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रविवार, 8 मार्च 2015

टीम


   ओकलैण्ड एथेलेटिक्स ने सन 2002 में एक बड़े ही अपरंपरागत तरीके से विजयी बेसबॉल टीम बनाई। उन्होंने 2001 के पश्चात अपनी टीम के तीन प्रमुख खिलाड़ियों को खो दिया था, और उनके पास अन्य जाने-माने खिलाड़ियों को टीम में लेने के लिए पर्याप्त धन की घटी थी। इसलिए ओकलैण्ड टीम के महाप्रबंधक, बिली बीन ने कुछ उपेक्षित आँकड़ों पर ध्यान किया और कुछ ऐसे कम ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों को एकत्रित किया जिन्हें अन्य टीमें या तो कम योग्यता वाले या फिर कम क्षमता वाले आँकते थे। ओकलैण्ड द्वारा जोड़-तोड़ करके बनाई गई यह टीम लगातार 20 गेम जीतती हुई अपने मण्डलीय खेलों में विजयी बनी तथा कुल 103 गेमों में विजयी रही!

   यह मुझे प्रभु यीशु द्वारा चुने गए चेलों की टीम की याद दिलाता है। उन चेलों की टीम में कोई विद्वान, ख्याति-प्राप्त या समाज के उच्च-वर्ग से संबंधित व्यक्ति नहीं था। प्रभु यीशु की टीम में थे गलील के रूखे अनपढ़ मछुवारे, एक उन्मादी व्यक्ति और लेवी (मत्ती) नाम का उपेक्षित चुंगी लेने वाला। इस टीम के इन लोगों के बारे में पढ़कर परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा लिखी बात स्मरण हो आती है: "हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे" (1 कुरिन्थियों 1:26-27)। परमेश्वर ने जगत द्वारा उपेक्षित परन्तु प्रभु यीशु के प्रति पूर्णतः समर्पित (यहूदा इस्करियोती को छोड़) इन व्यक्तियों को अपनी सामर्थ तथा ज्ञान से भरकर एक ऐसे अभियान के लिए प्रयोग किया जिसने सारे संसार को प्रभावित किया और हमेशा के लिए बदल डाला और आज भी यही कर रहा है।

   हम सब के लिए यहाँ एक महत्वपूर्ण सबक है: अकसर हम परिचित, प्रभावी, ख्याति-प्राप्त तथा समृद्ध लोगों को खोजते हैं और उनकी उपेक्षा करते हैं जो या तो कम हैसियत अथवा कुशलता रखते हैं, या जो किसी शारीरिक कमज़ोरी से ग्रसित हैं। लेकिन हमारे प्रभु ने उदाहरण द्वारा दिखा दिया कि समाज के उपेक्षित और कमज़ोर लोग भी उसके लिए उपयोगी हैं, वह उन्हें भी ऐसी सामर्थ से भर सकता है जो अलौकिक है, वह उनसे भी वह कार्य करवा सकता है जो संसार के सामर्थी और यशस्वी नहीं कर सकते।

   सांसारिक मापदण्डों और योग्यता परखने के पैमानों के आधार पर किसी को कभी कमतर नहीं आँकें। प्रभु यीशु के लिए सब समान हैं, वह सबसे प्रेम करता है, वह सबको सामर्थी बना सकता है, सबको अपनी महिमा के लिए प्रयोग कर सकता है। प्रभु यीशु का नज़रिया अपनाएं, सबको समान दृष्टि से देखें, सब को साथ लेकर प्रभु के लिए कार्य करें। - डेविड एग्नर


