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रविवार, 11 फ़रवरी 2018

क्षमा


   अपने बेटे के विवाह भोज के समय, मेरे मित्र बॉब ने नवविवाहितों को आने वाले वैवाहिक जीवन के लिए परामर्श और प्रोत्साहन देते हुए एक घटना बताई। उसने निकट के एक शहर के एक फुटबॉल प्रशिक्षक के बारे में बताया, जिसकी टीम अपना एक खेल हार गई थी। अपनी टीम को यह बात याद दिलाते रहने के लिए उसने सारे सप्ताह उनके हारने वाले अंकों को स्कोरबोर्ड पर लगाए रखा। हो सकता है कि यह फुटबॉल में अच्छी रणनीति हो, परन्तु बॉब ने बुद्धिमता से सलाह दी कि विवाह में ऐसा करना बहुत हानिकारक होता है। यदि आपका जोड़ीदार किसी रीति से आपको परेशान या विचलित कर देता है, या आपकी आशा के अनुरूप कार्य नहीं करता है, तो उसकी इस विफलता के बारे में लगातार उसे स्मरण मत दिलाते रहिए। हिसाब रखने के स्कोरबोर्ड से उस बात को हटा दीजिए।

   कितना भला परामर्श! परमेश्वर का वचन बाइबल एक दूसरे से प्रेम रखने और एक दूसरे की गलतियों को नज़रंदाज़ करने के निर्देषों और आज्ञाओं से भरी पड़ी है। हमें स्मरण दिलाया गया है कि प्रेम बुरा नहीं मानता है (1 कुरिन्थियों 13:5), और हमें भी एक दूसरे को वैसे ही क्षमा कर देने को तैयार रहना चाहिए, जैसे परमेश्वर ने हमारे साथ किया है: “और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो” (इफिसियों 4:32)।

   मैं परमेश्वर का बहुत कृतज्ञ और आभारी हूँ कि वह मेरी गलतियों का हिसाब नहीं रखता है। जब भी हम अपनी गलतियों के लिए पश्चाताप करते हैं, वह केवल हमारी गलतियों और अपराधों को क्षमा ही नहीं करता है, वरन उन्हें उतनी दूर कर देता है, जितना पूरब से पश्चिम दूर है (भजन 103:12)। परमेश्वर के साथ क्षमा का अर्थ है कि हमारा पाप न केवल दृष्टि से दूर है, वरन उसके मन से भी हट गया है। परमेश्वर हमें अनुग्रह प्रदान करे कि हम भी औरों को ऐसे ही क्षमा कर सकें जैसे परमेश्वर ने हमें क्षमा किया है। - जो स्टोवैल


वैसे क्षमा करें जैसे परमेश्वर आपको करता है; हिसाब न रखें।

उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है। - भजन 103:12  

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:25-32
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-12
  • मत्ती 26:1-25



शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

सर्वप्रथम


   मेरे मित्र के बेटे ने एक दिन अपने स्कूल की पोषाक के ऊपर एक स्पोर्ट्स कमीज़ पहन ली। वह अपनी मनपसंद टीम के लिए, जो उस संध्या एक महत्वपूर्ण खेल खेलने जा रही थी, अपना समर्थन दिखाना चाह रहा था। घर से बाहर निकलने से पहले उस स्पोर्ट्स कमीज़ के ऊपर उसने कुछ और डाल लिया – एक चेन जिसमें लगी लटकन पर लिखा था ‘यीशु’। उसके इस साधारण से कार्य ने एक महत्वपूर्ण और गहरे सत्य को प्रकट किया: हमारे जीवन की प्रत्येक बात में, प्रभु यीशु ही सर्वप्रथम, सर्वोच्च स्थान के हकदार हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु ही “सब वस्‍तुओं में प्रथम है” (कुलुस्सियों 1:17)। प्रभु यीशु समस्त सृष्टि में सर्वोच्च हैं (पद 15-16); और “वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर हैं” (पद 18)। इस बात के कारण उन्हें सब बातों में पहला स्थान मिलना चाहिए।

