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शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

अपेक्षाएं


   एक बार मैंने लोगों के परस्पर संबंधों को सुधारने की सलाह-मश्वरा देने का कार्य करने वाले एक व्यक्ति से पूछा कि मुख्यतः वे कौन सी समस्याएं हैं जिनके कारण लोग उनके पास आते हैं, या जो संबंध बिगड़ने का अकसर कारण होती हैं। बिना झिझके उसका उत्तर था, "अनेकों समस्याओं की जड़ होती है टूटी अपेक्षाएं; यदि इस बात को समय रहते ना सुधारा गया तो यह क्रोध और कड़वाहट उत्पन्न करके संबंधों का नाश कर देती है।"

   हमारे सबसे अच्छे समयों में, हमारा यह आशा रखना कि हम एक अच्छे स्थान पर, अच्छे लोगों के बीच में रहेंगे जो हमें चाहेंगे और हमारा पक्ष लेंगे कोई असमान्य बात नहीं है। लेकिन ऐसी आशाओं को तोड़ देने का जीवन का एक तरीका है; महत्वपूर्ण बात यह कि जब ऐसा हो तब हमारी प्रतिक्रीया क्या होती है?

   पौलुस प्रेरित के जीवन से देखें; वह जेल में बन्द था और वहाँ के स्थानीय मसीही विश्वासी उसे पसन्द भी नहीं करते थे (फिलिप्पियों 1:15-16), लेकिन फिर भी पौलुस निराश नहीं हुआ। इन विपरीत परिस्थितियों के प्रति उसका दृष्टिकोण सामान्य लोगों से भिन्न था; उसका मानना था कि परमेश्वर ने उसे सेवकाई का एक नया अवसर दिया है। अपने बन्दी होने की अवस्था में भी पौलुस ने अपने पहरेदारों को मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाया, जिससे उन रोमी सैनिकों में भी सुसमाचार प्रचार हो सका। यह देखकर, जेल के बाहर उससे द्वेश रखने वाले भी प्रतिस्पर्धा में सुसमाचार प्रचार में लग गए, लेकिन इससे भी पौलुस आनन्दित ही हुआ क्योंकि चाहे गलत उद्देश्य से ही सही किंतु मसीह यीशु में उपलब्ध उद्धार और पापों की क्षमा का प्रचार तो हुआ (पद 18)।

   पौलुस ने कभी यह आशा नहीं रखी कि वह किसी अच्छे स्थान में रहे या लोग उसे पसन्द करें; उसकी एकमात्र आशा थी उसके जीवन से मसीह यीशु की बड़ाई होती रहे (पद 20) और इस बात से पौलुस कभी पीछे नहीं हटा।

   हम चाहें जहाँ भी हों, हमारे आस-पास चाहे जैसे भी लोग हों, यदि हर परिस्थिति में हमारी अपेक्षा मसीह यीशु को अपने जीवन से प्रकट करने की है तो हम पाएंगे कि यह अपेक्षा ना केवल पूरी होगी वरन हमारी आशा से भी कहीं बढ़कर पूरी होगी और मसीह यीशु हमारे जीवनों से महिमान्वित होगा। - जो स्टोवैल


अपनी एकमात्र अपेक्षा अपने जीवन से मसीह यीशु को महिमान्वित करने की रखें, आप चाहे जहाँ और चाहे जिस के साथ हों।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-21
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। 
Philippians 1:20 मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं। 
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19


गुरुवार, 28 जनवरी 2016

बाधाएं तथा असुविधाएं


   बाधाएं कोई नई बात नहीं हैं; हमारा शायद ही कोई दिन पूर्णतयः पूर्वनियोजित रीति से निकल पाता होगा। जीवन असुविधाओं से भरा रहता है; हमारी योजनाएं हमारे नियंत्रण से बाहर बातों के द्वारा प्रभावित तथा कुंठित होती रहती हैं। ऐसा करने वाली बाधाओं और असुविधाओं की सूचि लंबी और बदलती रहने वाली है - बीमारी, संघर्ष और विरोध, यातायात में अटकना या फंसना, उपकरणों का ठीक काम ना करना, व्यवहार में अशिष्टता, सुस्ती और टालना, अधीरता, अयोग्यता या अक्षमता आदि जैसे अनेकों कारण हमारी योजनाओं पर पानी फेरते रहते हैं, उन्हें बदलते या बिगाड़ते रहते हैं।

