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गुरुवार, 6 जून 2019

परिवर्तन



      लंबे समय तक हारवर्ड विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रहे डॉ. चार्ल्स डब्ल्यू इलियट का मानना था कि साधारण लोग यदि सँसार के साहित्य से प्रतिदिन कुछ मिनिट तक भी कुछ पढ़ लेंगे तो वे मूल्यवान ज्ञान प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने 1910  में इतिहास, विज्ञान, दर्शन-शास्त्र, और कला के क्षेत्रों की साहित्यिक पुस्तकों से भाग चुनकर संकलित किए जिन्हें ‘द हारवर्ड क्लासिक्स’ नामक 50 पुस्तकों के संग्रह में प्रकाशित किया गया। प्रत्येक पुस्तक के साथ डॉ. इलियट द्वारा लिखित, पढ़ने की मार्गदर्शिका “Fifteen Minutes a Day” (प्रतिदिन पन्द्रह मिनिट) भी दी गई है, जिसमें वर्ष के प्रतिदिन के लिए पढ़ने के लिए 8-10 पृष्ठ सुझाए गए हैं।

      कैसा रहे यदि हम प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने के लिए पन्द्रह मिनिट लगाएँ? हम भजनकार के साथ कह सकते हैं, “मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला” (भजन 119:36-37)।

      पन्द्रह मिनिट प्रतिदिन का योग वर्ष के इक्यानवे घंटे बनता है। किन्तु हम जितना भी समय निर्धारित करें, उसे दृढ़ता से निभाना ही सफलता की कुंजी है। मुख्य आवश्यकता सिद्ध होने की नहीं, वरन डटे रहकर करते रहने की है। यदि हम से कभी कोई दिन या सप्ताह छुट भी जाए तो भी अध्ययन को पुनः आरंभ करने से न चूकें। जब पवित्र आत्मा हमें सिखाएगा, तो परमेश्वर का वचन हमारे मास्तिष्क से हमारे हृदय में आ जाएगा, और फिर हमारे हाथों और पैरों को  संचालित करके, हमें ज्ञानवर्धन से जीवन परिवर्तन में ले जाएगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


बाइबल ही एकमात्र पुस्तक है जिसे जब विश्वास के साथ पढ़ा जाता है तो, 
उसे सिखाने-समझाने के लिए उसका लेखक स्वयँ उपस्थित रहता है।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: भजन 119:33-40
Psalms 119:33 हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा।
Psalms 119:34 मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा।
Psalms 119:35 अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं।
Psalms 119:36 मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे।
Psalms 119:37 मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
Psalms 119:38 तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर।
Psalms 119:39 जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं।
Psalms 119:40 देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16



बुधवार, 5 जून 2019

जीवन



      एक वृद्ध आदमी ने अपनी पोती से कुछ कहा, जिसने फिर वह बात मुझे बताई। उस वृद्ध ने कहा “मैंने घोड़ागाड़ी से लेकर मनष्य को चाँद पर चलते हुए तक देखा है; परन्तु कभी नहीं सोचा था कि यह इतने कम समय में हो जाएगा।” जीवन छोटा है।

      हम में से कई प्रभु यीशु की ओर मुड़ते हैं क्योंकि  हम अनन्त जीवन चाहते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, परन्तु क्या हम समझते भी हैं कि अनन्त जीवन क्या है? हमारी प्रवृत्ति है कि हम गलत वस्तुओं की लालसा करते हैं। हम कुछ बेहतर चाहते हैं, और हमें लगता है कि वह जो हम चाहते हैं बस थोड़ा सा आगे ही है। हम सोचते हैं, बस यदि मैं स्कूल पूरा करके बाहर निकल जाऊँ; बस यदि मेरे पास वह वाली नौकरी हो; बस यदि मेरा विवाह हो जाए; बस यदि मैं सेवा-निवृत्त हो जाऊँ; बस यदि...। और फिर एक दिन हमें अपने वृद्धों की कही बात की गूंज सुनाई देती है, और हम सोचने लगते हैं कि समय कब और कैसे निकल गया?

