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रविवार, 10 मार्च 2019

घर



      एक युवा अफ्रीकी शरणार्थी जो स्टीवेन के नाम से जाना जाता है, बिना किसी देश का व्यक्ति है। उसे लगता है कि उसका जन्म मोज़ाम्बीक या जिम्बाब्वे में हुआ होगा। परन्तु उसने कभी अपने पिता को नहीं जाना, और उसकी माता का, जो गृह युद्ध के कारण बचकर भागी थी, और गलियों में कुछ-कुछ बेचती हुई, एक से दूसरे देश में चलती चली गई, देहांत हो गया था। बिना किसी पहचान पत्र के और अपने जन्म के स्थान का कोई प्रमाण न दे सकने के कारण स्टीवेन एक ब्रिटिश पुलिस थाने में आया, और अनुरोध करने लगा कि उसे पकड़कर जेल में डाल दिया जाए। स्टीवेन को नागरिकता के अधिकार और लाभ के बिना गलियों में भटकने से भला जेल में रहना लगा।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक, प्रेरित पौलुस ने जब इफिसुस की मसीही मण्डली को पत्री लिखी, तो उन्हें प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा उन्हें मिली स्वर्गीय नागरिकता के बारे में समझाया। उसके वे गैर यहूदी पाठक जानते थे कि परदेशी और यात्री होकर जीना कैसा होता है (2:12)। किन्तु प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाने और उसमें जीवन तथा आशा प्राप्त कर लेने (1:13) के बाद उन्होंने जान लिया था कि परमेश्वर के राज्य का नागरिक होने का अर्थ क्या था (मत्ती 5:3)। प्रभु यीशु मसीह में होकर उन्होंने समझा था कि उस पिता के साथ पहचान हो जाने और उसके द्वारा देखभाल किए जाने का अभिप्राय क्या है (मत्ती 6:31-33) जिसके बारे में प्रभु यीशु ने बताया है।

      किन्तु पौलुस ने इस बात का भी एहसास किया कि जैसे-जैसे बीता समय अदृश्य होता चला जाता है, बीती बातों की स्मृतियाँ भी धूमिल होती चली जाती हैं, जिससे फिर हम यह भूलने लगते हैं कि यद्यपि अब हम मसीही विश्वासियों के लिए आशा भविष्य का नया मानदंड है, परन्तु पहले निराशा हमारे जीवन की सच्चाई हुआ करती थी।

      हमारा प्रभु परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम उसकी सुरक्षा और देखभाल में सदा बने रहें। हम यह कभी न भूलें कि प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास के द्वारा ही हमें परमेश्वर के परिवार का सदस्य होने और उन स्वर्गीय अधिकारों और भलाईयों का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। - मार्ट डीहान


आशा उनके लिए ही सबसे सार्थक होती है जिन्होंने निराशा में जीवन व्यतीत किया हो।

इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है। - मत्ती 6:33-34

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:11-22
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)।
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो।
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया।
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे।
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए।
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दोनों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया।
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो।
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 11-13
  • मरकुस 12:1-27



शनिवार, 9 मार्च 2019

गलती



      कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने स्वीकार किया, “गलतियां तो हुई हैं”; वह कंपनी द्वारा गैर कानूनी कार्यों में लिप्त होने के बारे में चर्चा कर रहा था। वह खिन्न तो दिख रहा था, परन्तु उसने फिर भी दोष को दूर ही रखा और यह स्वीकार नहीं किया कि उसने व्यक्तिगत रीति से कुछ गलत किया था।

