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शनिवार, 6 सितंबर 2014

सुनें


   मुझे नहीं पता कि ऐसा सभी विवाह संबंधों में यह सत्य है या नहीं, लेकिन ना जाने क्यों, मेरी प्रवृति है कि मैं अकसर अपने आस-पास की बातों से ध्यान हटाकर केवल अपने ही विचारों पर अपना ध्यान केंद्रित कर लेता हूँ। यह मेरी पत्नि के लिए बहुत खिसिया देने वाला हो जाता है, विशेषकर तब जब वह मुझ से कोई आवश्यक बात कह रही होती है, और मैं अपने आप में ध्यान-मग्न हो जाता हूँ। जब उसे मेरी आँखों में वह खोई हुई से दशा दिखाई देती है, तो वह पूछती है, "जो मैं कह रही हूँ, तुमने उसमें से कुछ सुना भी है?"

   किसी भी संबंध का एक महत्वपूर्ण भाग है सुनना, विशेषकर प्रभु यीशु के साथ हमारे संबंधों में। यदि हम मसीह यीशु के हैं तो यह हमारा सौभाग्य है कि हम उससे बात-चीत बनाए रख सकते हैं, उसके वचन बाइबल तथा हमारे जीवनों में पवित्र आत्मा के कार्यों के द्वारा। प्रभु यीशु ने अपने आप को यूहन्ना 10 में "सच्चा चरवाहा" बताया और कहा कि उसकी भेड़ें उसकी आवाज़ सुनती हैं और उसे पहिचानती हैं। हम यह पहिचान सकते हैं कि हम अपने सच्चे चरवाहे और मार्गदर्शक प्रभु यीशु के प्रति ध्यान दे रहे हैं, जब उसके साथ हो रही हमारी बात-चीत हमारे अन्दर सदाचारिता, प्रेम, अनुग्रह तथा उसके चरित्र और गुणों के अनुरूप चरित्र तथा गुण उत्पन्न करती है और उन्हें बढ़ाती है। जो प्रभु यीशु पर अपना ध्यान लगाए रहते हैं, वे उसकी सुनते और मानते हैं, तथा उसकी समानता में भी परिवर्तित होते जाते हैं।

   जैसे अपने पति या पत्नि, या किसी मित्र की बात को ध्यान देकर सुनना यह दिखाता है कि हम उसे महत्व एवं मान्यता दे रहे हैं, उसी प्रकार प्रभु यीशु तथा उसके वचन बाइबल के प्रति भी ध्यान देना यह दिखाता है कि हमारे जीवनों में उसका महत्व एवं मान्यता है। इसलिए जीवन के उन विकर्षणों से जो हमारा ध्यान प्रभु यीशु से हटाते हैं, ध्यान हटाकर प्रभु की वाणी पर ध्यान लगाएं, उसकी सुनें और उससे प्रार्थना द्वारा सामर्थ माँगें कि उसके प्रति आज्ञाकारी रह सकें। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु का अनुसरण करने के लिए पहला कदम है उसकी सुनना।

मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। - यूहन्ना 10:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:1-10
John 10:1 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है। 
John 10:2 परन्तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है। 
John 10:3 उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले ले कर बुलाता है और बाहर ले जाता है। 
John 10:4 और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं। 
John 10:5 परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उस से भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानती। 
John 10:6 यीशु ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्तु वे न समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हम से कहता है।
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। 
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। 
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। 
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-11


शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

अनुग्रह


   ऐसा नहीं है कि खेल जगत में यह पहली बार हुआ हो, और ना ही इसका होना अन्तिम बार था। लेकिन इसके वर्णन को बार बार दोहराते रहना संभवतः हम ऐसी शर्मनाक गलती करने से बचाए रखेगा। जो घटना हुई वह एक कॉलेज के खेल प्रशीक्षक के साथ घटी; एक ऐसा व्यक्ति जो अपने मसीही चरित्र के लिए जाना जाता था। इस व्यक्ति को अपमानित होकर अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा क्योंकि उसने स्थापित और सर्वविदित खेल नियमों की अवहेलना करी थी। एक पत्रिका ने उसके बारे में लिखा, "उसकी ईमानदारी कॉलेज फुटबॉल का सबसे बड़ा झूठ थी!"

