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शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

परमेश्वर का विशेष स्थान

एक युवती, ग्रेस डिटमैनसन ऐडम्स, अपने मिशनरी माता-पिता के साथ, १९२० के दशक के अंतिम वर्षों में, चीन के अन्दरूनी इलाकों में यात्राएं किया करती थी। बाद में उसने अपनी इन यात्राओं और रात ठहरने के लिये भीड़-भाड़ वाले स्थानों के अनुभवों के बारे में लिखा। गांवों की उन सरायों में लोग भरे होते थे, कोई खांसता होता था, कोई छींकता तो कई धुम्रपान करते रहते; नन्हे शिशु रोते रहते और बच्चे खिसियाते होते थे। ऐसे स्थानों में उनका परिवार सभी लोगों के साथ किसी बड़े से कमरे में उन्हें जहां जगह मिलती वहां अपना बिस्तर लकड़ी के तखतों पर बिछाकर रात काट लेता था।

एक बरफीली रात वे एक सराय में पहुंचे तो मालुम पड़ा कि वो बिल्कुल ठसाठस भरी हुई है। सराय के मालिक ने पहले तो उन्हें जगह देने में अपनी असमर्थता बताई, फिर थोड़ा ठहरकर उसने उनसे कहा "मेरे पीछे आईये।" वह उन्हें साथ के एक कमरे में ले गया जो खेती के सामान और भूसे को रखने का गोदाम था। उस रात उनका परिवार भीड़ के शोर और परेशानी से दूर, शान्ति के साथ अपने विशेष स्थान में आराम से सोया।

इसके बाद जब भी ग्रेस प्रभु यीशु के जन्म के बारे में पढ़ती थी कि यीशु की माता मरियम "...अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेट कर चरनी में रखा: क्‍योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी" (लूका २:७), तो उसका दृष्टिकोण इस घटना के बारे में अन्य लोगों से भिन्न होता था। प्रभु के जन्म की इस घटना को लेकर बहुत से लोग सराय के स्वामी को प्रभु यीशु को तिरिस्कृत करने वाले निष्ठुर और पापी संसार के प्रतीक के रूप में देखते हैं, लेकिन अब ग्रेस ने समझा कि परमेश्वर ने उस सराय के स्वामी को प्रभु यीशु के लिये भीड़ से अलग, एकान्त में विशेष जन्म स्थान उपलब्ध कराने के लिये प्रयोग किया।

विश्वास की आंखों से हम मरियम के लिये परमेश्वर के विशेष स्थान के प्रबंध को देख सकते हैं। यदि आप अपनी कठिनाइयों और परिस्थितियों में अपने को लाचार पाते हैं, तो स्मरण रखिये कि आपको सकुशल रखने के लिये भी परमेश्वर के पास कोई विशेष स्थान है। - डेविड मैककैसलैंड


जो परमेश्वर को जीवन की आपूर्ति करने देते हैं वे संतुष्ट और सुखी रहते हैं।

और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेट कर चरनी में रखा: क्‍योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी। - लूका २:७


बाइबल पाठ: लूका २:१-७

उन दिनों में औगूस्‍तुस कैसर की ओर से आज्ञा निकली, कि सारे जगत के लोगों के नाम लिखे जाएं।
यह पहली नाम लिखाई उस समय हुई, जब क्‍विरिनयुस सूरिया का हाकिम था।
और सब लोग नाम लिखवाने के लिये अपने अपने नगर को गए।
सो यूसुफ भी इसलिये कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बैतलहम को गया।
कि अपनी मंगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी नाम लिखवाए।
उस के वहां रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए।
और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेट कर चरनी में रखा: क्‍योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी।

एक साल में बाइबल:
  • हबकुक १-३
  • प्रकाशितवाक्य १५

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

उदार मन

अपनी अन्तदृष्टिपूर्ण कहानियों के संकलन "The Forgotten Man" में लेखिका एमिटी शलेस ने १९३० के दशक में अमेरिका की भयानक आर्थिक मंदी के समय के जीवन के पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया है। इन कहानियों का केंद्र बिंदु है "भुलाया हुआ मनुष्य" - जो उस समय के अनगिनित बेरोज़गार लोगों के लिये प्रयोग होने वाली संज्ञा थी।

