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गुरुवार, 22 जनवरी 2015

चुन लें



   हाल ही में मैंने एक विज्ञापन देखा जो इंटरनैट पर खेले जाने वाले एक ऐसे खेल के बारे में था जो युनानी पौराणिक कथाओं पर आधारित था। वह खेल सेनाओं, पौराणिक देवताओं, नायकों, सैनिक अभियानों आदि को लेकर बनाया गया था। जिस बात ने मेरा ध्यान आकर्षित किया वह था खेल आरंभ करने की विधि का विवरण - खेलने वाले को इंटरनैट पर जाकर अपने आप को खेल के लिए पंजीकृत करना था, और फिर अपना ईश्वर चुनकर अपना सामराज्य बनाने का प्रयास करना था।

   वाह! क्या बात है; "अपना ईश्वर चुन लें।" ये बातें उस विज्ञापन में भले ही बड़े सहज रूप में कही गई थीं, लेकिन उससे मेरा ध्यान इस बात की ओर गया कि यही बात तो हमारे आज के संसार की सबसे खतरनाक बातों में से एक है। एक खेल में चाहे यह महत्वहीन हो कि आप ने किस को ईश्वर चुना है, लेकिन वास्तविक संसार में इस चुनाव के अनन्तकालीन प्रभाव हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक यहोशू ने, जिसे इस्त्राएलियों को कनान देश में बसाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी, इस्त्राएलियों से, जो अनेकों देवताओं की पूजा करने वाले लोगों से घिरे हुए थे, यही बात कही - कि वे चुन लें कि किस की उपासना करेंगे, किंतु उन्हें यह चुनाव लापरवाही से नहीं वरन पूरी गंभीरता से करना था। यहोशु ने इस्त्राएलियों को अपना उदाहरण देते हुए कहा, "और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (यहोशु 24:15)।

   जैसे उन इस्त्राएलियों और यहोशु के सामने था, आज हमारे सामने भी अनेकों विकल्प हैं - ना केवल अन्य धर्मों और मतों के अराध्यों के रूप में, वरन हमारी अपनी प्राथमिकताओं के रूप में भी; यदि परमेश्वर हमारे जीवन में हमारी पहली प्राथमिकता नहीं है, तो फिर परमेश्वर का वह सर्वोपरि स्थान किसी अन्य ने ले लिया है - वह हमारी नौकरी या कार्य हो सकता है, हमारा परिवार हो सकता है, हमारे लिए टी.वी. या अन्य मनोरंजन के साधन हो सकते हैं, या ऐसी कोई भी अन्य बात हो सकती है। चुनाव हमारा है, हम किसे अपने जीवन में पहला स्थान देते हैं; लेकिन बुद्धिमानी का चुनाव केवल एक ही है, यहोशु के समान यह कहना, "मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा।" - बिल क्राउडर


परमेश्वर को छोड़ और कोई आपके दिल के खाली स्थान को सही रीति से भर नहीं सकता।

सब राज्यों के लोग तो अपने अपने देवता का नाम ले कर चलते हैं, परन्तु हम लोग अपने परमेश्वर यहोवा का नाम ले कर सदा सर्वदा चलते रहेंगे। - मीका 4:5

बाइबल पाठ: यहोशु 24:14-18
Joshua 24:14 इसलिये अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर कर के यहोवा की सेवा करो। 
Joshua 24:15 और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा। 
Joshua 24:16 तब लोगों ने उत्तर दिया, यहोवा को त्यागकर दूसरे देवताओं की सेवा करनी हम से दूर रहे; 
Joshua 24:17 क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा वही है जो हम को और हमारे पुरखाओं को दासत्व के घर, अर्थात मिस्र देश से निकाल ले आया, और हमारे देखते बड़े बड़े आश्चर्य कर्म किए, और जिस मार्ग पर और जितनी जातियों के मध्य में से हम चले आते थे उन में हमारी रक्षा की; 
Joshua 24:18 और हमारे साम्हने से इस देश में रहनेवाली एमोरी आदि सब जातियों को निकाल दिया है; इसलिये हम भी यहोवा की सेवा करेंगे, क्योंकि हमारा परमेश्वर वही है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14:22-36


