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बुधवार, 22 जनवरी 2014

संगीत


   परमेश्वर के वचन बाइबल में संगीत का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। बाइबल की प्रथम पुस्तक, उत्पत्ति, से लेकर अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य, तक संगीत का उल्लेख और उपयोग है। परमेश्वर ने अनेक स्थानों पर संगीतकारों को अपने किसी कार्य करने के लिए चुना और उपयोग किया है। परमेश्वर ने कहीं संगीत द्वारा आराधना के लिए लोगों को बुलाया, तो कहीं वाद्यों की ध्वनि द्वारा उन्हें कूच करने को कहा, चाहे वह डेरा उठाकर किसी नए स्थान के लिए निकलना हो या फिर युद्ध के लिए हो। कहीं संगीत का प्रयोग विचलित और आहत मनोभावों को शान्त करने के लिए हुआ है तो कहीं लोगों में एक आत्मिक उन्माद जागृत करने के लिए। कभी संगीत किसी विजय का पर्व मनाने के लिए है तो कहीं किसी हानि के शोक को प्रकट करने के लिए।

   संगीत सभी अवसरों और सभी लोगों के लिए कला का एक वृहत रूप है। संगीत में अगुवे भी होते हैं और अनुयायी भी। सरल गीत भी होते हैं और कठिन भी; सरल वाद्य यंत्र भी होते हैं और जटिल भी। धुनें भी होती हैं और सुर भी; तेज़ गति की लय भी होती है और धीमी गति की लय भी; उसमें तीव्र स्वर भी हैं और मध्यम भी। संगीत मसीही मण्डली का एक अच्छा रूपक है - जैसे संगीत मण्डली में बहुत से भिन्न लोग और बहुत से भिन्न वाद्य मिलकर एक साथ वह करते हैं जो वे व्यक्तिगत रीति से सबसे अच्छा कर सकते हैं और कुल मिलकर एक मधुर संगीत बनता है, वैसे ही मसीही मण्डली में भी भिन्न लोग परमेश्वर द्वारा उन्हें दी गई भिन्न क्षमताओं और वरदानों के प्रयोग से परमेश्वर के एक ही उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य करते हैं। इसलिए हम जितना अधिक अपने संचालक, अर्थात प्रभु यीशु पर नज़र बनाए रखेंगे और जितना अधिक अपने कार्य तथा भाग के बारे में जानकारी रखेंगे, उतना बेहतर अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने पाएंगे।

   संगीत का सबसे उत्तम प्रयोग है परमेश्वर की स्तुति। जब राजा सुलेमान द्वारा बनवाया गया परमेश्वर का मन्दिर संपूर्ण हुआ तो परमेश्वर को उस मन्दिर के समर्पण के समय संगीतकारों ने संगीत बजाया और परमेश्वर को आराधना अर्पित करी; जब वे ऐसा कर रहे थे तब, "तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन में बादल छा गया, और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था" (2 इतिहास 5:13-14)।

   हम परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं मनमोहक संगीत के लिए और उसमें होकर मिलने वाली स्वर्ग की एक झलक के लिए जहाँ परमेश्वर का तेज और महिमा सदा वास करेंगी और जहाँ कभी परमेश्वर की स्तुति और आराधना का अन्त नहीं होगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जो पृथ्वी पर परमेश्वर की आराधना और स्तुति करते रहते हैं उन्हें स्वर्ग जाना-पहिचाना अनुभव होगा।

तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन में बादल छा गया, और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था। - 2 इतिहास 5:13-14

