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रविवार, 7 मार्च 2021

शोर

 

          कुछ वर्ष पहले, एक कॉलेज की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों को निमंत्रण दिया कि वे उनके साथ एक शाम शांत होकर समय बिताएँ। यद्यपि विद्यार्थी मान तो गए, किन्तु उन्होंने बड़े संकोच के साथ अपने मोबाइल फोन बन्द किए, उन्हें एक ओर रखा, और प्रार्थना-घर में आकर बैठे। अगले एक घंटे तक वे प्रार्थना और आराधना तथा स्तुति के संगीत में समय बिताते रहे। इसके बाद वहाँ सम्मिलित लोगों में से एक ने कहा कि उसका यह समय शांत हो जाने और जीवन में से शोर को हटा देने का एक अद्भुत अवसर और अनुभव था।

          कभी-कभी अनचाहे शोर से बच पाना बहुत कठिन होता है। हमारे अन्दर और बाहर के संसारों का कोलाहल हमें बहरा कर देने वाला हो सकता है। परन्तु हम जब शांत होने के लिए तैयार होते हैं, हम परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार के द्वारा परमेश्वर को जानने के लिए शान्त हो जाने की आवश्यकता (भजन 46:10) के लिखे जाने को समझने लगते हैं। हम 1 राजाओं 19 में देखते हैं कि जब एलिय्याह भविष्यद्वक्ता प्रभु परमेश्वर की खोज में था, तो उसे प्रभु आँधी, भूकंप, या आग के दिल दहला देने वाले शोर में नहीं मिला (पद 9-13)। वरन एलिय्याह ने परमेश्वर की कोमल आवाज़ को फुसफुसाहट के समान शांत वातावरण में पाया (पद 12)।

          किसी भी समारोह में, परिवार जनों के साथ एकत्रित होने में, अतिरिक्त शोर का होना निश्चित होता है। वह समय उत्तेजना के साथ वार्तालाप, ठहाकों, आवश्यकता से अधिक भोजन, और प्रेम की मनोहर अभिव्यक्तियों का समय होता है। परन्तु जब हम अपने मनों को शांत कर के परमेश्वर के साथ बैठते हैं, तो वह शान्ति का समय इन सभी बातों से कहीं अधिक मनोहर और लाभदायक होता है।  एलिय्याह के समान ही, हमें भी परमेश्वर किसी भी प्रकार के शोर में नहीं, वरन शान्ति के वातावरण में मिलेगा। और यदि हम अपने जीवन के शोर को एक ओर करके, उसकी आवाज़ को सुनना चाहें, तो परमेश्वर हमसे भी उस शान्ति में फुसफुसा कर बातें करेगा। - सिंडी हैस कैस्पर

 

परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए शांत हो जाना अनिवार्य है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन संहिता 46:10

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 19:9-13

1 राजा 19:9 वहां वह एक गुफा में जा कर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?

1 राजा 19:10 उस ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।

1 राजा 19:11 उसने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से हो कर चला, और यहोवा के सामने एक बड़ी प्रचण्ड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हुआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था।

1 राजा 19:12 फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाई दिया।

1 राजा 19:13 यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जा कर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाई दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52

गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

खुले कान


   हाल ही में मेरे कान मुझे तकलीफ दे रहे थे जिससे मुझे स्पष्ट सुन पाने में दिक्कत आ रही थी; इस समस्या के निवारण के लिए मैंने एक ऐसा इलाज लेने का निर्णय किया जिस की उपयोगिता के बारे में कुछ मतभेद थे। उस इलाज का दावा था कि उससे कान में जमा मैल गल कर निकल जाएगा और मेरे स्पष्ट सुन पाने में आ रही बाधाएं साफ हो जाएंगी। मुझे यह मानना पड़ेगा कि वह इलाज लेना एक विचित्र सा अनुभव प्रतीत हो रहा था किंतु मैं स्पष्ट सुन पाने के लिए इतना बेचैन था कि मैं उसे भी आज़माने के लिए तैयार था।

