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रविवार, 7 मार्च 2021

शोर

 

          कुछ वर्ष पहले, एक कॉलेज की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों को निमंत्रण दिया कि वे उनके साथ एक शाम शांत होकर समय बिताएँ। यद्यपि विद्यार्थी मान तो गए, किन्तु उन्होंने बड़े संकोच के साथ अपने मोबाइल फोन बन्द किए, उन्हें एक ओर रखा, और प्रार्थना-घर में आकर बैठे। अगले एक घंटे तक वे प्रार्थना और आराधना तथा स्तुति के संगीत में समय बिताते रहे। इसके बाद वहाँ सम्मिलित लोगों में से एक ने कहा कि उसका यह समय शांत हो जाने और जीवन में से शोर को हटा देने का एक अद्भुत अवसर और अनुभव था।

          कभी-कभी अनचाहे शोर से बच पाना बहुत कठिन होता है। हमारे अन्दर और बाहर के संसारों का कोलाहल हमें बहरा कर देने वाला हो सकता है। परन्तु हम जब शांत होने के लिए तैयार होते हैं, हम परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार के द्वारा परमेश्वर को जानने के लिए शान्त हो जाने की आवश्यकता (भजन 46:10) के लिखे जाने को समझने लगते हैं। हम 1 राजाओं 19 में देखते हैं कि जब एलिय्याह भविष्यद्वक्ता प्रभु परमेश्वर की खोज में था, तो उसे प्रभु आँधी, भूकंप, या आग के दिल दहला देने वाले शोर में नहीं मिला (पद 9-13)। वरन एलिय्याह ने परमेश्वर की कोमल आवाज़ को फुसफुसाहट के समान शांत वातावरण में पाया (पद 12)।

          किसी भी समारोह में, परिवार जनों के साथ एकत्रित होने में, अतिरिक्त शोर का होना निश्चित होता है। वह समय उत्तेजना के साथ वार्तालाप, ठहाकों, आवश्यकता से अधिक भोजन, और प्रेम की मनोहर अभिव्यक्तियों का समय होता है। परन्तु जब हम अपने मनों को शांत कर के परमेश्वर के साथ बैठते हैं, तो वह शान्ति का समय इन सभी बातों से कहीं अधिक मनोहर और लाभदायक होता है।  एलिय्याह के समान ही, हमें भी परमेश्वर किसी भी प्रकार के शोर में नहीं, वरन शान्ति के वातावरण में मिलेगा। और यदि हम अपने जीवन के शोर को एक ओर करके, उसकी आवाज़ को सुनना चाहें, तो परमेश्वर हमसे भी उस शान्ति में फुसफुसा कर बातें करेगा। - सिंडी हैस कैस्पर

 

परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए शांत हो जाना अनिवार्य है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन संहिता 46:10

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 19:9-13

1 राजा 19:9 वहां वह एक गुफा में जा कर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?

1 राजा 19:10 उस ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।

1 राजा 19:11 उसने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से हो कर चला, और यहोवा के सामने एक बड़ी प्रचण्ड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हुआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था।

1 राजा 19:12 फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाई दिया।

1 राजा 19:13 यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जा कर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाई दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52

शनिवार, 6 मार्च 2021

बाँटना

 

          वर्ष 1995 में, अमेरिका के स्टॉक मार्किट में निवेश करने वालों को सबसे अधिक लाभ, औसतन 37.6 प्रतिशत, प्राप्त हुआ। फिर  वर्ष 2008 में निवेशकों को लगभग उतने ही की हानि हुई, 37.0 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इन दोनों वर्षों के मध्य की अवधि में निवेशकों को लाभांश में बहुत उतर-चढ़ाव देखने पड़े, और उन्हें चिंता लगी रही कि उनके लगाए हुए धन का क्या होगा?

