ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 4 अक्टूबर 2014

सही समय


   कुछ महीने बीत जाने के बाद ही मुझे पता चला कि जिसे मैं एक संयोगात्मक मुलाकात का परिणाम समझे बैठी थी, वास्तव में वह मेरे होने वाले पति के द्वारा सही समय का प्रयोग था। हमारी पहली औपचारिक मुलाकात होने से पहले उन्होंने मुझे चर्च की बॉलकनी से देखा, अन्दाज़ा लगाया कि मैं किस ओर से बाहर निकलूँगी, दौड़ कर दो मंज़िल सीढ़ियाँ नीचे उतरे और मेरे पहुँचने से कुछ सेकेंड पहले ही पहुँच कर दरवाज़ा पकड़ कर खड़े हो गए और फिर बहाने से मुझ से वार्तालाप आरंभ कर लिया। मुझे बाद में ही यह भी पता चला कि जो उस समय मुझे भोजन के लिए बाहर मिलने का एक आकस्मिक निमंत्रण प्रतीत हुआ था, वह भी उनके द्वारा सही समय का प्रयोग था जो उन्होंने बड़े विचार और योजना के साथ मेरे सामने उस "आकस्मिक" रीति से रखा था। उस "सही समय" के प्रयोग से मुलाकातों का सिलसिला बना और बढ़ा और सही समय पर फिर हम पति-पत्नि भी हो गए।

   हम मनुष्यों के लिए सही समय की प्रतीक्षा और उपयोग की अपेक्षा, अधीरता तथा जल्दबाज़ी अधिक सामान्य व्यवहार रहता है। लेकिन परमेश्वर के हमारे लिए विशेष उद्देश्य और योजनाएं रहती हैं, और उसका समय सर्वदा सही समय होता है। जो हमें संयोग लगता है, वह परमेश्वर की योजना और निर्धारण होता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम अनेक उदाहरण पाते हैं जहाँ प्रतीत होने वाला संयोग वास्तव में परमेश्वर द्वारा निर्धारित सही समय पर पूरा हुआ कार्य था; जैसे कि: अब्राहम के सेवक ने अपने स्वामी की आज्ञानुसार सही पुत्रवधु से मिलवाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करी और उसकी मुलाकात रिबका से हो गई (उत्पत्ति 24); यूसुफ को उसके भाईयों ने दास बनाकर बेच दिया, फिर वह निर्दोष होने पर भी कैदखाने में डाला गया, लेकिन एक समय ऐसा आया जब परमेश्वर ने उसे लाकर मिस्त्र के राजा के सामने खड़ा कर दिया और यूसुफ वहाँ का प्रधानमंत्री और राजा के बाद सबसे अधिक अधिकार रखने वाला बना, और उसकी सलाह तथा कार्य से लाखों लोगों का जीवन अकाल में नाश होने से बचा, उसके अपने उन कुटिल भाईयों का भी (उत्पत्ति 45:5-8; 50:20); मोर्देकै के "क्योंकि जो तू इस समय चुपचाप रहे, तो और किसी न किसी उपाय से यहूदियों का छुटकारा और उद्धार हो जाएगा, परन्तु तू अपने पिता के घराने समेत नाश होगी। फिर क्या जाने तुझे ऐसे ही कठिन समय के लिये राजपद मिल गया हो?" (एस्तेर 4:14) कहने पर एस्तेर रानी ने अपनी जान जोखिम में डालकर राजा के सामने जाना स्वीकार किया और उसके प्रयास से यहूदीयों की जान बच सकी।

   क्या आज आप अपने जीवन में परमेश्वर की योजना की गति को लेकर निराश हैं? क्या आपको लग रहा है कि परमेश्वर ने आपको छोड़ दिया है, आपको भूल गया है या आपकी परवाह नहीं करता है? परमेश्वर पर भरोसा रखिए (भजन 37:3); सही समय पर वह आपके लिए सही कार्य करने के सही दरवाज़े भी खोलेगा और अपनी योजनाओं को आपके जीवन में पूरा भी करेगा, और उसकी योजना से बेहतर आपके लिए और कुछ हो नहीं सकता। - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर का समय ही सिद्ध तथा सही समय है - सर्वदा।

यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। - उत्पत्ति 50:20 

बाइबल पाठ: भजन 37:3-11
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा।
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी। 
Psalms 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Psalms 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा। 
Psalms 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • नहूम 1-3


शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

कीमत


   जब मैं युवा थी तो मुझे लगता था कि अपने माता-पिता के साथ उनके घर में रहने की मुझे एक बड़ी कीमत देनी पड़ रही है। आज, जब मैं उन बातों के बारे में सोचती हूँ तो अपने पर हँसी आती है कि उस समय मेरा शिकायत करना कितना बचकाना था। ऐसा नहीं है कि मेरे माता-पिता ने मुझ से अपने साथ घर में रहने के लिए कभी एक भी पैसा लिया हो; जिस "कीमत" की मैं बात कर रही हूँ वह थी आज्ञाकारिता। वे तो बस इतना ही चाहते थे कि मैं बस कुछ नियमों का पालन करती रहूँ, जैसे कि अपने पीछे कोई गन्दगी ना छोड़ूँ सब कुछ साफ-सफाई से रखूँ, सब के साथ शालीनता तथा नम्रता से व्यवहार करूँ, नियमित रूप से चर्च जाया करूँ इत्यादि। ये नियम ना तो कठिन थे और ना ही इनके पालन से मेरा कुछ नुकसान होता था, परन्तु फिर भी उनका पालन करना मुझे कठिन लगता था और मुझसे अनाज्ञाकारिता होती रहती थी। कभी-कभी, आवश्यकतानुसार नियम और उनका पालन और कड़ा भी कर दिया जाता था; किन्तु सदा ही मेरे माता-पिता मुझे बस स्मरण दिलाते रहते थे कि ये नियम मेरी भलाई के लिए हैं, मेरी सुरक्षा के लिए हैं, मुझे कोई नुक्सान पहुँचाने के लिए नहीं। ऐसा कभी नहीं हुआ कि कभी किसी अनाज्ञाकारिता के कारण मुझे घर से निकाला गया हो, या मुझे किसी बात से वंचित रखा गया हो। लेकिन आज्ञाकारिता की माँग और नियमों का स्मरण कराना लगा रहता था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम यही स्थिति परमेश्वर के लोगों के लिए परमेश्वर की ओर से लिए पाते हैं। इस्त्राएली समाज को वाचा किए हुए देश, कनान में बने रहने की भी यही "कीमत" चुकानी थी - आज्ञाकारिता। कनान देश में इस्त्राएल के प्रवेश से पहले जब मूसा ने उन्हें संबोधित किया, तब भी उन्हें यही स्मरण कराया कि उस देश में परमेश्वर की आशीषों में बने रहने का केवल एक ही मार्ग है, उनका परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहना (व्यवस्थाविवरण 30:16)। इससे पहले भी जब इस्त्राएली मिस्त्र की गुलामी से निकलकर कनान की ओर कूच कर रहे थे, तब भी मूसा में होकर परमेश्वर ने उन्हें समझाया था कि, "इन बातों को जिनकी आज्ञा मैं तुझे सुनाता हूं चित्त लगाकर सुन, कि जब तू वह काम करे जो तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और ठीक है, तब तेरा और तेरे बाद तेरे वंश का भी सदा भला होता रहे" (व्यवस्थाविवरण 12:28)।

   कुछ लोगों को लगता है कि बाइबल में पालन करने के लिए बहुत नियम हैं और उनका पालन करना बड़ा कठिन कार्य है; परन्तु स्थिति इससे बिलकुल विपरीत है: "और परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं" (1 यूहन्ना 5:3)। लेकिन साथ ही ऐसी धारणा रखने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि परमेश्वर ने जो आज्ञाएं हमारे पालन के लिए दी हैं वे हमारी भलाई के लिए और हमें परस्पर शान्ति तथा समृद्धि से रखने के लिए ही हैं।

   परमेश्वर की आज्ञाकारिता, परमेश्वर के परिवार का सदस्य होने तथा उसकी आशीषों के संभागी होने की "कीमत" है; और जो इस "कीमत" को चुकाने के लाभ पहिचान गए हैं, आत्मिक जीवन में परिपक्व हो गए हैं वे अब भली-भांति समझते हैं कि इस आज्ञाकारिता की "कीमत" चुकाने के लिए शिकायत करना कितना बचकाना है। परमेश्वर की आज्ञाकारिता ही परमेश्वर से मिलने वाली हमारी समृद्धि, सुरक्षा तथा सहायता का आधार है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


