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Friday, November 30, 2012

किया; करेंगे


   कुछ अधिक पुरानी बात नहीं है, जब संसार भर में इसाई समाज में "WWJD - What Would Jesus Do"  अर्थात "यीशु ऐसे में क्या करते" का नारा बहुत प्रचलित हुआ। लोग यह नारा लिखे हुए कड़े पहने रहते थे, इस आशय से कि वह कड़ा और उस पर लिखा नारा उनके लिए एक स्मरण कराने का माध्यम होगा - जब वे कठिन परिस्थितियों में या किसी दुविधा में हों तो कोई भी निर्णय लेने से पहले विचार कर लें कि यदि प्रभु यीशु उस परिस्थित में होते तो क्या करते, और फिर उसी के अनुसार अपना निर्णय लें। जब हम अपने उद्धाकर्ता प्रभु को आदर और महिमा देने वाला जीवन जीने के प्रयत्नशील रहते हैं तो हमारे लिए यह भी आवश्यक है कि हम अपने निर्णयों और प्रवृतियों को अपने प्रभु द्वारा दिए गए उदाहरणों के अनुकूल रखें।

   हाल ही में मैं एक चर्च में था जहां मुझे इस नारे से मिलता-जुलता किंतु कुछ भिन्न संदेश लिखा मिला। वहां लिखा था "WDJD - What Did Jesus Do?" अर्थात, "यीशु ने क्या करके दिया है?" यह वास्तव में अधिक महत्वपुर्ण प्रश्न है, क्योंकि इस प्रश्न के उत्तर के प्रति गंभीरता और समझदारी में ही हमारा भविष्य निहित है। अपने संसार के जीवन काल में जो कुछ प्रभु यीशु ने किया, उसमें से सबसे महत्वपुर्ण और उसके संसारमें आने का एकमात्र उद्देश्य वह है जिसके बारे में हम १ कुरिन्थियों १५:३-४ में लिखा पाते हैं: "...पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।"

   प्रभु यीशु ने क्या करके दिया है? उसने हमारे पापों और अपराधों का दोष अपने ऊपर लेकर हमारे स्थान पर उनका दण्ड सहा; वह हमारे स्थान पर मारा गया और फिर मुर्दों में से जी उठा; वह हमारे लिए पाप और मृत्यु पर जयवन्त हुआ जिससे अब हम जो उस पर विश्वास करते और स्वेच्छा से उसे अपना जीवन समर्पित करते हैं उसकी धार्मिकता और उसके जीवन के भागी हो जाएं। सच्चाई यही है कि जब तक प्रभु यीशु ने हमारे लिए जो करके दे दिया है हम उसे स्वीकार ना कर लें,  तब तक हम कभी वह समझ नहीं पाएंगे जो वह हमारे जीवनों में कर सकता है और करेगा।

   हम सब के जीवनों में "WWJD" तथा "WDJD" दोनो ही महत्वपूर्ण हैं, किंतु सबसे महत्वपूर्ण है प्रभु यीशु के प्रति हमारा रवैया और उसके साथ हमारा संबंध। प्रभु के प्रति सही रवैये और उससे सही संबंध के बाद ही हम जो प्रभु ने किया और जो वह करेगा उसके यथार्त एवं महत्व को वास्तव में जान सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारा उद्धार हमारे द्वारा करे गए कार्यों से नहीं वरन प्रभु यीशु द्वारा करे गए कार्य से है।

इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। - १ कुरिन्थियों १५:३-४

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १५:१-११
1Co 15:1  हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। 
1Co 15:2  उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। 
1Co 15:3 इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। 
1Co 15:4 और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। 
1Co 15:5  और कैफा को तब बारहों को दिखलाई दिया। 
1Co 15:6  फिर पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए। 
1Co 15:7  फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया। 
1Co 15:8  और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्मा हूं। 
1Co 15:9  क्‍योंकि मैं प्ररितों में सब से छोटा हूं, वरन प्ररित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्‍योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। 
1Co 15:10 परन्‍तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्‍तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। 
1Co 15:11  सो चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्वास भी किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३७-३९ 
  • २ पतरस २


Thursday, November 29, 2012

वर्तमान


   यदि आपकी प्रवृति अपने खोए हुए अवसरों के बारे में, या फिर भविष्य के बारे में आकुल रहने की है तो अपने आप से एक प्रश्न पूछिए - "मेरे समक्ष इस समय क्या है?" दूसरे शब्दों में, अब इस समय मुझे क्या अवसर और विकल्प उपलब्ध हैं? इस प्रश्न के द्वारा आप अपना ध्यान किसी बीते समय के पछतावे या आते समय की अनिश्चितता के भय से हटा कर, वर्तमान और वर्तमान में परमेश्वर द्वारा संभव बातों पर केंद्रित कर सकते हैं।

   यह वही प्रश्न है जो परमेश्वर ने बाइबल के एक नायक मूसा से पूछा था। मूसा परेशान था; वह अपनी कमज़ोरियों से अवगत था, उसने इस्त्राएल को मिस्त्र की बन्धुवाई से निकाल कर लाने की परमेश्वर द्वारा दी गई बुलाहट के लिए अपना भय और अयोग्यता परमेश्वर के सामने व्यक्त करी। तब परमेश्वर ने मूसा से एक प्रश्न किया: "...तेरे हाथ में वह क्या है?" (निर्गमन ४:२)। परमेश्वर ने मूसा का ध्यान उसकी अपनी अयोग्यताओं, असमर्थताओं तथा भविष्य को लेकर उसकी चिंताओं से हटा कर वह जो उसके पास अभी था - चरवाहे की लाठी, उसी पर केंद्रित किया। मूसा को परमेश्वर ने दिखाया कि यदि उसके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन हो तो वह एक साधारण लाठी में हो कर भी अपनी सामर्थ और आश्चर्यकर्म प्रगट कर सकता है, जिससे अविश्वासी लोग विश्वास कर सकें। आगे चलकर हम देखते हैं कि जैसे जैसे मूसा का विश्वास परमेश्वर में बढ़ता गया, वैसे वैसे ही परमेश्वर की सामर्थ द्वारा मूसा और भी अधिक बड़े बड़े आश्चर्यकर्म करता गया।

   क्या आप पिछली असफलताओं के बारे में चिंतित और विचारमग्न रहते हैं? क्या भविश्य को लेकर आपके मन में चिंताएं रहती हैं? परमेश्वर द्वारा मूसा से किए गए प्रश्न पर विचार कीजिए - "...तेरे हाथ में वह क्या है?" आपको विचलित करने वाली अपनी प्रत्येक परिस्थिति और बात को परमेश्वर के हाथों में सौंप दीजिए और उसके निर्देषों का पालन कीजिए जिससे वह आपके भले और अपनी महिमा के लिए आपके वर्तमान का प्रयोग कर सके। उसकी सामर्थ पर विश्वास किजिए, उसे अपने जीवन में अवसर दीजिए। बीते और आने वाले कल के कारण अपने वर्तमान को मत बिगाड़िए। - डेनिस फिशर


ना बदले जा सकने वाले भूतकाल और अनजाने भविष्य की चिंता कर के आप अपने वर्तमान को केवल बरबाद ही कर सकते हैं।

यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी। - निर्गमन ४:२

बाइबल पाठ: निर्गमन ४:१-१२
Exo 4:1  तब मूसा ने उतर दिया, कि वे मेरी प्रतीति न करेंगे और न मेरी सुनेंगे, वरन कहेंगे, कि यहोवा ने तुझ को दर्शन नहीं दिया। 
Exo 4:2  यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी। 
Exo 4:3  उस ने कहा, उसे भूमि पर डाल दे? जब उस ने उसे भूमि पर डाला तब वह सर्प बन गई, और मूसा उसके साम्हने से भागा। 
Exo 4:4  तब यहोवा ने मूसा से कहा, हाथ बढ़ाकर उसकी पूंछ पकड़ ले कि वे लोग प्रतीति करें कि तुम्हारे पितरों के परमेश्वर अर्थात इब्राहीम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर, और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने तुझ को दर्शन दिया है। 
Exo 4:5  तब उस ने हाथ बढ़ाकर उसको पकड़ा तब वह उसके हाथ में फिर लाठी बन गई। 
Exo 4:6  फिर यहोवा ने उस से यह भी कहा, कि अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप। सो उस ने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; फिर जब उसे निकाला तब क्या देखा, कि उसका हाथ कोढ़ के कारण हिम के समान श्वेत हो गया है। 
Exo 4:7  तब उस ने कहा, अपना हाथ छाती पर फिर रखकर ढांप। और उस ने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; और जब उस ने उसको छाती पर से निकाला तब क्या देखता है, कि वह फिर सारी देह के समान हो गया। 
Exo 4:8  तब यहोवा ने कहा, यदि वे तेरी बात की प्रतीति न करें, और पहिले चिन्ह को न मानें, तो दूसरे चिन्ह की प्रतीति करेंगे। 
Exo 4:9  और यदि वे इन दोनों चिन्हों की प्रतीति न करें और तेरी बात को न मानें, तब तू नील नदी से कुछ जल लेकर सूखी भूमि पर डालना; और जो जल तू नदी से निकालेगा वह सूखी भूमि पर लोहू बन जाथेगा। 
Exo 4:10  मूसा ने यहोवा से कहा, हे मेरे प्रभु, मैं बोलने में निपुण नहीं, न तो पहिले था, और न जब से तू अपने दास से बातें करने लगा; मैं तो मुंह और जीभ का भद्दा हूं। 
Exo 4:11  यहोवा ने उस से कहा, मनुष्य का मुंह किस ने बनाया है? और मनुष्य को गूंगा, वा बहिरा, वा देखने वाला, वा अन्धा, मुझ यहोवा को छोड़ कौन बनाता है? 
Exo 4:12  अब जा, मैं तेरे मुख के संग होकर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३५-३६ 
  • २ पतरस १

Wednesday, November 28, 2012

स्वर्ग में अर्जन

   लोगों को विभिन्न प्रकार की वस्तुएं एकत्रित करने के शौक होते हैं - सिक्के, डाकटिकट, बेसबॉल कार्ड इत्यादि। यह एकत्रित करने की रुचि एक अच्छा शौक हो सकती है, किंतु गंभीरता की बात यह है कि जब हम इस पृथ्वी से कूच करेंगे तो हमारे ये सभी संग्रह यहीं रह जाएंगे, अन्य किसी की संपत्ति हो जाएंगे। ऐसे संग्रह का क्या महत्व और क्या मूल्य जिसकी कीमत केवल पृथ्वी पर ही हो परन्तु स्वर्ग में जिसकी कोई कीमत ना हो?

