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Saturday, October 31, 2015

प्रेम-दृष्टि


   मार्क सालेम के कार्यक्रमों में आने वाले अनेक लोग यह मानते हैं कि वह उनके मन को पढ़ लेता है; लेकिन मार्क ऐसा कोई दावा नहीं करता। मार्क का कहना है कि वह ना तो कोई जादूगर है और ना ही उसमें लोगों के अन्दर देख पाने की क्षमता है, वह तो केवल उसके पास आने वाले लोगों की हर बात को बारीकी से देखता है और उसका आंकलन करता है। मार्क ने लेखिका जेनिफर मुलसन से एक साक्षात्कार में कहा, "हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो हमारे लिए प्रायः अदृश्य है क्योंकि हम बातों पर ध्यान नहीं देते हैं...मैं लोगों द्वारा प्रगट करी जा रही बातों के प्रति अति संवेदनशील रहता हूँ।"

   यह जानना रुचिकर है कि प्रभु यीशु लोगों में क्या देखते थे। अनन्त जीवन के खोजी एक धनी जवान व्यक्ति से हुई प्रभु यीशु की बातचीत इसका एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह बातचीत परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती, मरकुस और लूका नामक तीन पुस्तकों में दर्ज है। मरकुस ने अपने विवरण में एक रोचक बात लिखी है, "यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया..." (मरकुस 10:21)। क्योंकि यह जवान व्यक्ति धनवान था, संभवतः कुछ लोग उससे ईर्ष्या करते होंगे; या उसके आज्ञाओं को लड़कपन से मानते आने (मरकुस10:19-20) के दावे को लेकर उसे घमण्डी समझते होंगे, लेकिन प्रभु यीशु मे उसे प्रेम-दृष्टि से देखा।

   इस घटना को पढ़ते समय हम अकसर उस अमीर जवान व्यक्ति के अपने धनसंपत्ति को त्यागकर प्रभु यीशु के पीछे हो लेने से इंकार करने और वापस लौट जाने (पद 22) पर ध्यान करते हैं; प्रभु यीशु के चेलों ने भी ऐसा ही किया और किसी धनी व्यक्ति के परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर पाने की कठिनाई से चकित हुए (पद 26), लेकिन प्रभु यीशु ने फिर से अपने प्रेम का उदाहरण देते हुए चेलों से कहा, "...मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है" (पद 27)।

   आज भी प्रभु यीशु संसार के हर जन को प्रेम-दृष्टि से देखता है, हर जन को अपने पास आमंत्रित करता है, सभी को उसके पास लौट आने की प्रतीक्षा करता है। प्रभु यीशु के इस निमंत्रण के प्रति आपका प्रत्युत्तर क्या है? - डेविड मैक्कसलैंड


परमेश्वर के पास सब कुछ देखने और जानने वाली दृष्टि और सबको क्षमा कर देने वाला मन है।

यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता, और भाता भी है। वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें। - 1 तिमुथियुस 2:3-4

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-27
Mark 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Mark 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर। 
Mark 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Mark 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं। 
Mark 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Mark 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था। 
Mark 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:24 चेले उस की बातों से अचंभित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालको, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है! 
Mark 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Mark 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1


Friday, October 30, 2015

अन्तिम अध्याय


   मेरी एक सहेली, जब भी कोई नई रोमांचक किताब पढ़ना आरंभ करती है, वह अन्तिम अध्याय को पहले पढ़ लेती है; उसका कहना है कि ऐसा करने से कथानक से संबंधित उत्सुकता समाप्त हो जाती है और फिर वह शान्त होकर किताब को पढ़ सकती है। ऐसा ही हम मसीही विश्वासियों के साथ भी है; क्योंकि प्रभु यीशु द्वारा संसार की गाथा का अन्त हम पर प्रगट कर दिया गया है इसलिए वर्तमान की सभी अशान्ति, विपित्तियों और अव्यवस्था के बीच हम शान्ति के केंद्र बनकर जी सकते हैं।

   प्रभु यीशु ने हमें आश्वस्त किया है, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु का यह आश्वासन हमें हमारी प्रतिदिन की समस्याओं पर जयवन्त करता है। हमारे चारों ओर चाहे राज्य गिरें, चाहे हमारे मित्र बदल जाएं, या हमारे अराधनालय बन्द कर दिए जाएं, या फिर समुद्र चढ़ आए अथवा पर्वत हम पर टूट जाएं, लेकिन प्रभु यीशु में होकर हम शान्त बने रह सकते हैं - कैसे? यह स्मरण करते हुए कि प्रभु यीशु का आगमन निकट है (याकूब 5:8)।

