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Thursday, December 31, 2015

पकड़


   जब भी हम छोटे बच्चों के साथ सड़क पार कर रहे होते हैं, हम अपना हाथ उनकी ओर बढ़ाकर उनसे कहते हैं, "कस कर पकड़ लो" और बच्चे जितना कस कर पकड़ सकते हैं, पकड़ लेते हैं। लेकिन हम उनकी पकड़ की ताकत पर ही निर्भर नहीं रहते; उनके हाथों पर हमारी पकड़ ही उन्हें सुरक्षा देती है उन्हें संभाले रहती है। यही बात परमेश्वर और हमारे साथ, हमारी जीवन यात्रा में लागू है। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें बताया: "यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था" (फिलिप्पियों 3:12); या फिर यूँ कहिए कि "मसीह की पकड़ मुझपर बनी हुई है"।

   लेकिन एक बात निश्चित है: परमेश्वर से हमारी सुरक्षा उस पर हमारी पकड़ के कारण नहीं वरन हम पर मसीह यीशु की पकड़ के कारण है। कोई हमें उसके हाथों से निकाल नहीं सकता - ना शैतान और ना ही स्वयं हम। एक बार जो हाथ उसके हाथ में दे दिया गया, वह अनन्तकाल के लिए सुरक्षित हो गया; उसके हाथों से वह फिर नहीं छूट सकता; यह उसका आश्वासन है: "और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। मेरा पिता, जिसने उन्हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है, और कोई उन्हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता" (यूहन्ना 10:28-29)।

   अर्थात हर मसीही विश्वासी को सुरक्षा का दोहरा आश्वासन है; एक तरफ परमेश्वर पिता और दूसरी तरफ प्रभु यीशु, दोनों ही हमारे हाथों को थामें हमें संभाल कर रखे हुए हैं। हमें संभालने हाथ वे हैं जिन्होंने विशाल पर्वतों, अथाह सागरों और अनन्त अन्तरिक्ष को बनाया है। इसीलिए प्रेरित पौलुस बड़े आनन्द और आश्वासन के साथ कहता है: "...और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:39)। क्या आज आपका हाथ उन सुरक्षित हाथों में है? यदि नहीं तो अभी आपको अवसर है, अपना हाथ मसीह यीशु के हाथों में देकर अपने अनन्त को सर्वदा के लिए सुरक्षित कर लीजिए। - डेविड रोपर


जिसने हमें बनाया, जिसने हमें बचाया, वही हमें संभालता है, सुरक्षित रखता है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-39
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? 
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा? 
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है। 
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। 
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? 
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं। 
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं। 
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, 
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • मलाकी 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 22


Wednesday, December 30, 2015

मिश्रित भावनाएं


   मेरे और मारलीन के लिए "मिश्रित भावनाएं" हमारे विवाह का वर्णन हैं। इस बात को गलत मत समझिए; 35 वर्ष पूर्व हुआ हमारा विवाह वह घटना है जिसका उत्सव हम आज भी मना रहे हैं। किंतु उस समय हुए विवाह का समारोह कुछ फीका रह गया था क्योंकि कुछ सप्ताह पहले ही मार्लीन की माँ का कैंसर से देहांत हो गया था। मारलीन की मौसी विवाह समारोह में ’दुल्हन की माँ’ के रूप में खड़ी हुई थीं और उन्होंने सारे दायित्व बड़े अच्छे से निर्वाह किए थे, लेकिन माँ का ना होना खटक रहा था और सब कुछ को प्रभावित कर रहा था।

   हमारा यह अनुभव पाप के दुषप्रभावों से टूटे संसार के वास्तविक जीवन को दिखाता है। इस संसार में हमारे अनुभव अच्छे, बुरे, आनन्द और दुःखों का मिश्रण हैं। यह वह तथ्य है जिसे राजा सुलेमान ने भी स्वीकार किया और लिखा, "हंसी के समय भी मन उदास होता है, और आनन्द के अन्त में शोक होता है" (नीतिवचन 14:13)। आनन्दित हृदय भी शोकित रहता है क्योंकि कभी कभी यही जीवन की मांग होती है।

   लेकिन धन्यवाद की बात यह है कि यह जीवन ही सब कुछ नहीं है; इस पार्थिव जीवन के बाद एक अनन्तकाल का आत्मिक जीवन भी है। और जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं वे इस अनन्त जीवन को स्वर्ग में प्रभु के साथ बिताएंगे जहाँ परमेश्वर "...उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)। उस महान दिन में कोई मिश्रित भावनाएं नहीं होंगी, केवल परमेश्वर के साथ संगति और अनन्त आनन्द से भरे हृदय ही वहाँ होंगे। क्या आप उस अद्भुत समय के लिए तैयार हो गए हैं? - बिल क्राउडर


मसीही विश्वासियों के लिए पृथ्वी के गहरे दुःख स्वर्ग के प्रफुल्लित गीतों में बदल जाएंगे।

वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे: ओर न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। - प्रकाशितवाक्य 7:16

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 

  • ज़कर्याह 13-14
  • प्रकाशितवाक्य 21



Tuesday, December 29, 2015

रुचि


   अपने जीवन के अन्तिम दिनों में भी सी. एस. ल्यूईस युवा मसीही विश्वासियों की आत्मिक उन्नति में रुचि रखते थे। अपने देहांत के समय वे अस्वस्थ थे, फिर भी फिलिप नामक एक बच्चे के पत्र का उन्होंने उत्तर दिया। अपने उत्तर में उन्होंने उस बच्चे की लिखने की शैली की प्रशंसा करी, और उससे कहा कि वे यह जानकर बहुत प्रसन्न हैं कि उसने यह समझ लिया है कि नारनिया संबंधित उनकी कहानियों में असलन नाम का सिंह प्रभु यीशु मसीह को दर्शाता है। यह उत्तर लिखने के अगले दिन, ऑक्सफर्ड, इंगलैंड में स्थित उनके घर में, उनके 65वें जन्मदिन से एक सप्ताह पूर्व, ल्यूईस की मृत्यु हो गई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने अपने आत्मिक बच्चों को, अपने अन्तिम वर्षों में, पत्र लिखे। उन पत्रों में हम एक परिपक्व मसीही विश्वासी के आनन्द को देखते हैं, जो अपने युवा आत्मिक बच्चों को प्रोत्साहित कर रहा है कि सत्य और मसीह यीशु के पीछे चलते रहें। यूहन्ना ने लिखा, "मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं" (3 यूहन्ना 1:4)। चाहे यूहन्ना द्वारा लिखित यह पत्री छोटी ही है, लेकिन इसमें हम उस आनन्द को स्पष्ट देख सकते हैं जो आने वाली पीढ़ी का आत्मिक पालन-पोषण करने, उन्हें संभालने और प्रोत्साहित करने और उन्हें बढ़ता हुआ देखने से आता है।

   हर परिपक्व मसीही विश्वासी का यह ध्येय होना चाहिए कि वह मसीही विश्व&#