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सोमवार, 19 जुलाई 2021

कौन है?

 

          हम अपने हनीमून की यात्रा से वापस लौट रहे थे, और हवाई-अड्डे पर अपन सामान को वायु-यान में चढ़ाने के लिए सौंपे जाने की अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। मैंने हम से कुछ ही दूर खड़े एक व्यक्ति को देखा और अपने पति को कोहनी मार कर उसकी ओर देखने का संकेत किया। मेरे पति ने उसे ध्यान से देखने का प्रयास किया और फिर मुझ से पूछा “कौन है?” मैंने बताया कि वह एक प्रसिद्ध फ़िल्म कलाकार है और उसकी कई फिल्मों और उनमें उसके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं की एक लम्बी सूची उस सूना दी। फिर मैंने अपने पति से कहा कि वे हमारी एक फोटो लें, और जाकर उस कलाकार के साथ खड़ी हो गई। इस बात को चौबीस वर्ष हो चुके हैं, किन्तु आज भी मुझे इस घटना का वर्णन करना अच्छा लगता है, मैं बड़े आनन्द के साथ उस दिन के बारे में बताती हूँ जब मैं एक फिल्म कलाकार से मिली थी।

          किसी प्रसिद्ध कलाकार को पहचानना एक बात है, लेकिन एक और है जो सभी मनुष्यों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, और मैं उसकी कृतज्ञ हूँ, कि अब मैं उसे व्यक्तिगत रीति से जानती हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने पूछा “वह प्रतापी राजा कौन है?” (भजन 24:8)। भजनकार दाऊद सर्वशक्तिमान प्रभु की ओर संकेत करता है, जो सृष्टिकर्ता, संभालने वाला, और सभी पर राज्य करने वाला है। दाऊद कहता है, “पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है; जगत और उस में निवास करने वाले भी। क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ कर के रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है” (भजन 24:1-2)। दाऊद विस्मय से अभिभूत होकर घोषित करता है कि परमेश्वर सबसे महान है, किन्तु फिर भी हम उसके निकट जा सकते हैं (पद 3-4)। जब हम परमेश्वर के लिए जीवन व्यतीत करते हैं, तो हम न केवल उसे घनिष्ठता से जान सकते हैं, वरन उससे सामर्थ्य प्राप्त कर सकते हैं, और भरोसा रख सकते हैं कि वह हमारी ओर से लड़ेगा (पद 8)।

          प्रभु परमेश्वर हमें अवसर प्रदान करता है कि हम बता सकें कि केवल एक वही ऐसा सुप्रसिद्ध है जिसका औरों से वर्णन करना सर्वथा उपयुक्त है। जब हमारे जीवनों में से उसका चरित्र प्रतिबिंबित होता है, तब जो लोग उसे नहीं जानते हैं, उनके पास भी अवसर होता है कि वे हम से पूछें कि हमारा यह प्रभु परमेश्वर “कौन है?” दाऊद के समान, हम भी अपने अद्भुत सर्वशक्तिमान, सबसे महान परमेश्वर के बारे में बता सकते हैं कि वह “कौन है?” – सोहचील डिक्सन

 

प्रभु आपका धन्यवाद प्रतिदिन के उन अवसरों के लिए 

जिनमें हम आपके बारे में लोगों को बता सकते हैं।


अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। - 1 पतरस 2:12

बाइबल पाठ: भजन 24

भजन 24:1 पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है; जगत और उस में निवास करने वाले भी।

भजन 24:2 क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ कर के रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है।

भजन 24:3 यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्र स्थान में कौन खड़ा हो सकता है?

भजन 24:4 जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है।

भजन 24:5 वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करने वाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा।

भजन 24:6 ऐसे ही लोग उसके खोजी हैं, वे तेरे दर्शन के खोजी याकूब वंशी हैं।

भजन 24:7 हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो। हे सनातन के द्वारों, ऊंचे हो जाओ। क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा।

भजन 24:8 वह प्रतापी राजा कौन है? परमेश्वर जो सामर्थी और पराक्रमी है, परमेश्वर जो युद्ध में पराक्रमी है!

भजन 24:9 हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो हे सनातन के द्वारों तुम भी खुल जाओ! क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा!