   प्रभु यीशु ने अपने दूसरे आगमन के जो चिन्ह अपने चेलों को बताए थे वे सब पूरे हो चले हैं; इससे हम जानते हैं कि अब उसका आगमन बहुत निकट है, वरन वह द्वार ही पर है। प्रभु किसी भी क्षण आ सकता है और उसके आगमन के साथ हर गलत बात ठीक कर दी जाएगी, यह संसार और इसकी हर बात प्रभु की आधीनता में हो जाएगी, वह सब कुछ ठीक और सही कर देगा, और तब "पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भर जाता है" (हबकुक 2:14)।

   प्रभु यीशु ने कहा, "...हां मैं शीघ्र आने वाला हूं" (प्रकाशितवाक्य 22:20)। आज प्रभु यीशु के आगमन का दिन हो सकता है! परमेश्वर के वचन बाइबल के अन्तिम अध्याय में प्रभु द्वारा कही गई अन्तिम बात यही है; यह पूरी अवश्य ही होगी, संभवतः आज ही! - डेविड रोपर


प्रभु यीशु के पुनःआगमन से अधिक व्यावाहरिक दैनिक मसीही जीवन को प्रभावित करने वाला सिद्धांत कोई अन्य नहीं है।

तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है। - याकूब 5:8

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 22:6-20
Revelation 22:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें विश्वास के योग्य, और सत्य हैं, और प्रभु ने जो भविष्यद्वक्ताओं की आत्माओं का परमेश्वर है, अपने स्वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि अपने दासों को वे बातें जिन का शीघ्र पूरा होना अवश्य है दिखाए। 
Revelation 22:7 देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; धन्य है वह, जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें मानता है।
Revelation 22:8 मैं वही यूहन्ना हूं, जो ये बातें सुनता, और देखता था; और जब मैं ने सुना, और देखा, तो जो स्वर्गदूत मुझे ये बातें दिखाता था, मैं उसके पांवों पर दण्‍डवत करने के लिये गिर पड़ा। 
Revelation 22:9 और उसने मुझ से कहा, देख, ऐसा मत कर; क्योंकि मैं तेरा और तेरे भाई भविष्यद्वक्ताओं और इस पुस्‍तक की बातों के मानने वालों का संगी दास हूं; परमेश्वर ही को दण्‍डवत कर।
Revelation 22:10 फिर उसने मुझ से कहा, इस पुस्‍तक की भविष्यद्ववाणी की बातों को बन्‍द मत कर; क्योंकि समय निकट है।
Revelation 22:11 जो अन्याय करता है, वह अन्याय ही करता रहे; और जो मलिन है, वह मलिन बना रहे; और जो धर्मी है, वह धर्मी बना रहे; और जो पवित्र है, वह पवित्र बना रहे। 
Revelation 22:12 देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है। 
Revelation 22:13 मैं अलफा और ओमिगा, पहिला और पिछला, आदि और अन्‍त हूं। 
Revelation 22:14 धन्य वे हैं, जो अपने वस्‍त्र धो लेते हैं, क्योंकि उन्हें जीवन के पेड़ के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से हो कर नगर में प्रवेश करेंगे। 
Revelation 22:15 पर कुत्ते, और टोन्‍हें, और व्यभिचारी, और हत्यारे और मूर्तिपूजक, और हर एक झूठ का चाहने वाला, और गढ़ने वाला बाहर रहेगा।
Revelation 22:16 मुझ यीशु ने अपने स्वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि तुम्हारे आगे कलीसियाओं के विषय में इन बातों की गवाही दे: मैं दाऊद का मूल, और वंश, और भोर का चमकता हुआ तारा हूं।
Revelation 22:17 और आत्मा, और दुल्हिन दोनों कहती हैं, आ; और सुनने वाला भी कहे, कि आ; और जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।
Revelation 22:18 मैं हर एक को जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं, कि यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्‍तक में लिखीं हैं, उस पर बढ़ाएगा। 
Revelation 22:19 और यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्‍तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्‍तक में है, उसका भाग निकाल देगा।। 
Revelation 22:20 जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां मैं शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4


