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शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

परमेश्वर की उपासना

परमेश्वर, सिद्ध पवित्र परमेश्वर, सच्ची उपासना के योग्य है। वह ही हमारा सृजनहार, पालनहार, तारणहार है। यदि उसका प्रेम भरा मार्गदर्शन और देख-रेख हमें उपलब्ध न हो तो हमारे जीवन के लिये कोई आशा न रहे। इसलिये हमें सर्वदा उसकी ऐसी उपासना करनी चाहिये जो उसके नाम को आदर और उसे सच्ची महिमा देती हो।

प्रभु यीशु ने सामरी स्त्री से अपनी बातचीत में कहा "परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।" (यूहन्ना ४:२४)

अपनी उत्कृष्ट पुस्तक "The Practice of the Presence of God" में लेखक भाई लौरेन्स इस का अर्थ इस प्रकार समझाते हैं "सच्चाई से परमेश्वर की आराधना करने का तातपर्य है कि परमेश्वर की वास्तविकता को जानना, उसके संपूर्ण गुणों को पहिचानना, अर्थात यह कि वह अपनी अनन्त संपूर्णता में सिद्ध, हर एक प्रकार कि बुराई से परे और समस्त दिव्यगुणों से परिपूर्ण है। किसी मनुष्य के पास उपासना करने का चाहे कोई बहुत ही छोटा प्रतीत होने वाला कारण ही क्यों न हो, लेकिन जब वह उपासना करे तो ऐसे महान परमेश्वर की उपासना उसे अपनी सारी सामर्थ से करनी चाहिये।"

हमें अपने आप से पूछने की आवश्यक्ता है कि जिस ने हमें बनाया है, क्या उसकी उपासना हम इस प्रकार करते हैं? क्या सदा अपने मन मस्तिष्क कि गहिराईयों से हम उसका आदर और मान बनाए रखते हैं? क्या जब हम उसके सन्मुख आते हैं तो उससे जिससे कोई बात छिपी नहीं है, जो मन की बात और मस्तिष्क के विचारों को भी जानता है, उसके सन्मुख अपने आप को पूरी सच्चाई से प्रस्तुत करते हैं या उससे कुछ छिपाते हुए, कोई बहाने बनाते हुए, अपने आप को सही प्रमाणित करने के प्रयास के साथ आते हैं? क्या वह जो है, हम उसकी हस्ती और उसके गुणों का अंगीकार करते हैं?

यदि उस सर्वसामर्थी, सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी परमेश्वर की सच्ची उपासना करनी है तो यह केवल "आत्मा और सच्चाई" ही में हो सकती है। - डेव एग्नर


यदि जीवन में मसीह सबसे बहुमूल्य नहीं तो फिर उसका कोई मूल्य नहीं।

परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें। - यूहन्ना ४:२४



बाइबल पाठ: यूहन्ना ४:९-२६

उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्‍यों मांगता है? (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया और आप ही अपने सन्‍तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।
यीशु ने उस से कहा, जा, अपने पति को यहां बुला ला।
स्त्री ने उत्तर दिया, कि मैं बिना पति की हूं: यीशु ने उस से कहा, तू ठीक कहती है कि मैं बिना पति की हूं।
क्‍योंकि तू पांच पति कर चुकी है, और जिस के पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, मुझे ज्ञात होता है कि तू भविष्यद्वक्ता है।
हमारे बाप-दादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया: और तुम कहते हो कि वह जगह जहां भजन करना चाहिए यरूशलेम में है।
यीशु ने उस से कहा, हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में।
तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो, और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्‍योंकि उद्धार यहूदियों में से है।
परन्‍तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्‍चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्‍योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।
परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।
स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्‍तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा।
यीशु ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १२-१४
  • मरकुस ५:२१-४३

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

परमेश्वर पवित्र है

परमेश्वर ऐसा कुछ नहीं कर सकता जो उसके पवित्र चरित्र के अनुकूल न हो। क्योंकि परमेश्वर अपने स्वभाव से पवित्र और सिद्ध है, इसलिये उसके सारे गुण उसकी इस पवित्रता और सिद्धता को दर्शाते हैं। कुछ बातों पर ध्यान कीजिए:

१. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपनी धार्मिकता में सिद्ध है। हम उसकी इच्छा के आधीन बेखटके हो सकते हैं क्योंकि इब्राहिम द्वारा उत्पत्ति १८:२५ में उठाये गये प्रश्न "क्या सारी पृथ्वी का न्यायी न्याय न करे?" का एक ही उत्तर संभव हो सकता है - " हाँ "।

२. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपने न्याय में सिद्ध है। पौलुस ने कहा "...हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के साम्हने खड़े होंगे।" (रोमियों १४:१०); पतरस ने लिखा "क्‍योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्‍या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?" (१ पतरस ४:१७); यूहन्ना, अविश्वासियों के संबंध में कहता है " ...उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया।" (प्रकाशितवाक्य २०:१३)।

३. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपने सदा सत्य होने में सिद्ध है। इस कारण हम उसके वचन पर सम्पूर्ण विश्वास कर सकते हैं। गिनती २३:१९ में लिखा है " ईश्वर मनुष्य नहीं, कि झूठ बोले, और न वह मनुष्य है, कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उस ने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उस पूरा न करे?"

४. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपनी विश्वासयोग्यता में सिद्ध है। यर्मियाह नबी ने लिखा " हम मिट नहीं गए, यह यहोवा की महान करुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।" (विलापगीत ३:२२, २३)

हम अपने धर्मी, न्यायी, सच्चे और विश्वासयोग्य परमेश्वर पर समपूर्ण भरोसा रख सकते हैं क्योंकि वह पवित्र है। - रिचर्ड डी हॉन


परमेश्वर की जो पवित्रता पापी को दोषी सिद्ध करती है, वही धर्मी को सांत्वना भी देती है।

...सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है। - यशायाह ६:३


बाइबल पाठ: भजन ४८

हमारे परमेश्वर के नगर में, और अपने पवित्र पर्वत पर यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है!
सिय्योन पर्वत ऊंचाई में सुन्दर और सारी पृथ्वी के हर्ष का कारण है, राजाधिराज का नगर उत्तरीय सिरे पर है।
उसके महलों में परमेश्वर ऊंचा गढ़ माना गया है।
क्योंकि देखो, राजा लोग इकट्ठे हुए, वे एक संग आगे बढ़ गए।
उन्होंने आप ही देखा और देखते ही विस्मित हुए, वे घबराकर भाग गए।
वहां कंपकंपी ने उनको आ पकड़ा, और जच्चा की सी पीड़ाएं उन्हें होने लगीं।
तू पूर्वी वायु से तर्शीश के जहाजों को तोड़ डालता है।
सेनाओं के यहोवा के नगर में, अपने परमेश्वर के नगर में, जैसा हम ने सुना था, वैसा देखा भी है; परमेश्वर उसको सदा दृढ़ और स्थिर रखेगा।
हे परमेश्वर हम ने तेरे मन्दिर के भीतर तेरी करूणा पर ध्यान किया है।
हे परमेश्वर तेरे नाम के योग्य तेरी स्तुति पृथ्वी की छोर तक होती है। तेरा दहिना हाथ धर्म से भरा है;
तेरे न्याय के कामों के कारण सिय्योन पर्वत आनन्द करे, और यहूदा के नगर की पुत्रियां मगन हों!
सिय्योन के चारों ओर चलो, और उसकी परिक्रमा करो, उसके गुम्मटों को गिन लो,
उसकी शहरपनाह पर दृष्टि लगाओ, उसके महलों को ध्यान से देखो; जिस से कि तुम आने वाली पीढ़ी के लोगों से इस बात का वर्णन कर सको।
क्योंकि वह परमेश्वर सदा सर्वदा हमारा परमेश्वर है, वह मृत्यु तक हमारी अगुवाई करेगा।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती ९-११
  • मरकुस ५:१-२०

