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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

सदगुण

   न्यूयॉर्क के ब्रौंक्स इलाके के एक कॉलेज फुटबॉल प्रशिक्षक, क्लेटन हैन्ड्रिक-होम्स, ने मैरिटाईम कॉलेज की टीम को चरित्र के सदगुणों के साथ प्रशिक्षित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की कमीज़ पर खिलाड़ियों के नाम के स्थान पर कुछ शब्द लिखवाए, जैसे परिवार, आदर, जवाबदेही, चरित्र आदि। प्रत्येक खेल से पहले क्लेटन अपनी टीम से कहते कि उन शब्दों से संबंधित सदगुण के सिद्धांतों के अनुसार खेल खेलें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी प्रेरित पतरस ने कुछ मसीही सदगुणों की सूची दी (2 पतरस 1:5-7), जिसे मसीही विश्वासियों को अपने विश्वास के साथ जोड़ लेना चाहिए। सुची के सदगुण इस प्रकार हैं:
  • सदगुण - नेक आचरण से परिपूर्ण जीवन के साथ परमेश्वर के उद्देश्य पूरे करने के लिए।
  • समझ - परमेश्वर के वचन के अध्ययन द्वारा झूठी शिक्षाओं से बचे रहने की सूझ-बूझ।
  • संयम - परमेश्वर को अपने जीवन में इतना आदर देना कि हर प्रत्युत्तर परमेश्वर कि महिमा के लिए हो।
  • धीरज - परमेश्वर पर ऐसा भरोसा बनाए रखना कि प्रत्येक परिस्थिति में अन्ततः भलाई ही होने के आशावान बने रहें।
  • भक्ति - जीवन के प्रत्येक संबंध में परमेश्वर को आदर देना।
  • भाईचारा - मसीही सहविश्वासियों के प्रति स्नेहपूर्ण व्यवहार बनाए रखना।
  • प्रेम - दूसरों की भलाई के लिए त्याग का भाव रखना।


हम मसीही विश्वासियों को चाहिए कि इन सदगुणों को अपने जीवन में ना केवल बनाए रखें वरन उन्हें बढ़ाते रहें और अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखें। - ऐनी सेटास


सदगुणपूर्ण आचरण की कुँजी ईश्वरीय सदगुणों का सतत अभ्यास है।

क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:3

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1:1-11
2 Peter 1:1 शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्होंने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धामिर्कता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्त किया है। 
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। 
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। 
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ। 
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ। 
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। 
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। 
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी। 
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है। 
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे। 
2 Peter 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 50-52 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 5


बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

सफल

   प्रसिद्ध बास्केटबॉल प्रशिक्षक जौन वुडेन ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली टीम के लिए एक रोचक नियम बना रखा था; जब कभी कोई खिलाड़ी अंक बनाता तो उसे उस खिलाड़ी को धन्यवाद करना होता था जिसकी सहायता से अंक बनाने का अवसर उसे मिला। जब वे हाई-स्कूल में प्रशिक्षण दिया करते थे तो एक खिलाड़ी ने उनसे पूछा, "क्या ऐसा करने से खेल का बहुत समय व्यर्थ नहीं चला जाएगा?" उनका उत्तर था, "मैं तुम्हें हर बार खेल रोक कर उस खिलाड़ी के पास जाकर धन्यवाद करते रहने को नहीं कह रहा हूँ, केवल उसकी ओर देखकर अपना सिर हिलाकर उसकी सहायता के लिए आभारी होना ही काफी होगा।"

   बास्केटबॉल कोर्ट पर विजयी होने के लिए यह आवश्यक था कि सभी खिलाड़ी अपने आप को एक ही दल के अंग के रूप में देखें और इसी मनोवृति के साथ खेलें, ना कि स्वतंत्र खेलने वाले लोगों के झुंड जैसे। इसके लिए उनका एक दुसरे के साथ बन्धे रहना, एक दूसरे के प्रति धन्यवादी रहना बहुत आवश्यक था, तब ही वे एक साथ मिलकर एक दूसरे के पूरक होकर एक टीम के रूप में जीत सकते थे। जयवंत होने के लिए भिन्नता में एकता रखने की यह शिक्षा परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षा पर आधारित है।