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आश्वस्त किया, कि उनके द्वारा प्रभु में अपने जीवन निवेश करने से उन्हें अद्भुत लाभ मिलेंगे। उन्होंने प्रभु के पीछे हो लेने के लिए अपने घर, परिवार, नौकरियाँ, ओहदे, आदि सब कुछ छोड़ दिया था, अपना सब कुछ प्रभु यीशु के शिष्य होने में लगा दिया था। किन्तु जब उन्होंने एक धनी युवक को प्रभु के पीछे हो लेने के लिए अपने सांसारिक धन के छोड़ने की आवश्यकता के साथ संघर्ष करते देखा, तो प्रभु के शिष्यों के मन में प्रश्न उठे कि उन का क्या होगा; क्या उन्होंने सही निर्णय लिया था? प्रभु यीशु ने उन्हें उनके लाभांश के विषय आश्वस्त किया कि “और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन” (मरकुस 10:30)। यह संसार के किसी भी स्टॉक मार्किट से मिलने वाले लाभांश से कहीं अधिक बेहतर लाभ है।

          हमें परमेश्वर के राज्य में किए गए हमारे आत्मिक निवेश पर मिलने वाले “ब्याज की दर” की कभी चिंता नहीं करनी चाहिए; उसके समान कोई अन्य लाभांश है ही नहीं, और वह भी पूर्णतः सुरक्षित और निश्चित। पैसे के साथ तो उद्देश्य हमारे द्वारा लगाए गए पैसे से और पैसा कमाना होता है, जो अन्ततः नश्वर है। लेकिन परमेश्वर में किए गए निवेश के लाभांश को सांसारिक धन से नहीं नापा जा सकता है; उसे तो उस अविनाशी आनन्द और आशीष से देखा जा सकता है जो प्रभु परमेश्वर को जानने, उसकी निकटता में बढ़ते जाने से मिलती है, और अनन्तकाल तक मिलती रहेगी। सबसे अद्भुत बात, हम अपने इस निवेश को जितना अधिक औरों के साथ बाँटते हैं, यह उतना ही अधिक बढ़ता भी जाता है, उतना ही अधिक लाभ भी लाता जाता है। इसलिए उसे बढ़ाते जाने के लिए, प्रभु में अपने निवेश को औरों के साथ बाँटें। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

प्रभु परमेश्वर के लिए जीना, जीवन का एक उत्तम निवेश है।


और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा। - 1 यूहन्ना 2:17

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-31

मरकुस 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरु, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं?

मरकुस 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर।

मरकुस 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।

मरकुस 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरु, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं।

मरकुस 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।

मरकुस 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।

मरकुस 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!

मरकुस 10:24 चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालकों, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!

मरकुस 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है!

मरकुस 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है?

मरकुस 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

मरकुस 10:28 पतरस उस से कहने लगा, कि देख, हम तो सब कुछ छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं।

मरकुस 10:29 यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो।

मरकुस 10:30 और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन।

मरकुस 10:31 पर बहुतेरे जो पहिले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, वे पहिले होंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31

शुक्रवार, 5 मार्च 2021

भूमिका

 

          मेरे एक मित्र ने अपने फेसबुक पर पृष्ठ पर, उसे सौंपे गए एक कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लेने के बारे में लिखा। औरों ने उसे इस बात के लिए बधाइयां दीं, लेकिन उसकी इस सफलता से मेरे दिल पर छुरियाँ चल गईं। वह कार्य मुझे मिलना चाहिए था, उस पर मेरा अधिकार था; लेकिन मेरी अनदेखी करते हुए, वह कार्य मेरे उस मित्र को दे दिया गया, और मुझे पता भी नहीं है कि मेरे साथ ऐसा क्यों किया गया।

