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गुरुवार, 13 जनवरी 2011

प्राकृतिक स्वभाव

कई साल पहले हमने एक रैकून (अमेरिका में पाया जाने वाला बड़ी सी गिलहरी जैसा जानवर) को अपने घर में पालतू पशु बनाया और उसका नाम जैसन रखा। वह घंटों हमारे पालतु कुत्ते से, जो नम्र और शांत स्वभाव का था, लड़ता रहता और उसे तंग करता रहता था। जैसन के व्यवहार का बिलकुल भरोसा नहीं किया जा सकता था। एक मिनिट वह हमारी गोदी में आकर लेट जाता तो दूसरे ही मिनिट वह खतरनाक शरारतें करने लगता। वह कबूतरों के अंडे खा जाता, कूड़ेदान को उलट-पुलट कर देता, फूलों की क्यारीयों को तहस-नहस कर देता; उसके यह विनाशकारी कार्य उसके प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार थे। जैसन को चाहे कैसा भी पालतु रखने का प्रयास करो, उसका प्राकृतिक स्वभाव उसपर हावी हो ही जाता था।

जैसन के व्यवहार से मुझे मसीहियों में भी विद्यमान उनका पुराना मनुष्यत्व स्मरण आता है, चाहे अब पवित्र आत्मा उन में वास करता है। पौलुस इसे ’शरीर, जिसमें कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती’ (रोमियों ७:१८) कह कर संबोधित करता है। इस ’शरीर’ के स्वभाव को दबाया जा सकता है, नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह हमेशा अपनी मनमानी करने के अवसर की ताक में रहता है। यदि हम अपने आप को प्रतिदिन और प्रतिपल नियंत्रित रहने के लिये प्रभु के समर्पित नहीं रखते, तो मौका पाते ही यह ’शरीर’ अपना विनाशकारी, विलासी और स्वार्थी स्वभाव हम में दिखाने लग जाता है।

यद्यपि हम मसीह में एक नई सृष्टि हैं, तो भी आत्मिक जीवन में नए जन्में शिशु से व्यस्क होने तक हमें भी कई चरणों से होकर मसीही परिपक्वता तक पहुंचना होता है। इन चरणों में ’शारीर’ को अपना पुराना स्वभाव दिखाने के कई अवसर मिल सकते हैं और मिलते हैं। ऐसे में हम में जो पाप करने की क्षमता विद्यमामन रहती है, हमें उसे अपने पर हावी नहीं होने देना चाहिये। इसका एक ही उपाय है, परमेश्वर का आत्मा जो मसीह से जुड़ने के बाद हम में निवास करता है, हम उसके आधीन होकर उसी के चलाए चलें। परमेश्वर के वचन का पालन करके और उसके आत्मा के आधीन बने रहकर ही हम अपने ’शरीर’ के प्राकृतिक स्वभाव पर विजयी हो सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


आत्मसंयम का भेद है अपना नियंत्रण परमेश्वर के आत्मा के हाथों में दे देना।

क्‍योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्‍छी वस्‍तु वास नहीं करती, इच्‍छा तो मुझ में है, परन्‍तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते। - रोमियों ७:१८

बाइबल पाठ: गलतियों ५:१६-२६

पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।
क्‍योंकि शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं, इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।
शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के ऐसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,
और कृपा, भालाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
और जो मसीह यीशु के हैं, उन्‍होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ३१-३२
  • मत्ती ९:१८-३८

बुधवार, 12 जनवरी 2011

आप बच नहीं सकते

डेटरोइट शहर में स्थित एक हाई स्कूल के कुछ छात्र, शहर में हो रहे रॉक संगीत के उत्सव में जाने के लिये बिना अनुमति लिये कक्षा से अनुपस्थित हुए। उन्हें लगा कि उनकी यह बात किसी को पता नहीं चलेगी और वे दण्ड से बच जाएंगे। लेकिन अगले दिन के अखबार में रॉक संगीत उत्सव की जो तसवीरें छपीं उनमें वे छात्र स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। उनका वह चोरी छिपे जाना सब के सामने प्रगट हो गया और स्कूल के उप-प्रधानाध्यापक ने उन्हें बुला कर उनसे सफाई मांगी।

