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Friday, November 30, 2012

किया; करेंगे


   कुछ अधिक पुरानी बात नहीं है, जब संसार भर में इसाई समाज में "WWJD - What Would Jesus Do"  अर्थात "यीशु ऐसे में क्या करते" का नारा बहुत प्रचलित हुआ। लोग यह नारा लिखे हुए कड़े पहने रहते थे, इस आशय से कि वह कड़ा और उस पर लिखा नारा उनके लिए एक स्मरण कराने का माध्यम होगा - जब वे कठिन परिस्थितियों में या किसी दुविधा में हों तो कोई भी निर्णय लेने से पहले विचार कर लें कि यदि प्रभु यीशु उस परिस्थित में होते तो क्या करते, और फिर उसी के अनुसार अपना निर्णय लें। जब हम अपने उद्धाकर्ता प्रभु को आदर और महिमा देने वाला जीवन जीने के प्रयत्नशील रहते हैं तो हमारे लिए यह भी आवश्यक है कि हम अपने निर्णयों और प्रवृतियों को अपने प्रभु द्वारा दिए गए उदाहरणों के अनुकूल रखें।

   हाल ही में मैं एक चर्च में था जहां मुझे इस नारे से मिलता-जुलता किंतु कुछ भिन्न संदेश लिखा मिला। वहां लिखा था "WDJD - What Did Jesus Do?" अर्थात, "यीशु ने क्या करके दिया है?" यह वास्तव में अधिक महत्वपुर्ण प्रश्न है, क्योंकि इस प्रश्न के उत्तर के प्रति गंभीरता और समझदारी में ही हमारा भविष्य निहित है। अपने संसार के जीवन काल में जो कुछ प्रभु यीशु ने किया, उसमें से सबसे महत्वपुर्ण और उसके संसारमें आने का एकमात्र उद्देश्य वह है जिसके बारे में हम १ कुरिन्थियों १५:३-४ में लिखा पाते हैं: "...पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।"

   प्रभु यीशु ने क्या करके दिया है? उसने हमारे पापों और अपराधों का दोष अपने ऊपर लेकर हमारे स्थान पर उनका दण्ड सहा; वह हमारे स्थान पर मारा गया और फिर मुर्दों में से जी उठा; वह हमारे लिए पाप और मृत्यु पर जयवन्त हुआ जिससे अब हम जो उस पर विश्वास करते और स्वेच्छा से उसे अपना जीवन समर्पित करते हैं उसकी धार्मिकता और उसके जीवन के भागी हो जाएं। सच्चाई यही है कि जब तक प्रभु यीशु ने हमारे लिए जो करके दे दिया है हम उसे स्वीकार ना कर लें,  तब तक हम कभी वह समझ नहीं पाएंगे जो वह हमारे जीवनों में कर सकता है और करेगा।

   हम सब के जीवनों में "WWJD" तथा "WDJD" दोनो ही महत्वपूर्ण हैं, किंतु सबसे महत्वपूर्ण है प्रभु यीशु के प्रति हमारा रवैया और उसके साथ हमारा संबंध। प्रभु के प्रति सही रवैये और उससे सही संबंध के बाद ही हम जो प्रभु ने किया और जो वह करेगा उसके यथार्त एवं महत्व को वास्तव में जान सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारा उद्धार हमारे द्वारा करे गए कार्यों से नहीं वरन प्रभु यीशु द्वारा करे गए कार्य से है।

इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। - १ कुरिन्थियों १५:३-४

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १५:१-११
1Co 15:1  हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। 
1Co 15:2  उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। 
1Co 15:3 इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। 
1Co 15:4 और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। 
1Co 15:5  और कैफा को तब बारहों को दिखलाई दिया। 
1Co 15:6  फिर पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए। 
1Co 15:7  फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया। 
1Co 15:8  और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्मा हूं। 
1Co 15:9  क्‍योंकि मैं प्ररितों में सब से छोटा हूं, वरन प्ररित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्‍योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। 
1Co 15:10 परन्‍तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्‍तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। 
1Co 15:11  सो चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्वास भी किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३७-३९ 
  • २ पतरस २