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को समझाया कि वे सब मसीह यीशु में एक देह होकर कार्य करें। वे सब एक ही देह के भिन्न अंगों के समान हैं और सब एक साथ मिलकर ही देह की उन्नति और स्वास्थ्य का कारण हो सकते हैं। कोई भी एक अंग किसी अन्य से अधिक महत्वपूर्ण नहीं और ना ही कोई अंग किसी अन्य से गौण। प्रत्येक का देह में अपना विशिष्ट स्थान है, और प्रत्येक अपने कार्य के लिए देह के लिए आवश्यक है। यदि एक भी अंग ठीक से कार्य नहीं करेगा तो सारी देह पर इसका दुषप्रभाव आएगा।

   क्या किसी चर्च मण्डली के पास्टर की, या किसी बाइबल अधय्यन की, या किसी अन्य मसीही कार्य योजना की सफलता केवल किसी एक व्यक्ति ही के कारण है? क्या उस प्रमुख दिखने वाले व्यक्ति के पीछे अन्य कई सहायक जन नहीं होते? क्या उनका योगदान इसलिए नज़रंदाज़ होना चाहिए क्योंकि वे प्रकट में सामने नहीं आए? चाहे टीम चर्च की हो, चाहे परिवार हो चाहे कोई संस्था, जब तक उसके सब लोग एक साथ मिलकर अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों को भरसक नहीं निभाएंगे, सफलता तो दूर, सुचारू रीति से कार्य करना भी असंभव हो जाएगा।

   जौन वुडेन का नियम और प्रेरित पौलुस द्वारा कु्रिन्थुस की मण्डली को लिखे निर्देश दोनों एक ही सिद्धांत पर आधारित हैं - आगे बढ़ने के लिए हमें एक दुसरे की सहायता की आवश्यकता रहती है, कोई भी अकेले ही आगे नहीं बढ़ सकता, सफल नहीं हो सकता। परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए अपने वरदानों, गुणों और योग्यताओं को परमेश्वर की मण्डली की बढ़ोतरी के लिए, उसे मज़बूत बनाने के लिए और मण्डली से परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मिलजुल कर प्रयोग करें। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में व्यर्थ अथवा महत्वहीन अंग कोई नहीं है।

इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। - 1 कुरिन्थियों 12:14

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-26
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 4


मंगलवार, 15 अक्टूबर 2013

कृतज्ञ एवं धन्यवादी

   डेव रैन्डल्ट वह व्यक्ति थे जिनके लिए मैं कह सकता हूँ कि उनके कारण मेरा जीवन ऐसा बदला जो फिर कभी वापस लौट नहीं सकता। डेव अक्टूबर 2010 में अपने प्रभु के पास, अपने स्वर्गीय घर चले गए। जब मैं कॉलेज के दिनों में प्रभु यीशु का नया अनुयायी ही था, तब मैं डेव के संपर्क में आया और तब से ही वे मेरे परामर्शदाता और मुझे उभारने, सिखाने वाले बन गए। उन्होंने ना केवल मुझे में अपने समय का निवेश किया, वरन मुझे मसीही सेवकाई में सीखने और बढ़ने के अवसर देकर मेरे लिए अपने ऊपर जोखिम भी आने दिया। डेव प्रभु की ओर से माध्यम थे कि मैं छात्रावस्था में ही प्रचार कर सकूँ और कॉलेज के संगीत दल के साथ यात्राएं कर सकूँ। परिणामस्वरूप उन्होंने मेरे जीवन को परमेश्वर के वचन का शिक्षक होने के लिए ढाला और तैयार किया। मैं प्रसन्न हूँ कि इन सब बातों के लिए मैं कई बार उन्हें धन्यवाद दे सका।

   जैसे मैं डेव के प्रति अपने जीवन में आए प्रभावों के लिए कृतज्ञ और धन्यवादी हूँ, प्रेरित पौलुस भी अपने सहकर्मी अक्वीला और प्रिसका के प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी था, जो उसके साथ प्रभु यीशु की सेवा करते थे। पौलुस ने उनके विषय में लिखा, "उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं" (रोमियों 16:4)।

   आपके जीवन में भी कई लोग होंगे जिन्होंने आपको उन्नति के अवसर देने के लिए अपने ऊपर जोखिम लिए होंगे, या जिन्होंने आत्मिक रीति से आपको प्रभावित किया होगा, आपको संवारा और बढ़ाया होगा। संभवतः कोई पास्टर, या मसीही सेवकाई के अगुवे, या कोई मित्रगण अथवा परिवारजन ने अपने आपको आपके जीवन में व्यय किया जिससे आप मसीह यीशु में अपनी जीवन यात्रा में बेहतर रीति से आगे बढ़ सकें। आपके सांसारिक जीवन में भी आगे बढ़ने और उन्नति करने, आपको उचित अवसर मिलने तथा उन अवसरों का योग्य रीति से प्रयोग करने के लिए आपको प्रोत्साहित करने में भी कई लोग सम्मिलित रहे होंगे। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है, अवसर रहते क्या आपने उनके प्रति अपनी कृतज्ञता और धन्यवाद को उन पर प्रकट किया है?