Thursday, October 29, 2015

अद्भुत


   जैसे ही हमारा वायुयान उतरने लगा, विमान परिचारिका ने उतरने से संबंधित जानकारी पढ़नी आरंभ कर दी; उसका बताने का तरीका ऐसा था मानों वह उस दिन में हज़ारवीं बार दोहरा रही हो - ना कोई रुचि और ना ही कोई भावना; रूखी नीरस आवाज़ में उसने जानकारी की सूचि को पढ़कर समाप्त करते हुए कहा, "आपका दिन अत्युत्तम रहे" जबकि उसके कहने के लहज़े में उस दिन को विशेष बताने लायक कुछ भी नहीं था।

   कभी कभी मुझे लगता है कि परमेश्वर के साथ अपने संबंध को हम ऐसे ही देखते हैं - औपचारिक, उबाऊ, बेपरवाह, उदासीन। प्रभु यीशु में होकर हमें परमेश्वर की सन्तान होने, उसके परिवार के सदस्य होने का गौरव प्राप्त हुआ है; लेकिन इस अद्भुत सच्चाई के साथ जो अचरज और आनन्द जुड़ा होना चाहिए अनेक बार वह हमारे जीवनों से दिखाई नहीं देता।

   अय्युब ने परमेश्वर से अपनी परेशानियों और दुखों को लेकर प्रश्न किया, लेकिन जब परमेश्वर ने उसे उत्तर देना और उससे अपनी सृष्टि की अद्भुत बातें बयान करना आरंभ किया तो अय्युब अपने सृष्टिकर्ता और उसकी अद्भुत सृष्टि का वर्णन सुनकर नतमस्तक हो गया, और शर्मिंदगी के साथ परमेश्वर से बोला, तू ने पूछा "तू कौन है जो ज्ञान रहित हो कर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था" (अय्युब 42:3)।

   मेरी लालसा है कि परमेश्वर और मेरे प्रति उसके अद्भुत प्रेम की अद्भुत सच्चाई मेरे मन को पकड़ ले, वश में कर ले - प्रभु यीशु पर लाए गए विश्वास द्वारा परमेश्वर की सन्तान हो जाना - क्या ही अद्भुत बात है! - बिल क्राउडर


परमेश्वर और हमारे प्रति उसके प्रेम से बढ़कर अद्भुत कोई भी अन्य बात नहीं है।

देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है। - याकूब 5:11

बाइबल पाठ: अय्युब 42:1-6
Job 42:1 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया; 
Job 42:2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। 
Job 42:3 तू कौन है जो ज्ञान रहित हो कर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था। 
Job 42:4 मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे। 
Job 42:5 मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; 
Job 42:6 इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।

एक साल में बाइबल: यिर्मयाह 18-19; 2 तिमुथियुस 3

Wednesday, October 28, 2015

प्रतीक्षा


   आज के समय में, जब कि तत्क्षण संपर्क और संवाद के विभिन्न साधन सहजता से उपलब्ध हैं, तब भी लोग दूसरों से उत्तर मिलने की प्रतीक्षा नहीं कर पाते। मेरे एक जानकार ने अपनी पत्नि को पहले एक ईमेल भेजा, और फिर उससे फोन पर बात करने लगा, क्योंकि वह ईमेल के उत्तर की प्रतीक्षा नहीं कर पा रहा था!

   कभी कभी हम मनुष्य अधीरता का ऐसा ही रवैया परमेश्वर के प्रति भी रखते हैं, विशेषकर तब, जब वह हमारी प्राथनाओं के उत्तर तुरंत नहीं देता। हम ही नहीं, परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने भी कुछ ऐसा ही रवैया दिखाते हुए कहा, "हे यहोवा, फुर्ती कर के मेरी सुन ले; क्योंकि मेरे प्राण निकलने ही पर हैं मुझ से अपना मुंह न छिपा, ऐसा न हो कि मैं कबर में पड़े हुओं के समान हो जाऊं" (भजन 143:7)।

   लेकिन परमेश्वर हमें धैर्य के पाठ पढ़ा कर हमारे विश्वास को दृढ़ करता है। दाऊद को लड़कपन में ही इस्त्राएल का राजा होने के लिए अभिशेक कर दिया गया था, लेकिन उसे वर्षों तक शाऊल के क्रोध से जान बचाते हुए यहाँ से वहाँ भागना पड़ा, तब ही जाकर वह राजा बन सका। इन बातों से दाऊद निराश नहीं हुआ, वरन उसने लिखा, "यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह" (भजन 27:14)। अपने एक अन्य भजन में दाऊद लिखता है, "मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है" (भजन 40:1-2)। परमेश्वर पर अपने इसी विश्वास के कारण आगे चलकर दाऊद के विषय परमेश्वर ने कहा, "... कि मुझे एक मनुष्य यिशै का पुत्र दाऊद, मेरे मन के अनुसार मिल गया है। वही मेरे सारी इच्छा पूरी करेगा" (प्रेरितों 13:22; 1 शमूएल 13:14)।