          बेचारा यूसुफ! परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने उसे नहीं चुना, और वह जानता था कि क्यों। प्रभु यीशु मसीह के मृतकों में से पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद, उसके शिष्यों ने प्रभु को धोखे से पकड़वाने वाले यहूदा इस्करियोती के स्थान पर किसी और को नियुक्त करना चाहा। चेलों ने इसके विषय प्रार्थना की, परमेश्वर से उसकी इच्छा पूछी, और उनके सामने दो नाम, यूसुफ और मत्तियाह आए, और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किसे चुनना है। उन्होंने परमेश्वर से प्रार्थना में इसके बारे में पूछा और दोनों के नाम पर चिट्ठी डाली, जिससे फिर मत्तियाह का नाम सामने आया; यूसुफ को वह स्थान नहीं मिला।

          मैं सोचता हूँ, जब शिष्य मत्तियाह को बधाई दे रहे होंगे, तब यूसुफ की क्या प्रतिक्रिया रही होगी? उसने इस चुने न जाने को कैसे लिया होगा? क्या उसने अपने आप को ठुकराया हुआ अनुभव किया होगा? क्या वह अपने आप पर तरस खाकर, अपने को औरों से अलग करके कहीं एक ओर जाकर पड़ गया होगा? या, क्या उसने परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए, उसके इस निर्णय को सहर्ष लिया होगा, और दूसरों के साथ मिलकर शिष्यों में अपनी सहायक भूमिका का निर्वाह करता रहा होगा?

          यदि मैं यूसुफ के स्थान पर होता तो मैं यह जानता हूँ कि मेरे लिए कौन सा विकल्प सर्वोत्तम होता, और मैं कौन सा विकल्प लेता। मैं तो कहता ‘ठीक है; मुझे शर्मिंदा किया गया है। यदि तुम्हें मेरे महत्व का एहसास नहीं है, तो न सही! अब देखते हैं कि अब से तुम्हारे साथ मेरे न रहने के बाद तुम लोग कार्य कैसे करने पाते हो?’ यह भावना रखना स्वयं को अच्छा तो लग सकता है, परन्तु केवल इसलिए क्योंकि यह स्वार्थी भावना है।

          पवित्र शास्त्र में यूसुफ का फिर कहीं कोई उल्लेख नहीं आया है, इसलिए हमें नहीं पता है कि उसकी वास्तविक प्रतिक्रिया क्या थी। लेकिन हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यदि किसी बात के लिए हमारी अनदेखी की जाती है, तब हम क्या प्रतिक्रिया देते हैं? हम कभी इस बात को न भूलें के सबसे अधिक महत्व प्रभु यीशु के राज्य और कार्य का है, न कि हमारी व्यक्तिगत सफलता अथवा प्रशंसा का। इसलिए वह हमें जो भी भूमिका निभाने के लिए देता है, हम सहर्ष उसे स्वीकार करें और पूरी लगन तथा आनन्द के साथ उस भूमिका को निभाएं। हमारे प्रतिफल उसके हाथों में हैं। - माइक व्हिटमर

 

हे प्रभु परमेश्वर, चाहे कोई भी भूमिका हो, मैं सदा आपके लिए कार्य कर सकूँ।


देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है। - प्रकाशितवाक्य 22:12

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:15-26

प्रेरितों 1:15 और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा हो कर कहने लगा।

प्रेरितों 1:16 हे भाइयों, अवश्य था कि पवित्र शास्त्र का वह लेख पूरा हो, जो पवित्र आत्मा ने दाऊद के मुख से यहूदा के विषय में जो यीशु के पकड़ने वालों का अगुवा था, पहिले से कही थीं।

प्रेरितों 1:17 क्योंकि वह तो हम में गिना गया, और इस सेवकाई में सहभागी हुआ।

प्रेरितों 1:18 (उसने अधर्म की कमाई से एक खेत मोल लिया; और सिर के बल गिरा, और उसका पेट फट गया, और उस की सब अन्‍तडिय़ां निकल पड़ी।

प्रेरितों 1:19 और इस बात को यरूशलेम के सब रहने वाले जान गए, यहां तक कि उस खेत का नाम उन की भाषा में हकलदमा अर्थात लहू का खेत पड़ गया।)

