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Sunday, August 31, 2014

पलट


   बाइबल कॉलेज में मेरा एक मित्र था, बिल, जो एक बहुत ही घिनौने और पापमय जीवन से निकल कर मसीह यीशु में आया था। उसने अपने जीवन की एक घटना बताई: "मैं ब्रैन्डी पीते हुए सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा था, और किसी दूसरे की पत्नी मेरे बगल में बैठी थी; मैंने देखा कि कुछ मसीही विश्वासी सड़क के किनारे खड़े हुए आने-जाने वाले लोगों को प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा और उद्धार के बारे में बता रहे थे। मैं उनके पास से होकर निकला और उनको संबोधित करते हुए ज़ोर से चिल्लाया, ’मूर्खों’। लेकिन इसके कुछ ही सप्ताह के बाद मैं एक चर्च में अपने घुटनों पर पड़ा प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग रहा था और उसे अपने जीवन का उद्धारकर्ता तथा प्रभु बनने का आग्रह कर रहा था।" बिल ने प्रभु यीशु पर विश्वास लाने के द्वारा अपने पुराने जीवन तथा आदतों से छुटकारा और प्रभु यीशु मसीह में एक नया जीवन प्राप्त किया था। यह उसके लिए एक जीवन बदलने वाला अनुभव था जिसने उसके मन और जीवन मार्ग की दिशा को बिलकुल पलट दिया।

   सच्चा पश्चाताप, जिसकी पहल परमेश्वर के पवित्र आत्मा के द्वारा होती है, जीवन मार्ग की दिशा को पलट देने वाला अनुभव है। अकसर हम देखते हैं कि इस बदलाव से पहले उस व्यक्ति द्वारा जितना अधिक विरोध प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार का होता है, उसके जीवन मार्ग की दिशा परिवर्तन उतनी ही चकित कर देन वाली होती है। जब दमिश्क के मार्ग पर तरशीश के शाऊल का सामना प्रभु यीशु से हुआ, तो वह मसीही विश्वासियों को सताने वाले शाऊल से पलट कर मसीह यीशु का प्रचारक पौलुस बन गया। उसके अन्दर आए इस परिवर्तन को देखकर बहुतेरों ने टिप्पणी करी: "...जो हमें पहिले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहिले नाश करता था" (गलतियों 1:23)।

   सच्चे परिवर्तन का आरंभ सच्चे पश्चाताप से होता है, और वह मन, जीवन के दृष्टिकोण तथा जीवन की दिशा को बदल देता है। मसीह यीशु के अनुयायियों के लिए इसका अर्थ होता है पाप और साँसारिकता के जीवन से पलट कर मसीह यीशु की आज्ञाकारिता में उसे समर्पित जीवन व्यतीत करना।


पश्चाताप का अर्थ है पाप के प्रति इतना शर्मिंदा होना कि उसे बिलकुल छोड़ दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17 

बाइबल पाठ: गलतियों 1:11-24
Galatians 1:11 हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं। 
Galatians 1:12 क्योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला। 
Galatians 1:13 यहूदी मत में जो पहिले मेरा चाल चलन था, तुम सुन चुके हो; कि मैं परमेश्वर की कलीसिया को बहुत ही सताता और नाश करता था। 
Galatians 1:14 और अपने बहुत से जाति वालों से जो मेरी अवस्था के थे यहूदी मत में बढ़ता जाता था और अपने बाप दादों के व्यवहारों में बहुत ही उत्तेजित था। 
Galatians 1:15 परन्तु परमेश्वर की, जिसने मेरी माता के गर्भ ही से मुझे ठहराया और अपने अनुग्रह से बुला लिया, 
Galatians 1:16 जब इच्छा हुई, कि मुझ में अपने पुत्र को प्रगट करे कि मैं अन्यजातियों में उसका सुसमाचार सुनाऊं; तो न मैं ने मांस और लोहू से सलाह ली; 
Galatians 1:17 और न यरूशलेम को उन के पास गया जो मुझ से पहिले प्रेरित थे, पर तुरन्त अरब को चला गया: और फिर वहां से दमिश्क को लौट आया।
Galatians 1:18 फिर तीन बरस के बाद मैं कैफा से भेंट करने के लिये यरूशलेम को गया, और उसके पास पन्‍द्रह दिन तक रहा। 
Galatians 1:19 परन्तु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ और प्रेरितों में से किसी से न मिला। 
Galatians 1:20 जो बातें मैं तुम्हें लिखता हूं, देखो परमेश्वर को उपस्थित जानकर कहता हूं, कि वे झूठी नहीं। 
Galatians 1:21 इस के बाद मैं सूरिया और किलिकिया के देशों में आया। 
Galatians 1:22 परन्तु यहूदिया की कलीसियाओं ने जो मसीह में थी, मेरा मुँह तो कभी नहीं देखा था। 
Galatians 1:23 परन्तु यही सुना करती थीं, कि जो हमें पहिले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहिले नाश करता था। 
Galatians 1:24 और मेरे विषय में परमेश्वर की महिमा करती थीं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-46


