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रविवार, 30 अगस्त 2020

नींव

 

         अपने घर में कई वर्ष रहने के पश्चात मेरे मित्रों को पता पड़ा कि उनके घर की बैठक धीरे-धीरे धंसती जा रही है – दीवारों में दरारें आ गई थीं, और खिड़कियाँ खुल नहीं रही थीं। जाँच करने पर पता चला कि वह कमरा बाद में बनाया गया था, और उसे बिना नींव डाले ही बना दिया गया था। उस गलत और कामचलाऊ निर्माण कार्य को सुधारने के लिए लंबा समय लगा, नई नींव खोदनी और डालनी पड़ी और उसके बाद उस पर फिर से बैठक को बनाया गया। जब कार्य पूरा हो गया, तब मैं फिर से उनके घर गई, परन्तु मुझे वह बैठक पहले जैसी ही लगी, बस अब दरारें नहीं थीं, और खिड़की ठीक से खुलती और बन्द होती थी। मैं समझ गई, अच्छी नींव का होना बहुत आवश्यक है।

         यही हमारे जीवनों के लिए भी सत्य है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने मूर्ख और बुद्धिमान घर बनाने वालों की एक नीति-कथा सुनाई थी, उनकी बातों को न मानने की मूर्खता को समझाने के लिए (लूका 6:46-49)। वे जो उनकी बातें सुनकर उन्हें मानते हैं, उनका पालन करते हैं, वे उस बुद्धिमान व्यक्ति के समान हैं जिसने अपना घर एक दृढ़ नींव पर बनाया; और जो प्रभु की बातों को सुनकर उनकी अवहेलना कर देते हैं, वे मूर्ख व्यक्ति के समान हैं जिसने मिट्टी पर बिना नेव का घर बनाया। प्रभु यीशु ने बुद्धिमान व्यक्तियों को आश्वस्त किया कि जब उन्हें जीवन की आँधियों का सामना करना पड़ेगा, तो उनका जीवन स्थिर बना रहेगा, उनका विश्वास स्थिर रहेगा, क्योंकि वह अटल नींव पर खड़ा है।

         हम इस बात में शान्ति और आश्वासन पा सकते हैं कि जब हम प्रभु यीशु के वचनों को सुनते और उनका पालन करते हैं, तो यह हमारे जीवनों को एक दृढ़ नींव प्रदान करता है। हम बाइबल को पढ़ने, प्रार्थना करने, और अन्य मसीही विश्वासियों से शिक्षा लेने के द्वारा उसके प्रति अपने प्रेम को और बढ़ा सकते हैं, और दृढ़ कर सकते हैं। तब, जब भी विश्वास-घात, दुःख, या निराशाओं आदि की आँधियाँ हमारे विरुद्ध आएंगी, वे हमें हिला नहीं सकेंगी, क्योंकि हम दृढ़ और अटल नींव, प्रभु यीशु के वचन पर स्थापित हैं। हमारा उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर हमें वह आवश्यक सहारा प्रदान करेगा। - एमी बाउचर पाई

 

प्रभु यीशु कि सुनना और उसकी बातों को मानना 

हमारे जीवनों को एक दृढ़ नींव प्रदान करता है।


क्योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। - 1 कुरिन्थियों 3:11

बाइबल पाठ: लूका 6:46-49

लूका 6:46 जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो?

लूका 6:47 जो कोई मेरे पास आता है, और मेरी बातें सुनकर उन्हें मानता है, मैं तुम्हें बताता हूं कि वह किस के समान है

लूका 6:48 वह उस मनुष्य के समान है, जिसने घर बनाते समय भूमि गहरी खोदकर चट्टान की नेव डाली, और जब बाढ़ आई तो धारा उस घर पर लगी, परन्तु उसे हिला न सकी; क्योंकि वह पक्का बना था।

लूका 6:49 परन्तु जो सुनकर नहीं मानता, वह उस मनुष्य के समान है, जिसने मिट्टी पर बिना नेव का घर बनाया। जब उस पर धारा लगी, तो वह तुरन्त गिर पड़ा, और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 129-131
  • 1 कुरिन्थियों 11:1-16