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

आत्मविशलेष्ण

प्रसिद्ध पाश्चात्य संगीत शास्त्री बीथोवेन के घर की देखरेख करने वाला, कुछ पर्यटकों को बीथोवन का घर घुमा रहा था। जब वे एक पुराने और आलीशान प्यानो के पास आए, तो बड़े आदर से उस प्यानो का ढक्कन उठाते हुए कहा, "यही वह प्यानो है जिस पर बैठ कर बीथोवन अपने संगीत की रचना करते थे।" तभी उन पर्यटकों में से एक युवती आगे बढ़ी और प्यानो के आगे बैठ गई तथा बीथोवन द्वारा रचित एक छोटी धुन उस प्यानो पर बजाने लगी। धुन समाप्त करके वह बड़े गर्व से उस ठगे से खड़े और विस्मित देखरेख करने वाले की ओर मुड़ी और बोली, "यहां आने वाले लोगों में से बहुतेरे ऐसे ही बीथोवन के प्यानों को बजाना चाहते होंगे, हैं ना?" उस देखरेख करने वाले ने बड़े सहज भाव से उत्तर दिया, "मैडम, पिछले ग्रीष्म ‌‍ॠतु में विश्व प्रसिद्ध प्यानो वादक श्रीमान पाद्रेवस्की यहां आये थे। उनके कुछ मित्रों ने उनसे इस प्यानो पर कुछ बजाने का निवेदन किया, लेकिन उन्हों ने बड़ी नम्रता से यह कहकर इन्कार कर दिया कि मैं इसके योग्य नहीं हूँ!"

जैसे जैसे हम अपने प्रभु की समानता में बढ़ते जाते हैं, हम उसके समक्ष अपनी औकात के और अपने पापों के प्रति बोझिल भी होते जाते हैं। यह विरोधाभास किसी विकृत आत्मविशलेष्ण का नतीजा नहीं है और न ही यह स्व्यं अपने प्रति किसी हीन भावना का द्योतक है। यह इस बात की सच्ची पहिचान है कि मसीह क्या है और हम क्या हैं और हमारी मसीह की समानता में ढलने की इच्छा कैसी है।

परमेश्वर की पवित्रता की झलक पाने के बाद यशायाह नबी चिल्ला उठा "...हाय! हाय! मैं नाश हूआ। क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! " (यशायाह ६:५); अपनी तकलीफों और परीक्षाओं के अन्त में परमेश्वर के दर्शन पाने के बाद अय्युब ने विनम्रता सहित स्वीकार किया कि "...मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।" (अय्युब ४२:६); और यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले ने प्रभु यीशु के विष्य में कहा "...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं..."(मत्ती ३:११)।

परमेश्वर के समक्ष अपनी अयोग्यता की स्वस्थ स्वीकृति और पहिचान, हमें प्रभु की योग्यता पर निर्भरता बनाए रखने में सहायक होती है, और यही प्रभु की समानता में ढलते और बढ़ते जाने का राज़ है। - डेनिस डी हॉन


जब लोग सच्चे परमेश्वर की सच्ची पहिचान के साथ उसकी सच्ची उपासना करने लग जाते हैं, तो वे उसकी समानता में भी बढ़ने लग जाते हैं।

...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं... - मत्ती ३:११


बाइबल पाठ: अय्युब ४२:१-६

तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;
मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।
तू कौन है जो ज्ञान रहित होकर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिनको मैं जानता भी नहीं था।
मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे।
मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;
इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती ७-८
  • मरकुस ४:२१-४१

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

श्रद्धा

मेरे पिताजी परमेश्वर के प्रति श्रद्धालु व्यवहार बनाए रखने के लिये बड़े कट्टर थे। उनके समक्ष यदि कोई परमेश्वर को हल्के में संबोधित करता तो वे क्रुद्ध हो जाते। उनका नियम था कि जब वे सबके सामने बाइबल पढ़ें तो उनके परिवार जन सीधे और सतर्क बैठें, जैसे वे किसी उच्च पदाधिकरी के समक्ष बैठे हों। वे जब परमेश्वर को संबोधित करते थे तो उनके हावभाव से उनकी श्रद्धा और आश्चर्य प्रगट होता था कि हम पापी मनुष्य भी परम पवित्र सृष्टिकर्ता से वार्तालाप कर सकते हैं।

हमारा सर्वसामर्थी परमेश्वर चाहता है कि हम उसे "अब्बा, पिता" करके संबोधित करें, और वह हमें बिना किसी घबराहट या हिचकिचाहट के अपने समक्ष आने का निमंत्रण भी देता है। परन्तु बाइबल के सैंकड़ों खण्ड हैं जहां यह बात स्पष्ट करी गई है कि हमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा और भय का आचरण कभी नज़रांदज़ नहीं करना है।