भजन 24:10 वह प्रतापी राजा कौन है? सेनाओं का यहोवा, वही प्रतापी राजा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40

शनिवार, 22 मई 2021

उद्देश्य

 

            भूख के कारण मुझे बहुत परेशानी हो रही थी। मेरे आत्मिक सलाहकार ने परमेश्वर की निकटता में बढ़ने के लिए उपवास को एक माध्यम बताया था। किन्तु जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मैं तो बस यही विचार करता रह गया कि प्रभु यीशु ने चालीस दिन तक यह कैसे कर लिया? मैं संघर्ष कर रहा था कि पवित्र आत्मा की सहायता से शान्ति, सामर्थ्य, और धैर्य – विशेषकर धैर्य को बनाए रखूँ। यदि हम शारीरिक रीति से यह कर सकते हैं, तो उपवास रखना हमें आत्मिक भोजन के महत्व को सिखा सकता है। जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा, “लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा” (मत्ती 4:4)। लेकिन फिर भी, जैसा कि मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभव से सीखा, यह आवश्यक नहीं कि उपवास अपने आप से ही हमें परमेश्वर की निकटता में ले आए!

            वास्तव में, परमेश्वर ने अपने नबी ज़कर्याह के द्वारा अपने लोगों से कहा था कि उनका उपवास रखना व्यर्थ है यदि वे निर्धनों की सुधि नहीं रखते हैं तो। परमेश्वर ने विशेष रीति से संकेत करते हुए उन लोगों से पूछा, “सब साधारण लोगों से और याजकों से कह, कि जब तुम इन सत्तर वर्षों के बीच पांचवें और सातवें महीनों में उपवास और विलाप करते थे, तब क्या तुम सचमुच मेरे ही लिये उपवास करते थे?” (ज़कर्याह 7:5)।

            परमेश्वर का यह प्रश्न प्रकट करता है कि प्राथमिक समस्या उनके पेट नहीं थे, वरन उनके ठण्डे पड़ गए हृदय थे। अपनी ही स्वार्थ-सिद्धि करते रहने के कारण, वे परमेश्वर के हृदय के निकट नहीं आने पा रहे थे। इसलिए उसने उन से बल देकर कहा, “खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना, न तो विधवा पर अन्धेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर ; और न अपने अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना” (पद 9,10 )।

            आत्मिक अनुशासन बनाए रखने में हमारा उद्देश्य 0   अपने प्रभु परमेश्वर की निकटता में बढ़ना है। जब हम उसकी समानता में  बढ़ते जाएँगे, तो हम उनके बारे में भी चिंता करने लगेंगे, जिन से वह प्रेम करता है; और यही आत्मिक बढ़ोतरी का उद्देश्य है। - टिम गुस्ताफसन

 

प्रभु परमेश्वर, मेरे जीवन का उद्देश्य अपनी नहीं, वरन, आपकी इच्छा को पूरा करना हो।


और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा। - यहोशू 24:15

बाइबल पाठ: ज़कर्याह 7:1-10

ज़कर्याह 7:1 फिर दारा राजा के चौथे वर्ष में किसलेव नाम नौवें महीने के चौथे दिन को, यहोवा का वचन जकर्याह के पास पहुंचा।

ज़कर्याह 7:2 बेतेल वासियों ने शरेसेर और रेगेम्मेलेक को इसलिये भेजा था कि यहोवा से बिनती करें,

ज़कर्याह 7:3 और सेनाओं के यहोवा के भवन के याजकों से और भविष्यद्वक्ताओं से भी यह पूछें, क्या हमें उपवास कर के रोना चाहिये जैसे कि कितने वर्षों से हम पांचवें महीने में करते आए हैं?

ज़कर्याह 7:4 तब सेनाओं के यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा;

ज़कर्याह 7:5 सब साधारण लोगों से और याजकों से कह, कि जब तुम इन सत्तर वर्षों के बीच पांचवें और सातवें महीनों में उपवास और विलाप करते थे, तब क्या तुम सचमुच मेरे ही लिये उपवास करते थे?

ज़कर्याह 7:6 और जब तुम खाते-पीते हो, तो क्या तुम अपने ही लिये नहीं खाते, और क्या तुम अपने ही लिये नहीं पीते हो?

ज़कर्याह 7:7 क्या यह वही वचन नहीं है, जो यहोवा अगले भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा उस समय पुकार कर कहता रहा जब यरूशलेम अपने चारों ओर के नगरों समेत चैन से बसा हुआ था, और दक्खिन देश और नीचे का देश भी बसा हुआ था?