बुधवार, 21 जनवरी 2015

खुली बाँहें



  भूतपूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति की पत्नि बैट्टी फोर्ड के अन्तिम संस्कार के समय उनके पुत्र स्टीवन फोर्ड ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "उन्हीं के पास प्रेम और सान्त्वना थी, और अपनी खुली बाँहों में शरण देने वाली वे पहली हुआ करती थीं। उन्नीस वर्ष पहले जब मैं अपनी शराब की लत से जूझ रहा था, तब मेरी माँ ने मुझे एक महानतम उपहार दिया, और वह था कि मैं परमेश्वर के प्रति समर्पण कैसे करूँ, अपने जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह को कैसे ग्रहण करूँ। और वास्तव में उनकी बाँहों में आकर मुझे लगा जैसे उड़ाऊ-पुत्र लौट कर घर आ गया है, उनमें होकर मैंने परमेश्वर के प्रेम को अनुभव किया - और बिना किसी संदेह के, यह एक सर्वोत्तम उपहार था।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा दी गई उड़ाऊ-पुत्र की नीति-कथा एक ऐसे युवक के बारे में है जो अपने पिता से संपत्ति का अपना भाग माँग कर घर छोड़ कर निकल जाता है और उस संपत्ति को दुराचार में उड़ा देता है, फिर शर्मिंदगी के साथ घर लौटता है। घर लौटने पर उस उड़ाऊ-पुत्र के पिता की प्रतिक्रीया असाधारण और चकित कर देने वाली है: "तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा" (लूका 15:20)। बजाए इसके कि उसे कोई फटकार या दण्ड मिलता, पिता ने उसके प्रति प्रेम और क्षमा दिखाई, उसे सबके सामने स्वीकार किया, उसके लिए भोज का आयोजन करवाया। जब उस युवक के बड़े भाई ने इस पर एतराज़ किया तो पिता ने उसे समझाया, "परन्तु अब आनन्द करना और मगन होना चाहिए क्योंकि यह तेरा भाई मर गया था फिर जी गया है; खो गया था, अब मिल गया है" (लूका 15:32)। पिता ने ऐसा क्यों किया - "क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे" (लूका 15:24)।

   स्टीवन फोर्ड ने अपनी श्रद्धांजलि समाप्त करते हुए आगे कहा, "माँ आपको बहुत धन्यवाद कि आपने हमसे, अपने पति से, बच्चों से और अपने देश से परमेश्वर के हृदय के अनुसार प्रेम किया"। परमेश्वर करे कि जैसे परमेश्वर की बाँहें उस की ओर पश्चाताप के साथ लौट आने वाले प्रत्येक पापी के लिए खुली रहती हैं, हमारी बाँहें भी वैसे ही लोगों की सहायता के लिए खुली रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्षमा पाए हुए पापी प्रेम को समझते हैं, प्रेम को दर्शाते हैं।

मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है। - लूका 15:10

बाइबल पाठ: लूका 15:11-24
Luke 15:11 फिर उसने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे। 
Luke 15:12 उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उसने उन को अपनी संपत्ति बांट दी। 
Luke 15:13 और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा कर के एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी। 
Luke 15:14 जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया। 
Luke 15:15 और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा: उसने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा। 
Luke 15:16 और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था। 
Luke 15:17 जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहा हूं। 
Luke 15:18 मैं अब उठ कर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है। 
Luke 15:19 अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले। 
Luke 15:20 तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा। 
Luke 15:21 पुत्र ने उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है; और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं। 
Luke 15:22 परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; फट अच्‍छे से अच्छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ। 
Luke 15:23 और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्द मनावें। 
Luke 15:24 क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14:1-21



मंगलवार, 20 जनवरी 2015

स्मरण गीत



   मुझे एक मुफ्त उपहार मिला - एक ऐसी सी.डी. जिसमें परमेश्वर के वचन बाइबल के भाग संगीतबद्ध करके रिकॉर्ड किए गए थे। उस सी.डी. को कई बार सुनने के बाद, उनमें से कुछ भाग मेरे मस्तिषक में बस गए, और कुछ समय के बाद मैं उनमें से कई को बिना उस सी.डी. के बजाए ही गा लेती थी।