प्रभु यीशु की मण्डली में कोई महत्वहीन नहीं है।

क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। - रोमियों 12:3

बाइबल पाठ: लूका 5:27-35
Luke 5:27 और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेने वाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Luke 5:28 तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया। 
Luke 5:29 और लेवी ने अपने घर में उसके लिये बड़ी जेवनार की; और चुंगी लेने वालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी। 
Luke 5:30 और फरीसी और उन के शास्त्री उस के चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, कि तुम चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाते-पीते हो? 
Luke 5:31 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्तु बीमारों के लिये अवश्य है। 
Luke 5:32 मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं। 
Luke 5:33 और उन्होंने उस से कहा, यूहन्ना के चेले तो बराबर उपवास रखते और प्रार्थना किया करते हैं, और वैसे ही फरीसियों के भी, परन्तु तेरे चेले तो खाते पीते हैं! 
Luke 5:34 यीशु ने उन से कहा; क्या तुम बरातियों से जब तक दूल्हा उन के साथ रहे, उपवास करवा सकते हो? 
Luke 5:35 परन्तु वे दिन आएंगे, जिन में दूल्हा उन से अलग किया जाएगा, तब वे उन दिनों में उपवास करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18



शनिवार, 7 मार्च 2015

लालसा


   ग्रैण्ड रैपिड्स, मिशिगन में स्थित फ़्रेड्रिक मेइजर उद्यान में तितलियों के लिए एक विशेष कक्ष बनाया गया है जहाँ उनके स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक तापमान और नमी के वातावरण को वर्ष भर बनाए रखा जाता है, काँच से बनी छत से धूप तथा रौशनी आती रहती है, उनके लिए उपयुक्त भोजन उपलब्ध करवाया जाता है। उन तितलियों को बाहर कहीं जाने, भोजन ढ़ूँढ़ने, खतरे उठाने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्राकृतिक फूल, स्वच्छ वातावरण और उपयुक्त भोजन सब वहीं उस कक्ष में उनके लिए उपलब्ध करवाया गया है। लेकिन फिर भी कुछ तितलियाँ उस कक्ष की काँच की बनी छत के निकट मंडराती रहती हैं, उसपर बैठी रहती हैं; उस सुरक्षित और बहुतायत के कक्ष से बाहर निकलने की लालसा शायद उन्हें ऐसा करने को उकसाती है। मेरा मन होता है कि उन तितलियों से कहूँ, "क्या तुम को एहसास नहीं है कि जो कुछ तुम्हें चाहिए वह सब इस कक्ष में तुम्हारे लिए पहले से ही उपलब्ध करवाया गया है; यहाँ सुरक्षा है। बाहर ठंडा है, खतरे हैं और बाहर निकलने की लालसा के पूरे होने के कुछ ही समय में वहाँ तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।"

   मेरे लिए शायद यही सन्देश परमेश्वर की ओर से भी है - परमेश्वर ने मुझे अपने सुरक्षा और देख-रेख के बाड़े में बनाए रखा है; वह मेरी प्रत्येक आवश्यकता को जानता है, उसे पूरा करता है, लेकिन फिर भी मेरी नज़रें बाहर के संसार और संसार की बातों की ओर जाती रहती हैं। इसलिए मैं अपने आप से पूछती हूँ, क्या मैं उन बातों की लालसा करती रहती हूँ जो मेरे लिए हानिकारक हैं? क्या मैं अपनी शक्ति और सामर्थ उन बातों पर व्यय करती हूँ जिनकी ना तो मुझे आवश्यकता है और जो ना ही मेरे लिए उचित हैं? उसे नज़रन्दाज़ करके जो मुझे उपलब्ध है, उसे बेहतर मानकर तथा उसकी लालसा में जो मेरी पकड़ के बाहर है, क्या मैं परमेश्वर द्वारा बहुतायत से उपलब्ध करवाई गई आशीशों को महत्वहीन कर देती हूँ? क्या मैं अपने मसीही विश्वास को भरपूरी से जीने की बजाए, उस विश्वास की ज़िम्मेदारियों की सीमाओं को तोड़ने की लालसा में दिन बिताती हूँ?