   कौन कब जीवन का हिसाब देने के लिए बुला लिया जाएगा, कोई नहीं जानता। शायद कल आपके पास यह अवसर ना रहे। आज ही, अवसर रहते, अपने कृतज्ञ और धन्यवादी होने को उन लोगों पर प्रकट करें, जिन्होंने अपने जीवन आपके जीवन को संवारने में निवेश किए हैं। - बिल क्राउडर


जिन्होंने आपको बनाने में योगदान दिया है, उनके प्रति सदा कृतज्ञ एवं धन्यवादी रहें।

उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। - रोमियों 16:4

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-16
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं। 
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है। 
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार। 
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। 
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार। 
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 
Romans 16:7 ​अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार। 
Romans 16:8 अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार। 
Romans 16:9 उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार। 
Romans 16:10 अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार। 
Romans 16:11 मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्कार। 
Romans 16:12 त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्कार। प्रिया परसिस को जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 
Romans 16:13 रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्कार। 
Romans 16:14 असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मास ओर पत्रुबास और हर्मेस और उन के साथ के भाइयों को नमस्कार। 
Romans 16:15 फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार।
Romans 16:16 आपस में पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो तुम को मसीह की सारी कलीसियाओं की ओर से नमस्कार।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 45-46 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 3


सोमवार, 14 अक्टूबर 2013

परिवर्तित

   टेलिविज़न पर प्रसारित होने वाला एक कार्यक्रम मुझे पसन्द है। उस कार्यक्रम के एक खंड में दो महिलाओं को चुना जाता है और फिर 3 घंटे तक बड़ी तैयारी के साथ उनके केश संवारे जाते हैं, उनका श्रृंगार किया जाता है, उन्हें नई वेशभूषा पहनाई जाती है। इस सब से उन के रूप में होने वाला परिवर्तन अकसर नाटकीय होता है। इस सब के बाद जब उन महिलाओं को परदे के पीछे से उपस्थित दर्शकों के सामने लाया जाता है तो वे अपनी आँखों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पाते। कभी कभी उन महिलाओं के परिवार जनों और मित्रगणों की आंखों से, उस रूपांतर को देखकर, आँसू बहने लगते हैं। यह सब हो जाने के बाद ही उन महिलाओं को अपने आप को दर्पण में देखने दिया जाता है; कुछ तो इतनी अचंभित हो जाती हैं कि वे अपने आप को दर्पण में देखती ही रह जाती हैं, उन्हें विश्वास ही नहीं हो पाता कि वे वास्तव में अपने आप को ही देख रही हैं। लेकिन सबसे रोचक बात होती है जब उन महिलाओं से कहा जाता है कि वे चल कर जाएं और दर्शकों में बैठे अपने परिवार या मित्रगणों के साथ जाकर बैठ जाएं।

   जैसे ही वे महिलाएं चलना आरंभ करती हैं, उनका रुपांतर से पहले का स्वरूप प्रकट होने लगता है, क्योंकि अपने नई वेशभूषा और नए जूतों में चलना उन्हें नहीं आता। वे देखने में तो अति आकर्षक लगती हैं लेकिन उनकी अटपटी चाल उनकी वास्तविकता प्रकट कर देती है। यह तुरंत विदित हो जाता है कि उनका यह रूपांतरण अभी अधूरा ही है।