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 5:7-14
2 Chronicles 5:7 तब याजकों ने यहोवा की वाचा का सन्दूक उसके स्थान में, अर्थात भवन की भीतरी कोठरी में जो परमपवित्र स्थान है, पहुंचा कर, करूबों के पंखों के तले रख दिया। 
2 Chronicles 5:8 सन्दूक के स्थान के ऊपर करूब तो पंख फैलाए हुए थे, जिससे वे ऊपर से सन्दूक और उसके डणडों को ढांपे थे। 
2 Chronicles 5:9 डणडे तो इतने लम्बे थे, कि उनके सिरे सन्दूक से निकले हुए भीतरी कोठरी के साम्हने देख पड़ते थे, परन्तु बाहर से वे दिखाई न पड़ते थे। वे आज के दिन तक वहीं हैं। 
2 Chronicles 5:10 सन्दूक में पत्थर की उन दो पटियाओं को छोड़ कुछ न था, जिन्हें मूसा ने होरेब में उसके भीतर उस समय रखा, जब यहोवा ने इस्राएलियों के मिस्र से निकलने के बाद उनके साथ वाचा बान्धी थी। 
2 Chronicles 5:11 जब याजक पवित्रस्थान से निकले (जितने याजक उपस्थित थे, उन सभों ने तो अपने अपने को पवित्र किया था, और अलग अलग दलों में हो कर सेवा न करते थे; 
2 Chronicles 5:12 और जितने लेवीय गवैये थे, वे सब के सब अर्थात पुत्रों और भाइयों समेत आसाप, हेमान और यदूतून सन के वस्त्र पहिने झांझ, सारंगियां और वीणाएं लिये हुए, वेदी के पूर्व अलंग में खड़े थे, और उनके साथ एक सौ बीस याजक तुरहियां बजा रहे थे।) 
2 Chronicles 5:13 तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन मे बादल छा गया, 
2 Chronicles 5:14 और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-24


मंगलवार, 21 जनवरी 2014

सच्चा मित्र


   अंग्रेज़ी भाषा के उन विशेषज्ञों ने, जो शब्दों के बदलते हुए अर्थों पर शोध करते रहते हैं, कुछ वर्ष पहले अंग्रेज़ी शब्द "unfriend" को New Oxford American Dictionary का उस वर्ष का खिताबी शब्द चुना। उन्होंने इस शब्द "unfriend" की परिभाषा एक क्रीया के रूप में इस प्रकार करी: "किसी को सोशल नेटवर्किंग साईट जैसे फेसबुक से अपने मित्रों की सूची से हटा देना।" ऐसी वेब साईट्स पर जो लोग मित्र सूची में सम्मिलित होते हैं वे अपने ’मित्रों’ की व्यक्तिगत जानकारियाँ देख सकते हैं, उनपर टिप्पणी कर सकते हैं। संभव है कि वे परस्पर एक दूसरे से कभी मिले भी ना हों और ना ही उन्होंने कभी कोई अभिवादन एक दूसरे से बाँटा हो, लेकिन उस साईट पर वे अपने मित्र की व्यक्तिगत जानकारी देख सकते हैं, उसे प्रयोग कर सकते हैं, और सरलता से एक दूसरे को मित्र सूची से हटा भी सकते हैं। आज के संसार में व्याप्त इंटरनैट पर परस्पर पहचान की अविश्वसनीयता और अस्थिरता ने लोगों को इस बात का एहसास दिलाया है कि वास्तविक और सच्चे मित्र रखना कितना अर्थपूर्ण है।

   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को "मित्र" कहा (यूहन्ना 15:15) तो उसने एक अनूठे आपसी संबंध के संदर्भ में यह कहा, एक ऐसा संबंध जो एक दूसरे के प्रति विशवास और कटिबद्धता पर आधारित है। कुछ ही घंटों में प्रभु यीशु अपने प्राण बलिदान करने वाले थे (पद 13), और उन्होंने चेलों से कहा कि उनकी आज्ञाकारिता में बने रहकर वे अपनी मित्रता को प्रदर्शित करें (पद 15)। प्रभु यीशु द्वारा इस वार्तालाप में कहा गया एक कथन बहुत अद्भुत है: "अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं" (यूहन्ना 15:15)।

   जब मित्रता सच्ची होती है तो एक मित्र दूसरे को उसकी आवश्यकता के समयों में सहारा दे कर निराश या भयभीत होने से बचाए रखता है। यही प्रभु यीशु उनके साथ करता है जो उसके साथ संबंध जोड़कर उसके मित्र हो जाते हैं - वह उनका सदा काल तक पूर्णतया विश्वासयोग्य एवं सच्चा मित्र बना रहता है, उन्हें कभी नहीं छोड़ता, उनकी चिंता करता है, उनकी सहायता करता है। क्या आपने प्रभु यीशु को अपना मित्र बनाया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


इस संसार का हमारा सबसे अच्छा मित्र, प्रभु यीशु की मित्रता की तुलना में एक छाया मात्र ही है।

अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 18-20


सोमवार, 20 जनवरी 2014

अनुग्रह


   अमेरिका में स्थानीय समाचार पत्रों में 1970 के दशक के मध्य भाग में तलाक संबंधी सूचनाएं - किन लोगों ने तलाक के लिए अर्ज़ी दी है और किन का तलाक हो गया है, प्रकाशित होनी आरंभ हो गईं। हमारे चर्च के एक पास्टर बिल फ्लेनेगन ने प्रत्येक सप्ताह उन लोगों के नाम पढ़ना आरंभ किया, उनका प्रयास था कि लोग आंकड़ों पर नहीं वरन व्यक्तियों पर ध्यान दें। उन लोगों की सहायता के लिए उन्होंने तलाक से बहाली की कार्यशाला आरंभ करी जहाँ इन कठिन और दुखदायी समयों में दुखी लोगों को प्रभु यीशु के नाम में कुछ सांत्वना और सहायता मिल सके। हमारे चर्च के कुछ सदस्यों ने आपत्ति करी और कहा कि ऐसा कर के बिल तलाक को समर्थन दे रहे हैं। बिल का नम्र और धीमी आवाज़ में उत्तर था, मैं तो केवल उन लोगों तक परमेश्वर के अनुग्रह को पहुँचा रहा हूँ जिन्हें इस की आवश्यकता है।

   प्रभु यीशु ने जब मत्ती को, जो एक चुँगी लेने वाला था, अपने पीछे आने को कहा तो मत्ती प्रभु के साथ हो लिया; फिर मत्ती ने प्रभु यीशु को अपने घर भोजन करने के लिए बुलाया और प्रभु उसके घर भोजन करने के लिए गया। यह देख कर उस समय के धर्म के अगुवों ने आपत्ति करी और प्रभु यीशु पर आरोप लगाया कि वह पापी लोगों की संगति करता है, उनके साथ खाता-पीता है। प्रभु यीशु ने उन्हें उत्तर दिया: "उसने यह सुनकर उन से कहा, वैद्य भले चंगों को नहीं परन्तु बीमारों को आवश्यक है। सो तुम जा कर इस का अर्थ सीख लो, कि मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूं; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं" (मत्ती 9:12-13)। संसार का सबसे बड़ा और महान वैद्य, प्रभु यीशु, प्रत्येक जन से उसकी आवश्यकता के स्थान पर मिलना चाहता है; वह सबको पापों से क्षमा, चँगाई और आशा देना चाहता है। हम जिसके योग्य भी नहीं हैं वह सब वो हमें अपने अनुग्रह में होकर मुफ्त में देना चाहता है।

   ज़रूरतमन्द लोगों की सहायता के लिए अपने हाथ बढ़ाकर हम भी परमेश्वर का वह अनुग्रह जो हमें मिला है उन तक पहुँचा सकते हैं, प्रभु यीशु के सांत्वना, आशा और चँगाई देने वाले हाथ तक उन्हें पहुँचा सकते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब आप परमेश्वर के अनुग्रह को जानेंगे तो उसे औरों तक पहुँचाना भी चाहेंगे।

उसने यह सुनकर उन से कहा, वैद्य भले चंगों को नहीं परन्तु बीमारों को आवश्यक है। - मत्ती 9:12

बाइबल पाठ: मत्ती 9:9-13
Matthew 9:9 वहां से आगे बढ़कर यीशु ने मत्ती नाम एक मनुष्य को महसूल की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। वह उठ कर उसके पीछे हो लिया।
Matthew 9:10 और जब वह घर में भोजन करने के लिये बैठा तो बहुतेरे महसूल लेने वाले और पापी आकर यीशु और उसके चेलों के साथ खाने बैठे। 
Matthew 9:11 यह देखकर फरीसियों ने उसके चेलों से कहा; तुम्हारा गुरू महसूल लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाता है? 
Matthew 9:12 उसने यह सुनकर उन से कहा, वैद्य भले चंगों को नहीं परन्तु बीमारों को आवश्यक है। 
Matthew 9:13 सो तुम जा कर इस का अर्थ सीख लो, कि मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूं; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-17