बाइबल बताती है कि हम अपने दुष्कर्म छुपा नहीं सकते। चाहे थोड़े समय के लिये हम उन्हें ढांप दें या कुछ और लंबे समय के लिये उनके परिणामों से बचते रहें, लेकिन एक समय वह आएगा जब हमें उनका सामना करना ही पड़ेगा, चाहे इस जीवन में नहीं तो इस जीवन के बाद। पौलुस ने लिखा "धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।" (गलतियों ६:७)

जब कभी हमारे जीवन में कोई ऐसा पाप आए जिसे हम छुपा कर रखना चाहें, तो स्मरण रखें कि बेहतर होगा कि उसे छुपाने की बजाए उसे मान लें और छोड़ दें। या कभी कुछ ऐसा करने का प्रलोभन हो जो हम जानते हों कि गलत है, और हम सोचने लगें कि हम पकड़े नहीं जाएंगे, बात छिपी ही रहेगी, तो निश्चय कर लें कि ऐसी किसी बात की तरफ एक कदम भी नहीं बढ़ाएंगे, क्योंकि कुछ छुपा नहीं है जो प्रकट नहीं किया जाएगा।

चाहे उन छात्रों के समान हमारी तस्वीर अखबारों में न छपे, परन्तु हमारे काम कभी छिपे नहीं रहेंगे, हम उनकी जवाबदेही से बच नहीं सकते। - डेव एगनर


पाप का बीज चाहे छिपा कर बोया जाए, परन्तु उसकी फसल को छिपाया नहीं जा सकता।

क्योंकि हमारे अपराध तेरे साम्हने बहुत हुए हैं, हमारे पाप हमारे विरूद्ध साक्षी दे रहे हैं; हमारे अपराध हमारे संग हैं और हम अपने अधर्म के काम जानते हैं: - यशायाह ५९:१२


बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-९

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्‍छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।
धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
क्‍योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा, और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्‍त जीवन की कटनी काटेगा।
हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्‍योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २९-३०
  • मत्ती ९:१-१७

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

पाप से उत्पन्न दुख

जब एज़्रा भविष्यद्वक्ता को मालूम चला कि परमेश्वर के निर्देशों के विरुद्ध इस्त्राएलियों में से बहुतेरों ने अन्य जातीय स्त्रीयों से विवाह कर लिये थे तो उसने दुख, ग्लानि और पश्चाताप में अपने वस्त्र फाड़े और अपने सिर और दाढ़ी के बाल नोच डाले। फिर उसने घुटनों के बल गिरकर, रो रो कर परमेश्वर से अपने लोगों के लिये क्षमा की प्रार्थना करी।

पाप बहुत भयानक होता है। पाप से प्रभु को घिन है, आत्मिक लोगों को दुख होता है और पाप करने वाले को अनगिनित कष्टों को भोगना पड़ता है।

एज़्रा के उदहरण में, इस्त्राएल के लोगों ने अपनी अन्य जातीय पत्नियों को वापस उनके लोगों में भेज दिया, निश्चय ही इससे बहुतों को बहुत दुख हुआ होगा। लेकिन यह कठोर कदम इस्त्राएल को, आत्मिक पतन के इससे भी अधिक दुखदाई परिणामों से बचाने के लिये अनिवार्य था।

मुझे अनेक बार ऐसे पत्रों का उत्तर देना पड़ा है जहां परिवार के एक सदस्य के पाप के कारण पूरे परिवार को दुख उठाना पड़ा और परिवार टूटने की कगार पर आ गया था। ऐसे पत्रों का उत्तर देते समय मुझे स्मरण आता है कि अनाज्ञाकारिता कितनी तकलीफ लेकर आती है, और मुझपर इस बात की छाप और गहरी हो जाती है कि अन्ततः हमारे संसार में सभी दुखों का कारण पाप ही है। यद्यपि पाप के प्रभाव के कारण कष्ट हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं, फिर भी बहुत से लोग पाप के प्रति लापरवाही से अनैतिकता और व्यभिचार में धंसते चले जाते हैं तथा अपने कष्टों को कई गुणा बढ़ा लेते हैं।

