ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

तैयार


   संचालक अपने मंच पर खड़ा था, उसकी आँखें संगीत मण्डली और वाद्य-मण्डली के सदस्यों का सर्वेक्षण कर रही थीं। गायकों ने संगीत के अपने कागज़ व्यवस्थित करके सही स्थान पर किए जिससे वे उन कागज़ों के ऊपर से संचालक को देख सकें तथा अपने खड़े रहने के लिए आरामदायक मुद्रा बनाई। वाद्य-मण्डली के सदस्यों ने भी संगीत के अपने कागज़ों को उनके स्थानों पर व्यवस्थित किया, आराम से बैठने के लिए अपने स्थान को ठीक किया; और तैयार होने के पश्चात सब शांत होकर संचालक की ओर देखने लगे। संचालक प्रतीक्षा में था कि सभी तैयार हो जाएं; सब के तैयार होते ही संचालन करने वाली छड़ी के साथ उसका हाथ नीचे को आया, और हैण्डल का प्रसिद्ध संगीत "Overture to Messiah" चर्च भवन में भर गया।

   उस संगीत की धुन को अपने चारों ओर गूँजते हुए सुनकर मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानो मैं क्रिसमस में डूब गई हूँ; जब परमेश्वर के इशारे पर, संसार के इतिहास के सही पल में, मसीहा, जो "...आने वाली अच्छी अच्छी वस्‍तुओं का महायाजक हो कर आया..." (इब्रानियों 9:11) के जन्म की प्रक्रिया का आरंभ हो गया।

   प्रत्येक क्रिसमस पर, जब हम मसीह यीशु के जन्म के उत्सव को संगीत के साथ मनाते हैं, मुझे यह भी स्मरण आता है कि परमेश्वर के लोग अपने आप को तैयार कर रहे हैं हमारे महान संचालक परमेश्वर पिता के उस इशारे का जिस से हमारे उद्धार के संगीत की अन्तिम पंक्ति का आरंभ होगा, और मसीह यीशु अपने विश्वासियों को अपने साथ ले जाने के लिए आ जाएगा, जिसके बाद वह सब कुछ नया कर देगा (प्रकाशितवाक्य 21:5)। उस दिन हम मसीही विश्वासियों के लिए अनन्तकाल तक उसके साथ रहने के आनन्द का आरंभ होगा। जैसे परमेश्वर हमारे तैयार हो जाने की प्रतीक्षा में है, वैसे ही हमें भी अपने संचालक परमेश्वर पिता के उस इशारे के लिए तैयार हो जाना चाहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह के आगमन और जन्म का उत्सव उस के पुनःआगमन और 
मसीही विश्वासियों के अनन्त आनन्द की प्रत्याशा है।

और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा। - मत्ती 24:14

बाइबल पाठ: इब्रानियों 9:11-22
Hebrews 9:11 परन्तु जब मसीह आने वाली अच्छी अच्छी वस्‍तुओं का महायाजक हो कर आया, तो उसने और भी बड़े और सिद्ध तम्बू से हो कर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात इस सृष्‍टि का नहीं। 
Hebrews 9:12 और बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्त छुटकारा प्राप्त किया। 
Hebrews 9:13 क्योंकि जब बकरों और बैलों का लोहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है। 
Hebrews 9:14 तो मसीह का लोहू जिसने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो। 
Hebrews 9:15 और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्त मीरास को प्राप्त करें। 
Hebrews 9:16 क्योंकि जहां वाचा बान्‍धी गई है वहां वाचा बान्‍धने वाले की मृत्यु का समझ लेना भी अवश्य है। 
Hebrews 9:17 क्योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धने वाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती। 
Hebrews 9:18 इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लोहू के नहीं बान्‍धी गई। 
Hebrews 9:19 क्योंकि जब मूसा सब लोगों को व्यवस्था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उसने बछड़ों और बकरों का लोहू ले कर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया। 
Hebrews 9:20 और कहा, कि यह उस वाचा का लोहू है, जिस की आज्ञा परमेश्वर ने तुम्हारे लिये दी है। 
Hebrews 9:21 और इसी रीति से उसने तम्बू और सेवा के सारे सामान पर लोहू छिड़का। 
Hebrews 9:22 और व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्तुएं लोहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं; और बिना लोहू बहाए क्षमा नहीं होती।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 4-5
  • प्रकाशितवाक्य 12


मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

यीशु के नाम में


   परिवार की तस्वीरों के संग्रह में मेरी मनपसन्द फोटो एक पारिवारिक भोजन के समय की है। उस फोटो में पिताजी, उनके बेटे और बेटों की पत्नियाँ और उन सभी के बच्चे सब एक साथ धन्यवादी समारोह और प्रार्थना के अवसर पर एक साथ एकत्रित हैं। पिताजी को पक्षाघात के कई दौरे पड़ चुके थे, और अब वे पहले के समान बोल नहीं पाते थे। परन्तु प्रार्थना के उस समय में, मैंने उन्हें पूरे मन से कहते सुना, "हम प्रभु यीशु के नाम में माँगते हैं!" इसके लगभग एक वर्ष पश्चात, पिताजी इस संसार से कूच कर के उसके पास चले गए जिसके नाम में उन्होंने ऐसा दृढ़ विश्वास रखा था।

   प्रभु यीशु ने हमें अपने नाम में प्रार्थना करके परमेश्वर से आग्रह करना सिखाया है। अपने क्रूस पर बलिदान होने की पूर्व-संध्या को उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा: "अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए" (यूहन्ना 16:24)। परन्तु प्रभु यीशु की उनके नाम में माँगने से परमेश्वर से प्राप्त कर लेने की यह प्रतिज्ञा बैंक के किसी कोरे चेक के समान नहीं है, जिसे भुनाने वाला अपनी मर्ज़ी से चाहे जितनी रकम भर सकता है और वह रकम प्राप्त कर सकता है। इस प्रतिज्ञा में होकर हमें भी अपनी सनक के अनुसार परमेश्वर से कुछ भी माँग लेने और परमेश्वर का उस माँग को पूरा करने के लिए बाध्य होने की छूट प्रभु की इस प्रतिज्ञा से नहीं मिलती है।

   उस ही संध्या को, प्रभु ने यह भी सिखाया कि उसके नाम में माँगी गई बातों को इसलिए दिया जाता है जिससे परमेश्वर पिता की महिमा हो (यूहन्ना 14:13)। बाद में, उसी रात में प्रभु ने अपनी व्यथा में परमेश्वर से प्रार्थना की, "फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो" (मत्ती 26:39)। तात्पर्य यह है कि प्रभु ने अपने उदाहरण से दिखाया कि माँगने में परमेश्वर पिता की महिमा और आज्ञाकारिता के अनुसार माँगी गई बात ही पूरी हो सकती है (1 यूहन्ना 5:14)।

   जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, तो चाहिए कि हम परमेश्वर की इच्छा, समझ-बूझ, प्रेम और सार्वभौमिकता के प्रति समर्पित भी रहें; तब ही हम निःसंकोच होकर प्रार्थना में कह सकते हैं "यीशु के नाम में"। - डेनिस फिशर


प्रार्थना की पहुँच से बाहर कुछ भी नहीं है, 
बशर्ते कि वह परमेश्वर की इच्छा के बाहर ना हो।

और हमें उसके साम्हने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उस की इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो हमारी सुनता है। - 1 यूहन्ना 5:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:12-21
John 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं। 
John 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। 
John 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा। 
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11