      वास्तविकता यही है कि प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास अनन्त जीवन अभी और यहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, “क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया” (रोमियों 8:2)। उसने आगे लिखा, “क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं” (पद 5)। दूसरे शब्दों में, हम मसीह यीशु के पास आ जाते हैं तो हमारी लालसाएं भी बदल जाती हैं ; और इससे हम वह प्राप्त करने पाते हैं जिसकी हमें सबसे अधिक इच्छा रहती है “शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है”(पद 6)।

      जीवन के सबसे बड़े झूठ में से एक यह है कि वास्तव में जीने के लिए हमें कहीं और होना होगा, कुछ और करना होगा, किसी और के साथ होना होगा। जब हम प्रभु यीशु मसीह में अपना जीवन प्राप्त करते हैं, तो हम जीवन के छोटा होने के अफसोस को उसके साथ के जीवन की भरपूरी के साथ अदला-बदली कर लेते हैं, अभी के लिए भी और अनन्त जीवन के लिए भी। - टिम गुस्ताफसन


अनन्त जीवन के लिए हमें, हम में प्रभु यीशु मसीह को जीने देना होगा।

और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। - यूहन्ना 17:3

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-11
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी।
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए।
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं।
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है।
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है।
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।
Romans 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15



मंगलवार, 4 जून 2019

शान्ति



      एक सहेली ने मुझे बताया कि वर्षों से वह शान्ति और संतुष्टि की तलाश में थी। उसके पति और उसने मिलकर एक सफल व्यवसाय स्थापित किया, इसलिए वह एक बड़ा घर, सुन्दर और महंगे कपड़े, तथा कीमती ज़ेवर खरीद सकी। परन्तु इन संपत्तियों से उसे अपने अन्दर शान्ति और संतुष्टि नहीं मिली, और न ही समाज के प्रभावशाली और उच्च कोटि के लोगों के साथ संबंधों और मित्रता के द्वारा यह संभव हुआ। फिर एक दिन जब वह बहुत हताश और परेशान थी, किसी मित्र ने उसे प्रभु यीशु मसीह और उनके सुसमाचार के विषय में बताया। तब उसने शान्ति के राजकुमार से भेंट की, और तब से शान्ति तथा संतुष्टि की उसकी समझ हमेशा के लिए बदल गई।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने पकड़वाए जाने से पहले, अपने शिष्यों को सच्ची शान्ति के विषय बताया (यूहन्ना 14); वह अपने शिष्यों को आने वाली घटनाओं – उसके मारे जाने, गाड़े जाने, और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठने, तथा पवित्र आत्मा के आगमन के लिए तैयार कर रहा था। प्रभु चाहता था कि उसके शिष्य उसमें मिलने वाली उस अद्भुत शान्ति के बारे में समझ और सीख सकें, जिससे वे दुःख और कठिनाइयों के समयों में भी दुखी न हों, वरन प्रभु में आश्वस्त और संतुष्ट बने रहें।

      बाद में पुनरुत्थान के पश्चात जब प्रभु यीशु भयभीत शिष्यों के सामने प्रगट हुए, तो उन्होंने अभिनन्दन में उन से कहा, “तुम्हें शान्ति मिले” (यूहन्ना 20:19)। जो प्रभु ने उन शिष्यों और अब हमारे लिए किया है, उसके विषय, और प्रभु में मिलने वाले विश्राम के बारे में अब एक नई समझ हमें प्रभु में प्राप्त होती है। जब हम प्रभु की शान्ति को समझते और स्वीकार करते है, उसका अनुभव करते हैं, तो हमारी परिवर्तनशील भावनाओं के होते हुए भी हम एक गहरे भरोसे, संतुष्टि एवं अद्भुत शान्ति का अनुभव कर सकते हैं। - एमी बाउचर पाई

प्रभु यीशु सँसार और हमारे जीवन में शान्ति प्रदान करने के लिए आए थे।

मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है। - यूहन्ना ;16:33

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:25-31
John 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
John 14:26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
John 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
John 14:28 तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
John 14:29 और मैं ने अब इस के होने से पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
John 14:30 मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
John 14:31 परन्तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14