   लेकिन इन असुविधाओं और बाधाओं का एक दूसरा पक्ष भी है जिसे अकसर हम नहीं देख पाते हैं। हमारा विचार होता है कि हमें निराश और हताश करने, हमारे जीवन को कठिन बनाने और हमारी योजनाओं को व्यर्थ करने के इलावा इन बाधाओं और असुविधाओं का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है। किंतु ये बाधाएं और असुविधाएं हमें किसी अनजाने और अनदेखे खतरे से बचा कर रखने का परमेश्वर का तरीका, या फिर हमारे द्वारा दूसरों के प्रति परमेश्वर के समान अनुग्रह और क्षमा को प्रदर्शित करने अवसर भी हो सकती हैं। ये परिस्थितियाँ परमेश्वर द्वारा हमारी अपनी आशा और योजना से कुछ बेहतर के आरंभ करने का, या फिर विपरीत परिस्थितियों के प्रति हमारे प्रत्युत्तर और हमारी भावनाओं को हमारे समक्ष लाने का माध्यम भी हो सकती हैं जिससे हम अपना आंकलन कर सकें और समय रहते अपने आपको सुधार सकें। इन बाधाओं और असुविधाओं का कारण चाहे जो भी हो, चाहे हम परमेश्वर की बातों और उद्देश्यों ना भी समझने पाएं, तो भी हम मसीही विश्वासी इस बात पर भरोसा रख सकते हैं, उसे लेकर निश्चिंत रह सकते हैं कि सभी बातों के द्वारा परमेश्वर हमारा भला कर रहा है (रोमियों 8:28), हमें हमारा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में ढालता जा रहा है और हमारे द्वारा अपने स्वर्गीय राज्य का प्रचार और प्रसार कर रहा है।

   यह कहना कि संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर के अनुयायी बाधाओं तथा असुविधाओं में रहे हैं कोई अतिश्योक्ति नहीं है; लेकिन परमेश्वर के उन अनुयायियों के जीवन इस बात के भी गवाह हैं कि इन सब बातों के द्वारा परमेश्वर के बड़े उद्देश्यों की पूर्ति और उसकी महिमा उनके जीवन से हुई है। यह जानते और समझते हुए, हमें बाधाओं तथा असुविधाओं के लिए भी परमेश्वर के धन्यवादी होना चाहिए, इस विश्वास के साथ कि वह हमें समय के सदुपयोग का अवसर दे रहा है (इफिसियों 5:16, 20)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


हमारे साथ जो होता है वह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना वह जो परमेश्वर हम में और हमारे द्वारा कर रहा है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:15-21
Ephesians 5:15 इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो। 
Ephesians 5:16 और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। 
Ephesians 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है? 
Ephesians 5:18 और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ। 
Ephesians 5:19 और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। 
Ephesians 5:20 और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। 
Ephesians 5:21 और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35


बुधवार, 27 जनवरी 2016

क्रूस


   अपने ऑस्ट्रेलिया भ्रमण के समय मुझे अवसर मिला कि मैं पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध से तारामण्डल में दिखने वाले "दक्षिणी क्रूस" नाम से जाने वाले तारा-समूह को देख सकूँ। पृथ्वी के दक्षिणी भाग से दिखने वाला यह सितारों का सबसे विशिष्ट समूह है। 15वीं शताब्दी से ही समुद्री परिवाहन के लिए नाविकों ने इस तारा-समूह पर भरोसा करना आरंभ कर दिया था। यद्यपि यह आकार में छोटा है परन्तु लगभग सारे वर्ष दिखता रहता है। उस अन्धेरी रात को यह तारा-समूह इतना स्पष्ट दिख रहा था कि मैं भी उसे तारागणों में सरलता से पहचान सका। वह वास्तव मे एक अद्भुत दृश्य था।

   परमेश्वर का वचन बाइबल एक अन्य और भी अद्भुत क्रूस के बारे में बताती है - मसीह यीशु का क्रूस। जब हम सितारों की ओर देखते हैं तो हम सृष्टिकर्ता की विलक्षण कारिगरी को देखते हैं; किंतु जब हम मसीह के क्रूस को देखते हैं तो हमें अपनी सृष्टि के लिए अपने प्राण बलिदान कर देने वाला सृष्टिकर्ता नज़र आता है। इसीलिए परमेश्वर का वचन हमें कहता है कि हम "विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों 12:2)।

