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सोमवार, 6 जुलाई 2015

प्यास


   पिछले कुछ वर्षों में मैं एक-दो बार शरीर में पानी की कमी होने के कारण अस्वस्थ हुआ हूँ। जब भी मेरे शरीर में पानी की कमी हुई, मुझे चक्कर आने लगे, मैं ठीक से दिखने नहीं पा रहा था, मुझे समय स्थान और व्यक्ति को पहचान पाने में बहुत कठिनाई होने लगी, मैं स्पष्ट बोल भी नहीं पा रहा था। अपने उन कष्टदायक अनुभवों से मैंने सीख लिया कि पानी की उचित मात्रा शरीर में रहना कितना आवश्यक है; और मैं दोबारा उस अनुभव से कतई नहीं निकलना चाहता हूँ।

   शरीर में पानी की कमी के इन अनुभवों ने मुझे प्रभु यीशु के एक निमंत्रण के बारे में नया मूल्यांकन दिया है; प्रभु यीशु ने मन्दिर में खड़े होकर सार्वजनिक निमंत्रण दिया: "फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए" (यूहन्ना 7:37)। प्रभु द्वारा की गई यह घोषणा, जिस दिन वह करी गई उसके संदर्भ में, नाटकीय थी। यूहन्ना बताता है कि वह यहूदियों के एक बड़े पर्व का अन्तिम एवं मुख्य दिन था। जिस पर्व का यहाँ उल्लेख आया है वह यहूदियों के मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश तक पहुँचने की चालीस वर्षीय जंगल यात्रा को समरण करने का पर्व था। उस पर्व के अन्तिम एवं मुख्य दिन मन्दिर की सीढ़ियों पर जल प्रवाहित किया जाता था जो परमेश्वर द्वारा बियाबान और जंगल की यात्रा में भी उन इस्त्राएलियों को पानी उपलब्ध करवाते रहने को स्मरण करवाता था। उस जल प्रवाह करने के समय, प्रभु यीशु ने अपने आप को सभी के लिए अति आवश्यक जीवन का जल होना घोषित किया और निमंत्रण दिया कि जो प्यासा हो वह स्वेच्छा से आए और उससे जीवन जल भरपूरी से ले।

   हमारे आत्मिक स्वास्थ्य और भलाई के लिए हमारा प्रभु यीशु पर ऐसे निर्भर रहना जैसे हम दैनिक जीवन में जल पर निर्भर रहते हैं अति आवश्यक है; अन्यथा आत्मिक जल की कमी के वैसे ही आत्मिक लक्षण हम में दिखने लगेंगे जैसे मैंने शारीरिक जल की कमी के कारण अनुभव किए थे। अपने अन्दर इस आत्मिक जल की मात्रा को बनाए रखने और आत्मिक प्यास को बुझाए रखने के लिए हमें प्रभु के साथ प्रार्थना में बातचीत करते रहना चाहिए, उसके वचन के अध्ययन के द्वारा उसके साथ संपर्क तथा संगति को बनाए रखना चाहिए और अपने प्रत्येक निर्णय में उसकी बुद्धिमता और मार्गदर्शन को प्राप्त करना चाहिए।

   प्रभु यीशु से घनिष्ठता से जुड़े रहें, आपके आत्मा की प्यास को केवल वह ही बुझा सकता है। - जो स्टोवैल


जीवन जल की तरोताज़गी प्राप्त करने के लिए प्रभु यीशु के पास आएं, उसके साथ बने और चलते रहें।

क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर धाराएं बहाऊंगा; मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी सन्तान पर अपनी आशीष उण्डेलूंगा। - यशायाह 44:3

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:37-39
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 32-33
  • प्रेरितों 14


रविवार, 5 जुलाई 2015

अनुग्रह


   कहा जाता है कि रोमी साम्राज्य के दिनों में जब कोई रोमी सेनापति युद्ध-भूमि से विजयी होकर लौटता था तो उसके सम्मान में उसकी घर-वापसी पर एक बड़ा जलूस निकाला जाता था जिसमें उसके सैनिक तथा उसके द्वारा बंदी बनाकर लाए गए पराजित लोग उसकी विजय के प्रमाण के रूप में होते थे। जलूस के मार्ग के किनारों पर खड़े लोग सेनापति की जय-जयकार के नारे लगाते थे और अपने नायक का अभिनन्दन करते थे। वह सेनापति एक रथ पर स्वार होकर चलता था। सेनापति का अहम कहीं अनावश्यक रीति से फूल ना जाए, इसलिए उसके रथ में उसके साथ एक ग़ुलाम भी खड़ा रहता तो जो सेनापति से लगातार कहता रहता था, "आप भी एक मरणहार मनुष्य ही हैं।"