बाइबल जीवन के लिए बोझिल नहीं वरन आनन्दमय जीवन की मार्गदर्शक है।

भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे! - व्यवस्थाविवरण 5:29

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 30:15-20
Deuteronomy 30:15 सुन, आज मैं ने तुझ को जीवन और मरण, हानि और लाभ दिखाया है। 
Deuteronomy 30:16 क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे। 
Deuteronomy 30:17 परन्तु यदि तेरा मन भटक जाए, और तू न सुने, और भटककर पराए देवताओं को दण्डवत करे और उनकी उपासना करने लगे, 
Deuteronomy 30:18 तो मैं तुम्हें आज यह चितौनी दिए देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे; और जिस देश का अधिकारी होने के लिये तू यरदन पार जा रहा है, उस देश में तुम बहुत दिनों के लिये रहने न पाओगे। 
Deuteronomy 30:19 मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें; 
Deuteronomy 30:20 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है, और ऐसा करने से जिस देश को यहोवा ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को देने की शपथ खाई थी उस देश में तू बसा रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 5-7


गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

सन्तुष्ट


   सन्तुष्ट रहना बहुत कठिन है। विश्वास के नायक, प्रेरित पौलुस को भी सन्तुष्ट रहना सीखना पड़ा (फिलिप्पियों 4:11); उसके लिए भी सन्तुष्टि, चरित्र का एक स्वाभाविक गुण नहीं था। पौलुस के द्वारा यह लिखा जाना कि वह हर परिस्थिति में सन्तुष्ट रहता है वास्तव में अचरजपूर्ण है, क्योंकि जब पौलुस ने फिलिप्पियों को अपनी पत्री लिखी, तब वह शासन के प्रति राजद्रोह और विश्वासघात जैसे गंभीर अपराधों के आरोप में जेलखाने में कैद था। उसने अपने न्याय के लिए रोमी साम्राज्य के सर्वोच्च स्थान अर्थात कैसर की अदालत में गुहार लगाई थी, परन्तु क्योंकि उसके पास ना तो कोई वैधानिक सहायक थे और ना ही कोई ऐसा मित्र-जानकार जो उसके लिए ऊँचे पदों पर कार्य करता, इसलिए पौलुस को अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए कैदखाने में पड़े पड़े ही प्रतीक्षा करनी पड़ रही थी। ऐसे में पौलुस के लिए अधीर और अप्रसन्न होना बहुत ही स्वाभाविक बात होती, लेकिन इसके विप्रीत इन परिस्थितियों में भी वह फिलिप्पियों के मसीही विश्वासियों को लिखता है कि उसने ऐसे में भी सन्तुष्ट रहना सीख लिया है।

   ऐसा पौलुस ने कैसे सीखा - एक एक कदम कर के, जब तक कि उसने असुविधाजनक परिस्थितियों में भी सन्तुष्ट रहने का पाठ भली भाँति सीख नहीं लिया। पहले उसने सीखा कि जो भी परिस्थिति उसके मार्ग में आए वह उसे स्वीकार करे (पद 12), फिर उसने सीखा कि जो कुछ भी सहायता उसे उसके साथी मसीही विश्वासियों से मिलती है उसके लिए वह धन्यवादी रहे (पद 14-18), और सबसे बड़ी बात जो उसने सीखी वह थी कि हर परिस्थिति में परमेश्वर ही है जो उसकी हर आवश्यकता को पूरी करता है (पद 19)।

   सन्तुष्ट रहना हमारे लिए भी स्वाभाविक गुण नहीं है। हमारे अन्दर पाई जाने वाली परस्पर स्पर्धा करने की प्रवृति हमें दूसरों के साथ तुलना करने, शिकायत करने तथा लालच करने के लिए उकसाती रहती है। हम में से शायद ही कोई होगा जो पौलुस के समान कठिनाईयों में पड़ा हो, इसलिए पौलुस का जीवन हमें सिखाता है कि हम भी उसके समान हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा रखें और सन्तुष्ट रहें। - सी. पी. हिया