Thursday, November 29, 2012

वर्तमान


   यदि आपकी प्रवृति अपने खोए हुए अवसरों के बारे में, या फिर भविष्य के बारे में आकुल रहने की है तो अपने आप से एक प्रश्न पूछिए - "मेरे समक्ष इस समय क्या है?" दूसरे शब्दों में, अब इस समय मुझे क्या अवसर और विकल्प उपलब्ध हैं? इस प्रश्न के द्वारा आप अपना ध्यान किसी बीते समय के पछतावे या आते समय की अनिश्चितता के भय से हटा कर, वर्तमान और वर्तमान में परमेश्वर द्वारा संभव बातों पर केंद्रित कर सकते हैं।

   यह वही प्रश्न है जो परमेश्वर ने बाइबल के एक नायक मूसा से पूछा था। मूसा परेशान था; वह अपनी कमज़ोरियों से अवगत था, उसने इस्त्राएल को मिस्त्र की बन्धुवाई से निकाल कर लाने की परमेश्वर द्वारा दी गई बुलाहट के लिए अपना भय और अयोग्यता परमेश्वर के सामने व्यक्त करी। तब परमेश्वर ने मूसा से एक प्रश्न किया: "...तेरे हाथ में वह क्या है?" (निर्गमन ४:२)। परमेश्वर ने मूसा का ध्यान उसकी अपनी अयोग्यताओं, असमर्थताओं तथा भविष्य को लेकर उसकी चिंताओं से हटा कर वह जो उसके पास अभी था - चरवाहे की लाठी, उसी पर केंद्रित किया। मूसा को परमेश्वर ने दिखाया कि यदि उसके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन हो तो वह एक साधारण लाठी में हो कर भी अपनी सामर्थ और आश्चर्यकर्म प्रगट कर सकता है, जिससे अविश्वासी लोग विश्वास कर सकें। आगे चलकर हम देखते हैं कि जैसे जैसे मूसा का विश्वास परमेश्वर में बढ़ता गया, वैसे वैसे ही परमेश्वर की सामर्थ द्वारा मूसा और भी अधिक बड़े बड़े आश्चर्यकर्म करता गया।

   क्या आप पिछली असफलताओं के बारे में चिंतित और विचारमग्न रहते हैं? क्या भविश्य को लेकर आपके मन में चिंताएं रहती हैं? परमेश्वर द्वारा मूसा से किए गए प्रश्न पर विचार कीजिए - "...तेरे हाथ में वह क्या है?" आपको विचलित करने वाली अपनी प्रत्येक परिस्थिति और बात को परमेश्वर के हाथों में सौंप दीजिए और उसके निर्देषों का पालन कीजिए जिससे वह आपके भले और अपनी महिमा के लिए आपके वर्तमान का प्रयोग कर सके। उसकी सामर्थ पर विश्वास किजिए, उसे अपने जीवन में अवसर दीजिए। बीते और आने वाले कल के कारण अपने वर्तमान को मत बिगाड़िए। - डेनिस फिशर


ना बदले जा सकने वाले भूतकाल और अनजाने भविष्य की चिंता कर के आप अपने वर्तमान को केवल बरबाद ही कर सकते हैं।

यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी। - निर्गमन ४:२

बाइबल पाठ: निर्गमन ४:१-१२
Exo 4:1  तब मूसा ने उतर दिया, कि वे मेरी प्रतीति न करेंगे और न मेरी सुनेंगे, वरन कहेंगे, कि यहोवा ने तुझ को दर्शन नहीं दिया। 
Exo 4:2  यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी। 
Exo 4:3  उस ने कहा, उसे भूमि पर डाल दे? जब उस ने उसे भूमि पर डाला तब वह सर्प बन गई, और मूसा उसके साम्हने से भागा। 
Exo 4:4  तब यहोवा ने मूसा से कहा, हाथ बढ़ाकर उसकी पूंछ पकड़ ले कि वे लोग प्रतीति करें कि तुम्हारे पितरों के परमेश्वर अर्थात इब्राहीम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर, और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने तुझ को दर्शन दिया है। 
Exo 4:5  तब उस ने हाथ बढ़ाकर उसको पकड़ा तब वह उसके हाथ में फिर लाठी बन गई। 
Exo 4:6  फिर यहोवा ने उस से यह भी कहा, कि अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप। सो उस ने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; फिर जब उसे निकाला तब क्या देखा, कि उसका हाथ कोढ़ के कारण हिम के समान श्वेत हो गया है। 
Exo 4:7  तब उस ने कहा, अपना हाथ छाती पर फिर रखकर ढांप। और उस ने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; और जब उस ने उसको छाती पर से निकाला तब क्या देखता है, कि वह फिर सारी देह के समान हो गया। 
Exo 4:8  तब यहोवा ने कहा, यदि वे तेरी बात की प्रतीति न करें, और पहिले चिन्ह को न मानें, तो दूसरे चिन्ह की प्रतीति करेंगे। 
Exo 4:9  और यदि वे इन दोनों चिन्हों की प्रतीति न करें और तेरी बात को न मानें, तब तू नील नदी से कुछ जल लेकर सूखी भूमि पर डालना; और जो जल तू नदी से निकालेगा वह सूखी भूमि पर लोहू बन जाथेगा। 
Exo 4:10  मूसा ने यहोवा से कहा, हे मेरे प्रभु, मैं बोलने में निपुण नहीं, न तो पहिले था, और न जब से तू अपने दास से बातें करने लगा; मैं तो मुंह और जीभ का भद्दा हूं। 
Exo 4:11  यहोवा ने उस से कहा, मनुष्य का मुंह किस ने बनाया है? और मनुष्य को गूंगा, वा बहिरा, वा देखने वाला, वा अन्धा, मुझ यहोवा को छोड़ कौन बनाता है? 
Exo 4:12  अब जा, मैं तेरे मुख के संग होकर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३५-३६ 
  • २ पतरस १

