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गुरुवार, 19 जनवरी 2017

वचन


   मेरे लड़कपन के दिनों में, हमारा परिवार कभी-कभी नेवाडा प्रांत से होकर यात्रा करता था, जो मरुभूमि का इलाका है। उन यात्राओं में हमें मरुभूमि में आने वाले तूफान बहुत अच्छे लगते थे। बिजली के कड़कने और बादलों के ज़ोर से गर्जने के साथ मूसलाधार बारिष मरुभूमि की तपती हुई रेत पर छा जाती। ठण्डक देने वाली वह वर्षा हमें तथा धरती दोनों ही को तर-ओ-ताज़ा कर देती थी।

   सूखे इलाकों में जल अद्भुत परिवर्तन ले आता है; उदाहरण के लिए, सूखे में निर्जीव से दिखने वाले नागफनी के झाड़, ग्रीष्म ऋतु की पहली बारिष के बाद ही फूलने लगते हैं, गुलाबी, सुनहले, और सफेद फूलों से भर जाते हैं। इसी प्रकार इस्त्राएल के सूखे इलाकों में, वर्षा होने के साथ ही भूमि से वनस्पति अँकुरित होने लग जाती है।

   वर्षा द्वारा तर-ओ-ताज़गी देने तथा नया जीवन आरंभ करने के गुण को परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्यों पर परमेश्वर के वचनों के प्रभाव को समझाने के लिए प्रयुक्त किया गया है: "जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है, उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा" (यशायाह 55:10-11)।

   परमेश्वर के वचन में आत्मिक जीवन है, इसीलिए वह निष्फल कभी नहीं लौटता है। जहाँ कहीं भी उसे एक खुला और ग्रहणशील हृदय मिलता है, वहाँ यह वचन ताज़गी, पोषण और नया जीवन ले आता है। - डेनिस फिशर


जैसे मरुभूमि के लिए जल वैसे ही प्यासी आत्मा के लिए परमेश्वर का वचन है।

तू भूमि की सुधि ले कर उसको सींचता हैं, तू उसको बहुत फलदायक करता है; परमेश्वर की नहर जल से भरी रहती है; तू पृथ्वी को तैयार कर के मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है। तू रेघारियों को भली भांति सींचता है, और उनके बीच की मिट्टी को बैठाता है, तू भूमि को मेंह से नरम करता है, और उसकी उपज पर आशीष देता है। - भजन 65:9-10

बाइबल पाठ: यशायाह 55:6-13
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो; 
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा। 
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। 
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है, 
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
Isaiah 55:12 क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाडिय़ां गला खोल कर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे। 
Isaiah 55:13 तब भटकटैयों की सन्ती सनौवर उगेंगे; और बिच्छु पेड़ों की सन्ती मेंहदी उगेगी; और इस से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30


बुधवार, 18 जनवरी 2017

समानता


   livescience.com वेबसाईट पर मैंने मानव आँख के बारे में कुछ अद्भुत बातें पढ़ीं: "यदि आप एक ऊँचे पहाड़ की चोटी पर खड़े हैं जिससे पृथ्वी का सामान्य से अधिक भाग देखा जा सकता है, तो आप को सैंकड़ों मील दूर की चमकीली रौशनी का भी आभास हो सकता है। अंधेरी रात में, तीस मील (48 किलोमीटर) दूर स्थित जलती हुई मोमबत्ती की लौ भी आप देख सकते हैं। किसी दूरबीन या रात में देखने वाले चश्मे की आवश्यकता नहीं है - मानव आँख इतनी विलक्षण रीति से बनाई गई है कि स्पष्ट वातावरण में लंबी दूरी पर स्थित चीज़ें भी देखी जा सकती हैं।

