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गुरुवार, 20 अगस्त 2020

कार्य


        किसी कार्य को पूरा कर लेना बहुत संतुष्टि प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, मेरी नौकरी में, हर महीने मुझे सौंपे गए कार्यों के बारे में लेखा-जोखा देना होता है, और हर कार्य के सामने लिखना होता है “प्रगति पर है” या “पूरा हुआ।” मुझे वह “पूरा हुआ” लिखना बहुत अच्छा लगता है। पिछले महीने जब मैंने एक कार्य के सामने लिखा “पूरा हुआ” तो मैं साथ ही यह भी सोचने लगा, काश कि मेरे मसीही विश्वास की खामियों को सुधार कर उन्हें भी इतनी सहजता से “पूरा हुआ” कहा जा सकता। मसीही जीवन तो सदा ही “प्रगति पर है” रहता है, कभी “पूरा हुआ” तक नहीं पहुँचता है।

        फिर मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों 10:14 का ध्यान आया, जहाँ बताया गया है कि प्रभु यीशु मसीह के बलिदान के द्वारा हमारा पूर्ण छुटकारा हो गया है। तो एक प्रकार से हमारे लिए “पूरा हुआ” लिखा जा चुका है। कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु की मृत्यु ने हमारे लिए वह कर दिया है जिसे हम अपने आप कभी नहीं कर सकते थे: उसने हमें परमेश्वर को ग्रहण-योग्य बना दिया – जैसे ही हम अपने पापों से पश्चाताप करके उसमें विश्वास लाते हैं, उससे अपने पापों के क्षमा मांगते हैं, और अपना जीवन उसे समर्पित करते हैं, हम सदा-सर्वदा के लिए परमेश्वर की संतान बन जाते हैं (यूहन्ना 1:12-13)। जैसा कि प्रभु यीशु ने स्वयं क्रूस पर से कहा था, यह कार्य “पूरा हुआ” (यूहन्ना 19:30)। लेकिन साथ ही इब्रानियों का लेखक यह भी कहता है कि इस जीवन में हम अभी “पवित्र किए जा रहे हैं” यद्यपि प्रभु यीशु का क्रूस पर दिया गया बलिदान पूर्ण और कारगर है।

        यह समझना कठिन है कि जिस काम को प्रभु यीशु ने पूरा कर दिया है, वह अभी भी हमारे जीवनों में प्रगति पर है। जब मैं और आप किसी आत्मिक बात को लेकर संघर्ष में होते हैं, तो यह स्मरण करना उत्साहवर्धक होता है कि मेरे और आप के लिए प्रभु यीशु के बलिदान ने सब कुछ पूरा कर दिया है चाहे हमारे जीवन उसे अभी भी “प्रगति पर है” दिखा रहे हैं। हमारे उद्धार और नए जीवन के लिए प्रभु यीशु का कार्य पूरा है, पर्याप्त है, उसमें और किसी भी बात की कोई आवश्यकता नहीं है, वह अनन्तकाल तक सक्रिय है। - एडम होल्ज़

 

परमेश्वर हम में कार्य कर रहा है कि हम 

उसके पुत्र के बलिदान के द्वारा पूरा किए गए कार्य को दिखाएं।


परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:5-14

इब्रानियों 10:5 इसी कारण वह जगत में आते समय कहता है, कि बलिदान और भेंट तू ने न चाही, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया।

इब्रानियों 10:6 होम-बलियों और पाप-बलियों से तू प्रसन्न नहीं हुआ।

इब्रानियों 10:7 तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं।

इब्रानियों 10:8 ऊपर तो वह कहता है, कि न तू ने बलिदान और भेंट और होम-बलियों और पाप-बलियों को चाहा, और न उन से प्रसन्न हुआ; यद्यपि ये बलिदान तो व्यवस्था के अनुसार चढ़ाए जाते हैं।

इब्रानियों 10:9 फिर यह भी कहता है, कि देख, मैं आ गया हूं, ताकि तेरी इच्छा पूरी करूं; निदान वह पहिले को उठा देता है, ताकि दूसरे को नियुक्त करे।

इब्रानियों 10:10 उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं।

इब्रानियों 10:11 और हर एक याजक तो खड़े हो कर प्रति दिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते; बार बार चढ़ाता है।

इब्रानियों 10:12 पर यह व्यक्ति तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ा कर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।

इब्रानियों 10:13 और उसी समय से इस की बाट जोह रहा है, कि उसके बैरी उसके पांवों के नीचे की पीढ़ी बनें।

इब्रानियों 10:14 क्योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 105-106
  • 1 कुरिन्थियों 3

शनिवार, 17 दिसंबर 2016

प्रगति


   पाबेलो कैसल्स को 20वीं शताब्दी के प्रथम अर्ध-भाग का सबसे प्रख्यात चेलो-वायलिन वादक माना जाता है। वे अपने जीवन के दसवें दशक में भी चेलो-वायलिन बजाते थे; 95 वर्षीय पाबेलो से एक जवान पत्रकार ने पूछा, "श्रीमान कैसल्स, आप 95 वर्ष के हैं, और अभी तक के संसार के सबसे महानतम चेलो वादक हैं। फिर भी आप प्रतिदिन छः घंटे अभ्यास क्यों करते हैं?" पाबेलो कैसल्स ने उत्तर दिया, "क्योंकि मुझे लगता है कि ऐसा करने से मैं और प्रगति करता रहता हूँ।" कैसा महान दृष्टिकोण, तथा अपनी कला के प्रति कितना अद्भुत समर्पण!

   हम मसीही विश्वासियों को भी कभी यह सोच कर संतुष्ट हो कर थम नहीं जाना चाहिए, कि हम ने कोई आत्मिक सफलता प्राप्त कर ली है।, वरन हमें प्रेरित पतरस द्वारा लिखे निर्देश : "हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ" (2 पतरस 3:18) का पालन करते रहना चाहिए और प्रभु यीशु की पहचान में बढ़ते रहना चाहिए। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को स्मरण कराया कि, "तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ" (यूहन्ना 15:16)। आत्मिक जीवन में स्वस्थ प्रगति होते रहने का परिणाम जीवन भर प्रभु के लिए आत्मिक फल लाते रहना होता है। हमारे प्रभु ने हमें सिखाया है: "मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते" (यूहन्ना 15:5)।

   हम जिस प्रभु परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तथा हम जिस की सेवा करते हैं, उसकी समानता और गुणों में लगातार प्रगति करते जाने का हमें सतत परिश्रम करते रहना है, इस भरोसे के साथ कि जिसने हम में अपना कार्य आरंभ किया है वह अपने पुनः आगमन तक हमारे अन्दर अपने कार्य को बनाए रखेगा, उसमें प्रगति करते रहने में हमारा सहायक भी होगा (फिलिप्पियों 1:6)। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारे हृदयों के अन्दर होने वाला परमेश्वर का अदृश्य कार्य, बाहर हमारे जीवनों में फल लाता है।

और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:8-17
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • आमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8