सोमवार, 19 दिसंबर 2016

क्रिसमस


   चार्ल्स डिकिन्स का उपन्यास A Christmas Carol सर्वप्रथम 19 दिसंबर 1843 को प्रकाशित हुआ, और तब से लेकर आज तक उसकी माँग बनी रही है, तथा वह प्रकाशन में रहा है। यह उपन्यास एबेनेज़र स्क्रूज नामक एक धनी परन्तु रूखे और कंजूस व्यक्ति की कहानी है जो कहता था, "प्रत्येक ’मेरी क्रिसमस’ कहने वाले मूर्ख को उसकी ही पुडिंग में पका देना चाहिए!" लेकिन एक क्रिसमस की शाम, स्क्रूज एक उदार और प्रसन्नचित व्यक्ति बन जाता है। डिकिन्स के इस उपन्यास ने संसार के सभी लोगों के अन्दर व्याप्त शांति की लालसा को बड़े ही हास्यस्पद और गहरी अन्तःदृष्टि के साथ व्यक्त किया है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक प्रमुख पात्र, प्रेरित पौलुस, जब युवा था और शाऊल नाम से जाना जाता था, तब वह प्रभु यीशु और उनके अनुयायियों का कट्टर बैरी था; बाइबल बताती है कि, "शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा था; और घर घर घुसकर पुरूषों और स्‍त्रियों को घसीट घसीट कर बन्‍दीगृह में डालता था" (प्रेरितों 8:3)। लेकिन एक दिन उसका साक्षात्कार पुनरुत्थान हुए प्रभु यीशु मसीह से हो गया, जिससे उसके जीवन की दिशा तथा दशा दोनों ही पूर्णतया परिवर्तित हो गए (प्रेरितों 9:1-16)।

   मसीही विश्वास में उसके पुत्र समान तिमुथियुस को लिखी अपनी पत्री में पौलुस प्रभु यीशु से हुए अपने जीवन परिवर्तित कर देने वाले साक्षात्कार के संबंध में लिखता है: "मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे। और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ" (1 तिमुथियुस 1:13-14)।

   प्रभु यीशु मसीह ने इस संसार में जन्म इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए लिया, उन्होंने अपना बलिदान इसीलिए दिया जिससे कि हम मनुष्य, उनमें लाए गए साधारण विश्वास के द्वारा, सेंत-मेंत ही अपने पापी स्वभाव और प्रवृत्ति से परिवर्तित होकर उनसे अपने पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त कर सकें, उनकी समानता में आ सकें, परमेश्वर की संतान होने का अधिकार प्राप्त कर सकें।

   मसीही विश्वास किसी धर्म परिवर्तन का नहीं वरन मनुष्य के पापी मन के परिवर्तन का नाम है; और क्रिसमस का बस यही तात्पर्य है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब हम प्रभु यीशु को अपना हृदय परिवर्तित करने देते हैं, 
जीवन में परिवर्तन स्वतः ही आ जाता है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 1:12-17
1 Timothy 1:12 और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ दी है, धन्यवाद करता हूं; कि उसने मुझे विश्वास योग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया। 
1 Timothy 1:13 मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे। 
1 Timothy 1:14 और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। 
1 Timothy 1:15 यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं। 
1 Timothy 1:16 पर मुझ पर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं। 
1 Timothy 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • योना 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 10


रविवार, 18 दिसंबर 2016

मित्र


   कॉन्सटैनटिनोपोल के प्रधान बिशप जौन क्राएसोस्तोम (347-407 ई०) ने मित्रता के बारे कहा: "मित्रता ऐसी होती है कि उसके द्वारा हम स्थानों और ऋतुओं को भी चाहने लगते हैं; जैसे कि फूल अपने नीचे की ज़मीन पर अपनी सुगन्धित पंखुड़ियाँ बिखेर देते हैं, उसी प्रकार मित्र जन, जहाँ भी वे रहते हैं, उन स्थानों पर अपनी कृपादृष्टि बिखेर देते हैं।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में योनातान और दाऊद सच्ची मित्रता की मधुर उदाहरण हैं। बाइबल बताती है कि उन दोनों के एक दुसरे से मिलने के साथ ही उनमें एक बंधन बंध गया (1 शमूएल 18:1-4)। उन्होंने एक दूसरे की देखभाल और चिंता के द्वारा, एक दूसरे के प्रति अपनी वफादारी को दिखाने के द्वारा अपनी मित्रता को ना केवल जीवित रखा वरन उसे बढ़ाया भी (18:3; 20:16, 42; 23:18)। योनातान ने दाऊद को उपहार दिए (18:4) और अनेक कठिन परिस्थितियों में उसका ध्यान रखा (19:1-2; 20:12-13)।