   जब अपने जीवन की प्रत्येक बात में हम प्रभु यीशु को आदर का सर्वोच्च स्थान देते हैं, तो उसका सत्य हमारे आस-पास के लोगों पर प्रकट हो जाता है। हमें विचार करना चाहिए कि, अपने कार्यस्थल में क्या हम सर्वप्रथम परमेश्वर के लिए कार्य कर रहे हैं या केवल अपने अधिकारी को प्रसन्न करने के लिए? (3:23); औरों के साथ हमारे व्यवहार में हम परमेश्वर के मानकों को कैसे प्रकट करते हैं? (12-14)। क्या अपने जीवन-यापन, अपनी दिनचर्या, अपनी मनपसंद गतिविधियों में हम उसे सर्वप्रथम स्थान देते हैं?

   जब हमारे जीवनों पर प्रभाव डालने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रभु यीशु होंगे, तो हमारे ह्रदयों में उनका सही स्थान – सर्वप्रथम, भी हो जाएगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु को अपने जीवन की हर बात में सर्वप्रथम रखिए।

प्रभु परमेश्वर वह जो है, और जो था, और जो आने वाला है; जो सर्वशक्तिमान है: यह कहता है, कि मैं ही अल्फा और ओमेगा हूं। - प्रकाशितवाक्य 1:8

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:12-20
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएं, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46



शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

भोजन


   मीट-माउनटेन नामक सुपर-सैंडविच में गोश्त की छः परतें होती हैं। चिकन, बेकन, चीज़ और अन्य कई वस्तुओं से बना यह सैंडविच, दिखने में तो किसी भी रेस्टोरेंट की भोजन सूची में होना चाहिए; परन्तु मीट माउनटेन रेस्टोरेंटों की भोजन सूची में पाया नहीं जाता है। यह उन भोजन व्स्स्तुओं में से एक है जिसके बारे में केवल सोशल मीडिया में पता होता है या फिर जिसे माँग कर बनावाया जाता है। लगता है कि प्रतिस्पर्धा के कारण फास्ट-फूड रेस्टोरेंट अपने जानकर और विशेष ग्राहकों के लिए एक गुप्त भोजन सूची रखने पर विवष हैं।

   जब प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि उनके पास ऐसा भोजन है वे जिसके बारे में जानते नहीं हैं, तो उन शिष्यों को भी लगा होगा कि प्रभु के पास कोई गुप्त भोजन सूची उपलब्ध है (यूहन्ना 4:32)। प्रभु ने उनके असमंजस को भाँप लिया और स्पष्ट किया कि उसका भोजन अपने पिता की इच्छा को पूरा करना और उसे सौंपे गए कार्य को पूरा करना था  (पद 34)।

   प्रभु यीशु तब याकूब के कुएँ के निकट बैठकर सामरी स्त्री से बातचीत कर रहा था, और उसे उस जीवन जल के बारे में बताया था जिसके बारे में उस स्त्री ने कभी सुना भी नहीं था। बातचीत के दौरान प्रभु ने जीवन के लिए उसका स्त्री की अनबुझी प्यास के बारे में अलौकिक समझ प्रकट की। जब प्रभु ने उस स्त्री के सामने अपने आप को प्रकट किया तो तुरंत ही वह अपने घड़े वहीं छोड़कर अपने पड़ौसियों से यह पूछने के लिए भागी चली गई कि “कहीं यही तो मसीह नहीं?” (पद 29)।

   पहले जो गुप्त था, अब सबके लिए उपलब्ध है। प्रभु यीशु का सँसार के सभी लोगों को खुला निमंत्रण है कि वे उसके पास आएँ क्योंकि वह उनके मन की प्रत्येक आवश्यकता की आपूर्ति करने के लिए सक्षम है। जब हम उसके पास आते हैं तो पाते हैं कि वह न केवल हमारी शारीरिक भूख वरन आत्मिक भूख भी तृप्त कर सकता है। उससे मिलने वाला भोजन हर आवश्यकता के लिए काफी है। - मार्ट डीहान