सन्तुष्टि का अर्थ प्रत्येक ऐच्छित बात प्राप्त करना नहीं है, वरन हर प्राप्त बात के लिए परमेश्वर का धन्यवादी रहना है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-20
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है। 
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। 
Philippians 4:20 हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-4


बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

आशंकित मन


   मैं मिशिगन प्रांत के ऊपरी प्रायद्वीप गया हुआ था, वहाँ एक स्थान पर घूमते हुए दो पेड़ों की ओर मेरा ध्यान गया। यद्यपि बहुत हलकी सी ही हवा चल रही थी और अन्य पेड़ों के पत्ते उस से हिल भी नहीं रहे थे परन्तु फिर भी उस हलकी सी हवा में इन दोनों पेड़ों के पत्ते अच्छे से हिल रहे थे। मैंने उन पेड़ों की ओर अपनी पत्नि का भी ध्यान खींचा तो उस ने मुझे बताया कि वे पेड़ Quaking Aspen अर्थात कंपकंपाने वाले ऐस्पेन कहलाते हैं क्योंकि हलकी सी भी हवा में उनके पत्ते हिलने लगते हैं। मुझे उन दोनों पेड़ों द्वारा प्रस्तुत दृश्य ने प्रभावित किया - यद्यपि उनके आस-पास के अन्य किसी भी पेड़ के पत्ते नहीं हिल रहे थे, वह हलकी सी हवा उनके पत्ते हिला देने के लिए काफी थी।

   कभी कभी मैं भी उन क्वेकिंग ऐस्पेन वृक्षों के समान ही व्यवहार करता हूँ; मेरे चारों ओर लोग बिना किसी समस्या अथवा चिंता के, स्थिर और आश्वस्त कार्य कर रहे होते हैं, परन्तु मैं छोटी छोटी बातों को लेकर चिंतित रहता हूँ, मेरा मन काँपता रहता है। मैं दूसरों के जीवन को देखकर उनकी शांति पर अचरज करता हूँ, जबकि मेरा अपना जीवन इतनी आसानी से परेशानियों से भर जाता है। धन्यवाद हो परमेश्वर के वचन बाइबल का जो ऐसे समयों में मुझे स्मरण दिलाती है कि वास्तविक और स्थिर रखने वाली शान्ति परमेश्वर की उपस्थिति में उपलब्ध है, जैसे प्रेरित पौलुस ने लिखा, "अब प्रभु जो शान्‍ति का सोता है आप ही तुम्हें सदा और हर प्रकार से शान्‍ति दे: प्रभु तुम सब के साथ रहे" (2 थिस्स्लुनीकियों 3:16)। ना केवल हमारा परमेश्वर शान्ति प्रदान करता है, वरन वह स्वयं ही शान्ति का परमेश्वर भी है, और अपनी शान्ति हमें देता है।

   जब कभी हम समस्याओं में हों, जीवन में परेशान करने वाली परिस्थितियाँ आएं तो यह स्मरण रखना कि उस शान्ति के प्रभु में सच्ची शान्ति हर आशंकित मन के लिए हर समय बिना किसी रोक-टोक के उपलब्ध है बहुत सांत्वना प्रदान करता है। - बिल क्राउडर


सच्ची शान्ति केवल संघर्ष की अनुपस्थिति से नहीं, वरन परमेश्वर की उपस्थिति से है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:6-9
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • ओबाद्द्याह
  • योना