   परमेश्वर अपने बहुतायत के खज़ानों से हमारी हर आवश्यकता को पूरा करता रहता है (फिलिप्पियों 4:19); इसलिए बजाए इसके कि हम अपना समय उन बातों की लालसाओं में व्यतीत करें जो हमें उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं, हम उन बातों के लिए जो परमेश्वर ने हमारे लिए उपलब्ध करवाई हैं, उस देख-रेख एवं सुरक्षा के लिए जो वह हमारे प्रति लगातार बनाए रखता है, हम उसके धन्यवादी हों तथा अपने मसीही विश्वास को अपने आशीषपूर्ण जीवन द्वारा प्रकट करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारी आवश्यकताएं परमेश्वर के भण्डार को कभी अपर्याप्त नहीं जता सकतीं।

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। - 2 कुरिन्थियों 9:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-20
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है। 
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। 
Philippians 4:20 हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52



शुक्रवार, 6 मार्च 2015

अनुग्रह और क्षमा


   जीवन कई बातों में मनोरंजन स्थलों पर पाई जाने वाली "बम्पर कारों" के समान होता है। उन कारों में आप यह जानते हुए बैठते हैं कि आपको टक्कर अवश्य लगेगी, बस यह नहीं पता कि किसके द्वारा और कितनी ज़ोर से लगेगी। जब किसी के द्वारा आपकी कार को टक्कर लगती है, तो फिर आप उसकी कार का पीछा करके उसे टक्कर मारने का प्रयास करते हैं, और वह भी उसकी दी हुई टक्कर से अधिक ज़ोर से!

   किसी मनोरंजन स्थल में, विशेष रीति से बनाई गई कारों में बैठकर ऐसा करना मनोरंजक हो सकता है, लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा करना बहुत हानिकारक होता है। यदि जीवन में कोई आपको टक्कर या ठोकर दे तो पलट कर उसे टक्कर या ठोकर देना समस्या का समाधान नहीं करता वरन बात को बढ़ाता ही है, और अन्ततः यह सभी के लिए हानिकारक होता है।

   प्रभु यीशु के पास ऐसे में अपनाने के लिए एक भिन्न तथा बेहतर कार्यनीति है - जो आपको टक्कर या ठोकर दें उन्हें क्षमा कर दो। प्रभु यीशु के चेले प्रेरित पतरस के समान हम भी प्रभु से पूछ सकते हैं कि हमारे द्वारा किसी को कितनी बार क्षमा करना उचित होगा? जो उत्तर प्रभु यीशु ने पतरस को दिया था, वही हमारे लिए भी लागू होता है; पतरस ने पूछा क्या सात बार क्षमा करना उचित होगा, तो प्रभु यीशु का उत्तर था, सात के सत्तर गुना बार (मत्ती 18:21-22)! दूसरे शब्दों में, जो प्रभु यीशु कहना चाह रहे थे वह था कि अनुग्रह तथा क्षमा की कोई सीमा नहीं है, हमें सदा ही अनुग्रह और क्षमा के भाव से बर्ताव करना चाहिए। इस संदर्भ में प्रभु यीशु ने एक नीतिकथा द्वारा समझाया कि अनुग्रह और क्षमा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारा विरोध करने वाला इसके योग्य है, वरन इसलिए अनुग्रह और क्षमा का बर्ताव बनाए रखना है क्योंकि परमेश्वर हमारे प्रति यही बर्ताव बनाए रखता है: "तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उस से कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से बिनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया। सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था?" (मत्ती 18:32-33)

   हम मसीही विश्वासी यह भली भांति जानते हैं कि परमेश्वर ने कैसे प्रभु यीशु द्वारा अनुग्रह में होकर हमें क्षमा किया है, अपने साथ हमारा मेल-मिलाप किया है, हमारे साथ वह प्रेम किया है जिसके हम कभी योग्य नहीं थे। क्योंकि यह बहुतायत का अनुग्रह और क्षमा हमें सेंत-मेंत प्रदान किया गया है, इसलिए हम वे लोग बनें जो बुरे व्यवहार के बदले में वैसा ही बुरा व्यवहार नहीं वरन अनुग्रह और क्षमा का बर्ताव लौटा कर दें। - जो स्टोवैल