उस आर्थिक मंदी के दौर का एक प्रचलित गीत ऐसे लोगों की व्यथा को मार्मिक रूप में कहता है। गीत कुछ इस तरह से है:
"वे मुझसे कहते थे कि मैं आने वाली शान्ति और गौरव का सपना साकार कर रहा हूं; तो फिर मैं रोटी की भिक्षा पाने की प्रतीक्षा में पंक्ति में क्यों खड़ा हूं?
कभी मैं रेल पथ का निर्माण कर रहा था, मैंने उसे बनाया और चलाया, समय से तेज़ चलाया; कभी मैंने रेलपथ बनाया था, अब जब वह बन चुका है, तो भाई क्या मुझे कुछ दमड़ी दान दे सकते हो?"

जैसे ये गीत के बोल याद दिलाते हैं, आर्थिक मंदी मेहनतकश लोगों के हालात उथल-पुथल कर देती है। ऐसे में, मसीही होने के नाते, हमें उनकी सहायता के लिये जो बन सके वो करना चाहिये।

गलतियों कि मण्डली को लिखे अपने पत्र में पौलुस स्मरण करता है कि कैसे उसे और बरनबास को यरुशलेम में मण्डली के अगुवों ने "केवल यह कहा, कि हम कंगालों की सुधि लें, और इसी काम के करने का मैं आप भी यत्‍न कर रहा था।" (गलतियों २:१०) पौलुस के जीवन में हम देखते हैं कि कैसे वह सुसमाचार प्रचार करने और आर्थिक रूप से ज़रूरतमंदों की सहायता करने में लगा रहा (प्रेरितों ११:२९, ३०; १ कुरिन्थियों १६:१-३)।

कठिन समयों में, पौलुस के समान, हमें भी आत्मिक और शारीरिक ज़रूरतमंदों की सहायता में सन्लगन रहना चाहिये। थोड़ा सा धन चाहे ज़्यादा दूर तक साथ न दे, परन्तु उदार मन बहुत दूर तक साथ निभाता है; और उद्धारकर्ता परमेश्वर प्रभु यीशु, इस जीवन के बाद भी साथ निभाता है। - डेनिस फिशर


झुककर किसी दूसरे को उठना हृदय के लिये अच्छा व्यायाम है।

जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता, वह पाप करता है, परन्तु जो दीन लोगों पर अनुग्रह करता, वह धन्य होता है। - नीतिवचन १४:२१


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ९:६-१५

परन्‍तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा।
हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्‍योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।
और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो।
जैसा लिखा है, उस ने बिथराया, उस ने कंगालों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा।
सो जो बोने वाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्‍त करेगा और तुम्हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा।
कि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ।
क्‍योंकि इस सेवा के पूरा करने से, न केवल पवित्र लोगों की घटियां पूरी होती हैं, परन्‍तु लोगों की ओर से परमेश्वर का बहुत धन्यवाद होता है।
क्‍योंकि इस सेवा से प्रमाण लेकर परमेश्वर की महिमा प्रगट करते हैं, कि तुम मसीह के सुसमाचार को मान कर उसके आधीन रहते हो, और उन की, और सब की सहायता करने में उदारता प्रगट करते रहते हो।
ओर वे तुम्हारे लिये प्रार्थना करते हैं और इसलिये कि तुम पर परमेश्वर का बड़ा ही अनुग्रह है, तुम्हारी लालसा करते रहते हैं।
परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।

एक साल में बाइबल:
  • नहूम १-३
  • प्रकाशितवाक्य १४

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

उद्धारकर्ता या न्यायी?