   सफलता हमें विनाशकारी अहंकार में ढ़केल सकती है, हमारे मनों को फुला कर हम से हमारी वास्तविकता को नज़रंदाज़ करवा सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में हमें अहंकार के खतरों से सचेत करते हुए नम्र होकर परमेश्वर के साथ चलते रहने की शिक्षा दी; याकूब ने लिखा, "वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है" (याकूब 4:6)। याकूब के इस कथन की मुख्य बात है उसके द्वारा प्रयुक्त शब्द "अनुग्रह"। इससे बढ़कर कुछ और नहीं है; केवल प्रभु परमेश्वर ही है जो धन्यवाद और प्रशंसा के योग्य है - विशेषकर उस अनुग्रह के लिए जो उसने हमारे प्रति किया है, हम पर बहुतायत से उण्डेला है।

   हमारी उपलब्धियाँ, सफलताएं, महानता, चरित्र आदि संसार की दृष्टि में चाहे कितना भी अच्छा और प्रशंसनीय हो, वह सब केवल प्रभु परमेश्वर के उस अनुग्र्ह के कारण ही संभव हो सका जो उसने हम पर किया और जिसके अन्तर्गत यह सब कर पाने की योग्यता तथा क्षमता हमको प्रदान करी है। यह परमेश्वर का अनुग्रह ही है कि उसने प्रभु यीशु में होकर हमारे पापों की क्षमा और उसके साथ हमारे मेल-मिलाप का मार्ग तैयार करके दिया, हमें अनन्त विनाश से बचने का मार्ग बनाकर दिया।

   क्या आपने प्रभु परमेश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करके अपने अनन्त भविष्य को सुनिश्चित कर लिया है? - बिल क्राउडर


परमेश्वर का अनुग्रह उसका असीम प्रेम है जो हमारे प्रति उसकी अनन्त भलाई में प्रकट होता है।

हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। - 1 पतरस 5:5 

बाइबल पाठ: याकूब 4:6-17
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। 
James 4:11 हे भाइयों, एक दूसरे की बदनामी न करो, जो अपने भाई की बदनामी करता है, या भाई पर दोष लगाता है, वह व्यवस्था की बदनामी करता है, और व्यवस्था पर दोष लगाता है; और यदि तू व्यवस्था पर दोष लगाता है, तो तू व्यवस्था पर चलने वाला नहीं, पर उस पर हाकिम ठहरा। 
James 4:12 व्यवस्था देने वाला और हाकिम तो एक ही है, जिसे बचाने और नाश करने की सामर्थ है; तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? 
James 4:13 तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। 
James 4:14 और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। 
James 4:15 इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। 
James 4:16 पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। 
James 4:17 इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 30-31
  • प्रेरितों 13:26-52


शनिवार, 4 जुलाई 2015

दृष्टि


   पिछले महीने जब मैं अपनी आँखों की जाँच के लिए गया तो जाँच की रिपोर्ट से मुझे अच्छा लगने वाला समाचार मिला कि मेरी दूर देखने की दृष्टि पहले से बेहतर हो गई है। मैं इस बात से खुश था, लेकिन मेरे एक मित्र ने मुझे बताया कि उम्र के साथ दूर देखने की दृष्टि तो बेहतर हो सकती है, किंतु पास का देखने वाली दृष्टि कम होती जाती है।

   इस बात से मेरा ध्यान एक और प्रकार की दूर का देखने वाली दृष्टि की ओर गया जो मैंने कई मसीही विश्वासियों में देखी है। जो मसीही विश्वासी प्रभु यीशु के साथ निकटता से चलते रहते हैं या जिन्हें प्रभु यीशु के लिए कठिनाईयों तथा परीक्षाओं से होकर निकलना पड़ा है, अन्य विश्वासियों के मुकाबले उनकी स्वर्गीय तथा अलौकिक बातों की दृष्टि बेहतर और सांसारिक बातों के लिए कमज़ोर हो जाती है।