हमारे द्वारा दुसरों के प्रति क्षमा के व्यवहार द्वारा परमेश्वर का अनुग्रह प्रगट होता है।

और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। - इफिसियों 4:32

बाइबल पाठ: मत्ती 18:21-35
Matthew 18:21 तब पतरस ने पास आकर, उस से कहा, हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूं, क्या सात बार तक? 
Matthew 18:22 यीशु ने उस से कहा, मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, वरन सात बार के सत्तर गुने तक। 
Matthew 18:23 इसलिये स्वर्ग का राज्य उस राजा के समान है, जिसने अपने दासों से लेखा लेना चाहा। 
Matthew 18:24 जब वह लेखा लेने लगा, तो एक जन उसके साम्हने लाया गया जो दस हजार तोड़े धारता था। 
Matthew 18:25 जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्‍वामी ने कहा, कि यह और इस की पत्‍नी और लड़के बाले और जो कुछ इस का है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए। 
Matthew 18:26 इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा; हे स्‍वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूंगा। 
Matthew 18:27 तब उस दास के स्‍वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका धार क्षमा किया। 
Matthew 18:28 परन्तु जब वह दास बाहर निकला, तो उसके संगी दासों में से एक उसको मिला, जो उसके सौ दीनार धारता था; उसने उसे पकड़कर उसका गला घोंटा, और कहा; जो कुछ तू धारता है भर दे। 
Matthew 18:29 इस पर उसका संगी दास गिरकर, उस से बिनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूंगा। 
Matthew 18:30 उसने न माना, परन्तु जा कर उसे बन्‍दीगृह में डाल दिया; कि जब तक कर्ज को भर न दे, तब तक वहीं रहे। 
Matthew 18:31 उसके संगी दास यह जो हुआ था देखकर बहुत उदास हुए, और जा कर अपने स्‍वामी को पूरा हाल बता दिया। 
Matthew 18:32 तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उस से कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से बिनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया। 
Matthew 18:33 सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था? 
Matthew 18:34 और उसके स्‍वामी ने क्रोध में आकर उसे दण्‍ड देने वालों के हाथ में सौंप दिया, कि जब तक वह सब कर्जा भर न दे, तब तक उन के हाथ में रहे। 
Matthew 18:35 इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31



गुरुवार, 5 मार्च 2015

अवकाश


   एक साल, क्रिसमस से ठीक पहले, एक मित्र - किम को पता चला कि उसे ल्युकीमीया (रक्त का कैंसर) है तथा उसे शीघ्रातिशीघ्र इलाज के लिए अस्पताल में भरती होना होगा। इससे कुछ ही सप्ताह पहले किम ने अपने मित्रों को बताया था कि एक प्रेमी परिवार, एक आरामदेह घर और एक नए पोते के आने के कारण वह अपने आप को कितना आशीशित तथा संतुष्ट अनुभव करती है। इलाज के लिए अस्पताल मे भरती होते समय किम ने प्रभु यीशु से प्रार्थना करी कि वे उसके निकट रहें और उसे अपनी निकटता का आभास करवाते रहें।

   इसके पश्चात सात महीने तक किम का इलाज चलता रहा जिस में से कुछ समय उसे अकेले में बिताना पड़ा; किम अब उन समयों को "विवशता का अवकाश" कहती है। किम बताती है कि उन "अवकाश" के दिनों में उसने अपने व्यस्त जीवन की गति को मध्यम करना, मनन करना और परमेश्वर की भलाई, प्रेम और सिद्ध योजना में विश्राम करना सीखा - बिना इस बात की परवाह किए कि वह पुनः स्वस्थ होने पाएगी अथवा नहीं।