   यह सब उस प्रशीक्षक के लिए बहुत शर्मनाक तो था, परन्तु इससे संबंधित और बहुत गंभीर बात यह है कि ऐसा हम में से किसी के साथ भी हो सकता है। निर्धारित सीमाओं को लाँघ कर, किसी स्वार्थ के लिए कोई ऐसा कुकृत्य करने की परीक्षा, जो ना केवल हमें शर्मसार कर दे वरन हमारे कारण संसार के लोगों को हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु पर भी ऊँगुली उठाने और उस पर लांछन लगाने का अवसर दे, हम सभी के सामने आती रहती है। हम में से कोई भी ऐसी परीक्षाओं से अछूता नहीं है, और ऐसी परीक्षा में गिर कर अपने मसीही विश्वास की गवाही को असत्य में बदल देना, हम में से किसी की भी क्षमताओं के बाहर नहीं है।

   तो फिर कैसे हम ऐसी परीक्षा से सुरक्षित निकल सकते हैं? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें कुछ बातें सिखाती है, जिनके पालन के द्वारा हम अपने आप को ऐसी परीक्षाओं में पड़ने से बचाए रख सकते हैं। ये बातें हैं:
  • यह मानकर चलें कि परीक्षाएं सब पर आती हैं और आप पर भी आएंगी (1 कुरिन्थियों 10:13)
  • परीक्षा में बहक कर पाप करने के परिणामों को स्मरण रखें (याकूब 1:13-15)
  • अपने सह-मसीही विश्वासियों के प्रति उत्तरदायी बने रहें (सभोपदेशक 4:9-12)
  • परमेश्वर से प्रार्थना करते रहें कि आपको परीक्षा में गिरने से बचाए रखे (मत्ती 26:41)


केवल परमेश्वर का अनुग्रह और सामर्थ ही है जो हमें परीक्षा में गिरने से बचा सकता है, या गिरने के बाद पुनः उठा कर खड़ा कर सकता है। - डेव ब्रैनन


प्रत्येक पाप का प्रवेश द्वार होता है; गिरने से बचने के लिए उस द्वार को सदा बन्द ही रखें।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: याकूब 1:12-21
James 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। 
James 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है। 
James 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है। 
James 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है। 
James 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ। 
James 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। 
James 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 4-7


गुरुवार, 4 सितंबर 2014

तैयारी


   हर समय तैयार रहने की बात मुझे मेरे बचपन में हमारे एक पड़ौसी की याद दिलाती है। जब भी वे घर आते तो वे सदा ही अपनी कार को बाहर निकलने के लिए बिलकुल तैयार करके खड़ी करते थे। मुझे उनका यह व्यवहार कुछ अटपटा सा लगता था; लेकिन एक दिन मेरी माँ ने मुझे समझाया कि वे अग्नि-शमन विभाग में कार्य करते हैं और यदि कहीं आग लगे तो उन्हें कभी भी बुलाया जा सकता है, इसलिए वे सदा तैयार रहते हैं कि बुलावा आने पर तुरंत ही निकल कर जा सकें।