   उनकी मित्रता की पराकाष्ठा को हम 1 शमूएल 23:16-17 में देखते हैं जब दाऊद शाऊल से अपनी जान बचा कर भाग रहा था और "शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया"। जब आप अपने जीवन के किसी निम्न बिन्दु में होते हैं तब मित्र आपको परमेश्वर में सामर्थी होने में सहायक होते हैं।

   आज के इस संसार में जहाँ अधिकांश संबंध कुछ प्राप्त कर लेने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं, हम मसीही विश्वासी, अपने प्रभु परमेश्वर के समान, ऐसे मित्र बनें जो दूसरों को कुछ देने पर ध्यान लगाते हैं; क्योंकि हमारे प्रभु यीशु ने कहा है, "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो" (यूहन्ना 15:13-14)। - पोह फैंग चिया


जीवन की महिमा प्रेम तथा सेवा देने में है ना कि लेने में।

मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है। - नीतिवचन 17:17

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 18:1-4; 23:15-18
1 Samuel 18:1 जब वह शाऊल से बातें कर चुका, तब योनातान का मन दाऊद पर ऐसा लग गया, कि योनातान उसे अपने प्राण के बराबर प्यार करने लगा। 
1 Samuel 18:2 और उस दिन से शाऊल ने उसे अपने पास रखा, और पिता के घर को फिर लौटने न दिया। 
1 Samuel 18:3 तब योनातान ने दाऊद से वाचा बान्धी, क्योंकि वह उसको अपने प्राण के बराबर प्यार करता था। 
1 Samuel 18:4 और योनातान ने अपना बागा जो वह स्वयं पहिने था उतारकर अपने वस्त्र समेत दाऊद को दे दिया, वरन अपनी तलवार और धनुष और कटिबन्ध भी उसको दे दिए। 
1 Samuel 23:15 और दाऊद ने जान लिया कि शाऊल मेरे प्राण की खोज में निकला है। और दाऊद जीप नाम जंगल के होरेश नाम स्थान में था; 
1 Samuel 23:16 कि शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया। 
1 Samuel 23:17 उसने उस से कहा, मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू ही इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूंगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल भी जानता है। 
1 Samuel 23:18 तब उन दोनों ने यहोवा की शपथ खाकर आपस में वाचा बान्धी; तब दाऊद होरेश में रह गया, और योनातन अपने घर चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • ओबद्याह
  • प्रकाशितवाक्य 9


शनिवार, 17 दिसंबर 2016

प्रगति


   पाबेलो कैसल्स को 20वीं शताब्दी के प्रथम अर्ध-भाग का सबसे प्रख्यात चेलो-वायलिन वादक माना जाता है। वे अपने जीवन के दसवें दशक में भी चेलो-वायलिन बजाते थे; 95 वर्षीय पाबेलो से एक जवान पत्रकार ने पूछा, "श्रीमान कैसल्स, आप 95 वर्ष के हैं, और अभी तक के संसार के सबसे महानतम चेलो वादक हैं। फिर भी आप प्रतिदिन छः घंटे अभ्यास क्यों करते हैं?" पाबेलो कैसल्स ने उत्तर दिया, "क्योंकि मुझे लगता है कि ऐसा करने से मैं और प्रगति करता रहता हूँ।" कैसा महान दृष्टिकोण, तथा अपनी कला के प्रति कितना अद्भुत समर्पण!