ज़कर्याह 7:8 फिर यहोवा का यह वचन जकर्याह के पास पहुंचा, सेनाओं के यहोवा ने यों कहा है,

ज़कर्याह 7:9 खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना,

ज़कर्याह 7:10 न तो विधवा पर अन्धेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर ; और न अपने अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 16-18
  • यूहन्ना 7:28-53 


शुक्रवार, 21 मई 2021

अनुपम

 

          मनुष्य विशेष नहीं हैं – कम से कम लंडन के चिड़ियाघर के अनुसार तो यही सत्य है! सन 2005 में उस चिड़ियाघर में चार दिन की एक विशेष प्रदर्शनी लगी, जिसका शीर्षक था: “मनुष्य अपने प्राकृतिक निवास में”; इस प्रदर्शनी के लिए “पकड़ का लाए गए” मनुष्य एक ऑनलाइन प्रतियोगिता के द्वारा चुने गए थे। दर्शकों को मनुष्यों के बारे में समझाने के लिए, चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने एक पट्टिका तैयार की, जिस पर उनके भोजन, निवास-स्थान, और उन पर बने हुए खतरों के बारे में लिखा हुआ था। चिड़ियाघर के प्रवक्ता के अनुसार, उस प्रदर्शनी का उद्देश्य यह दिखाना था कि मनुष्य कोई विशिष्ट अथवा अनुपम नहीं हैं। उस प्रदर्शनी में भाग लेने वाला एक व्यक्ति इस बात से सहमत प्रतीत हुआ; उसका मत था, “जब लोग यहाँ पर मनुष्यों को अन्य पशुओं के समान देखते हैं तो उन्हें एहसास होता है कि हम कुछ विशिष्ट नहीं हैं।”

          यह परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्यों के बारे में दिए गए परमेश्वर के दृष्टिकोण की तुलना में कितना भिन्न है। बाइबल बताती है कि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में और अद्भुत रीति से रचा है (भजन 139:14; उत्पत्ति 1:26-27)।

          दाऊद ने भजन 139 का आरम्भ अपने बारे में परमेश्वर के गहन ज्ञान (पद 1-6), तथा उसके सर्वज्ञानी होने के वर्णन (पद 7-12) के साथ किया। एक निपुण कारीगर के समान, परमेश्वर ने न केवल दाऊद के भीतरी और बाहरी अंगों तथा स्वरूप की रचना की (पद 13, 14), वरन उसे एक जीवित प्राणी भी बनाया, उसे एक आत्मिक जीवन भी दिया, और यह क्षमता भी दी कि वह परमेश्वर के साथ एक घनिष्ठ संबंध बना सके। परमेश्वर की इस अद्भुत कारीगरी और रचना पर मनन करते हुए दाऊद की प्रतिक्रिया अचरज, विस्मय, और स्तुति एवं प्रशंसा की थी (पद 14)।

          निःसंदेह, मनुष्य विशिष्ट है। परमेश्वर ने हमारी सृष्टि एक अद्भुत, अद्वितीय योग्यता के साथ की है जिससे कि हम उसके साथ एक घनिष्ठ संबंध रखें। दाऊद के समान हम प्रभु परमेश्वर की स्तुति और प्रशंसा कर सकते हैं क्योंकि हम उसके प्रेमी हाथों की अनुपम रचना हैं। - मार्विन विलियम्स

 

परमेश्वर ने मनुष्यों को अपने साथ संगति रखने के लिए बनाया है।


तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है। तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है; तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है। - भजन संहिता 8:4-6

बाइबल पाठ: भजन 139:1-14

भजन 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।

भजन 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।

भजन 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।

भजन 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।

भजन 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।

भजन 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।

भजन 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? या तेरे सामने से किधर भागूं?

भजन 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!

भजन 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,

भजन 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।

भजन 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्‍धेरा हो जाएगा,

भजन 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।

भजन 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।

भजन 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 13-15
  • यूहन्ना 7:1-27


शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

सृष्टि

 

          मैं नैशनल जियोग्राफिक का एक वीडियो देख रही था, जिस में कैलिफोर्निया के निकट के समुद्र तट में चार हज़ार फीट गहराई में एक बहुत ही कम देखी जाने वाली जेली फिश को पानी की गहरी धाराओं के प्रवाह के साथ ‘नाचते’ हुए दिखाया गया था; उसका शरीर, पानी के कालेपन की तुलना में, चमकीले नीले, बैंगनी, और गुलाबी रंगों की विभिन्न छायाओं से चमक रहा था; और घंटे समान उसके शरीर से निकलने वाले अनेकों लचीले और चमकीले टेंटेकल्स उसके शरीर के प्रत्येक सपंदन के साथ थिरक रहे थे। उस अद्भुत वीडियो को देखते समय मैं विचार कर रही थी कि परमेश्वर ने जेलेटिन के समान इस सुन्दर जन्तु की सृष्टि कितनी अद्भुत रीति से की है; और न केवल उसकी, वरन उन् 2000 से भी अधिक प्रजातियों की जेली फिश की भी जिन्हें अक्तूबर 2017 तक वैज्ञानिक पहचान चुके थे।