   अपनी प्रजा इस्त्राएल से किए गए परमेश्वर के वायदों में से एक किम के लिए उन दिनों में व्यक्तिगत वायदा बन गया: "तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा" (सपन्याह 3:17)।

   एक ऐसी यात्रा के बाद जिसने, किम के अनुसार, उसके जीवन को बेहतर बना दिया, अब किम का कैंसर थमा हुआ है। वह अपने व्यस्त जीवन में वापस लौट आई है, लेकिन वह अकसर थम कर उस "विवशता के अवकाश" के समयों में सीखे गए सबकों को याद करती रहती है।

   यह हमारे लिए भी कितना महत्वपूर्ण है कि हम अपने व्यस्त जीवन में, चाहे हम भली परिस्थितियों में हों या चुनौती भरी में, अवकाश का कुछ समय निकालकर परमेश्वर के साथ बिताएं, उसके निकट आएं और उसकी वाणी को सुनें तथा अपने जीवनों को पुनः उसके हाथों में समपूर्ण समर्पण के साथ छोड़ दें। - डेविड मैक्कैसलैंड


लोग ही परमेश्वर के हृदय के निकट होते हैं।

और यहोवा तेरी भलाई के लिये तेरे सब कामों में, और तेरी सन्तान, और पशुओं के बच्चों, और भूमि की उपज में तेरी बढ़ती करेगा; क्योंकि यहोवा फिर तेरे ऊपर भलाई के लिये वैसा ही आनन्द करेगा, जैसा उसने तेरे पूर्वजों के ऊपर किया था; - व्यवस्थाविवरण 30:9

बाइबल पाठ: सपन्याह 3:14-20
Zephaniah 3:14 हे सिय्योन, ऊंचे स्वर से गा; हे इस्राएल, जयजयकार कर! हे यरूशलेम अपने सम्पूर्ण मन से आनन्द कर, और प्रसन्न हो! 
Zephaniah 3:15 यहोवा ने तेरा दण्ड दूर कर दिया और तेरा शत्रु भी दूर किया गया है। इस्राएल का राजा यहोवा तेरे बीच में है, इसलिये तू फिर विपत्ति न भोगेगी। 
Zephaniah 3:16 उस समय यरूशलेम से यह कहा जाएगा, हे सिय्योन मत डर, तेरे हाथ ढीले न पड़ने पाएं। 
Zephaniah 3:17 तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा।
Zephaniah 3:18 जो लोग नियत पर्वो में सम्मिलित न होने के कारण खेदित रहते हैं, उन को मैं इकट्ठा करूंगा, क्योंकि वे तेरे हैं; और उसकी नामधराई उन को बोझ जान पड़ती है। 
Zephaniah 3:19 उस समय मैं उन सभों से जो तुझे दु:ख देते हैं, उचित बर्ताव करूंगा। और मैं लंगड़ों को चंगा करूंगा, और बरबस निकाले हुओं को इकट्ठा करूंगा, और जिनकी लज्जा की चर्चा सारी पृथ्वी पर फैली है, उनकी प्रशंसा और कीर्ति सब कहीं फैलाऊंगा। 
Zephaniah 3:20 उसी समय मैं तुम्हें ले जाऊंगा, और उसी समय मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा; और जब मैं तुम्हारे साम्हने तुम्हारे बंधुओं को लौटा लाऊंगा, तब पृथ्वी की सारी जातियों के बीच में तुम्हारी कीर्ति और प्रशंसा फैला दूंगा, यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50



