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Thursday, December 31, 2015

पकड़


   जब भी हम छोटे बच्चों के साथ सड़क पार कर रहे होते हैं, हम अपना हाथ उनकी ओर बढ़ाकर उनसे कहते हैं, "कस कर पकड़ लो" और बच्चे जितना कस कर पकड़ सकते हैं, पकड़ लेते हैं। लेकिन हम उनकी पकड़ की ताकत पर ही निर्भर नहीं रहते; उनके हाथों पर हमारी पकड़ ही उन्हें सुरक्षा देती है उन्हें संभाले रहती है। यही बात परमेश्वर और हमारे साथ, हमारी जीवन यात्रा में लागू है। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें बताया: "यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था" (फिलिप्पियों 3:12); या फिर यूँ कहिए कि "मसीह की पकड़ मुझपर बनी हुई है"।

   लेकिन एक बात निश्चित है: परमेश्वर से हमारी सुरक्षा उस पर हमारी पकड़ के कारण नहीं वरन हम पर मसीह यीशु की पकड़ के कारण है। कोई हमें उसके हाथों से निकाल नहीं सकता - ना शैतान और ना ही स्वयं हम। एक बार जो हाथ उसके हाथ में दे दिया गया, वह अनन्तकाल के लिए सुरक्षित हो गया; उसके हाथों से वह फिर नहीं छूट सकता; यह उसका आश्वासन है: "और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। मेरा पिता, जिसने उन्हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है, और कोई उन्हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता" (यूहन्ना 10:28-29)।

   अर्थात हर मसीही विश्वासी को सुरक्षा का दोहरा आश्वासन है; एक तरफ परमेश्वर पिता और दूसरी तरफ प्रभु यीशु, दोनों ही हमारे हाथों को थामें हमें संभाल कर रखे हुए हैं। हमें संभालने हाथ वे हैं जिन्होंने विशाल पर्वतों, अथाह सागरों और अनन्त अन्तरिक्ष को बनाया है। इसीलिए प्रेरित पौलुस बड़े आनन्द और आश्वासन के साथ कहता है: "...और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:39)। क्या आज आपका हाथ उन सुरक्षित हाथों में है? यदि नहीं तो अभी आपको अवसर है, अपना हाथ मसीह यीशु के हाथों में देकर अपने अनन्त को सर्वदा के लिए सुरक्षित कर लीजिए। - डेविड रोपर


जिसने हमें बनाया, जिसने हमें बचाया, वही हमें संभालता है, सुरक्षित रखता है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-39
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? 
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा? 
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है। 
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। 
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? 
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं। 
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं। 
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, 
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • मलाकी 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 22


Wednesday, December 30, 2015

मिश्रित भावनाएं


   मेरे और मारलीन के लिए "मिश्रित भावनाएं" हमारे विवाह का वर्णन हैं। इस बात को गलत मत समझिए; 35 वर्ष पूर्व हुआ हमारा विवाह वह घटना है जिसका उत्सव हम आज भी मना रहे हैं। किंतु उस समय हुए विवाह का समारोह कुछ फीका रह गया था क्योंकि कुछ सप्ताह पहले ही मार्लीन की माँ का कैंसर से देहांत हो गया था। मारलीन की मौसी विवाह समारोह में ’दुल्हन की माँ’ के रूप में खड़ी हुई थीं और उन्होंने सारे दायित्व बड़े अच्छे से निर्वाह किए थे, लेकिन माँ का ना होना खटक रहा था और सब कुछ को प्रभावित कर रहा था।

   हमारा यह अनुभव पाप के दुषप्रभावों से टूटे संसार के वास्तविक जीवन को दिखाता है। इस संसार में हमारे अनुभव अच्छे, बुरे, आनन्द और दुःखों का मिश्रण हैं। यह वह तथ्य है जिसे राजा सुलेमान ने भी स्वीकार किया और लिखा, "हंसी के समय भी मन उदास होता है, और आनन्द के अन्त में शोक होता है" (नीतिवचन 14:13)। आनन्दित हृदय भी शोकित रहता है क्योंकि कभी कभी यही जीवन की मांग होती है।

   लेकिन धन्यवाद की बात यह है कि यह जीवन ही सब कुछ नहीं है; इस पार्थिव जीवन के बाद एक अनन्तकाल का आत्मिक जीवन भी है। और जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं वे इस अनन्त जीवन को स्वर्ग में प्रभु के साथ बिताएंगे जहाँ परमेश्वर "...उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)। उस महान दिन में कोई मिश्रित भावनाएं नहीं होंगी, केवल परमेश्वर के साथ संगति और अनन्त आनन्द से भरे हृदय ही वहाँ होंगे। क्या आप उस अद्भुत समय के लिए तैयार हो गए हैं? - बिल क्राउडर


