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मंगलवार, 28 नवंबर 2017

आँकलन


   बहुत पहले, जब दर्पणों या प्रतिबिंबित करने वाली चिकनी सतहों का अविश्कार नहीं हुआ था, लोग अपने आप को बहुत कम देखने पाते थे। यदि कहीं जल एकत्रित हो और उसकी सतह पर हलचल न हो, तब ही लोग अपने प्रतिबिंब को देखने पाते थे। परन्तु दर्पणों के अविश्कार के बाद से यह सब बदल गया, और जब से कैमरे आए तो अपने आप को देखने का आकर्षण एक भिन्न ही स्तर तक पहुँच गया। अब हमारे पास हमारी तसवीरें हैं जो आजीवन हमारे साथ रह सकती हैं और हम कभी भी देख सकते हैं कि आयु के किस समय पर हम कैसे दिखते थे। यह पारिवारिक इतिहास का लेखा और व्यक्तिगत संकलन बनाने के लिए तो अच्छा है, परन्तु यह हमारे आत्मिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अपने आप को कैमरे से देखने के लिए बाहरी रूप से सजाते-संवारते रहने के कारण हम अपने भीतरी स्वरूप के आँकलन को नज़रंदाज़ कर सकते हैं।

   एक स्वास्थ आत्मिक जीवन के लिए आत्म-निरीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर चाहता है कि हम अपना आँकलन करते रहें जिससे हम जाने-अनजाने में किए गए किसी पाप के दुष्परिणामों से बचे रहें। यह इतना आवश्यक है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में पवित्र आत्मा ने लिखवाया है कि प्रभु-भोज में सम्मिलित होने से पहले यह करना अनिवार्य है (1 कुरिन्थियों 11:28)। इस आँकलन का उद्देश्य न केवल परमेश्वर के साथ अपने संबंध को ठीक करते रहना है, परन्तु यह भी सुनिश्चित करना है कि हम एक दूसरे के साथ ठीक संबंध में बने रहें। प्रभु भोज में भाग लेना प्रभु यीशु मसीह के बलिदान, उसकी तोड़ी गई देह और बहाए गए लहु को स्मरण करना है; यदि हम अपने सहविश्वासियों के साथ मेल-मिलाप का और सही जीवन नहीं जी रहे हैं तो बाइबल हमें प्रभु-भोज में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं देती है।

   अपने पाप, बुराईयों और कमियों को देखने और उनको मान लेने से, उनसे पश्चाताप कर लेने से अन्य मसीही विश्वासियों के साथ हमारी एक-मनता और परमेश्वर के साथ हमारा संबंध स्वस्थ बना रहता है। अपना आँकलन करने से कतराएं नहीं, वरन ऐसा करने को अपने जीवन का नियमित भाग बना लें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम परमेश्वर के वचन के दर्पण में अपने आप को देखते हैं,
 तब हम अपने को और स्पष्ट देखने पाते हैं।

अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो। - 2 कुरिन्थियों 13:5

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-34
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। 
1 Corinthians 11:33 इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। 
1 Corinthians 11:34 यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हार इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34
  • 1 पतरस 5


सोमवार, 27 नवंबर 2017

सहायता


   मेरे पति कार्य के सिलसिले में बाहर गए हुए थे, और एक होटल में ठहरे थे। उन्होंने आकर होटल में आराम करना आरंभ ही किया था, कि एक विचित्र से शोर से वे चौंक गए। उन्होंने बाहर गलियारे में निकल कर उस शोर के बारे में जानना चाहा तो पता चला कि साथ के एक कमरे से किसी के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी। उन्होंने होटल के कर्मचारी को कारण देखने के लिए बुलाया, और पाया कि एक व्यक्ति अपने कमरे के बाथरूम में फंस गया है; बाथरूम के दरवाज़े को बन्द करने वाली कुण्डी खराब हो गई थी और वह व्यक्ति दरवाज़ा खोलकर बाहर नहीं आ पा रहा था। अपने आप को अन्दर फंसा हुआ जानकर वह घबरा गया और सहायता के लिए ऊँची आवाज़ से पुकारने लगा।

