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सोमवार, 28 जनवरी 2019

प्रेम



      हम मसीही विश्वासी उस परमेश्वर की सेवा करते हैं जो हमारी सेवा के कार्यों से बढ़कर, हम से प्रेम करता है। यह सच है कि परमेश्वर चाहता है कि अपने परिवारों की आवश्यकताओं के लिए हम कार्य करें, और उसके द्वारा रचे गए सँसार की ज़िम्मेदारी के साथ देख-भाल करें। वह हमसे यह भी आशा रखता है कि हम दुर्बल, भूखे, प्यासे, और दुखी लोगों की सेवा करें, तथा उनके प्रति भी सजग और संवेदनशील रहें जिन्होंने अब तक परमेश्वर की पवित्र आत्मा की प्रेम भरी पुकार को प्रत्युत्तर नहीं दिया है। परन्तु फिर भी जिस परमेश्वर के लिए हम यह सब कार्य करते हैं, वह हमारे कार्यों से बढ़कर हम से प्रेम रखता है।

      हमें इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि वह समय आ सकता है कि किसी अप्रत्याशित दुर्घटना, कोई स्वास्थ्य हानि, किसी परिस्थिति के कारण हमारे लिए परमेश्वर के लिए कुछ कर पाना संभव न रहे। परमेश्वर चाहता है कि ऐसे समयों में भी हम स्मरण रखें कि वह हम से प्रेम रखता है, जो हम उसके लिए करते हैं उसके कारण नहीं, वरन जो हम हैं – उसकी सन्तान, उसके कारण!

      जब एक बार हमने पापों से पश्चाताप करके प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया, उसे अपना जीवन समर्पित कर दिया, उसके बाद फिर कोई भी “परेशानी, या कठिनाई, या सताव, या अकाल, या नग्नता, या खतरा, या तलवार” हमें “परमेश्वर के प्रेम से जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग [नहीं] कर सकेगी” (रोमियों 8:35, 39)।

      जब वह सब जो हम हैं या जो हम कर सकते हैं, हम से ले लिया जाए, तब भी परमेश्वर इतना ही चाहता है कि हम हमारे प्रति उसके प्रेम में आश्वस्त रहें, उसपर भरोसा बनाए रखें। - रैंडी किल्गोर


हमारे अस्तित्व का कारण परमेश्वर के साथ हमारी संगति है।

यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है। - यिर्मयाह 31:3

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-29
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों के समान गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35



रविवार, 27 जनवरी 2019

अप्रत्यक्ष



      परमेश्वर के वचन बाइबल की कहानियाँ हमें रुक कर विचार करवा सकती हैं। उदाहरण के लिए, जब मूसा परमेश्वर के लोगों को प्रतिज्ञा किए हुए देश में लेकर जा रहा था, और अमालेकियों ने उन पर हमला किया, तो मूसा को कैसे पता चला कि उसे पहाड़ पर चढ़कर परमेश्वर की लाठी को ऊँचा उठाना है (निर्गमन 17:8-15)? हमें इसका उत्तर बताया तो नहीं गया है, परन्तु हम देखते हैं कि युद्ध के समय में जब मूसा अपने हाथों को उठाए रहता था, तो इस्राएली युद्ध जीतते रहते थे, और जब वह हाथ नीचे कर लेता था तो अमालेकी विजयी होने लगते थे। जब मूसा थक गया तो उसका भाई हारून, और एक अन्य पुरुष, हूर, ने मूसा के हाथों को उठाए रखा, जिससे इस्राएली युद्ध में विजयी हो सके।

      बाइबल में हम हूर के विषय में कुछ विशेष लिखा हुआ नहीं पाते हैं, परन्तु इस्राएल के इतिहास में इस समय पर उसने एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह हमें स्मरण करवाता है कि परमेश्वर के कार्य और राज्य में अप्रत्यक्ष लोगों की भी बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक भूमिका है – ऐसे लोग जो नेतृत्व करने वाले अगुवों की सहायता करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, किन्तु स्वयँ कभी सामने नहीं आते हैं। इतिहास की पुस्तकों में अगुवों का उल्लेख आता है, समाज उनके नेतृत्व और कार्यों की बड़ाई करता है। परन्तु शांति से अप्रत्यक्ष रहकर कार्य करते रहने वालों को परमेश्वर कभी नज़रंदाज़ नहीं करता है, उन्हें उनका प्रतिफल देता है। परमेश्वर अपने उस जन का ध्यान करता है जो प्रतिदिन उसके सम्मुख अपने परिवार और मित्रों के लिए प्रार्थना में मध्यस्थता करता है। उसे उस कार्यकर्ता की सुधि रहती है जो प्रति इतवार, चर्च से पहले और बाद में चर्च को साफ़ और व्यवस्थित करते हैं। परमेश्वर को उस पड़ौसी का ध्यान रहता है जो प्रोत्साहन तथा सहायता के साथ अपने पड़ौसी की ओर हाथ बढ़ाता है।

      परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों को अपनी सेवकाई और महिमा के लिए उपयोग करता है, चाहे हमें हमारा योगदान महत्वपूर्ण न भी लगे। इसलिए आप जिस भी अप्रत्यक्ष नायक को जानते हैं, उसके प्रति धन्यवादी और प्रोत्साहक रहिए। - एमी बाउचर पाई


परमेश्वर के सामने अप्रत्यक्ष नायक भी प्रत्यक्ष बने रहते हैं।

हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5: 5-7

बाइबल पाठ: निर्गमन 17:8-15
Exodus 17:8 तब अमालेकी आकर रपीदीम में इस्राएलियों से लड़ने लगे।
Exodus 17:9 तब मूसा ने यहोशू से कहा, हमारे लिये कई एक पुरूषों को चुनकर छांट ले, और बाहर जा कर अमालेकियों से लड़; और मैं कल परमेश्वर की लाठी हाथ में लिये हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूंगा।
Exodus 17:10 मूसा की इस आज्ञा के अनुसार यहोशू अमालेकियों से लड़ने लगा; और मूसा, हारून, और हूर पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए।
Exodus 17:11 और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था।
Exodus 17:12 और जब मूसा के हाथ भर गए, तब उन्होंने एक पत्थर ले कर मूसा के नीचे रख दिया, और वह उस पर बैठ गया, और हारून और हूर एक एक अलंग में उसके हाथों को सम्भाले रहें; और उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे।
Exodus 17:13 और यहोशू ने अनुचरों समेत अमालेकियों को तलवार के बल से हरा दिया।
Exodus 17:14 तब यहोवा ने मूसा से कहा, स्मरणार्थ इस बात को पुस्तक में लिख ले और यहोशू को सुना दे, कि मैं आकाश के नीचे से अमालेक का स्मरण भी पूरी रीति से मिटा डालूंगा।
Exodus 17:15 तब मूसा ने एक वेदी बनाकर उसका नाम यहोवानिस्सी रखा;
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20



शनिवार, 26 जनवरी 2019

समान



      ब्रिटेन के लेखक एवलिन वॉ शब्दों को ऐसे प्रयोग करते थे कि उनके चरित्र की त्रुटियाँ और अधिक विदित हो जाती थीं। अन्ततः वह उपन्यासकार मसीही विश्वासी बन गया, परन्तु वह फिर भी अपने चरित्र को लेकर संघर्ष करता रहा। एक दिन एक महिला ने उससे पूछा, “श्रीमान वॉ, ऐसा कैसे हो सकता है कि आप अपने आप को मसीही भी कहें और वैसे व्यवहार भी करें जैसा आप दिखाते हैं?” उन्होंने उस महिला को उत्तर दिया, “महोदया, आप मुझे जितना बुरा समझती हैं, संभव है कि मैं वैसा हूँ। परन्तु मेरा विश्वास कीजिए कि यदि मेरा यह धर्म न होता तो मैं मनुष्य कहलाने के योग्य भी न होता।”

      वॉ एक आंतरिक आत्मिक युद्ध लड़ रहे थे, जिसका अनुभव स्वयं पौलुस ने भी किया था और जिसके विषय परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा है। अपने इस संघर्ष के बारे में पौलुस लिखता है, कि वह भला तो करना चाहता है, परन्तु कर नहीं पाता है (रोमियों 7:18)। वह बताता है कि ऐसा व्यवस्था में कोई दोष होने के कारण नहीं है, वरन उसके मानव स्वभाव के कारण है (रोमियों 7:14)। इसे और अधिक स्पष्ट करते हुए वह कहता है कि अपने भीतरी मनुष्यत्व में तो वह परमेश्वर की व्यवस्था से प्रसन्न रहता है, परन्तु उसके शरीर में एक अन्य ही व्यवस्था कार्य करती है, और वह प्रश्न करता है कि वह कैसे इस मरणहार शरीर की इस प्रवृत्ति से बच सकता है (रोमियों 7: 22-24)? और फिर वह उल्लास के साथ इस प्रश्न का उत्तर बताता है कि यह प्रभु यीशु मसीह द्वारा संभव है (रोमियों 7:25–8:2)।