मंगलवार, 30 सितंबर 2014

आरंभिक बिन्दु


   यदि आप हमारे घर से, जो उत्तरी अमेरिका में बॉइस, इडाहो में स्थित है, दक्षिण की ओर चलें तो कुछ दूर जाने पर आपको सड़क के पूर्व में झाड़ियों के बीच में से ऊपर उठा हुआ एक टीला दिखाई देगा जो कभी ज्वालामुखीय कार्यवाही द्वारा अस्तित्व में आया था। इस टीले की चोटी ही वह आरंभिक बिन्दु है जहाँ से इडाहो प्रांत का सर्वेक्षण हुआ था। सन 1867 में अमेरिका के प्रधान सर्वेक्षण अधिकारी, लफायेटी कार्टी ने, इडाहो प्रांत की स्थापना के चार वर्ष पश्चात, पीटर बैल को यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वे इस नए इलाके का सर्वेक्षण करें। पीटर बैल ने उस टीले की चोटी पर पीतल का एक स्तंभ गाड़ा और उसे अपने सर्वेक्षण का आरंभिक बिन्दु घोषित किया। पीटर बैल द्वारा किए गए उस सर्वेक्षण से इडाहो प्रांत की सीमाएं और भौगोलिक विवरण स्थापित हुआ। उस आरंभिक बिन्दु के आधार पर ही वहाँ के रिहायशी इलाकों के उत्तर या दक्षिण में होने, अथवा पर्वत श्रंखलाओं के पूर्व या पश्चिम में होने का निर्धारण होता है। ऐसे स्थिर एवं स्थाई बिन्दु ही यह निर्धारित करते हैं कि आप सदा अपने स्थिति के बारे में निश्चित रहेंगे, कभी असमंजस में नहीं रहेंगे, कभी भटकने नहीं पाएंगे।

   हम बहुत सी पुस्तकें पढ़ते हैं, लेकिन हमारे लिए परमेश्वर का वचन बाइबल ही हमारा अटल और सदा स्थिर ’आरंभिक बिन्दु’ है। प्रसिद्ध मसीही प्रचारक जौन वेस्ली बहुत पुस्तकें पढ़ते थे, लेकिन वे अपने आप को सदा ही ’एक पुस्तक का व्यक्ति’ कहते थे। किसी भी पुस्तक की तुलना संसार के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक, परमेश्वर के वचन बाइबल से नहीं हो सकती, क्योंकि केवल बाइबल ही है जो परमेश्वर की प्रेरणा से लिखी गई है। बाइबल 66 छोटी-बड़ी पुस्तकों का संग्रह है जो अलग अलग लोगों द्वारा अलग अलग समय में अलग अलग स्थानों एवं भाषाओं में लगभग 1500 वर्ष के अन्तराल में लिखी गईं, और कोई भी लेखक यह नहीं जानता था कि अन्ततः उसकी लिखी पुस्तक एक व्यापक संग्रह का भाग होगी। जब इन सब पुस्तकों को संग्रहित करके एक पुस्तक का रूप दिया गया तो इनमें कोई भी परस्पर विरोधाभास नहीं मिला, वरन वे विभिन्न पुस्तकें एक दूसरे की ऐसी पूरक हो गईं मानों एक ही लेखक ने उन्हें लिखा हो - जो सच भी है, क्योंकि लेखनी चाहे मनुष्य की थी किन्तु विचार तो परमेश्वर के ही थे।

   बाइबल की एक और अद्भुत बात है कि वह प्रत्येक विश्वास करने वाले से बात करती है, उसकी शिक्षाएं एवं घटनाएं प्रत्येक विश्वासी को हर परिस्थिति में ऐसी प्रतीत होती हैं मानों वे उस परिस्थिति में उसी के लिए ही लिखी गई हों; इसीलिए बाइबल को परमेश्वर का जीवता वचन भी कहा जाता है। बाइबल की आरंभिक पुस्तक लगभग 1500 ईसवीं पूर्व अर्थात आज से लगभग 3500 वर्ष पहले लिखी गई, लेकिन बाइबल की हर शिक्षा, उसकी सभी बातें सभी विश्वास करने वालों के लिए ताज़ा और समकालीन ही रही हैं। परमेश्वर ने अपना यह वचन हम सब की भलाई के लिए उपलब्ध करवाया है, और वह चाहता है कि सभी उसके इस वचन पर विश्वास करें, उस पर अधारित जीवन व्यतीत करें जिससे वे कभी किसी गलत मार्ग पर ना चलें।

   जब हम बाइबल को जीवन की हर बात तथा परिस्थिति के लिए अपना आरंभिक बिन्दु तथा मार्गदर्शक बना लेते हैं, तो हम कभी भी गलत नहीं हो सकते क्योंकि बाइबल में होकर परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है। जो बाइबल से प्रेम करते हैं, उस पर विश्वास करते हैं वे सभी भजनकार के साथ कह सकते हैं: "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं" (भजन 119:103)। - डेविड रोपर


