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बुधवार, 6 जून 2018

महिमा



   रोमी साम्राज्य की महिमा ने प्रभु यीशु के जन्म के लिए एक व्यापक पृष्ठभूमि उपलब्ध करवाई। रोम के पहले सम्राट कैसर अगुस्तुस ने सन 27 ईसा पूर्व में 200 वर्ष पुराने गृह-युद्ध को समाप्त किया और क्षतिग्रस्त इलाकों में स्मारक, मंदिर, रंगशालाएं और सरकारी कार्य के लिए भवन बनवाना आरंभ किया। रोमी इतिहासकार प्लिनी द एल्डर के अनुसार “सँसार भर में किसी ने भी कहीं भी इतनी सुन्दर इमारतें नहीं देखी होंगी।”

   परन्तु अपनी सुंदरता के बावजूद, उस ‘चिरस्थाई’ नगर और साम्राज्य के इतिहास में क्रूरता भरी हुई थी जो रोम के पतन तक जारी रही। हज़ारों दासों, परदेशियों, क्रांतिकारियों, और सेना के भगोड़े सिपाहियों को सड़क के किनारे खम्बे गाड़ कर क्रूस पर चढ़ा दिया गया, जिससे सबके लिए चेतावनी रहे कि कोई रोमी साम्राज्य की सामर्थ्य को चुनौती नहीं दे सकता है।

   यह कैसी विडंबना है कि प्रभु यीशु का क्रूस पर चढ़ाया जाना एक ऐसी महिमा के प्रकट होने का कारण बन गया जिसके सामने रोम की महिमा और गौरव एक ढलती शाम की क्षणिक सुन्दरता से अधिक नहीं थी। किसने यह सोचा होगा कि क्रूस के सार्वजनिक श्राप और पीड़ा में हम परमेश्वर के प्रेम, उसकी उपस्थिति, और उसके अनन्त स्वर्गीय साम्राज्य की महिमा को देखने पाएँगे।

   किसने यह पूर्वानुमान लगाया होगा कि सारा स्वर्ग और पृथ्वी एक दिन साथ मिलकर गाएँगे, “वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है” (प्रकाशितवाक्य 5:12)। - मार्ट डीहॉन


जो मेमना मारा गया था, वही आज जीवता प्रभु है।

...उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 17:1-5
John 17:1 यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आंखे आकाश की ओर उठा कर कहा, हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे।
John 17:2 क्योंकि तू ने उसको सब प्राणियों पर अधिकार दिया, कि जिन्हें तू ने उसको दिया है, उन सब को वह अनन्त जीवन दे।
John 17:3 और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने।
John 17:4 जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है।
John 17:5 और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहिले, मेरी तेरे साथ थी।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15



सोमवार, 4 जून 2018

उद्देश्य



   पश्चिमी टेक्सस में, एक गर्म दिन में, मेरी भांजी ने एक महिला को सड़क के किनारे खड़े हुए देखा, उसके हाथ में एक पटिया थी जिसपर कुछ लिखा हुआ था। मेरी भांजी ने गाड़ी निकट लाकर, चलती हुई गाड़ी में से देखना चाहा कि उस पटिया पर क्या लिखा हुआ था, यह समझते हुए कि वहाँ भोजन अथवा आर्थिक सहायता देने के लिए कुछ लिखा होगा। परन्तु उस पटिया पर लिखे शब्दों को पढ़कर मेरी भांजी चकित रह गई; उस पर लिखा था, “आपका एक उद्देश्य है।”

   परमेश्वर ने हम सब को एक उद्देश्य के साथ सृजा है। प्रमुखतः वह उद्देश्य है उसे महिमा देना, और ऐसा करने का एक तरीका है औरों की सहायता करना (1 पतरस 4:10-11)।

