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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

स्पर्श



      कैनाडा की एक ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों ने एक तनावपूर्ण स्थिति का मार्मिक अन्त होते हुए देखा। एक जवान व्यक्ति ट्रेन में ऊँची आवाज़ में बोल रहा था, औरों को भयभीत तथा अशांत कर रहा था। एक 70 वर्षीय वृद्ध महिला ने अपने हाथ बढ़ाकर कोमलता से उसे स्पर्श किया, अपना हाथ उसे थामने के लिए दिया। उस महिला की दयालुता से वह जवान शान्त हो गया, आँखों में आँसुओं के साथ नीचे बैठ गया। उसने कहा, “दादी, धन्यवाद” फिर खड़ा हुआ और चुपचाप चला गया। बाद में उस महिला ने स्वीकार किया कि वह भी भयभीत हुई थी; उसने यह भी कहा, “मैं एक माँ भी हूँ, और मुझे लगा कि उसे किसी के स्पर्श की आवश्यकता है।” यद्यपि अकलमंदी उस जवान से दूरी बनाए रखने का कारण देती, उस महिला ने प्रेम का जोखिम उठाया।

      प्रभु यीशु भी ऐसी करुणा को समझते हैं। जब कोढ़ से भरा हुआ एक मजबूर और परेशान व्यक्ति उनके पास चँगा होने की माँग करता हुआ आया, तो प्रभु ने विचलित हो रही भीड़ के लोगों के समान प्रतिक्रया नहीं दी। न ही प्रभु यीशु ने धार्मिक अगुवों के समान असहाय होकर उस कोढ़ी को नगर में रोग को लेकर आने के लिए दुत्कारा (लैव्यवस्था 13:45-46)। वरन प्रभु यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे स्पर्श किया; ऐसे व्यक्ति को स्पर्श किया जिसे संभवतः वर्षों से किसी ने स्पर्श नहीं किया होगा, और उसे चँगा कर दिया।

      वह व्यक्ति भी धन्यवादी हुआ और आज हम भी धन्यादी हों कि प्रभु यीशु हमें वह प्रदान करने के लिए आए जो कोई भी व्यवस्था कभी नहीं दे सकती है – हमारे दुखी जीवनों में प्रभु परमेश्वर के हाथ और हृदय का स्पर्श। - मार्ट डीहॉन


कोई भी इतना अस्वच्छ या परेशान नहीं है कि, प्रभु यीशु द्वारा स्पर्श न किया जा सके।

परन्तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है (उसने उस झोले के मारे हुए से कहा), मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपनी खाट उठा कर अपने घर चला जा। - लूका 5:24

बाइबल पाठ: लूका 5:12-16
Luke 5:12 जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहां कोढ़ से भरा हुआ एक मनुष्य था, और वह यीशु को देखकर मुंह के बल गिरा, और बिनती की; कि हे प्रभु यदि तू चाहे हो मुझे शुद्ध कर सकता है।
Luke 5:13 उसने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ और कहा मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा: और उसका कोढ़ तुरन्त जाता रहा।
Luke 5:14 तब उसने उसे चिताया, कि किसी से न कह, परन्तु जा के अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने चढ़ावा ठहराया है उसे चढ़ा; कि उन पर गवाही हो।
Luke 5:15 परन्तु उस की चर्चा और भी फैलती गई, और भीड़ की भीड़ उस की सुनने के लिये और अपनी बिमारियों से चंगे होने के लिये इकट्ठी हुई।
Luke 5:16 परन्तु वह जंगलों में अलग जा कर प्रार्थना किया करता था।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 23-24
  • लूका 19:1-27



गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

हार न मानें



      बॉब फॉस्टर 50 वर्ष से भी अधिक से मेरे मित्र, सहायक और सलाहकार रहे हैं; उन्होंने मुझे लेकर कभी हार नहीं मानी है। उनकी, मेरे सबसे कठिन समयों में भी, कभी न बदलने वाली मित्रता और प्रोत्साहन ने मुझे अनेकों परिस्थितियों से सफलतापूर्वक पार होने में सहायता की है।