   प्रेरित पौलुस की दृष्टि भी ऐसी ही हो गई थी; उसने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को प्रोत्साहित किया, "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं" (2 कुरिन्थियों 4:17-18)।

   धर्मशास्त्री जौनथन एडवर्ड्स ने कहा था, "स्वर्ग जाना, और परमेश्वर में पूर्णतः आनन्दित होना, पृथ्वी की सबसे आनन्दायक बातों से भी कहीं अधिक उत्तम है।" आज हम अपनी दृष्टि को लेकर पशोपेश में रहते हैं - पार्थिव वस्तुओं की ओर आकर्षित होकर उनका आनन्द लें या जौनथन एडवर्ड्स की कही बात का अनुसरण करें। लेकिन जब सब बातों के लिए हमारी नज़रें प्रभु यीशु पर टिकी रहती हैं तो हमारा दृष्टि भी स्वर्गीय हो जाती है। - एनी सेटास


अपनी आँखें प्रभु पर तथा उससे मिलने वाले ईनाम पर लगाए रखें।

सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। कुलुस्सियों 3:1-2

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:16-5:8
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। 
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं। 
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 28-29
  • प्रेरितों 13:1-25


शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

सेवा एवं साक्षी


   20वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में ग्लैडिस एय्लवर्ड इंग्लैंड के लंडन शहर में एक नौकरानी का कार्य कर रही थी, परन्तु उसका उद्देश्य चीन में मिशनरी होकर जाना था। उसके चीन जाने के प्रयासों में जब एक मिशनरी संस्था ने उसे "अयोग्य" कहकर उसे भेजने से मना कर दिया तो उसने अपने आप ही जाने की ठान ली। 28 वर्ष की आयु में ग्लौडिस ने अपनी सारी बचाए जमा-पूँजी को एकत्रित करके चीन के भीतरी भागों में सुदूर स्थित यांगचैन गाँव का एकतरफा टिकिट खरीदा और वहाँ पहुँच गई। उस गाँव में उसने व्यापार करने के लिए आने-जाने वालों की सुविधा के लिए एक सराय़ खोली जहाँ वह लोगों को परमेश्वर के वचन बाइबल की कहानियाँ सुनाती थी और उस गाँव के अलावा आस-पास के अन्य गाँवों में भी लोगों की सहायता, सेवा करती थी जिसके फलस्वरूप लोग उसे "आई-वे-देह" अर्थात "सदाचारी" के नाम से पुकारने लगे।

   प्रेरित पौलुस ने भी सुसमाचार को संसार के सुदूर स्थानों में पहुँचाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करी। इस सेवकाई के लिए उसने अपने आप को औरों का दास बना लिया (2 कुरिन्थियों 11:16-29)। अपनी सेवकाई के संबंध में पौलुस ने लिखा: "क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं" (2 कुरिन्थियों 4:5)।

   हम सभी मसीही विश्वासियों को सुदूर इलाकों में सुसमाचार प्रचार के लिए कठिनाईयों एवं कष्टों को सहने के लिए नहीं बुलाया गया है; लेकिन हम में से प्रत्येक पर ज़िम्मेदारी है कि वह अपने रहने तथा कार्य करने के स्थान में प्रभु यीशु मसीह का गवाह बन कर रहे। हम मसीही विश्वासियों के लिए अपने सहकर्मियों, पड़ौसियों, मित्रों, रिश्तेदारों की सहायता करना एक सेवकाई है। परमेश्वर से प्रार्थना करें कि इस सेवा के कार्य में वह आपको प्रभु यीशु की साक्षी देने के लिए भी प्रयोग करे जिससे आप अपने साथ के लोगों में प्रभु यीशु के बारे में भी बाँट सकें। - डेनिस फिशर


दूसरों के साथ परमेश्वर के वचन को बाँटने के द्वारा हम परमेश्वर की सेवकाई करते हैं।

परन्तु जो घमण्‍ड करे, वह प्रभु पर घमण्‍ड करें। क्योंकि जो अपनी बड़ाई करता है, वह नहीं, परन्तु जिस की बड़ाई प्रभु करता है, वही ग्रहण किया जाता है। - 2 कुरिन्थियों 10:17-18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:1-12
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते। 
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं। 
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। 
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। 
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं। 
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। 
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 25-27
  • प्रेरितों 12