हमें पाप के प्रति और अधिक संवेदनशील होना चाहिये और पाप के जंजाल में फंसे लोगों के उद्धार के लिये और अधिक बोझिल होना चाहिये। पाप से उत्पन्न दुख और सर्वनाश इतने भयंकर हैं कि हमारे जीवनों में पाप के प्रति ज़रा भी लापरवाही नहीं होनी चाहिये। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


सबसे भयानक बुराईयों में से एक है किसी भी बुराई को हलके में लेना या उसे नज़रांदाज़ करना।

दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। - भजन ३२:१०


बाइबल पाठ: भजन ३२:१-११

क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढांपा गया हो।
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा, और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा, तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
तू मेरे छिपने का स्थान है, तू संकट से मेरी रक्षा करेगा, तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २७-२८
  • मत्ती ८:१८-३४

सोमवार, 10 जनवरी 2011

पाप का गणित

मैंने कैद में पड़े हुए कैदियों को शोकित होकर अपने सिर हिलाते और यह कहते देखा है कि "मैंने कभी नहीं सोचा था कि बात इस हद तक बिगड़ जाएगी।" जब उन्होंने छोटे छोटे अपराध करने शुरू किये तो बड़े या गंभीर अपराधों में पड़ने का उनका कोई इरादा नहीं था। लेकिन एक के बाद दूसरा अपराध होता गया, वे अपराध के जीवन में फंसते चले गए और अब वे आत्मग्लानि के साथ बन्दीगृह में पड़े हैं।

इन लोगों ने कभी यह नहीं पहचाना कि पाप में सदा पतन ही होता है और उसकी गंभीरता बद से बदतर ही होती है। जब हम जीवन के एक पहलू में परमेश्वर के नियमों को तोड़ते हैं तो जैसे गणित के जोड़ और गुणा के सिद्धांत जीवन में कम करने लग जाते हैं। शीघ्र ही पाप बढ़कर जीवन के अन्य पहलूओं में भी अपने प्रभाव डालने लगता है।

यह सोचना मूर्खता है कि हम बस एक छोटा प्रीय पाप पाल कर रख सकते हैं। वह एक पाप बढ़ता और फैलता रहेगा और हमें पतन की ओर अग्रसर रखेगा जब तक कि हम उसे पूरी तरह अपने से दूर नहीं कर देते। इसीलिये प्रभु यीशु ने पाप करने वाला हाथ काट कर फेंकने और पाप करने वाली आंख निकालने की बात कही (मत्ती १८:८, ९)। ऐसे कठोर शब्द रूपक प्रयोग करने में प्रभु का उद्देश्य यही समझाना था कि पाप को दूर रखने के लिये जो कुछ बन पड़े वह करो।

हम पाप के साथ खिलवाड़ करने का जोखिम नहीं उठा सकते। पौलुस ने रोमियों की पत्री के पहले अध्याय में तीन बार लिखा परमेश्वर ने पाप में बने रहने वालों को उनके दुष्कर्मों पर छोड़ दिया। वह पाप के पतन को उसका समय पूरा होने तक छोड़ देता है ताकि न केवल पापी को पश्चाताप का पूरा अवसर मिले, वरन न्याय को भी पूरा अवसर मिले और जब न्याय का समय आए तो उससे बचने का कोई बहाना न रहे।

हम प्रभु यीशु पर विश्वास करके पाप के इस अव्श्यंभावी गणित से बच सकते हैं। आज और अभी हमारे जीवन के किसी भी पाप से बचने के लिये उसकी सामर्थ काफी है। नहीं तो एक समय आएगा जब हमें उसके न्याय का सामना करना पड़ेगा और तब कोई और बचाव का मार्ग या उपाय नहीं होगा। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