   सदा तैयार रहना जीवन की हर बात के लिए आवश्यक है। अमेरिका के विख्यात पूर्व राष्ट्रपति, एब्राहम लिंकन ने कहा था, "यदि मुझे एक पेड़ को काटने के लिए 8 घंटे दिए जाएं तो मैं उन में से 6 घंटे अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज़ करने में लगाऊँगा"; अर्थात उस कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक तैयारी भली-भाँति करके, कार्य को भी बिना समय गँवाए भली-भाँति पूरा कर लूँगा। यह एक बहुत व्यावाहरिक बात है जिसे हम अपने जीवनों में प्रतिदिन विभिन्न बातों के संदर्भ में करते रहते हैं। अच्छी जीविका कमाने के लिए हम अच्छी तरह से पढ़ाई-लिखाई करते हैं। कार या घर के दुर्घटनाग्रस्त होने के नुकसान की भरपाई के लिए हम उनका बीमा करवाते हैं। यहाँ तक कि अपने शारीरिक जीवन के अन्त के बाद के लिए हम अपनी वसीयत भी बनाते हैं जिससे हमारे बाद हमारे परिवार जनों को सुविधा हो सके।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हम मसीही विश्वासियों को सिखाती है कि इसी प्रकार हमें आत्मिक रीति से भी तैयार रहना चाहिए; साथ ही बाइबल हमें यह भी बताती है कि कैसे:
  • आत्मिक हथियारों से लैस होने के द्वारा (इफिसियों 6:10-20)
  • अपने मनों को पवित्र जीवन जीने के लिए तैयार करने के द्वारा (1 पतरस1:13)
  • अपने विश्वास एवं आशा के बारे में उत्तर देने के लिए सदा तैयार रहने के द्वारा (1 पतरस 3:15)
  • प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के लिए अपने आप को तैयार करने के द्वारा (मत्ती 24:44)


   आज आप आने वाले अज्ञात कल के लिए कितने तैयार हैं? यदि अपनी तैयारी के लिए अनिश्चित हैं या पशोपेश में हैं तो प्रभु यीशु के पास आएं, उससे सहायता और मार्गदर्शन लें, क्योंकि वह आपको भी जानता है, भविष्य को भी; वही सब कुछ को नियंत्रित करता है, और अन्ततः सबको उसी के न्याय सिंहासन के सामने खड़े होकर उसे ही अपने जीवन का लेखा-जोखा देना है, उससे ही प्रतिफल लेना है। - सिंडी हैस कैस्पर


जो स्वयं को आत्मिक युद्ध के लिए तैयार करते हैं, आत्मिक विजय उन्हीं को प्राप्त होती है।

इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा। - मत्ती 24:44

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:10-20
Ephesians 6:10 निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। 
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। 
Ephesians 6:12 क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। 
Ephesians 6:13 इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको। 
Ephesians 6:14 सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता की झिलम पहिन कर। 
Ephesians 6:15 और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर। 
Ephesians 6:16 और उन सब के साथ विश्वास की ढाल ले कर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। 
Ephesians 6:17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो। 
Ephesians 6:18 और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो। 
Ephesians 6:19 और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूं जिस के लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूं। 
Ephesians 6:20 और यह भी कि मैं उस के विषय में जैसा मुझे चाहिए हियाव से बोलूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-3


बुधवार, 3 सितंबर 2014

नज़रिया एवं प्रेरणा


   1660 के दशक के अन्त की ओर सर क्रिस्टोफर रेन को लंडन के सेन्ट पॉल कैथिड्रल की पुनर्रचना का कार्य सौंपा गया। कहा जाता है कि एक दिन इस महान आराधना-भवन के निर्माण का मुआयना करने जब सर रेन आए तो वे कार्यस्थल पर अकेले ही घूमने चले गए। वहाँ कार्य कर रहे लोग उन्हें नहीं पहिचानते थे, और सर रेन उन से बातें करते और कार्य के बारे में पूछते हुए घूमने लगे। उन्होंने मज़दूरों से जानना चाहा कि वे क्या कर रहे हैं? एक मज़दूर का उत्तर था, "मैं पत्थर काट रहा हूँ"; एक अन्य ने कहा, "मैं प्रतिदिन की अपनी जीविका कमा रहा हूँ"; लेकिन एक अन्य मज़दूर का नज़रिया बहुत भिन्न था, उसका उत्तर था, "मैं सर क्रिस्टोफर रेन की सहायता कर रहा हूँ जिससे वे परमेश्वर की महिमा के लिए एक भव्य आराधना स्थल बना सकें"! इस मज़दूर का नज़रिये और कार्य करने की प्रेरणा अन्य मज़दूरों से कितनी भिन्न थी, वह परमेश्वर की महिमा के लिए कार्य कर रहा था।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह आँकलन करना कि जो कार्य हम करते हैं वह क्यों करते हैं, विशेषकर हमारे जीविका और कार्यकारी जीवनों के संदर्भ में, बहुत आवश्यक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें प्रेरित किया, "और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो" (इफिसियों 6:6-7)।

