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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

प्रार्थना



      मैंने परमेश्वर का धन्यवाद किया कि अपनी माँ के ल्यूकीमिया (बल्ड कैंसर) के साथ संघर्ष और इलाज के समय मैं उनकी देखभाल के लिए उनके साथ हो सकी। जब दवाईयां लेने से सहायता कम और तकलीफ अधिक होने लगी तो माँ ने उन्हें लेना बन्द कर देने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, “मैं और तकलीफ नहीं उठाना चाहती हूँ; मैं बस अपने अंतिम दिन अपने परिवार के साथ आनन्दित रहना चाहती हूँ। परमेश्वर जानता है कि मैं अब घर जाने के लिए तैयार हूँ।”

      मैंने प्रार्थनाओं में हमारे प्रेमी स्वर्गीय पिता परमेश्वर से उनके लिए विनती की – कि वो उन्हें चंगाई प्रदान करे। परन्तु परमेश्वर यदि मेरी माँ की प्रार्थना के लिए ‘हाँ’ करता, तो उसे मेरी प्रार्थनाओं के लिए ‘नहीं’ कहना पड़ता। इसलिए रोते हुए मैंने परमेश्वर के सामने समर्पण कर दिया, कि मेरी नहीं वरन उसकी इच्छा पूरी हो। कुछ ही समय के बाद प्रभु यीशु ने मेरी माँ का दुख-तकलीफ से बाहर उनके अनन्त घर में स्वागत कर लिया।

      पाप में गिरे हुए इस सँसार में हम प्रभु यीशु के दोबारा आगमन तक दुखों का अनुभव करते रहेंगे (रोमियों 8:22-25)। हमारा पापी स्वभाव, हमारी सीमित दृष्टि, और पीड़ा का भय हमारी प्रार्थनाओं के स्वरूप को प्रभावित करता तथा बिगाड़ता रहेगा। परन्तु हम धन्यवादी हो सकते हैं कि परमेश्वर का आत्मा हमारी सहायता करता है और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना करने में हमारा मार्गदर्शन करता है (पद 27), हमें स्मरण करवाता है कि हमारी प्रत्येक परिस्थिति और अनुभव अन्ततः हमारे लिए भलाई ही को उत्पन्न करेगा (पद 28)।

      जब परमेश्वर के महान उद्देश्य में हम अपनी छोटे सी भूमिका को स्वीकार कर लेते हैं, तो हम मेरी माँ के शब्दों “परमेश्वर भला है और बस इतना काफी है। वह जो भी निर्णय करे, मुझे स्वीकार है, मैं शान्ति से हूँ” की पुष्टि करते हैं। परमेश्वर की भलाई में भरोसा रखते हुए, हम विश्वास रख सकते हैं कि हमारी प्रार्थनाओं का वह जो भी उत्तर देगा, वह उसकी इच्छा के अनुसार और महिमा के लिए होगा। - डिक्सन


परमेश्वर के उत्तर हमारी प्रार्थनाओं से अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण होते हैं।

संकट के समय मैं ने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली। - भजन 120:1

बाइबल पाठ: रोमियों 8:19-30
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी।
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 13-15
  • लूका 6:27-49



रविवार, 31 मार्च 2019

निमंत्रण



      हाल ही के एक सप्ताह में मुझे डाक में अनेकों निमंत्रण मिले, विभिन्न प्रकार के समारोहों के लिए। उनमें से जितने मुझे ‘सेवा-निवृत्ति’, ‘घर-ज़मीन खरीदने/बेचने’, ‘जीवन-बीमा’ आदि विषयों पर होने वाली चर्चाओं में बुलाने के लिए थे, उन्हें मैंने तुरंत अलग कर दिया, वे मुझे स्वीकारीय नहीं थे। किन्तु एक निमंत्रण मेरे एक लंबे समय के दिवंगत मित्र के सम्मान में आयोजित होने वाली सभा में आने के लिए था, जिसे मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। निमंत्रण + इच्छा = स्वीकृति!

      परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर की ओर से सभी के लिए एक महान निमंत्रण है, “ओहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो” (यशायाह 55:1)। यह परमेश्वर की ओर से भीतरी पोषण, गहरी आत्मिक तृप्ति, और अनन्त जीवन (पद 2-3) ले लेने का निमंत्रण है। इसी निमंत्रण को प्रभु यीशु के द्वारा बाइबल के अंतिम अध्याय में भी दोहराया गया है: “...जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले” (प्रकाशितवाक्य 22:17)।

      बहुधा हम सोचते हैं कि अनन्त जीवन का आरंभ हमारे शारीरिक जीवन के अन्त के बाद आरंभ होता है। वास्तविकता यह है कि अनन्त जीवन का आरंभ हमारे द्वारा प्रभु यीशु  को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु ग्रहण कर लेने के साथ ही आरंभ हो जाता है। प्रभु यीशु में अनन्त जीवन प्राप्त कर लेने का निमंत्रण परमेश्वर की ओर से सँसार के सभी लोगों को दिया गया सबसे महान निमंत्रण है; उसे स्वीकार अथवा अस्वीकार करना प्रत्येक व्यक्ति का अपना चुनाव है! निमंत्रण + इच्छा = स्वीकृति! – डेविड मैक्कैस्लैंड


जब हम उसके पीछे हो लेने के प्रभु यीशु के निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, 
तो हमारे समस्त जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल जाते हैं।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” – मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-7
Isaiah 55:1 ओहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isaiah 55:2 जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isaiah 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isaiah 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isaiah 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26



शनिवार, 30 मार्च 2019

जीवन और मृत्यु



      मुझे कभी नहीं भूलेगा कि मैं अपनी सहेली के भाई की मृत्यु के समय उसकी शैया के निकट बैठी थी। वह साधारण में असाधारण के आगमन का दृश्य था। हम तीन जन शान्त होकर बातचीत कर रहे थे जब हमें एहसास हुआ कि रिचर्ड खींच-खींच कर साँस लेने लगा है। हम उसके चारों ओर जमा हो गए, उसे देखते और उसके लिए प्रार्थना करते रहे। जब उसने अपनी अंतिम साँस ली, तो लगा मानो यह एक पवित्र पल है; एक अद्भुत व्यक्ति की जवानी में ही मृत्यु हो जाने के दुःख के समय परमेश्वर की उपस्थिति ने हमें घेर लिया था।

      परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि विश्वास के कई नायकों ने मृत्यु के समय परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को अनुभव किया था। उदाहरण के लिए, याकूब ने बता दिया कि शीघ्र ही वह “अपने लोगों से जा मिलने को है” (उत्पत्ति 49-29-33)। याकूब के एक पुत्र यूसुफ ने भी होने वाली मृत्यु के बारे में बताया; उसने अपने भाईयों से कहा, “मैं तो मरने पर हूँ” और उन्हें विश्वास में दृढ़ बने रहने के लिए निर्देश दिए। वह स्वयँ तो शान्त प्रतीत होता है, परन्तु उत्सुक्त भी है कि उसके भाई प्रभु पर भरोसा बनाए रखें (उत्पत्ति 50:24)।

      हम में से कोई नहीं जानता है कि कब और कैसे हम अपनी अंतिम साँस लेंगे, परन्तु हम परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं कि हम विश्वास बनाए रखें कि हमारी अंतिम साँस के समय वह हमारे साथ होगा। हम प्रभु यीशु मसीह द्वारा अपने अनुयायियों को दिए गए वायदे पर विश्वास रख सकते हैं कि हमारे स्वर्गीय पिता के घर में उसने हमारे लिए स्थान तैयार कर दिया है (यूहन्ना 14:2-3)। -एमी बाउचर पाई


