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शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

पुनःआगमन

   कुछ वर्ष पहले की बात है, तब मेरे बच्चे उम्र मे छोटे ही थे; मैं मिशन सेवकाई के अपने 10 दिनों के दौरे से वापस घर लौटा तो हवाई-अड्डे पर मेरी पत्नि और मेरे बच्चे मुझे लेने के लिए आए। मेरे बाहर आते ही बच्चे मुझे देखकर खुशी के मारे चिल्लाने लगे, रोने लगे, और मैंने देखा कि मेरी पत्नि की आँखों में भी आँसू। मैं भी भावावेश में कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था, और हमारा यह हाल देखकर वहाँ उपस्थित कई अन्य अपिरिचित लोगों की आँखें भी नम हो गईं। वह एक बहुत भावुक और अद्भुत अवसर था।

   उस घटना के भावावेश की तीव्रता की यादें मेरी प्राथमिकताओं के बारे में मेरे हृदय की भावनाओं के लिए हल्की सी फटकार का कार्य करती हैं। प्रेरित यूहन्ना ने, प्रभु यीशु के पुनःआगमन की लालसा रखते हुए लिखा "जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां मैं शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ" (प्रकाशितवाक्य 22:20)। एक अन्य खण्ड में प्रेरित पौलुस ने भी इसी भाव को व्यक्त करते हुए यह भी लिखा कि जो प्रभु यीशु के पुनःआगमन को प्रीय जानते हैं, उनके लिए एक मुकुट प्रतीक्षा कर रहा है (2 तिमुथियुस 4:8)। लेकिन कई बार मैं प्रभु यीशु के पुनःआगमन की प्रतीक्षा उतनी लालसा से भी नहीं करता जितनी लालसा से मेरे बच्चे और पत्नि तब मेरे लौट आने की कर रहे थे।

   प्रभु यीशु हमारे सर्वोत्तम प्रेम और भक्ति के योग्य है - और उसे आमने-सामने देखने के विचार से बढ़कर हमारे लिए और कुछ इस संसार में नहीं होना चाहिए। जैसे जैसे हम अपने और समस्त जगत के उद्धारकर्ता के पुनःआगमन की प्रतीक्षा में रहते हैं और उसके आने का समय और निकट आता जाता है, उसके प्रति हमारा प्रेम और उससे मिलने की हमारी लालसा भी बढ़ती जाए। - बिल क्राउडर


जो मसीह यीशु के हैं उन्हें उससे मिलने की लालसा भी रहनी चाहिए।

तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए। और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त हो कर गल जाएंगे। - 2 पतरस 3:11-12

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 4:1-8
2 Timothy 4:1 परमेश्वर और मसीह यीशु को गवाह कर के, जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करेगा, उसे और उसके प्रगट होने, और राज्य को सुधि दिलाकर मैं तुझे चिताता हूं।
2 Timothy 4:2 कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डांट, और समझा।
2 Timothy 4:3 क्योंकि ऐसा समय आएगा, कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे।
2 Timothy 4:4 और अपने कान सत्य से फेरकर कथा-कहानियों पर लगाएंगे।
2 Timothy 4:5 पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर।
2 Timothy 4:6 क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है।
2 Timothy 4:7 मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है।
2 Timothy 4:8 भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 113-115 
  • 1 कुरिन्थियों 6