   कलवरी के क्रूस का अचरज यही है कि जब हम पापी ही थे तो प्रभु यीशु हमारे पापों के लिए मरा (रोमियों 5:8)। अब जो प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं उनका मेलमिलाप परमेश्वर के साथ हो जाता है और जीवन के पथ पर परमेश्वर उनका मार्गदर्शक बनकर आजीवन उनके साथ रहता है (2 कुरिन्थियों 1:8-10)।

   मसीह यीशु का क्रूस पर दिया गया बलिदान सृष्टि सबसे महान अचरज का कार्य है। - बिल क्राउडर


मसीह का क्रूस ही अनन्त में सकुशल प्रवेश का एकमात्र माध्यम है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:1-4
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20


मंगलवार, 26 जनवरी 2016

ज्योति


   प्रति वर्ष दिसंबर के महीने में हमारे घर के निकट के 13 घरों एक मोहल्ले के सभी परिवार मिलकर 300,000 बत्तियों से बनी क्रिसमस ज्योति सजाते हैं। बत्तियों की यह सज्जा इतनी भव्य होती है कि लोग दूर दूर से उसे देखने आते हैं और घंटों पंक्ति में खड़े रहकर उन रंगीन जलती-बुझती-चमकती बत्तियों को देखने तथा उनके साथ बजने वाले संगीत का आनन्द लेते हैं। बत्तियों और संगीत के इस समागम को सुचारू रूप से चलाते रहने के लिए उन लोगों को 64 कंप्यूटरों की सहायता लेनी पड़ती है।

   जब मैं अवकाश काल में लगाई और जलाई जाने वाली इन ज्योतियों के बारे में सोचती हूँ तो मेरा ध्यान उस सच्ची ज्योति की ओर भी जाता है जिस के कारण क्रिसमस संभव हुआ - वह एकल तेजोमय ज्योति जो अपने प्रेम, खराई और न्याय से सारे जगत को रौशन करती है। यह एकमात्र ज्योति है प्रभु यीशु मसीह, और सारे संसार की हर आवश्यकता के लिए वही काफी है (यशायाह 9:2, 6-7)। हमारे जीवनों की इस ज्योति ने हमें, जो उसके अनुयायी हैं, यह कहा है कि उसकी इस ज्योति को सारे संसार में प्रदर्शित करें जिससे लोग उस ज्योति को देखकर परमेश्वर कि महिमा करने पाएं (मत्ती 5:16)।

   ज़रा विचार कीजिए, क्रिसमस की बत्तियों को लगाने और सुचारू रूप से चलाने के लिए मेहनत करने वाले उन 13 परिवारों के समान यदि हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर कि सच्ची ज्योति को लोगों के जीवनों तथा संसार को ज्योतिर्मय करने के लिए एक जुट और प्रयासरत हो जाएं तो कैसा रहे? फिर पाप के अन्धकार में रहने और जीने वाले लोगों को जीवन की ज्योति को ढूंढ़ने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी, वह ज्योति उनके चारों ओर उन्हें चमकती मिलेगी।

   जब मसीही विश्वासी एक साथ मिलकर परमेश्वर के प्रेम की ज्योति को अपने अपने जीवनों से प्रदर्शित करेंगे, तो उद्धार तथा पाप-क्षमा के सुसमाचार की यह ज्योति और अधिक चमकेगी, और अधिक लोगों को प्रभु यीशु के पास आकर्षित करेगी और संसार को सच्ची ज्योति से ज्योतिर्मय कर देगी। - जूली ऐकैरमैन लिंक


संसार के पाप के अन्धकार में हमारे मसीही जीवन की गवाही आशा की ज्योति है।

जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्योति चमकी। - मत्ती 4:16

बाइबल पाठ: मत्ती 5:13-16
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए।
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता।
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है।
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 5-7
  • 2यूहन्ना


प्रतीक्षा का अनुशासन


   प्रतीक्षा करना कठिन होता है। हमें दुकान पर सामान खरिदने के समय, यात्रा में, डॉक्टर से मिलने के लिए, सभी स्थानों पर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ऐसा करते समय हम अपनी ऊँगलियों को चटकाते हैं, उबासी आने से रोकने का प्रयत्न करते हैं और अन्दर ही अन्दर खिसियाते हैं। कभी कभी प्रतीक्षा किसी पत्र की होती है जो पहुँच नहीं रहा होता है, किसी बिगड़ी हुई सन्तान के वापस लौट आने की होती है, जीवन साथी में किसी परिवर्तन की होती है, किसी बच्चे के पैदा होने की होती जिसे हम अपनी बाहों में ले सकें। हमें अपनी मनोकामनाओं के पूरे होने की प्रतीक्षा रहती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 40 में भजनकार दाऊद ने कहा, "मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा..." (भजन 40:1); मूल इब्रानी भाषा में जो शब्द "बाट जोहता रहा" के लिए प्रयोग हुए हैं उनका तात्पर्य होता है कि दाऊद ने "प्रतीक्षा करी, और प्रतीक्षा करी, और भी प्रतीक्षा करी" कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना का उत्तर दे। लेकिन फिर भी जब दाऊद प्रतीक्षा के अपने इस समय का पुनःअवलोकन करता है तो इस लंबे विलंब के लिए परमेश्वर की आराधना करता है कि "...उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है..." (भजन 40:3)।

   सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक और लेखक एफ. बी. मेयर्स ने कहा, "परमेश्वर के विलंब पर कैसा महान अध्याय लिखा जा सकता है। यह ऐसा भेद है जो मानव आत्मा को उसकी क्षमता के चरम बिंदु तक संवार सकता है।" प्रतीक्षा के अनुशासन के द्वारा हम में मृदुल सदगुण विकसित हो सकते हैं, जैसे समर्पण, नम्रता, धैर्य, आनन्द सहित सहनशीलता, भलाई में लगे रहना आदि - ये सब ऐसे सदगुण हैं जिन्हें सीखने और जिनमें बढ़ने में सबसे अधिक समय लगता है।

   जब ऐसा लगे कि परमेश्वर हमारी मनोकामनाओं को पूरा करने, हमारी प्रार्थानों का उत्तर देने में विलंब कर रहा है तो हमें क्या करना चाहिए? परमेश्वर से ही सहायता लें कि वह हमें उससे प्रेम करने, उसपर विश्वास बनाए रखने और उसके विलंब को आनन्द के साथ स्वीकार करने की सामर्थ दे तथा उपरोक्त सदगुणों को हम में विकसित करे; साथ ही दाऊद के समान हमें उसकी आराधना और स्तुति में भी लगे रहना चाहिए। - डेविड रोपर


परमेश्वर के लिए प्रतीक्षा करना कभी भी समय की बर्बादी नहीं है।

यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह! - भजन 27:14

बाइबल पाठ: भजन 40:1-5
Psalms 40:1 मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। 
Psalms 40:2 उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है। 
Psalms 40:3 और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।
Psalms 40:4 क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। 
Psalms 40:5 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17


सोमवार, 25 जनवरी 2016

सामन्य दिन


   संग्रहालय की एक प्रदर्श्नी, जिसका शीर्षक था "पॉम्पेई का एक दिन" देखते हुए मैं यह देखकर आश्चर्यचकित हुआ कि वहाँ की बातें बारंबार यह दर्शा रहीं थी कि पॉम्पेई के 20,000 लोगों के लिए 24 अगस्त सन 79 ईसवीं का दिन एक सामन्य दिन के समान ही आरंभ हुआ था, और लोग घरों, बाज़ारों और उस समृद्ध रोमी नगर की बन्दरगाह में अपनी सामान्य दिनचर्या में लगे हुए थे। प्रातः लगभग 8 बजे, निकट के वेसुवियस पहाड़ में एक के बाद एक कुछ छोटे विस्फोट दिखाई दिए और दोपहर होते होते एक भयानक ज्वालामुखी विस्फोट हो गया। 24 घंटे से कम के अन्दर ही पॉम्पेई और उसके अधिकांश लोग ज्वालामुखी की राख की मोटी परत के नीचे दफन हो गए थे। सब कुछ बिलकुल अनेपक्षित था।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि एक दिन वे लौट कर आएंगे। उस दिन भी लोग रोज़ की तरह अपने कार्यों में, व्यवसाय में, भोजन करने में, शादी-ब्याह में लगे होंगे: "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा" (मत्ती 24:37); लोगों को ज़रा सा अन्दाज़ा भी नहीं होगा कि क्या होने जा रहा है और प्रलय तथा विनाश उन पर आ पड़ेगा।

   यह बताने में प्रभु का उद्देश्य था कि उनके चेले उनके पुनःआगमन के लिए सदा जागरूक और तैयार रहें: "इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (मत्ती 24:44)।

   किसी एक सामन्य दिन में अचानक ही सृष्टि के प्रभु का स्वागत करना आपके लिए कैसा रहेगा - अनन्त आनन्द का कारण या अनन्त शोक का कारण? - डेविड मैक्कैसलैंड


तैयार रहिए; आज ही प्रभु यीशु का पुनःआगमन संभव है।

सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। - 1 पतरस 4:7

बाइबल पाठ: मत्ती 24:36-44
Matthew 24:36 उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता। 
Matthew 24:37 जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:38 क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी। 
Matthew 24:39 और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:40 उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। 
Matthew 24:41 दो स्‍त्रियां चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी। 
Matthew 24:42 इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा। 
Matthew 24:43 परन्तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता। 
Matthew 24:44 इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16


रविवार, 24 जनवरी 2016

सर्वोत्तम कथा


   मिशनरी मसीही सेवक एगर्टन रायर्सन यंग ने सन 1700 में कनाडा के सॉलट्यु कबीले के लोगों में सेवकाई करी। उस कबीले के मुख्या ने मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को उनके कबीले में लाने के लिए यंग का धन्यवाद किया, और टिप्पणी करी कि यह बात वे अपने जीवन में पहली बार अपने वृद्धावस्था में सुनने पाए। क्योंकि कबीले के मुख्या ने जाना कि परमेश्वर यंग के स्वर्गीय पिता हैं, इसलिए उन्होंने यंग से पूछा, "क्या परमेश्वर मेरे पिता भी हैं?" यंग ने उत्तर दिया, "जी हाँ!" जब यंग का यह उत्तर वहाँ जमा भीड़ ने सुना तो ऊँचे स्वर में अपने हर्ष का प्रगटिकरण किया।

   लेकिन कबीले के मुख्या की बात यहीं आकर समाप्त नहीं हुई; उन्होंने यंग से आगे कहा, "मैं अशिष्ट होना नहीं चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि अपने भटके हुए भाई तक यह बात पहुँचाने के लिए आपने बड़ा लंबा समय लिया!"

   अनेकों अवसरों पर मैं अपने जीवन की परिस्थितियों के कारण यह सोचकर विचिलित होता हूँ कि काश मैं इस या उस स्थान के इन या उन लोगों तक जाकर प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाने पाता। लेकिन ऐसे में परमेश्वर मुझे स्मरण दिलाता है कि दूर के स्थानों की ओर नहीं वरन अपने चारों ओर देखो, और मैं उन अनेकों लोगों को देखने पाता हूँ जिन्होंने कभी प्रभु यीशु के सुसमाचार को सुना ही नहीं है। ऐसे में मुझे यह भी स्मरण हो आता है कि मेरे पास सभी को सुनाने के लिए एक अद्भुत कथा है, "...इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा" (रोमियों 10:12-13)।

   हम मसीही विश्वासियों को यह कभी नहीं भूलना है कि हमारे पास संसार के सभी लोगों को सुनाने के लिए कोई कहानी मात्र नहीं है, वरन हमारे पास सारे संसार के लिए मानव इतिहास की सबसे आवश्यक, प्रभावशाली तथा सर्वोत्तम कथा है। - रैंडी किलगोर


प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाना एक भूख से तृप्ति पाए व्यक्ति द्वारा किसी अन्य भूखे व्यक्ति को अनन्त भोजन के स्त्रोत का पता देना है।

क्योंकि प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है; कि मैने तुझे अन्याजातियों के लिये ज्योति ठहराया है; ताकि तू पृथ्वी की छोर तक उद्धार का द्वार हो। - प्रेरितों 13:47

बाइबल पाठ: रोमियों 10:11-15
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। 
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। 
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। 
Romans 10:14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें? 
Romans 10:15 और प्रचारक बिना क्योंकर सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो क्योंकर प्रचार करें? जैसा लिखा है, कि उन के पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39