मसीही विश्वासियों के लिए पृथ्वी के गहरे दुःख स्वर्ग के प्रफुल्लित गीतों में बदल जाएंगे।

वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे: ओर न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। - प्रकाशितवाक्य 7:16

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 

  • ज़कर्याह 13-14
  • प्रकाशितवाक्य 21



Tuesday, December 29, 2015

रुचि


   अपने जीवन के अन्तिम दिनों में भी सी. एस. ल्यूईस युवा मसीही विश्वासियों की आत्मिक उन्नति में रुचि रखते थे। अपने देहांत के समय वे अस्वस्थ थे, फिर भी फिलिप नामक एक बच्चे के पत्र का उन्होंने उत्तर दिया। अपने उत्तर में उन्होंने उस बच्चे की लिखने की शैली की प्रशंसा करी, और उससे कहा कि वे यह जानकर बहुत प्रसन्न हैं कि उसने यह समझ लिया है कि नारनिया संबंधित उनकी कहानियों में असलन नाम का सिंह प्रभु यीशु मसीह को दर्शाता है। यह उत्तर लिखने के अगले दिन, ऑक्सफर्ड, इंगलैंड में स्थित उनके घर में, उनके 65वें जन्मदिन से एक सप्ताह पूर्व, ल्यूईस की मृत्यु हो गई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने अपने आत्मिक बच्चों को, अपने अन्तिम वर्षों में, पत्र लिखे। उन पत्रों में हम एक परिपक्व मसीही विश्वासी के आनन्द को देखते हैं, जो अपने युवा आत्मिक बच्चों को प्रोत्साहित कर रहा है कि सत्य और मसीह यीशु के पीछे चलते रहें। यूहन्ना ने लिखा, "मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं" (3 यूहन्ना 1:4)। चाहे यूहन्ना द्वारा लिखित यह पत्री छोटी ही है, लेकिन इसमें हम उस आनन्द को स्पष्ट देख सकते हैं जो आने वाली पीढ़ी का आत्मिक पालन-पोषण करने, उन्हें संभालने और प्रोत्साहित करने और उन्हें बढ़ता हुआ देखने से आता है।

   हर परिपक्व मसीही विश्वासी का यह ध्येय होना चाहिए कि वह मसीही विश्वासियों की अगली पीढ़ी को आत्मिक समझ-बूझ में बढ़ावा दे, समझाए, प्रोत्साहित करे। ऐसा करने के लिए वे विभिन्न तरीके अपना सकते हैं - प्रोत्साहन के कुछ शब्द लिखकर भेजना, उनके साथ प्रार्थना करना, उन्हें अच्छी और सही सलाह देना इत्यादि, जिनके द्वारा वे परमेश्वर के साथ अपनी आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ सकते हैं। परिपक्व विश्वासियों द्वारा आत्मिक बच्चों के जीवनों में दिखाई गई रुचि उन बच्चों को परिपक्व होने में बहुत सहायक होगी। - डेनिस फिशर


मार्ग की जानकारी रखने वाले के साथ यात्रा करना यात्रा को बेहतर बना देता है।

यह मनुष्य का पुत्र कौन है? यीशु ने उन से कहा, ज्योति अब थोड़ी देर तक तुम्हारे बीच में है, जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है तब तक चले चलो; ऐसा न हो कि अन्धकार तुम्हें आ घेरे; जो अन्धकार में चलता है वह नहीं जानता कि किधर जाता है। जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है, ज्योति पर विश्वास करो कि तुम ज्योति के सन्तान होओ। ये बातें कहकर यीशु चला गया और उन से छिपा रहा। - यूहन्ना 12:35-36