प्रेरितों 1:20 क्योंकि भजन संहिता में लिखा है, कि उसका घर उजड़ जाए, और उस में कोई न बसे और उसका पद कोई दूसरा ले ले।

प्रेरितों 1:21 इसलिये जितने दिन तक प्रभु यीशु हमारे साथ आता जाता रहा, अर्थात यूहन्ना के बपतिस्मा से ले कर उसके हमारे पास से उठाए जाने तक, जो लोग बराबर हमारे साथ रहे।

प्रेरितों 1:22 उचित है कि उन में से एक व्यक्ति हमारे साथ उसके जी उठने का गवाह हो जाए।

प्रेरितों 1:23 तब उन्होंने दो को खड़ा किया, एक यूसुफ को, जो बर-सबा कहलाता है, जिस का उपनाम यूसतुस है, दूसरा मत्तिय्याह को।

प्रेरितों 1:24 और यह कहकर प्रार्थना की; कि हे प्रभु, तू जो सब के मन जानता है, यह प्रगट कर कि इन दोनों में से तू ने किस को चुना है।

प्रेरितों 1:25 कि वह इस सेवकाई और प्रेरिताई का पद ले जिसे यहूदा छोड़ कर अपने स्थान को गया।

प्रेरितों 1:26 तब उन्होंने उन के बारे में चिट्ठियां डालीं, और चिट्ठी मत्तिय्याह के नाम पर निकली, सो वह उन ग्यारह प्रेरितों के साथ गिना गया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50

गुरुवार, 4 मार्च 2021

साथ


          उसका सारा ध्यान उस सबसे ऊपर वाली शेल्फ पर केन्द्रित था, जहाँ पर स्पैघेटी के साथ खाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की चटनी की बोतलें रखी हुई थीं। मैं भी दुकान में परचून के समान वाले भाग में उसी के पास खड़ा हुआ था, और मैं भी उसी शेल्फ पर लगी बोतलों को देख रहा था, अपने लिए खरीदने के लिए चुनाव करने का प्रयास कर रहा था, किन्तु उसे मेरी उपस्थिति का ज़रा सा भी आभास नहीं था; वह तो बस अपनी ही आवश्यकता में खोई हुई थी। अब, मैं कद में काफी लंबा हूँ, इसलिए दुकानों की सबसे ऊपर की शेल्फ पर रखे सामान तक पहुँचने में मुझे कोई समस्या नहीं होती है, लेकिन वह छोटे ही कद की थी, उसके लिए वह ऊपर की शेल्फ तक पहुँचना समस्या थी। इसलिए मैंने उसे सहायता देने का प्रस्ताव दिया, और मेरी आवाज़ सुन कर वह चौंक गई, और बोली, “अरे! मैंने तो आपको यहाँ खड़े हुए भी नहीं देखा। हाँ, कृपया मेरी सहायता कीजिए।”

          परमेश्वर के वचन बाइबल में शिष्यों के सामने भी के बड़ी समस्या थी – भूखे लोगों की एक बड़ी भीड़, आबादी से दूर स्थित क्षेत्र, और ढलता हुआ दिन। उन्होंने प्रभु यीशु से कहा – “देख देर होती जा रही है; इस भीड़ को विदा कर, जिससे के वे समय रहते गाँवों तक पहुँच सकें और अपने लिए भोजन खरीद सकें” (मत्ती 14:15)। जब प्रभु ने उन शिष्यों से कहा कि भीड़ को भेजने की बजाए, वे ही उस भीड़ के लिए रोटी का इंतज़ाम करें, तो उनका प्रत्युत्तर था, “हमारे पास तो ...” (पद 17)। उन्हें केवल अपनी घटी का ही ध्यान था; जबकि उनके साथ प्रभु यीशु खड़ा था, जो न केवल रोटी का स्त्रोत था, वरन स्वयं जीवन की रोटी भी था।