      कुछ “गलतियाँ” बस गलतियां ही होती हैं, जैसे कि सड़क की गलत दिशा में गाड़ी चलाना, समय सूचक में निर्धारित समय न डालना जिससे पक रहा भोजन जल जाए, अपनी बैंक की चेकबुक में उपलब्ध राशि का गलत हिसाब रखना, आदि। परन्तु कुछ जान-बूझकर किए गए कार्य होते हैं जो ‘गलती’ से कहीं बढ़कर होते हैं, और परमेश्वर उन्हें पाप कहता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भी इस बात के कई उदाहरण हैं जहाँ परमेश्वर के लोगों ने गलतियाँ करीं और फिर उनके लिए बहाने बना दिए। जब परमेश्वर ने आदम और हव्वा से पूछा कि उन्होंने उसकी अनाज्ञाकारिता क्यों की, तो तुरंत ही उन्होंने दूसरे को दोषी ठहराने का प्रयास किया (उत्पत्ति 3:8-13)। जब इस्राएलियों ने सुनहरा बछड़ा बनाकर उसकी उपासना करना आरंभ किया तो हारून ने अपना कोई दायित्व स्वीकार नहीं किया, परन्तु मूसा से कहा, “तब मैं ने उन से कहा, जिस जिसके पास सोने के गहनें हों, वे उन को तोड़कर उतार लाएं; और जब उन्होंने मुझ को दिया, मैं ने उन्हें आग में डाल दिया, तब यह बछड़ा निकल पड़ा” (निर्गमन 32:24)। शायद वह बुदबुदाया भी होगा, “गलतियाँ तो हुई हैं”।

      बहुधा अपनी गलती मान लेने की बजाए दूसरे पर दोष मढ़ देना अधिक सरल होता है। उतना ही बुरा अपने पाप को कम करके, उसकी वास्तविकता को स्वीकार करने की बजाए, उसे “गलती मात्र” कहना होता है। परन्तु जब हम परमेश्वर के समक्ष अपने पाप को मानकर उसके लिए दायित्व स्वीकार करते हैं, उससे क्षमा प्रार्थी होते हैं, तो वह हमें क्षमा करता है और बहाल भी करता है (1 यूहन्ना 1:9)। - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर से क्षमा प्राप्त करने के लिए प्रथम कदम होता है
 उस क्षमा की आवश्यकता को स्वीकार करना।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: निर्गमन 32:1-5, 19-26
Exodus 32:1 जब लोगों ने देखा कि मूसा को पर्वत से उतरने में विलम्ब हो रहा है, तब वे हारून के पास इकट्ठे हो कर कहने लगे, अब हमारे लिये देवता बना, जो हमारे आगे आगे चले; क्योंकि उस पुरूष मूसा को जो हमें मिस्र देश से निकाल ले आया है, हम नहीं जानते कि उसे क्या हुआ?
Exodus 32:2 हारून ने उन से कहा, तुम्हारी स्त्रियों और बेटे बेटियों के कानों में सोने की जो बालियां है उन्हें तोड़कर उतारो, और मेरे पास ले आओ।
Exodus 32:3 तब सब लोगों ने उनके कानों से सोने की बालियों को तोड़कर उतारा, और हारून के पास ले आए।
Exodus 32:4 और हारून ने उन्हें उनके हाथ से लिया, और एक बछड़ा ढालकर बनाया, और टांकी से गढ़ा; तब वे कहने लगे, कि हे इस्त्राएल तेरा परमेश्वर जो तुझे मिस्र देश से छुड़ा लाया है वह यही है।
Exodus 32:5 यह देखके हारून ने उसके आगे एक वेदी बनवाई; और यह प्रचार किया, कि कल यहोवा के लिये पर्ब्ब होगा।
Exodus 32:19 छावनी के पास आते ही मूसा को वह बछड़ा और नाचना देख पड़ा, तब मूसा का कोप भड़क उठा, और उसने तख्तियों को अपने हाथों से पर्वत के नीचे पटककर तोड़ डाला।
Exodus 32:20 तब उसने उनके बनाए हुए बछड़े को ले कर आग में डाल के फूंक दिया। और पीसकर चूर चूर कर डाला, और जल के ऊपर फेंक दिया, और इस्त्राएलियों को उसे पिलवा दिया।
Exodus 32:21 तब मूसा हारून से कहने लगा, उन लोगों ने तुझ से क्या किया कि तू ने उन को इतने बड़े पाप में फंसाया?
Exodus 32:22 हारून ने उत्तर दिया, मेरे प्रभु का कोप न भड़के; तू तो उन लोगों को जानता ही है कि वे बुराई में मन लगाए रहते हैं।
Exodus 32:23 और उन्होंने मुझ से कहा, कि हमारे लिये देवता बनवा जो हमारे आगे आगे चले; क्योंकि उस पुरूष मूसा को, जो हमें मिस्र देश से छुड़ा लाया है, हम नहीं जानते कि उसे क्या हुआ?
Exodus 32:24 तब मैं ने उन से कहा, जिस जिसके पास सोने के गहनें हों, वे उन को तोड़कर उतार लाएं; और जब उन्होंने मुझ को दिया, मैं ने उन्हें आग में डाल दिया, तब यह बछड़ा निकल पड़ा
Exodus 32:25 हारून ने उन लोगों को ऐसा निरंकुश कर दिया था कि वे अपने विरोधियों के बीच उपहास के योग्य हुए,
Exodus 32:26 उन को निरंकुश देखकर मूसा ने छावनी के निकास पर खड़े हो कर कहा, जो कोई यहोवा की ओर का हो वह मेरे पास आए; तब सारे लेवीय उस के पास इकट्ठे हुए।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33



