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गुरुवार, 29 जून 2017

अनिच्छुक और प्रतिरोधी


   बहुत वर्ष पहले, जल में सुरक्षित रहने के पाठ सीखते समय हमें सिखाया गया कि किसी डूबते हुए व्यक्ति को, जो बचाए जाने का प्रतिरोध कर रहा है, कैसे बचाना है। हमारे प्रशिक्षक ने हमें बताया, "उस व्यक्ति के पीछे से उसके निकट आएं, और अपना एक हाथ उसकी छाती और छटपटाती हुई बाहों पर लपेटकर, सुरक्षित स्थान की ओर तैरना आरंभ कर दें।" जब हम डर के मारे घबराए हुए होते हैं तो ऐसे में हमारी सोचने और सही निर्णय करने की क्षमता अवरुद्ध हो जाती है; तब हमें उस परिस्थिति से निकालने के लिए कुछ हद तक विवश करना पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम एक घटना पढ़ते हैं, जब दो स्वर्गदूत लूत और उसके परिवार को सदोम तथा अमोरा के विनाश से बचाने के लिए परमेश्वर की ओर से आए (उतपत्ति 19:12-13) तो उन्हें लूत के परिवार के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। लूत के दामादों ने उनकी इस चेतावनी को ठट्ठों में उड़ा दिया (पद 14)। जब उन स्वर्गदूतों ने लूत से कहा कि वे लोग विलंब न करें और उस स्थान से जल्दी से निकल जाएं, तो उसने संकोच किया (पद 15)। तब, "...उन पुरूषों ने उसका और उसकी पत्नी, और दोनों बेटियों का हाथ पकड़ लिया; क्योंकि यहोवा की दया उस पर थी: और उसको निकाल कर नगर के बाहर कर दिया" (पद 16)।

   जब हम मसीही विश्वास की अपनी यात्रा पर विचार करते हैं, तो हम देखने पाते हैं कि परमेश्वर अनेकों बार उसके प्रति हमारे प्रतिरोध और हिचकिचाहट के बावजूद, कैसे हमेशा हमारा विश्वासयोग्य सहायक बना रहा है। जब हम ऐसे लोगों को देखें जो आत्मिक हताशा और अनिश्चितता में होकर भयभीत हैं, परिस्थिति से निकलने के लिए इधर-उधर हाथ-पाँव मार रहे हैं, तो हम परमेश्वर की बुद्धिमता द्वारा उन्हें प्रभु परमेश्वर के प्रेम के बारे में बता और समझा सकें - और यही प्रत्येक उस व्यक्ति के साथ भी कर सकें, जो प्रभु परमेश्वर के द्वारा बचाए जाने के लिए अनिच्छुक है, उसका प्रतिरोध कर रहा है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की दया हमारे प्रतिरोध पर जयवंत रहती है।

यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। - भजन 103:8-10

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 19:12-25
Genesis 19:12 फिर उन पाहुनों ने लूत से पूछा, यहां तेरे और कौन कौन हैं? दामाद, बेटे, बेटियां, वा नगर में तेरा जो कोई हो, उन सभों को ले कर इस स्थान से निकल जा। 
Genesis 19:13 क्योंकि हम यह स्थान नाश करने पर हैं, इसलिये कि उसकी चिल्लाहट यहोवा के सम्मुख बढ़ गई है; और यहोवा ने हमें इसका सत्यनाश करने के लिये भेज दिया है। 
Genesis 19:14 तब लूत ने निकल कर अपने दामादों को, जिनके साथ उसकी बेटियों की सगाई हो गई थी, समझा के कहा, उठो, इस स्थान से निकल चलो: क्योंकि यहोवा इस नगर को नाश किया चाहता है। पर वह अपने दामादों की दृष्टि में ठट्ठा करने हारा सा जान पड़ा। 
Genesis 19:15 जब पौ फटने लगी, तब दूतों ने लूत से फुर्ती कराई और कहा, कि उठ, अपनी पत्नी और दोनो बेटियों को जो यहां हैं ले जा: नहीं तो तू भी इस नगर के अधर्म में भस्म हो जाएगा। 
Genesis 19:16 पर वह विलम्ब करता रहा, इस से उन पुरूषों ने उसका और उसकी पत्नी, और दोनों बेटियों का हाथ पकड़ लिया; क्योंकि यहोवा की दया उस पर थी: और उसको निकाल कर नगर के बाहर कर दिया। 
Genesis 19:17 और ऐसा हुआ कि जब उन्होंने उन को बाहर निकाला, तब उसने कहा अपना प्राण ले कर भाग जा; पीछे की और न ताकना, और तराई भर में न ठहरना; उस पहाड़ पर भाग जाना, नहीं तो तू भी भस्म हो जाएगा। 
Genesis 19:18 लूत ने उन से कहा, हे प्रभु, ऐसा न कर: 
Genesis 19:19 देख, तेरे दास पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि हुई है, और तू ने इस में बड़ी कृपा दिखाई, कि मेरे प्राण को बचाया है; पर मैं पहाड़ पर भाग नहीं सकता, कहीं ऐसा न हो, कि कोई विपत्ति मुझ पर आ पड़े, और मैं मर जाऊं: 
Genesis 19:20 देख, वह नगर ऐसा निकट है कि मैं वहां भाग सकता हूं, और वह छोटा भी है: मुझे वहीं भाग जाने दे, क्या वह छोटा नहीं है? और मेरा प्राण बच जाएगा। 
Genesis 19:21 उसने उस से कहा, देख, मैं ने इस विषय में भी तेरी बिनती अंगीकार की है, कि जिस नगर की चर्चा तू ने की है, उसको मैं नाश न करूंगा। 
Genesis 19:22 फुर्ती से वहां भाग जा; क्योंकि जब तक तू वहां न पहुचे तब तक मैं कुछ न कर सकूंगा। इसी कारण उस नगर का नाम सोअर पड़ा। 
Genesis 19:23 लूत के सोअर के निकट पहुंचते ही सूर्य पृथ्वी पर उदय हुआ। 
Genesis 19:24 तब यहोवा ने अपनी ओर से सदोम और अमोरा पर आकाश से गन्धक और आग बरसाई; 
Genesis 19:25 और उन नगरों को और सम्पूर्ण तराई को, और नगरों को और उस सम्पूर्ण तराई को, और नगरों के सब निवासियों, भूमि की सारी उपज समेत नाश कर दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


शनिवार, 14 जनवरी 2017

योग्य तथा लाभदायक


   हमारे 9 वर्षीय पुत्र रॉबर्ट ने अपनी पेन्सिल फेंकते हुए निराशा के साथ कहा, "मैं यह नहीं कर सकता; यह बहुत कठिन है!" रॉबर्ट को डिस्लेक्सिया है, जिसके कारण अक्षरों का ज्ञान, अर्थात उन्हें पढ़ना, लिखना और समझना बहुत कठिन हो जाता है; और रॉबर्ट प्रयास करते-करते निराश हो चुका था। उसकी इस निराशा एवं परेशानी का एक समाधान निकाला गया, परन्तु वह कठिन था; उसके साथ हमें भी प्रतिदिन संध्या को, बिना किसी भी अपवाद के, 20 मिनिट तक पढ़ना और अक्षरों की वर्तनी का अभ्यास करना होगा। कभी-कभी हमारा मन भी यह करने को कदापि तैयार नहीं होता था, और कभी उसकी धीमी प्रगति के कारण हमें भी निराशा होती थी। परन्तु हम रॉबर्ट को उसकी शारीरिक आयु के अनुसार पढ़ने-लिखने वाला बनाने के लिए दृढ़-संकल्प थे, इसलिए हमारे प्रयास ज़ारी रहे।

   हमारे इन प्रयासों के 2  1/2 वर्ष के पश्चात, सारे संघर्ष और आँसु योग्य और लाभप्रद लगने लगे - रॉबर्ट ने पढ़ना, लिखना और वर्तनी, तथा हमने धैर्य रख कर प्रयास करते रहना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र - प्रेरित पौलुस को परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए नियुक्त किया था, उन लोगों के बीच में जिन्होंने कभी यह नहीं सुना था; और ऐसा करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों में पौलुस को हर प्रकार की कठिनाई एवं परेशानी सहनी पड़ी। ऐसा करते हुए उसे सताया गया, मारा-पीटा गया, बन्दी बनाया गया, गलत समझा गया और उसे मृत्यु के जोखिम भी उठाने पड़े (2 कुरिन्थियों 11:23-27)। लेकिन सुसमाचार सुनने तथा उसपर विश्वास करने और मानने से लोगों के जीवनों में आने वाले परिवर्तन तथा आनन्द को देखना उस के लिए उन सभी विपरीत परिस्थितियों को योग्य बना देता था।