   यही बात हमारे मसीही जीवन पर भी लागू होती है। जब हम अपने पापों से क्षमा मांगकर प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करते हैं तो परमेश्वर भी हमें पुराने मनुष्यत्व से सुधारने संवारने लगता है, एक नए जीवन का द्वार हमारे लिए खोल देता है। लेकिन इस नए जीवन में चलना और इसे निभाने के लिए समय लगता है, उसके लिए अभ्यास और प्रयास चाहिए होता है। यदि हम एक ही स्थान पर खड़े खड़े मुस्कुराते रहें तो संभवतः लोग हमें देखकर सोच लें कि परिवर्तन आया है। लेकिन हमारे परिवर्तन की सार्थकता और गहराई का सूचक होता है हमारा चाल-चलन। यदि हमारे चाल-चलन में हमारे उद्धार के योग्य परिवर्तन नहीं आया, तो यह दिखाता है कि हमें अभी अपने मसीही चाल-चलन में कितना प्रयास और करना है। जो नई शुरुआत परमेश्वर ने हमें दी है, जो नई सामर्थ परमेश्वर से हमें मिली है, उसको सही रीति से प्रयोग करने के लिए हमें कितने अभ्यास की आवश्यकता है।

   मसीह यीशु में परिवर्तित हो जाने का अर्थ है पुरानी बातों और पुराने जीवन को छोड़कर नए जीवन और नए मार्ग पर चलते रहना, और उसे अपने जीवन से प्रगट करना। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परिवर्तित मन से ही परिवर्तित व्यवहार आता है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:15, 17

बाइबल पाठ: रोमियों 6:2-14
Romans 6:2 कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताएं? 
Romans 6:3 क्या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया 
Romans 6:4 सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। 
Romans 6:5 क्योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएंगे। 
Romans 6:6 क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। 
Romans 6:7 क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। 
Romans 6:8 सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी। 
Romans 6:9 क्योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की। 
Romans 6:10 क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है। 
Romans 6:11 ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। 
Romans 6:12 इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो।
Romans 6:13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Romans 6:14 और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 2


रविवार, 13 अक्टूबर 2013

व्यर्थ व्यस्तता

   एक दिन मैं जब यात्रा के लिए वायुयान में चढ़ने की प्रतीक्षा कर रहा था, एक अजनबी मेरे पास आया और मुझ से वार्तालाप करने लगा। उसने मेरा यह कहना सुन लिया था कि मैं एक पास्टर हूँ। वह मुझ से प्रभु यीशु के साथ हुई उसकी मुलाकात तथा उस मुलाकात से पहले और बाद के जीवन के बारे में बताने लगा। उसने बताया कि कैसे उस मुलाकात से पहले का उसका जीवन पाप और स्वार्थ से भरा हुआ था। मैं बड़ी रुची के साथ सुनता रहा कैसे प्रभु यीशु को समर्पण के बाद उसने अपने जीवन में कई परिवर्तन किए और वह अब कैसे भले कार्यों को करता रहता है। लेकिन एक बात मुझे खटक रही थी, उसका सारा वर्णन इस बात पर था कि उसने प्रभु के लिए और प्रभु के नाम में क्या कुछ किया, कहीं भी उस व्यक्ति ने यह नहीं बताया कि वह अब प्रभु के साथ समय कैसे बिताता है, प्रभु यीशु के साथ अब उसकी संगति कैसी है। इसलिए जब उसने कहा कि, "अगर मैं साफ-साफ शब्दों में कहूँ, तो मुझे लगता था कि इन सब के कारण अब तक मैं अपने आप से बहुत प्रसन्न होने पाऊँगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है" तो मुझे यह सुन कर कोई अचरज नहीं हुआ।

   इस व्यक्ति की बात से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेख किया गया मार्था का चरित्र स्मरण हो आया। मार्था अवश्य इस व्यक्ति के साथ सहानुभुति रखती। मार्था ने भी एक समय प्रभु यीशु को अपने घर निमंत्रण देकर बुलाया था, और प्रभु के आने पर वह उसकी आवभगत में दौड़-धूप करने लगी, अनेक प्रकार कि तैयारियाँ करने लगी। प्रभु को प्रसन्न करने की उसकी इस सारी प्रक्रिया में उसके पास प्रभु के साथ बैठने और उससे वार्तालाप करने का समय ही नहीं था। लेकिन उसकी बहन मरियम प्रभु के चरणों पर बैठकर प्रभु की बातें सुन रही थी, जो व्यस्त मार्था को बहुत नागवार गुज़रा, और मार्था ने प्रभु से उपेक्षित स्वर में मरियम को डाँटने के लिए कहा। लेकिन प्रभु यीशु ने मरियम का पक्ष लेते हुए मार्था को समझाया।