   हम मसीही विश्वासियों को भी कभी यह सोच कर संतुष्ट हो कर थम नहीं जाना चाहिए, कि हम ने कोई आत्मिक सफलता प्राप्त कर ली है।, वरन हमें प्रेरित पतरस द्वारा लिखे निर्देश : "हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ" (2 पतरस 3:18) का पालन करते रहना चाहिए और प्रभु यीशु की पहचान में बढ़ते रहना चाहिए। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को स्मरण कराया कि, "तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ" (यूहन्ना 15:16)। आत्मिक जीवन में स्वस्थ प्रगति होते रहने का परिणाम जीवन भर प्रभु के लिए आत्मिक फल लाते रहना होता है। हमारे प्रभु ने हमें सिखाया है: "मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते" (यूहन्ना 15:5)।

   हम जिस प्रभु परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तथा हम जिस की सेवा करते हैं, उसकी समानता और गुणों में लगातार प्रगति करते जाने का हमें सतत परिश्रम करते रहना है, इस भरोसे के साथ कि जिसने हम में अपना कार्य आरंभ किया है वह अपने पुनः आगमन तक हमारे अन्दर अपने कार्य को बनाए रखेगा, उसमें प्रगति करते रहने में हमारा सहायक भी होगा (फिलिप्पियों 1:6)। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारे हृदयों के अन्दर होने वाला परमेश्वर का अदृश्य कार्य, बाहर हमारे जीवनों में फल लाता है।

और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:8-17
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • आमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8


शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

सन्देश


   युक्रेन के लोग क्रिसमस के उत्सव के मनाने में कुछ अद्भुत बातें सम्मिलित करते हैं। कुछ लोग पारिवारिक खाने की मेज़ पर थोड़ा सा सूखी घास और भूसा रख देते हैं बैतलेहम की चरनी के स्मरण में जिसमें जन्म के बाद प्रभु यीशु को रखा गया था। उनके मनाने में एक और भिन्न बात होती है उस रात की घटनाओं का स्मरण जब सारे जगत के उद्धारकर्ता ने इस संसार में प्रवेश किया: क्रिसमस की प्रार्थना के पश्चात घराने का पुरनिया इस शुभ सन्देश को बताता है कि "मसीह पैदा हुआ है"; और प्रत्युत्तर में परिवार जन कहते हैं, "हम उसकी महिमा करें।"

   यह शब्द मेरा ध्यान प्रभु यीशु के जन्म की रात को बैतलेहम के आकाश में स्वर्गदूतों के आने की ओर ले जाते हैं। प्रभु के स्वर्गदूत ने चरवाहों को संबोधित करते हुए, सारे संसार के सभी लोगों के लिए सन्देश दिया, "आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है" (लूका 2:11); और उस स्वर्गदूत के साथ की स्वर्गीय सेना ने प्रत्युत्तर दिया, "आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो" (लूका 2:14)।

   ये दोनों सन्देश वर्ष के इस अद्भुत समय को एक बहुत गहरा अर्थ प्रदान करते हैं। जगत का उद्धारकर्ता आ गया है, और अपने साथ संसार के सभी लोगों के लिए पापों की क्षमा और अनन्त आनन्द के जीवन की आशा लाया है; और केवल वह ही है जो हमारी सारी आराधना, स्तुति और महिमा ग्रहण करने के सर्वथा योग्य है।

   संसार के वे सभी व्यक्ति जो साधारण विश्वास द्वारा उस से सेंत-मेंत उपहार के रूप में मिलने वाले इस उद्धार तथा अनन्त जीवन के बारे में जानते हैं, उन्हें चाहिए कि वे सारे संसार में इस शुभ सन्देश को फैला और सुना कर प्रभु परमेश्वर की महिमा करें।  - बिल क्राउडर


हम मनुष्यों प्रति परमेश्वर के अद्भुत प्रेम की भव्य महिमा, प्रभु यीशु में सदेह प्रकट हुई है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: लूका 2:6-14
Luke 2:6 उन के वहां रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए।
Luke 2:7 और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा: क्योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी। 
Luke 2:8 और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। 
Luke 2:9 और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। 
Luke 2:10 तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। 
Luke 2:11 कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। 
Luke 2:12 और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। 
Luke 2:13 तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्‍वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्‍तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया। 
Luke 2:14 कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो।