बुधवार, 4 मार्च 2015

गवाह


   कई दशक पहले घटी हाई-स्कूल के दिनों की एक घटना ने मुझे निराश करके झकझोर दिया था। उन दिनों मेरे लिए खेल-कूद बहुत महत्वपूर्ण होते थे, और मैंने बास्केटबॉल को अपने सबसे मनपसन्द खेल के रूप में चुना था तथा इस खेल के अभ्यास में सैंकड़ों घंटे लगा दिए थे; परिणामस्वरूप मैं अपने स्कूल के दिनों से ही स्कूल की बास्केटबॉल टीम का एक सदस्य रहा था, परन्तु कॉलेज में दाखिला लेने के बाद मुझे कॉलेज की टीम में स्थान नहीं मिला, जो मेरे लिए बहुत निराशाजनक था और जिससे मैं टूट गया।

   निराशा में उलझे हुए मन के साथ मैं आगे बढ़ता रहा, चाहे मैं कॉलेज की टीम में खेल नहीं सकता था लेकिन मैं टीम के लिए हिसाब-किताब रखने वाला बन गया। मैं टीम के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में जाता, मेरे किस साथी या मित्र ने कितने अंक अर्जित किए, कैसा खेल खेला आदि आँकड़ों को अर्जित करता रहता। सच कहूँ तो मैंने कभी इस बात पर ध्यान भी नहीं दिया कि मैं जिनके बारे में आँकड़े एकत्रित कर रहा हूँ वे मेरे बारे में क्या सोचते हैं; मैं बस अपनी निराशा और उलझन में पड़ा हुआ, खेल से संबंधित जैसे तैसे जो बन पड़ा सो करता रहा। इसलिए मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब मेरे अनेक सहपाठियों ने मेरे भाई से कहा कि वे मेरे व्यवहार में एक मसीही चरित्र, प्रभु यीशु मसीह का चित्रण देखते थे।

   जो बात मैं कहना चाह रहा हूँ वह यह नहीं है कि अपनी निराशाओं में आप को भी मेरे समान ही करना चाहिए, वरन मैं आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाह रहा हूँ कि हम लोगों की नज़रों में निरंतर रहते हैं। हम चाहे इस बात का एहसास रखें या ना रखें, परन्तु यह यथार्त है कि लोग हमें देख रहे हैं, हमारा आँकलन कर रहे हैं, हमारे बारे में अपनी राय बना रहे हैं।

   प्रेरित पौलुस ने तीतुस को लिखी अपनी पत्री में उसे उस जीवन-शैली के बारे में सचेत किया जो प्रभु हमारे जीवनों में देखना चाहता है - एक ऐसा जीवन जो आदर, आज्ञाकारिता और अनुकंपा का जीवन हो, उन गुणों से भरा जीवन हो जो प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास, पापों की क्षमा और परमेश्वर के पवित्र-आत्मा द्वारा स्वच्छ किए जाने से आते हैं (तीतुस 3:1-8)। जब हम प्रभु यीशु की आधीनता और आज्ञाकारिता में तथा परमेश्वर के पवित्र-आत्मा के मार्गदर्शन में होकर जीवन बिताते हैं तो परमेश्वर अपनी उपस्थिति की वास्तविकता को हम में होकर दूसरों पर प्रकट करता है। - डेव ब्रैनन


चाहे वह प्रचार के लिए मुँह से एक शब्द भी ना बोले, परन्तु प्रत्येक मसीही विश्वासी की जीवन-शैली एक जीता-जागता उपदेश होता है।

सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। - 2 कुरिन्थियों 5:20

बाइबल पाठ: तीतुस 3:1-8
Titus 3:1 लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहें। 
Titus 3:2 किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्‍वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। 
Titus 3:3 क्योंकि हम भी पहिले, निर्बुद्धि, और आज्ञा न मानने वाले, और भ्रम में पड़े हुए, और रंग रंग के अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्‍व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे। 
Titus 3:4 पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की कृपा, और मनुष्यों पर उसकी प्रीति प्रगट हुई। 
Titus 3:5 तो उसने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्म के स्‍नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। 
Titus 3:6 जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला। 
Titus 3:7 जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। 
Titus 3:8 यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29



