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सोमवार, 1 जुलाई 2019

सफाई



      हाल ही में मैंने अपने रहने का कमरा एक से दूसरे स्थान को बदला। यह करने में मुझे अपेक्षा से अधिक समय लगा, क्योंकि मैं अपने एक कमरे का सारा कबाड़ दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर देना नहीं चाहती थी। मैं उस नए स्थान में एक बिलकुल नया और सुव्यवस्थित आरंभ चाहती थी। घंटों की सफाई और छंटाई के बाद मेरे दरवाज़े पर कई थैले भरे हुए पड़े थे, उस सामान से जिसे फेंका, या बाँटा, या पुनःउपयोग के लिए पुनःचक्रित किया जाना था। परन्तु इस थका देने वाली मेहनत के बाद मेरे पास एक स्वच्छ सुन्दर कमरा था जिसे देखकर मैं उसमें रहने के लिए उत्साहित थी।

      मेरे घर के इस सफाई अभियान ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 पतरस 2:1 पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया, जिसे इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: “इसलिए घर की सफाई करो! प्रत्येक बैरभाव, छल, डाह, निन्दा, और दुःख देने वाली बातों को पूरी रीति से हटा दो।” यह रोचक है कि पतरस यह बात उन मसीही विश्वासियों से कह रहा है जिन्होंने मसीह यीशु विश्वास लाने के द्वारा नए आनंदपूर्ण नए जीवन की प्राप्ति का अंगीकार किया है (1:1-12), और पतरस उनसे कह रहा है कि वे हानिकारक व्यवहार को अपने जीवन से हटा दें (1:13-2:3)। जब प्रभु के साथ हमारा चलना हमें बाधित लगने लगे तथा औरों के प्रति हमारा प्रेम स्वभाविक या तनावपूर्ण प्रतीत हो, तो इससे हमें अपने उद्धार पर प्रश्न नहीं उठाना चाहिए। हम उद्धार पाने के लिए जीवन में परिवर्तन नहीं लाते है, परन्तु उद्धार पाया हुआ होने से हमारे जीवनों में परिवर्तन दिखाई देता है (1:23)।

      मसीह यीशु में हमारे विश्वास का जीवन अवश्य ही नया जीवन तो होता है, परन्तु हमारी पुरानी आदतों और बुराइयों को हमारे जीवन से जाते-जाते समय लगता है। इसलिए हमें प्रतिदिन अपने जीवन की सफाई करते रहने का रवैया बनाए रखना चाहिए; हमें उस प्रत्येक बात को अपने जीवन से निकाल देना चाहिए जो हमें औरों से प्रेम करने (1:22) और मसीही जीवन में उन्नत होने (2:2) से रोकती है।

      फिर उस स्वच्छ और साफ़ स्थिति में हम मसीह यीशु के जीवन और सामर्थ्य के द्वारा नए किए जाने (पद 5) के अचरज और आनन्द का अनुभव ले सकेंगे। - मोनिका ब्रैंड्स


प्रतिदिन हम हानिकारक आदतों का इन्कार करके 
मसीह यीशु में नए जीवन का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:22-2:5
1 Peter 1:22 सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
1 Peter 1:23 क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।
1 Peter 1:24 क्योंकि हर एक प्राणी घास के समान है, और उस की सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
1 Peter 1:25 परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहेगा: और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था।
1 Peter 2:1 इसलिये सब प्रकार का बैर भाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके।
1 Peter 2:2 नये जन्मे हुए बच्‍चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।
1 Peter 2:3 यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है।
1 Peter 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है।
1 Peter 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48



रविवार, 30 जून 2019

धीरजवंत



      पिछले बसंत, मैंने अपने घर के पिछले दरवाज़े के निकट उग रही गुलाब की झाड़ी को काट डालने का निर्णय लिया। हमें उस घर में रहते तीन वर्ष हो गए थे, और उस झाड़ी में कुछ विशेष फूल नहीं आए थे और उसकी बदसूरत टहनियाँ चारों ओर फैल रही थीं। परन्तु मैं जीवन की व्यस्तता में फंस गई और उस झाड़ी को काट डालने की मेरी योजना कार्यान्वित हुए बिना रह गई। यह भी भला ही हुआ क्योंकि मेरे यह निर्णय लेने के कुछ ही सप्ताह में उस गुलाब की झाड़ी में इतने फूल लगे जितने पहले मैंने कभी नहीं देखे थे। सैंकड़ों सफ़ेद बड़े फूलों, उनकी सुगंध, और उनकी सुन्दर पंखुड़ियों से हमारे घर के पिछला दरवाज़ा और आँगन भर गए।