बाइबल पाठ: 3 यूहन्ना
3 John 1:1 मुझ प्राचीन की ओर से उस प्रिय गयुस के नाम, जिस से मैं सच्चा प्रेम रखता हूं।
3 John 1:2 हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है; कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों मे उन्नति करे, और भला चंगा रहे। 
3 John 1:3 क्योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्य की गवाही दी, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्‍दित हुआ। 
3 John 1:4 मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं। 
3 John 1:5 हे प्रिय, जो कुछ तू उन भाइयों के साथ करता है, जो परदेशी भी हैं, उसे विश्वासी की नाईं करता है। 
3 John 1:6 उन्होंने मण्‍डली के साम्हने तेरे प्रेम की गवाही दी थी: यदि तू उन्हें उस प्रकार विदा करेगा जिस प्रकार परमेश्वर के लोगों के लिये उचित है तो अच्छा करेगा। 
3 John 1:7 क्योंकि वे उस नाम के लिये निकले हैं, और अन्यजातियों से कुछ नहीं लेते। 
3 John 1:8 इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों।
3 John 1:9 मैं ने मण्‍डली को कुछ लिखा था; पर दियुत्रिफेस जो उन में बड़ा बनना चाहता है, हमें ग्रहण नहीं करता। 
3 John 1:10 सो जब मैं आऊंगा, तो उसके कामों की जो वह कर रहा है सुधि दिलाऊंगा, कि वह हमारे विषय में बुरी बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्‍तोष न कर के आप ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है: और मण्‍डली से निकाल देता है। 
3 John 1:11 हे प्रिय, बुराई के नहीं, पर भलाई के अनुयायी हो, जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा। 
3 John 1:12 देमेत्रियुस के विषय में सब ने वरन सत्य ने भी आप ही गवाही दी: और हम भी गवाही देते हैं, और तू जानता है, कि हमारी गवाही सच्ची है।
3 John 1:13 मुझे तुझ को बहुत कुछ लिखना तो था; पर सियाही और कलम से लिखना नहीं चाहता। 
3 John 1:14 पर मुझे आशा है कि तुझ से शीघ्र भेंट करूंगा: तब हम आम्हने साम्हने बातचीत करेंगे: तुझे शान्‍ति मिलती रहे। यहां के मित्र तुझे नमस्‍कार करते हैं: वहां के मित्रों से नाम ले ले कर नमस्‍कार कह देना।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 9-12
  • प्रकाशितवाक्य 20


Monday, December 28, 2015

परिवरतन


   मेरी पत्नि मार्टी बहुत अच्छा खाना बनाती है। दिन भर के काम के बाद मैं उसके बनाए भोजन की सुगंध लेने की प्रतीक्षा में रहता हूं जो मेरे लिए अच्छा भोजन उपलब्ध होने का प्रमाण होता है। ना केवल उसे भोजन अच्छा बनाना आता है, वह उस भोजन को अच्छे से परोसना भी जानती। विभिन्न भोजन वस्तुओं को उनके रंग और स्वाद के ताल-मेल के साथ मेज़ पर सजाकर रखे हुए देखना मेरे लिए आमंत्रण होता है कि मैं अपनी कुर्सी खेंच कर बैठ जाऊँ और उस उत्तम भोजन का आनन्द लूँ। लेकिन मार्टी के हाथों में आने से पूर्व वे सब भोजन वस्तुएं इतनी आकर्षक और ऐसी स्वादिष्ट नहीं थीं; मार्टी को उन्हें धोना, काटना, छीलना, पकाना, अन्य वस्तुओं के साथ मिलाना और अन्य वस्तुओं के द्वारा सजाना पड़ा, तब ही वे ऐसी स्वादिष्ट और आकर्षक बन सकीं।

   यह मुझे उस अनुग्रहपूर्ण कार्य का स्मरण दिलाता है जो प्रभु यीशु ने मेरे साथ किया है। मैं अपनी कमज़ोरियों को और अपने पाप करने की प्रवृति को अच्छे से जानता हूँ। मैं यह भली-भांति जानता हूँ कि मैं अपने आप में परमेश्वर के सम्मुख आने के योग्य नहीं हूँ। लेकिन जब मैंने मसीह यीशु पर विश्वास द्वारा और उससे मिली पाप क्षमा द्वारा उद्धार और नया जन्म पाया, तब प्रभु यीशु ने मुझे एक नई सृष्टि भी बना दिया (2 कुरिन्थियों 5:17)। मैं अपने पापों और बुराईयों में जैसा भी था, मसीह यीशु ने मुझे स्वीकार किया और मुझे वह बना दिया जैसा मुझे होना चाहिए था - "पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष" (कुलुस्सियों 1:22)। अब प्रभु मुझे परमेश्वर के सामने एक ऐसी सुन्दर कलाकृति के समान प्रस्तुत करता है जो उसके सम्मुख आने के योग्य है।

   मसीह यीशु द्वारा अपने विश्वासियों के जीवन में किया जाने वाला यह परिवरतन ना केवल हमें उसके प्रति कृतज्ञ बनाता है वरन हमें प्रोत्साहित भी करता है कि हम उस नए जीवन और स्वरूप के अनुरूप अपना जीवन जीएं और बिताएं (2 कुरिन्थियों 5:15) जिससे अन्य भी प्रभु यीशु की ओर आकर्षित हो सकें। - जो स्टोवैल