   ये तथ्य हमारे अद्भुत सृष्टिकर्ता की रचनात्मक सामर्थ के अद्भुत गवाह हैं, जिसने ना केवल मानव आँख वरन हमारी सृष्टि की प्रत्येक ची़ज़ बड़ी बारीकी से बनाई है। और सृष्टि की किसी भी अन्य वस्तु से हटकर, उस परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में बनाया है (उत्पत्ति 1:26-27)। "उसके स्वरूप" में होने का अर्थ केवल देख पाने तक ही सीमित नहीं है; इसका तात्पर्य है परमेश्वर की समानता में होना जिससे हम उसके साथ सम्पर्क तथा संगति रखने की क्षमता प्राप्त करते हैं।

   हम दाऊद की अभीव्यक्ति "मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं" (भजन 139:14) के साथ अपनी सहमति घोषित कर सकते हैं। परमेश्वर पिता द्वारा ना केवल हमें सृष्टि को देखने के लिए आँखें दी गईं हैं, वरन हमें ऐसा रचा गया है कि प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास द्वारा एक दिन हम परमेश्वर को भी द्खेंगे, उसकी समानता में सिद्ध हो जाएंगे और उसके साथ अनन्तकाल तक संगति में रहेंगे। - बिल क्राउडर


परमेश्वर की संपूर्ण सृष्टि उसके सृष्टिकर्ता होने की गवाही देती है।

फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:26-27

बाइबल पाठ: भजन 139:1-16
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50


मंगलवार, 17 जनवरी 2017

छोड़ दिया


 किशोरावस्था में अपना ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करके अपनी जेब में बटुआ रखना आरंभ करने के पश्चात हमारे पुत्र के संबंध में हमें अनेकों लोगों से फोन आने लगे - जो उसके द्वारा अपना बटुआ यहाँ-वहाँ भूल जाने या छोड़ देने के पश्चात बटुआ ले जाने के लिए होते थे। हमें बारंबार उसे सचेत करना पड़ा कि वह अपने बटुए का ध्यान रखे और उसे ऐसे ही कहीं भी नहीं छोड़ दिया करे।

   लेकिन अपनी चीज़ें छोड़ देना सदा ही बुरा नहीं होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 4 में हम एक स्त्री के बारे में पढ़ते हैं जो कुएं पर पानी भरने आई थी। उसी कुएं पर प्रभु यीशु भी बैठे थे; उनसे उस स्त्री के वार्तालाप के पश्चात, उस स्त्री का उद्देश्य बिलकुल बदल गया और वह पानी भरने के अपने बरतन को वहीं छोड़कर वापस नगर को लौट गई ताकि जो बातें प्रभु यीशु ने उससे कहीं उन्हें लोगों को बता सके (पद 28-29)। प्रभु यीशु के बारे में बताने के उत्साह के सामने पानी की उसकी शारीरिक आवश्यकता फीकी पड़ गई।

   प्रभु यीशु की सेवकाई के आरंभ में, झील के तट पर काम करते हुए पतरस और अन्द्रियास उन्हें मिले, और प्रभु ने उन्हें अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया। वे दोनों तुरंत अपने मछली पकड़ने के जाल, जो उनके जीविका कमाने के साधन थे, छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए (मत्ती 4:18-20)। इसी प्रकार जब प्रभु यीशु ने उन्हें बुलाया तो यूहन्ना और याकूब भी अपने जाल, नाव और पिता को छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए (पद 21-22)।

   प्रभु यीशु मसीह के पीछे हो लेने के हमारे नए जीवन में हमें कई बातों, कई चीज़ों को पीछे छोड़ना हो सकता है, जिनमें से कई ऐसी भी हैं जिनसे स्थायी संतुष्टि प्राप्त नहीं होती है। जिनकी कभी हमें तीव्र लालसा रहती थी, प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन जल और उसकी तृप्ति के सामने वे बातें व्यर्थ हो जाती हैं, उन्हें छोड़ देना कोई घाटे का सौदा नहीं रह जाता। - सिंडी हैस कैस्पर