      मेरी उस गुलाब की झाड़ी के पुनर्जीवित होने से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 13:6-9 में प्रभु यीशु द्वारा दिया गया अंजीर के वृक्ष का दृष्टांत स्मरण हो आया। उस समय इस्राएल में यह परंपरागत था कि अंजीर के वृक्ष को फल लाने के लिए तीन वर्ष का समय दिया जाए। यदि तीन वर्ष में उसमें फल नहीं आता था तो उसे काट दिया जाता था जिससे भूमि का उपयोग किया जा सके। प्रभ यीशु द्वारा दिए गए दृष्टांत में माली ने भूमि के स्वामी से उस वृक्ष के लिए एक अतिरिक्त समय माँगा, कि वह वृक्ष फल ला सके। अपने संदर्भ में (पद 1-5) इस दृष्टांत का तात्पर्य था कि इस्राएलियों ने वह नहीं किया था जो उन्हें करना चाहिए था, और परमेश्वर उनका उचित न्याय कर सकता था। परन्तु परमेश्वर धीरजवंत है, और उसने इस्राएलियों को अतिरिक्त समय दिया कि वे उसकी ओर मुड़ें, उससे क्षमा प्राप्त करें और फलवन्त हो जाएँ।

      परमेश्वर सभी लोगों के लिए चाहता है कि वे फलते-फूलते हों, और उन्हें अतिरिक्त समय भी देता है कि वे ऐसा कर सकें। चाहे हम अभी भी प्रभु यीशु में विश्वास लाने की ओर बढ़ रहे हों, या प्रभु यीशु में विश्वास नहीं करने वाले परिवार जनों और मित्रों के लिए प्रार्थना कर रहे हों, परमेश्वर का धीरजवंत होना हम सभी के लिए शुभसमाचार है। - शेरिडन वॉयसे


परमेश्वर ने सँसार को अतिरिक्त समय दिया है कि 
पापों की क्षमा के उसके प्रस्ताव के प्रति सही प्रतिक्रया दें।

और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस न भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है। - 2 पतरस 3:15

बाइबल पाठ: लूका 13:1-9
Luke 13:1 उस समय कुछ लोग आ पहुंचे, और उस से उन गलीलियों की चर्चा करने लगे, जिन का लोहू पीलातुस ने उन ही के बलिदानों के साथ मिलाया था।
Luke 13:2 यह सुन उसने उन से उत्तर में यह कहा, क्या तुम समझते हो, कि ये गलीली, और सब गलीलियों से पापी थे कि उन पर ऐसी विपत्ति पड़ी?
Luke 13:3 मैं तुम से कहता हूं, कि नहीं; परन्तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम सब भी इसी रीति से नाश होगे।
Luke 13:4 या क्या तुम समझते हो, कि वे अठारह जन जिन पर शीलोह का गुम्मट गिरा, और वे दब कर मर गए: यरूशलेम के और सब रहने वालों से अधिक अपराधी थे?
Luke 13:5 मैं तुम से कहता हूं, कि नहीं; परन्तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम भी सब इसी रीति से नाश होगे।
Luke 13:6 फिर उसने यह दृष्‍टान्‍त भी कहा, कि किसी की अंगूर की बारी में एक अंजीर का पेड़ लगा हुआ था: वह उस में फल ढूंढ़ने आया, परन्तु न पाया।
Luke 13:7 तब उसने बारी के रख वाले से कहा, देख तीन वर्ष से मैं इस अंजीर के पेड़ में फल ढूंढ़ने आता हूं, परन्तु नहीं पाता, इसे काट डाल कि यह भूमि को भी क्यों रोके रहे।
Luke 13:8 उसने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, इसे इस वर्ष तो और रहने दे; कि मैं इस के चारों ओर खोदकर खाद डालूं।
Luke 13:9 सो आगे को फले तो भला, नहीं तो उसे काट डालना।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23