          हम भी अपनी ही चुनौतियों के समाधान स्वयं निकालने की चिंताओं तथा जीवन के प्रति अपने सीमित दृष्टिकोण में इतने लिप्त हो सकते हैं कि सदैव हमारे साथ बने रहने वाले हमारे प्रभु यीशु मसीह की उपस्थिति की अनदेखी कर देते हैं। चाहे वीरान पहाड़ी स्थान हों या परचून की दुकान में रखा सामान हो, और इन सबके मध्य जो कुछ भी और हो सकता है वह सभी हो, वह इम्मानुएल – परमेश्वर हमारे साथ, हमारी हर परिस्थिति में सहायता करने के लिए हमारे साथ विद्यमान है। - जॉन ब्लेज़

 

हम चाहे जहाँ हों, और सामने चुनौती चाहे कुछ भी हो, हमारा प्रभु सदा हमारे साथ है।


जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। -  यशायाह 43:2

बाइबल पाठ: मत्ती 14:13-21

मत्ती 14:13 जब यीशु ने यह सुना, तो नाव पर चढ़कर वहां से किसी सुनसान जगह एकान्‍त में चला गया; और लोग यह सुनकर नगर नगर से पैदल उसके पीछे हो लिए।

मत्ती 14:14 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी; और उन पर तरस खाया; और उसने उन के बीमारों को चंगा किया।

मत्ती 14:15 जब सांझ हुई, तो उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा; यह तो सुनसान जगह है और देर हो रही है, लोगों को विदा किया जाए कि वे बस्तियों में जा कर अपने लिये भोजन मोल लें।

मत्ती 14:16 यीशु ने उन से कहा उन का जाना आवश्यक नहीं! तुम ही इन्हें खाने को दो।

मत्ती 14:17 उन्होंने उस से कहा; यहां हमारे पास पांच रोटी और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।

मत्ती 14:18 उसने कहा, उन को यहां मेरे पास ले आओ।

मत्ती 14:19 तब उसने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पांच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को।

मत्ती 14:20 और सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियां उठाईं।

मत्ती 14:21 और खाने वाले स्त्रियों और बालकों को छोड़कर पांच हजार पुरुषों के अटकल थे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29


बुधवार, 3 मार्च 2021

उद्देश्य

 

          जब सियु फेन को पता चला कि उसके गुर्दों ने काम करना बन्द कर दिया है, और इस कारण उसे अपनी शेष सारी उम्र डायलिसिस करवाते रहना पड़ेगा, तो उसने हार मान कर बैठ जाना चाहा। वह अकेली थी, सेवा निवृत्त हो चुकी थी, और लम्बे समय से प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करती थी, इसलिए उसे मृत्योपरांत अपने अनन्त जीवन को लेकर कोई अनिश्चितता या भय नहीं था, और वह अपने जीवन को कृत्रिम साधनों से लंबा खींचने में कोई उद्देश्य नहीं समझ रही थी। फिर भी उसके मित्रों ने उसे समझाया और तैयार किया कि वह डायलिसिस के लिए जाए, और परमेश्वर द्वारा सहायता मिलते रहने की आशा बनाए रखे।

          दो वर्ष के बाद, उसने अपने इन अनुभवों को तब काम का होते देखा, जब वह अपने चर्च के एक मित्र से मिलने गई, जिसे शरीर को दुर्बल कर देने की बीमारी थी। वह महिला अपने आप को अकेली अनुभव कर रही थी, क्योंकि शायद ही कोई था जो उसकी तकलीफ और जिस परिस्थिति से होकर वह निकल रही थी, समझ पा रहा था। किन्तु सियु फेन को उसके शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा को समझ पाने में कोई कठिनाई नहीं हुई, और वह उस महिला के साथ उसके दुखों में व्यक्तिगत रीति से संबंधित हो सकी। सियु फेन के अपने अनुभवों ने उसे उस महिला के साथ चल पाने, और ऐसी शान्ति तथा ढाढ़स दे पाने के लिए सक्षम किया जो कोई और नहीं दे पा रहा था। सियु फेन ने कहा, “अब मैं देखने पाती हूँ कि इसमें भी परमेश्वर का उद्देश्य है और वह मुझे अभी भी प्रयोग कर सकता है।”