सँसार की आत्मिक भूख को 
केवल जीवित रोटी मसीह यीशु ही तृप्त कर सकता है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4: 27-34
John 4:27 इतने में उसके चेले आ गए, और अचम्भा करने लगे, कि वह स्त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न कहा, कि तू क्या चाहता है? या किस लिये उस से बातें करता है।
John 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी।
John 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?
John 4:30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।
John 4:31 इतने में उसके चेले यीशु से यह बिनती करने लगे, कि हे रब्बी, कुछ खा ले।
John 4:32 परन्तु उसने उन से कहा, मेरे पास खाने के लिये ऐसा भोजन है जिसे तुम नहीं जानते।
John 4:33 तब चेलों ने आपस में कहा, क्या कोई उसके लिये कुछ खाने को लाया है?
John 4:34 यीशु ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30



गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

फल


   मैं अपने किए को पलट नहीं सकती थी। एक महिला ने मेरे आगे अपनी कार को मार्ग में खड़ा किया और पास रखे डिब्बे में कुछ चीज़ों को डालने के लिए चली गई, जिससे पेट्रोल भरवाने के पम्प तक पहुँचाने का मेरा मार्ग अवरुद्ध हुआ। क्योंकि मैं प्रतीक्षा नहीं करना चाहती थी, इसलिए मैंने क्रोधावेश में जोर से हॉर्न बजाया और अपने गाड़ी को पीछे कर के घुमा कर पेट्रोल पम्प की ओर चली गई। तुरंत ही मुझे अपने इस प्रकार अधीर और क्रोधित होने का बुरा लगा, कि मैं उस महिला के लौटकर अपनी कार को आगे बढ़ा लेने का, जिसमें उसे 30 सेकेंड से अधिक नहीं लगते, प्रतीक्षा नहीं कर सकी। मैंने परमेश्वर से क्षमा माँगी। यह ठीक है कि उसे अपनी गाड़ी निर्धारित स्थान पर खड़ी करनी चाहिए थी, परन्तु मुझे भी तो उस कड़ुवाहट के स्थान पर नम्रता और धीरज दिखाना चाहिए था। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी, वह महिला जा चुकी थी, और अब मैं उससे अपने इस कठोर व्यवहार के लिए क्षमा नहीं माँग सकती थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में अनेकों ऐसी शिक्षाएँ दी गई हैं जो हमें सिखाती हैं कि जब औरों के द्वारा हमारे मार्ग या योजनाएं बाधित हों, तो हमें कैसे प्रत्युत्तर देना चाहिए। एक स्थान पर लिखा है, “मूढ़ की रिस उसी दिन प्रगट हो जाती है, परन्तु चतुर अपमान को छिपा रखता है” (नीतिवचन 12:16)। एक अन्य में कहा गया है, “मुकद्दमे से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं” (20:3)। और यह भी है जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है, “मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है” (29:11)।

   कभी-कभी नम्रता और धैर्य में बढना बहुत कठिन लगता है, परन्तु पौलुस प्रेरित ने बताया है कि ये गुण विक्सित करना परमेश्वर द्वारा संभव है; क्योंकि ये परमेश्वर के पवित्र आत्मा के फल है (गलतियों 5:22-23)। हम अपने व्यवहार में जितना अधिक परमेश्वर के आत्मा के साथ सहयोग करते हैं, उस पर निर्भर होते हैं, उतना अधिक वह हमारे अन्दर अपने फल उत्पन्न करता जाता है।

   हे प्रभु हमें अन्दर से परिवर्तित कीजिए, हमारे अन्दर बहुतायत से अपनी आत्मा के फल उत्पन्न कीजिए! – ऐनी सेटास

                  
परमेश्वर हमारे हृदयों को विशाल करने के लिए हमारे धैर्य की परिक्षा लेता है।

तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। - यूहन्ना 15:16

बाइबल पाठ: गलतियों 5:13-26
Galatians 5:13 हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
Galatians 5:15 पर यदि तुम एक दूसरे को दांत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।
Galatians 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।
Galatians 5:17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
Galatians 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज,
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।
Galatians 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Galatians 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
Galatians 5:26 हम घमण्‍डी हो कर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51



बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

शान्ति


   क्लीवलैंड ब्राउन फुटबॉल कल्ब का आजीवन समर्थक होने के कारण मैं निराशाओं से होकर निकलना जानता हूँ। मेरी यह टीम, प्रतिस्पर्धाओं में इस खेल के सर्वोच्च स्तर की चैम्पियनशिप पर कभी न पहुंच पाने वाली चार टीमों में से एक है। परन्तु फिर भी इस टीम के अपने वफादार समर्थक हैं जो वर्ष-प्रतिवर्ष इसके साथ बने रहते हैं। परन्तु क्योंकि इन समर्थकों को अकसर निराशा ही का सामना करना पड़ता है, इसलिए इस टीम के गृह-स्टेडियम को “उदासी का कारखाना” कहा जाता है।

   पाप और निराशाओं से टूटा हुआ यह सँसार भी “उदासी का कारखाना” हो सकता है। यहाँ दिल दुखाने या निराश करने वाली बातों की उपलब्धता का कोई अन्त नहीं है। ये बातें चाहे हमारे अपने चुनावों के कारण हों या हमारे नियंत्रण से बाहर की बातों के कारण।

   परन्तु प्रभु यीशु मसीह के शिष्यों के पास एक अद्भुत आशा है, जो न केवल आने वाले जीवन के लिए है वरन आज के दिन के लिए भी है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, “मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु मसीह द्वारा कहे गए इस कथन में ध्यान कीजिए कि उन्होंने किसी के भी द्वारा अनुभव हो सकने वाले संघर्षों या दुखों में किसी प्रकार की कोई भी कमी के किए जाने का आश्वासन दिए बिना, उन विपरीत और दुखदायी परिस्थितियों का प्रतिरोध, प्रभु से मिलने वाली शान्ति, आनन्द, और अंतिम विजय की प्रतिज्ञाओं से किया है।

   प्रभु यीशु में महान शान्ति उपलब्ध है; इतनी कि सँसार और जीवन से मिलने वाली कितनी भी, किसी भी विचलित या दुखदायी परिस्थिति में से होकर हम सुरक्षित और विजयी निकल सकें। - बिला क्राऊडर


हमारी आशा और शान्ति प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें मिलती है।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:28-33
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं।
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता।
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है।
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो?
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है।
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28



मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

सिद्ध स्थान


   मुझमें और आप में कुछ बात समान है – हम दोनों ही बिगड़े हुए, परेशान और दूषित संसार में रहते हैं, और हमने इसे इससे भिन्न कभी नहीं देखा-जाना है। परन्तु हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा के लिए ऐसा नहीं था; वे जानते थे कि उनके पाप के कारण सृष्टि पर आए श्राप से पहले सृष्टि तथा जीवन कैसा था। वे याद कर सकते थे कि सँसार को परमेश्वर ने कैसा बनाया और रखा था – मृत्यु, कठिनाई, और पीड़ा से मुक्त (उत्पत्ति 3:16-19)। पाप के प्रवेश से पहले अदन की वाटिका में भूख, बीमारी, बेरोजगारी आदि नहीं थे; उन दिनों में कोई परमेश्वर की सृजन-शक्ति पर संदेह नहीं करता था, और न ही कोई मानवीय व्यवहार तथा संबंधों के लिए उसकी योजनाओं के विषय प्रश्न करता था।

   जिस सँसार में हम अब हैं वह परमेश्वर द्वारा बनाए गए उस सिद्ध सँसार के बहुत ही कम समान है। सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्युईस ने लिखा, “यह एक अच्छा सँसार है जो बुरा हो गया है, परन्तु अभी भी यह, जैसा उसे होना चाहिए था, उसकी याद को संजोए हुए है।” सौभाग्यवश, सँसार को जैसा होना चाहिए था, उसकी यह धूमिल सी याद भी आने वाले भविष्य की एक झलक प्रदान करती है। जैसे अदन की वाटिका में आदम और हव्वा परमेश्वर के साथ स्वच्छानन्द घूमते थे, उससे आमने-सामने बात-चीत करते थे, वैसे ही उस आने वाले अनन्तकाल में मसीही विश्वासी भी परमेश्वर को आमने-सामने देखेंगे और सीधे उसकी सेवा करेंगे। वहाँ परमेश्वर और उसके बच्चों के बीच में आने वाला कोई भी, कुछ भी नहीं होगा। वहाँ पाप के श्राप का कोई प्रभाव नहीं होगा (प्रकाशितवाक्य 22:3); वहाँ कोई पाप, भय, या लज्जा नहीं होगी।