हमारा प्रभु हमें कभी नहीं त्यागेगा, विशेषकर हमारी मृत्यु के समय।

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:1-3

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 50:22-26
Genesis 50:22 और यूसुफ अपने पिता के घराने समेत मिस्र में रहता रहा, और यूसुफ एक सौ दस वर्ष जीवित रहा।
Genesis 50:23 और यूसुफ एप्रैम के परपोतों तक देखने पाया: और मनश्शे के पोते, जो माकीर के पुत्र थे, वे उत्पन्न हो कर यूसुफ से गोद में लिये गए।
Genesis 50:24 और यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा मैं तो मरने पर हूं; परन्तु परमेश्वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा, और तुम्हें इस देश से निकाल कर उस देश में पहुंचा देगा, जिसके देने की उसने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाई थी।
Genesis 50:25 फिर यूसुफ ने इस्राएलियों से यह कहकर, कि परमेश्वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा, उन को इस विषय की शपथ खिलाई, कि हम तेरी हड्डियों को वहां से उस देश में ले जाएंगे।
Genesis 50:26 निदान यूसुफ एक सौ दस वर्ष का हो कर मर गया: और उसकी लोथ में सुगन्धद्रव्य भरे गए, और वह लोथ मिस्र में एक सन्दूक में रखी गई।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39



शुक्रवार, 29 मार्च 2019

परीक्षाएँ और कठिनाईयाँ



      पिछली शरद ऋतु में मैं कोलराडो में एक प्राकृतिक संग्रहालय (Natural History Museum) गई थी, वहाँ मुझे सफ़ेद पीपल (Aspen) वृक्ष के बारे में कुछ अनूठी बातें पता चलीं। पतले सफ़ेद तनों वाले इस वृक्ष का संपूर्ण झुरमुट एक ही बीज से उत्पन्न हो सकता है, जिनकी धरती के नीचे फ़ैली हुई सभी जड़ें आपस में जुड़ी हुई होती हैं। ये जड़ें धरती के अन्दर हज़ारों वर्षों तक बनी रह सकती हैं, चाहे उन से पेड़ न भी उत्पन्न हों। वे बस धरती के अन्दर ‘सोई’ हुई रहती हैं, जब तक कि छाया देने वाले जंगल में आग, बाढ़ या भू-स्खलन के द्वारा उनके ऊपर की भूमि साफ़ नहीं हो जाती है। किसी प्राकृतिक आपदा के द्वारा जंगल की सफाई हो जाने के बाद, सफ़ेद पीपल की जड़ें किसी प्रकार से उन पर चमकते हुए सूरज को पहचान लेती हैं और उन जड़ों से अंकुर निकल कर ऊपर उठते हैं और सफ़ेद पीपल के वृक्ष बन जाते हैं।

      सफ़ेद पीपल के इन वृक्षों के लिए नयी बढ़ोतरी किसी प्राकृतिक आपदा से हुए विनाश के द्वारा संभव हो जाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा कि मसीही विश्वास में हमारी बढ़ोतरी भी कठिनाईयों और परीक्षाओं द्वारा संभव होने पाती है। याकूब कहता है, “हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे” (याकूब 1:2-4)।

      परीक्षाओं में आनन्दित होना कठिन होता है, परन्तु हम इस तथ्य से आशावान हो सकते हैं कि परमेश्वर हमारी परिस्थितियों का उपयोग हमें परिपक्वता तक ले जाने के लिए करता है। उन सफ़ेद पीपल के वृक्षों के समान, हमारा विश्वास परीक्षाओं के उन समयों में बढ़ सकता है जब कठिनाईयाँ हमारे हृदय से जंगल को हटाकर परमेश्वर की ज्योति को हमें स्पर्श करवा देती हैं। - एमी पीटर्सन


परीक्षाएं और कठिनाईयाँ हमें मसीह के और भी निकट ला सकती हैं।

मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं। - भजन 119:71

बाइबल पाठ: याकूब 1:1-12
James 1:1 परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
James 1:2 हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
James 1:3 तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है।
James 1:4 पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
James 1:5 पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी।
James 1:6 पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
James 1:7 ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
James 1:8 वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
James 1:9 दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
James 1:10 और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्योंकि वह घास के फूल के समान जाता रहेगा।
James 1:11 क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
James 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16



