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बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

ज्योति



      यूनानी दार्शनिक प्लेटो (c.427 – c.348 ईसा पूर्व) ने मानव हृदय के अँधेरे भाग पर ज्योति चमकाने का एक अनूठा मार्ग लिया। उसने एक कहानी बनाई, कि एक भूकंप के कारण किसी पहाड़ के निकट की एक कब्र खुल गई और उसमें छिपी एक सुनहरी अंगूठी एक चरवाहे को दिखाई दी। उस चरवाहे को यह भी पता चला कि उस अंगूठी में एक करिशमाई ताकत भी है – उसे पहनने वाला अपनी इच्छानुसार अदृश्य भी हो सकता है। अदृश्यता की बात करते हुए प्लेटो ने एक प्रश्न उठाया, “यदि लोगों को पकड़े जाने और दण्ड भुगतने का भय न हो, तो क्या वे बुरा अथवा गलत करने से अपने आप को रोकेंगे?”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने ऐसे ही एक विचार को भिन्न दिशा दी। वहाँ, प्रभु यीशु मसीह ने, जिसे अच्छा चरवाहा भी कहा गया है, ऐसे हृदयों की बात की जो अपने किए को छुपाए रखने के लिए अन्धकार में छिपे रहते हैं (यूहन्ना 3:19-20)। वह बात को छिपाए रखने की हमारी इच्छा की ओर हमारा ध्यान में हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं खींच रहे हैं, परन्तु हमें उनमें होकर मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के विषय बताने के लिए ऐसा कर रहे हैं (पद 17)। हमारे हृदय का चरवाहा होने के कारण, वह हमारे मानवीय हृदय और स्वभाव की सबसे बुरी स्थिति को उजागर करते हैं, यह प्रमाणित करने के लिए कि फिर भी परमेश्वर पिता हम से कितना प्रेम करते हैं (पद 16)।

      परमेश्वर अपने अनुग्रह में हमें पाप के अन्धकार से निकलकर उसकी ज्योति में चलने का निमंत्रण देता है, जिससे हम उसके साथ अनन्तकाल तक आशीषित जीवन व्यतीत कर सकें। - मार्ट डीहान


प्रभु यीशु की ज्योति आने पर पाप का अन्धकार मिट जाता है।

और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। - 2 कुरिन्थियों 4:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3: 16-21
John 3:16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
John 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
John 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
John 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।
John 3:20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
John 3:21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

संपूर्ण पहुँच



      कुछ वर्ष पहले, मेरे एक मित्र ने मुझे निमंत्रण दिया कि मैं उसके साथ एक व्यवासायिक गोल्फ स्पर्धा में दर्शक बनकर चलूं। ऐसी स्पर्धा में जाने का यह मेरा प्रथम अवसर था, और मुझे कुछ पता नहीं था कि क्या होगा। वहाँ पहुँचने पर मुझे आश्चर्य हुआ जब हमें उपहार, उस स्थान की जानकारी और गोल्फ के मैदान के नक़्शे दिए गए। लेकिन सबसे बढ़कर बात थी कि हमें खेल के सबसे विशेष स्थान में अति विशिष्ट लोगों के लिए लगे तम्बू में प्रवेश मिला जहाँ न केवल बैठने की व्यवस्था थी, वरन मुफ्त भोजन भी था। मैं उस तम्बू में कभी अपने आप से प्रवेश प्राप्त नहीं कर सकता था। यह कर पाना मेरे उस मित्र के कारण संभव हुआ, जिसने मुझे वहाँ की सभी बातों के लिए संपूर्ण पहुँच प्रदान करवाई।

      यदि हम केवल अपने ही भरोसे और प्रयासों पर होते तो हम परमेश्वर से सदा ही दूर रहते। परन्तु प्रभु यीशु ने हमारे पाप के दण्ड को अपने ऊपर ले लिया, और उसमें होकर हमें परमेश्वर तक पहुँच और उसका अनन्त जीवन मिलता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने लिखा, “ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्‍वर्गीय स्थानों में हैं प्रगट किया जाए” (इफिसियों 3:10)। इस ज्ञान से अब यहूदियों और अन्यजातियों का मसीह में परस्पर मेल करवा दिया और प्रभु में होकर परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग बनाकर दे दिया; “जिस में हम को उस पर विश्वास रखने से हियाव और भरोसे से निकट आने का अधिकार है” (पद 12)।

      हम जब प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं, हमें सबसे महान पहुँच मिलती है – परमेश्वर तक संपूर्ण पहुँच, जो हमसे प्रेम करता है और हमारे साथ संबंध में रहना चाहता है। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के क्रूस के कारण हम परमेश्वर के मित्र बन सकते हैं।

पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। - इफिसियों 2:13-14

बाइबल पाठ: इफिसियों 3: 6-13
Ephesians 3:6 अर्थात यह, कि मसीह यीशु में सुसमाचार के द्वारा अन्यजातीय लोग मीरास में साझी, और एक ही देह के और प्रतिज्ञा के भागी हैं।
Ephesians 3:7 और मैं परमेश्वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार, जो उसकी सामर्थ के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया, उस सुसमाचार का सेवक बना।
Ephesians 3:8 मुझ पर जो सब पवित्र लोगों में से छोटे से भी छोटा हूं, यह अनुग्रह हुआ, कि मैं अन्यजातियों को मसीह के अगम्य धन का सुसमाचार सुनाऊं।
Ephesians 3:9 और सब पर यह बात प्रकाशित करूं, कि उस भेद का प्रबन्‍ध क्या है, जो सब के सृजनहार परमेश्वर में आदि से गुप्‍त था।
Ephesians 3:10 ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्‍वर्गीय स्थानों में हैं प्रगट किया जाए।
Ephesians 3:11 उस सनातन मनसा के अनुसार, जो उसने हमारे प्रभु मसीह यीशु में की थी।
Ephesians 3:12 जिस में हम को उस पर विश्वास रखने से हियाव और भरोसे से निकट आने का अधिकार है।
Ephesians 3:13 इसलिये मैं बिनती करता हूं कि जो क्‍लेश तुम्हारे लिये मुझे हो रहे हैं, उनके कारण हियाव न छोड़ो, क्योंकि उन में तुम्हारी महिमा है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29



सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

संपूर्ण


      परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, कालिब संपूर्ण मन से परमेश्वर का काम करने वाला व्यक्ति था। मिस्र के दासत्व से इस्राएल के निकलने के पश्चात जब प्रतिज्ञा किए हुए देश के विषय जानकारी लेने के लिए बारह लोगों के दल को कनान देश में टोह लेने के लिए भेजा गया तो उनमें यहोशू और कालिब भी थे। उस दल ने आकर मूसा और इस्राएल की मण्डली को देश के विषय बताया, और लोगों को घबरा दिया। किन्तु कालिब ने कहा “पर कालेब ने मूसा के साम्हने प्रजा के लोगों को चुप कराने की मनसा से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें; क्योंकि नि:सन्देह हम में ऐसा करने की शक्ति है” (गिनती 13:30), और यहोशू ने भी उसका साथ दिया। किन्तु शेष दस सदस्यों ने कहा कि उनके सफल होने की संभावन बहुत कम है, और केवल बाधाओं को ही देखा (पद 31-33)।

      उन दस लोगों के द्वारा औरों को हताश करने के कारण इस्राएली परमेश्वर के विरुद्ध बड़बड़ाने  लगे, जिसके परिणामस्वरूप इस्राएलियों को चालीस वर्ष की जंगल की यात्रा झेलनी पड़ी। किन्तु कालेब ने कभी हार नहीं मानी, और उसके विषय परमेश्वर की गवाही थी, “मेरे दास कालिब के साथ और ही आत्मा है, और उसने पूरी रीति से मेरा अनुकरण किया है, मैं उसको उस देश में जिस में वह हो आया है पहुंचाऊंगा, और उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा” (गिनती 14:24)। इस घटना के पैंतालीस वर्ष पश्चात, परमेश्वर ने कालिब को, 85 वर्ष की आयु में, हेब्रोन नगर दिया क्योंकि “...वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का पूरी रीति से अनुगामी था” (यहोशू 14:14)।

      इसके सदियों बाद एक व्यवस्थापक ने प्रभु यीशु मसीह से पूछा, “हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” और प्रभु यीशु मसीह का उत्तर था, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है” (मत्ती 22:35-38)।

      हम आज भी कालिब के जीवन से प्रोत्साहन प्राप्त करते हैं, परमेश्वर के प्रति उसके भरोसे के द्वारा; उस परमेश्वर के प्रति जो हमारे संपूर्ण प्रेम, भरोसे और समर्पण के योग्य है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीह यीशु के प्रति समर्पण प्रति दिन की बुलाहट है।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23