Wednesday, November 28, 2012

स्वर्ग में अर्जन

   लोगों को विभिन्न प्रकार की वस्तुएं एकत्रित करने के शौक होते हैं - सिक्के, डाकटिकट, बेसबॉल कार्ड इत्यादि। यह एकत्रित करने की रुचि एक अच्छा शौक हो सकती है, किंतु गंभीरता की बात यह है कि जब हम इस पृथ्वी से कूच करेंगे तो हमारे ये सभी संग्रह यहीं रह जाएंगे, अन्य किसी की संपत्ति हो जाएंगे। ऐसे संग्रह का क्या महत्व और क्या मूल्य जिसकी कीमत केवल पृथ्वी पर ही हो परन्तु स्वर्ग में जिसकी कोई कीमत ना हो?

   प्रभु यीशु ने ऐसे संचय के विषय में अपने चेलों से कहा: "अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं" (मत्ती ६:१९, २०)।

   अनन्त धन का मूल्य ही असल मूल्य है क्योंकि वह कभी बदलता या घटता नहीं है; ना वह चुराया जा सकता है और ना ही नष्ट हो सकता है। यह स्वर्गीय धन जमा करने वाले के नाम पर ही सदा के लिए रखा रहता है। विचारने की बात यह है कि उस अवश्यंभावी आते स्वर्गीय समय और स्थान के लिए हम केवल अभी पृथ्वी के अपने वर्तमान जीवन में ही उस धन का संचय कर सकते हैं। यह संचय कैसे किया जाता है? हमारे परमेश्वर की आज्ञाकारिता में किए गए सेवा कार्यों द्वारा; प्रभु यीशु के द्वारा पापों की क्षमा के सुसमाचार को दूसरों तक पहुंचाने के द्वारा; दुखी और बोझ से दबे लोगों को प्रभु यीशु में मिलने वाले आराम और शांति तक लाने के द्वारा; दूसरों पर प्रभु यीशु के समान दया और प्रेम के व्यवहार के द्वारा; प्रभु यीशु द्वारा सिखाए तथा बताए जीवन को संसार के सामने जी कर दिखाने के द्वारा।

   मरकुस रचित सुसमाचार में एक वृतांत है जिसमें एक धनी जवान ने प्रभु यीशु के पास आकर अनन्त जीवन का मार्ग जानना चाहा। प्रभु ने उससे कहा कि जो कुछ तेरे पास है उसे बेच कर कंगालों में बांट दे और मेरे पीछे हो ले। यह सुनकर वह धनी जवान अपना मुंह लटकाए दुखी होकर लौट गया (मरकुस १०:१७-२३)। उस धनी जवान की प्रतिक्रीया ने दिखा दिया कि उसके जीवन में वास्तविक महत्व किस चीज़ का था - धन-संपत्ति का या स्वर्गीय जीवन का।