गुरुवार, 22 अगस्त 2013

विचार और मूल्याँकन

   ऑसट्रिया के एक 47 वर्षीय व्यक्ति, कार्ल रैबेडेर ने, अपनी सारी संपत्ति, जो लगभग 47 लाख अमेरीकी डॉलर की थी, दान कर दी क्योंकि उसका निष्कर्ष था कि उसकी संपत्ति और मन खोल कर खर्च करना उसे जीवन की वास्तविकता और आनन्द से वंचित कर रहे हैं। कार्ल ने लंडन शहर के एक अखबार डेली टेलिग्राफ को एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे लगने लगा था कि मैं एक दास के समान उन वस्तुओं के लिए कार्य किए जा रहा हूँ जिनकी ना तो मुझे आवश्यकता है और ना ही इच्छा। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सदमा था यह एहसास करना कि वह ’पाँच-सितारा’ जीवन शैली जो मैं जी रहा हूँ कितनी निरर्थक, आत्माविहीन और भावशून्य है।" कार्ल ने दक्षिणी अमेरिका के देशों में धर्माथ सेवा के कार्य आरंभ किए और अपनी सारी संपत्ति उन में लगा दी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 4 अध्याय में हम से अपने जीवन मार्ग के बारे में सावधानी पूर्वक विचार करने को कहा गया है। यहाँ धर्मियों के मुक्त, बाधारहित जीवन की तुलना दुष्टों के अन्धकारमय और उलझन भरे मार्गों से करी गई है (पद 19)। "और मेरा पिता मुझे यह कह कर सिखाता था, कि तेरा मन मेरे वचन पर लगा रहे; तू मेरी आज्ञाओं का पालन कर, तब जीवित रहेगा" (नीतिवचन 4:4); "सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है" (नीतिवचन 4:23); "अपने पांव धरने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें" (नीतिवचन 4:26)। प्रत्येक पद हमें उकसाता है कि हम मूल्याँकन करें कि हम जीवन में कहाँ खड़े हैं।

   कोई भी व्यक्ति अपना जीवन एक स्वार्थी और निर्दयी मार्ग से होकर तय नहीं करना चाहता। लेकिन यदि हम रुक कर विचार और मूल्याँकन नहीं करेंगे, और परमेश्वर पिता से मार्गदर्शन नहीं लेंगे तो यही होगा। परमेश्वर पिता से प्रार्थना करें कि वह अपने वचन के प्रति प्रेम और तथा समझ-बूझ का अनुग्रह आपको प्रदान करे तथा आप उसके साथ उसके मार्गों पर सदा चलने वाले बन सकें। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब आप परमेश्वर के साथ चलेंगे तो आप सही दिशा में आगे बढ़ेंगे।

मैं ने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है; और सीधाई के पथ पर चलाया है। शिक्षा को पकड़े रह, उसे छोड़ न दे; उसकी रक्षा कर, क्योंकि वही तेरा जीवन है। - नीतिवचन 4:11, 13

बाइबल पाठ: नीतिवचन 4:14-23
Proverbs 4:14 दुष्टों की बाट में पांव न धरना, और न बुरे लोगों के मार्ग पर चलना।
Proverbs 4:15 उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल, उसके निकट से मुड़ कर आगे बढ़ जा।
Proverbs 4:16 क्योंकि दुष्ट लोग यदि बुराई न करें, तो उन को नींद नहीं आती; और जब तक वे किसी को ठोकर न खिलाएं, तब तक उन्हें नींद नहीं मिलती।
Proverbs 4:17 वे तो दुष्टता से कमाई हुई रोटी खाते, और उपद्रव के द्वारा पाया हुआ दाखमधु पीते हैं।
Proverbs 4:18 परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है।
Proverbs 4:19 दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकारमय है; वे नहीं जानते कि वे किस से ठोकर खाते हैं।
Proverbs 4:20 हे मेरे पुत्र मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा।
Proverbs 4:21 इन को अपनी आंखों की ओट न होने दे; वरन अपने मन में धारण कर।
Proverbs 4:22 क्योंकि जिनको वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं।
Proverbs 4:23 सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।
Proverbs 4:24 टेढ़ी बात अपने मुंह से मत बोल, और चालबाजी की बातें कहना तुझ से दूर रहे।
Proverbs 4:25 तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें।
Proverbs 4:26 अपने पांव धरने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें।
Proverbs 4:27 न तो दाहिनी ओर मुढ़ना, और न बाईं ओर; अपने पांव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 110-112 
  • 1 कुरिन्थियों 5