प्रभु यीशु ने हमारे प्रति अपना प्रेम हमारे लिए अपने प्राण बलिदान करके दिखाया; 
आज, उसके प्रति हम अपना प्रेम उसके लिए जीवन व्यतीत करके दिखाते हैं।

इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:31-33

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:6-14; 24-30
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:24 परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें। 
John 4:25 स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्‍तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा। 
John 4:26 यीशु ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं।
John 4:27 इतने में उसके चेले आ गए, और अचंभा करने लगे, कि वह स्त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न कहा, कि तू क्या चाहता है? या किस लिये उस से बातें करता है। 
John 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी। 
John 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है? 
John 4:30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23


सोमवार, 16 जनवरी 2017

विवश


   जॉन ल्युइस, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सभा के सदस्य हैं, उस समय 23 वर्ष के थे जब उन्होंने डा० मार्टिन लूथर किंग के 1963 के एतिहासिक मानवाधिकार अभियान "मार्च ऑन वॉशिंगटन" में भाग लिया। अब उस घटना के अर्ध-शताब्दी पश्चात, जब पत्रकार बिल मौयेर्स ने ल्युइस से पूछा कि उस समय डा० किंग के द्वारा दिए गए प्रसिद्ध भाषण, "आई हैव ए ड्रीम" का उन पर क्या प्रभाव हुआ, तो श्री. ल्युइस ने उत्तर दिया, "आप उन्हें सुनने के पश्चात बिना प्रभावित हुए वापस पहले जैसे कार्य पर नहीं जा सकते थे। आप कुछ करने, किसी कार्य में लगने के लिए विवश हो गए। आपको आगे बढ़ना था, आपको जाकर इस बात का समाचार फैलाना ही था।"

   प्रभु यीशु के संपर्क में आने वाले अनेकों लोगों के साथ भी यही होता है; एक बार प्रभु यीशु को सुन लेने के बाद, वे उसके विषय में तटस्थ नहीं रह पाते, वे कुछ निर्णय लेने और कार्य करने के लिए विवश अनुभव करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 7:25-46 में प्रभु यीशु के प्रति दो भिन्न प्रतिक्रियाएं दिखाई गई हैं। जबकि उसकी बातें सुनकर "बहुत से लोगों ने उस पर विश्वास किया" (पद 31), उस समय के धर्म के अगुवों ने उसे शान्त कर देने के लिए प्रभु को पकड़ने के लिए सिपाहियों को भेजा (पद 32)। जब प्रभु यीशु लोगों से कह रहे थे, "...यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (पद 37-38) तब संभवतः वे सिपाही वहाँ थे और प्रभु की बात सुन रहे थे, और वे सिपाही प्रभु यीशु को गिरफ्तार किए बिना ही लौट गए। जब उन सिपाहियों से पूछा गया कि वे प्रभु यीशु को बन्दी बना कर क्यों नहीं लाए (पद 45), तो उनका उत्तर था "किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें नहीं कीं" (पद 46)।

   प्रभु यीशु के वचन हमें विवश करते हैं कि हम उसके बारे में अपने जीवनों में कोई निर्णय लें, अपने सामान्य कार्यों से ऊपर उठकर उसके लिए कुछ करें, आगे बढ़ें और उसके सुसमाचार को औरों तक पहुँचाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान मेरे पापों से छुटकारे का 
और उसके प्रति मेरे समर्पण एवं आज्ञाकारिता का कारण है।

शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं। और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है। - यूहन्ना 6:68-69