शनिवार, 29 जून 2019

सहायता



      मेरी एक सहेली अपनी कार से किराने की दूकान तक जा रही थी, और उसका ध्यान मार्ग के किनारे चलती हुई एक महिला की ओर गया; मेरी सहेली के मन में विचार आया कि उसे उस महिला की सहायता करनी चाहिए और उसने उस महिला को अपनी कार में बैठाकर उसे उसके गंतव्य तक पहुँचाने की पेशकश की। मेरी सहेली को यह सुनकर दुःख हुआ कि उस महिला के पास बस में जाने के लायक पैसे नहीं थे इसलिए वह उस गर्म और उमस भरे वातावरण में कई मील पैदल चलने के लिए मजबूर थी। अब न केवल वह वापस अपने घर की लंबी यात्रा कर रही थी वरन वह सुबह चार बजे अपने काम पर पहुँचने के लिए भी ऐसे ही पैदल चलकर पहुँची थी।

      उस महिला को अपनी कार में बैठाकर मेरी सहेली ने परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब द्वारा उसकी पत्री में लिखी बात को व्यवहारिक करके दिखाया कि मसीही विश्वासियों को अपने विश्वास को अपने कर्मों के द्वारा जी कर दिखाना चाहिए: “वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्‍वभाव में मरा हुआ है” (याकूब 2:17)। याकूब यह भी चाहता था कि चर्च के लोग विधवाओं और अनाथों का भी ध्यान रखें (याकूब 1:27), और वे मात्र शब्दों द्वारा नहीं वरन प्रेम के व्यवहार और कार्यों द्वारा अपने विश्वास को प्रगट करें।

      हमें प्रभु यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा उद्धार मिला है, किन्ही कर्मों के द्वारा नहीं; और हम औरों से प्रेम का व्यवहार करके, उनकी आवश्यकताओं में उनकी सहायता करके अपने विश्वास को जी कर दिखाते हैं। मेरी सहेली के समान हम भी अपनी जीवन यात्रा में उनके प्रति अपनी आँखों को खुला रखें जिन्हें हमारी सहायता की आवश्यकता है, और उनकी सहायता करके अपने मसीही विश्वास को व्यवहारिक करें। - एमी बाउचर पाई


हम भले कर्मों के द्वारा अपने विश्वास को जी कर दिखाते हैं।

और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्तु केवल विश्वास, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है। - गलातियों 5:6

बाइबल पाठ: याकूब 2:14-26
James 2:14 हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?
James 2:15 यदि कोई भाई या बहिन नगें उघाड़े हों, और उन्हें प्रति दिन भोजन की घटी हो।
James 2:16 और तुम में से कोई उन से कहे, कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्‍त रहो; पर जो वस्तुएं देह के लिये आवश्यक हैं वह उन्हें न दे, तो क्या लाभ?
James 2:17 वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्‍वभाव में मरा हुआ है।
James 2:18 वरन कोई कह सकता है कि तुझे विश्वास है, और मैं कर्म करता हूं: तू अपना विश्वास मुझे कर्म बिना तो दिखा; और मैं अपना विश्वास अपने कर्मों के द्वारा तुझे दिखाऊंगा।
James 2:19 तुझे विश्वास है कि एक ही परमेश्वर है: तू अच्छा करता है: दुष्टात्मा भी विश्वास रखते, और थरथराते हैं।
James 2:20 पर हे निकम्मे मनुष्य क्या तू यह भी नहीं जानता, कि कर्म बिना विश्वास व्यर्थ है?
James 2:21 जब हमारे पिता इब्राहीम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्या वह कर्मों से धामिर्क न ठहरा था?
James 2:22 सो तू ने देख लिया कि विश्वास ने उस के कामों के साथ मिल कर प्रभाव डाला है और कर्मों से विश्वास सिद्ध हुआ।
James 2:23 और पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हुआ, कि इब्राहीम ने परमेश्वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया, और वह परमेश्वर का मित्र कहलाया।
James 2:24 सो तुम ने देख लिया कि मनुष्य केवल विश्वास से ही नहीं, वरन कर्मों से भी धर्मी ठहरता है।
James 2:25 वैसे ही राहाब वेश्या भी जब उसने दूतों को अपने घर में उतारा, और दूसरे मार्ग से विदा किया, तो क्या कर्मों से धामिर्क न ठहरी?
James 2:26 निदान, जैसे देह आत्मा बिना मरी हुई है वैसा ही विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43