   पार्थिव वस्तुओं और नाशमान धन-संपत्ति पर मन लगाना और उनको अर्जित करने के प्रयास में लगे रहना बहुत सहज तथा सामान्य है। परन्तु जब आप प्रभु यीशु को अपना जीवन स्वेच्छा से समर्पित करके उसका अनुसरण करने का निर्णय ले लेते हैं तो वह अनन्त कालीन धन-संपत्ति को स्वर्ग में अर्जित करने के आनन्द से आपको परिचित कराता है। स्वर्ग में अर्जन के उस आनन्द के समान संसार का कोई आनन्द नहीं और स्वर्गीय धन के समान संसार के किसी धन का कोई मूल्य नहीं।

   आज ही से स्वर्ग में अर्जन आरंभ कर दीजिए - केवल यही अनन्त काल तक काम आएगा। - जो स्टोवैल


पार्थिव को ढीले और स्वर्गीय को दृढ़ता से थामे रहें।

अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। - मत्ती ६:१९, २०

बाइबल पाठ: मत्ती ६:१९-३४
Mat 6:19  अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। 
Mat 6:20 परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। 
Mat 6:21 क्‍योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा। 
Mat 6:22  शरीर का दिया आंख है: इसलिये यदि तेरी आंख निर्मल हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा। 
Mat 6:23 परन्‍तु यदि तेरी आंख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्‍धि्यारा होगा; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्‍धकार हो तो वह अन्‍धकार कैसा बड़ा होगा। 
Mat 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते। 
Mat 6:25  इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Mat 6:26  आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्‍या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते? 
Mat 6:27  तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? 
Mat 6:28  और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो; जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Mat 6:29  तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Mat 6:30  इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहिनाएगा? 
Mat 6:31  इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे? 
Mat 6:32  क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिए। 
Mat 6:33  इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी। 
Mat 6:34  सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्‍योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३३-३४ 
  • १ पतरस ५

Tuesday, November 27, 2012

एबेनेज़र


   एक पुराना स्तुति गीत है "हे प्रभु आशीष के सोते" जो परमेश्वर के साथ मसीही विश्वासी की जीवन यात्रा के अनुभवों पर आधारित है। इस गीत में एक शब्द प्रयुक्त हुआ है ’एबेनेज़र’; यह शब्द परमेश्वर की प्रजा इस्त्राएल के उस अनुभव से लिया गया जब वे लोग अपने परमेश्वर के साथ के उनके निकट संबंध पूर्वसमान बनाने के प्रयास कर रहे थे। उनके आत्मिक अगुवे शमूएल ने उन्हें कहा कि यदि वे उन पराए देवताओं को, जिन्हें उन्होंने अपना लिया है, तज कर पूरे मन और सच्चे समर्पण के साथ परमेश्वर के पास वापस लौट आएंगे, तो वह उन्हें उनके आताताई पलिश्ति लोगों के आतंक से बचा लेगा (१ शमूएल ७:३)।

   जब उन लोगों ने ऐसा किया और अपने पापों से पश्चाताप किया, तब परमेश्वर ने उन्हें विजय दी।  इस विजय के उपलक्ष्य में "तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेजेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है (१ शमूएल ७:१२)।"

   आज जब स्तुति गीत में हम गाते हैं कि, "एबेनेज़र तू मसीहा, हुआ मेरा तारणहार; इससे मैं भी पार उतरूँगा, शोक समुन्दर के उस पार" तो हम स्मरण करते हैं कि अपनी कमी घटी और आवश्यक्ता के समय में
हम भी पश्चाताप और समर्पण के साथ परमेश्वर की ओर लौट सकते हैं और वह हमारी सहायता करेगा। हमने चाहे जो भी किया हो, हम चाहे कहीं भी भटक गए हों, उसका अनुग्रह हमारे लिए उपलब्ध है और वह हमें, जो उसकी सन्तान हैं, सदा ही बहाल करने की चाह रखता है।

   अपने मनों में परमेश्वर के वचन को बसा लें, उसे अपना एबेनेज़र बना लें, और सदा स्मरण रखें कि जिस परमेश्वर ने आज तक और यहां तक आपको संभाला है, आपकी हर परिस्थिति में वह केवल एक प्रार्थना भर की दूरी पर आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है, इसलिए हमें भविष्य का भय नहीं।

...यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है। - १ शमूएल ७:१२

बाइबल पाठ: १ शमूएल ७:३-१४
1Sa 7:3  तब शमूएल ने इस्राएल के सारे घराने से कहा, यदि तुम अपने पूर्ण मन से यहोवा की ओर फिरे हो, तो पराए देवताओं और अश्तोरेत देवियों को अपने बीच में से दूर करो, और यहोवा की ओर अपना मन लगाकर केवल उसी की उपासना करो, तब वह तुम्हें पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाएगा। 
1Sa 7:4  तब इस्राएलियों ने बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों को दूर किया, और केवल यहोवा ही की उपासना करने लगे।
1Sa 7:5  फिर शमूएल ने कहा, सब इस्राएलियों को मिस्पा में इकट्ठा करो, और मैं तुम्हारे लिये यहोवा से प्रार्थना करूंगा। 
1Sa 7:6  तब वे मिस्पा में इकट्ठे हुए, और जल भरके यहोवा के साम्हने उंडेल दिया, और उस दिन उपवास किया, और वहां कहने लगे, कि हम ने यहोवा के विरूद्ध पाप किया है। और शमूएल ने मिस्पा में इस्राएलियों का न्याय किया। 
1Sa 7:7  जब पलिश्तियों ने सुना कि इस्राएली मिस्पा में इकट्ठे हुए हैं, तब उनके सरदारों ने इस्राएलियों पर चढ़ाई की। यह सुनकर इस्राएली पलिश्तियों से भयभीत हुए। 
1Sa 7:8  और इस्राएलियों ने शमूएल से कहा, हमारे लिये हमारे परमेश्वर यहोवा की दोहाई देना न छोड़, जिस से वह हम को पलिश्तियों के हाथ से बचाए। 
1Sa 7:9  तब शमूएल ने एक दूधपिउवा मेम्ना ले सर्वांग होमबलि करके यहोवा को चढ़ाया; और शमूएल ने इस्राएलियों के लिये यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसकी सुन ली। 
1Sa 7:10  और जिस समय शमूएल होमबलि हो चढ़ा रहा था उस समय पलिश्ती इस्राएलियों के संग युद्ध करने के लिये निकट आ गए, तब उसी दिन यहोवा ने पलिश्तियों के ऊपर बादल को बड़े कड़क के साथ गरजाकर उन्हें घबरा दिया, और वे इस्राएलियों से हार गए। 
1Sa 7:11  तब इस्राएली पुरूषों ने मिस्पा से निकल कर पलिश्तियों को खदेड़ा, और उन्हें बेतकर के नीचे तक मारते चले गए। 
1Sa 7:12  तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेजेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है। 
1Sa 7:13  तब पलिश्ती दब गए, और इस्राएलियों के देश में फिर न आए, और शमूएल के जीवन भर यहोवा का हाथ पलिश्तियों के विरूद्ध बना रहा। 
1Sa 7:14  और एक्रोन और गत तक जितने नगर पलिश्तियों ने इस्राएलियों के हाथ से छीन लिए थे, वे फिर इस्राएलियों के वश में आ गए; और उनका देश भी इस्राएलियों ने पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाया। और इस्राएलियों और एमोरियों के बीच भी सन्धि हो गई।

एक साल में बाइबल: 

  • सभोपदेशक १-३ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१६-३३

Monday, November 26, 2012

उन्नत पाठ


   हमारी प्रवृत्ति है कि हम अपने दिन और समय को उपखंडों में बांट लेते हैं और फिर उन उपखंडों को विभिन्न गतिविधियों से भर लेते हैं, जैसे इस समय में घर का कार्य, इस समय में बाहर का कार्य, जीविका के कार्य के लिए यह समय, बच्चों की देखभाल के लिए वह समय आदि। इस सब के बाद फिर हम आत्मिक गतिविधियों के लिए समय निकालने के प्रयास करते हैं जिससे चर्च जाना, प्रार्थना सभा और बाइबल अध्ययन में सम्मिलित होना संभव हो सके। हमारे लिए ये आत्मिक गतिविधियां, सांसारिक गतिविधियों से अधिक महत्वपुर्ण शायद ही कभी होती हों।