   यदि हम अपना कार्य केवल अपने अधिकारी अथवा निरीक्षक को सन्तुष्ट करने के लिए या फिर केवल जीविका कमाने के लिए करते हैं तो हम कार्य को भली-भाँति करने की सर्वोच्च प्रेरणा - परमेश्वर के प्रति हमारी भक्ति एवं समर्पण के प्रमाणस्वरूप, से कमतर रह जाते हैं। इसलिए यह आँकलन कीजिए कि आप कार्य क्यों करते हैं? सही नज़रिया एवं प्रेरणा होगी उस मज़दूर के समान यह कह पाना, "...परमेश्वर की महिमा" के लिए! - बिल क्राउडर


हमें मेहनताना देना वाला चाहे कोई भी हो, वास्तविकता में हम परमेश्वर के लिए कार्य करते हैं।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23 

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:5-9
Ephesians 6:5 हे दासो, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। 
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-5


मंगलवार, 2 सितंबर 2014

दोतरफा संवाद


   क्या कभी आप ऐसे वार्तालाप में फंसे हैं जहाँ कोई व्यक्ति केवल अपने बारे में ही बोले चला जा रहा हो? हो सकता है कि आपने शिष्टाचार के नाते किसी से कोई प्रश्न कर के वार्तालाप आरंभ तो किया हो, लेकिन वह दूसरा व्यक्ति वार्तालाप आरंभ होने से लेकर निरंतर अपने ही बारे में बोले चला जा रहा हो, कभी आपके बारे में ना तो कोई प्रश्न पूछे और ना ही आपको कोई बात कहने का अवसर प्रदान करे। आपको यह व्यवहार कैसा लगेगा, और आप कब तक इसे बर्दाशत करेंगे? अब ज़रा परमेश्वर के साथ अपने वार्तालाप, अर्थात अपने प्रार्थना के समय के बारे में विचार कीजिए!

   ज़रा विचार कीजिए कि परमेश्वर को कैसा लगता होगा जब हम अपने प्रार्थना के समय में उसके साथ संगति करने तो आएं, लेकिन फिर अपने ही बारे में आरंभ हो जाएं। हो सकता है कि हम ने प्रार्थना से पहले परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग पढ़ा हो, लेकिन प्रार्थना की बारी आते ही उस भाग को हम नज़रन्दाज़ कर देते हैं और बस अपनी आवश्यकताओं के वर्णन में आरंभ हो जाते हैं। हम परमेश्वर से किसी समस्या के समाधान के लिए सहायता माँगते हैं, अपनी किसी आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति का साधन माँगते हैं, या किसी शारीरिक बीमारी से स्वस्थ होने की माँग करते हैं - बस हमारी बातें और हमारी आवश्यकताएं या वह जो हमारी नज़रों में महत्वपूर्ण अथवा आवश्यक है, वही चलता रहता है। लेकिन बाइबल से पढ़ा गया वह खण्ड हमारी प्रार्थनाओं में कहीं स्थान नहीं पाता; उस खण्ड में होकर जो परमेश्वर ने हम से कहा है, हमें सिखाया है वह सब अन्देखा कर दिया जाता है।