बाइबल पाठ: गिनती 13:26-32; 14:20-24
Numbers 13:26 और पारान जंगल के कादेश नाम स्थान में मूसा और हारून और इस्त्राएलियों की सारी मण्डली के पास पहुंचे; और उन को और सारी मण्डली को संदेशा दिया, और उस देश के फल उन को दिखाए।
Numbers 13:27 उन्होंने मूसा से यह कहकर वर्णन किया, कि जिस देश में तू ने हम को भेजा था उस में हम गए; उस में सचमुच दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, और उसकी उपज में से यही है।
Numbers 13:28 परन्तु उस देश के निवासी बलवान हैं, और उसके नगर गढ़ वाले हैं और बहुत बड़े हैं; और फिर हम ने वहां अनाकवंशियों को भी देखा।
Numbers 13:29 दक्षिण देश में तो अमालेकी बसे हुए हैं; और पहाड़ी देश में हित्ती, यबूसी, और एमोरी रहते हैं; और समुद्र के किनारे किनारे और यरदन नदी के तट पर कनानी बसे हुए हैं।
Numbers 13:30 पर कालेब ने मूसा के साम्हने प्रजा के लोगों को चुप कराने की मनसा से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें; क्योंकि नि:सन्देह हम में ऐसा करने की शक्ति है।
Numbers 13:31 पर जो पुरूष उसके संग गए थे उन्होंने कहा, उन लोगों पर चढ़ने की शक्ति हम में नहीं है; क्योंकि वे हम से बलवान हैं।
Numbers 13:32 और उन्होंने इस्त्राएलियों के साम्हने उस देश की जिसका भेद उन्होंने लिया था यह कहकर निन्दा भी की, कि वह देश जिसका भेद लेने को हम गये थे ऐसा है, जो अपने निवासियों निगल जाता है; और जितने पुरूष हम ने उस में देखे वे सब के सब बड़े डील डौल के हैं।
Numbers 14:20 यहोवा ने कहा, तेरी बिनती के अनुसार मैं क्षमा करता हूं;
Numbers 14:21 परन्तु मेरे जीवन की शपथ सचमुच सारी पृथ्वी यहोवा की महिमा से परिपूर्ण हो जाएगी;
Numbers 14:22 उन सब लोगों ने जिन्होंने मेरी महिमा मिस्र देश में और जंगल में देखी, और मेरे किए हुए आश्चर्यकर्मों को देखने पर भी दस बार मेरी परीक्षा की, और मेरी बातें नहीं मानी,
Numbers 14:23 इसलिये जिस देश के विषय मैं ने उनके पूर्वजों से शपथ खाई, उसको वे कभी देखने न पाएंगे; अर्थात जितनों ने मेरा अपमान किया है उन में से कोई भी उसे देखने न पाएगा।
Numbers 14:24 परन्तु इस कारण से कि मेरे दास कालिब के साथ और ही आत्मा है, और उसने पूरी रीति से मेरा अनुकरण किया है, मैं उसको उस देश में जिस में वह हो आया है पहुंचाऊंगा, और उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43


रविवार, 24 फ़रवरी 2019

भरोसा



      सन 2002 में अपनी सत्रह वर्षीय पुत्री मेलिस्सा को एक कार-दुर्घटना में खो देने के इतने वर्ष बाद भी, मैं कभी-कभी अपने आप को “क्या होता यदि...” के विचारों में खोया हुआ पाता हूँ। इस दुःख में यह सोचना सरल होता है कि जून महीने के उस दुखद दिन की घटनाओं में यदि कुछ बातों को पुनःव्यवस्थित कर दिया जाता तो मेलिस्सा आज भी हमारे साथ होती।

      किन्तु वास्तविकता में, “क्या होता यदि...” में हमारे लिए रहना अच्छा नहीं है। वह स्थान पछतावे, अनुमान लगाने, और निराशा का स्थान है। यद्यपि दुःख वास्तविक है और उसका शोक बना रहता है, परन्तु यदि हम उस स्थिति में बने रहें जो वास्तविकता की स्थिति है, तो इससे जीवन हमारे लिए बेहतर होगा और यह परमेश्वर को भी आदर देगा।

      वास्तविकता की स्थिति में रहने से हम आशा, प्रोत्साहन, और शान्ति प्राप्त करते हैं। हमारे पास एक निश्चित आशा है (1 थिस्सलुनीकियों 4:13) – इस आश्वासन से – क्योंकि मेलिस्सा प्रभु यीशु मसीह से प्रेम करती थी इसलिए अब वह एक ऐसे स्थान पर है जो “बहुत ही अच्छा है” (फिलिप्पियों 1:23)। हमारे साथ समस्त शान्ति के परमेश्वर की उपस्थिति है “हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है” (2 कुरिन्थियों 1:3); जो “..हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक” (भजन 46:1); और अन्य मसीही विश्वासियों से मिलने वाला प्रोत्साहन है।