      हम, अपने पापों और गलतियों का अंगीकार कर के, और अपने लिए एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता को स्वीकार करके, जब प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाते हैं तो तुरंत ही हम एक नई सृष्टि हो जाते हैं (2 कुरिन्थियों 5: 17)। परन्तु शारीरिक से आत्मिक हो जाने का यह परिवर्तन एक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके विषय प्रेरित यूहन्ना लिखता है, “हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है” (1 यूहन्ना 3:2)। परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों को अपने पुत्र, हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में ढालता जा रहा है; एक दिन हम प्रभु के समान होंगे। - टिम गुस्ताफासन


मसीही होने का अर्थ है अक्षम्य को क्षमा करने वाला होना, 
क्योंकि परमेश्वर ने हम में विद्यमान अक्षम्य को क्षमा कर दिया। - सी. एस. ल्यूइस

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5: 17

बाइबल पाठ: रोमियों 7:12–8:2
Romans 7:12 इसलिये व्यवस्था पवित्र है, और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है।
Romans 7:13 तो क्या वह जो अच्छी थी, मेरे लिये मृत्यु ठहरी? कदापि नहीं! परन्तु पाप उस अच्छी वस्तु के द्वारा मेरे लिये मृत्यु का उत्पन्न करने वाला हुआ कि उसका पाप होना प्रगट हो, और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे।
Romans 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शरीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।
Romans 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।
Romans 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।
Romans 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
Romans 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।
Romans 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।
Romans 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।
Romans 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।
Romans 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
Romans 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं।
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17



शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

साथ



      बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं अपने मित्र के साथ मछली पकड़ने के लिए गया, और वर्षा होने लग गई। हमने पास के पेड़ों के एक झुरमुट में शरण ली, किन्तु वर्षा तेज होती चली गई, इसलिए हमने वापस घर लौट जाने का निर्णय किया और पास खड़े अपने ट्रक की ओर दौड़े। मैंने ट्रक का दरवाज़ा खोला ही था कि ज़ोर से बिजली कड़की और एक आग के गोले के समान उसी पेड़ों के झुरमुट पर गिरी जहाँ हम शरण लिए हुए थे। बिजली गिरने से उन पेड़ों के पत्ते झड़ गए, छाल उतर गई, और उनकी कुछ डालियाँ सुलगती हुई रह गईं। और फिर इसके बाद बिलकुल शान्ति हो गई।

      इस घटना से हम घबरा गए, हिल गए।

      हमारे निवास स्थान – इडाहो घाटी में, बिजली का कड़कना और चमकना सामान्य बात है। मुझे ऐसा होते देखना अच्छा लगता है – उस दिन बाल-बाल बचने के बावजूद। मुझे बिजली कड़कने और गिरने से व्यक्त होने वाली अद्भुत शक्ति, उसकी आश्चर्यचकित और भयभीत कर देने, तथा धरती को कंपा और थर्रा देने वाली अनुभूति और उसके बाद होने वाली शान्ति पसन्द है।

      मुझे आकाश की बिजली का यह कड़कना और चमकना इसलिए पसन्द है क्योंकि यह परमेश्वर की वाणी का चिन्ह है (अय्यूब 37:4), परमेश्वर का अपने वचन बाइबल में होकर प्रबल विस्मयकारक रीति से बोलना। भजनकार ने लिखा, “यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है। ... यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा” (भजन 29:7, 11)। परमेश्वर हमें सामर्थ्य देता है कि हम सह सकें, धैर्य रख सकें, कृपालु और दयालु हों, शान्त होकर बैठ सकें, एक से दूसरे स्थान जा सकें, कुछ हानि नहीं करें।

      सर्वशक्तिमान, शान्ति का परमेश्वर आपके साथ भी बना रहे। - डेविड रोपर


विश्वास हमारी निर्बलता को परमेश्वर की सामर्थ्य के साथ जोड़ देता है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: भजन 29
Psalms 29:1 हे परमेश्वर के पुत्रों यहोवा का, हां यहोवा ही का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ को सराहो।
Psalms 29:2 यहोवा के नाम की महिमा करो; पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो।
Psalms 29:3 यहोवा की वाणी मेघों के ऊपर सुन पड़ती है; प्रतापी ईश्वर गरजता है, यहोवा घने मेघों के ऊपर रहता है।
Psalms 29:4 यहोवा की वाणी शक्तिशाली है, यहोवा की वाणी प्रतापमय है।
Psalms 29:5 यहोवा की वाणी देवदारों को तोड़ डालती है; यहोवा लबानोन के देवदारों को भी तोड़ डालता है।
Psalms 29:6 वह उन्हें बछड़े के समान और लबानोन और शिर्योन को जंगली बछड़े के समान उछालता है।
Psalms 29:7 यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है।
Psalms 29:8 यहोवा की वाणी वन को हिला देती है, यहोवा कादेश के वन को भी कंपाता है।
Psalms 29:9 यहोवा की वाणी से हरिणियों का गर्भपात हो जाता है। और अरण्य में पतझड़ होती है; और उसके मन्दिर में सब कोई महिमा ही महिमा बोलता रहता है।
Psalms 29:10 जलप्रलय के समय यहोवा विराजमान था; और यहोवा सर्वदा के लिये राजा हो कर विराजमान रहता है।
Psalms 29:11 यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16



गुरुवार, 24 जनवरी 2019

व्यर्थ



      मेरा परिचित जन, जो वित्तीय सलाहकार का कार्य करता है, धन निवेश करने की वास्तविकता के बारे में एक तथ्य बताता है। वह कहता है, “सर्वोत्तम की आशा रखो किन्तु सर्वाधिक हानि के लिए तैयार रहो।” जीवन में हम जितने भी निर्णय करते हैं , उन सब के साथ अंतिम परिणाम के विषय कुछ न कुछ अनिश्चितता जुड़ी ही रहती है। परन्तु फिर भी एक मार्ग है जिसका अनुसरण कर के हम कभी हानि में नहीं रहेंगे, हमारा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाएगा; वह मार्ग है प्रभु यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करके अपना जीवन उसे समर्पित कर देना।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने भ्रष्ट और अनैतिक आचरण के लिए कुख्यात कोरिन्थ शहर में मसीह यीशु के अनुयायियों के साथ एक वर्ष बिताया। वहाँ से जाने के पश्चात, उसने उन्हें लिखे एक पत्र द्वारा प्रोत्साहित किया कि वे निराश न हों और यह न समझें कि मसीह यीशु के लिए उनके जीवन की गवाही व्यर्थ रही है। पौलुस ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह दिन आ रहा है जब प्रभु यीशु लौट कर आएगा और तब मृत्यु भी पराजित हो जाएगी (1 कुरिन्थियों 15:52-55)।

      प्रभु यीशु के प्रति वफादार बने रहना कठिन, निराशाजनक, और खतरनाक तो हो सकता है, परन्तु कभी व्यर्थ और निर्थक नहीं होगा। हम जब प्रभु के साथ चलते हैं, हमारे जीवनों में कार्यकारी उसकी उपस्थिति और सामर्थ्य की गवाही देते हैं, तो हमारे जीवन व्यर्थ नहीं हैं! हम इसके विषय भरोसा रख सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु मसीह के विषय हमारा जीवन और गवाही व्यर्थ नहीं है।

क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। - 2 कुरिन्थियों 4:11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:50-58
1 Corinthians 15:50 हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है।
1 Corinthians 15:51 देखे, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे।
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे।
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले।
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया।
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही?
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है।
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है।
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39



बुधवार, 23 जनवरी 2019

भरोसा



      कल्पना कीजिए कि आपको यात्रा पर जाना है, परन्तु अपने साथ कुछ भी नहीं ले जाना है – न बुनियादी आवश्यकताओं की कोई वस्तुएँ, न कपड़े, न पैसा, न क्रेडिट कार्ड, न कुछ और – यह बहुत मूर्खतापूर्ण और भयावह लगता है न?

      परन्तु हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि जब प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को उनकी सर्वप्रथम प्रचार और चंगाई की यात्रा पर भेजा तो उनसे ऐसा ही करने को कहा – “मार्ग के लिए लाठी छोड़ और कुछ नहीं लेना; कोई रोटी नहीं, कोई झोला नहीं, कोई बटुआ या पैसे नहीं, जूतियाँ तो पहन लो परन्तु दो कुरते मत ले जाना” (मरकुस 6:8-9)।

      परन्तु बाद में, जब प्रभु यीशु उन्हें अपने जाने के बाद के प्रचार के लिए तैयार कर रहे थे तो उनसे कहा, “परन्तु अब जिस के पास बटुआ हो वह उसे ले, और वैसे ही झोली भी, और जिस के पास तलवार न हो वह अपने कपड़े बेचकर एक मोल ले” (लूका 22:36)।

      ऐसा क्यों? प्रभु की इस बात का क्या अभिप्राय था? प्रभु अपने शिष्यों को परमेश्वर पर भरोसा रखना सिखा रहे थे।

      बाद में जब प्रभु ने उस पहले यात्रा के संदर्भ में उनसे पूछा, “जब मैं ने तुम्हें बटुए, और झोली, और जूते बिना भेजा था, तो क्या तुम को किसी वस्तु की घटी हुई थी?” तो शिष्यों ने उत्तर दिया, “किसी वस्तु की नहीं” (लूका 22:35)। उन शिष्यों के पास परमेश्वर के कार्य को करने के लिए जो कुछ आवश्यक था, सब उपलब्ध हो गया; परमेश्वर ने उन्हें उसका कार्य करने के लिए संपूर्ण सामर्थ्य दी (मरकुस 6:7)।

      क्या हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं? क्या हम उसकी सेवकाई के लिए अपनी ज़िम्मेदारी और योजना की आवश्यकता को समझते हैं? हम भरोसा रखें कि जब हम उसकी इच्छा के अनुसार उसके कार्य को करेंगे तो जो भी आवश्यक होगा, वह उसे हमें उपलब्ध करवाएगा। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर की इच्छा, 
जब परमेश्वर के अनुसार पूरी की जाएगी, 
तो उसमें परमेश्वर के प्रावधानों के कभी घटी नहीं होगी
 – हडसन टेलर, चाइना इनलैंड मिशन के संस्थापक

और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। - फिलिप्पियों 4:19

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-12
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया।
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे।
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो।
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो।
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15: 1-20



मंगलवार, 22 जनवरी 2019

चेहरा



      एक लेखक के रूप में मेरी अधिकांश जीविका दुःख की समस्या को संबोधित करने में व्यतीत हुई है। मैं बारंबार लौट कर उन्हीं प्रश्नों पर आ जाता हूँ, मानो एक ऐसे घाव को कुरेदता रहता हूँ जो कभी भरने का नहीं। मुझे अपने पाठकों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त होती हैं, और उनकी दुखद कहानियाँ मेरी शंकाओं को एक मान्वीय चहरे प्रदान करती हैं। मुझे स्मरण है कि एक युवा पास्टर ने मुझे फोन करके प्रश्न किया, “अब भला मैं अपने युवाओं के समूह के साथ एक प्रेमी परमेश्वर के बारे में कैसे बात कर सकता हूँ?” – उसकी पत्नि और शिशु बच्ची ऐड्स से ग्रसित होकर मर रहे थे क्योंकि उन्हें एड्स से संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था!

      मैंने सीख लिया है कि इस प्रकार के “क्यूँ?” प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास भी नहीं करूँ। उस पास्टर के पत्नि को वही एक संक्रमित खून की बोतल ही क्यों मिली? क्यों चक्रवाधि तूफ़ान ने एक नगर को तबाह कर दिया और पास के दूसरे नगर की कुछ हानि नहीं हुई? क्यों शारीरिक चंगाई के लिए की गई प्रार्थनाएं निरुत्तरित चली जाती हैं?

      लेकिन एक प्रश्न है जो मुझे अब वैसे परेशान नहीं करता है, जैसे पहले किया करता था – “क्या परमेश्वर को हमारी परवाह है?” मैं इस प्रश्न का केवल एक ही उत्तर जानता हूँ, और वह उत्तर है प्रभु यीशु मसीह। प्रभु यीशु मसीह में परमेश्वर ने हमें वह चेहरा दिया है जिसे देखने से हमें पता चल जाता है कि परमेश्वर इस दुःख से कराहते हुए सँसार की परवाह करता है कि नहीं।

      “क्या परमेश्वर को हमारी प्रवाह है?” हमारे पापों के लिए परमेश्वर के पुत्र की मृत्यु, जिससे अन्तः सारा दुःख, कष्ट, पीड़ा, और मृत्यु भी सदा के लिए समाप्त हो जाएँगी, ही इस प्रश्न का उत्तर है – “इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो” (2 कुरिन्थियों 4: 6)। - फिलिप यैंसी


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम का विस्तार क्रूस पर मसीह यीशु की फ़ैली हुई बाहों के जितना है।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-11
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14: 22-36