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:31-46
John 7:31 और भीड़ में से बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया, और कहने लगे, कि मसीह जब आएगा, तो क्या इस से अधिक आश्चर्यकर्म दिखाएगा जो इस ने दिखाए? 
John 7:32 फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में ये बातें चुपके चुपके करते सुना; और महायाजकों और फरीसियों ने उसके पकड़ने को सिपाही भेजे। 
John 7:33 इस पर यीशु ने कहा, मैं थोड़ी देर तक और तुम्हारे साथ हूं; तब अपने भेजने वाले के पास चला जाऊंगा। 
John 7:34 तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु नहीं पाओगे और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते। 
John 7:35 यहूदियों ने आपस में कहा, यह कहां जाएगा, कि हम इसे न पाएंगे: क्या वह उन के पास जाएगा, जो यूनानियों में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं, और यूनानियों को भी उपदेश देगा? 
John 7:36 यह क्या बात है जो उसने कही, कि तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु न पाओगे: और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते? 
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था। 
John 7:40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है। 
John 7:41 औरों ने कहा; यह मसीह है, परन्तु किसी ने कहा; क्यों? क्‍या मसीह गलील से आएगा? 
John 7:42 क्या पवित्र शास्त्र में यह नहीं आया, कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गांव से आएगा जहां दाऊद रहता था? 
John 7:43 सो उसके कारण लोगों में फूट पड़ी। 
John 7:44 उन में से कितने उसे पकड़ना चाहते थे, परन्तु किसी ने उस पर हाथ न डाला।
John 7:45 तब सिपाही महायाजकों और फरीसियों के पास आए, और उन्होंने उन से कहा, तुम उसे क्यों नहीं लाए? 
John 7:46 सिपाहियों ने उत्तर दिया, कि किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें नहीं कीं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11


रविवार, 15 जनवरी 2017

विश्राम-स्थल



   न्यू-यॉर्क में भूमिगत रेल में हुए एक साधारण से भलाई के कार्य का समाचार विश्व-भर में फैल गया और सराहा गया। एक जवान पुरुष, अपने साथ बैठे एक वृद्ध यात्री के कंधे पर सिर रखकर सो गया। जब किसी ने उसे उठाने का प्रयास करना चाहा तो उस वृद्ध ने मना करते हुए कहा, "उसका दिन बड़ा थकाने वाला रहा होगा, उसे सोने दो; हम सबने यह अनुभव किया है" और लगभग एक घंटे तक उस वृद्ध यात्री ने उस थके हुए जवान को अपने कंधे पर सिर रखकर सोते रहने दिया जब तक कि उसके उतरने का स्थान नहीं आ गया, और तब उसने बड़े धीरे से उस जवान के सिर को अपने कंधे पर से हटाया। इस दौरान एक अन्य यात्री ने इसकी फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी, और तुरंत ही वह सब जगह फैल गई, सराही गई।

   उस वृद्ध की वह भलाई हम सबके अन्दर की इच्छा को दर्शाती है - परमेश्वर के हृदय को प्रतिबिंबित करने वाली दया का अनुभव प्राप्त होना। इस दया को हम प्रभु यीशु मसीह में सजीव देखते हैं; एक बार जब प्रभु के चेलों ने छोटे बच्चों से होने वाले शोर और परेशानी से उन्हें बचाने के लिए बच्चों को प्रभु के पास आने से रोकने का प्रयास किया तो प्रभु ने चेलों से कहा कि वे बच्चों को उनके पास आने दें; प्रभु ने बच्चों को गोद में लिया, उन्हें आशीष दी (मरकुस 10:16), और साथ ही उन बच्चों में होकर हम सबके लिए यह शिक्षा भी रखी कि हम व्यसकों में भी, उन बच्चों के समान ही, प्रभु के प्रति प्रेम और विश्वास होना चाहिए (पद 13-16)।

   प्रभु यीशु हमें आश्वस्त करता है कि उसमें हम सभी सुरक्षित हैं; हम चाहे जागते हों या सो रहे हों, हम उस का सहारा ले सकते हैं, उस पर अपने जीवनों को टिका सकते हैं; जब हम जीवन की परिस्थितियों से थकित होते हैं, तो वह हमारे लिए सर्वोत्तम विश्राम-स्थल होता है। - मार्ट डीहॉन