एक साल में बाइबल: 
  • आमोस 4-6
  • प्रकाशितवाक्य 7


गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

भण्डारी


   बहुत से लोग यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि उनके पश्चात उनके संसाधनों का सही उपयोग होगा। वे उन संसाधनों के सदुपयोग के लिए वसीयत बनाते हैं, ट्रस्ट या संस्थाएं स्थापित करते हैं जिससे उनके शारीरिक जीवन की समाप्ति के पश्चात वे संसाधन भले कार्यों में उपयोग हों और उनके भले स्मारक बन जाएं। हम इसे अच्छा भण्डारीपन कहते हैं।

   सांसारिक संसाधनों की ऐसी भली उपयोगिता तथा अच्छे भण्डारीपन के समान ही आवश्यक हम मसीही विश्वासियों के मसीही जीवन की गवाही का उपयोग भी है। परमेश्वर ने अपने लोगों, इस्त्राएल को आज्ञा दी कि वे अपनी सन्तानों को ना केवल परमेश्वर की व्यवस्था और बातें सिखाएं वरन अपने परिवार का इतिहास भी सिखाएं। यह अभिभावकों का उत्तरदायित्व था कि वे अपनी अगली पीढ़ी को सिखाएं कि कैसे परमेश्वर ने उनके लिए कार्य किया, उन्हें सुरक्षित रखा और उन्हें अपने साथ लिए चला (व्यवस्थाविवरण 4:1-14)।

   आज, परमेश्वर ने हम सभी मसीही विश्वासियों को एक अनुपम जीवन-कथा दी है। हम में से प्रत्येक के लिए उसकी योजनाएं विशिष्ट और व्यक्तिगत हैं। आज क्या अन्य लोग यह जानते हैं कि आप ने क्यों और कैसे मसीह यीशु पर विश्वास किया और मसीही बनें? आपके मसीही विश्वास का आधार कौन से सिद्धांत हैं? परमेश्वर ने कैसे आपके जीवन में कार्य किया और आपके विश्वास को स्थिर तथा दृढ़ किया? क्या लोग जानते हैं कि कैसे बारंबार परमेश्वर ने अपने आप को आपके प्रति विश्वासयोग्य प्रमाणित किया है, और आपकी गलतियों, शंकाओं एवं निराशाओं के समयों में भी आपको कभी ना छोड़ने वाला, सदैव आपके साथ बना रहने वाला आपका सहायक और मार्गदर्शक रहा है?

   अपने प्रति परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की कहानी को बताना हमारा ना केवल हमारा विशेषाधिकार है, वफ़्रन उत्तरदायित्व भी है। अपने जीवन में जो अनुभव आपने परमेश्वर से प्राप्त किए हैं उन्हें कहीं किसी प्रकार दर्ज करें, उन्हें परिवार जनों, मित्रों, लोगों के साथ बाँटें - यह ना केवल आपको परमेश्वर की आशीषों का अच्छा भण्डारी बनाएगा, वरन आपको शैतान के आक्रमणों पर जयवन्त भी करेगा (प्रकाशितवाक्य 12:10-11)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के लिए व्यतीत किया गया जीवन एक स्थाई विरासत छोड़ जाता है।

फिर मैं ने स्वर्ग पर से यह बड़ा शब्द आते हुए सुना, कि अब हमारे परमेश्वर का उद्धार, और सामर्थ, और राज्य, और उसके मसीह का अधिकार प्रगट हुआ है; क्योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगाने वाला, जो रात दिन हमारे परमेश्वर के साम्हने उन पर दोष लगाया करता था, गिरा दिया गया। और वे मेम्ने के लोहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्‍त हुए, और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली। - प्रकाशितवाक्य 12:10-11