रविवार, 19 जनवरी 2014

खोज


  हमारे परिवार के लोग एक स्थान पर एकत्रित थे और मेरा एक भतीजा अपने साथ "मैजिक आई" चित्रों की एक पुस्तक लाया था। मैजिक आई चित्र सामान्य दो-आयाम वाले चित्रों के समान ही लगते हैं, परन्तु जब उन्हें एक विशेष कोण से देखा जाता है तो वे समतल सपाट चित्र तीन-आयामी दिखने लगते हैं। हम सब उस पुस्त्क के चित्रों को बारी बारी से देख रहे थे, और अपनी आंखों को उन तीन-अयामी चित्रों को देख पाने के लिए अलग अलग कोण और दूरी से अभ्यस्त कर रहे थे। हमारे परिवार के एक सदस्य को तीन-आयामी चित्र देखने में परेशानी हो रही थी और वह बार बार भिन्न कोणों और भिन्न दूरियों से उन्हें देखने का प्रयास कर रहा था। मैंने ध्यान किया कि यद्यपि वह तीन-आयामी चित्र देख तो नहीं पा रहा था, परन्तु फिर भी वह अन्य लोगों की बात पर विश्वास रख कर उन तीन-आयामी चित्रों को देखने के प्रयास में लगा हुआ था; क्योंकि उसे वे नहीं दिख रहे थे इसलिए उसने यह नहीं मान लिया कि तीन आयामी चित्र हैं ही नहीं या उन्हें देख पाना संभव नहीं है तथा अन्य जिन्होंने उन्हें देखा है वे कोई कालपनिक बात कर रहे हैं।

   उसके उन चित्रों को तीन-आयामों में देखने के अथक प्रयासों को देखकर मुझे विचार आया कि क्या हम अपने विश्वास की बातों को जानने-पहचानने के लिए भी इसी प्रकार प्रयासरत रहते हैं? जो लोग सन्देह करते हैं उनके लिए खतरा रहता है कि ढूंढना छोड़ देंगे, क्योंकि वे मानने लगते हैं कि परमेश्वर को खोजा नहीं जा सकता। परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा ने इस्त्राएलियों को चेतावनी दी कि ऐसा समय आएगा जब उनके भावी वंशज परमेश्वर से दूर चले जाएंगे; लेकिन साथ ही उसने यह आशवासन भी दिया कि यदि परमेश्वर से भटक जाने के बाद भी वे सच्चे मन से उसे ढूंढेंगे तो निश्चय ही उसे फिर पा भी लेंगे (व्यवस्थाविवरण 4:29)। इब्रानियों की पत्री भी इस बात को पुनःपुष्टि करती है कि जो परमेश्वर को सच्चे मन से विश्वास के साथ खोजते हैं वे उसे पा भी लेते हैं (इब्रानियों 11:6)।

   यदि आप परमेश्वर की खोज में भटक रहे हैं, या आपको उसपर विश्वास करने में कठिनाई हो रही है तो ध्यान रखिए कि आपका उससे संपर्क ना हो पाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह है ही नहीं या फिर मिलता ही नहीं है। वह अपने खोजने वालों को कभी निराश नहीं करता; उसे उसके वचन बाइबल से देखिए, उसने अपने आप को संसार पर प्रभु यीशु के रूप में प्रगट किया है। प्रभु यीशु और बाइबल को अपना लीजिए, परमेश्वर की खोज वहीं पूरी हो जाएगी। - जूली ऐकैरमैन लिंक


क्योंकि परमेश्वर महान है, उसने अपने आप को प्रगट किया है; 
क्योंकि परमेश्वर भला है, वह अपने खोजने वालों को मिलता है।

परन्तु वहां भी यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा को ढूंढ़ोगे, तो वह तुम को मिल जाएगा, शर्त यह है कि तुम अपने पूरे मन से और अपने सारे प्राण से उसे ढूंढ़ो। - व्यवस्थाविवरण 4:29

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:1-10
Hebrews 11:1 अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है। 
Hebrews 11:2 क्योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्छी गवाही दी गई। 
Hebrews 11:3 विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो। 
Hebrews 11:4 विश्वास की से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है। 
Hebrews 11:5 विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्वर को प्रसन्न किया है। 
Hebrews 11:6 और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है। 
Hebrews 11:7 विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धर्म का वारिस हुआ, जो विश्वास से होता है। 
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। 
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया। 
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 11-13