मसीह यीशु हमें जैसे हम हैं लेकर, जैसा हमें होना चाहिए वैसा बना देता है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:15, 17

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:21-23
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 5-8
  • प्रकाशितवाक्य 19


Sunday, December 27, 2015

चुनौति


   केन डील ने 86 वर्ष की आयु में 3 दशकों से भी अधिक की कारागारों में स्वयंसेवी सेवकाई का अन्त इतवार के चर्च सन्देश के साथ किया। अपने उस अन्तिम सन्देश में भी उन्होंने कारावास में पड़े उन लोगों को परमेश्वर के लिए कार्य करने को प्रोत्साहित किया। उस सन्देश में दिए गए उदाहरणों में से अनेक उदाहरण कैदियों के जीवनों से ही थे, कुछ ऐसे कैदियों के भी थे जो उम्र-कैद काट रहे थे। एक ऐसे स्थान पर जिस से सब बाहर निकलना चाहते हैं, केन ने सुनने वालों को प्रोत्साहित किया कि वे मसीह यीशु पर विश्वास लाएं, उसमें बढ़ें और अन्य लोगों के साथ मसीह यीशु के सुसमाचार को बाँटें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम इस्त्राएल के इतिहास से कुछ शिक्षा पाते हैं। परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के कारण नबूकदनेस्सर राजा के द्वारा यहूदा के लोगों को बन्दी बनाकर बाबुल ले जाया गया। उस बन्धुआई में यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा परमेश्वर ने उन इस्त्राएलियों को सन्देश भेजा: "घर बना कर उन में बस जाओ; बारियां लगा कर उनके फल खाओ। ब्याह कर के बेटे-बेटियां जन्माओ; और अपने बेटों के लिये स्त्रियां ब्याह लो और अपनी बेटियां पुरुषों को ब्याह दो, कि वे भी बेटे-बेटियां जन्माएं; और वहां घटो नहीं वरन बढ़ते जाओ" (यिर्मयाह 29:5-6)।

   संभव है कि आज हम कुछ ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जिनके कारण हम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, सीमित तथा संकुचित अनुभव कर रहे हैं। हमारे ये बन्धन चाहे हमारे अपने किसी किए के कारण हों या उनके लिए हमारा अपना कोई दोष ना भी हो, लेकिन उन्हें लेकर हमारे पास दो विकल्प हैं - हम उनमें से होकर बस निकल सकते हैं अन्यथा उनमें होते हुए भी हम बढ़ सकते हैं। हमें सीमित करने और बांधे रखने वाली हर बात से हमारे लिए चुनौति होती है कि हम उसके बावजूद बढें ना कि घटें, उन्नति करें ना कि अवनति में गिरें।

   हमारी हर परिस्थिति में परमेश्वर हमें कुशलता और आशा ही देना चाहता है (यिर्मयाह 29:11)। - डेविड मैक्कैसलैंड


एक सीमित परिस्थिति भी आत्मा को उन्नति का अवसर प्रदान कर सकती है।

पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन। - 2 पतरस 3:18

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 29:4-14
Jeremiah 29:4 उस में लिखा था कि जितने लोगों को मैं ने यरूशलेम से बंधुआ कर के बाबुल में पहुंचवा दिया है, उन सभों से इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता हे: 
Jeremiah 29:5 घर बना कर उन में बस जाओ; बारियां लगा कर उनके फल खाओ। 
Jeremiah 29:6 ब्याह कर के बेटे-बेटियां जन्माओ; और अपने बेटों के लिये स्त्रियां ब्याह लो और अपनी बेटियां पुरुषों को ब्याह दो, कि वे भी बेटे-बेटियां जन्माएं; और वहां घटो नहीं वरन बढ़ते जाओ। 
Jeremiah 29:7 परन्तु जिस नगर में मैं ने तुम को बंधुआ करा के भेज दिया है, उसके कुशल का यत्न किया करो, और उसके हित के लिये यहोवा से प्रार्थना किया करो। क्योंकि उसके कुशल से तुम भी कुशल के साथ रहोगे। 
Jeremiah 29:8 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा तुम से यों कहता है कि तुम्हारे जो भविष्यद्वक्ता और भावी कहने वाले तुम्हारे बीच में हैं, वे तुम को बहकाने न पाएं, और जí