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मंगलवार, 12 अगस्त 2014

सन्देह और विश्वास


   क्या एक मसीही विश्वासी जो अपने विश्वास की बातों को लेकर कभी-कभी सन्देह में पड़ जाता है, प्रभु यीशु की सेवकाई प्रभावी रीति से करने पाएगा? कुछ लोगों का मानना है कि परिपक्व एवं विश्वास में उन्नति करते रहने वाले मसीही विश्वासी कभी भी अपने विश्वास की बातों पर कोई सन्देह नहीं करते। किंतु जिस प्रकार हम ऐसे अनुभवों से होकर निकलते हैं जो हमारे विश्वास को बढ़ाते हैं, वैसे ही हम कभी कभी ऐसे अनुभवों से होकर भी निकल सकते हैं जो अस्थायी तौर पर हमारे मनों में सन्देह उत्पन्न कर सकते हैं।

   प्रभु यीशु के एक चेले, थोमा को प्रभु यीशु के मृतकों में से जी उठने के समाचार पर एकाएक विश्वास नहीं हुआ: "जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा" (यूहन्ना 20:25)। प्रभु यीशु मसीह ने इस अविश्वास के लिए थोमा की भर्त्सना नहीं करी, वरन उसके सामने वही प्रमाण प्रस्तुत किया जो थोमा को चाहिए था। मृतकों से जी उठे अपने प्रभु को सप्रमण प्रत्यक्ष देखकर थोमा उसके सामने झुक गया और, "यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!" (यूहन्ना 20:28)। 

   इस घटना के पश्चात परमेश्वर के वचन बाइबल में थोमा का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। परन्तु मसीही मण्डली, अर्थात चर्च का इतिहास बताता है कि थोमा भारत आया, और दक्षिण भारत में ही बस गया। उसने प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा तथा उद्धार का प्रचार किया, अनेक आश्चर्यकर्म किए, चर्च स्थापित किए, और उसके द्वारा स्थापित चर्चों में से कुछ आज भी सक्रीय हैं, और थोमा द्वारा स्थापित किए जाने का दावा करते हैं।

   जीवन में उठने वाले सन्देहों को जीवन का भाग मत बनने दीजिए। परमेश्वर के समक्ष अपने सन्देहों को रखिए, उससे अपने सन्देह के निवारण का मार्ग पूछिए, और परमेश्वर को अपनी गहरी पहिचान आप पर प्रगट करने का अवसर दीजिए और फिर अपने सन्देह से ऊपर उठकर अपने विश्वास को फिर से स्थिर कीजिए और आप परमेश्वर के लिए उपयोगी होने पाएंगे तथा उसके लिए महान कार्य करने पाएंगे। - डेनिस फिशर


अपने सन्देहों पर सन्देह और विश्वास पर विश्वास करना सीखिए।

और यह भी जानते हैं, कि परमेश्वर का पुत्र आ गया है और उसने हमें समझ दी है, कि हम उस सच्चे को पहचानें, और हम उस में जो सत्य है, अर्थात उसके पुत्र यीशु मसीह में रहते हैं: सच्चा परमेश्वर और अनन्त जीवन यही है। - 1 यूहन्ना 5:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 20:24-31
John 20:24 परन्तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था। 
John 20:25 जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
John 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा हो कर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
John 20:27 तब उसने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो। 
John 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! 
John 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया।
John 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। 
John 20:31 परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 49-51


मंगलवार, 7 मई 2013

शक का लाभ


   थॉमस इन्मैन ने सन 1860 में अपने संगी डॉक्टरों को यह प्रस्ताव दिया कि यदि किसी रोग के इलाज के लिए किसी दवा की उपयोगिता पर उन्हें शक है तो वे रोगी को वह दवा ना दें; उन्हें अपने इस शक का लाभ रोगी को देना चाहिए और व्यर्थ दवाएं देने से बचना चाहिए। यही वाक्यांश, "शक का लाभ" वैधानिक एवं न्याय सम्बंधित बातों से जुड़ा वाक्यांश भी है; यदि पंचों अथवा न्याय मण्डलियों को प्रस्तुत सबूतों की वैधता या सत्यता पर शक है तो उन्हें शक का लाभ देते हुए दोषी ना होने का निर्णय देना चाहिए।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए इस वाक्यांश से शिक्षा लेकर इसे अपने व्यवहार और सम्बंधों में लागू करना अच्छा है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल इससे भी आगे बढ़कर इसे अपने ही नहीं वरन दूसरों को लाभ पहुँचाने के लिए प्रयोग करने को कहती है। 1 कुरिन्थियों 13:7 में प्रेम के विषय में लिखा है: "वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।" बाइबल की एक व्याखया "टिंडेल न्यू टेस्टामेंट कमेंट्रीज़" में, इस पद में आए वाक्यांश "सब बातों की प्रतीति करता है" के संबंध में लियोन मौरिस लिखते हैं: "इसका अर्थ है कि सब बातों में दूसरों में उत्तम को ही देखना...लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं है कि प्रेम भोला होता है और कुटिलता को नहीं पहचानता; वरन यह कि संसार के समान वह दूसरों में सदैव ही बुराई ही नहीं देखता रहता। प्रेम दूसरों में विश्वास को बनाए रखता है; उनसे धोखा नहीं खाता, लेकिन साथ ही हर बात के लिए सदैव दूसरों को बुरा समझ कर उनको शक की दृष्टि से नहीं देखता, वरन दूसरों को शक का लाभ देने को तैयार रहता है।"

   जब कभी हम किसी के बारे में कुछ नकारात्मक सुनें, या उनके किसी कार्य या मंशा के बारे में हमें संषय हो, तो इससे पहले कि हम उन्हें गलत या बुरा करार दें, भला होगा कि कुछ पल रुक कर पूरी बात या परिस्थित का पुनः आंकलन कर लें। यदि कहीं भी शक की कोई गुंजाइश है तो मसीही प्रेम का उदाहरण प्रस्तुत करें और किसी को बुरा जताने या बदनाम करने की बजाए इस शक का लाभ उन्हें दें। - एनी सेटास


प्रेम शक का लाभ दूसरों को देता है।

वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। - 1 कुरिन्थियों 13:7

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं।
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 1-3 
  • लूका 24:1-35