सोमवार, 3 जून 2019

भरोसा



      मेरी सहेली ने रोते हुए कहा, “मैं किसी पर भरोसा कर ही नहीं सकती हूँ; जब भी करती हूं वे मुझे दुःख देते हैं।” उसके इस कटु अनुभव से मैं विचलित हुई – मेरी सहेली का पूर्व बॉय-फ्रेंड, जिसके विषय वह सोचती थी कि वह उसपर पूर्णतः भरोसा कर सकती है, उनके बीच के संबंधों के टूटने के पश्चात, उसके बारे में अफवाहें फैलाने लग गया था। मेरी सहेली का बचपन बहुत दुःख भरा रहा था, और उसने बड़े संघर्ष के साथ भरोसा करना सीखा था। परंतु यह धोखा उसके लिए एक और पुष्टि थी कि लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता था।

      मैं उसे सांत्वना देने के लिए शब्दों को ढूँढने का संघर्ष कर रही थी। एक बात जो मैं उस से नहीं कहा सकती थी, वह थी कि लोगों के प्रति उसकी यह धारणा गलत थी कि पूर्णतः भरोसेमंद लोगों का मिलना कठिन और दुर्लभ है। मैं जानती और मानती हूँ कि अधिकांश व्यक्ति दयालु और भरोसेमंद होते हैं। उसके अनुभवों की कहानी दुखदायी और परिचित थी; उससे मुझे भी अपने जीवन के ऐसे अनपेक्षित धोखों का स्मरण हो आया। जो मैं उससे कह सकी वह था कि इस प्रकार की निर्ममता जीवन की कहानी का एक भाग ही है।

      वास्तव में, परमेश्वर का वचन बाइबल मानव स्वभाव के विषय बहुत स्पष्ट है। नीतिवचन 20:6 में लेखक उसी दुःख की बात करता है जो मेरी सहेली को था; धोखे के दुःख को सदा की स्मृति बताता है।

      यद्यपि औरों से मिलने वाले घाव वास्तविक और दुखदायी होते हैं, फिर भी प्रभु यीशु मसीह में सच्चा प्रेम और स्थाई भरोसा सारे सँसार के सब लोगों के लिए उपलब्ध है। प्रभु यीशु ने यूहन्ना 13:35 में अपने शिष्यों से कहा कि सँसार के लोग, उन शिष्यों द्वारा दिखाए गए व्यावाहरिक प्रेम के द्वारा ही जानने पाएँगे कि वे प्रभु यीशु के शिष्य थे। यह संभव है कि कुछ लोग हमें दुःख पहुँचाएँ; परन्तु प्रभु यीशु मसीह के कारण सदा ही ऐसे लोग भी होंगे जो हमारे साथ खुलकर प्रेम को बाँटेंगे, और बिना किसी शर्त के हमारा साथ देंगे, हमारी देखभाल करेंगे। प्रभु में हमारा भरोसा, तथा हमारे प्रति प्रभु का अक्षय प्रेम हमें चंगाई, संगति, और दूसरों के साथ प्रेम करने का साहस प्रदान करता है, तथा हम प्रभु का वही भरोसा औरों तक भी पहुँचा सकते हैं। - मोनिका ब्रैंड्स


प्रभु यीशु ने सच्चे भरोसे और प्रेम को संभव किया है।

बहुत से मनुष्य अपनी कृपा का प्रचार करते हैं; परन्तु सच्चा पुरूष कौन पा सकता है? - नीतिवचन 20:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:33-35
John 13:33 हे बालको, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं।
John 13:34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो।
John 13:35 यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 19-20
  • यूहन्ना 13:21-38



रविवार, 2 जून 2019

चट्टान



      मेरे निवास-स्थान के निकट एक पठारी इलाके में, एक चट्टान पर एक बड़ा सा क्रूस खड़ा किया गया है, जो सदा रौशन रहता है। चट्टानों से भरे उस पठारी इलाके के निकट के मैदान पर बहुत से लोगों ने अपने घर बना लिए थे, परन्तु अब उन्हें सुरक्षा कारणों से वहाँ से हटा दिया गया है। उस पठारी इलाके के निकट होने के बावजूद, उनके घर सुरक्षित नहीं थे; उनकी नींव लगभग तीन इंच प्रति दिन की गति से खिसक रही थी, जिससे पानी पहुँचाने वाली मुख्य पाइपलाइन के टूटने और उस पानी की कारण खिसकने की गति और बढ़ जाने का खतरा हो गया था। वे घर चट्टानों के निकट तो थे किन्तु चट्टान पर नहीं थे, इसलिए उनकी नींव अस्थिर थी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने उन लोगों की तुलना, जो उसका वचन सुनकर उसे मानते हैं, ऐसे लोगों से की जिन्होंने चट्टान पर घर बनाया है (लूका 6:47-48)। चट्टान पर बने ये घर आँधी-तूफान में भी स्थिर खड़े रहते हैं। इसके तुलना में, प्रभु ने कहा, जो लोग उसके निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, वे उनके समान हैं जिन्होंने अस्थिर नींव पर घर बनाया, जो आँधियों का सामना नहीं करने पाएगा।