किसी रात जब आप शहर की रौशनी और चकाचौंध से दूर हों तो अपनी नज़रें ऊपर उठाकर देखियेगा, वहां आकाश में आपको क्षितिज से क्षितिज तक चमकते सितारों का पुंज दिखाई देगा और दूधिया आकाशगंगा की पट्टी, जिसका हम एक हिस्सा हैं, दिखाई देगी। परमेश्वर, अपने पवित्र वचन बाइबल में पूछता है "अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा?" (यशायाह ४०:२६)

खगोल शास्त्री साईमन ड्राइवर का कहना है कि यदि आपकी दृष्टि ठीक है तो आप लगभग ५००० सितारे देख सकते हैं। लेकिन इससे भी कहीं आधिक संख्या उन नक्षत्रों की है जिन्हें बिना विशेष उपकरणों के नहीं देखा जा सकता। सन १९९५ में Hubble Deep Field Study के वैज्ञानिक अपने अंत्रिक्ष अनुसंधान द्वारा इस निषकर्ष पर पहुंचे कि आकाश में करोड़ों नक्षत्र पुंज (galaxy) हैं और हर नक्षत्र पुंज में करोड़ों नक्षत्र हैं। एक अनुमान के अनुसार, पृथ्वी के हर ज़र्रे के लिये १० से भी अधिक नक्षत्र आकाश में मौजूद हैं।

लेकिन फिर भी, हर रात परमेश्वर "...इन गणों को गिन गिन कर निकालता, उन सब को नाम ले लेकर बुलाता है; वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।" (यशायाह ४०:२६) भजनकार कहता है "वह तारों को गिनता, और उन में से एक एक का नाम रखता है।" (भजन १४७:४) जो ऐसा सामर्थी और सर्वज्ञानी परमेश्वर है उसके लिये फिर क्यों लोग सोचते हैं कि "...मेरा मार्ग यहोवा के छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?" (यशायाह ४०:२७) जो परमेश्वर प्रत्येक नक्षत्र का स्थान निर्धारित करके उसे नाम लेकर बुला सकता और उसको संभाल सकता है, वह आप को भी अपनी उसी सामर्थ से संभाल सकता है। ऐसा अद्भुत परमेश्वर किसी कल्पना का विष्य नहीं है और न ही उसके न्याय को, जिसका प्रमाण उसने प्रभु यीशु को मुर्दों से जिलाकर दिया, हंसी में उड़ाया जा सकता है। "सो परमेश्वर का वंश होकर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों की अनाकानी करके, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्‍योंकि उस ने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उस ने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।" (प्रेरितों १७:२९-३१)

आज रात अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखिये और अपने आप से पूछिये, ऐसे अद्भुत और पराक्रमी परमेश्वर से आप किस रूप में मिलना चाहेंगे - अपने निज उद्धारकर्ता और रक्षक के रूप में, या न्याय सिहांसन पर बैठ कर आपके जीवन का हिसाब लेने वाले के रूप में? फैसला आपका है! - डेविड रोपर


हम आंखों से सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ को देखते हैं और मन से उसके प्रेम को अनुभव करते हैं।

अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा? - यशायाह ४०:२६


बाइबल पाठ: यशायाह ४०:२५-२७

सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है।
अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले लेकर बुलाता है; वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में से कोई बिना आए नहीं रहता।
हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?

एक साल में बाइबल:
  • मीका ६, ७
  • प्रकाशितवाक्य १३

मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

केवल परमेश्वर

मई २९, १९५३ के दिन, न्यूज़ीलैंड के एडमंड हिलेरी और उनके शेरपा तेनज़िंग नोरगे संसार के सबसे ऊंचे पर्वत एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने वाले सबसे पहले व्यक्ति बने। क्योंकि तेनज़िंग को कैमरा प्रयोग करना नहीं आता था इसलिये एडमंड ने प्रमाण के लिये शिखर पर तेनज़िंग की फोटो खींची।