   परन्तु जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता में लिखे भजनों को पढ़ता हूँ तो मुझे इस प्रकार जीवन को उपखंडों में बांटकर उसका उपयोग करना और फिर आत्मिक बातों के लिए समय निकालने का प्रयास करना कहीं दिखलाई नहीं देता। वरन मैं पाता हूँ कि भजनकार दाऊद तथा अन्य भजन लेखकों ने तो परमेश्वर को अपने जीवन का केंद्र बिंदु बना रखा था और इनके जीवन की हर गतिविधि परमेश्वर से जुड़ी होती थी। उनके लिए परमेश्वर कि आराधना और उपासना जीवन का मूल कार्य थी, ना कि कोई ऐसा कार्य जिसके लिए अन्य बातों से कुछ समय निकाल कर एक औपचारिकता पूरी कर ली जाए और फिर वापस उन्हीं बातों में व्यस्त हो जाएं। उन भजनकारों के समान आशीषित होने के लिए अपनी प्राथमिकताओं का ऐसा ही निर्धारण आज हमारे लिए भी अति आवश्यक है। हमें परमेश्वर को अपने जीवन और कार्य की हर बात से संबंधित रखना चाहिए तब ही उसका मार्गदर्शन और आशीष हमारे जीवन के हर कार्य पर होगी।

   मेरे लिए ये भजन परमेश्वर को अपने जीवन में केंद्रीय स्थान पर रखने की प्रेर्णा के स्त्रोत हो गए हैं। उन भजनकारों की परमेश्वर के लिए तीव्र भूख-प्यास और लालसा के सामने परमेश्वर के लिए मेरी अपनी भूख-प्यास और लालसा बिलकुल फीकी प्रतीत होती है। हरिणी जैसे जल के लिए हांफती है वैसे ही वे परमेश्वर के लिए हांफते थे (भजन ४२:१-२); वे रात भर जागते थे और परमेश्वर की मनोहरता पर मनन करते रहते थे (भजन २७:४); उनके लिए हज़ार वर्ष किसी अन्य स्थान पर बिताने से अच्छा था परमेश्वर की उपस्थिति में एक दिन बिता लेना (भजन ८४:१०)।

   ऐसा लगता है कि ये भजनकार परमेश्वर की पहचान की किसी उन्नत पाठशाला में रहते और अध्ययन करते थे। उनके लिखे भजन पढ़ने, मनन करने और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में लागू करने से उस उन्नत पाठशाला के वे उन्नत पाठ हमारे जीवनों में भी आ सकते हैं। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर को पूर्णतः समर्पित हृदय ही परमेश्वर के लिए उपयोगी हृदय हो सकता है।

यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? - भजन २७:१

बाइबल पाठ: भजन २७
Psa 27:1  यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psa 27:2  जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psa 27:3  चाहे सेना भी मेरे विरूद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरूद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचित रहूंगा।
Psa 27:4  एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psa 27:5  क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्तस्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psa 27:6  अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा और उसका भजन गाऊंगा।
Psa 27:7  हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psa 27:8  तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psa 27:9  अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध करके न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psa 27:10  मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psa 27:11  हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psa 27:12  मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरूद्ध उठे हैं।
Psa 27:13  यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psa 27:14  यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २७-२९ 
  • १ पतरस ३

Sunday, November 25, 2012

धन्यवादी


   घर पर परमेश्वर के धन्यवादी होने का पर्व मनाने और एक साथ भोजन करने के लिए परिवार के सभी सदस्य एकत्रित थे, भोजन के लिए मेज़ पर आकर बैठे हुए थे। उन्हें देखकर और उनकी विभिन्न योग्यताओं के बारे में सोचकर मैं प्रसन्न थी और मुस्कुरा रही थी। मेज़ पर डॉकटर भी थे और संगीतज्ञ भी। मैं चिकित्सकों के लिए भी धन्यवादी थी क्योंकि उनके द्वारा हमारे शरीर स्वस्थ बने रहते हैं, और संगीतज्ञों के लिए भी क्योंकि उनके संगीत से मन प्रफुल्लित होता है तथा विचलित मस्तिष्क शांति पाते हैं।

   डॉकटरों और संगीतज्ञों की योग्यताएं एक दूसरे से बहुत भिन्न हैं, किंतु उन दोनो के कार्य का प्रभावी होना एक ही बात पर निर्भर करता है - व्यवस्थित, क्रमबद्ध और सुचारू रूप से कार्यकारी संसार। यदि संसार में व्यवस्था और क्रमबद्धता नहीं होगी तो किसी बात का पूर्वानुमान संभव नहीं होगा; यदि पूर्वानुमान सही नहीं होगा तो ना संगीत बनेगा और ना ही चिकित्सा कार्यकारी होगी।