   किंतु भजन 119 के लेखक का दृष्टिकोण ऐसा कतई नहीं था; वरन उसने परमेश्वर से उसके वचन को समझने की सामर्थ माँगी: "मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं" (भजन 119:18) और अपनी प्रार्थना में परमेश्वर के वचन को बहुमूल्य तथा अपने लिए सुखमूल एवं मन्त्रणा देने वाला कहा (पद 24)। भजनकार के समान ही हम मसीही विश्वासियों को भी यह अनुशासन विकसित करना चाहिए कि हम परमेश्वर के वचन के अनुसार प्रार्थनाएं करें - यह हमारे परमेश्वर के साथ संगति तथा प्रार्थना के समय को बदल देगा। बाइबल पढ़ना और प्रार्थना करना हमारे लिए परमेश्वर के साथ दोतरफा संवाद का समय होना चाहिए ना कि केवल अपनी ही बात कहते रहने का। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के वचन की सुनिए, और फिर उसके अनुसार परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए।

मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। - कुलुस्सियों 3:16

बाइबल पाठ: भजन 119:17-24; 97-100
Psalms 119:17 अपने दास का उपकार कर, कि मैं जीवित रहूं, और तेरे वचन पर चलता रहूं। 
Psalms 119:18 मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं। 
Psalms 119:19 मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं; अपनी आज्ञाओं को मुझ से छिपाए न रख! 
Psalms 119:20 मेरा मन तेरे नियमों की अभिलाषा के कारण हर समय खेदित रहता है। 
Psalms 119:21 तू ने अभिमानियों को, जो शापित हैं, घुड़का है, वे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटके हुए हैं। 
Psalms 119:22 मेरी नामधराई और अपमान दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चितौनियों को पकड़े हूं। 
Psalms 119:23 हाकिम भी बैठे हुए आपास में मेरे विरुद्ध बातें करते थे, परन्तु तेरा दास तेरी विधियों पर ध्यान करता रहा। 
Psalms 119:24 तेरी चितौनियां मेरा सुखमूल और मेरे मन्त्री हैं।

Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50-52


सोमवार, 1 सितंबर 2014

एकता


   जुलाई 2010 में मिच मिलर के देहाँत के बाद, लोगों ने उसे ऐसे व्यक्ति के रूप में स्मरण किया जो सभी को साथ गाने के लिए आमंत्रित करता था। मिच द्वारा 1960 के दशक में टी. वी. पर आयोजित लोकप्रीय कार्यक्रम, Sing Along With Mitch में पुरुषों की गीत मण्डली लोकप्रीय गाने प्रस्तुत करती थी, साथ ही टी. वी. के पर्दे पर गीत के बोल लिखे हुए दिखाए जाते थे, जिससे देखने वाले सभी दर्शक गाने वाली मण्डली के गायकों के साथ वे गाने गा सकें। एक अखबार, Los Angeles Times, में छपी मिच की निधन-सूचना तथा उसके साथ लिखे सन्देश में इस कार्यक्रम के लोकप्रीय होने के लिए मिच के विचार भी बताए गए; मिच का कहना था कि "मैं सदा ही इस बात का ध्यान रखता हूँ कि जिन लोगों को गीत मण्डली बनाकर अपने कार्यक्रम में गाने के लिए मैं किराए पर बुलाता हूँ वे लम्बे, नाटे, गन्जे, मोटे, अर्थात समाज में सामान्य दिखने वाले लोग हों जिन्हें कोई आम आदमी प्रतिदिन अपनी दिनचर्या में देखता रहता है"। उस भिन्नता की एकता से ऐसा मधुर संगीत निकलता था जिससे सभी प्रसन्न होते थे और साथ गाने के लिए आमंत्रित होते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों के 15वें अध्याय में प्रेरित पौलुस ने भी मसीह के अनुयायियों में एकता रखने का आहवान किया, "ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो" (रोमियों 15:6)। पौलुस ने बाइबल के पुराने नियम खण्ड से कई परिच्छेदों से दिखाया कि यहूदियों और गैर-यहूदियों को एक साथ मिलकर परमेश्वर की स्तुति एवं प्रशंसा करनी चाहिए (रोमियों 15:9-12)। यहूदियों और गैर-यहूदियों की परस्पर एकता जो असंभव समझी जाती थी, संभव हो सकी जब उन लोगों ने जो परस्पर बड़ी गहराई से विभाजित थे, एक साथ मिलकर परमेश्वर की आराधना करनी और मसीह यीशु में होकर प्रकट हुई उसकी करुणा के लिए एक साथ धन्यवाद करना आरंभ किया।