      बहुधा हम पाते हैं कि किसी जानकार व्यक्ति की आवश्यकता की परिस्थिति में हम उसकी सहायता करने के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार हैं। परन्तु जब हम उसमें कोई सुधार होते नहीं देखते हैं, तो हमारा संकल्प ढीला पड़ सकता है और हम उससे निराश होकर हार मान सकते हैं। हमें लगता है कि हमने जिसे तुरंत परिवर्तन लाने वाली परिस्थिति समझा था, वह चलती रहने वाली प्रक्रिया बन गई है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस हमसे कहता है कि जीवन की ठोकरों और संघर्षों में एक दूसरे की सहायता करने के लिए धीरजवंत रहें। जब पौलुस ने लिखा, “तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो” (गलातियों 6:2), तो वह हमारे इस परिश्रम को किसान के कार्य के समान जता रहा था जिसे फसल काटने के लिए परिश्रम, समय और धैर्य दिखाना होता है।

      हम कितने समय तक प्रार्थना करते रहें और उनकी सहायता में हाथ बढ़ाते रहें जिनसे हम प्रेम करते हैं? “हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे” (पद 9)। हमें सहायता में हाथ कितनी बार बढ़ाना चाहिए? “इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ” (पद 10)।

      प्रभु आज हमें प्रोत्साहित करता है कि हम उसपर भरोसा बनाए रखें, औरों के प्रति विश्वासयोग्य बने रहें, प्रार्थना में लगे रहें, और कभी हार न मानें! – डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रार्थना में हम उस परमेश्वर को पुकारते हैं “जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है” (इफिसियों 3:20)।

बाइबल पाठ: गलातियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 21-22
  • लूका 18:24-43



बुधवार, 24 अप्रैल 2019

कृतज्ञ और धन्यवादी



      मेरी सहेली ग्लोरिया ने मुझे फोन किया, उसकी आवाज़ में उत्साह था। अपनी शारीरिक अक्षमताओं के कारण वह घर से बाहर केवल डॉक्टर को दिखाने के लिए ही निकलने पाती थी; इसलिए जो उसने मुझे बताया उसे लेकर उसके उत्साह और उत्तेजना को मैं समझ सकती थी। ग्लोरिया ने कहा, “मेरे बेटे ने मेरे कंप्यूटर के साथ नए स्पीकर्स जोड़ दिए हैं, इसलिए अब मैं चर्च की आराधना में सम्मिलित हो सकती हूँ!” अब वह उसके चर्च में हो रही आराधना सभा के सीधे प्रसारण को देख और सुन सकती थी। वह परमेश्वर की भलाई और उस “सर्वोत्तम उपहार जो मेरा बेटा मुझे दे सकता था” को लेकर बहुत उत्साहित थी, लोगों से उसके बारे में बातें करते नहीं थकती थी।

      ग्लोरिया मुझे एक धन्यवादी हृदय रखने के बारे में सिखाती है। अपनी अनेकों सीमाओं के होते हुए भी, वह छोटी-छोटी बातों के लिए – सूर्यास्त का दृश्य, परिवार के लोगों तथा पड़ौसियों और मित्रों आदि से मिलने वाली सहायता, शान्त होकर परमेश्वर के साथ बिताए जा सकने वाला समय, अपने स्वयँ के घर में रहने की सुविधा, आदि, वह सब के लिए सदा परमेश्वर की धन्यवादी बनी रहती है। उसने अपने जीवन भर अनुभव किया है कि परमेश्वर कैसे उसकी देखभाल करता है, उसकी आवश्यकताओं को पूरा करता है, और जो भी उससे मिलने आता है वह उससे परमेश्वर के विषय में बात करती है।

      हम परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 116 के लेखक की परिस्थतियों और कठिनाइयों को तो नहीं जानते हैं; बाइबल के कुछ  व्याख्याकर्ताओं का मानना है संभवतः वह बीमारी से होकर निकल रहा था, क्योंकि उसने लिखा, “मृत्यु की रस्सियाँ मेरे चारों ओर थीं” (पद 3)। परन्तु उन परिस्थतियों में भी वह परमेश्वर का कृतज्ञ और धन्यवादी था कि परमेश्वर ने उस पर करुणा और अनुग्रह दिखाया थाजब उसे “बलहीन किया गया” (पद 5-6)।

      जब हम बलहीन होते हैं, तो ऊपर देखना कठिन होता है। परन्तु यदि हम देखते हैं, तो हम पाते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में सब भली वस्तुओं का देवनहारा है – वे चाहे छोटी हों या बड़ी – और इसलिए हमें चाहिए कि हम हर बात के लिए हर परिस्थति में उसके प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी बने रहें। - ऐनी सेटास


जब आप अपनी आशीषों को गिनने लगते हैं तो 
परमेश्वर का कृतज्ञ और धन्यवादी होना स्वाभाविक हो जाता है।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: भजन 116:1-9
Psalms 116:1 मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है।
Psalms 116:2 उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा।
Psalms 116:3 मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा।
Psalms 116:4 तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले!
Psalms 116:5 यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है।
Psalms 116:6 यहोवा भोलों की रक्षा करता है; जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया।
Psalms 116:7 हे मेरे प्राण तू अपने विश्राम स्थान में लौट आ; क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है।
Psalms 116:8 तू ने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आंख को आंसू बहाने से, और मेरे पांव को ठोकर खाने से बचाया है।
Psalms 116:9 मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के साम्हने जान कर नित चलता रहूंगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 19-20
  • लूका 18:1-23



मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

बढ़ोतरी



      मेरा बेटा लगातार तीन वर्षों से प्यानो वादन में भाग ले रहा था। पिछले वर्ष मैंने उसे प्यानो बजाते हुए देखा। वह सीढियां चढ़कर मंच पर गया, संगीत की छपी हुई पुस्तिका को सही पन्ने पर खोलकर ठीक से लगाया, उसने दो गीत बजाए, और फिर आकर मेरे पास बैठ गया, और फुसफुसा कर बोला, “माँ, इस वर्ष मेरा प्यानो छोटा हो गया है।” मैंने कहा नहीं, प्यानो तो वही है जो तुमने पिछले वर्ष बजाया था, बस तुम थोड़े बड़े हो गए हो, तुम्हारा कद बढ़ गया है।

      शारीरिक बढ़ोतरी के समान, आत्मिक बढ़ोतरी भी समय के साथ-साथ, धीरे-धीरे होती है। यह एक होती रहने वाली प्रक्रिया है जिसमें हम मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की अधिकाधिक समानता में ढलते चले जाते हैं। यह प्रक्रिया हमारे मन के नए हो जाने के कारण संभव होने पाती है “और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो” (रोमियों 12:2)।

      जब परमेश्वर पवित्र आत्मा हमारे अन्दर कार्य करता है, तो हमारे अन्दर पाप के प्रति संवेदनशीलता तथा बोध आता है। परमेश्वर को आदर देने और उसके अनुसार व्यवहार करने के लिए हम अपने अन्दर, अपने जीवन में परिवर्तन चाहते हैं, पाप से हटकर परमेश्वर की निकटता में आना चाहते हैं। अपने इन प्रयासों में हम कभी सफल होते हैं तो कभी असफल होकर हमें फिर से प्रयास करने पड़ते हैं। हो सकता है कि कभी-कभी हमें लगे कि कुछ नहीं बदल रहा है और हम निराश हों; हम असफलता को बढ़ोतरी न होने का प्रमाण समझने लगते हैं, जबकि वास्तव में वह बढ़ोतरी के मार्ग में अग्रसर होने का प्रमाण है।

      आत्मिक बढ़ोतरी के लिए हमें पवित्र आत्मा की सहायता और मार्गदर्शन, अपने अन्दर परिवर्तन लाने की हमारी अपनी इच्छा, और समय की आवश्यकता होती है। अपनी जीवन यात्रा में जब हम कभी-कभी रुक कर पीछे देखते हैं तो हमें आभास होता है कि हम आत्मिक जीवन में भी बढ़े हैं। परमेश्वर हमें सामर्थ्य दे कि हम उसके वचन बाइबल की बात “और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फिलिप्पियों 1:6) पर अपना भरोसा बनाए रखें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आत्मिक बढ़ोतरी एक प्रक्रिया है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1: 1-11
Philippians 1:1 मसीह यीशु के दास पौलुस और तीमुथियुस की ओर से सब पवित्र लोगों के नाम, जो मसीह यीशु में हो कर फिलिप्पी में रहते हैं, अध्यक्षों और सेवकों समेत।
Philippians 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
Philippians 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं।
Philippians 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं।
Philippians 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो।
Philippians 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा।
Philippians 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो।
Philippians 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं।
Philippians 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
Philippians 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ।
Philippians 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 16-18
  • लूका 17:20-37



सोमवार, 22 अप्रैल 2019

सुनना



      मेरे पिता बहुत कम बोलते थे। वर्षों तक सेना में किए गए कार्य के कारण उनकी सुनने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा था और वे सुनने के लिए दोनों कानों में मशीन लगाते थे। एक दोपहर, जब मैं और मेरी माँ, उनके दृष्टिकोण से, आवश्यकता से कुछ अधिक देर तक बोलते रहे, तो उन्होंने व्यंग्यात्मक भाव में अपने दोनों हाथ ऊपर को उठा कर कहा, “जब भी मुझे शान्ति और एकांत की आवश्यकता अनुभव होती है, मैं यह करता हूँ” और उन्होंने अपने दोनों कानों की मशीनों को बन्द किया, सर के पीछे हाथ रखे और धीरे से मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बन्द कर लीं। हमारी हंसी निकल गई; जहाँ तक उनका प्रश्न था, उनके लिए वार्तालाप पूरा हो चुका था।

      उस दिन मेरे पिताजी की प्रतिक्रिया की तुलना में, हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता की प्रतिक्रिया कितनी भिन्न होती है; वह सदा ही अपने बच्चों की सुनता है। इस बात की पुष्टि परमेश्वर के वचन बाइबल की सबसे छोटी प्रार्थनाओं में से एक के द्वारा होती है। एक दिन, फारस के राजा अर्तक्षत्र का सेवक नहेम्याह, अपने कार्य के समय राजा की उपस्थिति में प्रगट रूप से उदास था। जब राजा ने उससे उसकी उदासी का कारण पूछा तो नहेम्याह डर गया, किन्तु उसने स्वीकार किया कि उसकी उदासी उसके पुरखाओं के शहर यरूशलेम की बुरी स्थिति के कारण थी, जो अब बरबाद पड़ा हुआ था। नहेम्याह ने स्मरण किया, “राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? तब मैं ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना कर के, राजा से कहा; यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कबरों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊं” (नहेम्याह 2:4-5)।

      नहेम्याह की यह प्रार्थना कुछ ही पलों की थी, परन्तु परमेश्वर ने उसे सुना। उस प्रार्थना के करुणामय प्रत्युत्तर ने नहेम्याह द्वारा इससे पहले यरूशलेम के लिए की गई अनेकों प्रार्थनाओं के उत्तर को सक्रीय कर दिया; और उस एक पल में राजा अर्तक्षत्र ने यरूशलेम के पुनःनिर्माण के लिए नहेम्याह के निवेदन को स्वीकार किया और उसे अनुमति प्रदान कर दी।

      यह कितना सुखदायी और आश्वस्त करने वाला है कि हमारा परमेश्वर पिता हमारी सभी प्रार्थनाओं – छोटी से छोटी से लेकर लंबी से लंबी तक, को सुनता है और उनका उत्तर देता है। जेम्स बैंक्स


हमारा महान परमेश्वर पिता हमारी छोटी सी प्रार्थना भी ध्यान से सुनता है।

जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। - भजन 145:18

बाइबल पाठ: नहेम्याह 2:1-9
Nehemiah 2:1 अर्तक्षत्र राजा के बीसवें वर्ष के नीसान नाम महीने में, जब उसके साम्हने दाखमधु था, तब मैं ने दाखमधु उठा कर राजा को दिया। इस से पहिले मैं उसके साम्हने कभी उदास न हुआ था।
Nehemiah 2:2 तब राजा ने मुझ से पूछा, तू तो रोगी नहीं है, फिर तेरा मुंह क्यों उतरा है? यह तो मन ही की उदासी होगी।
Nehemiah 2:3 तब मैं अत्यन्त डर गया। और राजा से कहा, राजा सदा जीवित रहे! जब वह नगर जिस में मेरे पुरखाओं की कबरें हैं, उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं, तो मेरा मुंह क्यों न उतरे?
Nehemiah 2:4 राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? तब मैं ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना कर के, राजा से कहा;
Nehemiah 2:5 यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कबरों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊं।
Nehemiah 2:6 तब राजा ने जिसके पास रानी भी बैठी थी, मुझ से पूछा, तू कितने दिन तक यात्रा में रहेगा? और कब लैटेगा? सो राजा मुझे भेजने को प्रसन्न हुआ; और मैं ने उसके लिये एक समय नियुक्त किया।
Nehemiah 2:7 फिर मैं ने राजा से कहा, यदि राजा को भाए, तो महानद के पार के अधिपतियों के लिये इस आशय की चिट्ठियां मुझे दी जाएं कि जब तक मैं यहूदा को न पहुंचूं, तब तक वे मुझे अपने अपने देश में से हो कर जाने दें।
Nehemiah 2:8 और सरकारी जंगल के रख वाले आसाप के लिये भी इस आशय की चिट्ठी मुझे दी जाए ताकि वह मुझे भवन से लगे हुए राजगढ़ की कड़ियों के लिये, और शहरपनाह के, और उस घर के लिये, जिस में मैं जा कर रहूंगा, लकड़ी दे। मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर थी, इसलिये राजा ने यह बिनती ग्रहण किया।
Nehemiah 2:9 तब मैं ने महानद के पार के अधिपतियों के पास जा कर उन्हें राजा की चिट्ठियां दीं। राजा ने मेरे संग सेनापति और सवार भी भेजे थे।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 14-15
  • लूका 17:1-19



रविवार, 21 अप्रैल 2019

समझ तथा चिन्ता



      जब एक व्यक्ति से पूछा गया कि क्या उसे लगता है कि आज के समाज की समस्या उदासीन रहना तथा जानकारी न रखना हो सकती है, तो उसने मुस्कुराते हुई उत्तर दिया, “न मैं यह जानता हूँ, और न ही इसकी परवाह करता हूँ।”

      मुझे लगता है कि आज अनेकों निराश लोग सँसार तथा औरों के प्रति ऐसा ही अनुभव करते हैं। परन्तु जब बात हमारे जीवन की परेशानियों और चिंताओं की है, तो एक है जो सब कुछ जानता है और हमारी चिंता भी करता है – प्रभु यीशु मसीह। परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह 53 अध्याय प्रभु यीशु के दुख उठाने और मारे जाने की भविष्यवाणी है, जो उनके जन्म से लगभग 700 वर्ष पूर्व लिखी गई। इस भविष्यवाणी में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने हमारे लिए क्या कुछ सहन किया। वे “वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला” (पद 7); “मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी” (पद 8); “तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी” (पद 10)।

      कलवारी के क्रूस पर प्रभु यीशु ने स्वेच्छा से हमारे पाप और दोष को अपने ऊपर उठा लिया, उनकी पूरी-पूरी कीमत चुका दी। जितना प्रभु यीशु मसीह ने हमारे लिए सहा, उतना कभी किसी ने नहीं सहा है। प्रभु जानते थे कि हमें पापों से बचाने के लिए उन्हें क्या कीमत चुकानी पड़ेगी, और उन्होंने सप्रेम हमारे लिए उस कीमत को चुकाया (पद 4-6)।

      प्रभु यीशु के मृतकों में से पुनरुत्थान के कारण, वे आज जीवित हैं, अपने लोगों के साथ सदा उपास्थिति हैं। हम चाहे कैसी भी, कोई भी परिस्थिति का सामना क्यों कर रहे हों, प्रभु उसे समझता है, हमारे लिए चिंता करता है, और हमें उस परिस्थिति से पार लेकर चलेगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


वह यहां नहीं, परन्तु जी उठा है; स्मरण करो; कि उसने गलील में रहते हुए तुम से कहा था। - लूका 24:6

बाइबल पाठ: यशायाह 53
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isaiah 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।
Isaiah 53:8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
Isaiah 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isaiah 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
Isaiah 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
Isaiah 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 12-13
  • लूका 16



शनिवार, 20 अप्रैल 2019

प्रेम



      मेरे माता-पिता, जो अमेरिका में रहते हैं, हम मिलने के लिए इंग्लैण्ड आए हुए थे, जहाँ हम रहते हैं। जब वे वापस जाने लगे, तो उन्हें विदा करते समय मेरी बेटी रोते हुए कहने लगी, “मैं नहीं चाहती कि वे जाएँ।” हम उसे दिलासा देने लगे और समझाने लगे, और मेरे पति ने कहा, “प्रेम कीमत माँगता है!”

      प्रिय जनों से बिछुड़ने पर हमें दुःख होता है, परन्तु प्रभु यीशु मसीह ने बिछुड़ने के चरम दुःख को सहा जब उन्होंने चरम प्रेम की कीमत क्रूस पर चुकाई। प्रभु यीशु, जो दोनों, मनुष्य और परमेश्वर थे, उन्होंने परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा उनके विषय उनके जन्म से 700 वर्ष पूर्व की गई भविष्यवाणी को पूरा किया कि “क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया” (यशायाह 53:12)। यशायाह की पुस्तक के इस अध्याय में हम उनके उस “दुखी पुरुष” होने के जिसके विषय वे भविष्यवाणियां की गई थीं, कई संकेत देखते हैं। जैसे कि, “वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया;” और यह कि “उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं” (यशायाह 53:5) – यह सब तब हुआ जब प्रभु को यातनाएं देने के बाद कलवारी के क्रूस पर कीलों के साथ ठोक दिया गया, और एक सैनिक ने उनके पंजर में भाला मारा (यूहन्ना 19:34)।

      हम मनुष्यों के प्रति अपने महान प्रेम के कारण प्रभु यीशु पृथ्वी पर आ गए, शिशु के रूप में जन्म लिया, और अपने उसी प्रेम के कारण उन्होंने धर्म के अगुवों, साधारण लोगों की भीड़, और सैनिकों, सभी से अपमान और दुर्व्यवहार सहन किया। प्रेम ही के कारण उन्होंने सब कुछ सहते हुए, हमारे स्थान पर स्वयँ हमारे पापों को अपने ऊपर लिया, दण्ड के स्थान पर खड़े हो गए और हमारे पापों की कीमत चुकाने के लिए अपने जीवन को सिद्ध बलिदान के रूप में चढ़ा दिया। आज हम उनके इस प्रेम के कारण ही जीवित हैं, परमेश्वर के जन हैं। - एमी बाउचर पाई


प्रभु यीशु वह सिद्ध बलिदान थे जिसने हमें जीवन देने के लिए स्वयं मृत्यु सहन की।

जिसने अपने आप को हमारे लिये दे दिया, कि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले, और शुद्ध कर के अपने लिये एक ऐसी जाति बना ले जो भले भले कामों में सरगर्म हो। - तीतुस 2:14

बाइबल पाठ: यशायाह 53: 1-12
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isaiah 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।
Isaiah 53:8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
Isaiah 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isaiah 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
Isaiah 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
Isaiah 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 शमूएल 9-11
  • लूका 15:11-32