   प्रभु यीशु ने ऐसे संचय के विषय में अपने चेलों से कहा: "अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं" (मत्ती ६:१९, २०)।

   अनन्त धन का मूल्य ही असल मूल्य है क्योंकि वह कभी बदलता या घटता नहीं है; ना वह चुराया जा सकता है और ना ही नष्ट हो सकता है। यह स्वर्गीय धन जमा करने वाले के नाम पर ही सदा के लिए रखा रहता है। विचारने की बात यह है कि उस अवश्यंभावी आते स्वर्गीय समय और स्थान के लिए हम केवल अभी पृथ्वी के अपने वर्तमान जीवन में ही उस धन का संचय कर सकते हैं। यह संचय कैसे किया जाता है? हमारे परमेश्वर की आज्ञाकारिता में किए गए सेवा कार्यों द्वारा; प्रभु यीशु के द्वारा पापों की क्षमा के सुसमाचार को दूसरों तक पहुंचाने के द्वारा; दुखी और बोझ से दबे लोगों को प्रभु यीशु में मिलने वाले आराम और शांति तक लाने के द्वारा; दूसरों पर प्रभु यीशु के समान दया और प्रेम के व्यवहार के द्वारा; प्रभु यीशु द्वारा सिखाए तथा बताए जीवन को संसार के सामने जी कर दिखाने के द्वारा।

   मरकुस रचित सुसमाचार में एक वृतांत है जिसमें एक धनी जवान ने प्रभु यीशु के पास आकर अनन्त जीवन का मार्ग जानना चाहा। प्रभु ने उससे कहा कि जो कुछ तेरे पास है उसे बेच कर कंगालों में बांट दे और मेरे पीछे हो ले। यह सुनकर वह धनी जवान अपना मुंह लटकाए दुखी होकर लौट गया (मरकुस १०:१७-२३)। उस धनी जवान की प्रतिक्रीया ने दिखा दिया कि उसके जीवन में वास्तविक महत्व किस चीज़ का था - धन-संपत्ति का या स्वर्गीय जीवन का।

   पार्थिव वस्तुओं और नाशमान धन-संपत्ति पर मन लगाना और उनको अर्जित करने के प्रयास में लगे रहना बहुत सहज तथा सामान्य है। परन्तु जब आप प्रभु यीशु को अपना जीवन स्वेच्छा से समर्पित करके उसका अनुसरण करने का निर्णय ले लेते हैं तो वह अनन्त कालीन धन-संपत्ति को स्वर्ग में अर्जित करने के आनन्द से आपको परिचित कराता है। स्वर्ग में अर्जन के उस आनन्द के समान संसार का कोई आनन्द नहीं और स्वर्गीय धन के समान संसार के किसी धन का कोई मूल्य नहीं।

   आज ही से स्वर्ग में अर्जन आरंभ कर दीजिए - केवल यही अनन्त काल तक काम आएगा। - जो स्टोवैल


पार्थिव को ढीले और स्वर्गीय को दृढ़ता से थामे रहें।

अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। - मत्ती ६:१९, २०

बाइबल पाठ: मत्ती ६:१९-३४
Mat 6:19  अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। 
Mat 6:20 परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। 
Mat 6:21 क्‍योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा। 
Mat 6:22  शरीर का दिया आंख है: इसलिये यदि तेरी आंख निर्मल हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा। 
Mat 6:23 परन्‍तु यदि तेरी आंख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्‍धि्यारा होगा; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्‍धकार हो तो वह अन्‍धकार कैसा बड़ा होगा। 
Mat 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते। 
Mat 6:25  इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Mat 6:26  आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्‍या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते? 
Mat 6:27  तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? 
Mat 6:28  और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो; जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Mat 6:29  तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Mat 6:30  इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहिनाएगा? 
Mat 6:31  इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे? 
Mat 6:32  क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिए। 
Mat 6:33  इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी। 
Mat 6:34  सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्‍योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३३-३४ 
  • १ पतरस ५

Tuesday, November 27, 2012

एबेनेज़र


   एक पुराना स्तुति गीत है "हे प्रभु आशीष के सोते" जो परमेश्वर के साथ मसीही विश्वासी की जीवन यात्रा के अनुभवों पर आधारित है। इस गीत में एक शब्द प्रयुक्त हुआ है ’एबेनेज़र’; यह शब्द परमेश्वर की प्रजा इस्त्राएल के उस अनुभव से लिया गया जब वे लोग अपने परमेश्वर के साथ के उनके निकट संबंध पूर्वसमान बनाने के प्रयास कर रहे थे। उनके आत्मिक अगुवे शमूएल ने उन्हें कहा कि यदि वे उन पराए देवताओं को, जिन्हें उन्होंने अपना लिया है, तज कर पूरे मन और सच्चे समर्पण के साथ परमेश्वर के पास वापस लौट आएंगे, तो वह उन्हें उनके आताताई पलिश्ति लोगों के आतंक से बचा लेगा (१ शमूएल ७:३)।

   जब उन लोगों ने ऐसा किया और अपने पापों से पश्चाताप किया, तब परमेश्वर ने उन्हें विजय दी।  इस विजय के उपलक्ष्य में "तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेजेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है (१ शमूएल ७:१२)।"

   आज जब स्तुति गीत में हम गाते हैं कि, "एबेनेज़र तू मसीहा, हुआ मेरा तारणहार; इससे मैं भी पार उतरूँगा, शोक समुन्दर के उस पार" तो हम स्मरण करते हैं कि अपनी कमी घटी और आवश्यक्ता के समय में
हम भी पश्चाताप और समर्पण के साथ परमेश्वर की ओर लौट सकते हैं और वह हमारी सहायता करेगा। हमने चाहे जो भी किया हो, हम चाहे कहीं भी भटक गए हों, उसका अनुग्रह हमारे लिए उपलब्ध है और वह हमें, जो उसकी सन्तान हैं, सदा ही बहाल करने की चाह रखता है।

   अपने मनों में परमेश्वर के वचन को बसा लें, उसे अपना एबेनेज़र बना लें, और सदा स्मरण रखें कि जिस परमेश्वर ने आज तक और यहां तक आपको संभाला है, आपकी हर परिस्थिति में वह केवल एक प्रार्थना भर की दूरी पर आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है, इसलिए हमें भविष्य का भय नहीं।

...यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है। - १ शमूएल ७:१२

बाइबल पाठ: १ शमूएल ७:३-१४
1Sa 7:3  तब शमूएल ने इस्राएल के सारे घराने से कहा, यदि तुम अपने पूर्ण मन से यहोवा की ओर फिरे हो, तो पराए देवताओं और अश्तोरेत देवियों को अपने बीच में से दूर करो, और यहोवा की ओर अपना मन लगाकर केवल उसी की उपासना करो, तब वह तुम्हें पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाएगा। 
1Sa 7:4  तब इस्राएलियों ने बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों को दूर किया, और केवल यहोवा ही की उपासना करने लगे।
1Sa 7:5  फिर शमूएल ने कहा, सब इस्राएलियों को मिस्पा में इकट्ठा करो, और मैं तुम्हारे लिये यहोवा से प्रार्थना करूंगा। 
1Sa 7:6  तब वे मिस्पा में इकट्ठे हुए, और जल भरके यहोवा के साम्हने उंडेल दिया, और उस दिन उपवास किया, और वहां कहने लगे, कि हम ने यहोवा के विरूद्ध पाप किया है। और शमूएल ने मिस्पा में इस्राएलियों का न्याय किया। 
1Sa 7:7  जब पलिश्तियों ने सुना कि इस्राएली मिस्पा में इकट्ठे हुए हैं, तब उनके सरदारों ने इस्राएलियों पर चढ़ाई की। यह सुनकर इस्राएली पलिश्तियों से भयभीत हुए। 
1Sa 7:8  और इस्राएलियों ने शमूएल से कहा, हमारे लिये हमारे परमेश्वर यहोवा की दोहाई देना न छोड़, जिस से वह हम को पलिश्तियों के हाथ से बचाए। 
1Sa 7:9  तब शमूएल ने एक दूधपिउवा मेम्ना ले सर्वांग होमबलि करके यहोवा को चढ़ाया; और शमूएल ने इस्राएलियों के लिये यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसकी सुन ली। 
1Sa 7:10  और जिस समय शमूएल होमबलि हो चढ़ा रहा था उस समय पलिश्ती इस्राएलियों के संग युद्ध करने के लिये निकट आ गए, तब उसी दिन यहोवा ने पलिश्तियों के ऊपर बादल को बड़े कड़क के साथ गरजाकर उन्हें घबरा दिया, और वे इस्राएलियों से हार गए। 
1Sa 7:11  तब इस्राएली पुरूषों ने मिस्पा से निकल कर पलिश्तियों को खदेड़ा, और उन्हें बेतकर के नीचे तक मारते चले गए। 
1Sa 7:12  तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेजेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है। 
1Sa 7:13  तब पलिश्ती दब गए, और इस्राएलियों के देश में फिर न आए, और शमूएल के जीवन भर यहोवा का हाथ पलिश्तियों के विरूद्ध बना रहा। 
1Sa 7:14  और एक्रोन और गत तक जितने नगर पलिश्तियों ने इस्राएलियों के हाथ से छीन लिए थे, वे फिर इस्राएलियों के वश में आ गए; और उनका देश भी इस्राएलियों ने पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाया। और इस्राएलियों और एमोरियों के बीच भी सन्धि हो गई।

एक साल में बाइबल: 

  • सभोपदेशक १-३ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१६-३३

Monday, November 26, 2012

उन्नत पाठ


   हमारी प्रवृत्ति है कि हम अपने दिन और समय को उपखंडों में बांट लेते हैं और फिर उन उपखंडों को विभिन्न गतिविधियों से भर लेते हैं, जैसे इस समय में घर का कार्य, इस समय में बाहर का कार्य, जीविका के कार्य के लिए यह समय, बच्चों की देखभाल के लिए वह समय आदि। इस सब के बाद फिर हम आत्मिक गतिविधियों के लिए समय निकालने के प्रयास करते हैं जिससे चर्च जाना, प्रार्थना सभा और बाइबल अध्ययन में सम्मिलित होना संभव हो सके। हमारे लिए ये आत्मिक गतिविधियां, सांसारिक गतिविधियों से अधिक महत्वपुर्ण शायद ही कभी होती हों।