   उनके समान ही आज हम भी आशा, आनन्द और शान्ति से परमेश्वर के पवित्र आत्मा के द्वारा भरे जाते हैं (पद 13), और एक ही स्तुति-गान मण्डली के अंग बनाए जाते हैं, भिन्न होते हुए भी मसीह यीशु में हम सब मसीही विश्वासी एक कर दिए गए हैं। मसीह यीशु में मिली इस एकता में होकर हमें यह आदर भी मिला है कि एक साथ मिलकर परमेश्वर की स्तुति और धन्यवाद करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासियों में एकता मसीह यीशु के साथ एक हो जाने से ही आती है।

और विश्वास करने वालों की मण्‍डली एक चित्त और एक मन के थे यहां तक कि कोई भी अपनी सम्पति अपनी नहीं कहता था, परन्तु सब कुछ साझे का था। - प्रेरितों 4:32

बाइबल पाठ: रोमियों 15:5-13
Romans 15:5 और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। 
Romans 15:6 ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो। 
Romans 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो। 
Romans 15:8 मैं कहता हूं, कि जो प्रतिज्ञाएं बाप दादों को दी गई थीं, उन्हें दृढ़ करने के लिये मसीह, परमेश्वर की सच्चाई का प्रमाण देने के लिये खतना किए हुए लोगों का सेवक बना। 
Romans 15:9 और अन्यजाति भी दया के कारण परमेश्वर की बड़ाई करें, जैसा लिखा है, कि इसलिये मैं जाति जाति में तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम के भजन गाऊंगा। 
Romans 15:10 फिर कहा है, हे जाति जाति के सब लोगों, उस की प्रजा के साथ आनन्द करो। 
Romans 15:11 और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगो; उसे सराहो। 
Romans 15:12 और फिर यशायाह कहता है, कि यिशै की एक जड़ प्रगट होगी, और अन्यजातियों का हाकिम होने के लिये एक उठेगा, उस पर अन्यजातियां आशा रखेंगी। 
Romans 15:13 सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 47-49


रविवार, 31 अगस्त 2014

पलट


   बाइबल कॉलेज में मेरा एक मित्र था, बिल, जो एक बहुत ही घिनौने और पापमय जीवन से निकल कर मसीह यीशु में आया था। उसने अपने जीवन की एक घटना बताई: "मैं ब्रैन्डी पीते हुए सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा था, और किसी दूसरे की पत्नी मेरे बगल में बैठी थी; मैंने देखा कि कुछ मसीही विश्वासी सड़क के किनारे खड़े हुए आने-जाने वाले लोगों को प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा और उद्धार के बारे में बता रहे थे। मैं उनके पास से होकर निकला और उनको संबोधित करते हुए ज़ोर से चिल्लाया, ’मूर्खों’। लेकिन इसके कुछ ही सप्ताह के बाद मैं एक चर्च में अपने घुटनों पर पड़ा प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग रहा था और उसे अपने जीवन का उद्धारकर्ता तथा प्रभु बनने का आग्रह कर रहा था।" बिल ने प्रभु यीशु पर विश्वास लाने के द्वारा अपने पुराने जीवन तथा आदतों से छुटकारा और प्रभु यीशु मसीह में एक नया जीवन प्राप्त किया था। यह उसके लिए एक जीवन बदलने वाला अनुभव था जिसने उसके मन और जीवन मार्ग की दिशा को बिलकुल पलट दिया।