कोई भी अचानक ही दुष्ट नहीं हो जाता।

यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काट कर फेंक दे। - मत्ती १८:८


बाइबल पाठ: मत्ती १८:६-९

पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता।
ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्य है, पर हाय उस मनुष्य पर जिस के द्वारा ठोकर लगती है।
यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काट कर फेंक दे। टुण्‍डा या लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्‍त आग में डाला जाए।
और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २५-२६
  • मत्ती ८:१-१७

रविवार, 9 जनवरी 2011

जान बूझ कर "गलती से"

डगलस कौरिगन, १९३८ में, एक उपनाम, ’गलत राह लेने वाले कौरिगन’ के नाम से मशहूर हो गए, जब उन्होंने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से कैलिफोर्निया शहर के लिये अपने हवाईजहाज़ में उड़ान भरी और २३ घंटे बाद प्रशांत महासागर पार योरप में आयरलेंड के डबलिन शहर में उतर कर उन्होंने वहां के अधिकारियों से पूछा, "क्या यह लॉस एंजिलिस है?" इस बात के लिये, सालों तक लोग उनका मज़ाक उड़ाते रहे, परन्तु १९६३ में उन्हों ने अन्ततः यह मान लिया कि प्रशांत महासागर के पार की उनकी यह उड़ान "गलती से" नहीं हुई थी वरन योजनाबद्ध थी। क्योंकि उन्हें सागर के पार उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा रही थी, इसलिये उन्होंने जान बूझ कर यह "गलती" करी।

कौरिगन ने जो किया, उसमें और हमारे मसीही जीवन के अनुभवों में बहुत समानान्तर हैं। रोमियों १ में लिखा है कि मनुष्य की स्वभाविक प्रकृति स्वार्थी, पाप करने और परमेश्वर की अवलेहना करने की है। पाप करने की मनशा विश्वासी के जीवन में ज़ोर मारती रहती है (रोमियों७:१५-१९)। यद्यपि विश्वासी मसीह में नई सृष्टि हो जाता है, लेकिन उसमें पाप करने की प्रवृति सिर उठाती रहती है, जिसे लगातार मसीह की सामर्थ से दबा कर काबू में रखना होता है।

कुछ लोग सोचते हैं कि मसीही जान बूझ कर पाप नहीं कर सकते, लेकिन बाइबल स्पष्ट बताती है कि प्रत्येक विश्वासी शरीर की लालसाओं और उस के अन्दर बसने वाली पवित्र आत्मा के बीच के संघर्ष को अनुभव करता है (गलतियों ५:१६, १७)। इसिलिये हमें लगातार अपने आप को परमेश्वर के आधीन करते रहना पड़ता है, क्योंकि वह ही हमें धार्मिकता के सही मार्ग पर चलते रहने की इच्छा और योग्य शक्ति देता है।

इस तरह का जान बूझ कर किया गया परमेश्वर को समर्पण, हमें जान बूझ कर "गलती से" गलत राह पर चल निकलने से बचाए रखेगा। - मार्ट डी हॉन


जो संपूर्ण रीति से परमेश्वर को समर्पित हैं, वे कभी जान बूझ कर शैतान के आगे घुटने नहीं टेकेंगे।

...उन्‍होंने परमेश्वर को पहिचानना न चाहा... - रोमियों १:२८


बाइबल पाठ: रोमियों १:१८-२५

परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्‍वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं।
इसलिये कि परमश्‍ेवर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है।
क्‍योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरूत्तर हैं।
इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्‍होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्‍तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्‍धेरा हो गया।
वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए।
और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्‍तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला।
इस कारण परमेश्वर ने उन्‍हें उन के मन के अभिलाषाओं के अनुसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें।
क्‍योंकि उन्‍होंने परमेश्वर की सच्‍चाई को बदल कर झूठ बना डाला, और सृष्‍टि की उपासना और सेवा की, न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है। आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २३-२४
  • मत्ती ७