बाद में पत्रकारों ने बार बार प्रश्न किया कि शिखर पर पहले कौन पहुंचा? अभियान के नेता जौन हन्ट ने यही उत्तर दिया के वे एक टीम कि तरह एकसाथ ही ऊपर पहुंचे। वे दोनो एक ही लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक साथ थे और उनमें में से किसी को भी इससे कोई मतलब नहीं था कि किसे अधिक श्रेय मिलेगा।

जब कोई भला काम किया जाता है तो इस बात की चिंता करना कि किसे अधिक श्रेय मिलेगा, काम की सफलता में अवरोध बन जाता है। कोरिंथ नगर की मण्डली दो भागों में विभाजित हो रही थी - वे जो पौलुस का अनुसरण करते थे और वे जो अपुल्लोस का अनुसरण करते थे। प्रेरित पौलुस ने उन्हें समझाया "अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया। इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।" - १ कुरिंथियों ३:३-७

जब हम परमेश्वर के लिये या परमेश्वर के नाम से काम करें तो अपनी प्रशंसा या अपने नाम को ऊंचा उठाने के लिये नहीं वरन इस उद्देश्य से करें कि परमेश्वर को ही सारा आदर और महिमा मिले। यदि हम अपने नाम या प्रशंसा के महत्वकांक्षी होंगे तो आपसी कलह और फूट के शिकार भी होंगे, किंतु यदि केवल प्रभु को आदर देने की इच्छा से काम करेंगे तो एकजुट भी रहेंगे और मसीह के सच्चे गवाह भी ठहरेंगे। - सी. पी. हिया


जब मेरे जीवन में ’मैं’ घटेगा तब ही मसीह बढ़ेगा।

क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं। - १ कुरिंथियों ३:९


बाइबल पाठ: १ कुरिंथियों ३:१-९

हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से, परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं।
मैं ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया, क्‍योंकि तुम उस को न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो।
क्‍योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्‍या तुम शारीरिक नहीं, और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते?
इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं?
अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्र्म के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।

एक साल में बाइबल:
  • मीका ४, ५
  • प्रकाशितवाक्य १२

सोमवार, 20 दिसंबर 2010

आनन्द से जयजयकार करो

ड्यूक विश्वविद्यालय के बास्केटबॉल प्रेमियों को ’कैमरून क्रेज़ीस’ के उपनाम से भी जाना जाता है। जब भी ड्यूक अपने प्रतिद्वन्दी नौर्थ कैरोलाइना से खेलता है तो क्रेज़ीस को बताया जाता है: "यही वह खेल का अवसर है जिसकी प्रतीक्षा की जा रही थी। अब कोई बहाना नहीं, बस अपना पूरा ज़ोर लगा दो। आज की रात कैमरून क्रीड़ास्थल जय के नारों से गूंजना चाहिये, नारों की आवाज़ में कोई कमी न हो।" स्पष्ट है कि ड्यूक के खेल प्रेमी ड्यूक से अपनी वफादारी को बहुत गंभीरता से लेते हैं।

भजन १०० के लिखने वाले ने भी परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी को बड़ी गंभीरता से लिया, और चाहा कि दूसरे भी ऐसा ही करें। उसने अपने उदगार प्रगट किये "हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!" (भजन १००:१)। परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर के प्रति अपनी स्तुति और प्रशंसा के भाव बिना हिचकिचाहट के प्रगट करने चाहियें, क्योंकि वह वाचा को बांधने और निभाने वाला वह परमेश्वर है जो उन सभी से जो इश्वर कहलाते हैं अति महान है। परमेश्वर की प्रजा को उस पर और उसकी भलाई पर अपनी सारी सामर्थ केंद्रित करनी चाहिये।