   हम में से बहुतेरे यही गलती करते रहते हैं, जो तब मार्था और उस समय उस व्यक्ति ने करी थी। हम या तो संसारिक उपलब्धियों के लिए या फिर प्रभु के लिए और प्रभु के नाम में इतना कुछ करने में अपने आप को व्यस्त कर लेते हैं कि हमारे पास समय ही नहीं होता कि हम जान सकें कि प्रभु हमसे चाहता क्या है और वह क्या है जिससे प्रभु हमसे वास्तव में प्रसन्न होगा। हम प्रभु को बेहतर जानने, उससे संगति करने में समय ही नहीं लगाते; बस अपनी ही मनसाओं, योजनाओं और कार्यक्रमों के अनुसार चलते रहते हैं और फिर थके हुए तथा कुँठित अनुभव करते हैं, निराश होते हैं कि क्यों हमारे मन प्रभु में प्रफुल्लित नहीं रहते।

   उस व्यक्ति को जो सलाह मैंने तब दी वही मैं आज आप के साथ भी बाँटना चाहता हूँ; मैंने उससे मार्था को कहे प्रभु यीशु के शब्दों को उद्वत किया: "प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:41-42)। यदि आप प्रभु के साथ संगति करने उसके वचन को पढ़ने और उस पर मनन करने के लिए समय नहीं निकाल पाते, तो प्रभु के नाम में या प्रभु के लिए, या फिर सांसारिक उपलब्धियों के लिए आप जो कुछ भी कर रहे हैं वह व्यर्थ व्यस्तता है, अन्ततः उसका फल निराशा और कुँठा ही है, प्रभु यीशु में मिलने वाली शान्ति और आनन्द नहीं। अपनी प्राथमिकताओं पर विचार कीजिए तथा सही प्राथमिकताओं को निर्धारित कीजिए। - रैण्डी किल्गोर


हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता अपने बच्चों से संगति करने और उनसे वार्तालाप करने को लालायित रहता है।

और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। - लूका 10:39

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा। 
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 1


शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

शक्तिहीन?

   मेरी किशोरावस्था में मैं और मेरे पिता अनेक बार जंगलों में शिकार खेलने तथा मछली पकड़ने साथ-साथ गए। उन अभियानों में से अधिकांशतः तो सुखद यादों से भरे हैं परन्तु एक है जो अनर्थकारी होते होते रह गया। उस अभियान में हम एक पर्वत श्रंखला पर काफी ऊँचाई पर अन्दर जंगलों में गए और वहाँ अपना डेरा लगाया। फिर मछली पकड़ने के लिए हम पैदल नीचे नदी पर आए और सारा दिन धूप तथा गर्मी में मछली पकड़ने में बिताया। फिर समय हुआ कि हम वापस ऊपर अपने डेरे पर लौटें। लेकिन जैसे हम ऊपर कि ओर चढ़ने लगे, मेरे पिता का चेहरा पीला पड़ने लगा, उन्हें चक्कर आने लगा और जी घबराने लगा। उनमें आगे बढ़ने की कोई शक्ति नहीं रही।

   ना घबराने का प्रयास करते हुए, मैंने उन्हें बैठा दिया और पीने के लिए कुछ तरल पदार्थ देने लगा, फिर ऊँचे शब्दों के साथ मैंने परमेश्वर से सहायता के लिए प्रार्थना करनी आरंभ कर दी। उस प्रार्थना के उत्तर में मैंने देखा कि पिताजी की स्थिति सुधरने लगी और फिर वे धीरे धीरे ऊपर डेरे की ओर चढ़ने लगे। मैं उनके आगे आगे था, और वे मेरी कमर पर बन्धी पेटी को पकड़े हुए चढ़ते जा रहे थे, और हम अपने डेरे तक सुरक्षित पहुँच गए।

   जीवन यात्रा में भी हम कभी कभी अपने आप को निराशा की किसी वादी में अशक्त पड़ा हुआ पाते हैं, जहाँ हमें समझ नहीं आता कि क्या करें, कहाँ जाएं, कैसे पार पाएं। हम मसीही विश्वासियों के पास ऐसी परिस्थितियों के लिए परमेश्वर का वायदा है: "वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है" (यशायाह 40:29)।