शुक्रवार, 8 मार्च 2019

चित्रण



      लंडन शहर की नैशनल पोर्टरेट गैलरी में बीती सदियों के लोगों के चित्रों का खज़ाना है। उन चित्रों में विंस्टन चर्चिल के 166, विलियम शेक्सपीयर के 94, और जॉर्ज वॉशिंगटन के 20 चित्र भी हैं। प्राचीन चित्रों को देखकर हम विचार कर सकते हैं कि क्या वे लोग वास्तव में वैसे ही दिखते होंगे?

       उदाहरण के लिए, स्कॉटिश देश-भक्त विलियम वॉलेस (c. 1270-1305) के 8 चित्र हैं, परन्तु हमारे पास उनकी कोई फोटो नहीं है जिससे तुलना कर के यह जाना जा सके कि वे वैसे ही दीखते थे जैसे कि चित्रकार ने उन्हें दिखाया है। हम कैसे जाने कि चित्रकार ने व्यक्ति को सही रीति से चित्रित किया है?

      कुछ ऐसा ही प्रभु यीशु के चित्रण के साथ भी संभव है। बिना इस बात का एहसास किए हुए, उस पर विश्वास करने वाले, प्रभु के विषय औरों पर एक छाप छोड़ते जा रहे हैं – रंग और कूची से नहीं वरन अपने व्यवहार, कार्यों, और संबंधों आदि के द्वारा। क्या हम मसीही विश्वासी सँसार के समक्ष अपने जीवनों के द्वारा अपने प्रभु का वास्तविक चित्र प्रस्तुत कर रहे हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस की यही चिंता थी; उसने फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में लिखा, “जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो” (फिलिप्पियों 2:5)। सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु का सही चित्रण प्रस्तुत करने की लालसा के अन्तर्गत, उसने प्रभु के अनुयायियों से आग्रह किया कि वे प्रभु की दीनता, आत्म-बलिदान, और करुणा को लोगों के सामने अपने जीवनों के द्वारा दिखाएँ।

      किसी ने कहा है, “संभव है कि हम ही वह ‘यीशु मसीह’ हों जिसे कुछ लोग कभी देखने पाएँगे”; ऐसे में वे हम में होकर हमारे प्रभु के बारे में क्या देखेंगे और जानेंगे? सँसार के सामने प्रभु यीशु की वास्तविकता को प्रगट करने के लिए “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो” (2:3) का पालन करें। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु का आत्म-बलिदान हमें औरों के लिए अपने आप को दे देने के लिए प्रेरित करता है।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।  


एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18



गुरुवार, 7 मार्च 2019

शासक


      राजा कैन्युट ग्यारहवीं शताब्दी में पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक था। उसके विषय एक कहानी प्रसिद्ध है, कहा जाता है कि समुद्र में उठते हुए ज्वार के समय में उसने आज्ञा दी कि उसकी कुर्सी को समुद्र के किनारे पर रखा जाए, और उसने कुर्सी पर बैठकर समुद्र की लहरों से कहा, “तुम मेरे आधीन हो, मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ कि  तुम मेरी भूमी पर आगे नहीं आओगे, अपने स्वामी, मेरे, कपड़ों और अंगों को गीला नहीं करोगे।” किन्तु ज्वार के साथ लहरें आगे बढ़ती रहीं और राजा के पैरों को भिगो दिया।

      इस कहानी को अकसर कैन्युट के घमण्ड को दिखाने के लिए कहा जाता है, परन्तु वास्तव में यह कहानी दीनता के बारे में है। इसके आगे कैन्युट ने कहा, “सारा सँसार जान ले कि राजाओं की शक्ति खोखली है, केवल उसी की सामर्थ्य है जिसकी इच्छा को आकाश, पृथ्वी और जल मानते हैं।” कैन्युट की कहानी एक बात की ओर ध्यान ले जाती है: “केवल परमेश्वर ही सर्वसामर्थी है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्यूब को भी इसी बात का बोध हुआ। उसके सामने जिसने पृथ्वी की नींव रखी (38:4-7), जो प्रातः के आगमन और रात्रि के अन्त होने को निर्धारित करता है (पद 12-13), जो हिम के भण्डार को बनाए रखता है और सितारों को दिशा देता है (पद 22, 31-33), हम मनुष्य बहुत छोटे हैं। लहरों का शासक एक ही है, और वह हम नहीं हैं (पद 11, मत्ती 8:23-27)।

      कैन्युट की कहानी को दोहराते रहना अच्छा है, विशेषकर तब जब हम अपने आप को बहुत चतुर समझ रहे हों या अपने उपर किसी बात के लिए घमण्ड कर रहे हों। किसी समुद्र या नदी के तट पर जाकर लहरों को, या कभी सूर्य को थमने का आदेश दे कर देखें; तुरंत ही पता चल जाएगा कि सर्वसामर्थी शासक कौन है, और किस की आज्ञा से सब कुछ होता है। फिर उस शासक के सामने नतमस्तक होकर उसके धन्यवादी हों कि वह हमारे जीवनों को भी संभालता है। - शेरिडन वॉयसे


परमेश्वर महान है, हम गौण हैं, और यही अच्छा है।

उसने [प्रभु यीशु] उन से कहा; हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो? तब उसने उठ कर आन्‍धी और पानी को डांटा, और सब शान्‍त हो गया। - मत्ती 8:26

बाइबल पाठ: अय्यूब 38:1-18
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?
Job 38:3 पुरुष के समान अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नींव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा?
Job 38:6 उसकी नींव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया,
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे?
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया;
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया,
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़ लगा दिए, कि
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?
Job 38:12 क्या तू ने जीवन भर में कभी भोर को आज्ञा दी, और पौ को उसका स्थान जताया है,
Job 38:13 ताकि वह पृथ्वी की छोरों को वश में करे, और दुष्ट लोग उस में से झाड़ दिए जाएं?
Job 38:14 वह ऐसा बदलता है जैसा मोहर के नीचे चिकनी मिट्टी बदलती है, और सब वस्तुएं मानो वस्त्र पहिने हुए दिखाई देती हैं।
Job 38:15 दुष्टों से उनका उजियाला रोक लिया जाता है, और उनकी बढ़ाई हुई बांह तोड़ी जाती है।
Job 38:16 क्या तू कभी समुद्र के सोतों तक पहुंचा है, वा गहिरे सागर की थाह में कभी चला फिरा है?
Job 38:17 क्या मृत्यु के फाटक तुझ पर प्रगट हुए, क्या तू घोर अन्धकार के फाटकों को कभी देखने पाया है?
Job 38:18 क्या तू ने पृथ्वी की चौड़ाई को पूरी रीति से समझ लिया है? यदि तू यह सब जानता है, तो बतला दे।  


एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52


बुधवार, 6 मार्च 2019

सिद्ध प्रेम



      उस महिला ने रुंधे गले से अपने बेटी से संबंधित उसकी समस्या के बारे में मुझे बताया। अपनी तरुण आयु बेटी के मित्रों के संदिग्ध आचरण के कारण उस चिन्तित महिला ने अपनी बेटी का मोबाइल फोन ज़ब्त कर लिया था और उसके साथ प्रत्येक स्थान पर जाने लगी थी। उनके संबंध बिगड़ते ही जा रहे थे।

      जब मैंने इस विषय पर उसकी बेटी से बात की तो उसने बताया कि वह अपने माँ से बहुत प्रेम करती है, परन्तु उसकी माँ का प्रेम व्यवहार इतना अभिभूत करने वाला होने लगा था कि उसे घुटन अनुभव होने लगी थी। वह माँ के इस प्रेम-प्रकटीकरण की घुटन से स्वतंत्र होना चाहती थी।

      हम सभी अपूर्ण हैं, और अपने संबंधों में परस्पर संघर्षों का सामना करते हैं। हम चाहे अभिभावक हों या बच्चे, अविवाहित हो या विवाहित, हम सभी प्रेम को सही रीति से व्यक्त करने में समस्याओं का सामना करते हैं, सही बात को सही समय पर सही रीति से करने या कहने में गड़बड़ा जाते हैं। हम अपने जीवन भर प्रेम में बढ़ते तथा परिपक्व होते रहते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कोरिन्थ की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में सिद्ध प्रेम के विषय लिखा, उन्हें उसके गुण बताए। पौलुस द्वारा दिए गए मानक बहुत अद्भुत तो हैं, परन्तु उन्हें व्यवहार में लाना बहुत चुनौतीपूर्ण तथा कठिन भी हो सकता है। परन्तु हमें परमेश्वर के धन्यवादी होना चाहिए कि उसने प्रभु यीशु मसीह में हमारे सामने सिद्ध प्रेम का सजीव उदाहरण रखा है। विभिन्न प्रकार के लोगों और उनकी विभिन्न समस्याओं के साथ व्यवहार के दौरान प्रभु यीशु ने दिखाया कि व्यवाहारिक जीवन में सिद्ध प्रेम कैसा होना चाहिए। हम मसीही विश्वासी जब प्रभु का अनुसरण करते हुए जीवन व्यतीत करते हैं, उसके प्रेम में बने रहते हैं, उसके वचनों से अपने मन को भर लेते हैं, तो हम उसके प्रेम और जीवन को अधिकाधिक प्रतिबिंबित करते जाऐंगे। हम फिर भी गलतियाँ तो करेंगे, परन्तु परमेश्वर उन्हें सुधार कर प्रत्येक परिस्थिति में से भलाई को उत्पन्न करेगा, क्योंकि उसका प्रेम सब कुछ सह लेता है, और कभी टलता नहीं है (पद 7-8)। - पोह फैंग चिया


हमारे प्रति अपने प्रेम को दिखाने के लिए प्रभु यीशु ने अपना जीवन बलिदान किया; 
उसके प्रति हमारे प्रेम को दिखाने के लिए हमें उसके लिए जीवन जीना है।

प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:10-11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13: 1-13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी।
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।  


एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31



मंगलवार, 5 मार्च 2019

स्वागत और पहुनाई



      हमने एक भोज का आयोजन किया, जिसमें पाँच देशों के निवासियों के परिवार हमारे साथ भोजन करने के लिए सम्मिलित हुए, और वह हमारे लिए एक अद्भुत यादगार है। भोज के समय हमारे वार्तालाप में सभी सम्मिलित हुए, यह वार्तालाप एक या दो तक ही सीमित नहीं रहा। उपस्थित सभी लोगों ने लंडन शहर में जीवन के प्रति, उनके विभिन्न देशों से होने के परिदृश्य में होकर, अपने विचारों को साझा किया। उस संध्या की समाप्ति के बाद, मेरे पति और मैंने अनुभव किया कि हमने जितना दिया था, उससे कहीं अधिक हमें मिल गया था, जिसमें नए मित्र बनाने और भिन्न संसकृतियों के विषय सीखने से संबंधित भावनाओं का स्नेहिल एहसास भी था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री के अन्त में लेखक सामाजिक जीवन से संबंधित कुछ बातों के विषय कुछ निर्देश देता है, जिनमें से एक है कि उसके पाठक अतिथिसत्कार में लगे रहें। क्योंकि इस सेवा में “इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है” (13:2)। संभव है कि लेखक के मन में अब्राहम और सारा का विचार हो, जिनके विषय हम उत्पत्ति 18:1-14 में देखते हैं कि उन्होंने कुछ अजनबियों का अपने निवास-स्थान में स्वागत किया, उनकी पहुनाई की, उन्हें उत्तम भोजन खिलाया। वे नहीं जानते थे कि वे स्वर्गदूतों की पहुनाई कर रहे हैं, जो उनके लिए आशीष का सन्देश लेकर आए थे।

      हम लोगों को अपने घरों में, उनसे कुछ प्राप्त करने के लिए स्वागत नहीं करते हैं, परन्तु बहुधा हम पहुनाई के द्वारा जितना देते हैं, उससे अधिक प्राप्त कर लेते हैं। प्रभु परमेश्वर के नाम में लोगों का स्वागत और पहुनाई करने के द्वारा हम प्रभु के प्रेम को औरों तक पहुँचने का माध्यम बनते हैं; स्वागत और पहुनाई में लगे रहें। - एमी बाउचर पाई


जब हम पहुनाई करते हैं, हम परमेश्वर की भलाई और उपहारों को बांटते हैं।

भाईचारे की प्रीति बनी रहे। पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। - इब्रानियों 13:1-2

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 18:1-14
Genesis 18:1 इब्राहीम माम्रे के बांजो के बीच कड़ी धूप के समय तम्बू के द्वार पर बैठा हुआ था, तब यहोवा ने उसे दर्शन दिया:
Genesis 18:2 और उसने आंख उठा कर दृष्टि की तो क्या देखा, कि तीन पुरूष उसके साम्हने खड़े हैं: जब उसने उन्हे देखा तब वह उन से भेंट करने के लिये तम्बू के द्वार से दौड़ा, और भूमि पर गिरकर दण्डवत की और कहने लगा,
Genesis 18:3 हे प्रभु, यदि मुझ पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि है तो मैं बिनती करता हूं, कि अपने दास के पास से चले न जाना।
Genesis 18:4 मैं थोड़ा सा जल लाता हूं और आप अपने पांव धोकर इस वृक्ष के तले विश्राम करें।
Genesis 18:5 फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊं और उस से आप अपने जीव को तृप्त करें; तब उसके पश्चात आगे बढें: क्योंकि आप अपने दास के पास इसी लिये पधारे हैं। उन्होंने कहा, जैसा तू कहता है वैसा ही कर।
Genesis 18:6 सो इब्राहीम ने तम्बू में सारा के पास फुर्ती से जा कर कहा, तीन सआ मैदा फुर्ती से गून्ध, और फुलके बना।
Genesis 18:7 फिर इब्राहीम गाय बैल के झुण्ड में दौड़ा, और एक कोमल और अच्छा बछड़ा ले कर अपने सेवक को दिया, और उसने फुर्ती से उसको पकाया।
Genesis 18:8 तब उसने मक्खन, और दूध, और वह बछड़ा, जो उसने पकवाया था, ले कर उनके आगे परोस दिया; और आप वृक्ष के तले उनके पास खड़ा रहा, और वे खाने लगे।
Genesis 18:9 उन्होंने उस से पूछा, तेरी पत्नी सारा कहां है? उसने कहा, वह तो तम्बू में है।
Genesis 18:10 उसने कहा मैं वसन्त ऋतु में निश्चय तेरे पास फिर आऊंगा; और तब तेरी पत्नी सारा के एक पुत्र उत्पन्न होगा। और सारा तम्बू के द्वार पर जो इब्राहीम के पीछे था सुन रही थी।
Genesis 18:11 इब्राहीम और सारा दोनो बहुत बूढ़े थे; और सारा का स्त्रीधर्म बन्द हो गया था
Genesis 18:12 सो सारा मन में हंस कर कहने लगी, मैं तो बूढ़ी हूं, और मेरा पति भी बूढ़ा है, तो क्या मुझे यह सुख होगा?
Genesis 18:13 तब यहोवा ने इब्राहीम से कहा, सारा यह कहकर क्यों हंसी, कि क्या मेरे, जो ऐसी बुढिय़ा हो गई हूं, सचमुच एक पुत्र उत्पन्न होगा?
Genesis 18:14 क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है? नियत समय में, अर्थात वसन्त ऋतु में, मैं तेरे पास फिर आऊंगा, और सारा के पुत्र उत्पन्न होगा।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50