   स्पष्ट सुन पाना हमारे दैनिक जीवनों में तो आवश्यक है ही, किंतु परमेश्वर के साथ हमारी चाल एवं संगति में और भी अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 40:6 में भजन का लेखक दाऊद कहता है, "मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्न नहीं होता तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तू ने नहीं चाहा।" मूल भाषा के जिस शब्द का अनुवाद यहाँ "खोले" हुआ है उस शब्द का अनुवाद "साफ किया है" भी हो सकता है, जो दिखाता है कि परमेश्वर हम से क्या चाहता है। क्योंकि कई बार हमारे आत्मिक कान हमारे आस-पास के वातावरण तथा संसकृति के शोर से, या प्रलोभन तथा पाप के ऊँचे स्वर से बाधित हो सकते हैं; इसलिए हमें अपने आत्मिक कानों की सफाई रखना भी आवश्यक है। परमेश्वर चाहता है कि जब वह हम से अपने वचन के द्वारा बोले और बातें करे उस समय हमारे आत्मिक कान उसके लिए खुले और तैयार हों।

   होने दें कि हम अपने मनों को परमेश्वर की ओर पूरी भक्ति में लगाएं और अपने आत्मिक कानों को उसकी वाणी के लिए खुला और साफ किया हुआ रखें, जिससे जब वह अपने वचन के द्वारा हमसे बातें करे तो हम उससे सीखने वाले और उसकी इच्छा में आनन्दित रहने वाले बन सकें। - बिल क्राउडर


परमेश्वर अपने वचन के द्वारा उन से बातें करता है जो अपने मनों को उसके वचन के लिए तैयार रखते हैं।

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा। - यशायाह 50:4-5

बाइबल पाठ: भजन 40:1-10
Psalms 40:1 मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। 
Psalms 40:2 उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है। 
Psalms 40:3 और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।
Psalms 40:4 क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। 
Psalms 40:5 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।
Psalms 40:6 मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्न नहीं होता तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तू ने नहीं चाहा। 
Psalms 40:7 तब मैं ने कहा, देख, मैं आया हूं; क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय ऐसा ही लिखा हुआ है। 
Psalms 40:8 हे मेरे परमेश्वर मैं तेरी इच्छा पूरी करने से प्रसन्न हूं; और तेरी व्यवस्था मेरे अन्त:करण में बनी है।
Psalms 40:9 मैं ने बड़ी सभा में धर्म के शुभ समाचार का प्रचार किया है; देख, मैं ने अपना मुंह बन्द नहीं किया हे यहोवा, तू इसे जानता है। 
Psalms 40:10 मैं ने तेरा धर्म मन ही में नहीं रखा; मैं ने तेरी सच्चाई और तेरे किए हुए उधार की चर्चा की है; मैं ने तेरी करूणा और सत्यता बड़ी सभा से गुप्त नहीं रखी।

एक साल में बाइबल: 
  • याकूब 1-2


गुरुवार, 18 सितंबर 2014

सन्देश


   आप चाहे किसी अन्धेरे सिनेमा हॉल में बैठे सिनेमा देख रहे हों, या किसी सार्वजनिक स्थान पर हों, अथवा किसी रेल या बस में यात्रा कर रहे हों, बाज़ार में हों या दफ्तर में, मोबाईल फोन की घंटी बजने और फिर उस फोन के मालिक द्वारा सन्देश देखने, उसके उत्तर में अपना सन्देश भेजने अथवा फोन पर वार्तालाप करने का सिलसिला देखने को मिलता ही रहता है। एक छोटे से यंत्र से सन्देश की सूचना मिलने को नज़रन्दाज़ करना हमारे लिए बहुत कठिन हो गया है, सन्देश मिलते ही उसे देखना और प्रत्युत्तर देना हमारे लिए लगभग अनिवार्य सा हो गया है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, शमूएल एक छोटा बालक ही था जब उसे परमेश्वर के भवन में परमेश्वर की सेवा के लिए एली महापुरोहित को सौंप दिया गया था। वो एली के साथ रहता था और उसके निर्देशों के अनुसार परमेश्वर के मन्दिर में कार्य करता था। एक रात सोते समय उसने किसी को अपना नाम पुकारते हुए सुना, और यह सोचकर के एली ने उसे बुलाया है वह एली के पास गया, लेकिन एली ने उसे नहीं बुलाया था (1 शमूएल 3:1-7)। जब बार बार ऐसा हुआ तब एली को समझ आया कि परमेश्वर शमूएल को बुला रहा है, और उसने शमूएल से कहा कि अगली बार जब उसे वह आवाज़ सुनाई दे तो वह कहे, "...हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है..." (1 शमूएल 3:10)। परमेश्वर के प्रति ऐसे कान लगाए रखना शमूएल के जीवन की कार्यविधि बन गया, और शमूएल तरक्की करता गया, और परमेश्वर अपने आप को अपने वचन द्वारा उस पर प्रकट करता रहा (1 शमूएल 3:21)। इस्त्राएल के इतिहास में शमूएल का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है और वह परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रमुख पात्रों में से एक है, क्योंकि उसके कान परमेश्वर की वाणी की ओर लगे रहते थे और वह उसकी आज्ञाकारिता में कार्य करता था।