परमेश्वर से बढ़कर सुरक्षित विश्राम-स्थल कोई अन्य नहीं है।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 10:13-16
Mark 10:13 फिर लोग बालकों को उसके पास लाने लगे, कि वह उन पर हाथ रखे, पर चेलों ने उन को डांटा। 
Mark 10:14 यीशु ने यह देख क्रुध हो कर उन से कहा, बालकों को मेरे पास आने दो और उन्हें मना न करो, क्योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है। 
Mark 10:15 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो कोई परमेश्वर के राज्य को बालक की नाईं ग्रहण न करे, वह उस में कभी प्रवेश करने न पाएगा। 
Mark 10:16 और उसने उन्हें गोद में लिया, और उन पर हाथ रखकर उन्हें आशीष दी।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42


शनिवार, 14 जनवरी 2017

योग्य तथा लाभदायक


   हमारे 9 वर्षीय पुत्र रॉबर्ट ने अपनी पेन्सिल फेंकते हुए निराशा के साथ कहा, "मैं यह नहीं कर सकता; यह बहुत कठिन है!" रॉबर्ट को डिस्लेक्सिया है, जिसके कारण अक्षरों का ज्ञान, अर्थात उन्हें पढ़ना, लिखना और समझना बहुत कठिन हो जाता है; और रॉबर्ट प्रयास करते-करते निराश हो चुका था। उसकी इस निराशा एवं परेशानी का एक समाधान निकाला गया, परन्तु वह कठिन था; उसके साथ हमें भी प्रतिदिन संध्या को, बिना किसी भी अपवाद के, 20 मिनिट तक पढ़ना और अक्षरों की वर्तनी का अभ्यास करना होगा। कभी-कभी हमारा मन भी यह करने को कदापि तैयार नहीं होता था, और कभी उसकी धीमी प्रगति के कारण हमें भी निराशा होती थी। परन्तु हम रॉबर्ट को उसकी शारीरिक आयु के अनुसार पढ़ने-लिखने वाला बनाने के लिए दृढ़-संकल्प थे, इसलिए हमारे प्रयास ज़ारी रहे।

   हमारे इन प्रयासों के 2  1/2 वर्ष के पश्चात, सारे संघर्ष और आँसु योग्य और लाभप्रद लगने लगे - रॉबर्ट ने पढ़ना, लिखना और वर्तनी, तथा हमने धैर्य रख कर प्रयास करते रहना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र - प्रेरित पौलुस को परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए नियुक्त किया था, उन लोगों के बीच में जिन्होंने कभी यह नहीं सुना था; और ऐसा करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों में पौलुस को हर प्रकार की कठिनाई एवं परेशानी सहनी पड़ी। ऐसा करते हुए उसे सताया गया, मारा-पीटा गया, बन्दी बनाया गया, गलत समझा गया और उसे मृत्यु के जोखिम भी उठाने पड़े (2 कुरिन्थियों 11:23-27)। लेकिन सुसमाचार सुनने तथा उसपर विश्वास करने और मानने से लोगों के जीवनों में आने वाले परिवर्तन तथा आनन्द को देखना उस के लिए उन सभी विपरीत परिस्थितियों को योग्य बना देता था।

   यदि आज आपको लगता है कि परमेश्वर ने आपको जिस कार्य के लिए बुलाया है वह बहुत कठिन है, तो स्मरण रखिए कि इस कठिन और असंभव प्रतीत होने वाली यात्रा में अद्भुत आनन्द और बहुमूल्य आत्मिक पाठ छुपे हुए हैं, जो आपको अभी चाहे ना दिखाई पड़ें, परन्तु जैसे जैसे आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, परमेश्वर उन्हें आपको दिखाता और देता जाएगा; और वह आनन्द तथा संबंधित पाठ इस सब को योग्य तथा लाभदायक बना देंगे। - मेरियन स्ट्राउड


केवल लक्ष्य ही नहीं, वरन उसका मार्ग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:6-8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-33
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाईं; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जोखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-प्यास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। 
2 Corinthians 11:32 दमिश्क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। 
2 Corinthians 11:33 और मैं टोकरे में खिड़की से हो कर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