बुधवार, 21 अगस्त 2013

पवित्र

   संभवतः यह वह शब्द नहीं है जिसे हम अपने लिए प्रयोग करेंगे, लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रेरित पौलुस अकसर मसीही विश्वासियों को "पवित्र" कहकर संबोधित करता है (इफिसियों 1:1; कुलुस्सियों 1:2)। क्या वह उन्हें ऐसा इसलिए कहता है क्योंकि वे सिद्ध थे? नहीं! ये लोग भी अन्य मनुष्यों के समान ही थे, पापी थे। तो फिर पौलुस का उनके लिए यह शब्द प्रयोग करने के पीछे क्या तात्पर्य था? मूल भाषा में, जिसमें बाइबल का नया नियम खंड लिखा गया, "पवित्र" शब्द का अर्थ था वह व्यक्ति जो परमेश्वर के लिए पृथक किया गया है। यह शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग हुआ है जिनका मसीह यीशु के साथ आत्मिक जोड़ बन गया है (इफिसियों 1:3-6)। यह शब्द मसीह यीशु के विश्वासियों का (रोमियों 8:27) तथा उन लोगों का पर्यायवाची है जिनसे मिलकर मसीही मण्डली बनती है (प्रेरितों 9:32)।

   पवित्र लोगों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे उन में निवास करने वाले परमेश्वर के पवित्र आत्मा की सामर्थ, सहायता और मार्गदर्शन द्वारा अपनी बुलाहट के योग्य जीवन व्यतीत करें। अर्थात, अब उनके अन्दर संसार के लोगों से अलग कुछ नए लक्षण पाए जानें हैं: एक दूसरे की सेवा करना (रोमियों 16:2); नम्रता, दीनता, धीरज, प्रेम, मेल के बन्धन में परस्पर आत्मा की एकमनता (इफिसियों 4:1-3), कठिनाईयों और क्लेषों में भी परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता (प्रकाशितवाक्य 13:10; 14:12)। साथ ही पवित्र लोगों में व्यभिचार और मूढ़ता की बातचीत और अन्य ऐसी कोई बात भी नहीं पाई जानी चाहिए (इफिसियों 5:3-4)। बाइबल के पुराने नियम खंड में भजनकार ने पवित्र लोगों के विषय कहा है: "पवित्र लोग...उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूँ" (भजन 16:3)।

   प्रभु यीशु के साथ हमारा मेल हमें मसीही विश्वासी अर्थात "पवित्र" उप-नाम देता है लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रति, पवित्र आत्मा की सामर्थ, सहायता और मार्गदर्शन द्वारा हमारी आज्ञाकारिता, हमें पवित्रता का स्वभाव देती है। - मार्विन विलियम्स


पवित्र वे लोग हैं जिनमें होकर परमेश्वर की ज्योति चमकती है।

मसीह में उन पवित्र और विश्वासी भाइयों के नाम जो कुलुस्‍से में रहते हैं। हमारे पिता परमेश्वर की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति प्राप्त होती रहे। - कुलुस्सियों 1:2

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:1-17
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 107-109 
  • 1 कुरिन्थियों 4


मंगलवार, 20 अगस्त 2013

अवरोध

   दूसरों में दोष ढूँढ़ना एक आम बात है, जिसमें बहुत से लोग मज़ा भी लेते हैं। दुर्भाग्यवश, इस बुराई को करने या बढ़ावा देने में भाग लेना बहुत सरल होता है। दूसरों के दोषों पर दृष्टि रखना और उन्हें औरों को बताना अपने दोषों को छिपाने और अपने आप को दूसरों से बेहतर समझने और दिखाने का एक बेहतरीन तरीका है - और यही समस्या कि जड़ भी है। अपने जीवन की कमियों और दोषों को नज़रंदाज़ करने से ना केवल हमारी आत्मिक उन्नति अवरुद्ध होती है, वरन साथ ही हम परमेश्वर के लिए उपयोगी भी नहीं हो पाते। हम मसीही विश्वासियों की जीवन शैली ही यह निर्धारित करती है कि हम परमेश्वर के लिए संसार में प्रभावी हैं या उसके कार्य को बाधित कर रहे हैं।

   इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि प्रेरित पौलुस ने यह ठान रखा था कि "हम किसी बात में ठोकर खाने का कोई भी अवसर नहीं देते, कि हमारी सेवा पर कोई दोष न आए" (2 कुरिन्थियों 6:3)। पौलुस के लिए इससे बढ़कर और कुछ भी नहीं था कि वह मसीह यीशु के लिए अन्य लोगों के जीवन में कार्यकारी बना रह सके। उसके इस उद्देश्य की पूर्ति में जो कुछ भी आता था उसे वह अपने जीवन में स्थान नहीं देता था।