गुरुवार, 2 जुलाई 2015

आश्चर्यकर्म


   परमेश्वर द्वारा रचे गए प्राणियों में तितली अद्भुत रूप से सुन्दर और विलक्षण है। उसके रंगीन पंख, नाज़ुक उड़ान और उसका एक से दूसरे इलाके को प्रवास करना उसे प्राणी जगत की उत्कृष्ठ कृतियों में से एक बना देती हैं। उड़ान भरने की क्षमता रखने वाला यह पतंगा, ना केवल दिखने में आनन्दयक होता है, वरन यह परमेश्वर के अद्भुत रचनात्मक कार्यों का उदाहरण भी प्रदान करता है। तितलियों पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार मैजिस्टिक मोनार्क प्रजाति की तितली उत्तरी अमेरिका से मध्य-अमेरिका का 3000 मील का सफर तय करके उसी पेड़ पर पहुँच जाती है जहाँ से उसका और उसके पूर्वजों का जीवन आरंभ हुआ था, और उसे इस प्रकार पहुँचाने का कार्य उसका सूक्षम सा मस्तिष्क करता है। मोनार्क के जीवन में होने वाले कायान्तरण पर ध्यान कीजिए - एक छोटे से अण्डे से निकलने वाला सूक्षम सा केटरपिल्लर (इल्ली) जब पत्ते खा खा कर बड़ा हो जाता है तो वह फिर अपने चारों ओर एक आवरण लपेट कर लटक जाता है, जिसके अन्दर फिर वह एक ऐसा रसायन छोड़ता है जो उसके सारे अंगों को गला कर लुगदी सा कर देता है, अर्थात उसका कोई भी प्रकट अंग नहीं रह जाता। फिर उस आवरण के अन्दर की लुगदी से मस्तिष्क, शरीर, सिर, टाँगें, पंख आदि बनते हैं और एक अति सुन्दर तितली बाहर निकल कर आती है।

   एक तितली विशेषज्ञ का कहना है, "इल्ली के शरीर से तितली का शरीर और पंख बनना, निःसन्देह इस पृथ्वी पर विद्यमान जीवन का एक महान अजूबा है।" एक अन्य विशषज्ञ ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि यह एक आश्चर्यकर्म है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार परमेश्वर की सृष्टि के बारे में कहता है: "हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है" (भजन 104:24) - और तितली परमेश्वर के उन कार्यों में से एक है। - डेव ब्रैनन


सृष्टि की रचना एक महान रचनाकार की ओर इशारा करती है।

हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती। - भजन 40:5

बाइबल पाठ: भजन 104:10-24
Psalms 104:10 तू नालों में सोतों को बहाता है; वे पहाड़ों के बीच से बहते हैं, 
Psalms 104:11 उन से मैदान के सब जीव-जन्तु जल पीते हैं; जंगली गदहे भी अपनी प्यास बुझा लेते हैं। 
Psalms 104:12 उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं। 
Psalms 104:13 तू अपनी अटारियों में से पहाड़ों को सींचता है तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है।
Psalms 104:14 तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन- वस्तुएं उत्पन्न करता है, 
Psalms 104:15 और दाखमधु जिस से मनुष्य का मन आनन्दित होता है, और तेल जिस से उसका मुख चमकता है, और अन्न जिस से वह सम्भल जाता है। 
Psalms 104:16 यहोवा के वृक्ष तृप्त रहते हैं, अर्थात लबानोन के देवदार जो उसी के लगाए हुए हैं। 
Psalms 104:17 उन में चिड़ियां अपने घोंसले बनाती हैं; लगलग का बसेरा सनौवर के वृक्षों में होता है। 
Psalms 104:18 ऊंचे पहाड़ जंगली बकरों के लिये हैं; और चट्टानें शापानों के शरणस्थान हैं। 
Psalms 104:19 उसने नियत समयों के लिये चन्द्रमा को बनाया है; सूर्य अपने अस्त होने का समय जानता है। 
Psalms 104:20 तू अन्धकार करता है, तब रात हो जाती है; जिस में वन के सब जीव जन्तु घूमते फिरते हैं। 
Psalms 104:21 जवान सिंह अहेर के लिये गरजते हैं, और ईश्वर से अपना आहार मांगते हैं। 
Psalms 104:22 सूर्य उदय होते ही वे चले जाते हैं और अपनी मांदों में जा बैठते हैं। 
Psalms 104:23 तब मनुष्य अपने काम के लिये और सन्ध्या तक परिश्रम करने के लिये निकलता है। 
Psalms 104:24 हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 22-24
  • प्रेरितों 11