शनिवार, 18 जनवरी 2014

स्थिर सन्तुलन


   मेरी पत्नि मर्लीन एक बहुत क्रियाशील स्त्री रही है, परन्तु पिछले कुछ वर्षों से वह कान के भीतरी भाग के एक रोग से ग्रस्त है जिसके कारण उसे अपना सन्तुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है। बिना किसी चेतावनी के उसका यह रोग अन्दर कोई व्याधि उत्पन्न कर देता है और मर्लीन को चक्कर आने लगते हैं, उसके लिए खड़ा रह पाना असंभव हो जाता है। यदि वह बैठने या उठने का प्रयास करे भी तो वह नहीं हो पाता और उसे लेटना ही पड़ता है। मर्लीन का अपना कोई भी प्रयास या युक्ति कान के अन्दर के उस रोग को वश में नहीं रख सकती, और यह रोग उसकी दिनचर्या को अचानक ही अस्त-व्यस्त कर देता है। दिनचर्या में अचानक आया यह अनचाहा विश्राम उसे बहुत विचलित कर देता है।

   जीवन ऐसा ही होता है; कोई अनेपक्षित बात हमारी दिनचर्या या बनाई हुई योजनाओं को अस्त-व्यस्त कर देती हैं और हमारे जीवन का सन्तुलन बिगड़ जाता है। विचलित कर देने वाली यह बात कुछ भी हो सकती है, जैसे, हमारी नौकरी का अनेपक्षित रूप से जाते रहना या किसी चिकित्सा संबंधी जाँच के परिणामों में कुछ प्रतिकूल निकल आना; यह हमारे आत्मिक शत्रु शैतान का भी कोई हमला हो सकता है। ऐसी ही किसी बात या घटना से हमारा भावनात्मक सन्तुलन प्रभावित हो सकता है और हमें लग सकता है कि हम इसे सहन नहीं कर पाएंगे, स्थिर खड़े नहीं रह पाएंगे।

   ये वे अवसर होते हैं जब हमें परमेश्वर को दृढ़ता से थामे रहना चाहिए क्योंकि वह ही है जो हमें हर परिस्थिति में स्थिर रख सकता है। उसकी आत्मिक सामर्थ और उसके संसाधन हमें कमज़ोर पड़ने और गिरने से बचाए रख सकते हैं, हमें बल दे सकते हैं। प्रेरित पौलुस ने लिखा, "इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको" (इफिसियों 6:13)।

   जब जीवन के अनेपक्षित परिस्थितियाँ हम पर हमला करें और हमारी अपनी सामर्थ और हमारे बनाए हुए आधार हमें टूटते प्रतीत हों तब भी हमें निराश होने और असहाय अनुभव करने कि आवश्यकता नहीं है। यदि हमने परमेश्वर की सामर्थ को थामा हुआ है और परमेश्वर के हथियार हम ने बांध रखे हैं, तो हम स्थिर खड़े रहेंगे, कोई हमें गिराने नहीं पाएगा। - बिल क्राउडर


यदि हम परमेश्वर पर सब कुछ के लिए निर्भर रहें तो कुछ भी हमें अस्थिर नहीं कर सकता।

इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको। - इफिसियों 6:13

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:10-18
Ephesians 6:10 निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। 
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। 
Ephesians 6:12 क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। 
Ephesians 6:13 इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको। 
Ephesians 6:14 सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मीकता की झिलम पहिन कर। 
Ephesians 6:15 और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर। 
Ephesians 6:16 और उन सब के साथ विश्वास की ढाल ले कर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। 
Ephesians 6:17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो। 
Ephesians 6:18 और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 8-10


शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

नेक सलाहकार


   हम में से कई लोग बहुत व्यस्त जीवन व्यतीत करते हैं, इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्गमन 18 अध्याय में दिए मूसा की व्यस्तता के वर्णन को समझ सकते हैं, उसके साथ सहानुभूति रख सकते हैं। उन लाखों इस्त्राएलियों के मध्य, जिन्हें वह मिस्त्र के दासत्व से निकालकर कनान देश को लिए जा रहा था, मूसा ही एक मात्र न्यायी था। इस लिए प्रातः से सन्धया तक मूसा ज़रूरतमन्द लोगों की भीड़ से घिरा रहता था (निर्गमन 18:3)।

   मेरे पास आकर कई लोगों ने, विशेषकर जवान माता-पिता ने कहा है कि वे मूसा की परिस्थिति समझते हैं और उससे सहानुभूति रखते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी व्यस्त परिस्थितियों में जीवन निर्वाह के लिए हमें मूसा के समान दो गुणों को विकसित कर लेना चाहिए; पहला तो सुनने में प्रवीण होना (पद 24) तथा दूसरा अन्य लोगों की सहायता स्वीकार करना (पद 25)। कई बार तो हमारा अहम हमें दूसरों से सहायता लेना स्वीकार करने से रोकता है, लेकिन यह सदा ही होने वाली बात नहीं है।