शनिवार, 29 अगस्त 2020

प्रेमी पिता

 

         अपनी युवावस्था में, जैसा कि इस आयु में सामान्यतः होता है, मैं भी अपनी माँ की आज्ञाओं के विरुद्ध विद्रोह करने के समय से निकल चुकी हूँ। मेरा पिता का देहांत मेरे किशोरावस्था में प्रवेश करने से पहले ही हो चुका था, इसलिए मेरी माँ को अकेले ही मेरी परवरिश करनी पड़ी और मेरी उस आयु की बातों को संभालना पड़ा। मुझे ध्यान है कि मैं समझती थी कि माँ नहीं चाहती कि मैं कुछ मज़े लूँ – और यह भी कि शायद वह मुझसे प्रेम भी नहीं करती थी – क्योंकि वह अकसर मेरी बातों के लिए मना कर देती थी। लेकिन अब मैं समझ सकती हूँ कि जिन बातों के लिए वो मना करती थीं, वो बातें मेरे लिए अच्छी नहीं थीं, और वो मना भी इसीलिए करती थीं क्योंकि वो मुझसे प्रेम करती थीं।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में इस्राएलियों ने भी उनकी बेबीलोन की बंधुवाई को लेकर उनके प्रति परमेश्वर के प्रेम पर प्रश्न किए। परन्तु उनकी वह बंधुवाई परमेश्वर द्वारा उनके निरंतर उसके विरोध में होकर चलने और कार्य करने के लिए थी, जिससे वे इस्राएली शिक्षा ले सकें। अब, परमेश्वर ने उन्हें समझाने के लिए अपने भविष्यद्वक्ता मलाकी को उनके पास भेजा, और उसके द्वारा परमेश्वर की ओर से उन इस्राएलियों से कहे गए आरंभिक शब्द थे, मैंने तुमसे प्रेम किया है” (मलाकी 1:2)। इस्राएलियों ने ताना मारने के भाव के साथ पूछा कि कैसे परमेश्वर उनसे प्रेम करता है; उनके कहने का अभिप्राय था, “अच्छा! सच में?” और परमेश्वर ने मलाकी में होकर उन्हें स्मरण करवाया कि उसने उन लोगों को एदोमियों के ऊपर चुनने के द्वारा उनके प्रति अपने प्रेम को दिखाया है।

         हम सभी जीवन में कठिन समयों से होकर निकलते हैं। उन कठिन समयों में हमारे सामने परमेश्वर और उसके प्रेम पर संदेह करने का प्रलोभन होता है। ऐसे में हम उन समयों को स्मरण करें जब परमेश्वर ने हमारे प्रति अपने कभी कम न होने और कभी न बदलने वाले प्रेम को दिखाया है। जब हम थोड़ा थम कर उसकी भलाई और कृपा को स्मरण करते हैं, तो हम पाते हैं कि वह निःसंदेह हमारा प्रेमी पिता है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

हमारा स्वर्गीय पिता हमें सुधरता भी है और सांत्वना भी देता है।


और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों के समान दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़। क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता? - इब्रानियों 12:5–7


बाइबल पाठ: मलाकी 1:1-5

मलाकी 1:1 मलाकी के द्वारा इस्राएल के विषय में कहा हुआ यहोवा का भारी वचन।

मलाकी 1:2 यहोवा यह कहता है, मैं ने तुम से प्रेम किया है, परन्तु तुम पूछते हो, तू ने किस बात में हम से प्रेम किया है? यहोवा की यह वाणी है, क्या ऐसाव याकूब का भाई न था?