सोमवार, 4 मार्च 2019

समझता



      कभी-कभी मैं और मेरी पत्नि, हम एक दूसरे के वाक्यों को पूरा कर देते हैं। तीस वर्ष से अधिक के विवाहित जीवन में साथ रहते-रहते हम एक दूसरे के विचार और बात करने के बारे में बहुत अच्छे से परिचित हैं। कभी-कभी तो हमें वाक्य को पूरा भी नहीं करना पड़ता है; केवल एक शब्द या एक-दूसरे की ओर एक झलक ही हमारी सोच को एक दूसरे से व्यक्त करने के लिए पर्याप्त होती है।

      इसमें ऐसी सुख-शान्ति है जैसे पैरों में अच्छे से आ जाने वाले पुराने जूतों की जोड़ी को पहनने में मिलती है। हम कभी-कभी एक दूसरे को प्यार से “मेरी पुरानी जूती” भी कह देते हैं – जो ऐसा अभिवादन है जिसे तब तक समझ पाना कठिन है जब तक आप हमें अच्छे से नहीं जानते हों। वर्षों के साथ में हमारे संबंध की एक अपनी ही भाषा विक्सित हो गई है, जिनमें ऐसी अभिव्यक्तियाँ हैं जो दशकों के प्रेम और भरोसे का परिणाम हैं।

      ऐसे ही इस जानकारी में संतोष और सुख है कि परमेश्वर हमें भली-भांति जानता है और हमसे प्रेम बहुत करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो” (भजन 139:4)। कल्पना कीजिए प्रभु यीशु के साथ बिना कुछ बोले वार्तालाप करने की, जिस में आप अपने हृदय की सभी बातें उससे निःसंकोच कहना चाहते हैं। परन्तु इससे पहले कि आप अपनी बात को शब्दों में लाने पाएँ, प्रभु आपकी ओर देखकर मुस्कुराता है और जो आप कहना चाहते हैं उसे व्यक्त कर देता है। यह जानने में कितना संतोष है कि हमें प्रभु परमेश्वर से वार्तालाप करने के लिए सही शब्दों का उपयोग करने की मजबूरी नहीं है। वह हमें जानता है, हमें अच्छे से समझता है। - जेम्स बैंक्स


परमेश्वर हमारे शब्दों से बढ़कर हमारे हृदयों को देखता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: भजन 139:1-12
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29