शुक्रवार, 28 जून 2019

पूर्ण



      विश्व-विख्यात महान शिल्पकार माइकलएंजेलो की मृत्यु के समय उनके द्वारा आरम्भ की गई अनेकों शिल्प-कृतियाँ अधूरी पड़ी थीं। परन्तु उनमें से चार – The Bearded Slave, The Atlas Slave, The Awakening Slave, और The Young Slave ऐसे थे जिन्हें पूरा करने की कभी कोई योजना नहीं थी। उन्हें देखकर प्रतीत होता है कि वे अधूरी हैं, परन्तु वे वैसी ही हैं जैसा माइकलएंजेलो उन्हें दिखाना चाहता था। शिल्पकार यह दिखाना चाहता था कि हमेशा दासत्व में बने रहना कैसा अनुभव होता है।

      उन आकृतियों को जंजीरों में बंधे हुए दिखाने के स्थान पर, माइकलएंजेलो ने उन्हें संगमरमर की उन्हीं चट्टानों में फंसा हुआ दिखाया है जिनमें से उन्हें तराशा जा रहा था। उन पत्थरों में से शरीर निकलते हुए दिखते हैं, परन्तु वे पूर्णतया निकले हुए नहीं हैं। उनकी मांस-पेशियाँ कार्यशील दिखाई देती हैं परन्तु वे अपने आप को स्वतंत्र नहीं कर पा रहे हैं।

      उन दासों की प्रतिमाओं के साथ मेरी सहानुभूति तुरंत जागृत हुई। उनकी वह दशा, पाप के साथ मेरे संघर्ष में मेरी दशा से भिन्न नहीं है। उन दासों के समान, मैं भी अपने आप को पाप की प्रवृत्ति से स्वतंत्र करने नहीं पाती हूँ, उन प्रतिमाओं के समान मैं भी फंसी हुई हूँ “पाप की व्यवस्था के बन्धन में” (रोमियों 7:23)। मैं चाहे कितना भी प्रयास करूँ, मैं अपने आप को बदलने नहीं पाती हूँ। परन्तु प्रभु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि मैं और आप, हम सभी मसीही विश्वासी, पाप के साथ संघर्ष में ऐसे ही फंसे नहीं रहेंगे; ऐसी अधूरी कृतियाँ नहीं रहेंगे। हम स्वर्ग पहुँचने से पहले तो संपूर्ण नहीं होंगे, परन्तु स्वर्ग पहुँचने तक परमेश्वर हम में कार्य कर रहा है और अपने आत्मा के द्वारा हमने अंश अंश करके हमारे प्रभु यीशु मसीह के स्वरूप में ढालता जा रहा है। प्रभु परमेश्वर का हमसे वायदा है कि उसने हम में जो अच्छा काम आरम्भ किया है, वह उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा (फिलिप्पियों 1:6), हमें पूर्ण करेगा। - एमी पीटरसन


हम मिट्टी हैं, और वह कुम्हार है।

...तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: रोमियों 7:14-25
Romans 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शरीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।
Romans 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।
Romans 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।
Romans 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
Romans 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।
Romans 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।
Romans 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।
Romans 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।
Romans 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
Romans 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13
  • प्रेरितों 9:1-21