   परन्तु जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता में लिखे भजनों को पढ़ता हूँ तो मुझे इस प्रकार जीवन को उपखंडों में बांटकर उसका उपयोग करना और फिर आत्मिक बातों के लिए समय निकालने का प्रयास करना कहीं दिखलाई नहीं देता। वरन मैं पाता हूँ कि भजनकार दाऊद तथा अन्य भजन लेखकों ने तो परमेश्वर को अपने जीवन का केंद्र बिंदु बना रखा था और इनके जीवन की हर गतिविधि परमेश्वर से जुड़ी होती थी। उनके लिए परमेश्वर कि आराधना और उपासना जीवन का मूल कार्य थी, ना कि कोई ऐसा कार्य जिसके लिए अन्य बातों से कुछ समय निकाल कर एक औपचारिकता पूरी कर ली जाए और फिर वापस उन्हीं बातों में व्यस्त हो जाएं। उन भजनकारों के समान आशीषित होने के लिए अपनी प्राथमिकताओं का ऐसा ही निर्धारण आज हमारे लिए भी अति आवश्यक है। हमें परमेश्वर को अपने जीवन और कार्य की हर बात से संबंधित रखना चाहिए तब ही उसका मार्गदर्शन और आशीष हमारे जीवन के हर कार्य पर होगी।

   मेरे लिए ये भजन परमेश्वर को अपने जीवन में केंद्रीय स्थान पर रखने की प्रेर्णा के स्त्रोत हो गए हैं। उन भजनकारों की परमेश्वर के लिए तीव्र भूख-प्यास और लालसा के सामने परमेश्वर के लिए मेरी अपनी भूख-प्यास और लालसा बिलकुल फीकी प्रतीत होती है। हरिणी जैसे जल के लिए हांफती है वैसे ही वे परमेश्वर के लिए हांफते थे (भजन ४२:१-२); वे रात भर जागते थे और परमेश्वर की मनोहरता पर मनन करते रहते थे (भजन २७:४); उनके लिए हज़ार वर्ष किसी अन्य स्थान पर बिताने से अच्छा था परमेश्वर की उपस्थिति में एक दिन बिता लेना (भजन ८४:१०)।

   ऐसा लगता है कि ये भजनकार परमेश्वर की पहचान की किसी उन्नत पाठशाला में रहते और अध्ययन करते थे। उनके लिखे भजन पढ़ने, मनन करने और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में लागू करने से उस उन्नत पाठशाला के वे उन्नत पाठ हमारे जीवनों में भी आ सकते हैं। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर को पूर्णतः समर्पित हृदय ही परमेश्वर के लिए उपयोगी हृदय हो सकता है।

यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? - भजन २७:१

बाइबल पाठ: भजन २७
Psa 27:1  यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psa 27:2  जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psa 27:3  चाहे सेना भी मेरे विरूद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरूद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचित रहूंगा।
Psa 27:4  एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psa 27:5  क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्तस्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psa 27:6  अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा और उसका भजन गाऊंगा।
Psa 27:7  हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psa 27:8  तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psa 27:9  अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध करके न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psa 27:10  मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psa 27:11  हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psa 27:12  मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरूद्ध उठे हैं।
Psa 27:13  यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psa 27:14  यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २७-२९ 
  • १ पतरस ३

Sunday, November 25, 2012

धन्यवादी


   घर पर परमेश्वर के धन्यवादी होने का पर्व मनाने और एक साथ भोजन करने के लिए परिवार के सभी सदस्य एकत्रित थे, भोजन के लिए मेज़ पर आकर बैठे हुए थे। उन्हें देखकर और उनकी विभिन्न योग्यताओं के बारे में सोचकर मैं प्रसन्न थी और मुस्कुरा रही थी। मेज़ पर डॉकटर भी थे और संगीतज्ञ भी। मैं चिकित्सकों के लिए भी धन्यवादी थी क्योंकि उनके द्वारा हमारे शरीर स्वस्थ बने रहते हैं, और संगीतज्ञों के लिए भी क्योंकि उनके संगीत से मन प्रफुल्लित होता है तथा विचलित मस्तिष्क शांति पाते हैं।

   डॉकटरों और संगीतज्ञों की योग्यताएं एक दूसरे से बहुत भिन्न हैं, किंतु उन दोनो के कार्य का प्रभावी होना एक ही बात पर निर्भर करता है - व्यवस्थित, क्रमबद्ध और सुचारू रूप से कार्यकारी संसार। यदि संसार में व्यवस्था और क्रमबद्धता नहीं होगी तो किसी बात का पूर्वानुमान संभव नहीं होगा; यदि पूर्वानुमान सही नहीं होगा तो ना संगीत बनेगा और ना ही चिकित्सा कार्यकारी होगी।

   जब परमेश्वर ने सृष्टि की रचना करी तो सब कुछ व्यवस्थित, क्रमबद्ध और सुचारू था। एक व्यवस्थित और क्रमबद्ध संसार में रोग इस बात का सूचक है कि कुछ अव्यवस्थित है; क्रमानुसार नहीं है। इसके विपरीत चंगाई इस बात का सूचक है कि अब व्यवस्था और क्रमबद्धता पुनः स्थापित हो गई है। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने जानना चाहा कि क्या यीशु ही वह आने वाला उद्धारकर्ता है तो प्रभु यीशु ने उन सन्देशवाहकों से कहा: "...जो कुछ तुम ने देखा और सुना है, जाकर यूहन्ना से कह दो; कि अन्‍धे देखते हैं, लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है" (लूका ७:२२)। यह विभिन्न प्रकार कि चंगाई इस बात का प्रमाण थी कि यीशु ही वह उद्धारकर्ता है जिसकी संसार बाट जोह रहा था (मलाकी ४:२) और जो सब कुछ संसार के पाप में बिगड़ने से पहले के समान बहाल कर देगा (प्रेरितों ३:२१)।

   मैं संगीत के लिए भी धन्यवादी हूँ जो मेरे विचलित मन-मस्तिष्क को शांति देता है, और चिकित्सा के साधनों के लिए भी जिनसे मेरा शरीर स्वस्थ रहता है। यह मुझे स्मरण दिलाते रहते हैं कि मेरे प्रभु यीशु में मुझे और संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी को पापों से क्षमा, पाप के दण्ड से मुक्ति तथा परमेश्वर के साथ अनन्त काल की शांति और बहाली सेंत-मेंत मिली है। यही आशीषें उन सबके लिए भी ऐसे ही सेंत-मेंत उपलब्ध हैं जो प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं और उसे अपने निज उद्धारकर्ता ग्रहण कर लेते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु पाप से बिगड़े हुओं को सुधारने और बहाल करने का विशेषज्ञ है।

परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे। - मलाकी ४:२

बाइबल पाठ: लूका ७:११-२३
Luk 7:11  थोड़े दिन के बाद वह नाईन नाम के एक नगर को गया, और उसके चेले, और बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी। 
Luk 7:12  जब वह नगर के फाटक के पास पहुंचा, तो देखो, लोग एक मुरदे को बाहर लिए जा रहे थे, जो अपनी मां का एकलौता पुत्र था, और वह विधवा थी: और नगर के बहुत से लोग उसके साथ थे। 
Luk 7:13  उसे देख कर प्रभु को तरस आया, और उस ने कहा; मत रो। 
Luk 7:14  तब उस ने पास आकर, अर्थी को छुआ; और उठाने वाले ठहर गए, तब उस ने कहा, हे जवान, मैं तुझ से कहता हूं, उठ। 
Luk 7:15  तब वह मुरदा उठ बैठा, और बोलने लगा: और उस ने उसे उस की मां को सौप दिया। 
Luk 7:16  इस से सब पर भय छा गया; और वे परमेश्वर की बड़ाई करके कहने लगे कि हमारे बीच में एक बड़ा भविष्यद्वक्ता उठा है, और परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपा दृष्‍टि की है। 
Luk 7:17  और उसके विषय में यह बात सारे यहूदिया और आस पास के सारे देश में फैल गई।
Luk 7:18  और यूहन्ना को उसके चेलों ने इन सब बातों का समचार दिया। 
Luk 7:19  तब यूहन्ना ने अपने चेलों में से दो को बुलाकर प्रभु के पास यह पूछने के लिये भेजा, कि क्‍या आने वाला तू ही है, या हम किसी और दूसरे की बाट देखें? 
Luk 7:20  उन्‍होंने उसके पास आकर कहा, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने हमें तेरे पास यह पूछने को भेजा है, कि क्‍या आने वाला तू ही है, या हम दूसरे की बाट जोहें?
Luk 7:21  उसी घड़ी उस ने बहुतों को बीमारियों और पीड़ाओं, और दुष्‍टात्माओं से छुड़ाया, और बहुत से अन्‍धों को आंखे दी। 
Luk 7:22  और उस ने उन से कहा, जो कुछ तुम ने देखा और सुना है, जाकर यूहन्ना से कह दो; कि अन्‍धे देखते हैं, लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है। 
Luk 7:23  और धन्य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २४-२६ 
  • १ पतरस २

Saturday, November 24, 2012

धन्यवादी मन


   एना एंडरसन के पति की मृत्यु विवाह के कुछ वर्षों में ही हो गई थी। पति की मृत्यु के पश्चात एना के पास तीन छोटी बेटियां और सामने एक कठिन भविष्य था। यद्यपि एना ने विर्जीनीया प्रांत में शिक्षिका का कार्य करने का प्रशिक्षण पाया था, किंतु फिलेडेल्फिया प्रांत में शिक्षिका का कार्य करने के लिए वह पूर्णतः योग्य नहीं थी। इस कारण उसे घर चलाने के लिए अन्य कामों का सहारा लेना पड़ा; वह लोगों के कपड़े धोती थी, कपड़े प्रेस करती थी, फिर बचे समय में बड़ी दुकानों के फर्श साफ करती थी। अफ्रीकी मूल और अश्वेत रंग की होने के कारण उसे बहुत बार रंग-भेद एवं पक्षपात का सामना करना पड़ता था।