   छोटे बच्चों की माँ का उद्देश्य उनकी बहती हुई नाक साफ़ करना और उन्हें प्रभु यीशु के बारे में बताना हो सकता है। किसी उबाऊ कार्य में लगे हुए कर्मी के लिए यह उद्देश्य उस कार्य को भी पूरी निष्ठा के साथ यह मानते हुए करना कि वह मनुष्य के लिए नहीं वरन प्रभु के लिए (कुलुस्सियों 3:23-24) कार्य कर रहा है हो सकता है। किसी वृद्ध महिला के लिए, जिसकी अब दृष्टि बहुत क्षीण हो चुकी है, यह उद्देश्य अपने बच्चों तथा नाती-पोतों के लिए प्रार्थना करना और उन पर प्रभु के बारे में प्रभाव डालना हो सकता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 139 में लिखा है “तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे” (पद 16), तथा यह कि “मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं” (पद 14) जिससे अपने सृष्टिकर्ता को महिमा दे सकूँ।
   स्मरण रखें: आपका एक उद्देश्य है। - सिंडी हैस कैस्पर


चाहे सब कुछ निरर्थक भी लगे, 
परन्तु परमेश्वर के पास आपके जीवन के लिए उद्देश्य है।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए।
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14



रविवार, 3 जून 2018

प्रतिज्ञा



   वह एक अच्छा दिन था, धूप खिली हुई थी, और मैं पार्क में टहल रहा था, परन्तु मैं अपनी आत्मा में थका हुआ और निढाल था। कोई एक बात नहीं थी जो मुझे दबाए हुई थी – लगता था कि सब कुछ ही मुझे दबा रहा है। मैं वहाँ लगी एक बेंच पर बैठने के लिए रुका; और मेरा ध्यान उस बेंच पर लगी एक पटिया पर गया, जिस पर लिखा था “एक वफादार पति, पिता, भाई, और मित्र” की प्रेम भरी यादगार में। साथ ही उस पटिया पर परमेश्वर के वचन बाइबल में से एक पद भी लिखा हुआ था, “परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे” (यशायाह 40:31)।

   ये जाने-पहचाने शब्द मेरे लिए मानों प्रभु की ओर से व्यक्तिगत रीति से स्पर्ष के रूप में आए। थकान – चाहे शारीरिक हो, या भावनात्मक, या आत्मिक – हम सब पर आती है। यशायाह हमें स्मरण दिलाता है कि चाहे हम थकित हो जाएँ, प्रभु हमारा अनन्त परमेश्वर, समस्त पृथ्वी का रचियता, कभी नहीं थकता है (पद 28), और मैं यह कितनी सरलता से भूल गया कि “वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है” (पद 29)।

   आज आपकी दिनचर्या के लिए कैसा है? यदि परमेश्वर की आपके साथ बनी हुई उपस्थिति और आपको उससे मिलने वाली सामर्थ्य के बारे में, थकान ने भुला दिया है, तो क्यों न थोड़ा थम कर उसकी प्रतिज्ञा को स्मरण करें कि “परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे” (पद 31)। प्रभु की इस प्रतिज्ञा पर अभी, इसी समय मनन करें, उससे आश्वस्त हों। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जब जीवन के संघर्ष आपको थका दें, तब प्रभु परमेश्वर से सामर्थ्य प्राप्त करें।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह 41:10

बाइबल पाठ: यशायाह 40:27-31
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है।
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं;
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 19-20
  • यूहन्ना 13:21-38



शनिवार, 2 जून 2018

भरोसा


   जबसे उसने मुझे यह बताया थी कि वह माँ बनने वाली है, मैं अपनी सहेली के लिए बहुत प्रसन्न थी! हम दोनों ने साथ-साथ मिलकर बच्चे के जन्म होने तक दिनों की गिनती की थी। परन्तु जब प्रसव के समय बच्चे को दिमागी क्षति हुई तो मेरा हृदय टूट गया, और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे प्रार्थना करूँ। मैं बस इतना जानती थी कि मुझे किस से प्रार्थना करनी है – अपने पिता परमेश्वर से, क्योंकि जब हम उसे पुकारते हैं तब वह हमारी सुनता है।