बुधवार, 1 जुलाई 2015

वापसी


   अमेरिका के कॉलेजों की परस्पर खेल स्पर्धाओं में सबसे लंबा लगातार चल रहा जीत का सिलसिला जनवरी 18, 2012 को तब समाप्त हुआ जब येल विश्वविद्यालय की टीम ने ट्रिनिटी कॉलेज की टीम को स्क्वैश के खेल के मुकाबले में हरा दिया। 14 वर्षों में लगातार जीते गए 252 स्क्वैश मुकाबलों में जीतते रहने के बाद मिली इस हार के अगली प्रातः ट्रिनिटी कॉलेज के खेल प्रशिक्षक पौल असियान्ते को अपने एक मित्र और फुटबॉल के राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति-प्राप्त तथा जाने-माने प्रशिक्षक द्वारा लिखा गया एक ई-मेल मिला, जिसमें उन्होंने अपने मित्र पौल को लिखा, "यह तुम्हारे लिए वापसी करने का अवसर है!" यह ई-मेल लिखने के दस दिन के बाद उस जाने-माने फुटबॉल प्रशिक्षक की टीम अपने एक खेल मुकाबले में हार गई! कभी ना कभी हार का सामना सभी को करना पड़ता ही है।

   खेल स्पर्धाओं में होने वाली हार के कारण होने वाली ग्लानि, हमारे आत्मिक जीवन में होने वाली हार की ग्लानि को प्रतिबिंबित करती है। यदि हमने परमेश्वर और अपने साथ के अन्य लोगों को दुखी या निराश किया है तो हम उस ग्लानि से कैसे उभर और निकल सकते हैं? सर्वप्रथम, इस बात को कभी नहीं भूलें कि परमेश्वर हमारी रचना को जानता है और यह भी कि हम कमज़ोर पड़ सकते हैं, गिर सकते हैं (भजन 103:14) और अपने लोगों को परमेश्वर का आश्वासन है: "चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है" (भजन 37:24)। इसीलिए प्रेरित यूहन्ना अपनी पत्री में लिखता है: "यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है" (1 यूहन्ना 1:8-10)। परमेश्वर हमें क्षमा करने और सब अधर्म से शुद्ध करने के लिए इसलिए तैयार रहता है क्योंकि सभी मनुष्यों के सभी पापों का दण्ड प्रभु यीशु अपने ऊपर ले चुका है, उसे भोग चुका है; इसलिए अब किसी को अपने पापों का दण्ड भुगतने की आवश्यकता नहीं है, प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास और माँगी गई क्षमा के द्वारा सभी पापों के सभी दण्डों से बचा जा सकता है (1 यूहन्ना 2:2)।

   परमेश्वर द्वारा समस्त मानव जाति को उपलब्ध करवाया गया यह क्षमा और वापसी का अवसर हमें पाप के दासत्व से मुक्त कर के अतीत की गलतियों की निराशा में रहने की बजाए पुनः अपने वर्तमान तथा भविष्य को संवारने-सुधारने का अवसर प्रदान करता है। हमें धोकर शुद्ध करने की परमेश्वर की विश्वासयोग्यता, हमें एक शुद्ध मन के साथ परमेश्वर की ओर वापसी के लिए प्रेरित करती है।

   आप की स्थिति, पाप और निराशा आपकी अपनी या दुनिया की नज़रों में चाहे कैसी भी भयानक और गिरी हुई क्यों ना हो, आज परमेश्वर आपको प्रभु यीशु में होकर क्षमा करने और अनन्त काल के आनन्द में वापसी करने के लिए बुला रहा है। क्या आप उसके निमंत्रण को स्वीकार करेंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


अतीत के अंधकार में जीते रहने की बजाए परमेश्वर के साथ आज की ज्योति और कल की उज्जवल आशा के आनन्द में जीएं।