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 4:1-14
Deuteronomy 4:1 अब, हे इस्राएल, जो जो विधि और नियम मैं तुम्हें सिखाना चाहता हूं उन्हें सुन लो, और उन पर चलो; जिस से तुम जीवित रहो, और जो देश तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ। 
Deuteronomy 4:2 जो आज्ञा मैं तुम को सुनाता हूं उस में न तो कुछ बढ़ाना, और न कुछ घटाना; तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूं उन्हें तुम मानना। 
Deuteronomy 4:3 तुम ने तो अपनी आंखों से देखा है कि बालपोर के कारण यहोवा ने क्या क्या किया; अर्थात जितने मनुष्य बालपोर के पीछे हो लिये थे उन सभों को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे बीच में से सत्यानाश कर डाला; 
Deuteronomy 4:4 परन्तु तुम जो अपने परमेश्वर यहोवा के साथ लिपटे रहे हो सब के सब आज तक जीवित हो। 
Deuteronomy 4:5 सुनो, मैं ने तो अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार तुम्हें विधि और नियम सिखाए हैं, कि जिस देश के अधिकारी होने जाते हो उस में तुम उनके अनुसार चलो। 
Deuteronomy 4:6 सो तुम उन को धारण करना और मानना; क्योंकि और देशों के लोगों के साम्हने तुम्हारी बुद्धि और समझ इसी से प्रगट होगी, अर्थात वे इन सब विधियों को सुनकर कहेंगे, कि निश्चय यह बड़ी जाति बुद्धिमान और समझदार है। 
Deuteronomy 4:7 देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? 
Deuteronomy 4:8 फिर कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसके पास ऐसी धर्ममय विधि और नियम हों, जैसी कि यह सारी व्यवस्था जिसे मैं आज तुम्हारे साम्हने रखता हूं? 
Deuteronomy 4:9 यह अत्यन्त आवश्यक है कि तुम अपने विषय में सचेत रहो, और अपने मन की बड़ी चौकसी करो, कहीं ऐसा न हो कि जो जो बातें तुम ने अपनी आंखों से देखीं उन को भूल जाओ, और वह जीवन भर के लिये तुम्हारे मन से जाती रहे; किन्तु तुम उन्हें अपने बेटों पोतों को सिखाना। 
Deuteronomy 4:10 विशेष कर के उस दिन की बातें जिस में तुम होरेब के पास अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने खड़े थे, जब यहोवा ने मुझ से कहा था, कि उन लोगों को मेरे पास इकट्ठा कर कि मैं उन्हें अपने वचन सुनाऊं, जिस से वे सीखें, ताकि जितने दिन वे पृथ्वी पर जीवित रहें उतने दिन मेरा भय मानते रहें, और अपने लड़के बालों को भी यही सिखाएं। 
Deuteronomy 4:11 तब तुम समीप जा कर उस पर्वत के नीचे खड़े हुए, और वह पहाड़ आग से धधक रहा था, और उसकी लौ आकाश तक पहुंचती थी, और उसके चारों ओर अन्धियारा, और बादल, और घोर अन्धकार छाया हुआ था। 
Deuteronomy 4:12 तब यहोवा ने उस आग के बीच में से तुम से बातें की; बातों का शब्द तो तुम को सुनाईं पड़ा, परन्तु कोई रूप न देखा; केवल शब्द ही शब्द सुन पड़ा। 
Deuteronomy 4:13 और उसने तुम को अपनी वाचा के दसों वचन बताकर उनके मानने की आज्ञा दी; और उन्हें पत्थर की दो पटियाओं पर लिख दिया। 
Deuteronomy 4:14 और मुझ को यहोवा ने उसी समय तुम्हें विधि और नियम सिखाने की आज्ञा दी, इसलिये कि जिस देश के अधिकारी होने को तुम पार जाने पर हो उस में तुम उन को माना करो। 

एक साल में बाइबल: 
  • आमोस 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 6