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बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

प्रोत्साहन

 

          हमारे घर के निकट एक फिटनेस सेंटर है जहाँ लोग अपने शारीरिक स्वास्थ्य और सामर्थ्य को बेहतर करने के लिए आते हैं। जब भी मैं उस सेंटर में जाता हूँ, मैं प्रोत्साहित होता हूँ। वहाँ लगे हुए पोस्टर हमें स्मरण दिलाते हैं कि हम एक-दूसरे को जाँचें नहीं, परन्तु ऐसे शब्द और कार्य करें जिससे एक दूसरे को बेहतर होने में सहायता और प्रोत्साहन मिले।

            आत्मिक जीवन में जैसा व्यवहार होना चाहिए, यह उस बात की कितनी अच्छी तस्वीर है। कभी-कभी हम जो आत्मिक जीवन में सुधरने या बढ़ने के प्रयास कर रहे हैं, हमें ऐसा लग सकता है कि हम किसी अन्य व्यक्ति के समान आत्मिक रीति से उन्नत अथवा मसीह यीशु के साथ चलने में उसके समान योग्य नहीं हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने हमें यह साफ़ और सीधा सुझाव दिया है “एक दूसरे को शान्ति दो और एक दूसरे की उन्नति का कारण बनो” (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)। साथ ही उसने रोम के मसीही विश्वासियों को यह भी लिखा, “हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिये प्रसन्न करे कि उसकी उन्नति हो” (रोमियों 15:2)। यह ध्यान रखते हुए कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे प्रति इतना प्रेमी तथा अनुग्रहकारी है, हम भी औरों को परमेश्वर का अनुग्रह दिखाएँ और प्रोत्साहन करने वाले कार्यों तथा बातों से उन्हें उभारें।

          जब हम “एक दूसरे को ग्रहण” (पद 7) करते हैं, तो साथ ही हम अपनी आत्मिक परिपक्वता के लिए, जो पवित्र आत्मा का कार्य है, परमेश्वर पर भरोसा भी बनाए रखें और उसके आज्ञाकारी बने रहें। परमेश्वर की आज्ञाकारिता में प्रति दिन चलते हुए हम अपने मसीही भाई-बहनों के मसीही विश्वास में बढ़ते जाने के लिए प्रोत्साहन का वातावरण बनाए रखें। - डेव ब्रैनन

 

प्रोत्साहन का एक शब्द, सफलता के लिए आगे बढ़ते रहने, 

या हार कर छोड़ देने का फर्क उत्पन्न कर सकता है।


अतः आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएँ, पर तुम यह ठान लो कि कोई अपने भाई के सामने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। - रोमियों 14:13

बाइबल पाठ: रोमियों 15:1-7

रोमियों 15:1 अतः हम बलवानों को चाहिए कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें, न कि अपने आप को प्रसन्न करें।

रोमियों 15:2 हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिये प्रसन्न करे कि उसकी उन्नति हो।

रोमियों 15:3 क्योंकि मसीह ने अपने आप को प्रसन्न नहीं किया, पर जैसा लिखा है : “तेरे निन्दकों की निन्दा मुझ पर आ पड़ी।” 

रोमियों 15:4 जितनी बातें पहले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा आशा रखें।

रोमियों 15:5 धीरज और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो।

रोमियों 15:6 ताकि तुम एक मन और एक स्वर में हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की स्तुति करो। 

रोमियों 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 21-22
  • मत्ती 28

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

देह



     जब हमारे साथ के एक कार्यकर्ता ने अत्याधिक पीड़ा के कारण दफ्तर से छुट्टी ली तो हम सभी उस के लिए चिंतित हुए। उसे कुछ समय अस्पताल में बिताना पड़ा और बाद में कार्य से कुछ अवकाश भी लेना पड़ा। काम पर वापस लौटने के पश्चात उसने अपनी उस पीड़ा के कारण को हमें दिखाया – गुर्दे की एक पत्थरी। उसने अपने डॉक्टर से कहा था कि उस पत्थरी को उसे दे, जिससे वह एक स्मृति के सामान उसे रख ले। उस पत्थरी को देख कर मुझे भी कुछ वर्षों पहले पित्त की थैली की पत्थरी के कारण उठी अपनी पीड़ा की याद आई।

     यह रोचक है कि इतनी छोटी से चीज़ सारी देह को इतनी पीड़ा दे सकती है, कार्य करने से रोक सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी प्रेरित पौलुस इसी बात को कोरिन्थ की मसीही मंडली को लिखी अपनी पत्री में समझाता है। 1 कुरिन्थियों 12 अध्याय, इसी विषय पर है, और इसमें मानव देह को रूपक के समान लेकर पौलुस समझा रहा है कि यदि एक अंग दुखी होता है तो पूरी देह प्रभावित होती है। पौलुस, पवित्र आत्मा की अगुवाई में, सारे संसार के मसीही विश्वासियों को परमेश्वर द्वारा एक साथ गठी गई एक देह के समान देखता है। इस एक देह में हम सब के पास भिन्न योग्यताएँ और भूमिकाएँ हैं, किन्तु क्योंकि हम सभी एक ही देह के भाग हैं, इसलिए एक व्यक्ति का दुःख अन्य सभी को प्रभावित करता है। जब हमारा कोई साथी मसीही सताव, दुःख, या परीक्षाओं का सामना करता है तो उसकी पीड़ा हम सभी को कष्ट देती है।