मंगलवार, 3 मार्च 2015

स्पष्टवादी


   मुझे अपनी माँ की बहुत सी बातें पसन्द हैं; उन पसन्दीदा बातों में से एक प्रमुख बात है उन की स्पष्टवादिता। मैंने अनेक बार भिन्न विषयों पर उन से सलाह लेने के लिए उन्हें फोन किया है, और प्रत्येक सलाह से पहले उनका एक ही आरंभिक उत्तर होता है: "यदि तुम मेरी बात को ठीक से स्वीकार करने को तैयार नहीं हो तो मेरी सलाह मत लो, क्योंकि मैं तुम्हें वह नहीं कहूँगी जो तुम सुनना चाहते हो वरन वही कहूँगी जो मैं इस विषय पर सोचती हूँ या जो सही है।"

   एक ऐसे संसार में जहाँ वार्तालाप में शब्दों को बहुत सावधानी से प्रयोग किया जाता है, उनकी यह स्पष्टवादिता मेरे लिए एक ताज़गी से भरा एहसास होता है। यह एक सच्चे मित्र का गुण भी है; सच्चे मित्र प्रेम में होकर हमसे सच्ची बात ही बोलते हैं चाहे उस सत्य को हम सुनना ना भी चाहते हों। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन पुस्तक में लिखा गया है: "जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है" (नीतिवचन 27:6)।

   यह भी एक कारण है कि प्रभु यीशु को सर्वोत्तम मित्र कहा गया है - क्योंकि वह सदा स्पष्टवादी एवं सत्यवादी रहता है। जब उस सामरी स्त्री की प्रभु यीशु के साथ बातचीत हुई (यूहन्ना 4:7-26), तो इधर-उधर की गौण बातों में उलझने, अथवा उनपर बहस में पड़ने की बजाए प्रभु यीशु ने उस स्त्री से उसकी आवश्यकता और मनःस्थिति के अनुसार दो-टूक बातचीत करी। प्रभु ने उसकी गहन निराशाओं, टूटे हुए सपनों और प्रेमी परमेश्वर पिता के चरित्र को लेकर उसके सामने एक चुनौती प्रस्तुत करी।

   आज यदि हम प्रभु यीशु के साथ-साथ चलते हैं, तो उसे यह अवसर और अनुमति दें कि वह हमारे मन की स्थिति और हमारी आवश्यकता के अनुसार हम से स्पष्टवादी होकर बातचीत करे, अपने वचन द्वारा हमारी आवश्यकतानुसार सभी बातों को हमें स्पष्ट दिखाए और सिखाए, जिससे हम उसकी ओर फिरें, उसकी निकटता में चलने बढ़ने वाले बनें और वह हमारा सहायक तथा मार्गदर्शक हो सके। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु सदा सत्य ही बोलता है।

पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। - याकूब 1:25

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:7-26
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं। 
John 4:16 यीशु ने उस से कहा, जा, अपने पति को यहां बुला ला। 
John 4:17 स्त्री ने उत्तर दिया, कि मैं बिना पति की हूं: यीशु ने उस से कहा, तू ठीक कहती है कि मैं बिना पति की हूं। 
John 4:18 क्योंकि तू पांच पति कर चुकी है, और जिस के पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है। 
John 4:19 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, मुझे ज्ञात होता है कि तू भविष्यद्वक्ता है। 
John 4:20 हमारे बाप दादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया: और तुम कहते हो कि वह जगह जहां भजन करना चाहिए यरूशलेम में है। 
John 4:21 यीशु ने उस से कहा, हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में। 
John 4:22 तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो; और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्योंकि उद्धार यहूदियों में से है। 
John 4:23 परन्तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है। 
John 4:24 परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें। 
John 4:25 स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्‍तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा। 
John 4:26 यीशु ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 28-30
  • मरकुस 8:22-38