परमेश्वर का अनुग्रह और भलाई हमें प्रेरित करती है कि हम मुक्त भाव से उसके प्रति अपने प्रेम और वफादारी को अभिव्यक्त करें। इसके लिये जो लोग शांत रहते हैं उन्हें अपनी खामोशी की सीमाओं को तोड़कर सीखना चाहिये कि कि उन्मुक्त भाव से स्तुति करना कैसा होता है; और जो इतने उन्मुक्त रहते हैं कि मौन आराधना की खुबसूरती को नहीं समझ पाते, उन्हें भी मौन आराधना को समझना है। अन्ततः सच्चे परमेश्वर की सच्ची आराधाना सच्चे मन से आनी चाहिये, क्योंकि वह ऐसी आराधना ही चाहता है "परन्‍तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्‍चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्‍योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।" (यूहन्ना ४:२३)

आराधना समय है अपने सृजनहार, पालनहार और तारणहार परमेश्वर पर और उसके कार्यों पर ध्यान करने का और उसकी जयजयकार करने का। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के प्रति हमारे विचारों ऐसे हों कि हम आनन्द से उसकी जयजयकार करने को प्रेरित हों।

हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! - भजन १००:१


बाइबल पाठ: भजन १००

हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं, हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल:
  • मीका १-३
  • प्रकाशितवाक्य ११

रविवार, 19 दिसंबर 2010

क्रोध की घंटी

एक रविवार प्रातः मैं चर्च में कुछ पहले आ गया। मेरी इच्छा थी कि लोगों के आने से पहले मैं वहां कुछ समय शान्त मनन में बिताऊं। चर्च में प्रवेश करने के लिये जैसे ही मैंने दरवाज़े के ताले में चाबी लगाकर घुमाई, खतरे की घंटी की तेज़ आवाज़ ने मुझे घबरा दिया - प्रवेश करने से पहले, मैं चोरों को रोकने वाली खतरे की घंटी को बन्द करना भूल गया था। उस तेज़ आवाज़ ने न केवल मुझे वरन सोते हुए पड़ौस के लोगों को भी जगाकर नाहक परेशान कर दिया।

क्रोध भी कुछ ऐसा ही होता है। हमारे शान्त जीवनों में अचानक किसी बात से खलबली मच जाती है जिससे हमारा क्रोध भड़क उठता है। इससे हमारी अपनी भी, और जो हमारे आसपास होते हैं उनकी भी शान्ति भंग हो जाती है।

कभी कभी क्रोध सकरात्मक होता है; हमारा ध्यान किसी अन्याय की ओर खिंचता है और उस अन्याय के प्रति हमारा क्रोध हमें कुछ सकरात्मक करने को प्रेरित करता है। परन्तु अधिकांशतः हमारा क्रोध किसी स्वार्थ से जुड़ा होता है - हमारी किसी इच्छा का पालन या पूर्ति न होना, हमारे किसी अधिकार की अवेहलना होना, हमारे किसी विशेषाधिकार या सुविधा का हनन होना, इत्यादि।

क्रोध का कारण जो भी हो, यह निशिचित है कि क्रोध को कभी अनियंत्रित तथा सतत नहीं होने देना चाहिये। प्रतिक्रिया से पहले यह जांचना आवश्यक है कि क्रोध उत्पन्न होने का कारण क्या है, फिर उसका समाधान भी परमेश्वरीय विधि के अनुसार होना चाहिये। परमेश्वर के वचन बाइबल बताती है कि हमारा परमेश्वर प्रभु "दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।" (भजन ८६:१५) तथा "...दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य..." (निर्गमन ३४:६) है; एवं मनुष्यों के विष्य में कहती है कि "क्रोधी पुरूष झगड़ा मचाता है, परन्तु जो विलम्ब से क्रोध करने वाला है, वह मुकद्दमों को दबा देता है" (नीतिवचन १५:१८)। "विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है" (नीतिवचन १६:३२)।

इसीलिये पौलुस ने भजनकार के शब्दों को स्मरण दिलाया "क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।" (इफिसियों ४:२६, भजन ४:४) - जो स्टोवैल


अनियंत्रित क्रोध खतरे की घंटी है।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों ४:२६


बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२५-३२

इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
और न शैतान को अवसर दो।
चोरी करने वाला फिर चोरी न करे, वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्र्म करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल:
  • योना १-४
  • प्रकाशितवाक्य १०