शनिवार, 8 जनवरी 2011

परमेश्वर के लिये घृणित

परमेश्वर पाप से घृणा करता है। नीतिवचन ६ में लेखक ने ७ विशिश्ट पाप गिनाये हैं जिनसे परमेश्वर विशेष घृणा करता है। परमेश्वर के लिये पाप इतना असहनीय है कि क्रूस पर जब उसके सिद्ध पुत्र यीशु मसीह ने संसार के पाप अपने ऊपर ले लिये, तो परमेश्वर पिता ने संसार के पापों को लिये हुए अपने प्रीय पुत्र से मुँह मोड़ लिया। उस घड़ी की तमस और क्रूस की पीड़ा में मसीह पुकार उठा "...हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्‍यों छोड़ दिया?" (मत्ती २७:४६)

यदि पाप परमेश्वर की नज़रों में इतना घृणित है तो हमें भी उससे डरना चाहिये, उससे बचना चाहिये और उससे घृणा करनी चाहिये।

योहन पीटर लैंग ने, जो जर्मनी में १९वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध धर्मशास्त्री थे, एक धार्मिक अगुवे से संबंधित कहानी सुनाई; इस अगुवे से वहां का राजा नफरत करता था। उस राजा के कुछ सलाहकारों ने राजा को सलाह दी कि राजा उस अगुवे को आग में झोंक दें, या उसकी सम्पत्ति ज़ब्त कर लें, या उसे सांकलों में बंध्वा दें, या किसी रीति से मरवा दें। लेकिन कुछ अन्य सलाहकार इन सब बातों से सहमत नहीं थे। उन्होंने राजा से कहा, "ऐसा करके आप कुछ भी लाभ नहीं पाएंगे। देश निकाला देने से भी वह परमेश्वर की संगति में मगन रहेगा; उसे अपनी सांकलों से प्रेम है और मृत्यु उसके लिये स्वर्ग के द्वार खोल देगी। उसे दुख देने का बस एक ही तरीका है, उसे केवल पाप करने से ही डर लगता है, इसलिये किसी तरह उससे पाप करवा दीजिए।"

क्या हम भी उस अगुवे की तरह हैं, जिन्हें संसार में केवल पाप ही से डर लगता हो? परन्तु दुर्भाग्य की बात यह है कि अकसर हम पाप से डरने की बजाए उसमें मज़ा लेते हैं। लेकिन इस बात का सदा ध्यान रखिये कि परमेश्वर पाप के प्रति कैसा नज़रिया रखता है। यदि हम परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तो उसके समान पाप से घृणा भी करेंगे। - रिचर्ड डी हॉन


बागबानों के लिये केवल फूलों से प्रेम रखना ही काफी नहीं है, उन्हें बगीचा खराब कर देने वाली खर-पतवार से भी घृणा रखनी चाहिये।

हे यहोवा के प्रेमियों, बुराई से घृणा करो। - भजन ९७:१०


बाइबल पाठ: नीतिवचन ६:१२-१९

ओछे और अनर्थकारी को देखो, वह टेढ़ी टेढ़ी बातें बकता फिरता है,
वह नैन से सैन और पांव से इशारा, और अपनी अगुंलियों से संकेत करता है,
उसके मन में उलट फेर की बातें रहतीं, वह लगातार बुराई गढ़ता है और झगड़ा रगड़ा उत्पन्न करता है।
इस कारण उस पर विपत्ति अचानक आ पड़ेगी, वह पल भर में ऐसा नाश हो जाएगा, कि बचने का कोई उपाय न रहेगा।
छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन सात हैं जिन से उसको घृणा है
अर्थात घमण्ड से चढ़ी हुई आंखें, झूठ बोलने वाली जीभ, और निर्दोष का लोहू बहाने वाले हाथ,
अनर्थ कल्पना गढ़ने वाला मन, बुराई करने को वेग दौड़ने वाले पांव,
झूठ बोलने वाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करने वाला मनुष्य।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २०-२२
  • मत्ती ६:१९-३४