      ऐसे बहुत से अवसर आए हैं जब मैंने अपने विवेक की अवहेलना करनी चाही है, जब मैं जानता था कि जितना मैं अपने आप को दे चुका हूँ, परमेश्वर मुझे उससे और अधिक देने के लिए कह रहा है, इस विचार के साथ कि मैं लगभग पर्याप्त कर तो चुका हूँ। परन्तु चट्टानों के निकट बने वे घर जिन्हें छोड़ना पड़ा, मुझे सिखाते हैं कि “लगभग” आज्ञाकारिता के दृष्टिकोण से अपर्याप्त ही होता है, अनाज्ञाकारिता होता है।

      उनके समान होने के लिए जिन्होंने अपने घर ऐसी दृढ़ नींव पर बनाए जो आँधी-तूफानों का सामना कर सकें, हमें अपने जीवन प्रभु यीशु मसीह के वचनों की पूर्ण आज्ञाकारिता की चट्टान पर बनाने चाहिएँ। - कर्सटिन होम्बर्ग


जीवन की एकमात्र स्थिर नींव परमेश्वर का वचन है।

बवण्डर निकल जाते ही दुष्ट जन लोप हो जाता है, परन्तु धर्मी सदा लों स्थिर है। - नीतिवचन 10:25

बाइबल पाठ: लूका 6:46-49
Luke 6:46 जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो?
Luke 6:47 जो कोई मेरे पास आता है, और मेरी बातें सुनकर उन्हें मानता है, मैं तुम्हें बताता हूं कि वह किस के समान है
Luke 6:48 वह उस मनुष्य के समान है, जिसने घर बनाते समय भूमि गहरी खोदकर चट्टान की नेव डाली, और जब बाढ़ आई तो धारा उस घर पर लगी, परन्तु उसे हिला न सकी; क्योंकि वह पक्का बना था।
Luke 6:49 परन्तु जो सुनकर नहीं मानता, वह उस मनुष्य के समान है, जिसने मिट्टी पर बिना नेव का घर बनाया। जब उस पर धारा लगी, तो वह तुरन्त गिर पड़ा, और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20



शनिवार, 1 जून 2019

सब कुछ


      बहुधा, जो कार्य मेरे सामने होते हैं, उन्हें करने के लिए मैं अपने आप को पूर्णतः अयोग्य पाता हूँ। वह चाहे सन्डे स्कूल में पढ़ाना हो, किसी मित्र को परामर्श देना हो, या इस पुस्तिका के लिए लिखना हो, मुझे सदा ही यह लगता है कि चुनौती मेरी क्षमता से बढ़कर है। पतरस के समान मुझे भी अभी बहुत कुछ सीखना है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु मसीह के शिष्य पतरस के जीवन से देखते हैं कि प्रभु का अनुयायी बनकर चलने के प्रयास में उसके जीवन में बहुत सी कमियां थीं। प्रभु की अनुमति के साथ पानी पर चलने में उसका विश्वास डगमगा गया और वह डूबने लगा (मत्ती 14:25-31)। जब प्रभु यीशु मसीह को पकड़वाया गया, पतरस ने शपथ खाकर इन्कार किया कि वह प्रभु को जानता है, प्रभु के साथ रहा है (मरकुस 14:66-72)। किन्तु प्रभु यीशु मसीह के मृतकों में से पुनरुत्थान के बाद उसके साथ पतरस के साक्षात्कार तथा पवित्र आत्मा की सामर्थ्य ने पतरस के जीवन को बदल दिया।

      पतरस को समझ आ गया कि प्रभु परमेश्वर कि “उसकी ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है” (2 पतरस 1:3)। यह एक अद्भुत कथन है, विशेषतः तब जब यह उस व्यक्ति द्वारा कहा गया है जिसके अपने जीवन में बहुत कमज़ोरियां थीं।