   क्या आज मैं और आप परमेश्वर के सन्देशों तथा वाणी के प्रति संवेदनशील हैं? क्या हम उसकी आवाज़ की ओर, उसके निर्देशों पर ध्यान देते हैं; उनका पालन करते हैं? एक फोन पर आया सन्देश तो हमारा ध्यान अन्य सभी कार्यों से हटा कर उस सन्देश का उत्तर देने पर कर देता है; क्या परमेश्वर के सन्देश को, उसकी वाणी को भी हम इतना ही महत्व देते हैं?

   काश कि हम भी शमूएल के समान सच्चे मन से परमेश्वर से कहने वाले हो सकें, "हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।" - डेविड मैक्कैसलैंड


अपने जीवन में संसार की बातों के शोर को परमेश्वर की आवाज़ को दबाने ना दें।

और यहोवा ने शीलो में फिर दर्शन दिया, क्योंकि यहोवा ने अपने आप को शीलो में शमूएल पर अपने वचन के द्वारा प्रगट किया। - 1 शमूएल 3:21

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 3:1-10
1 Samuel 3:1 और वह बालक शमूएल एली के साम्हने यहोवा की सेवा टहल करता था। और उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था; और दर्शन कम मिलता था। 
1 Samuel 3:2 और उस समय ऐसा हुआ कि (एली की आंखे तो धुंघली होने लगी थीं और उसे न सूझ पड़ता था) जब वह अपने स्थान में लेटा हुआ था, 
1 Samuel 3:3 और परमेश्वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था, और शमूएल यहोवा के मन्दिर में जहाँ परमेश्वर का सन्दूक था लेटा था; 
1 Samuel 3:4 तब यहोवा ने शमूएल को पुकारा; और उसने कहा, क्या आज्ञा! 
1 Samuel 3:5 तब उसने एली के पास दौड़कर कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। वह बोला, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह। तो वह जा कर लेट गया। 
1 Samuel 3:6 तब यहोवा ने फिर पुकार के कहा, हे शमूएल! शमूएल उठ कर एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। उसने कहा, हे मेरे बेटे, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह। 
1 Samuel 3:7 उस समय तक तो शमूएल यहोवा को नहीं पहचानता था, और न तो यहोवा का वचन ही उस पर प्रगट हुआ था। 
1 Samuel 3:8 फिर तीसरी बार यहोवा ने शमूएल को पुकारा। और वह उठके एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। तब एली ने समझ लिया कि इस बालक को यहोवा ने पुकारा है। 
1 Samuel 3:9 इसलिये एली ने शमूएल से कहा, जा लेट रहे; और यदि वह तुझे फिर पुकारे, तो तू कहना, कि हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है तब शमूएल अपने स्थान पर जा कर लेट गया। 
1 Samuel 3:10 तब यहोवा आ खड़ा हुआ, और पहिले की नाईं पुकारा, शमूएल! शमूएल! शमूएल ने कहा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 46-48


बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

शाँत स्थान

   गायक मैग हचिन्सन ने एक बार कहा, "मेरा अगला रिकॉर्ड 45 मिनिट तक शाँत रहने का होना चाहिए क्योंकि समाज में शाँत वातावरण की बहुत कमी है"। यह बात सही है; शाँत स्थान पाना वास्तव में बहुत कठिन होता जा रहा है। शहर वहाँ रहने वाले लोगों और चहल-पहल के कारण शोर से भर गए हैं और उनमें ऊँची आवाज़ में बजने वाले संगीत, ऊँची आवाज़ में बोलने वाले लोगों और तरह तरह की मशीनों के शोर से बचने का कोई तरीका सूझ नहीं पड़ता।