क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है। - भजन 103:14

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:5-2:2
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है। 
1 John 2:1 हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। 
1 John 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48


मंगलवार, 30 जून 2015

अनुग्रह


   एक संध्या मैं एक नर्सिंग होम गया, मुझे आया देखकर वहाँ भर्ती एक व्यक्ति टॉम मुझसे बातचीत करने के लिए अपने कमरे से बाहर निकल आया। कुछ देर बात करने के पश्चात टॉम ने पूछा, "क्या परमेश्वर इस बात से अपमानित अनुभव करेगा कि मैं इतने वर्षों के बाद अब मसीही विश्वासी बनना चाहता हूँ?" मेरे लिए टॉम का यह प्रश्न आश्चर्यजनक नहीं था। एक पास्टर होने के नाते मैंने इसी प्रश्न को भिन्न रूपों में अनेक वृद्धों से सुना है, उन से सुना है जो नशीली पदार्थों की लत से निकलना चाहते हैं और उन से भी जो अपने दुषकर्मों के कारण जेल में सज़ा काट रहे हैं। इन सब, और इनके समान ही अन्य लोगों को भी लगता है कि उनका वर्तमान या बीता हुआ जीवन उन्हें परमेश्वर के निकट आने या उसके लिए उपयोगी होने में आड़े आएगा और परमेश्वर उन्हें ग्रहण नहीं करेगा। ऐसा सोचने या मानने वाले सभी लोगों के लिए यह खुशखबरी है कि प्रभु यीशु संसार के पापियों के लिए ही आया (मरकुस 2:17) और वे सब उसको प्रीय हैं, उसे ग्रहणयोग्य हैं।

   टॉम के इस प्रश्न के उत्तर में मैंने उसके साथ परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में थोड़ा समय बिताया और उसमें दिए गए कुछ उन लोगों के उदाहरणों को देखा जो अपने बीते या वर्तमान जीवन के कारण यह सोच सकते थे कि वे परमेश्वर को ग्रहणयोग्य नहीं रहे या उसके लिए उपयोगी नहीं रहे किंतु परमेश्वर ने उन्हें ग्रहण भी किया और उपयोग भी किया। जिन लोगों के उदाहरणों को हमने देखा उनमें रहाब नामक वेश्या भी थी (यहोशु 2:12-14; इब्रानियों 11:31) और ज़क्कई नामक चुँगी लेने वाला भी (लूका 19:1-8)। इन सब ने संसार के लोगों को अस्वीकारीय अपने चरित्र और कर्मों के बावजूद प्रभु परमेश्वर की ओर हाथ बढ़ाया और प्रभु ने उन्हें थामा, अपना बनाकर उनके जीवनों को सुधारा और परिवर्तित किया, और अपने लिए उपयोगी भी बनाया।

   हमने बाइबल से प्रभु यीशु द्वारा दाख की बारी में मज़दूरी करने वालों के दृष्टांत को भी देखा (मत्ती 20:1-16) जहाँ दिन के आरंभ में कार्य करने को लिए गए लोग स्वामी के लिए अधिक कार्य कर सके परन्तु दिन ढलते हुए रखे लोग उतना कार्य नहीं कर सके, किंतु दाख की बारी के स्वामी ने दोनों के काम को समान महत्व दिया और समान ही मेहनताना भी दिया। उस स्वामी ने ना किसी को कमतर जाना और ना ही किसी के प्रति अपने अनुग्रह में फर्क रखा।

   हमारा भूतकाल या वर्तमान जैसा भी हो, परमेश्वर हम सबसे प्रेम करता है और अपने प्रेम को हम पर प्रगट करने की लालसा रखता है, हम पर अनुग्रह करना चाहता है, हमारे साथ एक गहरा और स्थाई संबंध बनाना चाहता है। उसके इस अनुग्रह और प्रेम को स्वीकार करना या अस्वीकार करना, यह निर्णय हमारा है। - रैंडी किल्गोर


आज अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करने का तात्पर्य है उसे अनन्तकाल के लिए आशीषित तथा सुरक्षित कर लेना।

यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं। - मरकुस 2:17

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-16
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 
Matthew 20:16 इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहिले होंगे, और जो पहिले हैं, वे पिछले होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23