मलाकी 1:3 तौभी मैं ने याकूब से प्रेम किया परन्तु ऐसाव को अप्रिय जान कर उसके पहाड़ों को उजाड़ डाला, और उसकी बपौती को जंगल के गीदड़ों का कर दिया है।

मलाकी 1:4 एदोम कहता है, हमारा देश उजड़ गया है, परन्तु हम खण्डहरों को फिर कर बसाएंगे; सेनाओं का यहोवा यों कहता है, यदि वे बनाए भी, परन्तु मैं ढा दूंगा; उनका नाम दुष्ट जाति पड़ेगा, और वे ऐसे लोग कहलाएंगे जिन पर यहोवा सदैव क्रोधित रहे।

मलाकी 1:5 तुम्हारी आंखें इसे देखेंगी, और तुम कहोगे, यहोवा का प्रताप इस्राएल के सिवाने की परली ओर भी बढ़ता जाए।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 126-128
  • 1 कुरिन्थियों 10:19-33

शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

विश्वासयोग्य

 

         मैं जब किशोरावस्था में था, और जब मेरी माँ मुझे परमेश्वर में विश्वास रखने के लिए प्रोत्साहित करती थी, और कहती थी “परमेश्वर में विश्वास रखो। वह तुम्हारी सहायता करेगा” तो कभी-कभी मैं पलटकर कहता था, “अरे माँ, यह इतनी सीधी बात नहीं है! परमेश्वर भी उन्हीं की सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करने का प्रयास करते हैं।”

         परन्तु ये शब्द, “परमेश्वर भी उन्हीं की सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करने का प्रयास करते हैं” परमेश्वर के वचन बाइबल में कहीं नहीं पाए जाते हैं। वरन परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि हम अपने दैनिक आवश्यकताओं के लिए उस पर निर्भर रहना सीखें। प्रभु यीशु ने कहा, आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। तुम में कौन है, जो चिन्ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है” (मत्ती 6:26-27)।

         हम जिन भी बातों का आनन्द लेते हैं – यहाँ तक कि अपना जीवन यापन करने तथा अपनी सहायता कर पाने की हमारी सामर्थ्य, सब परमेश्वर से मिले उपहार हैं जो हम से असीम प्रेम करता है।

         मेरी माँ के जीवन के अन्त के दिनों में उन्हें एलज्हाइमर रोग हो गया, जिससे मानसिक तथा स्मरण शक्ति जाती रहती है, और उनकी भी रचनात्मक कार्यों की क्षमता और स्मृति जाती रही, परन्तु परमेश्वर में उनका विश्वास बना रहा। वे हमारे साथ हमारे घर में रहीं, और मुझे प्रत्यक्ष देखने का अवसर मिला कि कैसे परमेश्वर अद्भुत और अनपेक्षित तरीकों से उनकी आवश्यकताओं को पूरा करता रहा, जिससे मुझे यह समझने और मानने का अवसर मिला कि सदा से उनकी बात ही सही थी। चिंता करने की बजाए उन्होंने अपने आप को उसके भरोसे छोड़ दिया था जिसने उनकी देखभाल करने का वायदा किया था – और प्रभु परमेश्वर विश्वासयोग्य प्रमाणित हुआ। - जेम्स बैंक्स

 

कल की चिंता न करें – परमेश्वर वहाँ पहले ही से उपस्थित है।


इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस पर मैंने विश्वास किया है, जानता हूं; और मुझे निश्चय है, कि वह मेरी धरोहर की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तीमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34

मत्ती 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्र से बढ़कर नहीं?

मत्ती 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय  पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।

मत्ती 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है

मत्ती 6:28 और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता  करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।

मत्ती 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्त्र पहने हुए न था।

मत्ती 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहनाता है, तो हे अल्प-विश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहनाएगा?

मत्ती 6:31 इसलिये तुम चिन्ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहनेंगे?

मत्ती 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।

मत्ती 6:33 इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।

मत्ती 6:34 सो कल के लिये चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 123-125
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18

गुरुवार, 27 अगस्त 2020

सेवा

 

         शिक्षा मनोवैज्ञानिक बेंजामिन ब्लूम ने जवान लोगों में प्रतिभा को विकसित करने पर शोध किया, और 120 उत्कृष्ट लोगों, जिनमें खिलाड़ी, कलाकार, विद्वान सम्मिलित थे, के बचपन का अध्ययन किया तो उसने पाया कि उन सभी में एक बात पाई जाती थी – उन्होंने अपने कार्य के लिए लम्बे समय तक कड़ा अभ्यास किया था।

         ब्लूम के शोध से यह संकेत मिलता है कि हमारे जीवन के किसी भी क्षेत्र में उन्नति करने के लिए हमें अनुशासित होना पड़ता है। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में भी एक आत्मिक अनुशासन की आवश्यकता होती है, और उसके साथ नियमित समय बिताना, उसके वचन के अध्ययन और प्रार्थना में, उसमें हमारे विश्वास को बनाए रखने का एक तरीका है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में दानिय्येल एक उत्तम उदाहरण है परमेश्वर के साथ अनुशासित संबंध को बनाए रखने वाले व्यक्ति का। अपने लड़कपन में ही दानिय्येल ने सोच-समझ कर और बुद्धिमानी के साथ निर्णय लेने आरंभ कर दिया था (1:8)। वह नियमित प्रार्थना करने वाला, और परमेश्वर को धन्यवाद करने वाला व्यक्ति भी था (6:10)। उसके बारंबार हर बात के लिए परमेश्वर और उसकी इच्छा का खोजी होने के द्वारा उसका जीवन ऐसा हो गया था कि उसके आस-पास के लोग परमेश्वर में उसके विश्वास को स्पष्ट देख सकते थे। दारा राजा ने तो उसे “जीवित परमेश्वर का दास” (पद 20) और दो बार “निरंतर” परमेश्वर की सेवा करने वाला कहा था (पद 16, 20)।

         दानिय्येल के समान हमें भी परमेश्वर को भली-भांति जानना बहुत आवश्यक है। यह कितनी दिलासा देने वाली बात है कि परमेश्वर हम में ऐसे कार्य करता है जिससे हम में उसके साथ समय बिताने की लालसा उत्पन्न हो सके (फिलिप्पियों 2:13)। इसलिए हम परमेश्वर के पास अनुशासित होकर नियमित आया करें, इस बात पर भरोसा रखते हुए कि उसके साथ बिताए गए समय के द्वारा हम में उसके प्रति प्रेम बढ़ता जाएगा, और हम अपने उद्धारकर्ता के ज्ञान और समझ में बढ़ते जाएँगे, जो फिर परमेश्वर के लिए हमारी सेवा को भी और उन्नत करता जाएगा। - कीला ओकोआ

 

परमेश्वर के साथ बिताया गया समय हमें बदल देता है।


क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है। - फिलिप्पियों 2:13

बाइबल पाठ: दानिय्येल 6:10-22

दानिय्येल 6:10 जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के सामने घुटने टेक कर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा।

दानिय्येल 6:11 तब उन पुरुषों ने उतावली से आकर दानिय्येल को अपने परमेश्वर के सामने बिनती करते और गिड़गिड़ाते हुए पाया।

दानिय्येल 6:12 सो वे राजा के पास जा कर, उसकी राज-आज्ञा के विषय में उस से कहने लगे, हे राजा, क्या तू ने ऐसे आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया कि तीस दिन तक जो कोई तुझे छोड़ किसी मनुष्य या देवता से बिनती करेगा, वह सिंहों की माँद में डाल दिया जाएगा? राजा ने उत्तर दिया, हां, मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार यह बात स्थिर है।

दानिय्येल 6:13 तब उन्होंने राजा से कहा, यहूदी बंधुओं में से जो दानिय्येल है, उसने, हे राजा, न तो तेरी ओर कुछ ध्यान दिया, और न तेरे हस्ताक्षर किए हुए आज्ञापत्र की ओर; वह दिन में तीन बार बिनती किया करता है।

दानिय्येल 6:14 यह वचन सुनकर, राजा बहुत उदास हुआ, और दानिय्येल के बचाने के उपाय सोचने लगा; और सूर्य के अस्त होने तक उसके बचाने का यत्न करता रहा।

दानिय्येल 6:15 तब वे पुरुष राजा के पास उतावली से आकर कहने लगे, हे राजा, यह जान रख, कि मादियों और फारसियों में यह व्यवस्था है कि जो जो मनाही या आज्ञा राजा ठहराए, वह नहीं बदल सकती।

दानिय्येल 6:16 तब राजा ने आज्ञा दी, और दानिय्येल लाकर सिंहों की माँद में डाल दिया गया। उस समय राजा ने दानिय्येल से कहा, तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, वही तुझे बचाए!

दानिय्येल 6:17 तब एक पत्थर लाकर उस गड़हे के मुंह पर रखा गया, और राजा ने उस पर अपनी अंगूठी से, और अपने प्रधानों की अंगूठियों से मुहर लगा दी कि दानिय्येल के विषय में कुछ बदलने ने पाए।

दानिय्येल 6:18 तब राजा अपने महल में चला गया, और उस रात को बिना भोजन पड़ा रहा; और उसके पास सुख विलास की कोई वस्तु नहीं पहुंचाई गई, और उसे नींद भी नहीं आई।

दानिय्येल 6:19 भोर को पौ फटते ही राजा उठा, और सिंहों के गड़हे की ओर फुर्ती से चला गया।

दानिय्येल 6:20 जब राजा गड़हे के निकट आया, तब शोक भरी वाणी से चिल्लाने लगा और दानिय्येल से कहा, हे दानिय्येल, हे जीवते परमेश्वर के दास, क्या तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, तुझे सिंहों से बचा सका है?

दानिय्येल 6:21 तब दानिय्येल ने राजा से कहा, हे राजा, तू युग-युग जीवित रहे!

दानिय्येल 6:22 मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेज कर सिंहों के मुंह को ऐसा बन्द कर रखा कि उन्होंने मेरी कुछ भी हानि नहीं की; इसका कारण यह है, कि मैं उसके सामने निर्दोष पाया गया; और हे राजा, तेरे सम्मुख भी मैं ने कोई भूल नहीं की।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 120-122
  • 1 कुरिन्थियों 9

बुधवार, 26 अगस्त 2020

बढ़


         लोगों में सुलह करने विषय पर आयोजित एक वार्ता में एक बुद्धिमान भाग लेने वाले ने कहा कि हम “लोगों को समय में जमा न दिया करें,” अर्थात कुछ पुरानी बातों ही के द्वारा उन्हें सदा स्मरण न करते रहें। उसने समझाया कि यह हमारी प्रवृत्ति होती है कि हम लोगों द्वारा की गई गलतियों को स्मरण रखते हैं, और उन्हें कभी बदलने और उन गलतियों से आगे बढ़ने, सुधरने का अवसर ही नहीं देते हैं।

         हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि प्रभु यीशु के शिष्य पतरस के जीवन में अनेकों ऐसे अवसर आए थे जब परमेश्वर उसे ‘समय में जमा सकता था; परन्तु परमेश्वर ने ऐसा कभी नहीं किया। उस आवेशपूर्ण शिष्य पतरस ने प्रभु यीशु को भी “सुधारने” का प्रयास किया था, जिसके लिए उसे प्रभु यीशु से तीखी डांट भी खानी पड़ी थी (मत्ती 16:21-23)। वह प्रभु यीशु का इनकार करने के लिए भी विख्यात है (यूहन्ना 18:15-27); परन्तु प्रभु ने उसे फिर से बहाल भी कर दिया (21:15-19)। और फिर उसने एक बार चर्च में जातीय भेद-भाव को लाने में भी सहयोग दिया।

         यह अंतिम बात तब हुई जब पतरस ने, जो कैफा भी कहलाता था, अपने आप को गैर-यहूदियों से पृथक कर लिया था (गलातियों 2:11-12)। अभी हाल तक तो वह उनके साथ स्वतंत्र होकर मेल-जोल रखता था। फिर कुछ यहूदी आए, जो इस बात पर जोर देने लगे कि मसीही विश्वासियों के लिए भी खतना करवाना अनिवार्य है, और उनके आने पर पतरस अपने आप को खतना-रहित गैर-यहूदियों से पृथक रखने लग गया। यह मूसा की व्यवस्था की ओर लौटना था, और चर्च की एकता के लिए खतरे की घंटी का बजना था। तभी पौलुस भी वहाँ आया, और उसने पतरस के इस व्यवहार को सबके सामने चुनौती दी, और उसे “कपट” कहा (पद 13)। पौलुस द्वारा उठाए गए इस निर्भीक कदम के कारण, इस बात का समाधान हो गया। और इसके बाद पतरस ने परमेश्वर की सेवा उस मनोहर एक-मनता के साथ की, जो परमेश्वर हम से चाहता है।

         किसी को भी अपने बुरे समयों में ‘जम जाने या फंसे रह जाने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर के अनुग्रह में होकर हम एक दूसरे को गले लगा सकते हैं, एक दूसरे से सीख सकते हैं, और आवश्यक होने पर एक-दूसरे को सुधार भी सकते हैं, और इस प्रकार मसीह यीशु के प्रेम में साथ-साथ बढ़ सकते हैं। - टिम गुस्ताफसन

 

यदि हम किसी का सामना करें, तो हमारा एक ही उद्देश्य होना चाहिए

उसे पुनःस्थापित करना, न कि लज्जित करना। - चक स्विनडौल


हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। -  गलातियों 6:1-2

 बाइबल पाठ: गलतियों 2:11-16

गलतियों 2:11 पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका सामना किया, क्योंकि वह दोषी ठहरा था।

गलतियों 2:12 इसलिये कि याकूब की ओर से कितने लोगों के आने से पहिले वह अन्यजातियों के साथ खाया करता था, परन्तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उन से हट गया और किनारा करने लगा।

गलतियों 2:13 और उसके साथ शेष यहूदियों ने भी कपट किया, यहां तक कि बरनबास भी उन के कपट में पड़ गया।

गलतियों 2:14 पर जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैं ने सब के सामने कैफा से कहा; कि जब तू यहूदी हो कर अन्यजातियों के समान चलता है, और यहूदियों के समान नहीं तो तू अन्यजातियों को यहूदियों के समान चलने को क्यों कहता है?

गलतियों 2:15 हम जो जन्म के यहूदी हैं, और पापी अन्यजातियों में से नहीं।

गलतियों 2:16 तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 119:89-176
  • 1 कुरिन्थियों 8

मंगलवार, 25 अगस्त 2020

उदार


         हमारे चर्च के अगुवों ने, हमारे चर्च के इतिहास में जो कुछ परमेश्वर ने किया था, उसे दोहराने के पश्चात, चर्च समुदाय के सामने एक नए जिम को बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसके द्वारा वे हमारे समुदाय की सेवा और अच्छे से करने पाएँगे। उन अगुवों ने यह भी कहा कि उस निर्माण-कार्य के लिए धन दान करने के प्रतिज्ञा-पत्रों पर सबसे पहले वे लोग हस्ताक्षर करेंगे। इस आवश्यकता के लिए अपनी ओर से देने के लिए मैंने पहले तो मन मारकर प्रार्थना की, मैं नहीं चाहती थी कि हम पहले से ही जो चर्च को देने का निर्णय ले चुके थे, उससे अधिक कुछ दें। फिर भी मैंने तथा मेरे पति ने इस निर्माण कार्य के लिए प्रार्थना करने का फैसला लिया। परमेश्वर जो कुछ हमारे लिए करता आ रहा था, जो कुछ देता आ रहा था, उस सब को ध्यान में रखते हुए हमने प्रति माह कुछ देते रहने का निर्णय लिया। हमारे चर्च-परिवार द्वारा दी गई संयुक्त भेंटों ने उस नए भवन को बनाने के लिए आवश्यक धान-राशि को उपलब्ध करवा दिया।

         हम आभारी हैं कि उसके बन जाने के बाद से परमेश्वर ने उस जिम को कैसे समुदाय के कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए विभिन्न प्रकार से उपयोग किया है। इससे मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में एक अन्य उदार दानी – राजा दाऊद का ध्यान आता है। यद्यपि परमेश्वर ने उसे अपना मंदिर बनवाने के लिए नहीं चुना था, फिर भी दाऊद ने उसके पास उपलब्ध सभी संसाधनों को इस परियोजना में लगा दिया (1 इतिहास 29:1-5)। उसके अधीन कार्य करने वाले अगुवों,और उन लोगों ने भी जिनकी वे सेवा करते थे, उदारता से दिया (पद 6-9)। राजा ने स्वीकार किया कि उन्होंने जो कुछ भी दिया था, वह सब पहले उन्हें परमेश्वर ने दिया था – उसने जो सृष्टिकर्ता, पालनहार, और प्रत्येक वस्तु का स्वामी है (पद 10-16)।

         जब हम यह पहचान लेते हैं कि परमेश्वर ही सभी वस्तुओं का वास्तविक स्वामी है, तो फिर हमारे लिए उदारता, कृतज्ञता, और विश्वासयोग्यता के साथ औरों की भलाई के लिए देना सहज हो जाता है। और साथ ही हम यह भी विश्वास रख सकते हैं कि हमारी आवश्यकता के समय में परमेश्वर हमारे लिए प्रावधान करेगा, और अन्य लोगों की उदारता का हमारे लिए प्रयोग करेगा। - होकिटिल डिक्सन

 

परमेश्वर पहले देता है, और वह सबसे उदार देने वाले से भी कहीं अधिक दे देता है।


सो जैसे हर बात में अर्थात विश्वास, वचन, ज्ञान और सब प्रकार के यत्‍न में, और उस प्रेम में, जो हम से रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी बढ़ते जाओ। - 2 कुरिन्थियों 8:7

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 29:1-14

1 इतिहास 29:1 फिर राजा दाऊद ने सारी सभा से कहा, मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार लड़का है, और केवल उसी को परमेश्वर ने चुना है; काम तो भारी है, क्योंकि यह भवन मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा परमेश्वर के लिये बनेगा।

1 इतिहास 29:2 मैं ने तो अपनी शक्ति भर, अपने परमेश्वर के भवन के निमित्त सोने की वस्तुओं के लिये सोना, चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, पीतल की वस्तुओं के लिये पीतल, लोहे की वस्तुओं के लिये लोहा, और लकड़ी की वस्तुओं के लिये लकड़ी, और सुलैमानी पत्थर, और जड़ने के योग्य मणि, और पच्ची के काम के लिये रंग रंग के नग, और सब भांति के मणि और बहुत संगमरमर इकट्ठा किया है।

1 इतिहास 29:3 फिर मेरा मन अपने परमेश्वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैं ने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सब से अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चान्दी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्वर के भवन के लिये दे देता हूँ।

1 इतिहास 29:4 अर्थात तीन हजार किक्कार ओपीर का सोना, और सात हजार किक्कार तपाई हुई चान्दी, जिस से कोठरियों की भीतें मढ़ी जाएं।

1 इतिहास 29:5 और सोने की वस्तुओं के लिये सोना, और चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, और कारीगरों से बनाने वाले सब प्रकार के काम के लिये मैं उसे देता हूँ। और कौन अपनी इच्छा से यहोवा के लिये अपने को अर्पण कर देता है?

1 इतिहास 29:6 तब पितृों के घरानों के प्रधानों और इस्राएल के गोत्रों के हाकिमों और सहस्रपतियों और शतपतियों और राजा के काम के अधिकारियों ने अपनी अपनी इच्छा से,

1 इतिहास 29:7 परमेश्वर के भवन के काम के लिये पांच हजार किक्कार और दस हजार दर्कनोन सोना, दस हजार किक्कार चान्दी, अठारह हजार किक्कार पीतल, और एक लाख किक्कार लोहा दे दिया।

1 इतिहास 29:8 और जिनके पास मणि थे, उन्होंने उन्हें यहोवा के भवन के खजाने के लिये गेर्शोनी यहीएल के हाथ में दे दिया।

1 इतिहास 29:9 तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न हो कर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ।

1 इतिहास 29:10 तब दाऊद ने सारी सभा के सम्मुख यहोवा का धन्यवाद किया, और दाऊद ने कहा, हे यहोवा! हे हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्वर! अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है।

1 इतिहास 29:11 हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है।

1 इतिहास 29:12 धन और महिमा तेरी ओर से मिलती हैं, और तू सभों के ऊपर प्रभुता करता है। सामर्थ्य और पराक्रम तेरे ही हाथ में हैं, और सब लोगों को बढ़ाना और बल देना तेरे हाथ में है।

1 इतिहास 29:13 इसलिये अब हे हमारे परमेश्वर! हम तेरा धन्यवाद और तेरे महिमायुक्त नाम की स्तुति करते हैं।