विश्राम


   मैं नहीं जानता कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार आसप किस निराशाजनक स्थिति में आ गया था जब उसने भजन 77 लिखा; लेकिन मैंने वैसे ही विलाप सुने भी हैं और करे भी हैं। मेरी युवा पुत्री की आकस्मिक मृत्यु को लगभग बारह वर्ष हुए हैं, इस दौरान अनेकों ऐसे लोगों ने जिन्होंने किसी प्रीय जन के जाने के दुःख को अनुभव किया है, मेरे साथ अपने दुःख भरे अनुभवों को बाँटा है। उन लोगों के विलाप में भी, आसप के विलाप के समान ही:
परमेश्वर की दोहाई देना (पद 1); आकाश की ओर खाली हाथों को फैलाना (पद 2); हताश कर देने वाली परिस्थितियों के कारण परमेश्वर के विषय परेशान करने वाले विचारों का सामना करना (पद 3); वर्णन से बाहर परेशानी उठाना (पद 4); त्याग दिए जाने, या अकेले छोड़ दिए जाने की भावना से आतंकित होना (पद 7); की गई प्रतिज्ञाओं को ना निभाने, तथा करुणा, दया, अनुकंपा आदि का अभाव होने के भय (पद 8) सम्मिलित थे।

   लेकिन आसप के लिए पद 10 से एक परिवर्तन आता है, जब वह परमेश्वर के महान कार्यों को स्मरण करना आरंभ करता है। उसके विचार परमेश्वर के प्रेम की ओर मुड़ते हैं; जो परमेश्वर ने किया है उनकी यादों की ओर जाते हैं। प्राचीन समय में परमेश्वर के द्वारा किए गए अद्भुत कार्यों, उसकी सदा बनी रहने वाली विश्वासयोग्यता, दया और करुणा की ओर जाते हैं। वह परमेश्वर की सृष्टि और सृष्टि में विदित उसकी महानता, उसकी सामर्थ पर और उसके द्वारा हमारे छुटकारे के कार्य पर विचार केंद्रित करता है; और इन सब बातों के द्वारा उसका दृष्टिकोण परिवर्तित हो जाता है।

   इस जीवन में हताशा वास्तविक है, और उस से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सरलता से नहीं आते। लेकिन, जब हम परमेश्वर की महिमा, वैभव और गौरव, सामर्थ तथा महान एवं वर्णन से बाहर प्रेम पर विचार करते हैं, तो अभिभूत कर देने वाले उस अन्धकार में भी जीवन की ज्योति स्पष्ट चमकती हुई दिखाई देती है, हताशा बैठ जाती है। अपने कठिन समय में, आसप के समान ही, हमें भी परमेश्वर के गुणों और कार्यों पर मनन करना चाहिए, विशेषकर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने से मिलने वाले सेंत-मेंत उद्धार पर; और यह हमें पुनः उसके प्रेम और संगति में विश्राम प्रदान कर देगा। - डेव ब्रैनन

बीते समय में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता एवं सहायता को स्मरण करने से 
हम आज की परिस्थितियों में विश्राम पा सकते हैं।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। - भजन 73:24

बाइबल पाठ: भजन 77:1-15
Psalms 77:1 मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा। 
Psalms 77:2 संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं। 
Psalms 77:3 मैं परमेश्वर का स्मरण कर कर के करहाता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला) 
Psalms 77:4 तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।
Psalms 77:5 मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है। 
Psalms 77:6 मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं: 
Psalms 77:7 क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा? 
Psalms 77:8 क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है? 
Psalms 77:9 क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध कर के अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला) 
Psalms 77:10 मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।
Psalms 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा। 
Psalms 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा। 
Psalms 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है? 
Psalms 77:14 अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है। 
Psalms 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है। (सेला)

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38