   मैं जानती थी कि परमेश्वर आश्चर्यकर्म कर सकता है। उसने याईर की बेटी को मुर्दों में से जिलाया था (लूका 8:49-55) और ऐसा करते समय उसने उस लड़की के शरीर से उस रोग को भी चँगा किया था जिस के कारण उसकी मृत्यु हुई थी। इसलिए मैं ने प्रार्थना की कि वह मेरी सहेली के बच्चे को भी चंगाई प्रदान करे।

   परन्तु यदि परमेश्वर चंगाई न दे तो? मैं सोच में थी। चंगाई देने के लिए वह सक्षम तो है। क्या वह परवाह भी करता है? मुझे क्रूस पर प्रभु यीशु द्वारा उठाए गए दुःख और पीड़ा का स्मरण आया, और उसका स्पष्टीकरण कि “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा” (रोमियों 5:8)। फिर मुझे अय्यूब के प्रश्न स्मरण आए और कैसे उसने अपने आस-पास की सृष्टि में परमेश्वर की बुद्धिमता को देखना सीखा था (अय्यूब 38-39)।

   धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि परमेश्वर कैसे हमारे जीवनों की बारीकियों में हमें अपने निकट बुलाता है। परमेश्वर के अनुग्रह में, मैंने और मेरी सहेली ने साथ-साथ यह सीखा कि प्रभु को पुकारना और उस पर भरोसा रखना क्या होता है – चाहे परिणाम जो कुछ भी हो। - पो फैंग चिया


जब जीवन आपको नीचे धकेल दे, 
तब आप प्रार्थना करने की सर्वोत्तम स्थिति में होते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:14-16
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे।
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला।
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20


शुक्रवार, 1 जून 2018

सही समय



   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड के नियमों के अनुसार जीवन सीधा-सादा प्रतीत होता है – परमेश्वर के आज्ञाकारी बने रहो और आशीषें प्राप्त करो; उसके अनाज्ञाकारी बनो और मुसीबतों का सामने करने को तैयार रहो। यह संतुष्टि देने वाली आध्यात्मिकता हो सकती है; परन्तु क्या यह इतनी सरल है भी?

   बाइबल के एक पात्र राजा आसा की कहानी तो इसी नमूने के अनुसार दिखाई देती है। राजा आसा ने अपनी प्रजा को झूठे देवताओं से पृथक किया, और उसके राज्य में संपन्नता आई (2 इतिहास 15:1-19)। फिर अपने राज्य के बाद के समय में वह परमेश्वर की बजाए अपने आप पर निर्भर रहने लगा (16:2-7) और उसके शेष जीवन भर युद्ध और बीमारियाँ उसे घेरे रहीं (पद 12)।

   इस कहानी को देखकर एक सीधा सा निष्कर्ष निकाल लेना सरल है। परन्तु हनानी भविष्यद्वक्ता ने आसा को सचेत करते समय उससे कहा “जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है” परमेश्वर उन्हें सामर्थी करता है (16:9)। हमारे मनों को सामर्थी होने की भला क्या आवश्यकता है? क्योंकि सही कार्य करने के लिए साहस और धीरज की आवश्यकता होती है।

   इस बारे में बाइबल से कुछ लोगों के जीवनों के उदाहरणों को देखें: अय्यूब को सृष्टि की महानतम त्रासदी सहने में प्रमुख भूमिका निभानी पड़ी; उसका दोष? “वह खरा और सीधा था” (अय्यूब 1:8)। यूसुफ पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया गया और उसे वर्षों तक, परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए, कैदखाने को सहना पड़ा (उत्पत्ति 39:19-41:1)। यिर्मयाह को मारा-पीटा गया और काठ में ठोक दिया गया (यिर्मयाह 20:2)। उसका क्या दोष था? वह भविष्यद्वक्ता, परमेश्वर की ओर से बलवई लोगों को सच बताता था (26:15)।