निर्गमन १९ अध्याय में परमेश्वर का अपने लोगों को अपने निकट आने का निमंत्रण और उसकी उपस्थिति से उत्पन्न पराक्रमी और भय पैदा करने वाली घटनाओं का अद्भुत समागम है, जिससे इस्त्राएली लोग उसके प्रति श्रद्धा और भय को समझ सकें। जब इस्त्राएली प्रजा पर्वत के नीचे परमेश्वर की बात सुनने को जमा हुई और परमेश्वर पर्वत की चोटी पर उतरा तब पर्वत की चोटी से बड़ी आग और धुआं उठा, भीष्ण गड़गड़ाहट की दिल दहला देने वाली ध्वनि हुई और तेज़ बिजली आकाश में कौन्धने लगी। पर्वत कांपने लगा और तुरही का ऊंचा शब्द हुआ और तब इस्त्राएली लोगों ने परमेश्वर को मूसा से बात करते सुना और वे आदर, भय और श्रद्धा से भर गए।

परमेश्वर कितना महान और पवित्र है, उसकी तुलना में हम कितने छोटे और कमज़ोर हैं और हमारी कोई सामर्थ या पवित्रता तो है ही नहीं। लेकिन फिर भी हमारे प्रति वह अपने प्रेम को प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट करता है और समस्त मानव जाति को, वे चाहे जो भी हों और जैसे भी हों, प्रभु यीशु में होकर अपने पास आने का खुला निमंत्रण देता है।

जब हम परमेश्वर के सन्मुख अपनी औकात का ध्यान रखते हैं तो हम भय के साथ उसकी सेवा और आनन्द के साथ उसकी संगति भी कर सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


सच्ची उपासना परमेश्वर की सच्ची पहिचान से होती है।

डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपके हुए मगन हो। - भजन २:११


बाइबल पाठ: निर्गमन १९:१-१९

इस्त्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीत चुके, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए।
और जब वे रपीदीम से कूच करके सीनै के जंगल में आए, तब उन्होंने जंगल में डेरे खड़े किए; और वहीं पर्वत के आगे इस्त्राएलियों ने छावनी डाली।
तब मूसा पर्वत पर परमेश्वर के पास चढ़ गया, और यहोवा ने पर्वत पर से उसको पुकार कर कहा, याकूब के घराने से ऐसा कह, और इस्त्राएलियों को मेरा यह वचन सुना,
कि तुम ने देखा है कि मै ने मिस्रियों से क्या क्या किया, तुम को मानो उकाब पक्षी के पंखों पर चढ़ा कर अपने पास ले आया हूं।
इसलिये अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे, समस्त पृथ्वी तो मेरी है।
और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे। जो बातें तुझे इस्त्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।
तब मूसा ने आकर लोगों के पुरनियों को बुलवाया, और ये सब बातें, जिनके कहने की आज्ञा यहोवा ने उसे दी थी, उनको समझा दीं।
और सब लोग मिल कर बोल उठे, जो कुछ यहोवा ने कहा है वह सब हम नित करेंगे। लोगों की यह बातें मूसा ने यहोवा को सुनाईं।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, सुन, मैं बादल के अंधियारे में होकर तेरे पास आता हूं, इसलिये कि जब मैं तुझ से बातें करूं तब वे लोग सुनें, और सदा तेरी प्रतीति करें। और मूसा ने यहोवा से लोगों की बातों का वर्णन किया।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, लोगों के पास जा और उन्हें आज और कल पवित्र करना, और वे अपने वस्त्र धो लें,
और वे तीसरे दिन तक तैयार हो रहें, क्योंकि तीसरे दिन यहोवा सब लोगों के देखते सीनै पर्वत पर उतर आएगा।
और तू लोगों के लिये चारों ओर बाड़ा बान्ध देना, और उन से कहना, कि तुम सचेत रहो कि पर्वत पर न चढ़ो और उसके सिवाने को भी न छूओ और जो कोई पहाड़ को छूए वह निश्चय मार डाला जाए।
उसको कोई हाथ से तो न छूए, परन्तु वह निश्चय पत्थरवाह किया जाए, वा तीर से छेदा जाए; चाहे पशु हो चाहे मनुष्य, वह जीवित न बचे। जब महाशब्द वाले नरसिंगे का शब्द देर तक सुनाई दे, तब लोग पर्वत के पास आएं।
तब मूसा ने पर्वत पर से उतर कर लोगों के पास आकर उनको पवित्र कराया और उन्होंने अपने वस्त्र धो लिए।
और उस ने लोगों से कहा, तीसरे दिन तक तैयार हो रहो, स्त्री के पास न जाना।
जब तीसरा दिन आया तब भोर होते बादल गरजने और बिजली चमकने लगी, और पर्वत पर काली घटा छा गई, फिर नरसिंगे का शब्द बड़ा भरी हुआ, और छावनी में जितने लोग थे सब कांप उठे।
तब मूसा लोगों को परमेश्वर से भेंट करने के लिये छावनी से निकाल ले गया, और वे पर्वत के नीचे खड़े हुए।
और यहोवा जो आग में होकर सीनै पर्वत पर उतरा था, इस कारण समस्त पर्वत धुएं से भर गया, और उसका धुआं भट्टे का सा उठ रहा था, और समस्त पर्वत बहुत कांप रहा था
फिर जब नरसिंगे का शब्द बढ़ता और बहुत भारी होता गया, तब मूसा बोला, और परमेश्वर ने वाणी सुना कर उसको उत्तर दिया।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ४-६
  • मरकुस ४:१-२०