शनिवार, 18 दिसंबर 2010

उपाय करने वाला परमेश्वर

अपने पास्टर होने के आरंभिक समय में मैंने छोटे चर्चों में सेवकाई करी, जहां आर्थिक स्थिति अकसर तंग हुआ करती थी। कभी कभी घर के खर्च के लिये पैसे कम पड़ जाते थे। एक अवसर ऐसा आया जब हमारे घर में भोजन वस्तुएं बिलकुल समाप्ति की कगार पर आ गईं और वेतन मिलने में अभी कुछ दिन बाकी थे। मैं और मेरी पत्नी चिंतित थे और आपस में बातचीत कर रहे थे कि आते दिनों में हम अपने बच्चों के भोजन का प्रबंध कैसे करेंगे? इतने में घर के दरवाज़े की घंटी बजी। जब हमने जाकर दरवाज़ा खोला तो बाहर कोई नहीं था, लेकिन दरवाज़े पर भोजन वस्तुओं से भरे दो थैले रखे थे। हमने किसी को भी अपनी स्थिति नहीं बताई थी, लेकिन फिर भी हमारे उपाय करने वाले परमेश्वर ने किसी को हमारी आवश्यक्ता की पूर्ति के लिये प्रेरित करके भेजा।

इस घटना से मुझे पुराने नियम में एब्राहम के साथ हुई घटना को याद दिलाया, जब परमेश्वर ने उसे अपने पुत्र इसहाक को बलिदान करने को कहा। एब्राहम आज्ञाकारी हुआ और अपने पुत्र को परमेश्वर द्वारा बताए स्थान पर लेजा कर बलिदान के लिये वेदी पर लेटा दिया, परन्तु उसे बलि करने से ठीक पहले परमेश्वर ने एब्राहम के हाथ को रोक दिया और इसहाक के स्थान पर बलि के लिये एक मेढ़ा उपलब्ध करा दिया। एब्राहम ने उस स्थान का नाम ’यहोवा-यीरे’ अर्थात ’परमेश्वर-उपाय-करेगा’ रखा (उतपत्ति २२:१४); परमेश्वर आज भी अपने बच्चों की अत्याधिक चिंता करता है।

प्रभु यीशु ने कहा "...तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्‍या क्‍या आवश्यक्ता है।" (मती ६:८) वो लगातार हमारा ध्यान रखता है और हमारे लिये जो सर्वोत्तम है करता है। पतरस ने लिखा "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है।" (१ पतरस ५:६, ७) यह हमें याद दिलाने के लिये कि कठिनाइयों, आवश्यक्ताओं और भय के समयों में एक है जिसे सदा हमारी चिन्ता रहती है। पौलुस ने कहा "और मेरा परमश्‍ेवर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।" (फिलिप्पियों ४:१९)

यदि आप परमेश्वर की सन्तान हैं तो अपनी चिन्ताएं उसपर डाल दीजिए और बस स्मरण रखिये आप यहोवा-यीरे की सन्तान हैं। - बिल क्राउडर


परमेश्वर जो वायदा करता है उसे पूरा भी करता है।

...तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्‍या क्‍या आवश्यक्ता है। - मती ६:८


बाइबल पाठ: मती ६:५-१५

और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्‍योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े होकर प्रार्थना करना उन को अच्‍छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके।
परन्‍तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाई बक बक न करो क्‍योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी।
सो तुम उन की नाई न बनो, क्‍योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्‍या क्‍या आवश्यक्ता है।
सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो - हे हमारे पिता, तू जो स्‍वर्ग में हैं, तेरा नाम पवित्र माना जाए।
तेरा राज्य आए, तेरी इच्‍छा जैसी स्‍वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो।
हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे।
और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
और हमें परीक्षा में न ला, परन्‍तु बुराई से बचा, क्‍योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही है। आमीन।
इसलिये यदि तुम मनुष्य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा।
और यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा न करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • ओबादियाह
  • प्रकाशितवाक्य ९