   कभी कभी जीवन की परिस्थितियों में हम भी अपने आप को फंसा हुआ अनुभव करते हैं, और उन परिस्थितियों से बाहर निकलने का कोई मार्ग दिखाई न देने के कारण कहीं से कोई सहायता पाने के लिए गुहार लगाते हैं। अन्दर फंसे हुए उस व्यक्ति के समान, हमें भी बाहर से मिलने वाली सहायता की आवश्यकता होती है। परन्तु उस बाहर से आने वाली सहायता के लिए हमें यह स्वीकार करना होता है कि हम अपने आप में असहाय हैं। कई बार हम अपनी समस्याओं से निकलने के लिए अपने अन्दर ही समाधान ढूँढने लगते हैं। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि अनेकों बार हम स्वयं ही अपनी समस्याओं का कारण होते हैं क्योंकि हम अपने मन की इच्छा करना चाहते हैं, और हमारा "मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?" (यिर्मयाह 17:9) जो हमें बुराई और समस्याओं में धकेल देता है।

   परन्तु हमें धन्यवादी रहना चाहिए कि हमारा प्रभु परमेश्वर, "...हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है" (1 यूहन्ना 3:20)। इस कारण वह भली-भांति जानता है कि कब और कैसे हमारी सहायता करनी है। हमारे जीवन की प्रत्येक समस्या की स्थायी और कारगर सहायता परमेश्वर ही से आती है; वही हमारे धोखेबाज़ मन को परिवर्तित कर के स्वच्छ और पवित्र बना सकता है। प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखने और उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करने के उद्देश्य से ही हम वास्तव में मुक्त रहेंगे; हर बात, हर परिस्थिति के लिए उस से मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त करते रहेंगे। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर उनका सहायक बनता है जो यह मान लेते हैं कि वे असहाय हैं।

फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं? यिर्मयाह 23:24

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:7-14
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। 
Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? 
Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं। 
Jeremiah 17:11 जो अन्याय से धन बटोरता है वह उस तीतर के समान होता है जो दूसरी चिडिय़ा के दिए हुए अंडों को सेती है, उसकी आधी आयु में ही वह उस धन को छोड़ जाता है, और अन्त में वह मूढ़ ही ठहरता है। 
Jeremiah 17:12 हमारा पवित्र आराधनालय आदि से ऊंचे स्थान पर रखे हुए एक तेजोमय सिंहासन के समान है।
Jeremiah 17:13 हे यहोवा, हे इस्राएल के आधार, जितने तुझे छोड देते हैं वे सब लज्जित होंगे; जो तुझ से भटक जाते हैं उनके नाम भूमि ही पर लिखे जाएंगे, क्योंकि उन्होंने बहते जल के सोते यहोवा को त्याग दिया है। 
Jeremiah 17:14 हे यहोवा मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊंगा; मुझे बचा, तब मैं बच जाऊंगा; क्योंकि मैं तेरी ही स्तुति करता हूँ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1 पतरस 4


रविवार, 26 नवंबर 2017

धन्यवादी


   जब हमारे बच्चे छोटे ही थे, तो उन में से एक ने, रात्रि के खाने के समय जब उसे मटर की सबज़ी परोसी गई, दृढ़ आवाज़ में कहा "नहीं"। उसके यह कहने पर हमने उससे पूछा, "क्या नहीं?" हमारी अपेक्षा थी कि वह कहेगा, "नहीं चाहिए; धन्यवाद"; परन्तु उसने कहा, "नहीं मटर नहीं चाहिएं!" उसके इस प्रत्युत्तर से अच्छे आचरण पर एक चर्चा आरंभ हो गई। इसी प्रकार, अच्छे व्यवहार के विषय में अनेकों बार चर्चाएं हमारे परिवार में हो चुकी हैं।

   हमारा प्रभु परमेश्वर हमें स्मरण करवाता है कि अच्छे आचरण के अतिरिकत - जो कि बाह्य होता है, हमारे अन्दर एक धन्यवादी हृदय भी होना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्जनों बार स्मरण करवाया गया है कि परमेश्वर से हमारे संबंध में धन्यवादी होना हमारे लाभ के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। भजन 118 का आरंभ तथा अन्त इस आग्रह से होता है, "यहोवा का धन्यवाद करो" (पद 1, 29)। जब भी हम प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति में आएं, हम धन्यवादी हृदय के साथ आएं (भजन 100:4)। जो निवेदन हम उससे करें, उन्हें भी धन्यवाद के साथ प्रस्तुत करें (फिलिप्पियों 4:6)। यह धन्यवादी रवैया हमें प्रभु परमेश्वर से मिलती रहने वाली अनगिनित आशीषों को स्मरण करवाता रहेगा, उसमें हमारे विश्वास को सुदृढ़ बनाए रखेगा, और हमें स्मरण करवाता रहेगा कि हमारी समस्याओं और कष्टों के समय में भी परमेश्वर की उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहती है।

   इसीलिए भजनकार हम से कहता है, "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है" (भजन 118:1)। - जो स्टोवैल


केवल परमेश्वर के प्रति धन्यवादी हृदय से ही जीवन समृद्ध बनता है। - डीट्रीश बॉनहोफर

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6

बाइबल पाठ: भजन 118:1-14
Psalms 118:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 118:2 इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:3 हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:4 यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:5 मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। 
Psalms 118:6 यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 118:7 यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूंगा। 
Psalms 118:8 यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है। 
Psalms 118:9 यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है।
Psalms 118:10 सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:11 उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:12 उन्होंने मुझे मधुमक्खियों के समान घेर लिया है, परन्तु कांटों की आग के समान वे बुझ गए; यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:13 तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पडूं परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की। 
Psalms 118:14 परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1 पतरस 3


शनिवार, 25 नवंबर 2017

प्रावधान


   हमारे बेटे ने नर्सरी स्कूल जाना आरंभ ही किया था। पहले दिन वह बहुत रोया, और कहा, "मुझे स्कूल पसन्द नहीं है।" मेरे पति और मैंने उससे उसे समझाया, और आश्वस्त किया, कि हम चाहे शरीर में उसके निकट न भी हों, परन्तु हम उसके लिए प्रार्थना करते रहते हैं; और प्रभु यीशु तो सदा उसके साथ बने रहते हैं। उसने प्रश्न किया, "किंतु प्रभु यीशु मुझे दिखाई तो नहीं देते हैं?" मेरे पति ने उसे गले लगाते हुए कहा, "प्रभु तुम्हारे हृदय के अन्दर वास करते हैं; वे तुम्हें कभी नहीं छोड़ते हैं।" मेरे बेटे ने आशवस्त होकर अपने हृदय पर हाथ रखकर कहा, "हाँ, प्रभु यीशु मेरे अन्दर वास करते हैं।"

   केवल बच्चे ही अपनों से अलग होने पर चिंतित नहीं होते हैं, जीवन के हर चरण में हमें उनसे अलग होने की स्थितियों का सामना करते हैं जिनसे हम प्रेम करते हैं। यह भौगोलिक दूरियों के कारण हो सकता है या कभी मृत्यु के कारण। परन्तु हमें सदा स्मरण रखना चाहिए कि चाहे और कोई मनुष्य किसी भी कारणवश हमें छोड़ भी दे, तो भी हमारा प्रभु परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता है। उसने सदा हमारे साथ बने रहने का वायदा किया है। प्रभु ने हमारी सहायाता के लिए अपने पवित्र आत्मा को हमें सहायक और मार्गदर्शक के रूप में दिया है, और वह सदा हम में वास करता है (यूहन्ना 14:15-18)। हम उसकी प्रीय सन्तान हैं।

   हमारा बेटा भरोसा रखना सीख रहा है, और मैं भी। मेरे बेटे के समान ही मैं भी अपने अन्दर निवास करने वाले पवित्र-आत्मा को अपनी शारीरिक आँखों से देख नहीं पाती हूँ, परन्तु मैं अपने में और अपने लिए उसके कार्यों को अनुभव करती और देखती हूँ। वह प्रतिदिन मेरा मार्गदर्शन करता है, मुझे प्रोत्साहित करता है, परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने, समझने और जीवन में उपयोगी करने में मेरी सहायता करता है।

   हमें प्रभु परमेश्वर के इस अद्भुत प्रावधान, उसके पवित्र-आत्मा, के लिए सदा धन्यवादी रहना चाहिए, जिसके कारण हम मसीही विश्वासी कभी भी अकेले नहीं हो सकते हैं। - कीला ओकोआ


हम कभी अकेले नहीं हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-21
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26
  • 1 पतरस 2


शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

मीरास


   संभव है कि आपने उस छोटे लड़के का वीडियो देखा है जिसे पता चलता है कि उसे एक छोटी बहन मिलने वाली है, और वह निराश होकर कहता है, "बस सदा लड़कियाँ, लड़कियाँ, और लड़कियाँ ही होता है।" यह मानवीय अपेक्षाओं की एक दिलचस्प झलक तो है, परन्तु निराशा में कुछ भी हास्यसपद नहीं होता है। निराशा हमारे संसार में भरी पड़ी है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक घटनाक्रम है जिसमें निराशा भरी हुई है। याकूब ने अपने मामा और स्वामी की बेटी राहेल से विवाह करने हेतु, उसके लिए सात वर्ष तक कार्य करना स्वीकार कर लिया। परन्तु ऐसा करने के पश्चात, राहेल के पिता ने राहेल के स्थान पर उसकी बड़ी बहन लीआ: का धोखे से याकूब के साथ विवाह कर दिया, और याकूब को यह बात अगले दिन प्रातः पता चली। हम याकूब की निराशा की ओर तो ध्यान केंद्रित करते हैं, परन्तु ज़रा लीआ: के बारे में भी तो विचार करें - उसे कैसा लगा होगा! जब उसे उस व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किया गया जो न तो उसे साथ रखना चाहता था और न ही उससे प्रेम करता था, तो लीया की कितनी आशाएं और विवाहित जीवन से संबंधित उसके कितने सपने धाराशायी हो गए होंगे।

   बाइबल में भजन 37:4 में लिखा है, "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।" क्या हम यह मान कर चलें कि परमेश्वर का भय मानने वाले लोग कभी निराश नहीं होते हैं? ऐसा नहीं है; यह भजन स्पष्ट दिखाता है कि भजनकार ने अपने चारों ओर निराशाओं को देखा था। परन्तु उसने दीर्घकालीन दृष्टिकोण अपनाया, और आगे कहा, "यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख" (पद 7)। उसका निष्कर्ष था, "परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (पद 11)।

   याकूब की कहानी में हम देखते हैं कि अन्ततः याकूब ने लीआ: को अधिक आदर दिया, और उसे अब्राहम, सारा, इसहाक और रिबका के संग पारिवारिक कब्रगाह में दफनाया (उत्पत्ति 49:31)। हम यह भी देखते हैं कि आगे चलकर लीआ: - जिसे लगता था कि उससे कोई प्रेम नहीं करता है, उसी की सन्तानों के वंश में से परमेश्वर ने सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह को संसार में भेजा। प्रभु यीशु जो न्याय बहाल करता है, आशा को पुनःस्थापित करता है, और हमारे सोच से भी कहीं बढ़कर एक मीरास हमें देता है। - टिम गुस्टाफसन


प्रभु यीशु ही एकमात्र ऐसा मित्र है जो कभी निराश नहीं करता है।

यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा। - भजन 37:34

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 29:13-30
Genesis 29:13 अपने भानजे याकूब का समाचार पाते ही लाबान उस से भेंट करने को दौड़ा, और उसको गले लगाकर चूमा, फिर अपने घर ले आया। और याकूब ने लाबान से अपना सब वृत्तान्त वर्णन किया। 
Genesis 29:14 तब लाबान ने याकूब से कहा, तू तो सचमुच मेरी हड्डी और मांस है। सो याकूब एक महीना भर उसके साथ रहा। 
Genesis 29:15 तब लाबान ने याकूब से कहा, भाईबन्धु होने के कारण तुझ से सेंतमेंत सेवा कराना मुझे उचित नहीं है, सो कह मैं तुझे सेवा के बदले क्या दूं? 
Genesis 29:16 लाबान के दो बेटियां थी, जिन में से बड़ी का नाम लिआ: और छोटी का राहेल था। 
Genesis 29:17 लिआ: के तो धुन्धली आंखे थी, पर राहेल रूपवती और सुन्दर थी। 
Genesis 29:18 सो याकूब ने, जो राहेल से प्रीति रखता था, कहा, मैं तेरी छोटी बेटी राहेल के लिये सात बरस तेरी सेवा करूंगा। 
Genesis 29:19 लाबान ने कहा, उसे पराए पुरूष को देने से तुझ को देना उत्तम होगा; सो मेरे पास रह। 
Genesis 29:20 सो याकूब ने राहेल के लिये सात बरस सेवा की; और वे उसको राहेल की प्रीति के कारण थोड़े ही दिनों के बराबर जान पड़े। 
Genesis 29:21 तब याकूब ने लाबान से कहा, मेरी पत्नी मुझे दे, और मैं उसके पास जाऊंगा, क्योंकि मेरा समय पूरा हो गया है। 
Genesis 29:22 सो लाबान ने उस स्थान के सब मनुष्यों को बुला कर इकट्ठा किया, और उनकी जेवनार की। 
Genesis 29:23 सांझ के समय वह अपनी बेटी लिआ: को याकूब के पास ले गया, और वह उसके पास गया। 
Genesis 29:24 और लाबान ने अपनी बेटी लिआ: को उसकी दासी होने के लिये अपनी दासी जिल्पा दी। 
Genesis 29:25 भोर को मालूम हुआ कि यह तो लिआः है, सो उसने लाबान से कहा यह तू ने मुझ से क्या किया है? मैं ने तेरे साथ रहकर जो तेरी सेवा की, सो क्या राहेल के लिये नहीं की? फिर तू ने मुझ से क्यों ऐसा छल किया है? 
Genesis 29:26 लाबान ने कहा, हमारे यहां ऐसी रीति नहीं, कि जेठी से पहिले दूसरी का विवाह कर दें। 
Genesis 29:27 इसका सप्ताह तो पूरा कर; फिर दूसरी भी तुझे उस सेवा के लिये मिलेगी जो तू मेरे साथ रह कर और सात वर्ष तक करेगा। 
Genesis 29:28 सो याकूब ने ऐसा ही किया, और लिआ: के सप्ताह को पूरा किया; तब लाबान ने उसे अपनी बेटी राहेल को भी दिया, कि वह उसकी पत्नी हो। 
Genesis 29:29 और लाबान ने अपनी बेटी राहेल की दासी होने के लिये अपनी दासी बिल्हा को दिया। 
Genesis 29:30 तब याकूब राहेल के पास भी गया, और उसकी प्रीति लिआ: से अधिक उसी पर हुई, और उसने लाबान के साथ रहकर सात वर्ष और उसकी सेवा की।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 22-23
  • 1 पतरस 1


गुरुवार, 23 नवंबर 2017

खामोशी


   मेरे एक मित्र ने कहा, छिछले नदी-नाले सबसे अधिक शोर करते हैं, जो कि एक सुप्रसिद्ध कहावत, "गहरे जल निश्चल होते हैं" का विलोम था। उसके कहने का तात्पर्य था कि जो लोग सबसे अधिक शोर करने वाले होते हैं उनके पास कहने के लिए कुछ खास नहीं होता है। इस समस्या का एक पहलु और भी है, कि बहुत बोलने वाले ठीक से सुनते भी नहीं हैं। मुझे साईमन और गारफ़न्कल के एक गीत, Sounds of Silence में कही गई बात स्मरण आती है, लोग बिना ध्यान दिए सुनते हैं। वे कहे जा रहे शब्दों को कानों से तो सुनते हैं, परन्तु अपने विचारों को शान्त कर के वास्तव में ध्यान से मन से नहीं सुनते हैं। हमारे लिए भला होगा यदि हम हम शान्त हो कर ध्यान से मन से सुनना आरंभ कर दें।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि "...चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोपदेशक 3:7)। अच्छी खामोशी, सुनने वाली खामोशी, नम्रता की खामोशी होती है। ऐसी खामोशी से सही सुना जाता है, बात को सही समझा जाता है, और फिर सही बात कही जाती है। नीतिवचन का लेखक लिखता है, "मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तौभी समझ वाला मनुष्य उसको निकाल लेता है" (नीतिवचन 20:5)। बात की तह तक पहुँचने के लिए बहुत ध्यान से शान्त होकर सुनना अनिवार्य होता है।

   जब हम औरों की सुनते हैं, तो साथ ही हमें परमेश्वर की भी सुनने और जो वह कहता है उस पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है। मैं उस घटना के बारे में सोचता हूँ जब फरिसी व्यभिचार में पकड़ी गई एक स्त्री को प्रभु के पास ले कर आए और उस स्त्री के विरुद्ध आरोपों तथा निन्दा की झड़ी लगाए हुए बोले जा रहे थे; परन्तु प्रभु खामोश होकर अपनी ऊँगली से मिट्टी पर कुछ लिख रहा था (देखिए यूहन्ना 8:1-11)। प्रभु क्या कर रहा था? मेरा सुझाव है कि वह परमेश्वर पिता की आवाज़ को सुन रहा होगा कि इस क्रुद्ध भीड़ को क्या उत्तर दिया जाए, और इस प्रिय स्त्री से क्या कहा जाए? प्रभु का अपनी खामोशी द्वारा दिया गया उत्तर आज भी संसार भर में गूँज रहा है, लोगों से बातें कर रहा है। - डेविड रोपर


समयानुसार खामोशी बहुत शब्दों से अधिक अर्थपूर्ण हो सकती है।

जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। - नीतिवचन 10:19

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना, मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। 
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है। 
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना। 
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है। 
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे? 
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


बुधवार, 22 नवंबर 2017

मुख्य बात


   हमारे शहर में एक उत्सव के दौरान की जा रही आतिशबाज़ी को देखते समय मेरा ध्यान बार-बार बंट रहा था। मुख्य समारोह के दोनों ओर, बीच-बीच में छोटी आतिश्बाज़ी होने लगती थी, जिससे मेरा ध्यान मुख्य आतिश्बाज़ी से बंट जाता था। वे छोटी वाली आतिशबाज़ियाँ अच्छी तो थीं, परन्तु उन्हें देखने के कारण मैं हमारे ऊपर हो रही मुख्य आतिशबाज़ी के कुछ अंश देखने से रह जाती थी।

   कई बार अच्छी बातें हमें और बेहतर बातों से अलग कर देती हैं। यही मार्था के साथ भी हुआ, जिसके बारे में परमेश्वर के वचन बाइबल के ने नियम में लूका 10:38-42 में दिया गया है। जब प्रभु यीशु और उनके चेले बैतनियाह गाँव में पहुँचे, तो मार्था ने अपने घर में उनका स्वागत किया। अच्छी मेज़बान होने के नाते वह अपने मेहमानों के लिए भोजन बनाने में लग गई, इसलिए हमें मार्था के प्रति सख्त रवैया नहीं रखना चाहिए।

   जब मार्था ने प्रभु यीशु से शिकायत की, कि उसकी बहन मरियम उनकी देखभाल कार्यों को करने में उसका हाथ नहीं बंटा रही है, तो प्रभु यीशु ने मरियम के चुनाव - प्रभु के चरणों पर बैठ कर उसके वचन को सुनने का समर्थन किया। परन्तु इससे प्रभु का यह तात्पर्य नहीं था कि मरियम अपनी बहन मार्था से अधिक आत्मिक या धर्मी है। एक अन्य अवसर पर प्रतीत होता है कि मार्था ने मरियम की अपेक्षा प्रभु पर अधिक भरोसा रखा था (यूहन्ना 11:19-20)। न ही प्रभु मार्था के उनके शारीरिक आवश्यकताओं के प्रति चिंतित होने की आलोचना कर रहा था। वरन जो बात प्रभु मार्था पर प्रगट करना चाहता था वह थी कि जीवन की व्यस्तता में भी मुख्य बात प्रभु के साथ समय बिताना, उसके साथ बैठना ही है। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु को हमारी संगति की लालसा रहती है।

एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं। - भजन 27:4 

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4