गुरुवार, 28 मार्च 2019

फल



      वायु-यान की खिड़की से दिखने वाला वह दृश्य ध्यान आकर्षित करने वाला था: दो बंजर पहाड़ों के बीच की उस वादी में पकते हुए गेहूँ के खेत और फलों के बगीचे का एक पतला सा इलाका दिखाई दे रहा था, और एक जीवन-दायी जल की नदी बह रही थी। यदि वह नदी नहीं होती तो वहाँ कोई फल भी नहीं होता।

      जैसे भरपूरी की फसल स्वच्छ जल के स्त्रोत के विद्यमान होने पर निर्भर है, उसी प्रकार मेरे मसीही जीवन, मेरे शब्दों, मेरे कार्यों, और मेरे रवैये से उत्पन्न होने वाले “फल” भी मुझ में प्रवाहित होने वाले आत्मिक ‘जल’ पर निर्भर हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा कि जो व्यक्ति परमेश्वर की व्यवस्था में मगन रहता है वह ऐसे फलवन्त होगा मानो बहती नालियों के के किनारे लगा हुआ वृक्ष हो जो अपनी ऋतु में फलदाई होता है (भजन 1:1-3)। प्रेरित पौलुस ने भी लिखा कि जो परमेश्वर की पवित्र-आत्मा के चलाए चलते हैं उनके जीवनों में आत्मा के गुणों के फल बने रहेंगे (गलातियों 5:22-23)।

      कभी-कभी मेरा दृष्टिकोण या मेरी परिस्थितियाँ अप्रिय हो जाते हैं, और तब मेरे शब्द तथा मेरे कार्य भी कठोर हो जाते हैं। मेरे जीवन से अच्छा फल नहीं आता, और मुझे एहसास होता है कि मैंने परमेश्वर और उसके वचन के साथ उपयुक्त समय नहीं बिताया है, उस जीवन-दायी जल को अपने में से प्रवाहित होकर उसे मुझे स्वच्छ और फलवन्त करने नहीं दिया है। परन्तु जब मेरे दिन की प्रत्येक गतिविधि परमेश्वर के वचन के अनुसार और उस पर आधारित हो कर होती है, तब मैं अच्छा फल लाने लगता हूँ; तब धैर्य और नम्रता मेरे व्यवहार का अंग होते हैं, और मेरे लिए कुड़कुड़ाने के स्थान पर कृतज्ञ रहना सहज रहता है।

      जिस परमेश्वर ने अपने आप को समस्त सँसार पर प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट किया है वह हमारे लिए सामर्थ्य, बुद्धि, आनन्द, समझ-बूझ, और शान्ति का स्त्रोत है (भजन 119: 28, 98, 111, 144, 165)। जब हम अपने आप को प्रभु यीशु मसीह के प्रति समर्पित होकर परमेश्वर के वचन से ओत-प्रोत कर लेते हैं, तब जीवन-दायी जल के प्रभाव के समान, परमेश्वर की पवित्र-आत्मा के फल भी हमारे जीवनों से प्रगट होने लगते है। - पीटर चिन, अतिथि लेखक


परमेश्वर का आत्मा उसके लोगों में निवास करता है, जिससे उनमें होकर अपना कार्य करे।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है!
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44



बुधवार, 27 मार्च 2019

छवि



      द्वितीय विश्वयुद्ध में इंग्लैण्ड के प्रधान-मंत्री रहे और मित्र राष्ट्रों के साथ विजय में इंग्लैण्ड का नेतृत्व करने वाले, विंस्टन चर्चिल के अस्सीवें जन्म-दिवस के अवसर पर ब्रिटिश संसद ने चित्रकार ग्राहम सदरलैंड को नियुक्त किया कि वे उस सुप्रसिद्ध राजनैतिज्ञ का एक चित्र बनाएँ। कहा जाता है कि चर्चिल ने सदरलैंड से पूछा, “मुझे चित्र में कैसा दिखाओगे; मनोहर स्वर्गदूत जैसा या बुलडॉग के समान?” चर्चिल को अपनी ये दोनों ही छवियाँ पसन्द थीं। किन्तु सदरलैंड ने उत्तर दिया कि जैसा उसे दिखाई देगा, वह वैसा ही चित्र में दिखाएंगे।

      चित्र के बन जाने पर चर्चिल को वह पसन्द नहीं आया; चित्र में चर्चिल को कुर्सी पर पसर कर बैठे दिखाया गया था, और उनके चहरे पर उनकी विख्यात चढ़ी हुई त्यौरियाँ थीं। यह चित्र वास्तविकता के समान तो था किन्तु चर्चिल को प्रशंसनीय दिखाने वाला नहीं था। उस चित्र के औपचारिक अनावरण समारोह के पश्चात उसे तहखाने में रख दिया गया, और बाद में गुप्त रूप से नष्ट कर दिया गया।

      चर्चिल के समान, हम सब के मनों में भी अपनी एक छवि होती है, जिसे हम औरों के सामने रखना चाहते हैं – चाहे वह सफलता, या भक्ति, या सुन्दरता, या शक्ति, या अन्य किसी भी गुण की हो। हम लोगों से अपने “कुरूप” स्वरूप को छिपाने के लिए बहुत प्रयास करते हैं। संभवतः हमें लगता है कि यदि हमारी वास्तविकता लोगों के समक्ष आ जाएगी तो लोग हमें पसन्द नहीं करेंगे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब इस्राएलियों को बाबुल में बन्दी बना कर ले जाया गया, तब उनकी छवि सबसे बुरी थी। उनके पापों के कारण, परमेश्वर ने उनके शत्रुओं को उन पर विजयी होने दिया था। परन्तु उनसे यह भी कहा कि वे भयभीत न हों; वह उन्हें उनके नाम से जानता था, और उनकी प्रत्येक अपमानजनक स्थिति में उनके साथ बना हुआ था (यशायाह 43:1-2)। वे उसके लिए “अनमोल और प्रतिष्ठित” थे (आयत 4), तथा उसके हाथों में सुरक्षित थे (आयत 13)। परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता और उनके पाप के कारण उनकी उस कुरूपता के बावजूद परमेश्वर उनसे प्रेम करता था।

      जब यह सत्य हमारे अन्दर घर कर लेगा, तो हम अपने आप को लोगों में प्रशंसनीय बनाने के प्रयासों में कम ही लगाएंगे। परमेश्वर हमारी वास्तविक छवि को जानता है किन्तु फिर भी हम से असीमित प्रेम करता है। - शेरिडन वौएसे


हमारे प्रति परमेश्वर का गहरा प्रेम हमें औरों के सामने वास्तविक रहने देता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: यशायाह 43:1-9
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है।
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं।
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।
Isaiah 43:5 मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा, और पच्छिम से भी इकट्ठा करूंगा।
Isaiah 43:6 मैं उत्तर से कहूंगा, दे दे, और दक्खिन से कि रोक मत रख; मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ;
Isaiah 43:7 हर एक को जो मेरा कहलाता है, जिस को मैं ने अपनी महिमा के लिये सृजा, जिस को मैं ने रचा और बनाया है।
Isaiah 43:8 आंख रहते हुए अन्धों को और कान रहते हुए बहिरों को निकाल ले आओ!
Isaiah 43:9 जाति जाति के लोग इकट्ठे किए जाएं और राज्य राज्य के लोग एकत्रित हों। उन में से कौन यह बात बता सकता वा बीती हुई बातें हमें सुना सकता है? वे अपने साक्षी ले आएं जिस से वे सच्चे ठहरें, वे सुन लें और कहें, यह सत्य है।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30



मंगलवार, 26 मार्च 2019

जाँचना



      दक्षिणपूर्व एशिया के एक क्षेत्र में उत्तरी अमेरिका का एक शिक्षक अतिथि बनकर गया, जहाँ उस अतिथि शिक्षक ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा। अमेरिका से आए उस शिक्षक ने अपनी कक्षा को बहु-विकल्प प्रश्न-पत्र दिया, और उसे देख कर अचम्भा हुआ कि बहुत से विद्यार्थियों ने कई प्रशों को अनुत्तरित छोड़ रखा था। प्रश्न-पत्र को जाँचने के पश्चात विद्यार्थियों को वापस करते समय उसने उन्हें सुझाव दिया कि अगली बार अनुत्तरित छोड़ने की बजाए उन्हें अनुमान लगा कर उत्तर पर चिन्ह लगा देना चाहिए। यह सुनकर अचंभित होकर एक विद्यार्थी ने पूछा, “ऐसे में यदि गलती से मेरे अनुमान द्वारा कोई उत्तर सही हो जाए तो इससे क्या मैं यह नहीं जताऊँगा कि मुझे उत्तर आता है, जबकि वास्तव में मुझे उत्तर आता ही नहीं है?” शिक्षक और विद्यार्थी के दृष्टिकोण और कार्यविधि बहुत फर्क थे।

      नए नियम के दिनों में, जब यहूदी और गैर-यहूदी लोग परिवर्तित होकर मसीही हो रहे थे, तो उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण भी बहुत भिन्न थे। कुछ ही समय में उनमें मतभेद होने लग गए, भिन्न बातों पर, जैसे कि, आराधना का कौन सा दिन होना चाहिए, या, मसीही विश्वासी को क्या खाने या पीने की स्वतंत्रता है, आदि। पौलुस प्रेरित ने आग्रह किया कि वे एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखें: कोई भी किसी अन्य के हृदय को जानने या जाँचने की स्थिति में नहीं है।

      अन्य मसीही विश्वासियों के साथ सामंजस्य बनाए रखने के लिए, परमेश्वर चाहता है कि हम इस बात का ध्यान रखें कि हम सभी अपने-अपने जीवन और कार्यों के लिए व्यक्तिगत रीति से उसके प्रति उत्तरदायी हैं; और केवल वह ही है जो हमारे हृदयों के भाव को जाँचता है (रोमियों 14:4-7)। - मार्ट डीहान

 औरों को जाँचने में धीमा किन्तु स्वयँ को जाँचने में त्वरित रहें।

हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। - याकूब 1:19



बाइबल पाठ: रोमियों 14:1-12
Romans 14:1 जो विश्वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो; परन्तु उसकी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं।
Romans 14:2 क्योंकि एक को विश्वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्तु जो विश्वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है।
Romans 14:3 और खानेवाला न-खाने वाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खाने वाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।
Romans 14:4 तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिर जाना उसके स्वामी ही से सम्बन्ध रखता है, वरन वह स्थिर ही कर दिया जाएगा; क्योंकि प्रभु उसे स्थिर रख सकता है।
Romans 14:5 कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर जानता है, और कोई सब दिन एक सा जानता है: हर एक अपने ही मन में निश्चय कर ले।
Romans 14:6 जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है, और जो नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्वर का धन्यवाद करता है।
Romans 14:7 क्योंकि हम में से न तो कोई अपने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है।
Romans 14:8 क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएं या मरें, हम प्रभु ही के हैं।
Romans 14:9 क्योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो।
Romans 14:10 तू अपने भाई पर क्यों दोष लगाता है? या तू फिर क्यों अपने भाई को तुच्छ जानता है? हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के साम्हने खड़े होंगे।
Romans 14:11 क्योंकि लिखा है, कि प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध कि हर एक घुटना मेरे साम्हने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्वर को अंगीकार करेगी।
Romans 14:12 सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3