   कुछ ऐसी बातों और विचारों को स्मरण रखने में, जिन्हें हम अकसर भूल जाते हैं, संगीत हमारी सहायता करता है, और परमेश्वर भी इस बात को जानता है। जब परमेश्वर इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दास्तव से निकालकर ला रहा था तब वह जानता था कि वाचा किए हुए कनान देश में बसने के थोड़े ही समय के बाद वे इस्त्राएली परमेश्वर को भूल जाएंगे, उसे नज़रन्दाज़ कर देंगे; और फिर वे अन्य देवी-देवताओं और मूर्ति-पूजा की ओर मुड़ जाएंगे, जिस कारण वे फिर मुसीबतों में पड़ेंगे (व्यवस्थाविवरण 31:16-20)। इसीलिए परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह इस्त्राएलियों के लिए एक स्मरण-गीत रचे तथा उसे इस्त्राएलियों को सिखाए जिससे वे परमेश्वर के साथ अपने निकट संबंध को स्मरण रख सकें और उस पाप को भी जिसके कारण परमेश्वर से उनका संबंध बाधित हो सकता था। साथ ही उस स्मरण-गीत के द्वारा वे परमेश्वर के चरित्र को भी ध्यान रख सकें, कि "वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है" (व्यवस्थाविवरण 32:4)।

   थोड़ा विचार कीजिए कि अपने किस गुण के बारे में परमेश्वर चाहता है कि आज आप उसपर मनन करें - उसकी सामर्थ, उसकी पवित्रता, उसका निस्वार्थ प्रेम, उसकी अटल विश्वासयोग्यता, या अन्य कोई गुण। क्या आप किसी ऐसे स्तुति गीत या भजन के बारे में सोच सकते हैं जो परमेश्वर के गुणों पर रचा गया है? ऐसे गीत स्मरण कीजिए और उन्हें उसके चरित्र और गुणों के स्मरण को बनाए रखने के लिए स्मरण-गीत की तरह गाते रहिए, चाहे मन में या फिर खुली आवाज़ में। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की भलाईयों का स्मरण मन में उसकी स्तुति के गीत जगा देता है।

और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। - इफिसीयों 5:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 31:16-22
Deuteronomy 31:16 तब यहोवा ने मूसा से कहा, तू तो अपने पुरखाओं के संग सो जाने पर है; और ये लोग उठ कर उस देश के पराये देवताओं के पीछे जिनके मध्य वे जा कर रहेंगे व्यभिचारी हो जाएंगे, और मुझे त्यागकर उस वाचा को जो मैं ने उन से बान्धी है तोडेंगे। 
Deuteronomy 31:17 उस समय मेरा कोप इन पर भड़केगा, और मैं भी इन्हें त्यागकर इन से अपना मुंह छिपा लूंगा, और ये आहार हो जाएंगे; और बहुत सी विपत्तियां और क्लेश इन पर आ पड़ेंगे, यहां तक कि ये उस समय कहेंगे, क्या ये विपत्तियां हम पर इस कारण तो नहीं आ पड़ीं, क्योंकि हमारा परमेश्वर हमारे मध्य में नहीं रहा? 
Deuteronomy 31:18 उस समय मैं उन सब बुराइयों के कारण जो ये पराये देवताओं की ओर फिर कर करेंगे नि:सन्देह उन से अपना मुंह छिपा लूंगा। 
Deuteronomy 31:19 सो अब तुम यह गीत लिख लो, और तू उसे इस्राएलियों को सिखाकर कंठ करा देना, इसलिये कि यह गीत उनके विरुद्ध मेरा साक्षी ठहरे। 
Deuteronomy 31:20 जब मैं इन को उस देश में पहुंचाऊंगा जिसे देने की मैं ने इनके पूर्वजों से शपथ खाईं थी, और जिस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, और खाते-खाते इनका पेट भर जाए, और ये हृष्ट-पुष्ट हो जाएंगे; तब ये पराये देवताओं की ओर फिरकर उनकी उपासना करने लगेंगे, और मेरा तिरस्कार कर के मेरी वाचा को तोड़ देंगे। 
Deuteronomy 31:21 वरन अभी भी जब मैं इन्हें इस देश में जिसके विषय मैं ने शपथ खाई है पहुंचा नहीं चुका, मुझे मालूम है, कि ये क्या क्या कल्पना कर रहे हैं; इसलिये जब बहुत सी विपत्तियां और क्लेश इन पर आ पड़ेंगे, तब यह गीत इन पर साक्षी देगा, क्योंकि इनकी सन्तान इस को कभी भी नहीं भूलेगी। 
Deuteronomy 31:22 तब मूसा ने उसी दिन यह गीत लिख कर इस्राएलियों को सिखाया।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58