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

हमारा महान परमेश्वर

अमेरिका के जौर्जिया प्रांत में स्थित "स्टोन माऊंन्टेन" संसार का सबसे बड़ा उघाड़े हुए ग्रेनाईट चट्टान का पहाड़ है। उस १,७०० फुट चौड़े चट्टान के पटल पर दक्षिणी अमेरिका के तीन महान नेताओं के चेहरे तराशे गए हैं। यद्यपि यह पहाड़ और इसपर तराशी गई प्रतिमाएं विशाल हैं, फिर भी दूर से यह उतना आकर्षक नहीं लगता। इसकी महानता इसे देखने वाले को तभी अभिभूत करती है जब दर्शक इसके निकट आकर इसे निहारता है।

भजनकार एथन भजन ८९ में एक ऐसा ही सत्य परमेश्वर को जानने के संबंध में लिखता है। यह प्रेरणादायक भजन परमेश्वर की स्तुति से भरा है। भजनकार परमेश्वर की महानता, उसकी दया और विश्वासयोग्यता का वर्णन करता है। एथन यह सब कर सका क्योंकि वह अपने परमेश्वर को निकट से जानता था और उसके साथ एक निकट का व्यक्तिगत संबंध रखता था। भजन ८९ जैसे दर्शन उन्हीं को प्राप्त होते हैं जो परमेश्वर के निकट आते हैं और उसकी महानता से अभीभूत होते हैं।

हम जितना अपने परमेश्वर के निकट आते हैं उतना अधिक हम उसके प्रेम, सामर्थ और महानता का अनुभव करते हैं। एथन यहोवा के लिये गा सका "तेरी भुजा बलवन्त है; तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दहिना हाथ प्रबल है।" (भजन ८९:१३) और उसका उसके परमेश्वर के संबंध में यही ज्ञान उसके लिये आशीश बना। हम जितना अधिक उसके निकट आते जाएंगे, वह हमारे पक्ष में उतना अधिक महान होता जाएगा। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर किसी का भी स्थान ले सकता है लेकिन परमेश्वर का स्थान कोई नहीं ले सकता।

क्योंकि आकाशमण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी? - भजन ८९:६


बाइबल पाठ: भजन ८९:५-१७

हे यहोवा, स्वर्ग में तेरे अद्भुत काम की, और पवित्रों की सभा में तेरी सच्चाई की प्रशंसा होगी।
क्योंकि आकाशमण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी?
ईश्वर पवित्रों की गोष्ठी में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य, और अपने चारों ओर सब रहने वालों से अधिक भययोग्य है।
हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे याह, तेरे तुल्य कौन सामर्थी है? तेरी सच्चाई तो तेरे चारों ओर है!
समुद्र के गर्व को तू ही तोड़ता है, जब उसके तरंग उठते हैं, तब तू उनको शान्त कर देता है।
तू ने रहाब को घात किए हुए के समान कुचल डाला, और अपने शत्रुओं को अपने बाहुबल से तितर बितर किया है।
आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है, जगत और जो कुछ उस में है, उसे तू ही ने स्थिर किया है।
उत्तर और दक्खिन को तू ही ने सिरजा; ताबोर और हेर्मोन तेरे नाम का जयजयकार करते हैं।
तेरी भुजा बलवन्त है, तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दाहिना हाथ प्रबल है।
तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है; करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है।
क्या ही धन्य है वह समाज जो आनन्द के ललकार को पहिचानता है; हे यहोवा वे लोग तेरे मुख के प्रकाश में चलते हैं,
वे तेरे नाम के हेतु दिन भर मगन रहते हैं, और तेरे धर्म के कारण महान हो जाते हैं।
क्योंकि तू उनके बल की शोभा है, और अपनी प्रसन्नता से हमारे सींग को ऊंचा करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १-३
  • मरकुस ३