Saturday, August 30, 2014

सच्चा धन


   हम लोग छुट्टियाँ बिताने अलास्का गए हुए थे, और वहाँ फेयरबैंक्स के निकट प्रसिद्ध एल डोराडो सोने की खान देखने गए। उस स्थान पर हमें भ्रमण करवाने और जब वह खान आरंभ हुई थी तब लोगों द्वारा सोना निकालने के तरीकों को दिखाने के बाद, हम को एक तश्तरी, और कंकर-मिट्टी से भरा एक बोरा दिया गया जिसको छान कर हमें उसमें मिले सोने के कणों को खोजने का प्रयास करना था। बोरे में से कंकर-मिट्टी लेकर हम तश्तरी में डालने लगे और बहते पानी के नीचे उसे हिला-हिला कर निथारने लगे जिससे मिट्टी तो बह जाए पर सोने के भारी कण नीचे तश्तरी के तले पर बैठ जाएं। यद्यपि यह करने की विधि हमें विशेषज्ञों ने दिखाई और सिखाई थी, लेकिन हम कुछ खास करने नहीं पाए; कारण? इस डर से कि कहीं हम कुछ मूल्यवान ना गवाँ दें, हम व्यर्थ के कंकरों को फेंकने से बहुत हिचकिचा रहे थे।

   बाद में इस घटना के बारे में सोचते हुए मुझे बोध हुआ कि ऐसे ही हम कितनी ही व्यर्थ साँसारिक बातों को अपने जीवन में लगाए रहते हैं और इस कारण सच्चे मूल्य की अनेक बातों को पाने नहीं पाते। प्रभु यीशु के पास एक जवान व्यक्ति आया, जिसके जीवन में यह सत्य जाता था। उस व्यक्ति के लिए उसकी नाशमान साँसारिक धन-संपत्ति उसे मिलने वाले अविनाशी आत्मिक खज़ानों से अधिक मूल्यवान थी (लूका 18:18-30)। उसके इस रवैये को देख प्रभु यिशु ने टिप्पणी करी, "...धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है" (पद 24)।

   धन अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन यदि धन को लेकर हमारा दृष्टिकोण सही नहीं है और धन का संचय ही हमारे जीवन का उद्देश्य बन गया है, तो फिर वह हमें सच्चे मूल्य की वस्तुओं को जमा करने से रोकेगा। संसार की नाशमान धन-संपत्ति जमा करने के प्रयास में समय गंवाना मूर्खता है, क्योंकि यह साँसारिक धन-संपत्ति नहीं वरन प्रभु यीशु मसीह में हमारा सच्चा विश्वास ही है जो हमें परीक्षाओं में सुरक्षित रखेगा और अन्ततः हमारे लिए प्रशंसा एवं आदर तथा हम में होकर परमेश्वर के लिए महिमा का कारण ठहरेगा (1 पतरस 1:7)।