   जब कभी किसी प्रकार के अवसर के दरवाज़े उन पर बन्द हो जाते थे तो एना का विश्वास रहता था कि यदि वे परमेश्वर पर पूर्ण मन से विश्वास रखेंगे और उसकी आधीनता में बने रहेंगे तो वह उनके लिए मार्ग निकालेगा (नीतिवचन ३:५-६)। एना ने अपनी पुत्रियों को भी इसी बात की शिक्षा दी कि वे हर बात में परमेश्वर पर निर्भर रहें, उसके वचन के अनुसार चलें और सदा हर बात में उसके धन्यवादी रहें।

   जब उसकी सबसे बड़ी पुत्री मेरियन ने अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका के स्थान तक उन्नति करी तब भी एना उसकी सफलता के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करती रही और अपनी पुत्री की सारी उपलब्धियों और सफलताओं का श्रेय परमेश्वर को देती रही। मेरियन ने जब सुप्रसिद्ध Metropolitan Opera में अपने सम्मिलित किए जाने का शुभारंभ प्रतिष्ठित कारनेजी हॉल में अपने गायकी के प्रदर्शन के द्वारा किया, तो पत्रकारों ने इस बड़े आदर के बारे में एना से पूछा कि उसे कैसा लग रहा है। एना का उत्तर था, "हम परमेश्वर के बहुत धन्यवादी हैं।" यह कोई आम कथन नहीं वरन एना के मन से निकली परमेश्वर के प्रति सच्ची कृतज्ञता थी।

   बजाए इसके कि वह उन बातों पर विलाप करती जो उसके पास नहीं थीं, एना एंडरसन ने उन बातों के लिए जो उसके पास थीं परमेश्वर का धन्यवाद किया, उनका प्रयोग किया और उनके द्वारा परमेश्वर को महिमा दी।

   आज एना के उदाहरण का हम अनुसरण कर सकते हैं और विश्वास के साथ परमेश्वर और उसके वचन पर आश्वस्त होकर हर बात में उसके धन्यवादी रह सकते हैं, क्योंकि वह सब बातों के द्वारा हमारा भला ही करता है। एक धन्यवादी मन परमेश्वर से बड़े प्रतिफल पाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


कृतज्ञता भक्ति का चिन्ह है।

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। - नीतिवचन ३:५

बाइबल पाठ: नीतिवचन ३:१-१२
Pro 3:1  हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना; अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना; 
Pro 3:2  क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा। 
Pro 3:3  कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएं; वरन उनको अपने गले का हार बनाना, और अपनी हृदयरूपी पटिया पर लिखना। 
Pro 3:4  और तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह पाएगा, तू अति बुद्धिमान होगा।
Pro 3:5  तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। 
Pro 3:6  उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। 
Pro 3:7  अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। 
Pro 3:8  ऐसा करने से तेरा शरीर भला चंगा, और तेरी हड्डियां पुष्ट रहेंगी। 
Pro 3:9  अपनी संपत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की पहिली उपज दे देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना; 
Pro 3:10  इस प्रकार तेरे खत्ते भरे और पूरे रहेंगे, और तेरे रसकुण्डों से नया दाखमधु उमण्डता रहेगा।
Pro 3:11  हे मेरे पुत्र, यहोवा की शिक्षा से मुंह न मोड़ना, और जब वह तुझे डांटे, तब तू बुरा न मानना, 
Pro 3:12  क्योंकि यहोवा जिस से प्रेम रखता है उसको डांटता है, जैसे कि बाप उस बेटे को जिसे वह अधिक चाहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २२-२३ 
  • १ पतरस १

Friday, November 23, 2012

खुली पहुँच


   नवंबर २००९ की घटना है, जब अमरीकी राष्ट्रपति के सुरक्षा घेरे में एक अप्रत्याशित चूक हुई; एक दंपत्ति बड़े रौब के साथ अमरीकी राष्ट्रपति निवास में आयोजित एक भोज में घुस आया, और यहां तक दुस्साहस किया कि उन्होंने राष्ट्रपति के साथ अपनी एक तस्वीर भी खिंचवा ली। साधारणतया इन अतिविशिश्ट लोगों के समीप कोई पहुँच नहीं सकता। जहां ऐसे अतिविशिश्ट लोग आमंत्रित होते हैं वहां सुरक्षा कर्मियों द्वारा आमंत्रित मेहमानों की सूची की पहले ही से बड़ी बारीकी से जाँच की जाती है और बुलाए गए मेहमानों की पृष्ठभूमि और गतिविधियों का व्यापक अध्ययन किया जाता है और अन्दर जाने वालों को पहचान कर ही जाने दिया जाता है जिससे जो आमंत्रित नहीं हैं वे अन्दर पहुँच ना सकें और जो पहुँचें उन से कोई खतरा ना हो।

   हम सामान्य लोगों के लिए स्थान स्थान पर प्रवेश निषेध एक आम बात हो गई है। जगह जगह सूचक चिन्ह लगे होते हैं: ’केवल कर्मचारियों के लिए’; ’प्रवेश निषेध’; ’केवल अधिकृत वाहनों के लिए’; ’इससे आगे जाना वर्जित है’ इत्यादि। हम में से कोई यह सुनना नहीं चाहता कि किसी स्थान पर उसका स्वागत नहीं है, किंतु सत्य यही है कि ऐसे अनेक स्थान होते हैं जहां हमारा स्वागत नहीं होता, हमारे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा होता है। यह मुझे परमेश्वर का और भी अधिक धन्यवादी बनाता है, क्योंकि मेरे उसके पास जाने के लिए कभी कोई प्रतिबन्ध नहीं होता है।

   जो परमेश्वर के पास आना चाहते हैं, उनके लिए कभी कोई प्रतिबन्ध या रुकावट नहीं होती। प्रार्थना द्वारा हम कभी भी और कहीं भी उससे संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि हमारे उद्धाकर्ता प्रभु यीशु ने अपने प्रत्येक विश्वासी को पिता परमेश्वर तक पहुँचने का खुला मार्ग बनाकर दे दिया है (इफिसीयों २:१८)। प्रभु यीशु ने निमंत्रण दिया है: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती ११:२८); "जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना ६:३७); "यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई पियासा हो तो मेरे पास आकर पीए" (यूहन्ना ७:३७)।

   एक बार जब आप मसीह यीशु के पास समर्पण और पश्चाताप के साथ आ जाते हैं और उसे अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेते हैं, उसके साथ आपकी अविरल संगति बनी रहती है और परमेश्वर पास खुली पहुँच का मार्ग सदा उपलब्ध रहता है। - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर का सिंहासन स्थान में प्रवेश उसकी संतान के लिए सदा खुला है।

क्‍योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। - इफिसीयों २:१८

बाइबल पाठ: इफिसीयों २:११-२२
Eph 2:11  इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतनावाले कहलाते हैं, वे तुम को खतनारिहत कहते हैं)। 
Eph 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वररिहत थे। 
Eph 2:13  पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Eph 2:14 क्‍योंकि वही हमारा मेल है, जिस ने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Eph 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्‍पन्न करके मेल करा दे। 
Eph 2:16  और क्रूस पर बैर को नाश करके इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। 
Eph 2:17 और उस ने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्‍हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Eph 2:18 क्‍योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। 
Eph 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्‍तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। 
Eph 2:20  और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिस के कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। 
Eph 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्‍दिर बनती जाती है। 
Eph 2:22  जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवासस्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २०-२१ 
  • याकूब ५

Thursday, November 22, 2012

यथार्थवादी


   कुछ परिस्थितियों के कारण मैं निराश और परेशान थी और सोच रही थी कि कैसे मैं इस नकारत्मक मन्सा से बाहर निकलूँ। मैंने अपनी किताबों की अलमारी से सूज़न लेंज़्किस की पुस्तक Life is Licking Honey Off a Thorn निकाली और पढ़ने लगी। एक स्थान पर मैंने पढ़ा: "आँसू और हँसी, जैसे भी आएं, हम उन्हें स्वीकार करते हैं, और यथार्थ के अपने परमेश्वर पर उनका अर्थ और उद्देश्य समझाना छोड़ देते हैं।"

   उस लेखिका ने लिखा कि कुछ लोग आशावादी होते हैं जो सदा आनन्द और अच्छी यादों में जीते रहते हैं और जीवन की कड़ुवी बातों को नज़रंदाज़ करते हैं। कुछ निराशावादी होते हैं, जो जीवन कि हानियों पर ही ध्यान लगाए रखते हैं और अपने जीवन के आनन्द तथा जय को खो देते हैं। लेकिन जो प्रभु यीशु में सच्चे विश्वास के साथ जीवन जीते हैं वे यथार्थवादी होते हैं और जीवन में मिलने वाले अच्छे-बुरे सब को स्वीकार करते हैं, इस निश्चय के साथ कि प्रभु हमसे प्रेम करता है और हर बात के द्वारा हमारी भलाई और अपनी महिमा उत्पन्न करने के लिए कार्य कर रहा है।

   वह पुस्तक पढ़ते पढ़ते मैंने खिड़की के बाहर देखा तो घने काले बादल घिरे हुए थे और बरसात हो रही थी। कुछ समय के बाद हवा चलने लगी, बादल उड़ गए, स्वच्छ नीला आकाश दिखने लगा और धूप फिर खिल उठी। मैं सोचने लगी जीवन के तूफान भी ऐसे ही आते-जाते रहते हैं।

   हम मसीही विश्वासी रोमियों ८:२८ में दी परमेश्वर कि प्रतिज्ञा को भरोसे के साथ थामे रह सकते हैं "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।" विश्वासी जन क्लेषों से निराश नहीं होते, "क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लि्ये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त जीवन महिमा उत्‍पन्न करता जाता है" (२ कुरिन्थियों ४:१७)।

   परमेश्वर हमसे प्रेम करता है और हमें उस दिन के लिए तैयार कर रहा है जब जीवन की काली घटाएं और तूफान सदा के लिए जाते रहेंगे और परमेश्वर की महिमा तथा उसके प्रेम का प्रकाश अनन्त काल तक हमारे जीवनों को रौशन करता रहेगा। - एने सेटास


परमेश्वर ने मंज़िल पर सुरक्षित पहुँचाने का वायदा किया है, सुखद यात्रा देने का नहीं।

क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त जीवन महिमा उत्‍पन्न करता जाता है। - २ कुरिन्थियों ४:१७