   सच्चा पश्चाताप, जिसकी पहल परमेश्वर के पवित्र आत्मा के द्वारा होती है, जीवन मार्ग की दिशा को पलट देने वाला अनुभव है। अकसर हम देखते हैं कि इस बदलाव से पहले उस व्यक्ति द्वारा जितना अधिक विरोध प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार का होता है, उसके जीवन मार्ग की दिशा परिवर्तन उतनी ही चकित कर देन वाली होती है। जब दमिश्क के मार्ग पर तरशीश के शाऊल का सामना प्रभु यीशु से हुआ, तो वह मसीही विश्वासियों को सताने वाले शाऊल से पलट कर मसीह यीशु का प्रचारक पौलुस बन गया। उसके अन्दर आए इस परिवर्तन को देखकर बहुतेरों ने टिप्पणी करी: "...जो हमें पहिले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहिले नाश करता था" (गलतियों 1:23)।

   सच्चे परिवर्तन का आरंभ सच्चे पश्चाताप से होता है, और वह मन, जीवन के दृष्टिकोण तथा जीवन की दिशा को बदल देता है। मसीह यीशु के अनुयायियों के लिए इसका अर्थ होता है पाप और साँसारिकता के जीवन से पलट कर मसीह यीशु की आज्ञाकारिता में उसे समर्पित जीवन व्यतीत करना।


पश्चाताप का अर्थ है पाप के प्रति इतना शर्मिंदा होना कि उसे बिलकुल छोड़ दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17 

बाइबल पाठ: गलतियों 1:11-24
Galatians 1:11 हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं। 
Galatians 1:12 क्योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला। 
Galatians 1:13 यहूदी मत में जो पहिले मेरा चाल चलन था, तुम सुन चुके हो; कि मैं परमेश्वर की कलीसिया को बहुत ही सताता और नाश करता था। 
Galatians 1:14 और अपने बहुत से जाति वालों से जो मेरी अवस्था के थे यहूदी मत में बढ़ता जाता था और अपने बाप दादों के व्यवहारों में बहुत ही उत्तेजित था। 
Galatians 1:15 परन्तु परमेश्वर की, जिसने मेरी माता के गर्भ ही से मुझे ठहराया और अपने अनुग्रह से बुला लिया, 
Galatians 1:16 जब इच्छा हुई, कि मुझ में अपने पुत्र को प्रगट करे कि मैं अन्यजातियों में उसका सुसमाचार सुनाऊं; तो न मैं ने मांस और लोहू से सलाह ली; 
Galatians 1:17 और न यरूशलेम को उन के पास गया जो मुझ से पहिले प्रेरित थे, पर तुरन्त अरब को चला गया: और फिर वहां से दमिश्क को लौट आया।
Galatians 1:18 फिर तीन बरस के बाद मैं कैफा से भेंट करने के लिये यरूशलेम को गया, और उसके पास पन्‍द्रह दिन तक रहा। 
Galatians 1:19 परन्तु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ और प्रेरितों में से किसी से न मिला। 
Galatians 1:20 जो बातें मैं तुम्हें लिखता हूं, देखो परमेश्वर को उपस्थित जानकर कहता हूं, कि वे झूठी नहीं। 
Galatians 1:21 इस के बाद मैं सूरिया और किलिकिया के देशों में आया। 
Galatians 1:22 परन्तु यहूदिया की कलीसियाओं ने जो मसीह में थी, मेरा मुँह तो कभी नहीं देखा था। 
Galatians 1:23 परन्तु यही सुना करती थीं, कि जो हमें पहिले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहिले नाश करता था। 
Galatians 1:24 और मेरे विषय में परमेश्वर की महिमा करती थीं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-46