   यदि आप परमेश्वर के लिए कार्यकारी और उपयोगी होना चाहते हैं तो अवरोधों की सूची बनाएं - "मेरे जीवन में ऐसा क्या क्या है जो मुझे परमेश्वर की सेवा में प्रभावी नहीं होने दे रहा है?"; यह सूची बनाते हुए अनेक बार आप पाएंगे कि ऐसे भी अवरोध हैं जो अपने आप में वाजिब और न्यायसंगत हैं परन्तु कुछ परिस्थितियों के सन्दर्भ में वे अनुचित हो जाते हैं। लेकिन परिस्थिति कुछ भी क्यों ना हो, पाप सदा ही अनुचित होता है। अपने आप को जाँचिए कि कहीं कानाफूसी, लांछन लगाना, अहंकार, जलन और कड़ुवाहट, लालच, गाली-गलौज़, क्रोध, स्वार्थ, बदला लेना आदि बातें आपके जीवन में स्थान तो नहीं पा रही हैं, क्योंकि ये सब और ऐसी ही अन्य बातें हमारे आस-पास के लोगों के मनों को हमारे मसीही विश्वास और परमेश्वर प्रभु यीशु, दोनो ही के विमुख कर देती हैं, और परमेश्वर के प्रेम तथा उद्धार का सन्देश लोगों तक नहीं पहुँच पाता।

   इसलिए अपने जीवन से इन अवरोधों को हटा कर इनके स्थान पर अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के मनोहर गुणों को बसा लीजिए। यह आपके जीवन के द्वारा संसार पर जगत के उस निर्दोष उद्धारकर्ता को स्पष्ट प्रगट कर सकेगा और आपका जीवन सुसमाचार प्रचार का माध्यम बन जाएगा, अवरोध नहीं। - जो स्टोवैल


मसीह यीशु के अनुयायी सबसे प्रभावशाली तब ही होते हैं जब उनके व्यवहार और कार्य मसीह यीशु के समान ही हों।

सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। - रोमियों 14:13

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 6:3-10
2 Corinthians 6:3 हम किसी बात में ठोकर खाने का कोई भी अवसर नहीं देते, कि हमारी सेवा पर कोई दोष न आए।
2 Corinthians 6:4 परन्तु हर बात से परमेश्वर के सेवकों की नाईं अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं, बड़े धैर्य से, क्‍लेशों से, दरिद्रता से, संकटो से।
2 Corinthians 6:5 कोड़े खाने से, कैद होने से, हुल्लड़ों से, परिश्रम से, जागते रहने से, उपवास करने से।
2 Corinthians 6:6 पवित्रता से, ज्ञान से, धीरज से, कृपालुता से, पवित्र आत्मा से।
2 Corinthians 6:7 सच्चे प्रेम से, सत्य के वचन से, परमेश्वर की सामर्थ से; धामिर्कता के हथियारों से जो दाहिने, बाएं हैं।
2 Corinthians 6:8 आदर और निरादर से, दुरनाम और सुनाम से, यद्यपि भरमाने वालों के जैसे मालूम होते हैं तौभी सच्चे हैं।
2 Corinthians 6:9 अनजानों के सदृश्य हैं; तौभी प्रसिद्ध हैं; मरते हुओं के जैसे हैं और देखो जीवित हैं; मार खाने वालों के सदृश हैं परन्तु प्राण से मारे नहीं जाते।
2 Corinthians 6:10 शोक करने वालों के समान हैं, परन्तु सर्वदा आनन्द करते हैं, कंगालों के जैसे हैं, परन्तु बहुतों को धनवान बना देते हैं; ऐसे हैं जैसे हमारे पास कुछ नहीं तौभी सब कुछ रखते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 105-106 
  • 1 कुरिन्थियों 3