      हम सभी, जीवन की त्रासदियों से बच कर रहना चाहते हैं। परन्तु जब हम कठिन परिस्थितियों का सामना करें तो हमारी सबसे उत्तम सहायता परमेश्वर पर भरोसा रखने के द्वारा होती है। - डेव ब्रैनन


हमारी सबसे महान आशा परमेश्वर पर भरोसा रखने से है।

हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों के समान शोक करो जिन्हें आशा नहीं। - 1 थिस्सलुनीकियों 4:13

बाइबल पाठ: भजन 46:1-7
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20



शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

दौड़



      मेरे सबसे पसंदीदा टेलिविज़न प्रोग्रामों में से एक है The Amazing Race जो वास्तविकता में होने वाली एक प्रतिस्पर्धा दौड़ का प्रसारण है। इस रियालिटी शो में दस जोड़ों को विदेश भेजा जाता है जहाँ उन्हें ट्रेन, बस, टैक्सी, बाईक्स, और पैदल यात्रा करके एक से दूसरे स्थान तक पहुँचाना होता है, जहाँ से उन्हें फिर उससे अगले स्थान के लिए निर्देश मिलते हैं। दौड़ का उद्देश्य है कि एक जोड़ा अन्य सभी से पहले अंतिम स्थान पर पहुँचे, और जीतने वाले को दसलाख अमेरिकी डॉलर ईनाम में मिलते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही जीवन की तुलना भी एक दौड़ से की, और कहा कि वह अब तक समापन रेखा तक नहीं पहुँचा है, वरन दौड़ को पूरा करने में प्रयासरत है – “हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह ईनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है” (फिलिप्पियों 3:13-14)।

      पौलुस ने बीते समय की अपनी असफलताओं के दोष-बोध को उसे अपनी इस दौड़ में दौड़ने से बाधित नहीं करने दिया; और न ही उसने अपनी वर्तमान सफलताओं को उसे इस दौड़ में ढीला पड़ने दिया। वह बस मसीह यीशु की समानता में ढलते जाने की इस दौड़ में निरन्तर प्रयास करता रहा।

      हम सभी मसीही विश्वासी पौलुस के समान इस दौड़ में हैं। अपनी असफलताओं या सफलताओं के बावजूद, हम मसीह यीशु की समानता में ढलते जाने के उस अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ने में लगे रहें। हम किसी सांसारिक ईनाम के लिए नहीं दौड़ रहे हैं, वरन मसीह यीशु के साथ अनन्त काल के लिए रहने और आनदित होने के ईनाम के लिए दौड़ रहे हैं। - मारविन विलियम्स


मसीह यीशु का अनुसरण करते रहने को कभी छोड़ न दें।

मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:7-8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों  3:12-21
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।
Philippians 3:18 क्योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार की है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
Philippians 3:19 उन का अन्‍त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं।
Philippians 3:20 पर हमारा स्‍वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं।
Philippians 3:21 वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:12-41



शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

सिद्ध



      मुझे प्रभु यीशु द्वारा दी गई शिक्षाओं में परमेश्वर के सिद्ध आदर्शों और परमेश्वर के सिद्ध अनुग्रह में विरोधाभास प्रतीत होता था। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने कभी परमेश्वर के आदर्शों के स्तर को कम नहीं किया। प्रभु ने अपने शिष्यों से कहा, “इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है” (मत्ती 5:48)। उन्होंने व्यवस्था में सबसे बड़ी आज्ञा के विषय पूछने वाले व्यवस्थापक से कहा “उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख” (मत्ती 22:37)। प्रभु परमेश्वर की इन आज्ञाओं को कोई भी कभी भी पूर्णतः नहीं निभाने पाया है।

      किन्तु यही प्रभु यीशु बड़ी कोमलता से सँसार के सभी लोगों को अपना अनुग्रह प्रदान करता है। उन्होंने व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री को, क्रूस पर उनके साथ चढ़ाए गए और पश्चाताप करने वाले एक डाकू को, अपने उस शिष्य को भी जिसने उनका तीन बार इन्कार किया था, शाऊल (पौलुस) को जो कि मसीही विश्वासियों को सताने के लिए जाना जाता था, अपने अनुग्रह में क्षमा किया। प्रभु का अनुग्रह सिद्ध है, सभी के लिए उनके सभी पापों के लिए है, उनके लिए भी जिन्होंने प्रभु को क्रूस पर ठोका था, “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं” (लूका 23:34)।

