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मंगलवार, 16 नवंबर 2010

सही प्राथमिकताएं

मध्यपूर्व एशिया और योरप के बीच स्थित ’एशिया माइनर’ के नाम से जाने जानेवाले भूभाग का एक शहर था लौदीकिया। इस शहर की एक समस्या थी - वहां का पानी। लौदीकिया के निकट का एक शहर अपने गर्म पानी के सोतों के लिये मशहूर था, और दूसरा अपने ठंडे, स्वच्छ और मीठे पानी का लिये जाना जाता था। परन्तु इन दोनो के बीच में स्थित लौदीकिया, न गर्म न ठंडे वरन गुनगुने और खनीज़ों तथा लवणों से भरे बदमज़ा पानी से त्रस्त था।
जब इस पृष्टभूमि के संदर्भ में हम प्रभु यीशु द्वारा प्रकाशितवाक्य ३ अध्याय में लौदीकिया की मण्डली को दी गई चेतावनी को पढ़ते हैं, तो समझ सकते हैं कि प्रभु के वचन उन्हें कैसे तलख़ लगे होंगे। प्रभु ने उस मण्डली के लोगों को न गर्म और न ठंडा होने के लिये डांटा (प्रकाशितवाक्य ३:१५) और कहा कि उनके ऐसे व्यवहार के कारण, उनके बदमज़ा पानी के समान, वह अपने मूँह से उन्हें उगल देना चाहता है (प्रकाशितवाक्य ३:१६)।

उनकी समस्या क्या थी कि प्रभु को उन्हें ऐसा कहना पड़ा? समस्या थी उनका प्रभु से अधिक अपनी संपति पर निर्भर होना परन्तु फिर भी पाखंड में अपने आप को ’प्रभु की मण्डली’ कहना। लौदीकिया के लोग सांसारिक धन संपदा से ऐसे भर गए थे कि उन्हें अपनी आत्मिक कंगाली का बोध ही नहीं रहा गया था (प्रकाशितवाक्य ३:१७)। अपनी धन दौलत की लालसा में वे भूल गए कि प्रभु अपनी मण्डली से सांसारिक नहीं आत्मिक संपन्नता चाहता है, ऐश्वर्य का घमण्ड नहीं धार्मिकता की दीनता चाहता है, और पाखंड से उसे नफरत है। उनकी प्राथमिकताएं बिगड़ गईं थीं, जिन्हें ठीक करना अति आवश्यक था, ताकि वे इस बहकावे में बने रहकर विनाश में न चले जाएं।

प्रभु ने उन्हें सम्मति दी कि वे उससे अपनी आत्मिक कंगाली दूर करने के सभी साधन ले लें; प्रभु द्वारा उन्हें दी गई ताड़ना, उनके प्रति उसके प्रेम का चिन्हः थी (प्रकाशितवाक्य ३:१८, १९)। उसकी यह चेतावनी केवल उस समय की लौदीकिया की मण्डली के लिये ही नहीं थी, यह आज भी उतनी ही संगत है।

यदि आप प्रभु यीशु के अनुयायी होने का दावा करते हैं, किंतु आपकी प्राथमिकता प्रभु की आज्ञाकारिता नहीं वरन संसार की उपलब्धियां और संपदा हैं और आप अपनी स्वार्थसिद्धी को प्रभु के नाम में न्यायसंगत ठहराना चाहते हैं, तो चेत जाईये। इससे पहिले कि प्रभु के न्याय का आप को सामना करना पड़े, प्रभु आपको अवसर दे रहा है। उसका कहना है "मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं, यदि कोई मेरा शब्‍द सुन कर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ।" (प्रकाशितवाक्य ३:१९, २०)।

अभी अवसर है, मन फिराईये, प्रभु को अपने जीवन में आमंत्रित कीजिये और उसकी आशीशों से अपने जीवन को भर लीजिए। - जो स्टोवैल


यदि परमेश्वर हमारा दाता है तो हमें किसी वस्तु की घटी नहीं होगी।

...मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठंडा है और न गर्म: भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता। - प्रकाशितवाक्य ३:१५


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य ३:१४-२२

और लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो आमीन, और विश्वासयोग्य, और सच्‍चा गवाह है, और परमेश्वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह यह कहता है।
कि मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठंडा है और न गर्म: भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता।
सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह से उगलने पर हूं।
तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्‍तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा, और नंगा है।
इसी लिये मैं तुझे सम्मति देता हूं, कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले, कि धनी हो जाए, और श्वेत वस्‍त्र ले ले कि पहिन कर तुझे अपने नंगेपन की लज्ज़ा न हो, और अपनी आंखों में लगाने के लिये सुर्मा ले, कि तू देखने लगे।
मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा।
देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं, यदि कोई मेरा शब्‍द सुन कर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ।
जो जय पाए, मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊंगा, जैसा मैं भी जय पाकर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया।
जिस के कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३, ४
  • इब्रानियों ११:२०-४०

सोमवार, 15 नवंबर 2010

परमेश्वर से प्रतिफल

लोकप्रीय चित्रकार ऐन्डी वारहोल ने एक बार कहा, "भविष्य में ऐसा समय आएगा ज्ब हर कोई १५ मिनिट के लिये प्रसिद्ध होगा।" परन्तु यह सही नहीं है। ऐसे लाखों लोग हैं जो कभी अपनी प्रसिद्धी पाने के अवसर को थामते नहीं, बस अपनी ज़िम्मेवारी को पूरा करते रहते हैं। उन में से कुछ ऐसे स्त्री और पुरुष हैं जो पूरी लगन और मेहन्त के साथ अपना काम करते रहने में ही अपना जीवन व्यतीत कर देते हैं, या अपने बच्चों को परमेश्वर के भय और धार्मिकता में बड़ा करते हैं, या दूसरों के लिये प्रार्थनाएं करते हैं, या प्रभु यीशु में अपने विश्वास को उनके साथ बांटते हैं जो अभी भी प्रभु यीशु को नहीं जानते। वे लोगों को परमेश्वर के वचन की शिक्षाएं सिखाते हैं, बीमारों को भोजन पहुंचाते हैं, बुज़ुर्गों को डाकटरों के पास ले जाते हैं और प्रेम तथा भलाई के ऐसे ही अनेक कार्य खामोशी और गुमनामी में करते रहते हैं।

ऐसे लोग अपने मित्रों और कुटुमबियों के बाहर सम्भवतः कभी जाने न जाएं। उनके नाम प्रसिद्ध नहीं होंगे। और यद्यपि वे निस्वार्थ भाव से और बहुत त्याग सहित अपने आप को ऐसी सेवा में दे देते हैं, तो भी उनकी प्रशंसा करने या उन्हें धन्यवाद कहने वाला शायद ही कोई होता होगा। लेकिन परमेश्वर उनकी यह विश्वासयोग्यता जानता है और उनकी इस आज्ञाकारिता से प्रसन्न होता है, "तब धर्मी उस को उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया या प्यासा देखा, और पिलाया? हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए? हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? तब राजा उन्‍हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।" (मती २५:३७-४०)

पौलुस २ कुरिन्थियों ५:९ में कहता है कि हम अपने जीवन का ध्येय बना लें कि हम परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले बनेंगे। जब हम उसमें विश्वास करके अपने जीवन उसे समर्पित कर देते हैं और अपने जीवन उसकी सेवकाई में बिताते हैं, तो वह हमसे प्रसन्न होता है। जिससे परमेश्वर प्रसन्न होता है, वह उसे प्रतिफल भी देता है, और उसका प्रतिफल मनुष्यों द्वारा दी गई किसी भी ख्याति से कहीं बढ़कर और भला होता है।

आप किससे प्रतिफल और ख्याति पाना चाहते हैं - संसार से अथवा परमेश्वर से? - सिंडी हैस कैसपर


जिन कार्यों से परमेश्वर प्रसन्न होता है, वे उसकी आज्ञाकारिता और सेवाकाई में किये जाने वाले कार्य हैं।

मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। - मती २५:४०


बाइबल पाठ : मत्ती २५:३१-४६

जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्‍वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा।
और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी, और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्‍हें एक दूसरे से अलग करेगा।
और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाईं और खड़ी करेगा।
तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है।
कयोंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया।
मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए, मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए।
तब धर्मी उस को उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया या पियासा देखा, और पिलाया?
हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए?
हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए?
तब राजा उन्‍हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।
तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगों, मेरे साम्हने से उस अनन्‍त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है।
क्‍योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया।
मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया, मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहिनाए, बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि न ली।
तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या पियासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की?
तब वह उन्‍हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया।
और यह अनन्‍त दण्‍ड भोगेंगे परन्‍तु धर्मी अनन्‍त जीवन में प्रवेश करेंगे।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल १, २
  • इब्रानियों ११:१-१९

रविवार, 14 नवंबर 2010

सताव और क्लेशों से निकलती मण्डली

अक्तूबर २००६ की एक प्रातः, एक स्त्री और उसके छः बच्चों को मजबूर किया गया कि वे अपने पति/पिता को दी जाने वाली यातनाओं को देखें। यातना देने वाले चाहते थे कि वह आदमी प्रभु यीशु का इन्कार करे, परन्तु वह नहीं माना, और यातना सहते सहते भी यीशु को अपना प्रभु होने की घोषणा करता रहा और अपने परिवार के लिये यीशु से प्रार्थना करता हुआ उनके सामने मर गया। अपने इस दुख में भी वह परिवार प्रभु यीशु का अनुसरण करने को अब भी दृढ़ निश्चित है।

एक अन्य व्यक्ति को ३ वर्ष के कारावास का दण्ड दिया गया, उस पर इल्ज़ाम था कि उसने किसी दूसरे के धर्म का अपमान किया है। दण्ड पाने वाला मसीह के लिये उत्साह रखने वाला और प्रभु यीशु मसीह की गवाही देने वाला व्यक्ति है। वह व्यक्ति, उसकी पत्नी और बच्चे आज भी मसीह के प्रति वफादार हैं और प्रभु का इनकार करने से इनकार करते हैं।

मसीही विश्वास के लिये सताया और प्रताड़ित किया जाना वर्तमान २१वीं सदी के हमारे समाज में उतना ही वास्तविक है जितना पहली सदी के यहूदी विश्वासियों के लिये था, जिन्हें पतरस ने उत्साहित करने के लिये लिखा और प्रार्थना करी "अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिस ने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्‍त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा। उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।" (१ पतरस ५:१०, ११)

यह सताव केवल उन देशों में ही नहीं है जो किसी भी धर्म को नहीं मानते जैसे कम्युनिस्ट देश, या जहां किसी अन्य धर्म के अनुयायी बहुमत में हैं, अथवा जो किसी अन्य धर्म को अपने देश का धर्म मानते हैं। यह सताव उन देशों में भी उतना ही व्याप्त है जिन्हें हम ’पाश्चात्य’ देश कहकर संबोधित करते हैं और जिनके विष्य में आम धारणा है कि वे ’इसाई’ देश हैं। मसीही विश्वास किसी धर्म से संबंधित नहीं है - इस विश्वास और धर्म में ज़मीन - आसमान का अन्तर है।

प्रभु यीशु मसीह न तो कोई धर्म देने आया, न किसी धर्म के अनुयायी बनाने आया। वह पाप के बन्धन में जकड़े संसार के प्रत्येक जन को मुक्ति का मार्ग देने और परमेश्वर की सन्तान होने का दर्जा देने आया। वह किसी का धर्म बदलने नहीं, वरन सबका मन बदलने आया। उसका अनुसरण करना, किसी धर्म का पालन करना कदापि नहीं है, न ही यह किन्ही धार्मिक कर्तव्यों और अनुष्ठानों को पूरा करना है; और न ही किसी धर्म को मानने वाले परिवार में जन्म लेने से कोई स्वतः ही उसका अनुयायी बन जाता है। जो कोई सच्चे विश्वास और सम्पूर्ण मन से अपने पापों की क्षमा के लिये उससे एक छोटी सी प्रार्थना कर लेता है "हे प्रभु यीशु मैं मान लेता हूँ कि आपने मेरे पापों के लिये अपने प्राण दिये, कृप्या मेरे पाप क्षमा कर मुझे अपनी शरण में ले लीजिए" वह उसी क्षण से प्रभु यीशु का अनुयायी हो जाता है, चाहे वह किसी धर्म, जाति या भूभाग से संबंध रखता हो।

आज सताव और क्लेशों से निकलती प्रभु यीशु की विश्वव्यापी विश्वासी मण्डली के लिये प्रार्थना का दिन है। आप भी अपनी प्रार्थनाओं द्वारा सहयोग दे सकते हैं। प्रार्थना कीजिये कि:
१. जिन देशों में मसीही विश्वास की गवाही देना प्रतिबंधित है, वहाँ के गुप्त विश्वसी अपने विश्वास में दृढ़ रहें और सुरक्षित रहें।
२. जो मसीही विश्वासी अपने विश्वास के कारण बन्दीगृहों में पड़े हैं वे उत्साहित रहें, विश्वास में दृढ़ रहें और उनकी सेहत भी ठीक रहे।
३. जिन के प्रीय जन अपने विश्वास के कारण शहीद हो गए हैं, वे परमेश्वर पर अपने विश्वास में बने रहें और उससे सामर्थ पाकर आगे बढ़ सकें।

आज एक साथ मिलकर हम अपने सहविश्वासियों को प्रभु के सन्मुख प्रार्थना में लाएं। - ऐनी सेटास


मसीही शहीदों का बहाया गया लहू और नए विश्वासियों की फसल को उत्पन्न करने वाला बीज है।

पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे। - १ पतरस ४:१६


बाइबल पाठ: १ पतरस ४:१२-१९

हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्‍द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।
फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो, क्‍योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।
तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए;
पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
क्‍योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्‍या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?
और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्‍या ठिकाना?
इसलिये जो परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल:
  • विलापगीत ३-५
  • इब्रानियों १०:१९-३९

शनिवार, 13 नवंबर 2010

हानि के सौदे

हम सब ने ऐसे विज्ञापन देखे और सुने हैं जो कुछ प्राप्त करने के आसान रास्तों का प्रलोभन देते हैं - "हमारे द्वारा उत्पादित वस्तु खरीदिये और उसके लिये साल भर तक कोई पैसा देने की आवश्यक्ता नहीं है" - अति सहज और त्वरित सन्तुष्टि के प्रलोभन!

जब शैतान ने प्रभु यीशु कि परीक्षा करी (लूका ४:१-१३), तो प्रभु को भी ऐसी ही सहज और त्वरित सन्तुष्टि के प्रलोभन दिये। शैतान का प्रयास था कि वह प्रभु को उकसाए कि वह परमेश्वर पिता पर भरोसा छोड़ कर, बात को अपने हाथ में ले ले और अपने मन की करे।

जब प्रभु यीशु ४० दिन के उपवास के बाद भूखा था (लूका ४:२) तो शैतान ने उसे सुझाया कि वह अपनी शक्ति का उपयोग करके पत्थरों को रोटी में बदल दे। यदि प्रभु ऐसा करते तो वह अपनी शक्ति का उपयोग अपनी स्वार्थसिद्धी के लिये करते, इसलिये उन्होंने लिये मना कर दिया।

प्रभु यीशु ने शैतान द्वारा संसार के सभी राज्यों के अधिकार को क्यों नकार दिया (लूका ४:५-७)? यदि वह मान जाते तो क्रूस की पीड़ा से बच सकते थे। परन्तु यह करना, उनके लिये परमेश्वर द्वारा बनाई गई योजना के विरुद्ध जाता, जिसका उद्देश्य केवल उन्हें पृथ्वी के समस्त राज्य देना नहीं था वरन स्वर्ग और पथ्वी का सारा अधिकार देना और क्रूस के बलिदान तथा मृत्कों में से पुनुरुत्थान के द्वारा समस्त संसार के प्रत्येक जन के लिये मुक्ती का मार्ग खोलकर परमेश्वर के राज्य में परमेश्वर के दाहिने बैठना था। इस योजना के सामने शैतान का अति सहज और त्वरित सन्तुष्टि का प्रलोभन हानि का सौदा था।

जब तीसरी परीक्षा में भी प्रभु शैतान के प्रलोभन में नहीं फंसा, तो शैतान "तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया" (लूका ४:१३)। शैतान जल्दी से हार नहीं मानता, यदि वह पीछे भी हटता है तो केवल इसलिये कि मौका पा कर फिर वार कर सके।

ऐसे सौदों से सावधान रहें जो वर्तमान में बिना कोई खास कीमत दिये बड़े लाभ का प्रलोभन लिये होते हैं। ऐसे सौदे अकसर आपके लिये हानि के और सौदे का प्रलोभन देने वाले के लाभ के सौदे होते हैं। शैतान भी ऐसे कई प्रलोभन आपके समक्ष लाकर आपको सहजता से यश, धन और सामर्थ प्राप्ति के लिये उकसाता है। उसका उद्देश्य आपका लाभ नहीं है, वह आपको अपनी मर्ज़ी पूरी करने को उकसा कर और परमेश्वर के हाथों से अपने जीवन की बागडोर वापस लेकर, आपके विश्वास को नाश करना और आपकी आशीशों में सेंध लगाना चाहता है। उसका सदा प्रयत्न रहता है कि वह विश्वासी के जीवन में परेशानी पैदा कर सके।

जब कभी कोई किसी अति सहज और त्वरित सन्तुष्टि का प्रलोभन आपको दे, तो परख लीजिये कि देने वाले की मनशा क्या है। जल्दबाज़ी के सौदे हानि के सौदे होते हैं। - सी. पी. हिया


प्रलोभन से बचने का सबसे आसान तरीका है प्रलोभन के समक्ष परमेश्वर की ओर भागना।

...लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्‍तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। - मत्ती ४:४


बाइबल पाठ: लूका ४:१-१३

फिर यीशु पवित्रआत्मा से भरा हुआ, यरदन से लौटा और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा, और शैतान उस की परीक्षा करता रहा।
उन दिनों में उस ने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी।
और शैतान ने उस से कहा - यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो इस पत्थर से कह, कि रोटी बन जाए।
यीशु ने उसे उत्तर दिया कि लिखा है, मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा।
तब शैतान उसे ले गया और उस को पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए।
और उस से कहा, मैं यह सब अधिकार, और इन का वैभव तुझे दूंगा, क्‍योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूं, उसी को दे देता हूं।
इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा।
यीशु ने उसे उत्तर दिया, लिखा है कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।
तब उस ने उसे यरूशलेम में ले जाकर मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहां से नीचे गिरा दे।
क्‍योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें।
और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पांव में पत्थर से ठेस लगे।
यीशु ने उस को उत्तर दिया यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना।
जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल:
  • विलापगीत १, २
  • इब्रानियों १०

शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

सुरक्षा का बाड़ा

अमेरिका का Yellowstone National Park बहुत सुन्दर पर्यटक स्थल है जो अद्भुत और मनमोहक प्राकृतिक विशेषताओं से भरा है। उसमें विचरण करते और उसकी प्राकृतिक विविधताओं का आनन्द लेते समय पर्यटक भूल जाते हैं कि वे संसार के सबसे बड़े और सक्रीय ज्वालामुखीयों में से एक पर चल फिर रहे हैं, और विनाशकारी खतरे के कितना समीप हैं।

जब मैं बाइबल में अय्युब की पुस्तक पढ़ता हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं Yellowstone में चल फिर रही हूँ - ऐसे दिन में जिसमें ज्वालामुखी फट कर पृथ्वी की सतह की कमज़ोर पपड़ी को फाड़ डालता है और विनाश मुँह बाए खड़ा होता है।

जैसे पर्यटक Yellowstone का आनन्द लेते हैं, अय्युब भी जीवन का आनन्द ले रहा था, इस बात से अनभिज्ञ कि विनाश और उसके बीच केवल एक बाड़ है (अय्युब १:९, १०)। जब परमेश्वर ने शैतान को अनुमति दी कि वह बाड़ तोड़ कर अय्युब की परीक्षा कर सके, तब अय्युब के जीवन में तबाही आ गयी (अय्युब १:१३, १९)।

बहुत से विश्वासी ऐसी परिस्थितियों में जीवन बिताते हैं जहाँ लगता है कि किसी कारणवश परमेश्वर ने अपनी सुरक्षा का बाड़ा उन पर से हटा लिया है। फिर कुछ ऐसे भी हैं जो अपने क्षण्भंगुर जीवन के खतरों से कतई अनभिज्ञ होकर बिल्कुल निशचिंत जीवन बिताते हैं। अय्युब के मित्रों के समान, शायद वे भी सोचते हैं कि उनके साथ कुछ बुरा नहीं होगा जब तक वे कुछ ऐसा न करें जिसका प्रतिफल बुरा हो। लेकिन जैसे हम अय्युब के जीवन से सीखते हैं, कभी कभी परमेश्वर भले लोगों को भी परीक्षाओं से होकर निकलने देता है, जिससे उनके चरित्र में और निखार आये और उनके जीवन की व्यर्थ बातें छांटी जा सकें ताकि वे परमेश्वर के लिये और अधिक फलवन्त हो सकें। यह प्रक्रिया दुखद तो होती है, किंतु इसका दीर्घकालीन परिणाम परमेश्वर की उत्तम आशीशों से परिपूर्ण जीवन होता है।

यद्यपि विनाश किसी भी क्षण आ सकता है, किंतु जो मसीह यीशु पर विश्वास रखते हैं, उन्हें कुछ भी नाश नहीं कर सकता (२ कुरिन्थियों ४:९); परमेश्वर के प्रेम से उन्हें कोई संकट या विनाश पृथक नहीं कर सकता (रोमियों ८:३५-३९)। उसकी यह सुरक्षा उसपर विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिये सदैव उपलब्ध है।

क्या आपने अविनाशी परमेश्वर, प्रभु यीशु, को अपनी सुरक्षा का बाड़ा बना लिया है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


सब कुछ नष्ट हो जाने के बाद भी परमेश्वर का प्रेम स्थिर बना रहता है।

...हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। - २ कुरिन्थियों १:९


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १:८-१० ; रोमियों ८:३५-३९

हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
बरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।
उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।


कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाई गिने गए हैं।
परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं।
क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ५१, ५२
  • इब्रानियों ९

गुरुवार, 11 नवंबर 2010

निस्वार्थ वीरता का प्रोत्साहन

अमेरिका के एक अखबार Chicago Tribune में एक रिपोर्ट छपी जिसमें बताया गया कि बहुत से ऐसे अमेरिकी नागरिक है, पादरियों से लेकर वकीलों और कंपनियों के उच्च संचालकों तक जो ऐसे शौर्य के कार्यों के लिये पदकों का दावा कर रहे हैं जो उन्होंने कभी किये ही नहीं! युद्ध के रिकार्डों में हेरा-फेरी और पराक्रम के झूठे दावे हमारी कल्पना से कहीं अधिक प्रचलित हैं। एक व्यक्ति, जिसने जल सेना के शौर्य पदक का झूठा दावा किया, बाद में इस बात के लिये शर्मिंदा हुआ, और कहा कि वास्तविक शूरवीर कभी अपने कार्यों का स्वयं बखान नहीं करते।

वीरता की निशानी होती है दूसरों की भलाई के लिये निस्वार्थ रीति से अपनी जान भी जोखिम में डाल देने की पृवर्ति।

फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस अपने दो ऐसे साथियों की, उनके विश्वास के सच्चे नायक होने के लिये सराहना करता है, जो समाज में बहुत ही साधारण सा जीवन और स्थान रखते थे किंतु विश्वास में उनकी कर्मठता ने उन्हें परमेश्वर के वचन में सदा काल के लिये उदाहरण बना दिया और असाधारण स्थान दे दिया। तिमुथियुस को, उसके निस्वार्थ और परखे हुआ चरित्र के कारण, पौलुस अपने ऐसे पुत्र की संज्ञा देता है जिसने सुसमाचार प्रचार में उसकी सेवा करी (फिलिप्पियों २:२२)। पौलुस एपाफ्रुदितुस की भी सराहना करता है क्योंकि मसीह के कार्य के लिये उसने अपनी जान जोखिम में डाली, और उसे अपना भाई, सहकर्मी और संगी योद्धा करके संबोधित करता है (फिलिप्पियों २:२५, ३०)। फिलिप्पियों के विश्वासियों को पौलुस ने समझाया कि ऐसे लोगों का बहुत आदर करें (फिलिप्पियों २:२९)।

अपने सहविश्वासियों का, परमेश्वर के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिये आदर करना बाइबल की शिक्षा है। इसका तात्पर्य ऐसे वीरों की पूजा करना नहीं है, वरन एक भला जीवन जीने के लिये उनके प्रति आदर का भाव रखना है।

आज हमारा यह कर्तव्य है कि हम परमेश्वर के लिये निस्वार्थ कार्य करने वालों और उसके नाम की खातिर दूसरों की सहयतार्थ अपना जीवन बिताने वालों का आदर करें और अपने शब्दों द्वारा अथवा किसी ठोस कार्य के द्वारा उन्हें प्रोत्साहित करें। - डेविड मैककैसलैंड


मसीह में विश्वास द्वारा साधारण मनुष्य भी असाधारण नायक बन जाते हैं।

इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। - फिलिप्पियों २:२९


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१९-३०

मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्‍त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुन कर मुझे शान्‍ति मिले।
क्‍योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे।
क्‍योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की।
पर उसको तो तुम ने परखा और जान भी लिया है, कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उस ने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया।
सो मुझे आशा है, कि ज्योंही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्‍या दशा होगी, त्योंही मैं उसे तुरन्‍त भेज दूंगा।
और मुझे प्रभु में भरोसा है, कि मैं आप भी शीघ्र आऊंगा।
पर मैं ने एपाफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा।
क्‍योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्‍योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था।
और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्‍तु परमेश्वर ने उस पर दया की, और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट कर के आनन्‍दित हो जाओ और मेरा शोक घट जाए।
इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना।
क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ५०
  • इब्रानियों ८

बुधवार, 10 नवंबर 2010

परमेश्वर का आलिंगन

शाम को जब उसके परिवार के सदस्य घर वापस चले गए, तो कैरल को लगने लगा कि अस्पताल का उसका कमरा संसार का सबसे अधिक अकेलेपन का स्थान है। रात हो चुकी थी, उसकी बीमारी से संबंधित भय उसे सताने लगे और वह अपने आप को बहुत हताश अनुभव करने लगी थी। ऐसे में उसने अपनी आंखें बन्द करी और वह परमेश्वर से बात करने लगी: "हे प्रभु, मैं जानती हूँ कि यहां भी मैं वास्तव में अकेली नहीं हूँ। आप मेरे साथ यहां उपस्थित हैं। कृप्या मेरे मन को अपनी शांति से भर दीजिये। कृप्या, मैं आपकी बाहों के आलिंगन को, आपके द्वार अपने थामे जाने को अनुभव कर सकूँ।"

प्रार्थना करते करते कैरल को उसके भय जाते अनुभव हुए और जब उसने अपनी आंखें खोलीं तो उसकी सहेली मार्ज की चमकती आखें और मुस्कुराहट की गर्मी बिखेरता चेहरा उसके सामने था, और मार्ज ने कस कर उसे अपने आलिंगन में भर लिया। कैरल को लगा जैसे परमेश्वर ने स्वयं उसे अपने आलिंगन में भर लिया हो।

परमेश्वर अपने प्रेम को प्रगट करने के लिये अक्सर अपने विश्वासियों को उपयोग करता है, उसके द्वारा दिये गए वरदानों को एक दुसरे की भलाई के लिये उपयोग करने के द्वारा (रोमियों १२:४-८) और एक दूसरे की सहायता के द्वारा : "तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो" (गलतियों ६:२)।

जैसे प्रभु यीशु ने हमारे प्रति किया, जब हम भी दूसरों के प्रति प्रेम और अनुकम्पा दिखाते हैं, तो संसार के लिये परमेश्वर की सेवाकाई को पूरा करते हैं : "और प्रेम में चलो, जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट करके बलिदान कर दिया।" (इफिसियों ५:२); "और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो, जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।" (कुलुस्सियों ३:१३)


जब हम परमेश्वर की सन्तानों से प्रेम करते हैं, हम परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को प्रकट करते हैं।

भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। रोमियों १२:१०


बाइबल पाठ : रोमियों १२:३-११

क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़ कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
क्‍योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्‍साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
प्रेम निष्‍कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।
भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ४८-४९
  • इब्रानियों ७