   बीते समय के पाप की परछाईं हमारे आज पर तो है, परन्तु मसीही विश्वासी की नियति में उसके लिए एक अच्छे स्थान की दृढ़ प्रतिज्ञा है – अदन की वाटिका के समान सिद्ध स्थान की! – जेनिफर बेन्सन शुल्ट


एक दिन परमेश्वर सब कुछ ठीक कर देगा।

और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं। - 2 कुरिन्थियों 4:18

बाइबल पाठ: प्रकाशिवाक्य 22:1-5
Revelation 22:1 फिर उसने मुझे बिल्लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्वर और मेंम्ने के सिंहासन से निकल कर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी।
Revelation 22:2 और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे।
Revelation 22:3 और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे।
Revelation 22:4 और उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उन के माथों पर लिखा हुआ होगा।
Revelation 22:5 और फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले का प्रयोजन न होगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा: और वे युगानुयुग राज्य करेंगे।


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 39-40
  • मत्ती 23:23-39



सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

सेवक


   पारंपरिक अफ्रीकी समाज में, नेतृत्व के लिए उत्तराधिकारी का चयन गंभीर निर्णय होता है। राजा के देहांत के पश्चात अगले अगुवे को चुनने में बहुत सावधानी बरती जाती है। उस नए अगुवे को न केवल राजसी परिवार में से होना होता है, वरन उसे बलवान, निर्भीक और समझदार भी होना होता है। निर्णय करने के लिए पदाभिशिलाषियों से पूछ-ताछ की जाती है, यह जानने के लिए कि वे  प्रजा की सेवा करेंगे या उन पर कठोरता से शासन करेंगे। राजा के उत्तराधिकारी को ऐसा होना चाहिए जो नेतृत्व भी प्रदान करे और सेवा भी करे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा सुलेमान ने अनेकों व्यक्तिगत गलत निर्णय लिए, गलत चुनाव किए, परन्तु वह अपने उत्तराधिकारी को लेकर चिन्तित था। उसने अपनी इस चिंता के विषय लिखा “मैं ने अपने सारे परिश्रम के प्रतिफल से जिसे मैं ने धरती पर किया था घृणा की, क्योंकि अवश्य है कि मैं उसका फल उस मनुष्य के लिये छोड़ जाऊं जो मेरे बाद आएगा। यह कौन जानता है कि वह मनुष्य बुद्धिमान होगा वा मूर्ख? तौभी धरती पर जितना परिश्रम मैं ने किया, और उसके लिये बुद्धि प्रयोग की उस सब का वही अधिकारी होगा। यह भी व्यर्थ ही है” (सभोपदेशक 2:18-19)। सुलेमान के बाद उसका पुत्र रहूबियाम उसकी गद्दी पर बैठा; परन्तु उसने नासमझी से काम लिया और उसका पिता जिस बात के होने से डरता था, वही कर बैठा।

   जब प्रजा के लोगों ने रहूबियाम से कार्य स्थिति को सुधार कर उसे और मानवीय बनाने की माँग की, तो यह उसके पास अवसर था कि वह सेवक और अगुवा होने की दोनों ही जिम्मेदारियों को निभाए। राज्य के प्राचीनों ने उसे परामर्श दिया, “...यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके आधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे आधीन बने रहेंगे” (1 राजा 12:7), किंतु उसने उनकी इस नेक सलाह को नहीं माना। रहूबियाम ने परमेश्वर की इच्छा भी जानने का प्रयास नहीं किया। प्रजा के प्रति उसके कठोर प्रत्युत्तर के कारण राज्य विभाजित हो गया और परमेश्वर के लोगों का आत्मिक पतन गतिमान हो गया (12:14-19)।