   जब हम परिस्थितियों और परेशानियों से, तथा परमेश्वर से प्रार्थना का उत्तर ना मिल पाने से निराश होने लगें तो दाऊद के जीवन का यह उदाहरण स्मरण और ध्यान रखें कि परमेश्वर हमारे विश्वास और चरित्र के विकास में रुचि रखता है (याकूब 1:2-4) और इसके लिए जो भी आवश्यक है वह करता है, चाहे वह विलंब ही क्यों ना हो! परमेश्वर के समय और उपाय की प्रतीक्षा करना सीखें, परिणाम लाभप्रद ही होंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमारे धैर्य को खींचकर हमारे विश्वास के आकार को बढ़ाता है।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे। - याकूब 1:2-4

बाइबल पाठ: भजन 27
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 15-17
  • 2 तिमुथियुस 2


Tuesday, October 27, 2015

सामर्थी सहायक


   एक दिन प्रातः बहुत तड़के तेज़ हवा चलने लगी और बारिश की मोटी मोटी बूँदें मेरे घर पर कंकरों के समान गिरने लगीं। मैंने बाहर झाँककर धुँधले पीले-स्लेटी आकाश को और तेज़ हवा के थपेड़ों से पेड़ों को हिलते हुए देखा। आकाश में बिजली बार बार तेज़ी से कौंध रही थी और उसके कड़कने की आवाज़ हड्डियों को भी हिला रही थी। घर के अन्दर की बिजली कभी आती और कभी चली जाती, और मैं सोच में थी कि यह तूफान कब तक चलेगा?

   उस तूफान के गुज़र जाने के बाद मैंने अपने दैनिक मनन के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल को खोला। मेरा ध्यान बाइबल में अय्युब की पुस्तक के उस भाग पर गया जहाँ तूफान के बल को परमेश्वर की सामर्थ को समझाने के लिए उपयोग किया गया है। अय्युब के मित्र एलिहू ने कहा, "ईश्वर गरज कर अपना शब्द अद्भूत रीति से सुनाता है, और बड़े बड़े काम करता है जिन को हम नहीं समझते" (अय्युब 37:5); "वह बिजली को अपने हाथ में ले कर उसे आज्ञा देता है कि दुश्मन पर गिरे" (अय्युब 36:32)। वास्तव में परमेश्वर "अति सामर्थी" है (अय्युब 37:23)।

   अति सामर्थी परमेश्वर के सामने हम मनुष्य बहुत ही सामर्थहीन हैं। ना तो हम अपने आप को आत्मिक रीति से संभाले रख सकते हैं, ना अपने मनों को स्वस्थ रख सकते हैं और ना ही उस अन्याय का कोई समाधान कर पाते हैं जिसे हमें अकसर सहना पड़ता है। लेकिन वह अति सामर्थी परमेश्वर हमें संभालता है, हमारी चिंता करता है, क्योंकि उसे हमारी सृष्टि स्मरण रहती है (भजन103:14)। ना केवल वह हमारी देखभाल और चिंता करता है वरन "वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है" (यशायाह 40:29)। हम मसीही विश्वासी इस बात द्वारा आश्वस्त और निशचिंत रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता हमारा सामर्थी सहायक भी है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर ही हमारी सामर्थ का स्त्रोत है।