      वर्षों तक मैं प्रभु के सिद्ध आदर्शों के समक्ष, अपने आप को प्रभु के सर्वथा अयोग्य समझता था; मैंने प्रभु के सिद्ध अनुग्रह पर कभी विचार ही नहीं किया था। एक बार जब मैंने इस दोहरी सिद्धता के सन्देश को समझ लिया, तो मैंने प्रभु यीशु के जीवन और शिक्षाओं का पुनरवलोकन करने पर पाया कि उनके अनुग्रह का सन्देश उनके संपूर्ण जीवन और शिक्षाओं में विद्यमान है।

      प्रभु यीशु का यह सिद्ध अनुग्रह सँसार के उस प्रत्येक आशाहीन, ज़रूरतमंद, टूटे हुए व्यक्ति के लिए जो अपने आप से पाप पर विजयी होने में असमर्थ होना स्वीकार करता है, और सहायता के लिए प्रभु की ओर हाथ बढ़ाता है, उन्हें अपना हाथ थमा देता है, सदा उपलब्ध है।

      प्रभु का सिद्ध अनुग्रह हम सभी के लिए उपलब्ध है। - फिलिप येन्सी


प्रभु यीशु ने व्यवस्था की सिद्ध अनिवार्यताओं को पूरा कर दिया, 
जिससे हम उसके अनुग्रह की सिद्ध शान्ति का आनन्द ले सकें।

क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। - इफिसियों 2:8-9

बाइबल पाठ: मत्ती 5:43-48; यूहन्ना 8:9-11
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।
Matthew 5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते?
Matthew 5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते?
Matthew 5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।

John 8:9 परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई।
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी।
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20



गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

सन्देश



      बॉस्टन शहर की नॉर्थईस्टर्न विश्वविद्यालय का ‘वायरल टेक्स्ट्स प्रोजेक्ट’ इस बात का अध्ययन कर रहा है कि सन 1800 में छापी गई लेख सामग्री समाचारपत्रों – जो उस समय के ‘सोशल मीडिया’ थे, के द्वारा कैसे प्रसारित हुई। ‘सोशल मीडिया’ पर किसी बात का ‘वायरल’ होने से अभिप्राय होता है उसे थोड़े ही समय में बहुत अधिक बार देखा अथवा सुना अथवा पढ़ा गया हो। उस समय में यदि कोई लेख 50 या अधिक बार पुनः छापा जाता था तो उसे ‘वायरल’ समझा जाता था। स्मिथसोनियन पत्रिका में लिखते हुए, ब्रिट पीटरसन ने ध्यान किया कि उन्नीसवीं सदी का एक लेख जिसमें प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों में से कौन-कौन से उनके मसीही विश्वास के लिए घात किए गए थे, कम से कम 110 भिन्न प्रकाशनों में प्रकाशित हुआ था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित पौलुस ने थिस्सलुनीके के मसीही विश्वासियों को पत्री लिखी तो उसमें प्रभु यीशु मसीह के लिए साहस और आनंद के साथ साक्षी देने के लिए उनकी प्रशंसा की। पौलुस ने उन्हें लिखा, “क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं” (1 थिस्सलुनीकियों 1:8)। इन लोगों में होकर, जिनके जीवन प्रभु यीशु द्वारा बदल दिए गए थे, सुसमाचार का सन्देश ‘वायरल’ हो गया। कठिनाइयों और सताव के बावजूद वे लोग अपने जीवन में आए इस आनन्द और परिवर्तन के प्रति शान्त नहीं रह सके।

      हम मसीह यीशु में होकर मिलने वाली पापों की क्षमा और अनन्त जीवन के वरदान की साक्षी अपने करुणामय हृदयों, सहायता के लिए बढ़े हाथों, और ईमानदारों शब्दों के प्रयोग के द्वारा सँसार के समक्ष रखते हैं। प्रभु यीशु मसीह में क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सन्देश हमारे तथा हमारे संपर्क में आने वाले लोगों के जीवनों में परिवर्तन लाता है। यह सुसमाचार संदेश हमारे द्वारा सदा वायरल होता रहे, जीवनों को परिवर्तित करता रहे। - डेविड मैक्कैस्लैंड


सुसमाचार से बढ़कर कोई सन्देश नहीं है – इसे फैलाते रहें।

यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:18-20

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 1: 1-10
1 Thessalonians 1:1 पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
1 Thessalonians 1:2 हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
1 Thessalonians 1:3 और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं।
1 Thessalonians 1:4 और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो।
1 Thessalonians 1:5 क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे।
1 Thessalonians 1:6 और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे।
1 Thessalonians 1:7 यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने।
1 Thessalonians 1:8 क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं।
1 Thessalonians 1:9 क्योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम कैसे मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो।
1 Thessalonians 1:10 और उसके पुत्र के स्वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात यीशु की, जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3