   यदि हम बाहरी शोर से पीड़ित हैं तो कितने ही ऐसे भी हैं जो अपने अन्दर के शोर से परेशान हैं, ऐसा शोर जो हमारी आध्यात्मिक सेहत के लिए हानिकारक है। विचित्र बात तो यह है कि ऐसे शोर को अकसर हम स्वयं ही अपने अन्दर आमंत्रित करते हैं। कुछ लोग आत्मिक एकाकीपन से बचने के लिए शोर को प्रयोग करते हैं - टी०वी० और रेडियो कार्यक्रमों के शोर को अपने जीवनों में आमंत्रित करके; उन्हें लगता है कि टी०वी० और रेडियो कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ता और कलाकार उन्हें संगति दे रहे हैं और वे उन के साथ अपना समय व्यतीत करना चाहते हैं। कुछ इस शोर को अपने विचारों को दबाने के लिए प्रयोग करते हैं - दूसरों के विचार और आवाज़ें उनके स्वयं के मन की आवाज़ से बचने और उसे दबाए रखने का माध्यम बन जाती हैं। कुछ अन्य लोग शोर का प्रयोग परमेश्वर की आवाज़ को अनसुना करने के लिए करते हैं; वे अपने मनों को संसार की बातों के शोर से इतना भर लेते हैं कि परमेश्वर की आवाज़ को सुनना उनके लिए कठिन हो जाता है। कुछ ऐसे भी हैं जो परमेश्वर और आध्यात्म के बारे में इतना बोलते रहते हैं कि वे स्वयं भी यह नहीं सुन पाते कि परमेश्वर वास्तव में उन से कह क्या रहा है; उनके लिए परमेश्वर तथा आध्यत्म पर उनके विचार और उन विचारों के प्रचार द्वारा मिलने वाली संसार कि वाह-वाही, इज़्ज़त, शोहरत, समाज में वर्चस्व और सांसारिक वस्तुएं ऐसे हो महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि परमेश्वर की आवाज़ के लिए उनके कान बन्द हो जाते हैं।

   लेकिन प्रभु यीशु के लिए ऐसा नहीं था। प्रभु यीशु चाहे कितने भी व्यस्त क्यों ना हों, उन्होंने सदा ही एक ऐसे शाँत स्थान को खोजा जहाँ वे संसार के शोर से दूर परमेश्वर पिता के साथ वार्तालाप कर सकें (मरकुस 1:35)। परमेश्वर पिता के साथ किसी शाँत स्थान पर और शाँत मन के साथ यही वार्तालाप हम मसीही विश्वासियों के लिए भी उतना ही अनिवार्य और आवश्यक है। चाहे हम कोई ऐसा स्थान ना भी ढूँढ़ पाएं जो बिलकुल शाँत है, हमें ऐसा स्थान अवश्य बनाना होगा जहाँ हमारा मन शाँत रह सके (भजन 131:2); एक ऐसा स्थान जहाँ हमारा सारा ध्यान केवल परमेश्वर पिता पर ही हो और वह हम से बातचीत कर सके। - जूली ऐकैरमैन लिंक


संसार के शोर को अपने लिए परमेश्वर की आवाज़ को दबाने मत दीजिए।

निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है। - भजन 131:2

बाइबल पाठ: मरकुस 1:35-45
Mark 1:35 और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा।
Mark 1:36 तब शमौन और उसके साथी उस की खोज में गए।
Mark 1:37 जब वह मिला, तो उस से कहा; कि सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।
Mark 1:38 उस ने उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं।
Mark 1:39 सो वह सारे गलील में उन की सभाओं में जा जा कर प्रचार करता और दुष्टात्माओं को निकालता रहा।
Mark 1:40 और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेककर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
Mark 1:41 उसने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा; मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।
Mark 1:42 और तुरन्त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।
Mark 1:43 तब उसने उसे चिताकर तुरन्त विदा किया।
Mark 1:44 और उस से कहा, देख, किसी से कुछ मत कहना, परन्तु जा कर अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने ठहराया है उसे भेंट चढ़ा, कि उन पर गवाही हो।
Mark 1:45 परन्तु वह बाहर जा कर इस बात को बहुत प्रचार करने और यहां तक फैलाने लगा, कि यीशु फिर खुल्लमखुल्ला नगर में न जा सका, परन्तु बाहर जंगली स्थानों में रहा; और चहुं ओर से लागे उसके पास आते रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 14-16 
  • इफिसियों 5:1-16