सोमवार, 19 अगस्त 2013

ईश्वरीय कैमरा

   स्टीवन विल्टशायर नामक व्यक्ति को "मानव कैमरा" भी कहा जाता है क्योंकि उस में एक विलक्षण प्रतिभा है - वह जो देख लेता है उसकी बारीकियों को भी याद कर लेता है और फिर उन्हें चित्र में बना कर दिखा सकता है। उदाहरण के लिए, एक बार स्टीवन को रोम शहर वायुयान द्वारा ऊपर से घुमाया गया और फिर धरती पर उतरने के बाद उससे कहा गया कि रोम के मध्य भाग का चित्र बनाए। जाँचने वाले दंग रह गए जब उसने अपनी स्मरण शक्ति से उस भाग का बिल्कुल सही चित्र बना दिया जिसमें वहाँ की छोटी-छोटी घुमावदार गलियां, सभी इमारतें, भवनों की खिड़कियां आदि सभी बिल्कुल हू-ब-हू दिख रहीं थीं।

   स्टीवन विल्टशायर की स्मरण शक्ति निःसन्देह विलक्षण है, लेकिन एक और स्मरण शक्ति है जो इससे भी अधिक विलक्षण है, और कहीं अधिक महत्वपूर्ण। प्रभु यीशु ने अपने स्वर्गारोहण से पूर्व अपने शिष्यों से वायदा किया था कि उनकी सहायता के लिए वह पवित्र आत्मा को भेजेगा जो उन्हें एक ईश्वरीय स्मरण शक्ति प्रदान करेगा जिससे वे प्रभु यीशु की शिक्षाओं और उसके साथ के अपने अनुभवों को स्मरण रख सकें (यूहन्ना 14:26)।

   शिष्यों ने प्रभु यीशु की अद्भुत शिक्षाओं को सुना था, उसे अनेक आश्चर्यकर्म - अन्धों को आँखें देना, बहरों को श्रवण-शक्ति देना, मृतकों को जीवित करना आदि करते हुए देखा था। अब प्रभु यीशु ने उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपी थी कि वे इन सब शिक्षाओं और प्रभु यीशु की बातों को संसार के छोर तक सभी लोगों और जातियों में लेकर जाएं और उन्हें बताएं। ना केवल वे शिष्य, वरन जो उनकी गवाही और प्रचार द्वारा प्रभु यीशु पर विश्वास लाते, उन्हें भी यही ज़िम्मेदारी ऐसे ही निभानी थी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रभु यीशु की शिक्षाओं और कार्यों के वर्णन में समय, भाषा और काल के परिवर्तन के बावजूद कभी भी कोई मिलावट या त्रुटि ना होने पाए उन्हें और उनके बाद के सभी चेलों को एक ईश्वरीय स्मरण शक्ति की आवश्यकता थी। उनके लिए यह सहायता परमेश्वर के पवित्र आत्मा के रूप में उन्हें उपलब्ध कराई गई और परमेश्वर का पवित्र आत्मा तब से प्रत्येक मसिही विश्वासी के अन्दर निवास करता है और उसे प्रभु यीशु तथा परमेश्वर की बातों को स्मरण कराता रहता है।

   इसी कारण जब मसीही शिष्यों और विश्वासियों ने प्रभु यीशु के वचन, शिक्षाएं और कार्य लिखे तो यह अपनी किसी सामर्थ अथवा स्मरण शक्ति या समझ-बूझ के आधार पर नहीं लिखे, वरन जैसा परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने उन्हें प्रेरित करके लिखवाया, उन्होंने लिखा। यही कारण है कि संपूर्ण बाइबल में कोई विरोधाभास नहीं है, बाइबल का प्रत्येक भाग अन्य भागों का पूरक और सहायक है - क्योंकि सभी भागों का लिखवाने वाला वही एक पवित्र आत्मा है, चाहे लिखने वाले मनुष्य भिन्न हों। इसीलिए बाइबल परमेश्वर का वचन है और आप इस पर संपूर्ण रीति से भरोसा रख सकते हैं, इसे परख भी सकते हैं; क्योंकि यह ईश्वरीय कैमरे में दर्ज हो रखी बातों का लिखित विवरण है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर का पवित्र आत्मा परमेश्वर के वचन का उपयोग परमेश्वर के लोगों को सिखाने के लिए करता है।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:7-15
John 16:7 तौभी मैं तुम से सच कहता हूं, कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा।
John 16:8 और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा।
John 16:9 पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते।
John 16:10 और धामिर्कता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं,
John 16:11 और तुम मुझे फिर न देखोगे: न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है।
John 16:12 मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते।
John 16:13 परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा।
John 16:14 वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा।
John 16:15 जो कुछ पिता का है, वह सब मेरा है; इसलिये मैं ने कहा, कि वह मेरी बातों में से ले कर तुम्हें बताएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 103-104 
  • 1 कुरिन्थियों 2