गुरुवार, 27 जून 2019

प्रार्थना



      प्रार्थना करना परमेश्वर के साथ संवाद करना है, किसी सूत्र या औपचारिकता का निर्वाह करना नहीं। किन्तु फिर भी कभी-कभी हमें अपने प्रार्थना के समय को तरोताज़ा करने के लिए किसी “विधि” की आवश्यकता पड़ती है। हम परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन संहिता का या किसी अन्य भाग, जैसे कि प्रभु की प्रार्थना का उपयोग कर सकते हैं; या फिर हम ACTS विधि – Adoration (आराधना), Confession (अंगीकार), Thanksgiving (धन्यवाद), तथा Supplication (विनती) का भी प्रयोग कर सकते हैं। हाल ही में मैंने औरों के लिए प्रार्थना में सहायता के लिए इस “पाँच ऊँगली विधि” के बारे में जाना:
·         जब आप दोनों हाथ मिलाकर जोड़ते हो, तो आपके हाथों के अंगूठे आपके सबसे निकट होते हैं। इसलिए अपने निकट जनों के लिए प्रार्थना के साथ आरंभ करें (फिलिप्पियों 1:3-5)।
·         अगली उँगली तर्जनी है, जो दिशा संकेत देती है। उनके लिए प्रार्थना करें जो शिक्षा प्रदान करते हैं, बाइबल शिक्षक और प्रचारक, और वे जो बच्चों को सिखाते हैं (1 थिस्सलुनीकियों 5:25)।
·         इससे अगली उँगली सबसे लंबी होती है। उनके लिए प्रार्थना करें जो आपके ऊपर अधिकारी हैं – राष्ट्रीय और स्थानीय अगुवे एवँ अधिकारी, और कार्यस्थल पर आपके पर्वेक्षक (1 तिमुथियुस 2:1-2)।
·         चौथी उँगली सामान्यतः सबसे दुर्बल होती है। उनके लिए प्रार्थना करें जो परेशानियों में हैं या दुखों में पड़े हैं (याकूब 5:13-16)।
·         फिर आती है छोटी ऊँगली जो परमेश्वर की महानता के सामने आपके ‘कद’ की सूचक है। परमेश्वर से मांगें कि वह आपकी आवश्यकताओं की पूर्ति करे (फिलिप्पियों 4:6, 19)।

      प्रार्थना के लिए आप कोई भी विधि क्यों न प्रयोग करें, परन्तु परमेश्वर पिता से बातें अवश्य करें। वह आपके मन की बात को सुनना चाहता है। - ऐनी सेटास


प्रार्थना में महत्व हमारे शब्दों का नहीं है; हमारी मनोदशा का है।

निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:17

बाइबल पाठ: याकूब 5:13-18
James 5:13 यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्‍दित हो, तो वह स्‍तुति के भजन गाए।
James 5:14 यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें।
James 5:15 और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठा कर खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप भी किए हों, तो उन की भी क्षमा हो जाएगी।
James 5:16 इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।
James 5:17 एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उसने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा।
James 5:18 फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 8-10
  • प्रेरितों 8:26-40



बुधवार, 26 जून 2019

स्वरूप



      कभी-कभी कुछ दिन ऐसे होते हैं जिनमें एक विषय से संबंधित बातें होती चली जाती हैं। हाल ही में मैंने एक ऐसे ही दिन का अनुभव किया। हमारे पास्टर ने उत्पत्ति 1 अध्याय पर अपने सन्देश का आरंभ फूलों को खिलते हुए दिखाने वाली विस्मयकारी फोटोग्राफी को दिखाने के साथ किया। फिर जब मैं घर पर सोशल मीडिया पर आए संदेशों को देख रही थी तो उन संदेशों में बहुतेरे फूलों से संबंधित थे। बाद में जब मैं टहलने के लिए जंगल की ओर निकली तो वहाँ अनगिनित, अनेकों प्रकार के फूल खिले हुए थे और उनकी छटा देखते ही बनती थी।

      परमेश्वर ने भूमि, फूल और अनेकों प्रकार की वनस्पति को सृष्टि के तीसरे दिन बनाया, और उस दिन में दो बार उसने अपनी रचना को “अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:10, 12)। सृष्टि की रचना के वृतान्त में केवल एक अन्य दिन – छठे दिन में, परमेश्वर ने “अच्छा” दो बार कहा (पद 25, 31)। उस छठे दिन, जब परमेश्वर ने मनुष्य को, जो उसकी सबसे उत्कृष्ठ रचना है, सृजा तो उसके बाद उसने अपनी बनाई समस्त सृष्टि को देखा कि “वह बहुत ही अच्छी है।”