      प्रभु परमेश्वर ने “हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ” (2 पतरस 1:4)।

      प्रभु यीशु मसीह के साथ हमारा संबंध वह स्त्रोत है जिससे हमें बुद्धिमत्ता, धैर्य, तथा वह सामर्थ्य प्राप्त होती है जिससे हम परमेश्वर की महिमा, तथा औरों की सहायता कर सकते हैं और अपने प्रतिदिन के जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उस ही के द्वारा हम अपनी हिचकिचाहट और अयोग्य नोने की भावनाओं पर भी जय पा सकते हैं।

      हर परिस्तिथि में प्रभु की सेवा और महिमा करने के लिए जो कुछ हमें चाहिए, वह सब कुछ उसने हमें प्रभु यीशु में प्रदान किया है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर का वायदा है कि हमारे जीवनों से उसकी महिमा करने के लिए जो कुछ भी आवश्यक है, 
वह सब उसने हमें प्रदान कर दिया है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1: 1-11
2 Peter 1:1 शमौन पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्होंने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धामिर्कता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्त किया है।
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ।
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ।
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह की पहचान में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे।
2 Peter 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 15-16
  • यूहन्ना 12:27-50



शुक्रवार, 31 मई 2019

प्रार्थना



      किन्तसुगी एक प्राचीन जापानी कला है, टूटे हुए चीनी-मिट्टी के बर्तनों की मरम्मत करने की। इस मरम्मत के कार्य में राल या धूना के साथ सोने की धूल मिलाकर टूटे हुए टुकड़ों को आपस में जोड़ा जाता है और उनके बीच की दरारों को भरा जाता है, जिससे एक बहुत असाधारण और मजबूत जोड़ बनता है। इस कला के द्वारा मरम्मत को छुपाया नहीं जाता है वरन उस टूटेपन को एक सुन्दर कलाकृति में परिवर्तित कर दिया जाता है।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि यदि हम अपने किसी पाप के प्रति वास्तव में पश्चातापी होते हैं तो परमेश्वर भी हमारे उस टूटेपन की कदर करता है। जब दाऊद ने बतशेबा के साथ व्यभिचार का पाप किया और उसके पति को मरवाने का षडयंत्र रचा, तो नातान नबी ने उसे उसका पाप स्मरण करवाया, और दाऊद ने पश्चाताप किया। इसके बाद दाऊद द्वारा की गई प्रार्थना हमें अंतःदृष्टि प्रदान करती है कि यदि हम पाप कर बैठें तो परमेश्वर हम से क्या चाहता है: “क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता। टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता” (भजन 51:16-17)।

      जब हमारा हृदय किसी पाप को लेकर टूटता है, तो परमेश्वर प्रभु यीशु द्वारा कलवारी के क्रूस पर दिए गए बलिदान से मिलने वाली अमूल्य क्षमा से उस टूटेपन को जोड़ता और भरता है। जब हम अपने आप को उसके सामने दीन करते हैं तो वह हमें प्रेम सहित स्वीकार करता है, और उसके साथ हमारा संबंध बहाल हो जाता है।

      परमेश्वर कितना दयालु है! वह हम से एक दीन और नम्र हृदय चाहता है, जिससे वह अपनी करुणा की सुन्दरता से हमें सुधार और संवार सके। बाइबल की एक अन्य प्रार्थना: “हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले! और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!” (भजन 139:23-24) आज हमारी भी प्रार्थना हो। - जेम्स बैंक्स


ईश्वरीय पश्चाताप से परम आनन्द की प्राप्ति होती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: भजन 51
Psalms 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
Psalms 51:2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
Psalms 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
Psalms 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
Psalms 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
Psalms 51:14 हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा।
Psalms 51:15 हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।
Psalms 51:16 क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।
Psalms 51:17 टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।
Psalms 51:18 प्रसन्न हो कर सिय्योन की भलाई कर, यरूशलेम की शहरपनाह को तू बना,
Psalms 51:19 तब तू धर्म के बलिदानों से अर्थात सर्वांग पशुओं के होमबलि से प्रसन्न होगा; तब लोग तेरी वेदी पर बैल चढ़ाएंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26