सोमवार, 19 जनवरी 2015

महिमा के लिए तैयार


   मार्च 1, 1981 के दिन प्रचारक और बाइबल के टीकाकार डी. मार्टिन लौयड-जोन्स अपनी मृत्यु-शैया पर थे। उन्होंने सन 1939 से 1968 लंडन के वेस्टमिनस्टर चैपल में पास्टर का कार्य किया था। अब जीवन के अन्त के निकट आकर वे अपनी बोल पाने की क्षमता खो चुके थे। मृत्यु-शैया से उन्होंने इशारा किया कि वे अपने स्वास्थ होने के लिए और प्रार्थनाएं नहीं चाहते, उन्होंने एक कागज़ पर लिखा, "मुझे महिमा में जाने से रोकने के और प्रयास मत करो।"

   क्योंकि जीवन अन्मोल है इसलिए किसी प्रीय जन को पृथ्वी के जीवन को छोड़कर जाते देखना कष्टदायक होता है। लेकिन यह भी निश्चित और सत्य है कि परमेश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति के लिए इस संसार को छोड़कर जाने का एक समय निश्चित किया है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि, "यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है" (भजन 116:15)। जब प्रेरित पौलुस ने देखा कि उसकी मृत्यु का समय निकट है तब वह निराश नहीं हुआ, वरन जो उसके लिए स्वर्ग में रखा हुआ था, उसे लेकर प्रसन्न था, और दूसरों को भी मसीही विश्वास में बने रहने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था; उसने अपनी अन्तिम पत्री में लिखा, "क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं" (2 तिमुथियुस 4:6-8)।

   जीवन यात्रा में एक मसीही विश्वासी चाहे किसी भी स्थान पर पहुँचा हो, उसका अन्तिम गन्तव्य है मसीह यीशु के साथ जा रहना, क्योंकि यह अच्छा है (फिलिप्पियों 1:23)। यह आशा हमें उत्साहित करती है, जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस देती है और जब हमारे साथी मसीही विश्वासी संसार से कूच करते हैं तब सान्तवना भी देती है।

   क्या आज आपके पास यह आशा, यह निश्चय है? क्या आप महिमा के लिए तैयार हैं? - डेनिस फिशर


जीवन का सबसे बड़ा आनन्द स्वर्ग की आशा है।

धर्मी जन नाश होता है, और कोई इस बात की चिन्ता नहीं करता; भक्त मनुष्य उठा लिये जाते हैं, परन्तु कोई नहीं सोचता। धर्मी जन इसलिये उठा लिया गया कि आने वाली आपत्ति से बच जाए, - यशायाह 57:1

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-23
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। 
Philippians 1:20 मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं। 
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है। 
Philippians 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं। 
Philippians 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30



रविवार, 18 जनवरी 2015

आवश्यक


   एक कहानी है: संगीत सभा के लिए वाद्य-वृंद का अभ्यास चल रहा था, संचालक सभी वाद्य-वादकों को निर्देश देते हुए उन्हें संचालित कर रहा था, ऑरगन से मधुर धुन आ रही थी, ड्रम्स बज रहे थे, तुरही अपना स्वर दे रही थी तथा वायलिनों से मधुर संगीत-ध्वनि आ रही थी; लेकिन संचालक को कुछ कमी का आभास हुआ, और उसने अभ्यास रोक दिया - बाँसुरी का स्वर उसे सुनाई नहीं दे रहा था! बाँसुरी वादक का ध्यान भटक गया था और वह अपनी लय खो बैठा था, यह सोचकर कि इतने सारे अन्य बड़े-बड़े वाद्यों के स्वर में उस छोटी सी अकेली बाँसुरी के स्वर की कमी किसी को पता नहीं चलेगी, वह शाँत हो गया था। लेकिन संचालक को तुरंत ही उसकी कमी का आभास हो गया, और उसने बाँसुरी वादक से कहा, "यहाँ सभी आवश्यक हैं।"