     मेरे उस सहकर्मी के गुर्दे के दर्द ने उसकी सम्पूर्ण देह को अनुभव हो रही पीड़ा के समाधान को ढूँढने के लिए बाध्य किया। मसीह की देह में, किसी अन्य जन की पीड़ा हमारी करुणा को जागृत कर के हमें प्रोत्साहित करती है कि हम उसके लिए कुछ करें। हम प्रार्थना कर सकते हैं, प्रोत्साहन के शब्द कह सकते हैं, या किसी अन्य प्रकार की सहायता को, जिसकी उसे आवश्यकता है, उसे प्रदान कर सकते हैं, जिससे वह आराम पाए। सारी देह मिलकर ही कार्य करती है, कि सभी अंग स्वस्थ बने रहें। - लिंडा वॉशिंगटन

हम सभी प्रभु के कार्य में एक साथ हैं।

और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। - इफिसियों 2:15-16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:14-26
1 कुरिन्थियों 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं।
1 कुरिन्थियों 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?
1 कुरिन्थियों 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?
1 कुरिन्थियों 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता?
1 कुरिन्थियों 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है।
1 कुरिन्थियों 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती?
1 कुरिन्थियों 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है।
1 कुरिन्थियों 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं।
1 कुरिन्थियों 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं।
1 कुरिन्थियों 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं।
1 कुरिन्थियों 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो।
1 कुरिन्थियों 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें।
1 कुरिन्थियों 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमुएल 22-24
  • लूका 12:1-31



मंगलवार, 28 नवंबर 2017

आँकलन


   बहुत पहले, जब दर्पणों या प्रतिबिंबित करने वाली चिकनी सतहों का अविश्कार नहीं हुआ था, लोग अपने आप को बहुत कम देखने पाते थे। यदि कहीं जल एकत्रित हो और उसकी सतह पर हलचल न हो, तब ही लोग अपने प्रतिबिंब को देखने पाते थे। परन्तु दर्पणों के अविश्कार के बाद से यह सब बदल गया, और जब से कैमरे आए तो अपने आप को देखने का आकर्षण एक भिन्न ही स्तर तक पहुँच गया। अब हमारे पास हमारी तसवीरें हैं जो आजीवन हमारे साथ रह सकती हैं और हम कभी भी देख सकते हैं कि आयु के किस समय पर हम कैसे दिखते थे। यह पारिवारिक इतिहास का लेखा और व्यक्तिगत संकलन बनाने के लिए तो अच्छा है, परन्तु यह हमारे आत्मिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अपने आप को कैमरे से देखने के लिए बाहरी रूप से सजाते-संवारते रहने के कारण हम अपने भीतरी स्वरूप के आँकलन को नज़रंदाज़ कर सकते हैं।

   एक स्वास्थ आत्मिक जीवन के लिए आत्म-निरीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर चाहता है कि हम अपना आँकलन करते रहें जिससे हम जाने-अनजाने में किए गए किसी पाप के दुष्परिणामों से बचे रहें। यह इतना आवश्यक है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में पवित्र आत्मा ने लिखवाया है कि प्रभु-भोज में सम्मिलित होने से पहले यह करना अनिवार्य है (1 कुरिन्थियों 11:28)। इस आँकलन का उद्देश्य न केवल परमेश्वर के साथ अपने संबंध को ठीक करते रहना है, परन्तु यह भी सुनिश्चित करना है कि हम एक दूसरे के साथ ठीक संबंध में बने रहें। प्रभु भोज में भाग लेना प्रभु यीशु मसीह के बलिदान, उसकी तोड़ी गई देह और बहाए गए लहु को स्मरण करना है; यदि हम अपने सहविश्वासियों के साथ मेल-मिलाप का और सही जीवन नहीं जी रहे हैं तो बाइबल हमें प्रभु-भोज में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं देती है।

   अपने पाप, बुराईयों और कमियों को देखने और उनको मान लेने से, उनसे पश्चाताप कर लेने से अन्य मसीही विश्वासियों के साथ हमारी एक-मनता और परमेश्वर के साथ हमारा संबंध स्वस्थ बना रहता है। अपना आँकलन करने से कतराएं नहीं, वरन ऐसा करने को अपने जीवन का नियमित भाग बना लें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम परमेश्वर के वचन के दर्पण में अपने आप को देखते हैं,
 तब हम अपने को और स्पष्ट देखने पाते हैं।

अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो। - 2 कुरिन्थियों 13:5

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-34
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। 
1 Corinthians 11:33 इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। 
1 Corinthians 11:34 यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हार इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34
  • 1 पतरस 5