            जीवन इतना सरल नहीं है, और परमेश्वर के मार्ग हमारे मार्गों से भिन्न हैं। सही निर्णय लेने और उस पर बने रहने के लिए कीमत चुकानी पड़ सकती है। परन्तु परमेश्वर की अनन्त योजना में, उसकी आशीषें सही समय पर आ जाती हैं। - टिम गुस्ताफासन


जो परमेश्वर पर निर्भर रहते हैं, परमेश्वर उनकी सहायता करता है।

क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है। - यशायाह 55:8-9

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 16:7-14
2 Chronicles 16:7 उस समय हनानी दर्शी यहूदा के राजा आसा के पास जा कर कहने लगा, तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन अराम के राजा ही पर भरोसा रखा है, इस कारण अराम के राजा की सेना तेरे हाथ से बच गई है।
2 Chronicles 16:8 क्या कूशियों और लूबियों की सेना बड़ी न थी, और क्या उस में बहुत ही रथ, और सवार न थे? तौभी तू ने यहोवा पर भरोसा रखा था, इस कारण उसने उन को तेरे हाथ में कर दिया।
2 Chronicles 16:9 देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा।
2 Chronicles 16:10 तब आसा दर्शी पर क्रोधित हुआ और उसे काठ में ठोंकवा दिया, क्योंकि वह उसकी ऐसी बात के कारण उस पर क्रोधित था। और उसी समय से आसा प्रजा के कुछ लोगों को पीसने भी लगा।
2 Chronicles 16:11 आदि से ले कर अन्त तक आसा के काम यहूदा और इस्राएल के राजाओं के वृत्तान्त में लिखे हैं।
2 Chronicles 16:12 अपने राज्य के उनतीसवें वर्ष में आसा को पांव का रोग हुआ, और वह रोग अत्यन्त बढ़ गया, तौभी उसने रोगी हो कर यहोवा की नहीं वैद्यों ही की शरण ली।
2 Chronicles 16:13 निदान आसा अपने राज्य के एकतालीसवें वर्ष में मर के अपने पुरखाओं के साथ सो गया।
2 Chronicles 16:14 तब उसको उसी की कब्र में जो उसने दाऊदपुर में खुदवा ली थी, मिट्टी दी गई; और वह सुगन्धद्रव्यों और गंधी के काम के भांति भांति के मसालों से भरे हुए एक बिछौने पर लिटा दिया गया, और बहुत सा सुगन्धद्रव्य उसके लिये जलाया गया।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 15-16
  • यूहन्ना 12:27-50



गुरुवार, 31 मई 2018

साहस और विश्वास



   चीनी दार्शनिक हैन फैजी ने जीवन के बारे कहा, “तथ्यों को जानना तो सरल है; उन तथ्यों के आधार पर कार्य करना कठिन होता है।”

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक स्थान पर हम पाते हैं कि एक धनी जवान व्यक्ति प्रभु यीशु के पास इस प्रश्न के साथ आया: “हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं?” (मरकुस 10:17)। वह मूसा द्वारा दी गई व्यवस्था को जानता था और उसका कहना था कि वह उस व्यवस्था का पालन लड़कपन से करता आया था। परन्तु प्रभु यीशु के उत्तर ने उस जवान को निराश कर दिया, क्योंकि प्रभु ने उससे कहा कि अपनी सारी संपत्ति बेचकर उस धन को कंगालों में वितृत कर दे और स्वयं प्रभु के पीछे हो ले (पद 21)। इन चंद शब्दों के द्वारा प्रभु यीशु ने उसके जीवन के उस तथ्य को उजागर कर दिया जिसे वह व्यक्ति स्वीकार करना नहीं चाहा रहा था – उसका अपनी दौलत पर भरोसा और उस दौलत से प्रेम, प्रभु पर किए गए भरोसे और प्रेम से कहीं अधिक था। प्रभु यीशु के पीछे चलने के लिए दौलत की सुरक्षा को त्यागना बहुत बड़ा जोखिम था, जिसे वह उठाना नहीं चाहता था, और वह उदास होकर खाली हाथ ही वापस चला गया (पद 22)।