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मसीही विश्वासियों की मण्डली को लिखी अपनी पहली पत्री में उन्हें भी यही बात समझाने का प्रयास किया - मण्डली में प्रत्येक की आवश्यकता है, मण्डली में प्रत्येक का उद्देश्य है (1 कुरिन्थियों 12:4-7)। मसीही विश्वासी मण्डली, जिसे प्रभु यीशु की देह भी कहा गया है, के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए प्रत्येक सदस्य की अपनी भूमिका है, आवश्यकता है। पौलुस ने इस बात को समझाने के लिए मसीही विश्वासियों को परमेश्वर से मिलने वाले आत्मा के वरदानों की सूची दी और उनके उपयोग की तुलना मानव देह के विभिन्न अंगों के कार्यों से करी। पौलुस, पवित्र आत्मा की अगुवाई में होकर कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों को समझा रहा था कि चाहे उनकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, उनके वरदान, उनके व्यक्तित्व अलग-अलग हों लेकिन वे परमेश्वर के उस एक ही आत्मा से परिपूर्ण हैं और मसीह यीशु की उसी एक देह के अंग हैं। पौलुस ने विशेष रीति से समझाया कि शरीर के दुर्बल और शोभाहीन अंगों का भी महत्व है। वह सिखा रहा था कि मसीही विश्वासियों की मण्डलियों में प्रत्येक सदस्य आवश्यक है, उसकी अपनी भूमिका है, और कोई ऐसा नहीं है जो किसी अन्य से अधिक या कम आवश्यक हो; देह सभी के एक साथ होने और मिलजुलकर, एक दूसरे का पूरक होकर कार्य करने से ही सुचारू रीति से कार्य कर सकती है।

   सदा स्मरण रखें, प्रभु यीशु के दृष्टि में कोई भी छोटा, तुच्छ या अनावश्यक नहीं है। उसने सभी के उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान किए, सभी ने उस पर लाए विश्वास और पापों की क्षमा द्वारा ही उद्धार और उसकी देह का अंग होने के आदर को पाया है, और वह प्रत्येक को अपनी देह के अन्य सदस्यों को बनाने बढ़ाने के लिए प्रयोग करता है। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु की देह का अंग होने के कारण आप संपूर्ण का एक अनिवार्य भाग हैं।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत हो कर मिले रहो। - 1 कुरिन्थियों 1:10

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50



शनिवार, 17 जनवरी 2015

संकट


   मुझे खुशी थी कि वर्ष के अन्तिम दिन भी समाप्त होने लगे हैं, क्योंकि इस वर्ष में मैंने बहुत दुख, बिमारी और उदासी को देखा था। इसलिए मैं नव-वर्ष का स्वागत पूरे ज़ोर-शोर के साथ करने को तैयार थी। लेकिन नए वर्ष के पहले महीने के साथ ही एक के बाद एक उदासी बढ़ाने वाले समचारों ने भी आना आरंभ कर दिया। मेरे कई मित्रों के माता-पिता में से कोई जाता रहा; मेरे पिता के भाई निद्रा में ही जाते रहे; कुछ मित्रों को पता चला कि उन्हें कैंसर है; एक सहकर्मी का भाई, तथा एक मित्र का पुत्र, अनापक्षित दुर्घटनाओं में जाते रहे। बीते वर्ष के साथ दुख भरे समयों का अन्त तो नहीं हुआ, वरन नया वर्ष और भी दुखों की बाढ़ ले आया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 16:33 में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "संसार में तुम्हें क्लेष होता है", अर्थात क्लेषों का आना अवश्यंभावी हैं। हम मसीही विश्वासी जो परमेश्वर की सनतान हैं, हम भी क्लेषों से बचे हुए नहीं हैं; परमेश्वर ने हमारे लिए भी आरामदेह जीवन, समृद्धि एवं संपन्नता और अच्छे स्वास्थ्य की प्रतिज्ञा नहीं करी है। लेकिन जो प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हम से करी है वह यह है कि हमारे प्रत्येक संकट और क्लेष में वह हमारे साथ होगा। यशायाह 43:2 में परमेश्वर ने कहा कि "जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी"; अर्थात प्रत्येक खतरनाक परिस्थिति में वह हमारी रक्षा करेगा, हमारे साथ बना रहेगा। जिन संकटों और क्लेषों से होकर हम निकलते हैं, उनमें पूरे होने वाले परमेश्वर के उद्देश्यों को चाहे हम ठीक से समझने ना पाएं, लेकिन परमेश्वर सदा हमारे साथ है, और क्योंकि हम उसके प्रेम तथा हृदय को जानते हैं इसलिए उस पर भरोसा रख सकते हैं।