   आज आपके लिए सच्चा धन क्या है; और आप उसे कहाँ जमा कर रहे हैं? कहीं नाशमान साँसारिक धन के पीछे आप अविनाशी खज़ाने गंवाने में तो नहीं लगे हैं? - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपनी नज़रें प्रभु यीशु पर लगाए रखिए; तब साँसारिक धन-संपत्ति की चका-चौंध आपकी आँखों को आत्मिक खज़ानों के प्रति अन्धा करने नहीं पाएगी।

और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। - 1 पतरस 1:7 

बाइबल पाठ: लूका 18:18-30
Luke 18:18 किसी सरदार ने उस से पूछा, हे उत्तम गुरू, अनन्‍त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Luke 18:19 यीशु ने उस से कहा; तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक, अर्थात परमेश्वर।
Luke 18:20 तू आज्ञाओं को तो जानता है, कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना, और चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Luke 18:21 उसने कहा, मैं तो इन सब को लड़कपन ही से मानता आया हूं। 
Luke 18:22 यह सुन, यीशु ने उस से कहा, तुझ में अब भी एक बात की घटी है, अपना सब कुछ बेच कर कंगालों को बांट दे; और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Luke 18:23 वह यह सुनकर बहुत उदास हुआ, क्योंकि वह बड़ा धनी था। 
Luke 18:24 यीशु ने उसे देख कर कहा; धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है? 
Luke 18:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है। 
Luke 18:26 और सुनने वालों ने कहा, तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Luke 18:27 उसने कहा; जो मनुष्य से नहीं हो सकता, वह परमेश्वर से हो सकता है। 
Luke 18:28 पतरस ने कहा; देख, हम तो घर बार छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं। 
Luke 18:29 उसने उन से कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं जिसने परमेश्वर के राज्य के लिये घर या पत्‍नी या भाइयों या माता पिता या लड़के-बालों को छोड़ दिया हो। 
Luke 18:30 और इस समय कई गुणा अधिक न पाए; और परलोक में अनन्त जीवन।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42


Friday, August 29, 2014

भरपेट


   एक मित्र ने, जो सिंगापुर में रहता है, एक पुराने चीनी अभिवादन के बारे में बताया। यह पूछने की बजाए कि "आप कैसे हैं?" लोग पूछते "क्या आपने भरपेट भोजन किया?" संभवतः यह अभिवादन उस समय आरंभ हुआ था जब लोगों के पास भोजन की कमी थी और बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता था कि उन्हें अगला भोजन कब मिलेगा। जब भी भोजन उपलब्ध होता तब भरपेट भोजन कर लेने में ही बुद्धिमानी होती थी।

   प्रभु यीशु के 5000 से अधिक लोगों को दो मछली और पाँच रोटी से भरपेट भोजन कराने के पश्चात (यूहन्ना 6:1-13), वह भीड़ प्रभु यीशु के पीछे पीछे आई, क्योंकि उन्हें और भोजन मिलने की आशा थी (पद 24-26)। तब उस भीड़ से प्रभु यीशु ने कहा कि वे शारीरिक नहीं वरन आत्मिक भोजन के लिए मेहनत करें, उसकी लालसा रखें, जो उन्हें प्रभु यीशु से ही मिल सकता था: "नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। ... यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा" (यूहन्ना 6:27; 35)।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सहायाता करें जिनके पास शारीरिक भोजन नहीं है लेकिन उससे भी बढ़कर उन्हें उस आत्मिक भोजन के बारे में बताएं जो उन्हें भीतरी शान्ति, पाप क्षमा और अनन्त जीवन प्रदान कर सकता है, अर्थात प्रभु यीशु मसीह।

   जीवन की रोटी, प्रभु यीशु मसीह आज हमें निमंत्रण दे रहा है कि हम उसके पास आएं और अपनी आत्मा की हर भूख को उससे तृप्त करें, उससे भरपेट खाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


आत्मा की प्रत्येक भूख को केवल प्रभु यीशु ही तृप्त कर सकता है।

जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस(शरीर) है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:24-35
John 6:24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे। 
John 6:25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया? 
John 6:26 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
John 6:27 नाशमान भोजन