          हमें दुखों का सामना क्यों करना पड़ता है, यह समझना कठिन हो सकता है। लेकिन परमेश्वर हमारे दुखों और सम्बन्धित अनुभवों का प्रयोग अनपेक्षित तरीकों से कर सकता है। जब हम अपने परीक्षाओं और परेशानियों के मध्य में परमेश्वर की ओर उसके ढाढ़स, शान्ति, और प्रेम के लिए मुड़ते हैं, तो यह हमें औरों की सहायता करने के लिए भी सक्षम कर सकता है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि पौलुस ने भी अपने दुखों में एक उद्देश्य देखा; उन दुखों से उसे अवसर मिला कि वह परमेश्वर के ढाढ़स और शान्ति को प्राप्त करे, जिसे वह फिर औरों को आशीष देने के लिए प्रयोग कर सकता था (2 कुरिन्थियों 1:3-5)।

          हमें अपने दुखों और परेशानियों की अवहेलना करने के लिए नहीं कहा गया है, परन्तु उनमें परमेश्वर के उद्देश्यों को समझने के लिए कहा गया है; उन उद्देश्यों को जिनसे परमेश्वर औरों की भलाई करवा सकता है। - लेस्ली कोह

 

हे प्रभु मैं हर परिस्थिति में आपके प्रति भरोसे को बनाए रखूँ; 

और हर परिस्थिति का उपयोग आपके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए करूं।


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-7

2 कुरिन्थियों 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है।

2 कुरिन्थियों 1:4 वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों।

2 कुरिन्थियों 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।

2 कुरिन्थियों 1:6 यदि हम क्लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।

2 कुरिन्थियों 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्ति के भी सहभागी हो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 28-30
  • मरकुस 8:22-38

मंगलवार, 2 मार्च 2021

खज़ाना


          गड़ा हुआ खज़ाना बच्चों की कहानियों की बात लगती है। किन्तु एक सनकी करोड़पति फोर्रेस्ट फेन्न का कहना है कि उन्होंने दो करोड़ डॉलर के बराबर जवाहरात और सोने से भरा एक संदूक रॉकी माउंटेन्स में कही दबा रखा है। बहुत से लोगों ने उसे ढूँढ़ने का प्रयास किया है और चार लोग तो उसकी तलाश में अपना जीवन गँवा चुके हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक का लेखक हमें थोड़ा थम कर इस के बारे में विचार करने के लिए कारण देता है कि ‘क्या कोई भी खज़ाना इस प्रकार की खोज में लगाने के योग्य हो सकता है?’। नीतिवचन 4 में, पिता ने अपने पुत्र को लिखा कि बुद्धि ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जिसे किसी भी कीमत पर खोजना चाहिए (पद 7)। उसका कहना है कि बुद्धि हमें जीवन भर मार्गदर्शन करेगी, हमें ठोकर खाने से बचाए रखेगी, और हमें आदर का मुकुट पहनाएगी (पद 8-12)।

          इससे सैकड़ों वर्ष बाद लिखते हुए प्रभु यीशु के भाई और शिष्य याकूब ने भी बुद्धि के महत्व पर बल दिया। उसने लिखा,पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है” (याकूब 3:17)। जब हम बुद्धि के खोजी होते हैं, तो हम अपने जीवन में कई प्रकार की भली बातों की भरपूरी को देखते हैं।

          बुद्धि को खोजना अन्ततः परमेश्वर को, जो समस्त बुद्धिमानी और समझ का स्त्रोत है, खोजना है। और जो बुद्धि ऊपर से आती है वह किसी भी गड़े हुए खज़ाने से, जिसकी हम कलपना कर सकते हैं, अधिक बहुमूल्य है। - एमी पीटरसन