   क्योंकि हमारा परमेश्वर अत्यन्त प्रेमी परमेश्वर है, और "...न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:38-39) इसलिए जब संकट और क्लेष आएं तो वह भी उनमें हमारे साथ रहेगा, और उनमें होकर भी हमारे लिए भला ही उत्पन्न करेगा (रोमियों 8:28)। - सिंडी हैस 
कैस्पर


विश्वास का अर्थ है चाहे हमें कुछ सुनाई या दिखाई ना भी दे, तो भी भरोसा बनाए रखना कि परमेश्वर हमारे साथ ही है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ:  यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

उल्टी शिक्षाएं


   प्रभु यीशु से संबंधित ऐसी अनेक बातें हैं जो मेरे अन्दर कौतूहल उत्पन्न करती हैं। प्रभु यीशु की सेवकाई की एक बात जो सदा लोगों को चकित और उन्हें सोचने के लिए विवश करती रही है, वह है उनकी सांसारिक व्यवहार और समझ से उल्ट लगने वाली शिक्षाएं।

   हमारी जीवन यात्रा में ऐसा समय भी आता है जब हम यह समझने लगते हैं कि हम सब कुछ जानने लग गए हैं, सब बातों की समझ अब हम में है, और हम अब जीवन के मार्गों पर सही रीति से चलना सीख चुके हैं। लेकिन प्रभु यीशु हमारे जीवन में हस्तक्षेप करके हमें एक नए और बेहतर मार्ग पर चलने के लिए बुलाता है। किंतु सावधान! प्रभु यीशु के मार्गों पर चलना चुनौती भरा है। संसार के व्यवहार और मान्यताओं के परिपेक्ष में उल्ट लगने वाली तथा विरोधाभास से भरी प्रभु यीशु की कुछ शिक्षाओं पर विचार कीजिए:
  • जीने के लिए मरना पड़ेगा (मरकुस 8:35);
  • पाने के लिए देना होगा (मत्ती 19:21);
  • "धन्य हैं वे जो विलाप करते हैं" (मत्ती 5:4);
  • प्रधान बनने के लिए सेवक बनना होगा (लूका 22:26);
  • दुख एवं कष्टों का भी उद्देश्य है (मत्ती 5:10-11)।

   ऐसी शिक्षाओं को सुनकर लोग सोचते हैं कि प्रभु यीशु संसार की वास्तविकताओं तथा उनके अनुरूप आवश्यक व्यवहार से अनभिज्ञ हैं। लेकिन वास्तविकता तो यह है कि अनभिज्ञ प्रभु यीशु नहीं हम हैं; वह उल्टा नहीं है, उल्टे हम हैं! हम उन छोटे बच्चों के समान हैं जो यह मानकर चलते हैं के वे अपने माता-पिता से बेहतर जानते हैं, बेहतर समझ रखते हैं। इसीलिए परमेश्वर ने कहा है, "...मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है" (यशायाह 55:8)।

   आखिरकर हम और यह स्मस्त सृष्टि प्रभु यीशु ही की बनाई हुई है (कुलुस्सियों 1:15-17), इसीलिए वह बेहतर जानता है कि इसमें कार्य तथा इसका संचालन सही रीति से किस प्रकार हो सकता है। इसलिए अपनी उल्टे नैसर्गिक गुणों, सहजज्ञान और सांसारिक मान्यताओं पर भरोसा रखकर चलते रहने और कार्य करने की बजाए, हमारे लिए भला होगा कि हम प्रभु यीशु की शिक्षाओं को अपना लें और उनका पालन करें। - जो स्टोवैल


जो हमें उल्टा लगता है, वह परमेश्वर की दृष्टि में सही है।

वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों 1:15-17

बाइबल पाठ: यशायाह 55:6-13
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो; 
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा। 
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। 
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है, 
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
Isaiah 55:12 क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाडिय़ां गला खोल कर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे। 
Isaiah 55:13 तब भटकटैयों की सन्ती सनौवर उगेंगे; और बिच्छु पेड़ों की सन्ती मेंहदी उगेगी; और इस से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11