   यदि आज आपको लगता है कि परमेश्वर ने आपको जिस कार्य के लिए बुलाया है वह बहुत कठिन है, तो स्मरण रखिए कि इस कठिन और असंभव प्रतीत होने वाली यात्रा में अद्भुत आनन्द और बहुमूल्य आत्मिक पाठ छुपे हुए हैं, जो आपको अभी चाहे ना दिखाई पड़ें, परन्तु जैसे जैसे आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, परमेश्वर उन्हें आपको दिखाता और देता जाएगा; और वह आनन्द तथा संबंधित पाठ इस सब को योग्य तथा लाभदायक बना देंगे। - मेरियन स्ट्राउड


केवल लक्ष्य ही नहीं, वरन उसका मार्ग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:6-8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-33
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाईं; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जोखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-प्यास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। 
2 Corinthians 11:32 दमिश्क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। 
2 Corinthians 11:33 और मैं टोकरे में खिड़की से हो कर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

विश्राम


   मैं नहीं जानता कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार आसप किस निराशाजनक स्थिति में आ गया था जब उसने भजन 77 लिखा; लेकिन मैंने वैसे ही विलाप सुने भी हैं और करे भी हैं। मेरी युवा पुत्री की आकस्मिक मृत्यु को लगभग बारह वर्ष हुए हैं, इस दौरान अनेकों ऐसे लोगों ने जिन्होंने किसी प्रीय जन के जाने के दुःख को अनुभव किया है, मेरे साथ अपने दुःख भरे अनुभवों को बाँटा है। उन लोगों के विलाप में भी, आसप के विलाप के समान ही:
परमेश्वर की दोहाई देना (पद 1); आकाश की ओर खाली हाथों को फैलाना (पद 2); हताश कर देने वाली परिस्थितियों के कारण परमेश्वर के विषय परेशान करने वाले विचारों का सामना करना (पद 3); वर्णन से बाहर परेशानी उठाना (पद 4); त्याग दिए जाने, या अकेले छोड़ दिए जाने की भावना से आतंकित होना (पद 7); की गई प्रतिज्ञाओं को ना निभाने, तथा करुणा, दया, अनुकंपा आदि का अभाव होने के भय (पद 8) सम्मिलित थे।

   लेकिन आसप के लिए पद 10 से एक परिवर्तन आता है, जब वह परमेश्वर के महान कार्यों को स्मरण करना आरंभ करता है। उसके विचार परमेश्वर के प्रेम की ओर मुड़ते हैं; जो परमेश्वर ने किया है उनकी यादों की ओर जाते हैं। प्राचीन समय में परमेश्वर के द्वारा किए गए अद्भुत कार्यों, उसकी सदा बनी रहने वाली विश्वासयोग्यता, दया और करुणा की ओर जाते हैं। वह परमेश्वर की सृष्टि और सृष्टि में विदित उसकी महानता, उसकी सामर्थ पर और उसके द्वारा हमारे छुटकारे के कार्य पर विचार केंद्रित करता है; और इन सब बातों के द्वारा उसका दृष्टिकोण परिवर्तित हो जाता है।

   इस जीवन में हताशा वास्तविक है, और उस से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सरलता से नहीं आते। लेकिन, जब हम परमेश्वर की महिमा, वैभव और गौरव, सामर्थ तथा महान एवं वर्णन से बाहर प्रेम पर विचार करते हैं, तो अभिभूत कर देने वाले उस अन्धकार में भी जीवन की ज्योति स्पष्ट चमकती हुई दिखाई देती है, हताशा बैठ जाती है। अपने कठिन समय में, आसप के समान ही, हमें भी परमेश्वर के गुणों और कार्यों पर मनन करना चाहिए, विशेषकर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने से मिलने वाले सेंत-मेंत उद्धार पर; और यह हमें पुनः उसके प्रेम और संगति में विश्राम प्रदान कर देगा। - डेव ब्रैनन

बीते समय में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता एवं सहायता को स्मरण करने से 
हम आज की परिस्थितियों में विश्राम पा सकते हैं।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। - भजन 73:24