 

हे परमेश्वर मेरे मन को बुद्धि का खोजी, और मेरे पांवों को तेरे मार्गों में चलने वाला बना।


क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। - नीतिवचन 2:6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 4:5-19

नीतिवचन 4:5 बुद्धि को प्राप्त कर, समझ को भी प्राप्त कर; उन को भूल न जाना, न मेरी बातों को छोड़ना।

नीतिवचन 4:6 बुद्धि को न छोड़, वह तेरी रक्षा करेगी; उस से प्रीति रख, वह तेरा पहरा देगी।

नीतिवचन 4:7 बुद्धि श्रेष्ठ है इसलिये उसकी प्राप्ति के लिये यत्न कर; जो कुछ तू प्राप्त करे उसे प्राप्त तो कर परन्तु समझ की प्राप्ति का यत्न घटने न पाए।

नीतिवचन 4:8 उसकी बड़ाई कर, वह तुझ को बढ़ाएगी; जब तू उस से लिपट जाए, तब वह तेरी महिमा करेगी।

नीतिवचन 4:9 वह तेरे सिर पर शोभायमान भूषण बान्धेगी; और तुझे सुन्दर मुकुट देगी।

नीतिवचन 4:10 हे मेरे पुत्र, मेरी बातें सुन कर ग्रहण कर, तब तू बहुत वर्ष तक जीवित रहेगा।

नीतिवचन 4:11 मैं ने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है; और सिधाई के पथ पर चलाया है।

नीतिवचन 4:12 चलने में तुझे रोक टोक न होगी, और चाहे तू दौड़े, तौभी ठोकर न खाएगा।

नीतिवचन 4:13 शिक्षा को पकड़े रह, उसे छोड़ न दे; उसकी रक्षा कर, क्योंकि वही तेरा जीवन है।

नीतिवचन 4:14 दुष्टों की बाट में पांव न धरना, और न बुरे लोगों के मार्ग पर चलना।

नीतिवचन 4:15 उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल, उसके निकट से मुड़ कर आगे बढ़ जा।

नीतिवचन 4:16 क्योंकि दुष्ट लोग यदि बुराई न करें, तो उन को नींद नहीं आती; और जब तक वे किसी को ठोकर न खिलाएं, तब तक उन्हें नींद नहीं मिलती।

नीतिवचन 4:17 वे तो दुष्टता से कमाई हुई रोटी खाते, और उपद्रव के द्वारा पाया हुआ दाखमधु पीते हैं।

नीतिवचन 4:18 परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है।

नीतिवचन 4:19 दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकारमय है; वे नहीं जानते कि वे किस से ठोकर खाते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 26-27
  • मरकुस 8:1-21

सोमवार, 1 मार्च 2021

समान

 

          मेरी मित्र, सू, ने दोपहर का भोजन करते समय अपने पति से यूँ ही कहा – “एक दिन मैं यह सब फेसबुक पर डाल दूंगी, और केवल अच्छे बातें ही नहीं!” और उसकी यह बात सुनकर मैं ज़ोर से हंस पड़ा, परन्तु इस बात पर विचार भी करने लगा। सोशल मीडिया एक अच्छी बात हो सकता है, जिसके माध्यम से हम मित्रों के साथ संपर्क में रह सकते हैं, और बिना समय और शारीरिक दूरी की मजबूरी से बाधित हुए, एक-दूसरे के साथ और एक-दूसरे के लिए प्रार्थना भी कर सकते हैं। परन्तु यदि हम सोशल मीडिया पर उपलब्ध बातों के प्रति सचेत न रहें तो जीवन के प्रति अवास्तविक दृष्टिकोण, या हमें भटकाने वाली बातों के द्वारा हम भरमाए भी जा सकते हैं। जो कुछ सोशल मीडिया पर लिखा और पोस्ट किया जाता है, वह जीवन तथा अनुभवों का एक संकलित, सम्पादित, और बहुधा काल्पनिक एवं अवास्तविक भाग होता है, जिस में केवल वही अच्छी बातें कही और दिखाई जाती हैं, जो पोस्ट करने वाला दिखाना चाहता है। इससे हम इस भ्रम में भी पड़ सकते हैं कि औरों के जीवनों में तो कोई समस्याएँ नहीं हैं; और फिर हम अपने बारे में सोचने लगते हैं कि ‘तो फिर हमारे जीवन में क्या गलत हो गया है?