क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है। - भजन 103:14 

बाइबल पाठ: अय्युब 37:14-24
Job 37:14 हे अय्यूब! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह, और ईश्वर के आश्चर्यकर्मों का विचार कर। 
Job 37:15 क्या तू जानता है, कि ईश्वर क्योंकर अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है? 
Job 37:16 क्या तू घटाओं का तौलना, वा सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म जानता है? 
Job 37:17 जब पृथ्वी पर दक्खिनी हवा ही के कारण से सन्नाटा रहता है तब तेरे वस्त्र क्यों गर्म हो जाते हैं? 
Job 37:18 फिर क्या तू उसके साथ आकाशमण्डल को तान सकता है, जो ढाले हुए दर्पण के तुल्य दृढ़ है? 
Job 37:19 तू हमें यह सिखा कि उस से क्या कहना चाहिये? क्योंकि हम अन्धियारे के कारण अपना व्याख्यान ठीक नहीं रच सकते। 
Job 37:20 क्या उसको बताया जाए कि मैं बोलना चाहता हूँ? क्या कोई अपना सत्यानाश चाहता है? 
Job 37:21 अभी तो आकाशमण्डल में का बड़ा प्रकाश देखा नहीं जाता जब वायु चलकर उसको शुद्ध करती है। 
Job 37:22 उत्तर दिशा से सुनहली ज्योति आती है ईश्वर भययोग्य तेज से आभूषित है। 
Job 37:23 सर्वशक्तिमान जो अति सामथीं है, और जिसका भेद हम पा नहीं सकते, वह न्याय और पूर्ण धर्म को छोड़ अत्याचार नहीं कर सकता। 
Job 37:24 इसी कारण सज्जन उसका भय मानते हैं, और जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान हैं, उन पर वह दृष्टि नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 12-14
  • 2 तिमुथियुस 1


Monday, October 26, 2015

भीतर और बाहर


   मेरी पत्नि मार्टी खरीददारी करने में बड़ी सावधानी बरतती है, वह निश्चित करती है कि जो वह परिवार के लिए खरीद रही है वह पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक है। चाहे उस वस्तु को कितनी भी आकर्षक पैकिंग में क्यों ना रखा गया हो, मार्टी बाहर से दिखने वाले स्वरूप पर नहीं जाती; वह पैकिंग पर लिखा देखती है कि प्रत्येक वस्तु में क्या कुछ डाला गया है क्योंकि अनेक प्रकार के पदार्थ भोजन वस्तुओं को खराब होने से बचाने के लिए उनमें मिलाए जाते हैं और उन पदार्थों में से कुछ स्वस्थ्य के लिए हानिकारक भी होते हैं। इसलिए चाहे उन पदार्थों के नाम पढ़ने में कितने भी कठिन क्यों ना हों, मार्टी उन्हें ध्यान से पढ़कर, उनकी जानकारी लेकर तब ही खरीदती है; यदि कोई वस्तु हानिकारक या अनजाने पदार्थों वाली होती है तो वह उसे वापस रख देती है। मार्टी को अपने तथा अपने परिवार के लिए बाहर से सुन्दर तथा आकर्षक दिखने वाली नहीं वरन अन्दर से अच्छी और स्वास्थ्यवर्धक वस्तुएं चाहिएं।

   मैंने अकसर यह सोचा है कि मार्टी का खरीददारी करने का तरीका परमेश्वर का अपने लिए हमारी उपयोग्यता का आँकलन करने के तरीके के समान है। परमेश्वर भी हमारे जीवनों के बाहरी स्वरूप और सज्जा या अन्य मनुष्यों द्वारा हमारे बारे में रखी गई राय के आधार पर नहीं वरन हम जैसे अन्दर से हैं, जो हमारे मनों में है, उसके अनुसार हमारा आँकलन करता है। इसलिए कोई अचरज की बात नहीं कि परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन का लेखक कहता है, "सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है" (नीतिवचन 4:23)। संसार की रीति के अनुसार सही फैशन के कपड़े पहनना, अपने आप को सजाए-संवारे रखना, जवान दिखते रहने के प्रयास करते रहना आदि ठीक है, परन्तु इन बातों का कोई महत्व नहीं यदि हमारे मनों में लालच, घृणा, कुड़कुड़ाना, बैर, विरोध, आत्मग्लानि आदि हानिकारक और अनुपयोगी बातें भरी हुई हैं; ये ना तो हमारे अपने स्वास्थ्य के लिए अच्छी होंगी और ना ही हमें परमेश्वर के लिए उपयोगी बनने देंगी।

   इसलिए हमें अपने आप से प्रश्न करना है: जब लोग हमारे बाहरी स्वरूप से पार होकर हमारे भीतरी मनुष्यतव को देखते हैं तो उन्हें क्या दिखाई देता है? क्या मेरी बाहरी सुन्दरता के बाद उन्हें मेरे अन्दर स्वस्थ मसीही चरित्र और गुण नज़र आते हैं? यदि हमारे जीवन आत्मा के फलों (गलतियों 5:22-23) से भरे होंगे, तो हमारे जीवन परमेश्वर के लिए उपयोगी और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को महिमा देने वाले, उसकी गवाही देनेवाले भी होंगे। - जो स्टोवैल