   जब परमेश्वर ने सृष्टि की रचना करी तो सब कुछ व्यवस्थित, क्रमबद्ध और सुचारू था। एक व्यवस्थित और क्रमबद्ध संसार में रोग इस बात का सूचक है कि कुछ अव्यवस्थित है; क्रमानुसार नहीं है। इसके विपरीत चंगाई इस बात का सूचक है कि अब व्यवस्था और क्रमबद्धता पुनः स्थापित हो गई है। जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने जानना चाहा कि क्या यीशु ही वह आने वाला उद्धारकर्ता है तो प्रभु यीशु ने उन सन्देशवाहकों से कहा: "...जो कुछ तुम ने देखा और सुना है, जाकर यूहन्ना से कह दो; कि अन्‍धे देखते हैं, लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है" (लूका ७:२२)। यह विभिन्न प्रकार कि चंगाई इस बात का प्रमाण थी कि यीशु ही वह उद्धारकर्ता है जिसकी संसार बाट जोह रहा था (मलाकी ४:२) और जो सब कुछ संसार के पाप में बिगड़ने से पहले के समान बहाल कर देगा (प्रेरितों ३:२१)।

   मैं संगीत के लिए भी धन्यवादी हूँ जो मेरे विचलित मन-मस्तिष्क को शांति देता है, और चिकित्सा के साधनों के लिए भी जिनसे मेरा शरीर स्वस्थ रहता है। यह मुझे स्मरण दिलाते रहते हैं कि मेरे प्रभु यीशु में मुझे और संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी को पापों से क्षमा, पाप के दण्ड से मुक्ति तथा परमेश्वर के साथ अनन्त काल की शांति और बहाली सेंत-मेंत मिली है। यही आशीषें उन सबके लिए भी ऐसे ही सेंत-मेंत उपलब्ध हैं जो प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं और उसे अपने निज उद्धारकर्ता ग्रहण कर लेते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु पाप से बिगड़े हुओं को सुधारने और बहाल करने का विशेषज्ञ है।

परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे। - मलाकी ४:२

बाइबल पाठ: लूका ७:११-२३
Luk 7:11  थोड़े दिन के बाद वह नाईन नाम के एक नगर को गया, और उसके चेले, और बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी। 
Luk 7:12  जब वह नगर के फाटक के पास पहुंचा, तो देखो, लोग एक मुरदे को बाहर लिए जा रहे थे, जो अपनी मां का एकलौता पुत्र था, और वह विधवा थी: और नगर के बहुत से लोग उसके साथ थे। 
Luk 7:13  उसे देख कर प्रभु को तरस आया, और उस ने कहा; मत रो। 
Luk 7:14  तब उस ने पास आकर, अर्थी को छुआ; और उठाने वाले ठहर गए, तब उस ने कहा, हे जवान, मैं तुझ से कहता हूं, उठ। 
Luk 7:15  तब वह मुरदा उठ बैठा, और बोलने लगा: और उस ने उसे उस की मां को सौप दिया। 
Luk 7:16  इस से सब पर भय छा गया; और वे परमेश्वर की बड़ाई करके कहने लगे कि हमारे बीच में एक बड़ा भविष्यद्वक्ता उठा है, और परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपा दृष्‍टि की है। 
Luk 7:17  और उसके विषय में यह बात सारे यहूदिया और आस पास के सारे देश में फैल गई।
Luk 7:18  और यूहन्ना को उसके चेलों ने इन सब बातों का समचार दिया। 
Luk 7:19  तब यूहन्ना ने अपने चेलों में से दो को बुलाकर प्रभु के पास यह पूछने के लिये भेजा, कि क्‍या आने वाला तू ही है, या हम किसी और दूसरे की बाट देखें? 
Luk 7:20  उन्‍होंने उसके पास आकर कहा, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने हमें तेरे पास यह पूछने को भेजा है, कि क्‍या आने वाला तू ही है, या हम दूसरे की बाट जोहें?
Luk 7:21  उसी घड़ी उस ने बहुतों को बीमारियों और पीड़ाओं, और दुष्‍टात्माओं से छुड़ाया, और बहुत से अन्‍धों को आंखे दी। 
Luk 7:22  और उस ने उन से कहा, जो कुछ तुम ने देखा और सुना है, जाकर यूहन्ना से कह दो; कि अन्‍धे देखते हैं, लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है। 
Luk 7:23  और धन्य है व