      सृष्टि की रचना के वृतान्त में, हम सृष्टिकर्ता परमेश्वर को देखते हैं जो अपनी सृष्टि से आनन्दित होता है – और सृष्टि करने के कार्य में आनन्दित होता है। अन्यथा इतनी अद्भुत रंगीनी और विविधता वाले सँसार को क्यों बनाया गया? उसने अपने सर्वोत्तम कार्य को अन्त के लिए रख छोड़ा, जब उसने मनुष्य की रचना अपने स्वरूप में की (पद 27)। परमेश्वर के स्वरूप में होने के नाते हम उसकी सुन्दर हस्तकला द्वारा आशीषित और प्रेरित हैं। - एलीसन कीडा


समस्त सृष्टि पर परमेश्वर की छाप विद्यमान है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन19:1

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:24-31
Genesis 1:24 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:25 सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
Genesis 1:26 फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।
Genesis 1:27 तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की।
Genesis 1:28 और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओं पर अधिकार रखो।
Genesis 1:29 फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं:
Genesis 1:30 और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:31 तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 5-7
  • प्रेरितों 8:1-25



मंगलवार, 25 जून 2019

वचन



      हमारा बेटा ज़ेवियर अभी छोटा ही था जब हम एक समुद्री जीवों के अजायबघर में गए। जब हमने उस भवन में प्रवेश किया तो सामने ही छत से एक विशाल प्रतिमा लटकी हुई थी, और मैंने उसकी ओर संकेत करते हुए ज़ेवियर से कहा, “देखो, वह हम्पबैक व्हेल मछली है।” उसके आकार को देखकर अचरज से ज़ेवियर की आँखें फैल गईं और वह बोला “विशालकाय!”

      मेरे पति ने मेरी ओर मुड़कर कहा, “यह इस शब्द को कैसे जानता है?”

      मैंने भी अचरज से कंधे झटकते हुए कहा, “शायद उसने हमें इस शब्द को प्रयोग करते हुए सुना होगा;” मैं चकित थी कि हमारे छोटे से बच्चे ने अनजाने में ही वह शब्द सुनकर सीख लिया था, जबकि हम नें उसे वह शब्द कभी सिखाया नहीं था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में व्यवस्थाविवरण 6 अध्याय में परमेश्वर ने अपने लोगों से कहा कि वे ध्यान देकर अपनी युवा और आने वाली पीढ़ियों को उसके पवित्र-शास्त्र को सीखने और मानने की शिक्षा दें। जैसे-जैसे इस्राएली परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ेंगे, वैसे-वैसे वे स्वयँ और उनके बच्चे परमेश्वर के प्रति श्रद्धा और आज्ञाकारिता में बढ़ते जाएँगे, और परमेश्वर को निकटता से जानने, उससे संपूर्ण हृदय से प्रेम करने, और आज्ञाकारिता के साथ उसका अनुसरण करने से मिलने वाले प्रतिफलों का आनन्द लेने पाएँगे (पद 2-5)।

      अपने मन और मस्तिष्क को परमेश्वर के वचन से भर लेने (पद 6) से, हम परमेश्वर के प्रेम और सत्य को अपने बच्चों के साथ, उनके दैनिक जीवन की गतिविधियों में, और अधिक भली रीति से समझाने सिखाने पाएँगे (पद 7)। इस प्रकार से उदाहरण बनके उनकी अगुवाई करने के द्वारा हम अपने जवानों को प्रोत्साहित तथा तैयार कर सकते हैं कि वे परमेश्वर के कभी न बदलने वाले वचन के सत्यों पहचानें और अपने जीवनों में उन वचनों को योग्य आदर प्रदान करें (पद 8-9)।

      जब परमेश्वर का वचन हमारे मन और मुख से स्वाभाविक रीति से प्रवाह करेगा, हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए उस वचन पर आधारित विश्वास की प्रबल और दृढ़ धरोहर को छोड़ने पाएँगे। - जोशील डिक्सन


जो शब्द हम अपने अन्दर लेते हैं, वे ही निर्धारित करते हैं कि हम क्या बोलेंगे, 
कैसे व्यवहार करेंगे, और अपने आस-पास वालों के साथ क्या बाँटेंगे।

तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है; और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती। - भजन 119:165

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो;
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 3-4
  • प्रेरितों 7:44-60