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

सर्वोत्तम तो अभी आना है

१९वीं सदी के महान अंग्रेज़ी प्रचारक, चार्ल्स सिमियोन, जब बिमारी की अवस्था में अपनी मृत्यु शैया पर पड़े थे, तो अपने आसपास खड़े लोगों से उन्होंने कहा, "आप जानते हैं कि इस समय मुझे क्या चीज़ शान्ति दे रही है? मैं इस बात से बेबयान सांतव्ना पाता हूँ कि आरंभ में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।" उसके मित्रों ने पूछा कि यह बात अब मृत्यु के समक्ष उन्हें कैसे शान्ति दे सकती है? उन्होंने प्रभु से मिलने जाने वाले जन की तरह बड़े आत्मविश्वास से कहा, "क्यों? यदि परमेश्वर शून्य से इतनी अद्भुत सृष्टि बना सकता है, तो अवश्य ही वह मुझसे भी कुछ अच्छा बना सकता है।"

उस महिमा की कलपना भी करना जो परमेश्वर की सन्तानों के लिये रखी गई है - एक परमसिद्ध आत्मा और एक पुनरुत्थान पाई देह जो स्वर्गीय अनन्तता का, उसकी संपूर्णता में आनन्द लेने देने में सक्षम है, हमारे विचार की सामर्थ के परे है।

अभी भी परमेश्वर की परवर्तित करने वाली सामर्थ, उसकी सन्तानों में काम कर रही है। मसीही विश्वास में आने से हम परमेश्वर की सन्तान बने और उसने "हमें मसीह के साथ जिलाया" (इफिसियों २:५)। लेकिन केवल इतना ही नहीं, पौलुस कहता है कि यह इसलिये हुआ जिससे परमेश्वर भविष्य में "अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए" (इफिसियों २:७)। कोई अचंभा नहीं कि प्रेरित यूहन्ना ने कहा "हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्‍तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्‍या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्‍योंकि उस को वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।" (१ यूहन्ना ३:२)

परमेश्वर का कार्य अभी हम में पूरा नहीं हुआ है। अनन्त महिमा में अपने में हम जिन परिवर्तनों को अनुभव करेंगे वे हमारी कलपना के परे हैं। कितना रोमांचकारी है यह सोचना कि हमारे लिये हमारा सर्वोत्तम तो अभी आना है! - पौल वैन गौर्डर


प्रभु जब आप हमारे लिये स्थान तैयार कर रहे हैं, तो हमें भी उस स्थान के लिये तैयार कीजिए।

हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्‍तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्‍या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्‍योंकि उस को वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। - १ यूहन्ना ३:२


बाइबल पाठ: १ यूहन्ना ३:१-१२

देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्‍तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्‍योंकि उस ने उसे भी नहीं जाना।
हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्‍तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्‍या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्‍योंकि उस को वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।
जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है और पाप तो व्यवस्था का विरोध है।
और तुम जानते हो, कि वह इसलिये प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्‍वभाव में पाप नहीं।
जो कोई उस में बना रहता है, वह पाप नहीं करता: जो कोई पाप करता है, उस ने न तो उसे देखा है, और न उस को जाना है।
हे बालको, किसी के भरमाने में न आना, जो धर्म के काम करता है, वही उस की नाईं धर्मी है।
जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्‍योंकि शैतान आरम्भ ही से पाप करता आया है: परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।
जो कोई परमेश्वर से जन्मा है वह पाप नहीं करता, क्‍योंकि उसका बीज उस में बना रहता है: और वह पाप कर ही नहीं सकता, क्‍योंकि परमेश्वर से जन्मा है।
इसी से परमेश्वर की सन्‍तान, और शैतान की सन्‍तान जाने जाते हैं, जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता।
क्‍योंकि जो समाचार तुम ने आरम्भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति १८-१९
  • मत्ती ६:१-१८