रविवार, 20 फ़रवरी 2011

भय और प्रेम

बच्चों की कहानी "The Mole and the Rat" में लेखक केनेथ ग्राहम ने प्रेम और भय के संबंध को रूपक द्वारा दर्शाया है। दो जानवर, छछुंदर और चूहा, एक और सामर्थी जीव "मित्र तथा सहायक" (- जो परमेश्वर को दर्शता है) से मिलते हैं। उसे देखकर छछुंदर थरथर कांपने लगता है और चूहे से फुसफुसा कर पूछता है "चूहे, क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा?" चूहा, जिसकी आंखें से बयान से बाहर प्रेम से छलक रहा था, "मित्र और सहायक" को निहारते हुए धीमी आवाज़ में उत्तर देता है "डर? इनसे? नहीं, नहीं, कभी नहीं! लेकिन फिर भी ओह छछुंदर, मुझे डर तो है।"

परमेश्वर का दर्शन देखकर दानियल नबी का भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ होगा। दानियेल का परमेश्वर के प्रति प्रेम असीम था, लेकिन जब उसने दर्शन में परमेश्वर को अपने समक्ष खड़ा पाया तो वह भय से गिर पड़ा (दानियेल ८:१५-२७)। परमेश्वर की पवित्रता की एक झलक ने उसे अभिभूत कर दिया।

प्रभु यीशु ने परमेश्वर से प्रेम रखने की आज्ञा दी (मत्ती २२:३७), जबकि पौलुस कहता है कि हमें परमेश्वर का भय रखना चाहिये (कुलुस्सियों ३:१८-२५)। लेकिन यदि हम परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तो क्या हमें डर से मुक्त नहीं हो जाना चाहिये? क्या सच्चा प्रेम डर को दूर नहीं कर देता?

मेरा अपना अनुभव इसे समझने में सहायता कर सकता है। मैं परमेश्वर से प्रेम करता हूँ, लेकिन जब उस दिन के बारे में सोचता हूँ जब मैं उसके समक्ष खड़ा होऊंगा तो डरता भी हूँ। मुझे यह डर नहीं है कि वह मुझे नरक भेज देगा, इसका निर्णय तो उसी क्षण हो चुका जब मैंने प्रभु यीशु पर विश्वास किया, उससे अपने पापों की क्षमा मांगी - क्योंकि मेरे पापों की कीमत चुका कर प्रभु यीशु ने मुझे नरक के दंड से बचा लिया है। लेकिन यह सोचकर कि मैं, हां मैं, मुझ जैसा मनुष्य, उस परम पवित्र परमेश्वर के सामने खड़ा होने पाएगा, मुझे परमेश्वर के प्रति श्रद्धा पूर्ण भय से भर देता है और मेरे प्राण-देह-आत्मा उसके आगे झुक जाते हैं। यही भय है जो मुझे परमेश्वर को प्रसन्न रखने को प्रेरित करता है, इसलिये नहीं कि मुझे उससे किसी सज़ा का डर है, वरन इसलिये कि उसकी इच्छा के अनुसार कार्य करके उसे प्रसन्न रखना उसके महान प्रेम के कारण उसके प्रति मेरा कर्तव्य है।

परमेश्वर से प्रेम तो करें, लेकिन श्रद्धा सहित उसका भय भी मानें। प्रेम और भय का यही समायोग पवित्रता का जीवन जी सकने की कुंजी है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


जो परमेश्वर से डरता है वह किसी और से नहीं डरेगा; जो परमेश्वर से नहीं डरता उसे अन्य सब का डर रहता है।

हे सेवको, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्‍तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। - कुलुस्सियों ३:२२


बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१८-२५

हे पत्‍नियो, जैसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने अपने पति के आधीन रहो।
हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, और उन से कठोरता न करो।
हे बालको, सब बातों में अपने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करो, क्‍योंकि प्रभु इस से प्रसन्न होता है।
हे बच्‍चे वालो, अपने बालकों को तंग न करो, न हो कि उन का साहस टूट जाए।
हे सेवको, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्‍तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से।
और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्‍तु प्रभु के लिये करते हो।
क्‍योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो।
क्‍योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २६-२७
  • मरकुस २

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

हर भय पर जयवंत भय

जौन हौपकिन्स विश्वविद्यालय के एक डॉकटर के अनुसार, हमारे मस्तिष्क, नाड़ीतंत्र, कोषिकाओं, आत्मा - प्रत्येक चीज़ की रचना ऐसी हुई है कि वह "विश्वास" की स्थिति में ही सबसे बेहतर कार्य करती है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर ने हमें ऐसा बनाया है कि हम तब ही अपनी सामर्थ की पराकाष्ठता तक पहुंच सकते हैं जब हम भय के विनाशकारी प्रभाव से मुक्त हों। परन्तु हम सब किसी न किसी भय से ग्रसित रहते हैं - दूसरों का भय, अपने आप का भय, भविष्य का भय, अतीत का भय, बेरोज़गारी का भय, लोगों की राय का भय - आदि, आदि कई तरह के भय हमें सताते रहते हैं।

बाइबल में कई तरह के भय मिलते हैं, और इन विभिन्न प्रकार के भय को वर्णित करने के लिये दो दर्जन से अधिक अलग अलग शब्द प्रयोग किये गए हैं। इन शब्दों द्वारा आतंक से लेकर कायरता तक हर प्रकर के भय की विवेचना करी गई है। लेकिन एक भय है जो स्वास्थवर्धक तथा सकारात्मक है - परमेश्वर का भय।

बाइबल इस भय के बारे में कहती है कि यह परमेश्वर का भय :
  • "बुद्धि का मूल है" (नीतिवचन १:७);
  • "पवित्र" है (भजन १९:९);
  • जो "दृढ़ भरोसा" देता है (नीतिवचन १४:२६);
  • जो "जीवन का सोता" है (नीतिवचन १४:२७)
  • और सबसे बढ़कर, यही एक ऐसा भय है जिसके आधीन हम अपने आप को स्वेच्छा से कर सकते हैं (नीतिवचन १:२९)।

परमेश्वर का भय परमेश्वर पर श्रद्धापूर्ण विश्वास करना है। मूसा ने यह भय दिखाया जब जलती झाड़ी से परमेश्वर ने उसे संबोधित किया, "तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर निहारने से डरता था अपना मुंह ढ़ाप लिया।" - निर्गमन ३:६

"यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है" (नीतिवचन ८:१३)। हम परमेश्वर के सम्मुख उसकी पवित्रता और महानता के भय में आएं, उसके वचन, उसकी प्रतिज्ञाओं और उसकी चेतावनियों का भय मानें और उन पर विश्वास करें।

परमेश्वर का भय मान कर ही हम परमेश्वर के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त कर सकते हैं। यही वह भय है जो हर भय पर जयवंत है। - डेनिस डी हॉन


केवल परमेश्वर का भय ही मनुष्यों के भय से मुक्ति दे सकता है।

तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर निहारने से डरता या अपना मुंह ढ़ाप लिया। - निर्गमन ३:६

बाइबल पाठ: नीतिवचन २३:१५-२२

हे मेरे पुत्र, यदि तू बुद्धिमान हो, तो विशेष करके मेरा ही मन आनन्दित होगा।
और जब तू सीधी बातें बोले, तब मेरा मन प्रसन्न होगा।
तू पापियों के विषय मन में डाह न करना, दिन भर यहोवा का भय मानते रहना।
क्योंकि अन्त में सुफल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी।
हे मेरे पुत्र, तू सुनकर बुद्धिमान हो, और अपना मन सुमार्ग में सीधा चला।
दाखमधु के पीने वालों में न होना, न मांस के अधिक खाने वालों की संगति करना;
क्योंकि पियक्कड़ और खाऊ अपना भाग खोते हैं, और पिनक वाले को चिथड़े पहिनने पड़ते हैं।
अपने जन्माने वाले की सुनना, और जब तेरी माता बुढिय़ा हो जाए, तब भी उसे तुच्छ न जानना।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २५
  • मरकुस १:२३-४५