बाइबल एक कुतुबनुमा है जो आपको सदा ही सही दिशा दिखाता है, सही मार्ग पर चलाता है।

उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। - मत्ती 4:4

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 7-9


सोमवार, 29 सितंबर 2014

सच्चाई और निश्चयता


   एक दिन मैंने कहीं जाने के लिए टैक्सी करी। जब मैं टैक्सी के अन्दर जा कर बैठा तो मैंने पाया कि अन्दर एक ’न्यू ऐज’ (नए युग) गुरू के कई विज्ञापन लगे हुए हैं। टैक्सी चालक से इस बारे में बात करने पर उस चालक ने बताया कि उसका मानना है कि परमेश्वर ने हर समय और काल में अनेक दिव्य व्यक्तित्वों को गुरू बनाकर भेजा ताकि वे लोगों की आत्मिक अगुवाई करें और वह गुरु हमारे समय के लिए भेजा गया दिव्य व्यक्तित्व था। उस टैक्सी चालक के अनुसार यीशु मसीह भी अपने समय के लिए भेजे गए दिव्य व्यक्तित्व थे। मैंने उस टक्सी चालक से अपनी असहमति व्यक्त करते हुए उसे प्रभु यीशु द्वारा कही गई बात बताई: "...मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6)।

   उस टैक्सी चालक तथा उसके समान विश्वास रखने वाले लोगों की धारणा के विपरीत, प्रभु यीशु दिव्य व्यक्तित्वों की किसी श्रंखला की एक कड़ी मात्र नहीं हैं वरन स्वयं उनके अपने दावे के अनुसार केवल वे ही परमेश्वर तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग हैं; उनके बिना स्वर्ग पहुँचने का और कोई रास्ता नहीं है।

   "जीवते परमेश्वर का पुत्र" (मत्ती 16:16) होने के कारण प्रभु यीशु ने अपने आप को एकमात्र सच्चा आध्यात्मिक अगुवा केवल घोषित ही नहीं किया, वरन उस घोषणा के अनुरूप जीवन जी कर भी दिखाया। उनके जन्म से लेकर आज तक, 2000 वर्ष के लंबे अन्तराल में कोई भी जन उनके जीवन में किसी भी प्रकार का कोई पाप या दुराचार दिखा अथवा प्रमाणित नहीं कर सका है। प्रभु यीशु का परिपेक्ष किसी धर्म, जाति, काल या भौगोलिक इलाके तक ही सीमित नहीं था; वे समस्त संसार के हर जन के लिए, वो चाहे किसी भी समय-काल-स्थान का रहने वाला हो, आए थे। प्रभु यीशु ने समस्त संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए प्रभावी अपने जीवन के बलिदान (इब्रानियों 10:12) तथा फिर मृतकों में से अपने पुनरुत्थान के द्वारा अपने एकमात्र सच्चा आध्यात्मिक अगुवा होने के दावे को भी प्रमाणित कर के दिखाया है।

   प्रभु यीशु ने कहा, "मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो" (यूहन्ना 14:11)। जितनी अधिक प्रभु यीशु के जीवन पर खोज हुई है उतनी संसार के किसी अन्य जन पर कभी नहीं हुई, और हर खोज ने प्रभु यीशु तथा उनसे संबंधित परमेश्वर के वचन बाइबल के सभी दावों को सदा सच ही प्रमाणित किया है। इसलिए समस्त मानव जाति को पाप क्षमा तथा उद्धार पाने के लिए किसी अन्य गुरू या मार्ग की आवश्यकता नहीं है - प्रभु यीशु में यह सभी के लिए सेंत-मेंत और सहज रीति से साधारण विश्वास द्वारा उपलब्ध है।

   प्रभु यीशु के बारे में सीखिए और उसे अपना गुरू तथा मार्गदर्शक ग्रहण कर लिजिए; आत्मिक सच्चाई और निश्चयता केवल वह ही प्रदान कर सकता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आत्मिक छलिए केवल भटका सकते हैं; केवल प्रभु यीशु ही है जो परमेश्वर से आपका मेल करवा सकता है, आपको स्वर्ग ले जा सकता है।