 1 इतिहास 29:14 मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 119:1-88
  • 1 कुरिन्थियों 7:20-40

सोमवार, 24 अगस्त 2020

देखना


          मैं एक महिला के अंतिम संस्कार में मंच पर से प्रार्थना करने वालों के साथ खड़ी थी, मेरी दृष्टि एक पीतल की पट्टिका पर गई, जिसपर परमेश्वर के वचन बाइबल में से यूहन्ना 12:21 के कुछ शब्द लिखे थे: “श्रीमान, हम यीशु से भेंट करना चाहते हैं।” मैंने सोचा यह कितना उपयुक्त है; हम जिस महिला के जीवन को आँसुओं और मुस्कानों के साथ स्मरण कर रहे थे उसमें हमने प्रभु यीशु को किस प्रकार से देखा था? उसे अपने जीवन में चुनौतियों और निराशाओं से जूझना पड़ा था, परन्तु उसने कभी मसीह यीशु में अपने विश्वास को नहीं छोड़ा। और क्योंकि परमेश्वर का आत्मा उसमें निवास करता था, इसलिए हम उसमें यीशु को देखने पाए।


          बाइबल में यूहन्ना रचित सुसमाचार में लिखा है कि यीशु के अंतिम दिनों में, उनके यरूशलेम में प्रवेश करने के  पश्चात (यूहन्ना 12:12-16) कुछ यूनानियों ने प्रभु के एक शिष्य फिलिप्पुस के पास आकर उससे कहा, श्रीमान, हम यीशु से भेंट करना चाहते हैं” (पद 21)। हो सकता है कि उनमें प्रभु यीशु द्वारा किए गए आश्चर्यकर्मों और चंगाइयों को लेकर उत्सुकता रही हो; परन्तु क्योंकि वे यहूदी नहीं थे, इसलिए उन्हें मंदिर की भीतरी आँगन में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। जब उनका यह निवेदन प्रभु यीशु को बताया गया, तो प्रभु ने कहा कि उसके महिमान्वित होने का समय आ गया था (पद 23)। इससे उसका अभिप्राय था कि वह बहुतों के पापों के लिए बलिदान होने जा रहा था। वह न केवल यहूदियों वरन गैर-यहूदियों (पद 20 के यूनानी) तक भी पहुँचने के अपने उद्देश्य को पूरा करेगा और अब वे सभी प्रभु यीशु को देखने पाएँगे।


          प्रभु यीशु ने अपनी मृत्यु, पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के पश्चात, अपने कहे के अनुसार (यूहन्ना 14:16-17) विश्वासियों में निवास करने के लिए पवित्र आत्मा को भेजा। इस प्रकार से जब हम यीशु से प्रेम करते हैं और उसकी सेवा करते हैं, तो हम उसे अपने जीवनों में सक्रिय देखते हैं; और अद्भुत बात है कि और लोग भी प्रभु यीशु को देखने पाते हैं! – एमी बाउचर पाई

 

हम प्रभु यीशु को उसके अनुयायियों के जीवनों में देखने पाते हैं।


जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:5


बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:20-26

यूहन्ना 12:20 जो लोग उस पर्व में भजन करने आए थे उन में से कई यूनानी थे।

यूहन्ना 12:21 उन्होंने गलील के बैतसैदा के रहने वाले फिलिप्पुस के पास आकर उस से बिनती की, कि श्रीमान‍ हम यीशु से भेंट करना चाहते हैं।

यूहन्ना 12:22 फिलिप्पुस ने आकर अन्द्रियास से कहा; तब अन्द्रियास और फिलिप्पुस ने यीशु से कहा।

यूहन्ना 12:23 इस पर यीशु ने उन से कहा, वह समय आ गया है, कि मनुष्य के पुत्र कि महिमा हो।

यूहन्ना 12:24 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जब तक गेहूं का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है।

यूहन्ना 12:25 जो अपने प्राण को प्रिय जानता है, वह उसे खो देता है; और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है; वह अनन्त जीवन के लिये उस की रक्षा करेगा।

यूहन्ना 12:26 यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा।

 

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 116-118
  • 1 कुरिन्थियों 7:1-19