          यद्यपि हम परमेश्वर को सृष्टिकर्ता स्वीकार करते हैं, फिर भी क्या हम कभी कुछ धीमे होकर परमेश्वर के वचन बाइबल के पहले अध्याय में प्रकट किए गए विलक्षण सच्चाइयों पर विचार करते हैं? हमारे विस्मयकारी परमेश्वर ने इस विविध प्रकार की रचनाओं से भरे संसार में अपनी ज्योति और जीवन को डाला है। उसने, “इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया” (उत्पत्ति 1:21)। अभी तक वैज्ञानिक उसका और उन जीव-जंतुओं का, जो परमेश्वर ने बनाए हैं, केवल एक छोटा सा अंश ही जानने और समझने पाए हैं।

          न केवल जीव-जन्तु, वरन परमेश्वर ने प्रत्येक मनुष्य को भी एक अनुपम सृष्टि बनाया है, और सभी को अपने अपने अनुपम कार्य और जिम्मेदारियां सौंपी हैं (भजन 139:13–16)। परमेश्वर की विभिन्न रचनाओं का आनन्द लेते समय हम उसके प्रति अपनी कृतज्ञता और धन्यवाद भी अर्पित करें कि उसने हमें अपने स्वरूप में बनाया, हम में अपना श्वास फूंका, और हमें अपनी महिमा के लिए प्रयोग भी करता है। - सोहचील डिक्सन

 

प्रभु पिता, हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर, हमारी अद्भुत सृष्टि के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।


मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। - भजन 139:14

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-21

उत्पत्ति 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।

उत्पत्ति 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।

उत्पत्ति 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया।

उत्पत्ति 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया।

उत्पत्ति 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।

उत्पत्ति 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 1:11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्हीं में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्हीं में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 1:13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों।

उत्पत्ति 1:15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया।

उत्पत्ति 1:17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें,

उत्पत्ति 1:18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 1:19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।

उत्पत्ति 1:21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35

शनिवार, 27 मार्च 2021

कार्य

 

          मेरे पास मेरे पिता की सबसे अच्छी स्मृतियाँ उनके बाहर कुछ-न-कुछ काम करते रहने की हैं। वे या तो कहीं कोई ठोका-पीटी कर रहे होते थे, या बागबानी में लगे होते थी, या नीचे तहखाने में अपनी कार्यशाला में, जहाँ उनके अनेकों अद्भुत औज़ार और यंत्र रखे हुए थे, कुछ बना रहे होते थे।

          अपने पिता को स्मरण करने से मुझे मेरे स्वर्गीय पिता और सृष्टिकर्ता परमेश्वर का ध्यान आता है, जो, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, सदा ही कार्य करता रहता है। आरंभ में, परमेश्वर ने पृथ्वी की नींव रखी, उसके तथा सितारों और नक्षत्रों के आकार, चाल, घेरे और स्थान आदि को निर्धारित किया, और उसके कार्य को देखकर स्वर्गदूत आनन्द से गाने लगे (अय्यूब 38:4-7)। परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया वह कला का एक उत्कृष्ट नमूना था। उसने एक विस्मयकारी सुन्दर संसार बनाया और उसे “बहुत अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:31)।

          मैं और आप भी उसके इस अद्भुत, सुन्दर, बहुत अच्छे, संसार का एक भाग हैं। परमेश्वर ने हमें विस्मयकारी और अद्भुत रीति से अपने ही स्वरूप में रचा है (भजन 139:13-16), और अपने ही समान हमारे अन्दर भी कार्य करने की इच्छा डाली है जिससे कि हम उद्देश्यों को पूरा कर सकें। इन कार्यों तथा उद्देश्यों का एक भाग पृथ्वी और उसके जीव-जन्तुओं, वनस्पति आदि की देखभाल करना और उन पर प्रभुता रखना भी है (उत्पत्ति 1:26-28; 2:15)। हम चाहे जो भी कार्य करें – हमारे व्यवसाय में, या हमारे आराम के समय में -  परमेश्वर हमें सामर्थ्य तथा संसाधन देता है कि हम उसके लिए पूरा मन लगाकर कार्य करें।

          हम जो भी कार्य करें, उसे प्रसन्न करने और उसकी महिमा के लिए करें। - एलिसन कीड़ा

 

परमेश्वर ने जिस कार्य के लिए बुलाया है, उसके लिए तैयार भी किया है।


सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो। - 1 कुरिन्थियों 10:31

बाइबल पाठ: अय्यूब 38:1-11

अय्यूब 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,

अय्यूब 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?

अय्यूब 38:3 पुरुष के समान अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।

अय्यूब 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।

अय्यूब 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा?

अय्यूब 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई,  या किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया,

अय्यूब 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे?

अय्यूब 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया;

अय्यूब 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया,

अय्यूब 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़ लगा दिए, कि

अय्यूब 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30