   क्या आप अपने आप को थका हुआ और शक्तिहीन अनुभव कर रहे हैं? प्रार्थना में उसे पुकारें, उस निराशा की वादी से बाहर निकलने की शक्ति उससे माँगें; उसकी सामर्थ पर निर्भर हो जाएं और उसके मार्गदर्शन का पालन करें। जो उस पर भरोसा करते हैं वे कभी निराश नहीं होते। - डेनिस फिशर


जब परमेश्वर के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं होता तब हम पाते हैं कि परमेश्वर के अतिरिक्त किसी उपाय की हमें आवश्यकता भी नहीं है, वह हर परिस्थिति के लिए काफी है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: यशायाह 40:25-31
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। 
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40 
  • कुलुस्सियों 4


शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

पवित्र आत्मा

   प्रेरितों के विश्वास वचन को दोहराते समय हम एक वाक्य बोलते हैं, "मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता हूँ"। बाइबल विद्वान और लेखक जे०बी०फिलिप्स ने इस वाक्य के संबंध में कहा, "जब हम यह कहते हैं तो इसका तात्पर्य होता है कि हम यह मानते हैं कि पवित्र आत्मा जीवित परमेश्वर है जो मानव व्यक्तित्व में आने और उसे संवारने की क्षमता तथा इच्छा रखता है"।

   कई बार हम पवित्र आत्मा को एक अव्यैक्तिक शक्ति मान लेते हैं लेकिन यह सही नहीं है। परमेश्वर का वचन बाइबल पवित्र आत्मा को परमेश्वर बताती है। उसमें परमेश्वर के गुण हैं: वह सर्वविद्यमान है (भजन 139:7-8); वह सब कुछ जानता है (1कुरिन्थियों 2:10-11); उसकी शक्ति असीम है (लूका 1:35)। पवित्र आत्मा ऐसे कार्य करता है जो केवल परमेश्वर ही कर सकता है: उत्पन्न करना (उत्पत्ति 1:2), जीवन देना (रोमियों 8:2)। पवित्र आत्मा त्रिएक परमेश्वर में, पिता और पुत्र के साथ तथा उनके बराबर है।

   पवित्र आत्मा एक व्यक्ति है जो हमारे साथ व्यक्तिगत रीति से सम्बंध बनाए रखता है। जब हम पाप करते हैं तो वह दुखी होता है (इफीसियों 4:30); वह हमें सिखाता है (1कुरिन्थियों 2:13); हमारे लिए प्रार्थना करता है (रोमियों 8:26); हमारा मार्गदर्शन करता है (यूहन्ना 16:13); वह हमें आत्मिक वर्दान देता है (1कुरिन्थियों 12:11); और हमें हमारे उद्धार के विषय में आश्वस्त करता है (रोमियों 8:16)।

   यदि हमने पापों से पश्चाताप करके प्रभु यीशु से उनके लिए क्षमा प्राप्त करी है तो पवित्र आत्मा हमारे अन्दर निवास करता है। वह चाहता है कि हमें परिवर्तित करे कि हम और भी मसीह यीशु की समानता में होते चले जाएं। जितना हम परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर करते हुए बाइबल की आज्ञाकारिता में बढ़ते जाएंगे, उतना ही अधिक हम पवित्र आत्मा के साथ सहयोग करते हुए उसे अपने जीवनों में प्रभावी कार्य करने तथा परिवर्तित करने देने वाले बनते चले जाएंगे, प्रभु यीशु की समानता में बदलते चले जाएंगे। - मार्विन विलियम्स


जो मसीही विश्वासी पवित्र आत्मा की अवहेलना करता है वह उस दीपक के समान है जो बिना ऊर्जा स्त्रोत के है।

मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। - 1 कुरिन्थियों 2:11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 2:6-16
1 Corinthians 2:6 फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होने वाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। 
1 Corinthians 2:7 परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। 
1 Corinthians 2:8 जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते। 
1 Corinthians 2:9 परन्तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। 
1 Corinthians 2:10 परन्तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है। 
1 Corinthians 2:11 मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। 
1 Corinthians 2:12 परन्तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। 
1 Corinthians 2:13 जिन को हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्तु आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिला कर सुनाते हैं। 
1 Corinthians 2:14 ​परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है। 
1 Corinthians 2:15 आत्मिक जन सब कुछ जांचता है, परन्तु वह आप किसी से जांचा नहीं जाता। 
1 Corinthians 2:16 क्योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए? परन्तु हम में मसीह का मन है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38 
  • कुलुस्सियों 3