रविवार, 18 अगस्त 2013

विश्वासयोग्य

   संसार भर को प्रभावित करने वाले आर्थिक संकट के बाद अमेरिका की सरकार ने कुछ सख्त कानून बनाए जो लोगों की बैंकों की आपत्तिजनक कार्यप्रणालियों से सुरक्षा कर सकें। इन नियमों के पालन के लिए बैकों को अपनी कुछ नीतियों में परिवर्तन करने पड़े और इन परिवर्तनों की सूचना अपने ग्राहकों को देने के लिए बैंकों ने उन्हें सूचना-पत्र भेजे। जब मुझे अपने बैंक से यह सूचना-पत्र पहुँचा तो मैंने उसे बड़े ध्यान से पढ़ा, और पत्र के अन्त तक पहुँचते पहुँचते मैं असमंजस में थी क्योंकि उस सूचना-पत्र से मुझे उत्तर तो कम मिले लेकिन मन में प्रश्न अनेक उठ खड़े हुए। उस पूरे पत्र में अनेक स्थानों पर, "हम कर सकते हैं" या "हमारी इच्छानुसार" जैसे वाक्याँशों के प्रयोग के कारण मुझे उन बैंक प्रबन्धकों की नीतियों और कार्यप्रणाली की विश्वासयोग्यता पर विश्वास नहीं हो पाया।

   इसकी तुलना में, परमेश्वर के वचन बाइबल में हम परमेश्वर के विषय में अनेक बार लिखा पाते हैं कि परमेश्वर कहता है, "मैं करूंगा"। दाऊद से परमेश्वर ने वायदा किया: "जब तेरी आयु पूरी हो जाएगी, और तू अपने पुरखाओं के संग सो जाएगा, तब मैं तेरे निज वंश को तेरे पीछे खड़ा कर के उसके राज्य को स्थिर करूंगा। मेरे नाम का घर वही बनवाएगा, और मैं उसकी राजगद्दी को सदैव स्थिर रखूंगा" (2 शमूएल 7:12-13)। परमेश्वर की वाचाओं में कोई अनिश्चितता नहीं है; वह स्पष्ट बात कहता है, घुमा-फिरा कर नहीं। राजा सुलेमान ने परमेश्वर की उसकी वाचाओं के प्रति विश्वासयोग्यता को पहचानते हुए, परमेश्वर के मन्दिर के समर्पण के समय करी गई अपनी प्रार्थना में कहा: "तू ने जो वचन मेरे पिता दाऊद को दिया था, उसका तू ने पालन किया है; जैसा तू ने अपने मुंह से कहा था, वैसा ही अपने हाथ से उसको हमारी आंखों के साम्हने पूरा भी किया है" (2 इतिहास 6:15)। इस बात के सदियों बाद प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर की वाचाओं के संबंध में लिखा कि परमेश्वर की जितनी प्रतिज्ञाएं हैं, वे सब मसीह यीशु में हां के साथ हैं (2 कुरिन्थियों 1:20)।

   इस अनिश्चितता से भरे संसार में अपने विश्वास और भविष्य का आधार उस विश्वासयोग्य और कभी ना बदलने वाले परमेश्वर को बनाईए जो अपनी प्रतिज्ञाओं में कोई दोगलापन या अनिश्चितता नहीं रखता और स्पष्ट बात करता है; जो कहता है उसे वैसा ही पूरा भी करता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


विश्वास जानता है कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं का निर्वाह सदा ही करता है।

क्योंकि परमेश्वर की जितनी प्रतिज्ञाएं हैं, वे सब उसी में हां के साथ हैं: इसलिये उसके द्वारा आमीन भी हुई, कि हमारे द्वारा परमेश्वर की महिमा हो। - 2 कुरिन्थियों 1:20