बाइबल पाठ: रोमियों ८:१३-३०
Rom 8:13  क्‍योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रियाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे। 
Rom 8:14   इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। 
Rom 8:15  क्‍योंकि तुम को दासत्‍व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्‍तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्‍बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं। 
Rom 8:16  आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्‍तान हैं। 
Rom 8:17  और यदि सन्‍तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
Rom 8:18  क्‍योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। 
Rom 8:19  क्‍योंकि सृष्‍टि बड़ी आशाभरी दृष्‍टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। 
Rom 8:20  क्‍योंकि सृष्‍टि अपनी इच्‍छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। 
Rom 8:21  कि सृष्‍टि भी आप ही विनाश के दासत्‍व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्‍तानों की महिमा की स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करेगी। 
Rom 8:22  क्‍योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्‍टि अब तक मिलकर कहरती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। 
Rom 8:23   और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कहरते हैं, और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं। 
Rom 8:24  आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्‍तु जिस वस्‍तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्‍योंकि जिस वस्‍तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्‍या करेगा? 
Rom 8:25  परन्‍तु जिस वस्‍तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Rom 8:26  इसी रीति से आत्मा भी हमारी र्दुबलता में सहायता करता है, क्‍योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्‍तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। 
Rom 8:27  और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्‍या है क्‍योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार बिनती करता है। 
Rom 8:28  और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Rom 8:29  क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Rom 8:30  फिर जिन्‍हें उस ने पहिले से ठहराया, उन्‍हें बुलाया भी, और जिन्‍हें बुलाया, उन्‍हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्‍हें धर्मी ठहराया, उन्‍हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १८-१९ 
  • याकूब ४

Wednesday, November 21, 2012

महान आराधना


   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन ८ अचंभित कर देने वाले दो परस्पर तुलनात्मक वाक्यों से होता है। भजन के पहले पद में भजनकार दाऊद बताता है कि परमेश्वर ने अपनी महिमा आकाशमण्डल में प्रगट करी है और इसके एकदम बाद दूसरे पद में वह कहता है: "तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नेव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेने वालों को रोक रखे" (भजन ८:२)।

   एक बच्चे की आराधना इतनी उभारने वाली क्यों होती है? इसलिए कि एक बच्चा सच्चे मन से परमेश्वर को जानता है और उससे प्रेम करता है, जो सामान्यतः संसार के लोगों में नहीं पाया जाता। प्रभु यीशु के जीवन काल में जब प्रभु यीशु के संबंध में, मन्दिर में बच्चे "दाऊद की सन्तान की होशान्ना" चिल्लाते हुए दौड़ते फिर रहे थे, तो यहूदी धर्म के अगुवों को यह बहुत बुरा लगा और उन्होंने इसपर एतराज़ किया; तब प्रभु यीशु ने उनके सामने इसी भजन ८ का यही पद २ उद्धरित किया (मत्ती २१:१५-१६)। प्रभु यीशु ने इस प्रकार से उन्हें जताया कि जो बात वे धर्म के अगुवे नहीं समझ पा रहे थे, वह उन बच्चों को सम्झ में आ गई थी - कि प्रभु यीशु ही वह परमेश्वर का पुत्र और जगत का उद्धारकर्ता है जिसकी प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी।

   एक पिता के रूप में मेरे सबसे स्मरणीय समयों में वे पल हैं जब मैं अपने बच्चों के साथ उनके पलंग के किनारे घुटने टेक कर प्रार्थना में होता था और वे बच्चे बड़े सहज भाव से अपना दिल खोल कर परमेश्वर के सामने रख देते थे। परमेश्वर के प्रति उनके प्रेम और विश्वास की सादगी ने मुझे बहुत बार बड़ी गहराई से छूआ, मेरे भय और शंकाओं का निवारण किया और मुझे विश्वास में बढ़ाया है।

   कभी उन बच्चों को छोटा या गौण ना समझें जो प्रभु यीशु में अपने विश्वास को गंभीरता से लेते हैं (मत्ती१८:६)। उनकी गवाही से सीखें क्योंकि उनका विश्वास और उनकी आराधना आकाशमण्डल जैसी महान है। - डेविड रोपर


बच्चे परमेश्वर के बहुमूल्य रत्न हैं, मसीह यीशु के लिए चमकने में उनकी सहायता करें।

परन्‍तु जब महायाजकों और शास्‍त्रियों ने इन अद्भुत कामों को, जो उस ने किए, और लड़कों को मन्‍दिर में दाऊद की सन्‍तान को होशाना पुकारते हुए देखा, तो क्रोधित होकर उस से कहने लगे, क्‍या तू सुनता है कि ये क्‍या कहते हैं? यीशु ने उन से कहा, हां; क्‍या तुम ने यह कभी नहीं पढ़ा, कि बालकों और दूध पीते बच्‍चों के मुंह से तु ने स्‍तुति सिद्ध कराई। - मत्ती २१:१५-१६

बाइबल पाठ: मत्ती १८:१-१०
Mat 18:1  उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, कि स्‍वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है? 
Mat 18:2   इस पर उस ने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया। 
Mat 18:3  और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्‍वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे। 
Mat 18:4  जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्‍वर्ग के राज्य में बड़ा होगा। 
Mat 18:5   और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है। 
Mat 18:6   पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १६-१७ 
  • याकूब ३

Tuesday, November 20, 2012

चेतन


   जब एक ४ वर्षीय बच्चा स्कूल में शरारत के लिए पकड़ा गया तो उसकी माँ ने उससे पूछा कि उसने क्या गलती की? बच्चे ने अपनी सफाई दी, "मैं अपने साथ के एक बच्चे से क्रोधित हुआ, किंतु क्योंकि आपने मुझे किसी को पीटने के लिए मना कर रखा है इसलिए मैंने अपने एक मित्र द्वारा उसे पिटवा दीया!" एक छोटे से बच्चे ने यह कहाँ से सीखा होगा? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि उसे यह कहीं से सीखने की आवश्यकता नहीं है, हर मनुष्य पाप करने के इस स्वभाव के साथ ही पैदा होता है और पाप करना हमारे लिए स्वाभाविक प्रक्रीया है; ज़ोर तो पाप करने से अपने आप को रोकने और बचाए रखने में लगता है। किंतु फिर भी प्रत्यक्ष रूप में नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से, यदि कर्मों से नहीं तो मन-ध्यान-विचारों में, पाप सभी से होता रहता है - हमारी पाप करने की स्वाभाविक प्रवृति अपना प्रभाव दिखाती ही रहती है।

   लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी को पाप करने की इस प्रवृति पर विजय पाने का साधन उपलब्ध है, वह इस पापी स्वभाव के अनुसार कार्य करने को मजबूर नहीं रहा। प्रेरित पौलुस ने स्मरण दिलाया: "क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्‍व उस[यीशु] के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्‍व में न रहें" (रोमियों ६:६)। हम एक नई सृष्टि हैं (२ कुरिन्थियों ५:१७) और पाप की आधीनता से छुड़ाए जाकर अब परमेश्वर की आधीनता में हो गए हैं (रोमियों ६:२२)।

   यद्यपि मसीही विश्वासी होने के बावजूद भी हम अपने शरीर और उसकी पापमय प्रवृति के साथ संघर्ष में रहते हैं (रोमियों ७:१८-१९), तो भी, क्योंकि अब हम परमेश्वर के लिए मसीह यीशु में जीवित हैं इसलिए अब हम परमेश्वर को आदर देने वाला जीवन जीने में सक्षम हैं (रोमियों ६:११)।

   उस छोटे बालक के समान किसी ना किसी रीति से अपना बदला लेने और मनमानी करने में भी अपने आप को न्यायसंगत दिखाने की बजाए अब हमें रोमियों ६:१३ के निर्देष का पालन करना चाहिए: "और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जान कर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।"

   मसीह यीशु में मिले नए जीवन की अपनी ज़िम्मेदारियों और गरिमा के प्रति सदा चेतन रहें। - सी. पी. हीया


पाप में आनन्द लेने की बजाए जब हम मसीह के जीवन को जीना चुनते हैं तो पाप करने की प्रवृति पर विजयी रहते हैं।

ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। - रोमियों ६:११

बाइबल पाठ: रोमियों ६:१-१४
Rom 6:1  सो हम क्‍या कहें क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? 
Rom 6:2  कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं? 
Rom 6:3  क्‍या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया?
Rom 6:4   सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। 
Rom 6:5  क्‍योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्‍चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएंगे। 
Rom 6:6  क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्‍व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्‍व में न रहें। 
Rom 6:7  क्‍योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। 
Rom 6:8   सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी। 
Rom 6:9  क्‍योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की। 
Rom 6:10  क्‍योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्‍तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है। 
Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। 
Rom 6:12  इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो। 
Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जान कर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १४-१५ 
  • याकूब २

Monday, November 19, 2012

समझौते का जीवन


   मैं और मेरी पत्नि मार्टी इंगलैंड, उसके इतिहास, संसकृति और लोगों को चाहने लगे। जब कभी हमारा वहाँ जाना होता तो हमारे सबसे पसंदीदा कार्यक्रमों में से एक होता था खुले मैदानों में आयोजित संगीत सभाओं में, जिन्हें प्रौम भी कहा जाता है, जाना। प्राचीन ज़मींदारों के बड़े-बड़े घरों के आस-पास के विशाल घास के मैदानों पर आयोजित यह कार्यक्रम बहुत मोहक होते हैं। इनमें से सबसे उत्तम होता है प्रौम की अंतिम रात का कार्यक्रम जिसमें आतिशबाज़ी होती है, और सभी लोग इंगलैंड के छोटे छोटे झंडे हाथ में लिए और हिलाते हुए इंगलैंड के प्रति देश-भक्ति के गीत बड़े उत्साह के साथ गाते हैं।

   हम भी बड़े उत्साह के साथ इन सभी बातों में सम्मिलित होने लगे - तब तक जब तक हमारे बच्चे हमारे साथ एक गर्मी की छुट्टीयां मनाने आए। वे भी हमारे साथ प्रौम देखने गए और हमें ब्रिटेन के नागरिकों के साथ मिलकर ब्रिटेन के प्रति देश-भक्ति के गीत गाते और उनका झंडा लहराते देख वे अवाक रह गए। मुझे अभी भी उन गीतों के ऊपर सुनाई देने के लिए उनके चिल्लाने की आवाज़ स्मरण है, जब उन्होंने विसम्य के साथ कहा, "आप यह क्या कर रहे हैं? हम तो अमरीकी नागरिक हैं!"