   प्रभु क्या कहना चाह रहा था? प्रभु के अपने शिष्य चकित रह गए और पूछने लगे कि “फिर किसका उद्धार हो सकता है?” प्रभु का उत्तर था, “मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है” (पद 27)। प्रभु के पीछे चलने के लिए साहस और विश्वास की आवश्यकता होती है। इसके बिना उसे प्रसन्न कर पाना असंभव है: “और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है” (इब्रानियों 11:6)। - पो फैंग चिया


उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर
तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा। - प्रेरितों 16:31

कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। - रोमियों 10:9

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-27
Mark 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं?
Mark 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर।
Mark 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।
Mark 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं।
Mark 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।
Mark 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।
Mark 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!
Mark 10:24 चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालको, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!
Mark 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है!
Mark 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है?
Mark 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26



बुधवार, 30 मई 2018

प्रत्युत्तर


   मेरी सहेली, मिर्ना, यात्रा के लिए विदेश गई हुई थी, और आराधना सभा में सम्मिलित होने के लिए वहाँ के एक स्थानीय चर्च में गई। उसने ध्यान किया कि चर्च में प्रवेश करने से पहले लोग चर्च की ओर पीठ करके घुटने टेकते और प्रार्थना करते तब ही चर्च में प्रवेश करते थे। पता करने पर मेरी सहेली को ज्ञात हुआ कि पहले परमेश्वर के सामने अपने पापों का अंगीकार करके ही लोग आराधना के लिए चर्च में प्रवेश करते थे।

   दीनता और नम्रता का यह प्रतिरूप, परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद द्वारा भजन 51 में लिखी बात को स्मरण दिलाता है: “टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता” (पद 17)। इस भजन में दाऊद बतशीबा के साथ किए गए व्यभिचार के पाप के विषय अपने पश्चाताप और ग्लानि को व्यक्त कर रहा था। पाप के विषय सच्ची ग्लानि और दुःख मानने का अर्थ है, पाप को परमेश्वर के दृष्टिकोण से देखना – पूर्णतः गलत, उससे घृणा करना और उसमें बने रहने से इन्कार करना।

   जब हम अपने पाप के लिए वास्तव में पश्चातापी होते हैं, उसके कारण टूट कर परमेश्वर के सामने क्षमा याचना के साथ आ जाते हैं, तब परमेश्वर अपने बड़े प्रेम में होकर हमें क्षमा भी करता है और बहाल भी: “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9)। परमेश्वर पिता से मिली यह क्षमा हमें उसके सामने और अधिक खुले मन से जाने और अपने आप को व्यक्त करने की प्रेरणा देती है, और सच्ची आराधना का स्त्रोत बन जाती है। अपने पाप का अंगीकार, पश्चाताप, तथा परमेश्वर से क्षमा प्राप्त करने के पश्चात दाऊद का प्रत्युत्तर था: “हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा” (भजन 51:15)।

   परमेश्वर की पवित्रता तथा प्रेम के प्रति हमारी दीनता और नम्रता ही सही प्रत्युत्तर है; और उससे मिलने वाली क्षमा तथा बहाली के लिए मन से निकली आराधना सही प्रत्युत्तर है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आराधना मुक्त की गई आत्मा का गीत है।

क्योंकि परमेश्वर-भक्ति का शोक ऐसा पश्‍चाताप उत्पन्न करता है जिस का परिणाम उद्धार है और फिर उस से पछताना नहीं पड़ता: परन्तु संसारी शोक मृत्यु उत्पन्न करता है। - 2 कुरिन्थियों 7:10

बाइबल पाठ: भजन 51: 6-17
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
Psalms 51:14 हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा।
Psalms 51:15 हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।
Psalms 51:16 क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।
Psalms 51:17 टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।
                                                 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57