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 6:1-11
2 Chronicles 6:1 तब सुलैमान कहने लगा, यहोवा ने कहा था, कि मैं घोर अंधकार मैं वास किए रहूंगा।
2 Chronicles 6:2 परन्तु मैं ने तेरे लिये एक वासस्थान वरन ऐसा दृढ़ स्थान बनाया है, जिस में तू युग युग रहे।
2 Chronicles 6:3 और राजा ने इस्राएल की पूरी सभा की ओर मुंह फेर कर उसको आशीर्वाद दिया, और इस्राएल की पूरी सभा खड़ी रही।
2 Chronicles 6:4 और उसने कहा, धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसने अपने मुंह से मेरे पिता दाऊद को यह वचन दिया था, और अपने हाथों से इसे पूरा किया है,
2 Chronicles 6:5 कि जिस दिन से मैं अपनी प्रजा को मिस्र देश से निकाल लाया, तब से मैं ने न तो इस्राएल के किसी गोत्र का कोई नगर चुना जिस में मेरे नाम के निवास के लिये भवन बनाया जाए, और न कोई मनुष्य चुना कि वह मेरी प्रजा इस्राएल पर प्रधान हो।
2 Chronicles 6:6 परन्तु मैं ने यरूशलेम को इसलिये चुना है, कि मेरा नाम वहां हो, और दाऊद को चुन लिया है कि वह मेरी प्रजा इस्राएल पर प्रधान हो।
2 Chronicles 6:7 मेरे पिता दाऊद की यह मनसा थी कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनवाए।
2 Chronicles 6:8 परन्तु यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कहा, तेरी जो मनसा है कि यहोवा के नाम का एक भवन बनाए, ऐसी मनसा कर के तू ने भला तो किया;
2 Chronicles 6:9 तौभी तू उस भवन को बनाने न पाएगा: तेरा जो निज पुत्र होगा, वही मेरे नाम का भवन बनाएगा।
2 Chronicles 6:10 यह वचन जो यहोवा ने कहा था, उसे उसने पूरा भी किया है; ओर मैं अपने पिता दाऊद के स्थान पर उठ कर यहोवा के वचन के अनुसार इस्राएल की गद्दी पर विराजमान हूँ, और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के नाम के इस भवन को बनाया है।
2 Chronicles 6:11 और इस में मैं ने उस सन्दूक को रख दिया है, जिस में यहोवा की वह वाचा है, जो उसने इस्राएलियों से बान्धी थी।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 100-102 
  • 1 कुरिन्थियों 1


शनिवार, 17 अगस्त 2013

मध्य-रात्रि मित्र

   क्या आपका कोई ऐसा मित्र है जिसे आप मध्य-रात्रि में भी सहायता के लिए बेहिचक बुला सकते हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल के शिक्षक रे प्रिट्चर्ड ऐसे मित्रों को "मध्य-रात्रि मित्र" कहते हैं। यदि आप किसी आपात स्थिति में हों और ऐसे किसी मित्र से संपर्क करें तो वह आपसे दो ही प्रश्न पूछेगा, "मैं क्या सहायता कर सकता हूँ?" और "यह सहायता कहाँ पर उपलब्ध करानी है?"

   ऐसे मित्र कठिन समयों के लिए अति महत्वपूर्ण होते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक मुख्य नायक दाऊद का भी एक ऐसा ही मित्र था - योनातान। योनातान का पिता - तत्कालीन इस्त्राएली राजा शाऊल दाऊद की इस्त्राएली समाज में लोकप्रीयता और दाऊद पर परमेश्वर की आशीषों से बहुत डाह रखता था और इन कारणों से उसे मार डालने के प्रयास करता रहता था (1 शमूएल 19)। लेकिन दाऊद इन सब हमलों से बचता रहा, जाकर छिप गया और उसने अपने मित्र योनातान से सहायता माँगी (1 शमूएल 20), क्योंकि योनातान का मन दाऊद से लगा हुआ था और वह दाऊद से अपने समान ही प्रेम करता था (1 शमूएल 18:1)। योनातान ने अपने पिता को दाऊद के विषय में समझाने का प्रयास किया लेकिन शाऊल के व्यवहार और उत्तर से भाँप लिया कि शाऊल से दाऊद की जान को बहुत खतरा है (1 शमूएल 20:24-34)।