बाइबल पाठ: भजन 77:1-15
Psalms 77:1 मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा। 
Psalms 77:2 संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं। 
Psalms 77:3 मैं परमेश्वर का स्मरण कर कर के करहाता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला) 
Psalms 77:4 तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।
Psalms 77:5 मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है। 
Psalms 77:6 मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं: 
Psalms 77:7 क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा? 
Psalms 77:8 क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है? 
Psalms 77:9 क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध कर के अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला) 
Psalms 77:10 मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।
Psalms 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा। 
Psalms 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा। 
Psalms 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है? 
Psalms 77:14 अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है। 
Psalms 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है। (सेला)

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38


सोमवार, 14 नवंबर 2016

आशा


   जब अमेरिका के लोक गायक जॉर्ज जोन्स का 81 वर्ष की आयु में निधन हुआ, तो उसके प्रशंसकों ने उसकी अनोखी आवाज़, उसके कठिन जीवन और व्यक्तिगत संघर्षों को स्मरण किया। उसके अनेकों गीत उसकी अपनी उत्कंठाओं और निराशाओं को प्रतिबिंबित करते थे, उसके गाने की शैली ने लोगों को गहराई से छूआ था। शिकागो ट्रिब्यून नामक समाचार-पत्र के संगीत आलोचक ग्रेग कोट ने लिखा, "उसकी आवाज़ टूटे हुए हृदय को व्यक्त करने के लिए बनी थी।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत की पुस्तक यहूदा राष्ट्र द्वारा ढिटाई में परमेश्वर का अनुसरण करने से इंकार करने के कारण यिर्मयाह की वेदना को दिखाती है। यिर्मयाह को अकसर "विलाप करने वाला भविष्यद्वक्ता" कहा जाता है; वह यरूशालेम के विनाश का साक्षी हुआ और उसने अपने लोगों को बन्धुआई में जाते हुए देखा। दुःख से अभिभूत होकर वह यरूशालेम की सड़कों पर घूमता और विलाप करता हुआ फिरता रहा (विलापगीत 1:1-5)।

   लेकिन फिर भी, गहन अन्धकार के अपने इस समय में, यिर्मयाह ने कहा, "परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (विलापगीत 3:21-23)।

   हम चाहे अपने, या किसी और के निर्णयों एवं चुनावों के कारण दुःख उठाएं, ऐसी परिस्थितियों में हताशा से अभिभूत हो जाने का खतरा हमारे सामने बना रहता है। जब लगता है कि सब कुछ खो गया है, हम परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को थाम कर कह सकते हैं: "मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा" (विलापगीत 3:24)।

   प्रत्येक परिस्थिति में परमेश्वर ही कभी ना टलने या बदलने वाली हमारी एकमात्र विश्वासयोग्य आशा है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का लंगर सबसे तीव्र तूफानों में भी हमें स्थिर रखता है।

परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें। - भजन 46:1-3

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:1-6, 15-25
Lamentations 3:1 उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगने वाला पुरुष मैं ही हूं; 
Lamentations 3:2 वह मुझे ले जा कर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है; 
Lamentations 3:3 उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरुद्ध उठता रहता है। 
Lamentations 3:4 उसने मेरा मांस और चमड़ा गला दिया है, और मेरी हड्डियों को तोड़ दिया है; 
Lamentations 3:5 उसने मुझे रोकने के लिये किला बनाया, और मुझ को कठिन दु:ख और श्रम से घेरा है; 
Lamentations 3:6 उसने मुझे बहुत दिन के मरे हुए लोगों के समान अन्धेरे स्थानों में बसा दिया है। 
Lamentations 3:15 उसने मुझे कठिन दु:ख से भर दिया, और नागदौना पिलाकर तृप्त किया है। 
Lamentations 3:16 उसने मेरे दांतों को कंकरी से तोड़ डाला, और मुझे राख से ढांप दिया है; 
Lamentations 3:17 और मुझ को मन से उतार कर कुशल से रहित किया है; मैं कल्याण भूल गया हूँ; 
Lamentations 3:18 इसलिऐ मैं ने कहा, मेरा बल नाश हुआ, और मेरी आश जो यहोवा पर थी, वह टूट गई है। 
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39