उसने उन से कहा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है। - मत्ती 16:15-16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-11
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। 
John 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है। 
John 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है। 
John 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा। 
John 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। 
John 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 4-6


रविवार, 28 सितंबर 2014

अज्ञात


   बहुतेरे लंडनवासियों के लिए 1666 वह वर्ष था जब प्रभु यीशु मसीह का पुनरागमन हो जाएगा। भविष्यवाणी करने वाले उत्साही लोगों ने परमेश्वर के वचन बाइबल में मसीह विरोधी के अंक 666 को मसीह यीशु के जन्मोप्रांत 1000 वर्ष पूरे होने को मिलाकर यह संख्या पाई थी। प्रभु यीशु ने भी अपने दूसरे आगमन के चिन्हों में कहा था कि संसार में भयानक परिस्थितियाँ और विपित्तियाँ होंगी (मत्ती 24:1-8), और उन लंडनवासियों को लग रहा था कि यही हो रहा है क्योंकि सन 1665 में प्लेग द्वारा 100,000 लोगों की मृत्यु होकर चुकी थी और फिर सितंबर 1666 में लंडन में लगी भयानक आग ने दसियों हज़ार मकान जला कर ध्वस्त कर दिए थे। लेकिन सन 1666 भी आकर चला गया और जीवन वैसे ही चलता रहा जैसे पहले चलता था।

   आज हमारे समयों में भी ऐसे अनेक लोग हैं जिन्होंने प्रभु यीशु के दूसरे आगमन और जगत के अन्त की तिथि की भविष्यवाणी करी है। ऐसी भविष्यवाणियाँ होती हैं, मीडिया उसके बारे में बहुत कुछ बताता है, उस से संबंधित संसार में होने वाले उन्माद को दिखाता है, वह तारीख आकर चली जाती है और जीवन वैसा ही चलता रहता है जैसे वह चल रहा था।

   परमेश्वर की योजना में प्रभु यीशु के पुनरागमन के समय को हम से छिपा कर ही रखा गया है। इस संबंध में स्वयं प्रभु यीशु ने कहा, "उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता" (मत्ती 24:36)। प्रभु यीशु के कभी भी आ जाने की अनिश्चितता हम मसिही विश्वासियों को अपनी आत्मिक उन्नति तथा मसीही सेवकाई के लिए सदा तत्पर एवं तैयार बनाए रखती है, अन्यथा लोग सदा ही नहीं वरन उस निर्धारित तिथि के आस-पास ही इस कार्य को पूरा करते (मत्ती 25:1-13; 1 यूहन्ना 3:2-3)।

   आश्वस्त रहें कि प्रभु यीशु का पुनरागमन होगा अवश्य, लेकिन कब, यह ना तो कोई जानता है और ना ही बता सकता है। हमारा कर्त्वय है कि जब तक हमारा प्रभु अपने समय में हमें लेने पुनः ना आ जाए तब तक हम उसके कार्य में पूरी लगन के साथ लगे रहें और अपने जीवनों को इस संसार की नश्वर लालसाओं में रत नहीं वरन पवित्र चाल-चलन तथा भक्ति के साथ व्यतीत होने वाला बनाए रखें (2 पतरस 3:11)। - डैनिस फिशर


प्रभु यीशु के पुनरागमन के सिद्धांत के जितना व्यावाहरिक मसीही जीवन से जुड़ा और कोई सिद्धांत नहीं है।

तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए। - 2 पतरस 3:11

बाइबल पाठ: मत्ती 24:1-8
Matthew 24:1 जब यीशु मन्दिर से निकलकर जा रहा था, तो उसके चेले उसको मन्दिर की रचना दिखाने के लिये उस के पास आए। 
Matthew 24:2 उसने उन से कहा, क्या तुम यह सब नहीं देखते? मैं तुम से सच कहता हूं, यहां पत्थर पर पत्थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा। 
Matthew 24:3 और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, हम से कह कि ये बातें कब होंगी और तेरे आने का, और जगत के अन्‍त का क्या चिन्ह होगा? 
Matthew 24:4 यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। 
Matthew 24:5 क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:6 तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्‍त न होगा। 
Matthew 24:7 क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईंडोल होंगे। 
Matthew 24:8 ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 1-3