          किसी अन्य के साथ अपनी तुलना करना अपने जीवन में अशांति उत्पन्न करने का अचूक नुस्खा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में जब शिष्य परस्पर अपनी तुलना करने लगे (देखें लूका 9:46; 22:24), तो प्रभु यीशु ने उन्हें तुरंत ऐसा करने से मना किया। अपने मृतकों में से पुनरुत्थान के बाद प्रभु यीशु ने पतरस को बताया कि कैसे उसे प्रभु में उसके विश्वास के लिए उसे सताव झेलना पड़ेगा। लेकिन पतरस का ध्यान पीछे चले आ रहे यूहन्ना पर लगा था, और पतरस ने यूहन्ना की ओर मुड़ते हुए प्रभु से पूछा, “प्रभु इसका क्या होगा?” प्रभु यीशु ने पतरस को उत्तर दिया,यदि मैं चाहूं कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या? तू मेरे पीछे हो ले” (यूहन्ना 21:22)।

          प्रभु यीशु ने पतरस को व्यर्थ की तुलना करने से बचने का सर्वोत्तम तरीका बताया। जब हमारे मन परमेश्वर पर तथा जो कुछ उसने हमारे लिए किया है, उसी पर  केन्द्रित होंगे, तब स्वयं पर केन्द्रित विचार हटने लगेंगे और हम किसी मनुष्य का नहीं वरन परमेश्वर का ही अनुसरण करने की लालसा करने लगेंगे। संसार में स्पर्धा के कारण उत्पन्न होने वाले तनाव और दबाव के स्थान पर, प्रभु हमें हमारे जीवनों में अपनी उपस्थिति तथा शान्ति देता है। हमें किसी और की ओर देखने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रभु के समान और कोई है ही नहीं। - जेम्स बैंक्स

 

तुलना करना आनन्द चुरा लेता है – थियोडोर रूज़वेल्ट


हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यूहन्ना 21:17-25

यूहन्ना 21:17 उसने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।

यूहन्ना 21:18 मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्ध कर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्ध कर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा।

यूहन्ना 21:19 उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।

यूहन्ना 21:20 पतरस ने फिरकर उस चेले को पीछे आते देखा, जिस से यीशु प्रेम रखता था, और जिसने भोजन के समय उस की छाती की ओर झुककर पूछा हे प्रभु, तेरा पकड़वाने वाला कौन है?

यूहन्ना 21:21 उसे देखकर पतरस ने यीशु से कहा, हे प्रभु, इस का क्या हाल होगा?

यूहन्ना 21:22 यीशु ने उस से कहा, यदि मैं चाहूं कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या? तू मेरे पीछे हो ले।

यूहन्ना 21:23 इसलिये भाइयों में यह बात फैल गई, कि वह चेला न मरेगा; तौभी यीशु ने उस से यह नहीं कहा, कि यह न मरेगा, परन्तु यह कि यदि मैं चाहूं कि यह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इस से क्या?

यूहन्ना 21:24 यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है और जिसने इन बातों को लिखा है और हम जानते हैं, कि उस की गवाही सच्ची है।

यूहन्ना 21:25 और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक कर के लिखे जाते, तो मैं समझता हूं, कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 23-25
  • मरकुस 7:14-37