   मैं सोचता हूँ कि परमेश्वर भी हम मसीही विश्वासियों को अनपेक्षित कार्यों, गलत जीवन शैली और संसार के साथ समझौते का जीवन जीते तथा अपने स्वर्गीय देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को भूलकर सांसारिक बातों में उलझते देखकर ऐसे ही प्रतिक्रीया देता होगा: "यह तुम क्या कर रहे हो? ऐसा जीवन कैसे व्यतीत कर सकते हो? तुम स्वर्गीय राज्य के निवासी हो, वहां की बातें संसार के सामने रखो ना कि संसार की बातें अपनाओ।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस स्मरण दिलाता है कि हम मसीही विश्वासी संसार से पृथक करके एक पवित्र समाज बनाए गए हैं। इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर ने हमें उसकी पवित्रता को संसार के सामने प्रदर्शित करने का माध्यम बनाया है, हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के जीवन और चरित्र को जी कर दिखाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। जैसे अपने प्रति क्रूर और शत्रुतापूर्ण व्यवहार में भी वह अपने आताताईयों के प्रति क्षमाशील, अनुग्रहकारी और दयालु रहा, जैसे उसने सच्चाई और खराई का जीवन जीया तथा अपनी बातों से कभी नहीं पलटा, हमें भी वैसा ही व्यवहार और जीवन संसार के सामने प्रदर्शित करना है।

   यदि आप भी प्रभु यीशु के पवित्र स्वर्गीय साम्राज्य के नागरिक हैं तो उसकी पवित्रता और प्रेम के ध्वज को संसार में ऊँचा रखिए, संसार के साथ समझौते का जीवन अपनाकर उसे लज्जित मत कीजिए।


प्रभु यीशु के प्रति हमारी वफादारी हमारे जीवनों में दिखाई और सुनाई देनी चाहिए।

पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। - १ पतरस २:९

बाइबल पाठ: १ पतरस २:९-१७
1Pe 2:9  पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1Pe 2:10  तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1Pe 2:11  हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। 
1Pe 2:12  अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्‍टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1Pe 2:13  प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। 
1Pe 2:14  और हाकिमों के, क्‍योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। 
1Pe 2:15  क्‍योंकि परमेश्वर की इच्‍छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। 
1Pe 2:16  और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्‍तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। 
1Pe 2:17  सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ११-१३ 
  • याकूब १

Sunday, November 18, 2012

व्यर्थ भोजन


   बहुत से देशों में बच्चों में मोटापा बहुत बढ़ गया है जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और आगे चलकर अनेक समस्याओं को उत्पन्न करेगा। इसका एक मुख्य कारण है भोजन से संबंधित गलत आदतें और व्यर्थ भोजन सामग्री का सेवन।

   व्यर्थ भोजन सामग्री का तात्पर्त्य उस भोजन सामग्री से है जो स्वाद में तो अच्छा होता है किंतु पौष्टिक तथा संतुलित आहार नहीं होता। ऐसे भोजन में वसा (चिकनाई या तैल पदार्थ) तथा उष्णता अधिक होते हैं जो शरीर में एकत्रित होते रहते हैं और शरीर के अनेक अंगों पर हानिकारक प्रभाव डालते रहते हैं जिनसे बाद में बहुत से रोग हो जाते हैं। ऐसे व्यर्थ भोजन के उदाहरण हैं चिप्स, सोडा युक्त ठंडे पेय, मिठाईयां-केक-पेस्ट्री इत्यादि, कुछ फास्ट-फूड दुकानों पर मिलने वाले भोजन आदि।

   जैसे कुछ प्रकार का शारीरिक भोजन व्यर्थ और हानिकारक होता है, वैसे ही कई प्रकार का आत्मिक भोजन भी व्यर्थ और हानिकारक होता है। व्यर्थ शारीरिक भोजन के समान ही यह व्यर्थ आत्मिक भोजन भी सामान्य आत्मिक भोजन की वस्तुओं से ही बनाया जाता है, दिखने और स्वाद में भी अच्छा लगता है किंतु इसके दीर्घ-कालीन परिणाम अति हानिकारक होते हैं। मसीही विश्वासियों को तो इससे खासकर बहुत सावधान रहना चाहिए।

   यह व्यर्थ आत्मिक भोजन कोई "भिन्न सुसमाचार" (गलतियों १:६) से लेकर मसीही विश्वास द्वारा शारीरिक लाभ और संपदा में बढ़ोतरी तथा झूठी धार्मिकता की बातों तक कुछ भी हो सकता है। कुछ मसीही विश्वास के गीतों तथा पुस्तकों में भी यह गलत शिक्षाएं पाई जाती हैं। ऐसे आत्मिक भोजन के प्रयोग से आत्मिक भूख मिटने का आभास तो हो सकता है किंतु आत्मिक बढ़ोतरी नहीं होगी, वरन आगे चलकर आत्मिक हानि ही होगी।

   परमेश्वर के वचन में इब्रानियों की पत्री में सचेत किया गया है: "नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्‍योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखने वालों को कुछ लाभ न हुआ" (इब्रानियों १३:९)। गलत शिक्षाएं हमारे लिए हानिकारक हैं, उनसे कोई लाभ नहीं होता क्योंकि वे हमें ना तो पाप की सामर्थ पर जयवंत होना सिखाती हैं और ना ही हमारी आत्मिक वृद्धि में योगदान करती हैं। परन्तु जैसे प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को सिखाया, परमेश्वर के वचन बाइबल के सत्य और परमेश्वर के आत्मा की प्रेर्णा से उपयोग द्वारा हमारी आत्मिक भूख भी तृप्त होती है और आत्मिक स्वास्थ्य भी मिलता है।

   व्यर्थ भोजन से बचें - चाहे वाह शारीरिक हो अथवा आत्मिक, और नित्य परमेश्वर के वचन के अध्ययन द्वारा अपने आत्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ और उन्नत रखें। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के वचन के सत्यों पर नित्य भोजन करते रहने से हम झूठी और व्यर्थ बातों के स्वाद को पहचान पाने में सक्षम हो जाएंगे।

नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्‍योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखने वालों को कुछ लाभ न हुआ। - इब्रानियों १३:९

बाइबल पाठ: गलतियों १:६-१२; २ तिमुथियुस ३:१२-१७
Gal 1:6  मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Gal 1:7  परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Gal 1:8  परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Gal 1:9  जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Gal 1:10  यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।
Gal 1:11  हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं। 
Gal 1:12 क्‍योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला।

2Ti 3:12  पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। 
2Ti 3:13 और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे। 
2Ti 3:14 पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह, कि तू ने उन्‍हें किन लोगों से सीखा था; 
2Ti 3:15 और बालकपन से पवित्र शास्‍त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्‍त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। 
2Ti 3:16 हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। 
2Ti 3:17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लि्ये तत्‍पर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल ८-१० 
  • इब्रानियों १३

Saturday, November 17, 2012

स्वच्छ और उपयोगी


   जब हम अपने हाथों को गन्दगी और कीटाणुओं से स्वच्छ करने के लिए धोते हैं, तो क्या वास्तव में हम ही उन्हें स्वच्छ करते हैं? उत्तर हाँ और नहीं दोनो ही है। हाँ इसलिए क्योंकि यह हमारे निर्णय, हमारे प्रयास और हमारी इच्छा से होता है, और नहीं इसलिए क्योंकि स्वच्छ करने का वास्तविक कार्य तो वह साबुन और पानी करते हैं जिनका हम प्रयोग करते हैं; हमारा निर्णय, प्रयास और इच्छा तो उन स्वच्छ करने में सक्षम माध्यमों को कार्यकारी होने देता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पुलुस ने तिमुथियुस को अपनी दूसरी पत्री में लिखा: "यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा" (२ तिमुथियुस २:२१); पौलुस के कहने का तात्पर्य यह नहीं था कि हमारे पास अपने आप को पापों से शुद्ध करने की क्षमता है, वरन यह कि हम स्वेच्छा से अपने आप को उस माध्यम को समर्पित करें जो हमें पापों से शुद्ध करने और हमें परमेश्वर की दृष्टी में धर्मी कर देने में सक्षम है - अर्थात प्रभु यीशु मसीह को। इसी संदर्भ में, अपनी एक और पत्री में, पौलुस ने लिखा, "और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है" (फिलिप्पियों ३:९)।

   जब हम प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं तो उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान हमें पाप के दण्ड और हमें बान्ध कर रखने वाली पाप की शक्ति से मुक्त कर देते हैं। यदि हम फिर कभी पाप में पड़ें भी, तब भी यह पुनः स्वच्छ हो पाने की सुविधा हमें प्रभु यीशु में उपलब्ध रहती है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ यूहन्ना १:९)।

   पाप और उसके दुष्परिणामों से मिली यह अद्भुत स्वतंत्रता हमें जवानी की अभिलाषाओं से मुँह मोड़ने तथा धार्मिकता अर्थात सही व्यवहार, विश्वास अर्थात सही आधार, प्रेम अर्थात सही प्रत्युत्तर और मेल-मिलाप अर्थात सही उद्देश्य जैसे सद्गुणों के पीछे बढ़ने में सक्षम करती है। जब हम अपने निर्णय, प्रयास और इच्छा से अपने आप को प्रभु यीशु को समर्पित करते हैं और उसके आत्मा को अपने अन्दर कार्य करने देते हैं तो वह हमें स्वच्छ और परमेश्वर के लिए उपयोगी बनाता है।

   क्या आप स्वच्छ और परमेश्वर के लिए उपयोगी होने को तैयार हैं? - एलबर्ट ली


सही सोच ही जीवन को सही रीति से जीने का मार्गदर्शन करती है।

जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। - २ तिमुथियुस २:२२

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:२०-२६
2Ti 2:20  बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। 
2Ti 2:21  यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। 
2Ti 2:22   जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। 
2Ti 2:23  पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं। 
2Ti 2:24   और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो। 
2Ti 2:25  और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्‍या जाने परमेश्वर उन्‍हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें। 
2Ti 2:26  और इस के द्वारा उस की इच्‍छा पूरी करने के लिये सचेत होकर शैतान के फंदे से छूट जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ५-७ 
  • इब्रानियों १२

Friday, November 16, 2012

संपूर्ण निष्ठा


   अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायलिन वादक मिदोरी का मानना है कि ध्यानपूर्वक और निष्ठा से किया गया अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। वे प्रतिवर्ष ९० कार्यक्रमों में वायलिन वादन करती हैं और प्रतिदिन ५-६ घंटे अभ्यास करती हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा: "मुझे अपने काम के लिए अभ्यास कि बहुत आवश्यकता रहती है; अभ्यास में व्यय किए समय का उतना महत्व नहीं है जितना उस निष्ठा का है जिस के साथ अभ्यास किया जाता है। मैं छात्रों को देखती हूँ, वे साज़ बजाते हैं और उसे अभ्यास कहते हैं, परन्तु ना वे ध्यान से सुनते हैं और ना देखते हैं। यदि आप अपनी अध्ययन पुस्तक अपने सामने खोल के बैठ जाएं तो क्या इसका अर्थ है कि आप अध्ययन कर रहे हैं?"