   जैसा मूसा के साथ हुआ, वैसे ही हमारे साथ भी होता है कि जीवन इतनी तेज़ी से चल रहा होता है और हमारे समय पर इतनी माँगें बनी रहती हैं (पद 13-15) कि हमारे पास उन माँगों को ही उचित प्रतिक्रीया देने का ही समय नहीं होता, किसी के पास परामर्श या सहायता की माँग लेकर जाना तो बहुत दूर की बात है। संभवतः इसीलिए परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सलाह देती है कि हमारे साथ और हमारे संपर्क में अच्छे सलाहकार रहने चाहिएं जो अपने अनुभव और भली समझ-बूझ के आधार पर हमें आवश्यकतानुसार स्वयं ही सही सलाह दे सकें, चाहे हमारे पास सलाह माँगने का अवसर हो या ना हो। हम यही बात मूसा के जीवन की इस घटना में भी देखते हैं जहाँ उसके ससुर येत्रो ने मूसा की हालत देखकर उसे समझाया कि वह अपनी कुछ ज़िम्मेदारियाँ अन्य योग्य लोगों में बाँट दे जो साधारण और हलके मामले सुलझा सकें और मूसा को केवल कठिन मामलों के लिए ही समय देना पड़े (पद 17-23)।

   कार्य करने की ज़िम्मेदारी परमेश्वर ने सब को दी है, लेकिन वह हमें कुछ ही कार्यों द्वारा अभिभूत होकर अन्य ज़िम्मेदारियों से मूँह मोड़ते हुए नहीं देखना चाहता। इसलिए परमेश्वर का भय मानने वाले भले सलाहकारों के साथ संगति रखें, आवश्यकतानुसार उनसे परामर्श लें और फिर उस परामर्श का पालन भी करें। - रैण्डी किलगोर


जो सलाह नहीं लेता वह सहायता से भी वंचित रहता है।

जहां बुद्धि की युक्ति नहीं, वहां प्रजा विपत्ति में पड़ती है; परन्तु सम्मति देने वालों की बहुतायत के कारण बचाव होता है। - नीतिवचन 11:14

बाइबल पाठ: निर्गमन 18:13-24
Exodus 18:13 दूसरे दिन मूसा लोगों का न्याय करने को बैठा, और भोर से सांझ तक लोग मूसा के आसपास खड़े रहे। 
Exodus 18:14 यह देखकर कि मूसा लोगों के लिये क्या क्या करता है, उसके ससुर ने कहा, यह क्या काम है जो तू लोगों के लिये करता है? क्या कारण है कि तू अकेला बैठा रहता है, और लोग भोर से सांझ तक तेरे आसपास खड़े रहते हैं? 
Exodus 18:15 मूसा ने अपने ससुर से कहा, इसका कारण यह है कि लोग मेरे पास परमेश्वर से पूछने आते है। 
Exodus 18:16 जब जब उनका कोई मुकद्दमा होता है तब तब वे मेरे पास आते हैं और मैं उनके बीच न्याय करता, और परमेश्वर की विधि और व्यवस्था उन्हें जताता हूं। 
Exodus 18:17 मूसा के ससुर ने उस से कहा, जो काम तू करता है वह अच्छा नहीं। 
Exodus 18:18 और इस से तू क्या, वरन ये लोग भी जो तेरे संग हैं निश्चय हार जाएंगे, क्योंकि यह काम तेरे लिये बहुत भारी है; तू इसे अकेला नहीं कर सकता। 
Exodus 18:19 इसलिये अब मेरी सुन ले, मैं तुझ को सम्मति देता हूं, और परमेश्वर तेरे संग रहे। तू तो इन लोगों के लिये परमेश्वर के सम्मुख जाया कर, और इनके मुकद्दमों को परमेश्वर के पास तू पहुंचा दिया कर। 
Exodus 18:20 इन्हें विधि और व्यवस्था प्रगट कर कर के, जिस मार्ग पर इन्हें चलना, और जो जो काम इन्हें करना हो, वह इन को जता दिया कर। 
Exodus 18:21 फिर तू इन सब लोगों में से ऐसे पुरूषों को छांट ले, जो गुणी, और परमेश्वर का भय मानने वाले, सच्चे, और अन्याय के लाभ से घृणा करने वाले हों; और उन को हज़ार-हज़ार, सौ-सौ, पचास-पचास, और दस-दस मनुष्यों पर प्रधान नियुक्त कर दे। 
Exodus 18:22 और वे सब समय इन लोगों का न्याय किया करें; और सब बड़े बड़े मुकद्दमों को तो तेरे पास ले आया करें, और छोटे छोटे मुकद्दमों का न्याय आप ही किया करें; तब तेरा बोझ हलका होगा, क्योंकि इस बोझ को वे भी तेरे साथ उठाएंगे। 
Exodus 18:23 यदि तू यह उपाय करे, और परमेश्वर तुझ को ऐसी आज्ञा दे, तो तू ठहर सकेगा, और ये सब लोग अपने स्थान को कुशल से पहुंच सकेंगें। 
Exodus 18:24 अपने ससुर की यह बात मान कर मूसा ने उसके सब वचनों के अनुसार किया।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 5-7


गुरुवार, 16 जनवरी 2014

पुस्तक


   अमेरीकी नागरिक जौन म्युइर (1838-1914) के पिता एक मसीही विश्वासी थे जो परमेश्वर के वचन बाइबल को कण्ठस्त करने पर बहुत ज़ोर देते थे। कहा जाता है कि किशोरावस्था तक जौन ने बाइबल का सम्पूर्ण नया नियम खण्ड और पुराने नियम खण्ड के अधिकांश भाग कण्ठस्त कर लिए थे और अपनी स्मरण शक्ति द्वारा ही उन्हें दोहरा सकता था।

   अपनी युवावस्था से ही जौन ने परमेश्वर की सृष्टि से विशेष प्रेम हो गया था और उसके दृष्टिकोण से प्रकृति परमेश्वर के बारे में जानने समझने का एक माध्यम थी। वह सृष्टि को "प्रकृति की पुस्तक" कहता था। जंगल और बियाबान में खोज करना उसे बहुत पसन्द था और अपनी इस खोज में वह पेड़-पौधों और जानवरों का एक ऐसे वातवरण में अध्ययन करने पाया जो सभ्यता और रिहायशी स्थानों के बढ़ते हुए दायरे से बाहर सीधे परमेश्वर के हाथों से उपलब्ध हुआ था। आगे चलकर जौन ने वन संरक्षण आन्दोलन का नेतृत्व किया और उसके प्रयासों का ही नतीजा था कि अमेरिका में कई राष्ट्रीय उद्यान बने जहां वनस्पति और जानवर संरक्षित रहते हैं और सुरक्षित विचरण कर सकते हैं, फल-फूल सकते हैं।

   परमेश्वर का ज्ञान हमें बाइबल से प्राप्त होता है इसलिए परमेश्वर में रुचि रखने वालों के लिए बाइबल का अध्ययन अनिवार्य है। बाइबल से ही हम सीखते हैं कि परमेश्वर ने अपने अन्देखे गुण अपनी सृष्टि में प्रगट किए हैं, इसलिए परमेश्वर की सृष्टि का अध्ययन और उसकी देखभाल भी परमेश्वर से प्रेम रखने वालों के लिए आवश्यक है। सृष्टि परमेश्वर की एक और पुस्तक है जहाँ शब्द और अक्षर नहीं वरन परमेश्वर की कारीगरी उसके गुणों का बयान करती है।

   परमेश्वर की दोनों पुस्तकों, बाइबल और सृष्टि, को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लीजिए, उनका अध्ययन और पालन करते रहिए; आपका जीवन आशीषित हो जाएगा। - डेनिस फिशर


सृष्टि रूपी परमेश्वर की पुस्तक से हम अनेक बहुमूल्य पाठ सीख सकते हैं।

क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:20

बाइबल पाठ: रोमियों 1:18-24
Romans 1:18 परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं। 
Romans 1:19 इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। 
Romans 1:20 क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। 
Romans 1:21 इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। 
Romans 1:22 वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। 
Romans 1:23 और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला।
Romans 1:24 इस कारण परमेश्वर ने उन्हें उन के मन के अभिलाषाओं के अुनसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-4