आपके बाहरी स्वरूप और सज्जा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण आपके मन की दशा और बातें हैं।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: नीतिवचन4:14-27
Proverbs 4:14 दुष्टों की बाट में पांव न धरना, और न बुरे लोगों के मार्ग पर चलना। 
Proverbs 4:15 उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल, उसके निकट से मुड़ कर आगे बढ़ जा। 
Proverbs 4:16 क्योंकि दुष्ट लोग यदि बुराई न करें, तो उन को नींद नहीं आती; और जब तक वे किसी को ठोकर न खिलाएं, तब तक उन्हें नींद नहीं मिलती। 
Proverbs 4:17 वे तो दुष्टता से कमाई हुई रोटी खाते, और उपद्रव के द्वारा पाया हुआ दाखमधु पीते हैं। 
Proverbs 4:18 परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है। 
Proverbs 4:19 दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकारमय है; वे नहीं जानते कि वे किस से ठोकर खाते हैं।
Proverbs 4:20 हे मेरे पुत्र मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा। 
Proverbs 4:21 इन को अपनी आंखों की ओट न होने दे; वरन अपने मन में धारण कर। 
Proverbs 4:22 क्योंकि जिनको वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं। 
Proverbs 4:23 सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। 
Proverbs 4:24 टेढ़ी बात अपने मुंह से मत बोल, और चालबाजी की बातें कहना तुझ से दूर रहे। 
Proverbs 4:25 तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें। 
Proverbs 4:26 अपने पांव धरने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें। 
Proverbs 4:27 न तो दाहिनी ओर मुढ़ना, और न बाईं ओर; अपने पांव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 9-11
  • 1 तिमुथियुस 6


Sunday, October 25, 2015

प्रेम और जानना


   जौनथन सफरन फोएर के लिखे एक उपन्यास का एक पात्र न्यू यॉर्क शहर में स्थित एम्पायर स्टेट बिल्डिंग के विष्य बातचीत करते हुए कहता है, "मैं इस इमारत को जानता हूँ क्योंकि मैं इस इमारत से प्रेम करता हूँ।"

   इस वाक्य ने मुझे प्रेम और जानने के बीच के संबंध पर विचार करने को विवश किया। जब भी हम किसी चीज़ से प्रेम करते हैं, हम उसके बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं। जब हम किसी स्थान से प्रेम करते हैं, हम उसके प्रत्येक इंच की खोज-बीन करना चाहते हैं। जब हम किसी व्यक्ति से प्रेम करते हैं तो हम उसके जीवन की सभी बातों का संपूर्ण विवरण जानना चाहते हैं - वह कहाँ से है, उसे क्या पसन्द है, वह कहाँ और किन बातों में समय बिताता है, उसके मित्र कौन हैं, वह किन बातों पर विश्वास रखता है, आदि। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो प्रेम तो चाहते हैं परन्तु यह नहीं चाहते कि कोई उन्हें जाने; उन्हें भय होता है कि यदि उनकी सारी बातें लोगों को मालूम पड़ गईं तो फिर लोग उनसे प्रेम नहीं करेंगे।

   लेकिन परमेश्वर के साथ हमें इस बात को लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर का प्रेम मनुष्यों के प्रेम से कहीं बढ़कर है: "परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा" (रोमियों 5:8)। ना केवल परमेश्वर ने प्रभु यीशु में होकर अपने प्रेम को हम पर प्रगट किया है, अपनी सृष्टि और अपने वचन बाइबल के द्वारा परमेश्वर अपने चरित्र और गुण भी हमपर प्रगट करता है। क्योंकि हमारी कमी-घटियों के बावजूद परमेश्वर हम से प्रेम करता है, हमारी अन्दर-बाहर की सारी दशा से भली-भांति अवगत होने के बावजूद वह हमारे साथ संबंध बनाना चाहता है, इसलिए किसी बात से डर कर उससे कुछ भी छुपाने की हमें कोई आवश्यकता नहीं है; हम निसंकोच होकर अपनी हर बात उसके सामने रख सकते हैं, खुले दिल से अपने पापों को भी उसके सामने मान सकते हैं क्योंकि वह तो उन्हें पहले से ही जानता है।

   इसीलिए परमेश्वर को जानना उससे प्रेम करना है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


इससे बढ़कर कोई दूसरा आनन्द नहीं कि हम जानें कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है।

प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। - 1 यूहन्ना 4:18-19

बाइबल पाठ: रोमियों 5:6-11
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये