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बुधवार, 7 जून 2017

सर्वोत्तम तथा महानतम


   एक बार अराधना के लिए चर्च में बठे हुए, मेरी दृष्टि कई पंक्ति आगे एक शिशु पर गई। वह अपने पिता की गोद में था और उनके कंधे के ऊपर से बड़ी-बड़ी आँखों से इधर-उधर देख रहा था। उसके मुँह से लार बह रही थी, वह अपनी ऊँगलियों को मुँह में लेकर चूस रहा था, परन्तु अपने अँगूठे को मुँह तक नहीं ला पा रहा था और वह आस-पास बैठे हुए लोगों को देखते हुए कभी कभी मुस्कुरा देता था। उसकी हरकतों के कारण मेरा ध्यान पादरी द्वारा दिए जा रहे सन्देश से भटक कर बार-बार उस सुन्दर शिशु तथा उसकी अटखेलियों की ओर जा रहा था।

   ध्यान भटकाने वाली बातें अनेकों रूप और आकार में आती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम दो बहनों, मरियम और मार्था का उल्लेख पाते हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। उन में से मार्था के लिए प्रभु यीशु से ध्यान भटकाने वाली बात प्रभु की सेवा-टहल करना बन गई; बजाए प्रभु के पास बैठकर उसकी बातें सुनने के, मार्था प्रभु के लिए पकाने-परोसने में लग गई। लेकिन मरियम प्रभु के साथ ही बैठी रही, उसकी बातें सुनती रही। अपने सेवा-टहल के प्रयासों से थक कर जब मार्था ने कुड़कुड़ाते हुए प्रभु से शिकायत की तब प्रभु यीशु ने उसे समझाया, "...मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:41-42)।

   मार्था से कहे गए प्रभु यीशु के ये शब्द हम मसीही विश्वासियों को स्मरण करवाते हैं कि प्रभु यीशु के साथ हमारे सुदृढ़ तथा लगातार बढ़ते हुए संबंधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है शान्त होकर उसके पास बैठकर उसकी सुनना, न कि उसे प्रसन्न करने के प्रयासों में अपनी इच्छानुसार कुछ भला लगने वाला करने का प्रयास करना। कहा जाता है कि बहुधा बेहतर बातें सर्वोत्तम बातों की शत्रु होती हैं - बेहतर के कारण, हम सर्वोत्तम से ध्यान हटा लेते हैं। प्रभु यीशु के अनुयायियों के लिए, इस जीवन में सर्वोत्तम तथा महानतम बात है प्रभु यीशु को निकटता से जानना और उसके साथ-साथ चलना। हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु की इच्छा जानकार, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहने से बढ़कर और कुछ भी नहीं है, क्योंकि प्रभु इसी से प्रसन्न होता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हे प्रभु मुझे सिखाएं कि मैं आपको निकटता से जान सकूँ; 
क्योंकि तब ही मैं आपसे सबसे बढ़कर प्रेम करने पाऊँगा।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22 

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17


मंगलवार, 6 जून 2017

आगे


   फ्रांस में नौरमंडी के तट पर जून 6, 1944 को तीन अमरीकी सैनिकों ने जब अपने आप को बम फटने से बने गढ़हे में पड़ा पाया, तो उन्हें एहसास हुआ कि लहरें उन्हें बहा कर गलत स्थान पर ले आई हैं। उस गढ़हे में उन तीनों ने तात्कालिक निर्णय लिया, "हम युध्द यहीं से आरंभ करेंगे।" प्रारंभ करने के उस कठिन स्थान से उन्हें अब आगे बढ़ना था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि शाऊल (प्रेरित पौलुस का पहला नाम) ने दमिशक के मार्ग पर प्रभु यीशु के साथ हुई मुलाकात के बाद अपने आप को एक कठिन परिस्थिति में पाया (प्रेरितों 9:1-20)। अब अचानक ही उसे अपना पिछला जीवन और जीवन की दिशा एक भूल लग रही थी और संभवतः व्यर्थ भी। अब जहाँ वह था वहाँ से आगे बढ़ना न केवल कठिन था, वरन आगे बढ़ना उसे बहुत कठिन तथा कष्टप्रद परिश्रम लग रहा था, जहाँ उसे उन परिवारों का भी सामना करना पड़ सकता था जिन्हें उसने उजाड़ा था। परन्तु फिर भी उसने प्रभु की आज्ञा को नहीं टाला और वहीं गया जहाँ प्रभु चाहता था कि वह जाए (प्रेरितों 9:6)।

   बहुधा हम अपने आप को ऐसे स्थान या परिस्थिति में पा सकते हैं जहाँ होने के संबंध में हमने कभी सोचा भी नहीं था और न ही चाहा था। हो सकता है हम कर्ज़ में दबे जा रहे हों, या किन्ही सीमाओं से बाधित हो रहे हों, या पाप और उसके दुषपरिणामों के दबाव में पड़े हों। आज मसीह यीशु हमें चाहे बन्दीगृह में पाए या किसी महल में; चाहे वह हमें टूटा और कर्ज़ में दबा पाए या हमारी अपनी किसी स्वार्थी अभिलाषा में पड़ा हुआ पाए; परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि हम पौलुस की सलाह को मानें, और जो बीत गया उसे पीछे छोड़ कर मसीह यीशु की ओर आगे बढ़ें (फिलिप्पियों 3:13-14)।

   हमारे मसीह यीशु की ओर, मसीह यीशु के साथ आगे बढ़ने के लिए, हमारा अतीत कोई बाधा नहीं है; यह मसीह यीशु का आश्वासन है। - रैंडी किलगोर


मसीह यीशु के साथ नया आरंभ करने के लिए कभी कोई विलंब नहीं है।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:1-9, 17-22
Acts 9:1 और शाऊल जो अब तक प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था, महायाजक के पास गया। 
Acts 9:2 और उस से दमिश्क की अराधनालयों के नाम पर इस अभिप्राय की चिट्ठियां मांगी, कि क्या पुरूष, क्या स्त्री, जिन्हें वह इस पंथ पर पाए उन्हें बान्‍ध कर यरूशलेम में ले आए। 
Acts 9:3 परन्तु चलते चलते जब वह दमिश्क के निकट पहुंचा, तो एकाएक आकाश से उसके चारों ओर ज्योति चमकी। 
Acts 9:4 और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्द सुना, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है? 
Acts 9:5 उसने पूछा; हे प्रभु, तू कौन है? उसने कहा; मैं यीशु हूं; जिसे तू सताता है। 
Acts 9:6 परन्तु अब उठ कर नगर में जा, और जो कुछ करना है, वह तुझ से कहा जाएगा। 
Acts 9:7 जो मनुष्य उसके साथ थे, वे चुपचाप रह गए; क्योंकि शब्द तो सुनते थे, परन्तु किसी को दखते न थे। 
Acts 9:8 तब शाऊल भूमि पर से उठा, परन्तु जब आंखे खोलीं तो उसे कुछ दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़के दमिश्क में ले गए। 
Acts 9:9 और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया।

Acts 9:17 तब हनन्याह उठ कर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात यीशु, जो उस रास्‍ते में, जिस से तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है, कि तू फिर दृष्टि पाए और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए। 
Acts 9:18 और तुरन्त उस की आंखों से छिलके से गिरे, और वह देखने लगा और उठ कर बपतिस्मा लिया; फिर भोजन कर के बल पाया।
Acts 9:19 और वह कई दिन उन चेलों के साथ रहा जो दमिश्क में थे। 
Acts 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है। 
Acts 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए? 
Acts 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्‍द करता रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16


सोमवार, 5 जून 2017

कार्य तथा दायित्व


   जब पुलिटज़र पुरुस्कार विजेता तथा फिल्म समीक्षक रॉजर एबर्ट का देहांत हुआ तो उनके एक साथी पत्रकार ने उनके विषय में लिखा: "अपनी समस्त बदनामी, सम्मान, और कीर्ति, फिल्मों की महान हस्तियों के साथ उनके विशिष्ट साक्षात्कारों और मुलाकातों के बावजूद एबर्ट यह कभी नहीं भूले कि उनके कार्य का उद्देश्य क्या है - फिल्मों की समीक्षा करना। और वे यह समीक्षा सदा ही बड़े उत्साह तथा बारीकी से करते रहे।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रेरित पौलुस ने भी सदा उस बात को अपना ध्येय बनाए रखा जो परमेश्वर उस से चाहता था, जैसा परमेश्वर उसे बनाना चाहता था। मसीह के साथ पौलुस के संबंधों का आधार प्रभु यीशु की सेवकाई के प्रति उसका केंद्रित होना तथा उत्साहित रहना था। चाहे वह एथेने में दार्शनिकों के साथ चर्चा कर रहा हो, या भूमध्यसागर में जहाज़ के टूटने के कारण संकट में हो, या बन्दीगृह में रोमी सैनिक के साथ बेड़ियों से बंधा हो, उसका ध्यान सदा ही मसीह यीशु तथा उसके पुनरुत्थान की सामर्थ के बारे में सीखने और सिखाने पर केंद्रित रहता था (फिलिप्पियों 3:10)।

   बन्दीगृह से पौलुस ने लिखा, "हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों 3:13-14)। उसकी परिस्थितियाँ चाहे जो भी रही हों, पौलुस मसीह यीशु का अनुयायी होने के दायित्व निभाने और उसमें आगे बढ़ते जाने के प्रयासों में लगा ही रहता था।

   हम सभी मसीही विश्वासियों को सदा स्मरण रखना चाहिए कि हमें किस कार्य के लिए बुलाया गया है; मसीह यीशु के अनुयायी होने के नाते हमारा कार्य तथा दायित्व क्या है। - डेविड मैक्कैसलैंड


पौलुस केवल एक बात के लिए कटिबध्द था, 
और वह थी यीशु मसीह के साथ उसका संबंध। - ऑस्वॉल्ड चैंबर्स

एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं। - भजन 27:4

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-17
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिध्द हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। 
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा। 
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15


रविवार, 4 जून 2017

एकाकी


   एक मित्र ने, जिसके जीवन में एकाकीपन के साथ संघर्ष चल रहा था, अपने फेसबुक पृष्ठ पर लिखा, "ऐसा नहीं है कि क्योंकि मेरे कोई मित्रगण नहीं हैं इसलिए मैं एकाकी अनुभव करती हूँ। मेरे बहुत से मित्र हैं। मैं जानती हूँ कि मेरे बहुत से साथी हैं जो मुझे थामेंगे, मुझे आश्वस्त करेंगे, मेरे साथ बातचीत करेंगे, मेरे बारे में चिंता करेंगे और मेरी देखभाल करेंगे। परन्तु वे हमेशा मेरे साथ बने नहीं रह सकते हैं।"

   प्रभु यीशु इस प्रकार के एकाकीपन को समझते हैं। मेरा विचार है कि इस पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के दिनों में प्रभु ने यह एकाकीपन कोढ़ियों की आँखों और अन्धों की आवाज़ में देखा था। लेकिन इस भी बढ़कर उन्होंने स्वयं इसे अनुभव किया जब उनके निकट साथी उन्हें छोड़कर भाग गए (मरकुस 14:50)।

   परन्तु जैसा उन्होंने अपने साथियों द्वारा छोड़े जाने की भविष्यवाणी की थी, वैसे ही प्रभु ने परमेश्वर पिता की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति के आश्वासन के बारे में भी कहा था। प्रभु ने अपने शिष्यों से कहा: "देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है" (यूहन्ना 16:32)। यह कहने के कुछ समय के पश्चात उन्होंने हमारे लिए क्रूस उठा लिया और उस पर हमारे पापों को अपने ऊपर लिए वे बलिदान हो गए। अपने इस बलिदान के द्वारा उन्होंने हमारे लिए संभव कर दिया कि हमारा मेल-मिलाप परमेश्वर पिता के साथ पुनः स्थापित हो सके, हम परमेश्वर के परिवार के सदस्य बन सकें।

   मनुष्य होने के नाते हमें एकाकीपन के समयों से होकर निकलना पड़ेगा; परन्तु प्रभु यीशु हमें यह समझने में सहायता करते हैं कि उस एकाकीपन में भी पिता परमेश्वर की उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहेगी। परमेश्वर सर्वव्यापी और शाश्वत है; केवल वह ही है जो सदा हमारे साथ बना रह सकता है। इसलिए जो भी स्वेच्छा से प्रभु यीशु पर लाए गए विश्वास और पापों के लिए पश्चाताप के द्वारा परमेश्वर के परिवार का अंग बन गया है, वह कभी भी एकाकी नहीं होगा। - पो फैंग चिया


यदि आप प्रभु यीशु के हैं तो आप एकाकी कभी नहीं हो सकते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: मरकुस 14:32-50
Mark 14:32 फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उसने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं। 
Mark 14:33 और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा। 
Mark 14:34 और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो। 
Mark 14:35 और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। 
Mark 14:36 और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। 
Mark 14:37 फिर वह आया, और उन्हें सोते पाकर पतरस से कहा; हे शमौन तू सो रहा है? क्या तू एक घड़ी भी न जाग सका? 
Mark 14:38 जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है। 
Mark 14:39 और वह फिर चला गया, और वही बात कहकर प्रार्थना की। 
Mark 14:40 और फिर आकर उन्हें सोते पाया, क्योंकि उन की आंखे नींद से भरी थीं; और नहीं जानते थे कि उसे क्या उत्तर दें। 
Mark 14:41 फिर तीसरी बार आकर उन से कहा; अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुंची; देखो मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Mark 14:42 उठो, चलें: देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।
Mark 14:43 वह यह कह ही रहा था, कि यहूदा जो बारहों में से था, अपने साथ महायाजकों और शास्‍त्रियों और पुरनियों की ओर से एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियां लिये हुए तुरन्त आ पहुंची। 
Mark 14:44 और उसके पकड़ने वाले ने उन्हें यह पता दिया था, कि जिस को मैं चूमूं वही है, उसे पकड़ कर यतन से ले जाना। 
Mark 14:45 और वह आया, और तुरन्त उसके पास जा कर कहा; हे रब्बी और उसको बहुत चूमा। 
Mark 14:46 तब उन्होंने उस पर हाथ डालकर उसे पकड़ लिया। 
Mark 14:47 उन में से जो पास खड़े थे, एक ने तलवार खींच कर महायाजक के दास पर चलाई, और उसका कान उड़ा दिया। 
Mark 14:48 यीशु ने उन से कहा; क्या तुम डाकू जानकर मेरे पकड़ने के लिये तलवारें और लाठियां ले कर निकले हो? 
Mark 14:49 मैं तो हर दिन मन्दिर में तुम्हारे साथ रहकर उपदेश दिया करता था, और तब तुम ने मुझे न पकड़ा: परन्तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्र शास्त्र की बातें पूरी हों। 
Mark 14:50 इस पर सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14


शनिवार, 3 जून 2017

कार्य


   देखने में वह केवल बेकार पड़ू हुई पुरानी लकड़ी ही थी, परन्तु चार्ल्स हूपर को उसमें कुछ और भी अधिक दिखाई दिया। उन्होंने लंबे समय से खाली छोड़े गए स्थान की पुरानी लकड़ी को लिया, और एक योजना की रूपरेखा तैयार की। फिर उन्होंने अपनी ज़मीन पर के जंगल में से कुछ पेड़ों को काटा, और अपने दादा के औज़ारों को लेकर उन पेड़ों से तख़ते तथा खंबे बनाए। फिर बड़ी मेहनत के साथ उन्होंने अपनी योजना के अनुसार पुरानी और नई लकड़ी को एक साथ जोड़ना-बैठाना आरंभ किया। आज आप टेनेसी पर्वत श्रंखला के पेड़ों में चार्ल्स और शर्ली हूपर का लकड़ी से बना उत्कृष्ठ घर देख सकते हैं, अब जिसका कुछ भाग अतिथि-गृह है और कुछ पारिवारिक विरासत की चीज़ों का संग्रहालय है। वह घर चार्ल्स के दर्शन, कार्यकुशलता और धीरज की गवाही बनकर खड़ा है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफसुस की गैर-यहूदी मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में उन्हें समझाया कि कैसे प्रभु यीशु यहूदी तथा गैर-यहूदी मसीही विश्वासियों को एकत्रित कर रहा है कि वे एक साथ मिलकर परमेश्वर के निवास के लिए एक भवन बनें: "पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो" (इफिसियों 2:13)। परमेश्वर के लिए बनने वाला यह स्थान, "प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो" (इफिसियों 2:20-21)।

   आज भी इस भवन के निर्माण का कार्य ज़ारी है। परमेश्वर हमारे टूटे और बिखरे जीवनों को लेकर, उन्हें हमारे समान ही अन्य टूटे, मुसीबत और परेशानियों से बचाए गए लोगों के साथ मिलाता है, हमारे खुरदरेपन को छीलकर उसे दूर करता है, नए लोगों के साथ हमें मिलाता है, उनके साथ हमारा तालमेल बैठाता है जिससे हम एक साथ मिलकर उसकी महिमा का कारण ठहरें। वह आज भी हमें अपने साथ रहने के लिए तैयार कर रहा है; वह अपने कार्य, अर्थात हम से बहुत प्रेम करता है। - टिम गुस्टाफसन


हमें मसीह के स्वरूप में लाने के लिए 
हमारे जीवन के खुरदरेपन का दूर किया जाना अनिवार्य है।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो। - 1 कुरिन्थियों 3:16-17

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:10-22
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)। 
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे। 
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। 
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। 
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। 
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। 
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। 
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। 
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 19-20
  • यूहन्ना 13:21-38


शुक्रवार, 2 जून 2017

महत्वहीन?


   हम उन सात अरब लोगों में से एक हैं जो इस पृथ्वी पर निवास करते हैं; उस पृथ्वी पर जो आकार में अपेक्षाकृत महत्वहीन एक सौर-मंडल का एक छोटा सा भाग है। वास्तव में हमारी पृथ्वी परमेश्वर द्वारा सृजे गए करोड़ों आकाशीय पिंडों में एक छोटा सा नीला बिंदु मात्र है। इस अति विशाल सृष्टि के दृश्य-पटल पर हमारी सुन्दर, भव्य पृथ्वी धूल के एक छोटे से कण के समान दिखाई देती है, और हम उस कण पर निवास करने वाले अरबों व्यक्तियों में से एक हैं।

   यह विचार हमें अत्यंत महत्वहीन और नगण्य अनुभव करवा सकता है। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि वास्तव में इसका उलट ही सही है। हमारे महान परमेश्वर, जिसके विषय लिखा गया है, "किस ने महासागर को चुल्लू से मापा और किस के बित्ते से आकाश का नाप हुआ, किस ने पृथ्वी की मिट्टी को नपवे में भरा और पहाड़ों को तराजू में और पहाडिय़ों को कांटे में तौला है?" (यशायाह 40:12), की दृष्टि में हम में से प्रत्येक व्यक्ति बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसने हम सब को अपने ही स्वरूप में रचा है, हमें अपनी इस भवय सृष्टि का आनन्द लेने के लिए बनाया है (1 तिमुथियुस 6:17)। जितने जन अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं, उसे अपना प्रभु मान लेते हैं, उन सबके लिए परमेश्वर ने कुछ भले कार्य निर्धारित किए हैं (इफिसियों 2:10)। इस सृष्टि की विशालता के बावजूद परमेश्वर हम में से प्रत्येक के बारे में सब कुछ जानता है, हम में से प्रत्येक की परवाह करता है।

   बाइबल में भजन 139 हमें बताता है कि परमेश्वर जानता है कि हम क्या कहने जा रहे हैं, क्या विचार कर रहे हैं। हम उसकी उपस्थिति से कहीं भाग नहीं सकते, बच नहीं सकते, उसकी नज़रों से कहीं भी ओझल नहीं हो सकते हैं। उसने हमारे जन्म से पूर्व ही हमारे अस्तित्व का प्रत्येक पल नियोजित किया है। हमारे परमेश्वर पिता ने हमें अनन्त विनाश से निकालकर अनन्त आनन्द के जीवन में लाने के लिए, हमारे पापों की क्षमा के लिए अपने एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा, वरन उसे भी इस संसार में भेजकर बलिदान कर दिया जिससे उसके साथ हमारा मेल-मिलाप हो सके। यदि इस सृष्टि के सृजनहार की नज़रों में हम इतने महत्वपूर्ण, इतने कीमती हैं, तो फिर हम महत्वहीन कैसे हो सकते हैं? - डेव ब्रैनन

   
जिस परमेश्वर ने इस सृष्टि को सृजा, वह आपसे भी प्रेम करता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: भजन 139:7-16
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20


गुरुवार, 1 जून 2017

ज्योति


   पेरू देश के एक दौरे के समय, मैं उस पहाड़ी देश में पाई जाने वाली अनेकों गुफाओं में से एक को देखने गया। हमारे मार्गदर्शक ने बताया कि जिस गुफा में हम जा रहे थे वह 9 मील की गहराई तक खोजा जा चुका है, परन्तु वह इससे भी अधिक गहरी है। उस गुफा में उतरते हुए हमने अचंभित करने वाली चमगादड़ें, अंधेरे में विचरण करने वाले पक्षी और चट्टानों की आकर्षक आकृतियाँ देखीं। लेकिन गहराई में उतरते हुए गुफा का अन्धकार विचलित कर देने वाला, लगभग दम घोटने वाला सा हो गया। हमारे वापस सतह पर दिन की ज्योति में आ जाने से मुझे बहुत राहत मिली।

   यह अनुभव मेरे लिए एक यादगार था, कि अंधेरा कितना विचलित कर देने वाला हो सकता है और हमें ज्योति की कितनी अधिक आवश्यकता होती है। हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जिसे पाप ने अंधेरा कर दिया है - ऐसा संसार जो अपने सृष्टिकर्ता के विरुध्द हो गया है। हमें इस अंधकार से निकलने के लिए ज्योति की आवश्यकता है।
   प्रभु यीशु मसीह, जो मानव जाति सहित समस्त सृष्टि को उसके नियत स्वरूप में पुनः बहाल करने आए थे, ने अपने आप को "ज्योति" बताया (यूहन्ना 8:12)। प्रभु ने अपने संसार में आने के उद्देश्य के संबंध में कहा, "मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे" (यूहन्ना 12:46)।

   प्रभु यीशु में ना केवल हमें उध्दार की ज्योति मिलती है, वरन वह एकमात्र ज्योति मिलती है जिसके साथ हम संसार में व्याप्त पाप के अंधकार में भी अपना मार्ग - हमारे लिए परमेश्वर का मार्ग देख सकते हैं, उस पर चल सकते हैं। - बिल क्राउडर


यदि हम ज्योति में चलेंगे तो अंधकार से ठोकर नहीं खाएंगे।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:42-50
John 12:42 तौभी सरदारों में से भी बहुतों ने उस पर विश्वास किया, परन्तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, ऐसा न हो कि आराधनालय में से निकाले जाएं। 
John 12:43 क्योंकि मनुष्यों की प्रशंसा उन को परमेश्वर की प्रशंसा से अधिक प्रिय लगती थी।
John 12:44 यीशु ने पुकारकर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है। 
John 12:45 और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है। 
John 12:46 मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। 
John 12:47 यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं। 
John 12:48 जो मुझे तुच्‍छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहराने वाला तो एक है: अर्थात जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा। 
John 12:49 क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिसने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं 
John 12:50 और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 15-16
  • यूहन्ना 12:27-50