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शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

भोजन


   मीट-माउनटेन नामक सुपर-सैंडविच में गोश्त की छः परतें होती हैं। चिकन, बेकन, चीज़ और अन्य कई वस्तुओं से बना यह सैंडविच, दिखने में तो किसी भी रेस्टोरेंट की भोजन सूची में होना चाहिए; परन्तु मीट माउनटेन रेस्टोरेंटों की भोजन सूची में पाया नहीं जाता है। यह उन भोजन व्स्स्तुओं में से एक है जिसके बारे में केवल सोशल मीडिया में पता होता है या फिर जिसे माँग कर बनावाया जाता है। लगता है कि प्रतिस्पर्धा के कारण फास्ट-फूड रेस्टोरेंट अपने जानकर और विशेष ग्राहकों के लिए एक गुप्त भोजन सूची रखने पर विवष हैं।

   जब प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि उनके पास ऐसा भोजन है वे जिसके बारे में जानते नहीं हैं, तो उन शिष्यों को भी लगा होगा कि प्रभु के पास कोई गुप्त भोजन सूची उपलब्ध है (यूहन्ना 4:32)। प्रभु ने उनके असमंजस को भाँप लिया और स्पष्ट किया कि उसका भोजन अपने पिता की इच्छा को पूरा करना और उसे सौंपे गए कार्य को पूरा करना था  (पद 34)।

   प्रभु यीशु तब याकूब के कुएँ के निकट बैठकर सामरी स्त्री से बातचीत कर रहा था, और उसे उस जीवन जल के बारे में बताया था जिसके बारे में उस स्त्री ने कभी सुना भी नहीं था। बातचीत के दौरान प्रभु ने जीवन के लिए उसका स्त्री की अनबुझी प्यास के बारे में अलौकिक समझ प्रकट की। जब प्रभु ने उस स्त्री के सामने अपने आप को प्रकट किया तो तुरंत ही वह अपने घड़े वहीं छोड़कर अपने पड़ौसियों से यह पूछने के लिए भागी चली गई कि “कहीं यही तो मसीह नहीं?” (पद 29)।

   पहले जो गुप्त था, अब सबके लिए उपलब्ध है। प्रभु यीशु का सँसार के सभी लोगों को खुला निमंत्रण है कि वे उसके पास आएँ क्योंकि वह उनके मन की प्रत्येक आवश्यकता की आपूर्ति करने के लिए सक्षम है। जब हम उसके पास आते हैं तो पाते हैं कि वह न केवल हमारी शारीरिक भूख वरन आत्मिक भूख भी तृप्त कर सकता है। उससे मिलने वाला भोजन हर आवश्यकता के लिए काफी है। - मार्ट डीहान


सँसार की आत्मिक भूख को 
केवल जीवित रोटी मसीह यीशु ही तृप्त कर सकता है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4: 27-34
John 4:27 इतने में उसके चेले आ गए, और अचम्भा करने लगे, कि वह स्त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न कहा, कि तू क्या चाहता है? या किस लिये उस से बातें करता है।
John 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी।
John 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?
John 4:30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।
John 4:31 इतने में उसके चेले यीशु से यह बिनती करने लगे, कि हे रब्बी, कुछ खा ले।
John 4:32 परन्तु उसने उन से कहा, मेरे पास खाने के लिये ऐसा भोजन है जिसे तुम नहीं जानते।
John 4:33 तब चेलों ने आपस में कहा, क्या कोई उसके लिये कुछ खाने को लाया है?
John 4:34 यीशु ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30



शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

भरपेट


   एक मित्र ने, जो सिंगापुर में रहता है, एक पुराने चीनी अभिवादन के बारे में बताया। यह पूछने की बजाए कि "आप कैसे हैं?" लोग पूछते "क्या आपने भरपेट भोजन किया?" संभवतः यह अभिवादन उस समय आरंभ हुआ था जब लोगों के पास भोजन की कमी थी और बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता था कि उन्हें अगला भोजन कब मिलेगा। जब भी भोजन उपलब्ध होता तब भरपेट भोजन कर लेने में ही बुद्धिमानी होती थी।

   प्रभु यीशु के 5000 से अधिक लोगों को दो मछली और पाँच रोटी से भरपेट भोजन कराने के पश्चात (यूहन्ना 6:1-13), वह भीड़ प्रभु यीशु के पीछे पीछे आई, क्योंकि उन्हें और भोजन मिलने की आशा थी (पद 24-26)। तब उस भीड़ से प्रभु यीशु ने कहा कि वे शारीरिक नहीं वरन आत्मिक भोजन के लिए मेहनत करें, उसकी लालसा रखें, जो उन्हें प्रभु यीशु से ही मिल सकता था: "नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। ... यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा" (यूहन्ना 6:27; 35)।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सहायाता करें जिनके पास शारीरिक भोजन नहीं है लेकिन उससे भी बढ़कर उन्हें उस आत्मिक भोजन के बारे में बताएं जो उन्हें भीतरी शान्ति, पाप क्षमा और अनन्त जीवन प्रदान कर सकता है, अर्थात प्रभु यीशु मसीह।

   जीवन की रोटी, प्रभु यीशु मसीह आज हमें निमंत्रण दे रहा है कि हम उसके पास आएं और अपनी आत्मा की हर भूख को उससे तृप्त करें, उससे भरपेट खाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


आत्मा की प्रत्येक भूख को केवल प्रभु यीशु ही तृप्त कर सकता है।

जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस(शरीर) है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:24-35
John 6:24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे। 
John 6:25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया? 
John 6:26 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
John 6:27 नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। 
John 6:28 उन्होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्या करें? 
John 6:29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। 
John 6:30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
John 6:31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उसने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी। 
John 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है। 
John 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है। 
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39