सोमवार, 2 मार्च 2015

भलाई और अनुग्रह


   जेराल्ड स्टीवन्स की मृत्योप्रांत उसकी यादगार में रखी गई प्रार्थना सभा में पादरी ने कहा, "जेरी एक भला व्यक्ति था। वह अपने परिवार से प्रेम रखता था; वह अपनी पत्नि के प्रति विश्वासयोग्य था। वह एक अच्छा पिता और दादा था। उसने फौज में रहकर अपने देश की सेवा करी। वह एक अच्छा मित्र था।" इसके बाद पास्टर ने उस प्रार्थना सभा में उपस्थित लोगों को आगे बताया कि जेरी का यह भला जीवन और नेक कार्य स्वर्ग में उसे लिए स्थान देने के लिए पर्याप्त कदापि नहीं थे - और यह बात उनसे कहने वाला पहला व्यक्ति स्वयं जेरी ही होता!

   जेरी एक मसीही विश्वासी था। वह परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी गई बात: "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23) पर पूरा पूरा विश्वास रखता था। जेरी यह जानता तथा मानता था कि उसकी जीवन यात्रा का अन्तिम एवं अनन्त गन्तव्य इस बात पर आधारित नहीं है कि उसने कितना भला जीवन व्यतीत किया है, या लोग उसके बारे में क्या सोचते-कहते हैं; वरन वह गन्तव्य पूर्णतः इस बात पर निर्भर है कि प्रभु यीशु ने जो उसके पापों के बदले अपना बलिदान दिया और फिर मृतकों से पुनः जीवित हो उठा, इस बात पर विश्वास रखकर उसने अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित किया है या नहीं, प्रभु यीशु पर विश्वास किया है या नहीं। वह बाइबल की एक अन्य बात, "क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है" (रोमियों 6:23)  पर भी पूरा पूरा विश्वास रखता था, और उसने प्रभु यीशु पर विश्वास कर के उससे अपने पापों की क्षमा माँगी, प्राप्त करी और अपना जीवन प्रभु को समर्पित किया था।

   निःसन्देह जेरी भला व्यक्ति अवश्य था, लेकिन साथ ही वह यह भी जानता था कि कोई भी अपने प्रयासों एवं कर्मों से कभी इतना भला नहीं हो सकता कि निष्पाप, निष्कलंक हो जाए; इसलिए पापों के दोष से मुक्त होने के लिए उसने परमेश्वर द्वारा दिया गया एकमात्र मार्ग अपना लिया था (प्रेरितों 4:12)। ना जेरी अपनी भलाई और अच्छे जीवन के द्वारा उद्धार पा सका, और ना ही हम पा सकते हैं। जेरी ने भी प्रभु यीशु पर विश्वास द्वारा, प्रभु के अनुग्रह से अपने लिए उद्धार तथा अनन्त सुख और शान्ति के जीवन को पाया, और हम सब के लिए भी वही एकमात्र मार्ग है; यह हमारे प्रयासों-कार्यों-कर्मों द्वारा नहीं वरन परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा मिलने वाला दान है (इफिसियों 2:8-9)।

   "परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो" (2 कुरिन्थियों 9:15)। - सिंडी हैस कैसपर


हम अपने भले कार्यों द्वारा नहीं परन्तु परमेश्वर द्वारा हमारे लिए किए गए भले कार्य से अपने पापों की क्षमा तथा उद्धार पाते हैं।

क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। - इफिसियों 2:8-9

बाइबल पाठ: रोमियों 3:10-18
Romans 3:10 जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। 
Romans 3:11 कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं। 
Romans 3:12 सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं। 
Romans 3:13 उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है। 
Romans 3:14 और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है। 
Romans 3:15 उन के पांव लोहू बहाने को फुर्तीले हैं। 
Romans 3:16 उन के मार्गों में नाश और क्लेश हैं। 
Romans 3:17 उन्होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना। 
Romans 3:18 उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 26-27
  • मरकुस 8:1-21