   यही सिद्धांत हमारे मसीही विश्वास के जीवन पर भी लागू होता है। प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को लिखा: "अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो" (२ तिमुथियुस २:१५)। निष्ठा का अर्थ है अविरल, अथक सच्चा प्रयास और यह किसी भी कार्य के प्रति असावधान और ध्यान-रहित होने के विपरीत है। निष्ठा परमेश्वर के साथ हमारे हर संबंध पर लागू होती है।

   जैसे एक संगीतकार श्रेष्ठता के लिए निष्ठापूर्ण रीति से प्रयासरत रहता है, हम मसीही विश्वासीयों को भी परमेश्वर की सेवकाई, उसकी स्वीकृति और उसके वचन के श्रेष्ठता से बांटे जाने के लिए निष्ठापूर्ण रीति से प्रयासरत रहना चाहिए। 

   क्या आज आपने संपूर्ण निष्ठा के साथ परमेश्वर के वचन का अध्ययन और परमेश्वर से प्रार्थना करी तथा उसकी बात सुनी है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर उनसे बात-चीत करता है जो उसकी सुनने को तैयार होते हैं; और उनकी सुनता है जो प्रार्थना में उसके पास आते हैं।

अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - २ तिमुथियुस २:१५

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:३-१६
2Ti 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा। 
2Ti 2:4  जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता; 
2Ti 2:5  फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2Ti 2:6  जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए। 
2Ti 2:7  जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा। 
2Ti 2:8  यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है। 
2Ti 2:9  जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं। 
2Ti 2:10  इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्‍त महिमा के साथ पाएं। 
2Ti 2:11  यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी। 
2Ti 2:12  यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे : यदि हम उसका इन्‍कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्‍कार करेगा। 
2Ti 2:13  यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वासयोग्य बना रहता है, क्‍योंकि वह आप अपना इन्‍कार नहीं कर सकता।
2Ti 2:14  इन बातों की सुधि उन्‍हें दिला, और प्रभु के साम्हने चिता दे, कि शब्‍दों पर तर्क-वितर्क न किया करें, जिन से कुछ लाभ नहीं होता, वरन सुनने वाले बिगड़ जाते हैं। 
2Ti 2:15  अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। 
2Ti 2:16  पर अशुद्ध बकवाद से बचा रह; क्‍योंकि ऐसे लोग और भी अभक्ति में बढ़ते जाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३-४ 
  • इब्रानियों ११:२०-४०

Thursday, November 15, 2012

दूरीयां पाट दीजिए


   जर्मनी के एक शहर में कुछ अमरीकी मिशनरी सुसमाचार प्रचार के लिए अपनी बस के पास खड़े थे। वे लोगों से वार्तालाप के अवसर ढूंढ रहे थे जिस से फिर उन तक उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाएं। वहां के दो युवकों ने उपद्रव करके उन्हें परेशान करने की ठानी, और वे अपने सिर पर खोपड़ी और हड्डी के निशान बने पटुके बांधे हुए उन मिशनरीयों की ओर गड़बड़ी करने के लिए बढ़े। लेकिन उन मिशनरीयों ने बड़ी गर्म-जोशी और सहृदयता से उनका स्वागत किया और बड़े प्रेम से उनसे वार्तालाप आरंभ किया; यह उन युवकों के लिए अप्रत्याशित था। वे कुछ देर वहां रुके और उन्होंने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुना। एक ने उसी दिन प्रभु यीशु को अपना निज उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया और दूसरे ने अगले दिन यह कर लिया।

   वे दोनों युवक और वे मिशनरी संस्कृति में, नागरिकता में, उद्देश्यों में एक दूसरे से बहुत भिन्न थे। एक अन्धकार में थे और अन्धकार के साम्राज्य को फैलाना चाहते थे, तो दूसरे जीवन की ज्योति लोगों के मनों में प्रज्वलित करना चाहते थे। उन दोनों के बीच एक बड़ी दूरी थी, किंतु निस्वार्थ प्रेम और प्रेम पूर्ण वार्तालाप ने वह दूरी सहजता से पाट दी और उद्धार के सुसमाचार को सुनने तथा स्वीकार करने के लिए मनों को तैयार कर दिया।

   क्या आप भी आज इसी विभिन्न प्रकार की भिन्नता की समस्या का सामना कर रहे हैं जिस से लोगों से संपर्क और वार्तालाप आरंभ करना आपको कठिन लगता है? निस्वार्थ प्रेम का प्रदर्शन और प्रेम पूर्ण वार्तालाप को आज़माईये। प्रभु यीशु का प्रेम जिसने स्वर्ग और पृथ्वी की दूरी पाट दी वह संसार की हर दूरी को पाटने में सक्षम है, उसी प्रेम को अपने जीवन में दिखा कर सभी दूरीयां पाट दीजिए। - डेव ब्रैनन


पाप के अंधकार से भरे संसार में प्रभु यीशु उद्धार का मार्ग और परमेश्वर की ज्योति है।

...और वह[यीशु] उसके[लेवी के] घर में भोजन करने बैठे; और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। - मरकुस २:१५

बाइबल पाठ: मरकुस २:१३-१७
Mar 2:13  वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्‍हें उपदेश देने लगा। 
Mar 2:14   जाते हुए उस ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Mar 2:15  और वह उठ कर, उसके पीछे हो लिया: और वह उसके घर में भोजन करने बैठे; और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। 
Mar 2:16  और शास्‍त्रियों और फरीसियों ने यह देख कर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ भोजन कर रहा है, उसक चेलों से कहा, वह तो चुंगी लेने वालों और पापियों के साय खाता-पीता है!! 
Mar 2:17  यीशु ने यह सुन कर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १-२ 
  • इब्रानियों ११:१-१९

Wednesday, November 14, 2012

विश्वास


   किसी काम पर लगे नए कार्यकर्ताओं को निराश करने का सबसे कारगर तरीका है उस कार्य पर काम कर रहे वरिष्ठ लोगों द्वारा उनकी आलोचना। इसीलिए अच्छे प्रबंधक प्रयास करते हैं कि वे नए कार्यकर्ताओं को ऐसे वरिष्ठ लोगों के साथ रखें जो व्यर्थ आलोचना और तानों से उन्हें सुरक्षित रख सकें और उनका उत्साह बढ़ाते रहें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हन्ना नामक स्त्री एक ऐसा पात्र है जो हमारे लिए आलोचना और हृदय की गहरी अपूर्ण इच्छाओं की तकलीफों का सामना करने में एक ऐसा ही परामर्शदाता और उत्साहवर्धक सहायक बन सकती है (१ शमूएल १:१-१८)। हन्ना बांझ थी और एक ऐसे पति से जो उसकी मनःस्थिति समझता नहीं था, ताने मारते रहने वाली एक सौतन से और एक आलोचनात्मक पुरोहित के बीच घिरी हुई थी। अपनी इस विकट परिस्थिति में परमेश्वर पर अपने विश्वास और उसके सामने अपने मन की स्थिति बयान करने के द्वारा हन्ना ने मार्ग पाया (१ शमूएल १:१०)। परमेश्वर ने हन्ना के हृदय की गहराईयों से निकली प्रार्थना सुनी और उत्तर में उसे पुत्र दिया।

   परमेश्वर ने हमारी सृष्टि इसलिए करी है कि हम उसके साथ संबंध में बने रहें। हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध को जितना घनिश्ठ करते जाते हैं, उतना ही अधिक हम उसकी सामर्थ को भी अपने जीवन में कार्यकारी होने का अवसर बढ़ाते जाते हैं। परमेश्वर से करी गई वे प्रार्थनाएं जो हमारी वेदनाओं और मन के दुखों तथा हमारी भावनाओं को व्यक्त करती हैं अवश्य ही परमेश्वर को स्वीकार्य हैं क्योंकि वे परमेश्वर में हमारे विश्वास को व्यक्त करती हैं।

   जो बातें हमें तकलीफ पहुँचाती हैं - चाहे वे समस्याएं हों या हमारी इच्छाएं, जब हम उन्हें उस के हाथों में सौंप देते हैं जो उनका निवारण कर सकता है तो हम उस से एक सही दृष्टिकोण, मार्ग और शान्ति भी पाते हैं। - रैंडी किलगोर


प्रार्थना में बिना शब्दों के हृदय को उंडेलना, बिना हृदय के शब्दों को प्रवाहित करने से भला होता है।

मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है। - भजन ३:४

बाइबल पाठ: १ शमूएल १:१-१८
1Sam 1:1  एप्रैम के पहाड़ी देश के रामतैम सोपीम नाम नगर का निवासी एल्काना नाम पुरूष था, वह एप्रेमी था, और सूप के पुत्र तोहू का परपोता, एलीहू का पोता, और यरोहाम का पुत्र था।
1Sam 1:2  और उसके दो पत्नियां थीं; एक का तो नाम हन्ना और दूसरी का पनिन्ना था। और पनिन्ना के तो बालक हुए, परन्तु हन्ना के कोई बालक न हुआ।
1Sam 1:3  वह पुरूष प्रति वर्ष अपने नगर से सेनाओं के यहोवा को दण्डवत करने और मेलबलि चढ़ाने के लिये शीलो में जाता था; और वहां होप्नी और पीनहास नाम एली के दोनों पुत्र रहते थे, जो यहोवा के याजक थे।
1Sam 1:4  और जब जब एल्काना मेलबलि चढ़ाता था तब तब वह अपनी पत्नी पनिन्ना को और उसके सब बेटे-बेटियों को दान दिया करता था;
1Sam 1:5  परन्तु हन्ना को वह दूना दान दिया करता था, क्योंकि वह हन्ना से प्रीति रखता था; तौभी यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी।
1Sam 1:6  परन्तु उसकी सौत इस कारण से, कि यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी, उसे अत्यन्त चिढ़ाकर कुढ़ाती रहती थीं।
1Sam 1:7  और वह तो प्रति वर्ष ऐसा ही करता था; और जब हन्ना यहोवा के भवन को जाती थी तब पनिन्ना उसको चिढ़ाती थी। इसलिये वह रोती और खाना न खाती थी।
1Sam 1:8  इसलिये उसके पति एल्काना ने उस से कहा, हे हन्ना, तू क्यों रोती है? और खाना क्यों नहीं खाती? और मेरा मन क्यों उदास है? क्या तेरे लिये मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूं?
1Sam 1:9  तब शीलो में खाने और पीने के बाद हन्ना उठी। और यहोवा के मन्दिर के चौखट के एक अलंग के पास एली याजक कुर्सी पर बैठा हुआ था।
1Sam 1:10  और यह मन में व्याकुल हो कर यहोवा से प्रार्थना करने और बिलख बिलखकर रोने लगी।
1Sam 1:11  और उसने यह मन्नत मानी, कि हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दु:ख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूंगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा।
1Sam 1:12  जब वह यहोवा के साम्हने ऐसी प्रार्थना कर रही थी, तब एली उसके मुंह की ओर ताक रहा था।
1Sam 1:13  हन्ना मन ही मन कह रही थी; उसके होंठ तो हिलते थे परन्तु उसका शब्द न सुन पड़ता था; इसलिये एली ने समझा कि वह नशे में है।
1Sam 1:14  तब एली ने उस से कहा, तू कब तक नशे में रहेगी? अपना नशा उतार।
1Sam 1:15  हन्ना ने कहा, नहीं, हे मेरे प्रभु, मैं तो दु:खिया हूं; मैं ने न तो दाखमधु पिया है और न मदिरा, मैं ने अपने मन की बात खोल कर यहोवा से कही है।
1Sam 1:16  अपनी दासी को ओछी स्त्री न जान जो कुछ मैं ने अब तक कहा है, वह बहुत ही शोकित होने और चिढ़ाई जाने के कारण कहा है।
1Sam 1:17  एली ने कहा, कुशल से चली जा; इस्राएल का परमेश्वर तुझे मन चाहा वर दे।
1Sam 1:18  उसे ने कहा, तेरी दासी तेरी दृष्टि में अनुग्रह पाए। तब वह स्त्री चली गई और खाना खाया, और उसका मुंह फिर उदास न रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ७-९ 
  • मत्ती ३

Tuesday, November 13, 2012

ज़िम्मेदारी


   मैं और मेरी पत्नी एक शॉपिंग मॉल में खरीद्दारी के लिए रखा सामान देख रहे थे। हम एक स्थान पर पहुँचे जहां टी शर्ट रखे हुए थे, और मैं उन टी शर्ट्स और उनपर लिखे मनोरंजक वाक्यों को देखने लगा। एक टी शर्ट पर लिखे वाक्य ने मुझे विचलित किया; उसपर लिखा था "कितने अधिक मसीही और कितने कम शेर।" यह वाक्य प्रथम ईसवीं में मसीही विश्वासियों पर ढाए जाने वाले सताव पर आधारित था। रोमी साम्राज्य के उस काल में मसीही विश्वासियों को मनोरंजन के लिए शेरों के आगे फेंक दिया जाता था और लोग मनोरंजनशालाओं जमा होकर शेरों द्वारा उनके फाड़ खाए जाने का तमाशा देखते थे। यह वाक्य और इसका संदर्भ हमारे लिए कतई मनोरंजक नहीं था।

   मसीही विश्वासियों का सताया जाना कोई मज़ाक नहीं है। प्रथम ईसवीं के उन विश्वासियों के इस प्रकार के क्रूर मनोरंजन द्वारा परखे जाने से कुछ पहले ही प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में चिताया था, "पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे" (२ तिमुथियुस ३:१२)। यह सताया जाना तो अवश्यंभावी है, और प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए गंभीर विषय होना चाहिए, क्योंकि हर पल और हर क्षण संसार भर में कहीं ना कहीं मसीही विश्वासी लोग इस उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।

   हम इस बारे में क्या कर सकते हैं? सबसे पहली बात तो हम उनके लिए प्रार्थना कर सकते हैं कि जो इस सताव में से होकर निकल रहे हैं परमेश्वर उन्हें इस दुख में शांति और सांत्वना दे। दूसरे, जो इस उत्पीड़न के कारण मारे या कैद में डाल दिए जाते हैं उनके परिवारों की देख-रेख और सहायता के लिए हम अपना हाथ बढ़ा सकते हैं। तीसरा, हम अपने आप को अभी से प्रार्थना द्वारा तैयार कर सकते हैं कि जब यह परीक्षा की घड़ी हम पर आए तो हम परखे जाने के लिए तैयार पाए जाएं, अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु का इन्कार ना करें।

   जब प्रेरित पौलुस अपने मसीही विश्वास के कारण कैद में डाला गया तो वहां पर भी उसके द्वारा प्रदर्शित साहस और विश्वास ने औरों की भी हिम्मत बढ़ाई कि वे भी अपने विश्वास में दृढ़ बने रहें (फिलिप्पियों १:१४)। प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार तथा अनन्त जीवन के सुसमाचार के प्रचार में सम्मिलित हो जाएं। आपकी प्रार्थनाएं और सुसमाचार में आपका सहयोग सताव से निकल रहे विश्वासियों के लिए प्रोत्साहन होगा। - बिल क्राउडर


जब हम प्रभु परमेश्वर के सामने घुटनों पर आते हैं तो संसार के सामने खड़ा हो सकने की सामर्थ को पाते हैं।

पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। - २ तिमुथियुस ३:१२

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:१२-२१
Php 1:12  हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Php 1:13  यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Php 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Php 1:15  कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Php 1:16  कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Php 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्‍पन्न करें। 
Php 1:18 सो क्‍या हुआ केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्‍चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Php 1:19 क्‍योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। 
Php 1:20  मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं वा मर जाऊं। 
Php 1:21  क्‍योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत १-२ 
  • इब्रानियों १०:१-१८

Monday, November 12, 2012

अनुयायी


   १७वीं शताब्दी के क्वेकर मत के एक अगुवे आईज़क पेनिंगटन ने कहा, "प्रभु मुझे उस पर निर्भर होकर जीना सिखा रहा है - उससे प्राप्त हो सकने वाली वस्तुओं पर नहीं वरन उसके जीवन पर।" परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना ६ अध्याय में हम ऐसे लोगों को देखते हैं जो प्रभु यीशु से बहुत लगाव दिखाते हैं, क्योंकि उन्हें लगा कि प्रभु के साथ रहकर उन्हें मुफ्त में भोजन मिलता रहेगा। वे प्रभु यीशु को नहीं वरन प्रभु यीशु से मिल सकने वाली पार्थिव आवश्यक्ताओं की पूर्ति को चाहते थे; उनके मन प्रभु यीशु पर नहीं वरन उसकी सामर्थ से संभव स्वार्थ-सिद्धी पर लगे हुए थे।

   प्रभु यीशु ने एक आश्चर्यकर्म करके उन्हें मछली और रोटी खिलाई थी, और उन्हें निश्चय हो गया था कि प्रभु उनके लिए अपनी इस विलक्षण सामर्थ से बहुत कुछ कर सकता है और वे उसे अपना राजा बनाने का विचार करने लगे। प्रभु यीशु भी उनकी मनसा जान गया था इसलिए वह उन से अलग होकर एकांत में चला गया (यूहन्ना ६:१४-१५)। अगले दिन लोग उसे ढूंढते हुए आए और उसके साथ रहने की इच्छा दिखाने लगे, लेकिन प्रभु यीशु ने उनकी मुफ्तख़ोरी के जीवन जीने की मनसाओं पर पानी फेरते हुए उनके सामने अपने आप को जीवन की रोटी और अनन्त जीवन के मार्ग के रूप में प्रस्तुत किया और उनसे अपने प्रति समर्पण को रखा। समर्पित जीवन की बात सुनकर बहुतेरे जो उसके अनुयायी होने का दावा कर रहे थे, उसे छोड़कर चले गए।

   प्रभु यीशु के पीछे अवश्य चलें, उसके अनुयायी अवश्य बने, किंतु सही मनसा और दृष्टीकोण के साथ। इसलिए नहीं क्योंकि उसमें आपकी पार्थिव आवश्यक्ताओं को पूरा करने की सामर्थ है, वरन इसलिए क्योंकि पापों की क्षमा और अनन्त जीवन उसी में है। - मार्विन विलियम्स


यदि आपने मसीह को समर्पण करके उसे भरपूरी से अपने जीवन में स्थान दिया है, तो स्वतः ही मसीह की भरपूरी भी आपके जीवन में बनी रहेगी।

यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्‍तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। - यूहन्ना ६:२६

बाइबल पाठ: यूहन्ना ६:२५-३६
Joh 6:25  और झील के पार उस से मिल कर कहा, हे रब्‍बी, तू यहां कब आया? 
Joh 6:26  यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्‍तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
Joh 6:27  नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्‍तु उस भोजन के लिये जो अनन्‍त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्‍योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। 
Joh 6:28  उन्‍होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्‍या करें?
Joh 6:29  यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उस ने भेजा है, विश्वास करो। 
Joh 6:30  तब उन्‍होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्‍ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
Joh 6:31  हमारे बापदादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है, कि उस ने उन्‍हें खाने के लिये स्‍वर्ग से रोटी दी। 
Joh 6:32  यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्‍वर्ग से न दी, परन्‍तु मेरा पिता तुम्हें सच्‍ची रोटी स्‍वर्ग से देता है। 
Joh 6:33  क्‍योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्‍वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है। 
Joh 6:34  तब उन्‍होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
Joh 6:35   यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। 
Joh 6:36  परन्‍तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तो भी विश्वास नहीं करते।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ५१-५२ 
  • इब्रानियों ९