   परमेश्वर का वचन हमें आगे बताता है कि योनातान दाऊद के लिए दुखी हुआ (पद 34) और उसने दाऊद से अपने पिता की उसे घात करने की योजना के बारे में बताया और कहा कि वह वहाँ से कहीं दूर चला जाए (पद 41-42)। दाऊद ने जान लिया कि योनातान में उसे कितना अच्छा मित्र मिला है; वे दोनों गले लगकर रोए, दाऊद का रोना अधिक था। योनातान राजकुमार था, शाऊल के बाद राजगद्दी का उत्तराधिकारी; योनातान यह भी जानता था कि उसके राजा बनने में यदि कोई बाधा हो सकता है तो वह इस्त्राएल में अपनी लोकप्रीयता और उस पर बने हुए परमेश्वर के हाथ के कारण दाऊद ही है। लेकिन योनातान ने इस बात को अपनी मित्रता के आड़े नहीं आने दिया और दाऊद की भरसक सहायता करी। कुछ समय बाद एक युद्ध में शाऊल और योनातान दोनों ही मारे गए और इसत्राएल के लोगों ने दाऊद को लाकर अपना राजा बना लिया। राजा बनने के बाद: "दाऊद ने पूछा, क्या शाऊल के घराने में से कोई अब तक बचा है, जिस को मैं योनातन के कारण प्रीति दिखाऊं?" (2 शमूएल 9:1) - योनातान की मित्रता के कारण दाऊद ने राजा बनने के बाद अपनी जान के दुश्मन शाऊल के समस्त घराने पर कृपादृष्टि बनाए रखी।

   क्या आपके पास ऐसे "मध्य-रात्रि मित्र" हैं? इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात है कि एक मसीही विश्वासी होने के कारण क्या आप अपने मसीही समाज के लिए एक "मध्य-रात्रि मित्र" बने हैं? - ऐनी सेटास


एक सच्चा मित्र संकट और कष्ट में भी साथ खड़ा रहता है।

जब वह शाऊल से बातें कर चुका, तब योनातान का मन दाऊद पर ऐसा लग गया, कि योनातान उसे अपने प्राण के बराबर प्यार करने लगा। - 1 शमूएल 18:1

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 20:30-42
1 Samuel 20:30 तब शाऊल का कोप योनातन पर भड़क उठा, और उसने उस से कहा, हे कुटिला राजद्रोही के पुत्र, क्या मैं नहीं जानता कि तेरा मन तो यिशै के पुत्र पर लगा है? इसी से तेरी आशा का टूटना और तेरी माता का अनादर ही होगा।
1 Samuel 20:31 क्योंकि जब तक यिशै का पुत्र भूमि पर जीवित रहेगा, तब तक न तो तू और न तेरा राज्य स्थिर रहेगा। इसलिये अभी भेज कर उसे मेरे पास ला, क्योंकि निश्चय वह मार डाला जाएगा।
1 Samuel 20:32 योनातन ने अपने पिता शाऊल को उत्तर देकर उस से कहा, वह क्यों मारा जाए? उसने क्या किया है?
1 Samuel 20:33 तब शाऊल ने उसको मारने के लिये उस पर भाला चलाया; इससे योनातन ने जान लिया, कि मेरे पिता ने दाऊद को मार डालना ठान लिया है।
1 Samuel 20:34 तब योनातन क्रोध से जलता हुआ मेज पर से उठ गया, और महीने के दूसरे दिन को भोजन न किया, क्योंकि वह बहुत खेदित था, इसलिये कि उसके पिता ने दाऊद का अनादर किया था।
1 Samuel 20:35 बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिये हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया।
1 Samuel 20:36 तब उसने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ ले आ। छोकरा दौड़ता ही था, कि उसने एक तीर उसके परे चलाया।
1 Samuel 20:37 जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है।
1 Samuel 20:38 फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकारकर कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत। और योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकार के कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत! और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ल आया।
1 Samuel 20:39 इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था; केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे।
1 Samuel 20:40 और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा।
1 Samuel 20:41 ज्योंही छोकरा चला गया, त्योंही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिरके तीन बार दण्डवत की; तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद को रोना अधिक था।
1 Samuel 20:42 तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठ कर चला गया; और योनातन नगर में गया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 97-99 
  • रोमियों 16