   हमारे परिवारों, कार्यस्थल, चर्च, पड़ौस इत्यादि की बातों और निर्णयों में हमें परमेश्वर से मिलने वाली इस समझ-बूझ की बहुत आवश्यकता होती है, जिससे नम्रता के साथ और सेवक बन कर निर्णय लें और कार्य करें न कि रौब गाँठ कर और कठोरता से। - लौरेंस दरामानी


अच्छा अगुवा अच्छा सेवक भी होता है।

यीशु ने उन्हें पास बुलाकर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं। परन्तु तुम में ऐसा न होगा; परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने। जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे। - मत्ती 20: 25-28

बाइबल पाठ: 1 राजा 12:1-15
1 Kings 12:1 रहूबियाम तो शकेम को गया, क्योंकि सब इस्राएली उसको राजा बनाने के लिये वहीं गए थे।
1 Kings 12:2 और जब नबात के पुत्र यारोबाम ने यह सुना, (जो अब तक मिस्र में रहता था, क्योंकि यारोबाम सुलैमान राजा के डर के मारे भगकर मिस्र में रहता था।
1 Kings 12:3 सो उन लोगों ने उसको बुलवा भेजा) तब यारोबाम और इस्राएल की समस्त सभा रहूबियाम के पास जा कर यों कहने लगी,
1 Kings 12:4 कि तेरे पिता ने तो हम लोगों पर भारी जूआ डाल रखा था, तो अब तू अपने पिता की कठिन सेवा को, और उस भारी जूए को, जो उसने हम पर डाल रखा है, कुछ हलका कर; तब हम तेरे आधीन रहेंगे।
1 Kings 12:5 उसने कहा, उभी तो जाओ, और तीन दिन के बाद मेरे पास फिर आना। तब वे चले गए।
1 Kings 12:6 तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने उपस्थित रहा करते थे सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो?
1 Kings 12:7 उन्होंने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके आधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे आधीन बने रहेंगे।
1 Kings 12:8 रहूबियाम ने उस सम्मति को छोड़ दिया, जो बूढ़ों ने उसको दी थी,और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे, और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
1 Kings 12:9 उन से उसने पूछा, मैं प्रजा के लोगों को कैसा उत्तर दूं? उस में तुम क्या सम्मति देते हो? उन्होने तो मुझ से कहा है, कि जो जूआ तेरे पिता ने हम पर डाल रखा है, उसे तू हलका कर।
1 Kings 12:10 जवानों ने जो उसके संग बड़े हुए थे उसको यह उत्तर दिया, कि उन लोगों ने तुझ से कहा है, कि तेरे पिता ने हमारा जूआ भारी किया था, परन्तु तू उसे हमारे लिऐ हलका कर; तू उन से यों कहना, कि मेरी छिंगुलिया मेरे पिता की कमर से भी मोटी है।
1 Kings 12:11 मेरे पिता ने तुम पर जो भारी जूआ रखा था, उसे मैं और भी भारी करूंगा; मेरा पिता तो तुम को कोड़ों से ताड़ना देता था, परन्तु मैं बिच्छुओं से दूंगा।
1 Kings 12:12 तीसरे दिन, जैसे राजा ने ठहराया था, कि तीसरे दिन मेरे पास फिर आना, वैसे ही यारोबाम और समस्त प्रजागण रहूबियाम के पास उपस्थित हुए।
1 Kings 12:13 तब राजा ने प्रजा से कड़ी बातें कीं,
1 Kings 12:14 और बूढ़ों की दी हुई सम्मति छोड़कर, जवानों की सम्मति के अनुसार उन से कहा, कि मेरे पिता ने तो तुम्हारा जूआ भारी कर दिया, परन्तु मैं उसे और भी भारी कर दूंगा: मेरे पिता ने तो कोड़ों से तुम को ताड़ना दी, परन्तु मैं तुम को बिच्छुओं से ताड़ना दूंगा।
1 Kings 12:15 सो राजा ने प्रजा की बात नहीं मानी, इसका कारण यह है, कि जो वचन यहोवा ने शीलोवासी अहिय्याह के द्वारा नबात के पुत्र यारोबाम से कहा था, उसको पूरा करने के लिये उसने ऐसा ही ठहराया था।


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 36-38
  • मत्ती 23:1-22