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गुरुवार, 22 सितंबर 2016

सुसमाचार


   यदि आपने हवाई-अड्डों पर कभी स्वचलित मार्ग-पट्टी का प्रयोग किया है तो आप अवश्य बारंबार दोहराई जाने वाली चेतावनी, "सावधान! स्वचलित मार्ग-पट्टी समाप्त होने पर है" से परिचित होंगे। हवाई-अड्डों पर यह चेतावनी बारंबार क्यों दोहराई जाती है? इसलिए कि यात्री सावधान रहें, उस ’स्वचलित मार्ग-पट्टी’ के प्रयोग के समय किसी हानि से बचे रहें और यदि किसी को कोई हानि होती भी है तो वे हवाई-अड्डे को इसका ज़िम्मेदार ना बना सकें।

   बारंबार दोहराई जाने वाली चेतावनियाँ तथा घोषणाएं परेशान करने वाली हो सकती हैं, परन्तु उनकी उपयोगिता भी है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम परमेश्वर की अनेकों चेतावनियों और शिक्षाओं को बारंबार दोहराया गया पाते हैं। प्रेरित पौलुस ने गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में, ऐसे ही एक महत्वपूर्ण चेतावनी को दोहराया है। पौलुस ने उन्हें सचेत किया कि यदि कोई भी, चाहे वह स्वयं, या चाहे कोई स्वर्गदूत ही आकर उन्हें ऐसा सुसमाचार सुनाए जो उस सुसमाचार से भिन्न हो जो वे पहले सुन चुके हैं, तो उस पर कदापि विश्वास ना करें (गलतियों 1:8)। इससे अगले पद में पौलुस ने फिर से यही बात दोहराई; क्योंकि यह चेतावनी दोहराने के योग्य थी। पौलुस को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि गलतिया के वे मसीही विश्वासी, केवल परमेश्वर के अनुग्रह से मिलने वाली पाप क्षमा और केवल मसीह यीशु पर लाए गए विश्वास द्वारा उद्धार के सच्चे सुसमाचार से हटकर उस गलत शिक्षा की ओर मुड़ने लगे थे कि पाप क्षमा, उद्धार और परमेश्वर के साथ उनका संबंध उनके भले कार्यों और रीति-रिवाज़ों के पालन पर निर्भर है।

   प्रभु यीशु मसीह का सुसमाचार - उसमें लाए गए विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार, केवल उसकी मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरुत्थान के द्वारा ही संभव है: "हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा" (1 कुरिन्थियों 15:1-4)। और यही वह सुसमाचार है जिसे दुनिया के लोगों को बताने की ज़िम्मेदारी प्रभु ने अपने अनुयायियों को सौंपी है (मत्ती 28:18-20; प्रेरितों 1:8)।

   जब हम प्रभु यीशु के सुसमाचार को लोगों के सामने रखें, तो सचेत रहें कि उस सुसमाचार को छोड़ जो परमेश्वर की ओर से हमें दिया गया है, अन्य किसी भी गलत ’सुसमाचार’ को ना सुनाएं। प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास और उसके अनुग्रह से मिलने वाली पापों की क्षमा द्वारा उद्धार ही एकमात्र एवं सच्चा सुसमाचार है। - डेव ब्रैनन


मसीह यीशु ही वह एकमात्र मार्ग है जो स्वर्ग ले जाता है।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: गलतियों 1:1-10
Galatians 1:1 पौलुस की, जो न मनुष्यों की ओर से, और न मनुष्य के द्वारा, वरन यीशु मसीह और परमेश्वर पिता के द्वारा, जिसने उसको मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है। 
Galatians 1:2 और सारे भाइयों की ओर से, जो मेरे साथ हैं; गलतिया की कलीसियाओं के नाम। 
Galatians 1:3 परमेश्वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। 
Galatians 1:4 उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्वर और पिता की इच्छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। 
Galatians 1:5 उस की स्‍तुति और बड़ाई युगानुयुग होती रहे। आमीन।
Galatians 1:6 मुझे आश्चर्य होता है, कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Galatians 1:7 परन्तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Galatians 1:8 परन्तु यदि हम या स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Galatians 1:9 जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्या मनुष्यों को मनाता हूं या परमेश्वर को? क्या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Galatians 1:10 यदि मैं अब तक मनुष्यों को ही प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 10-12
  • गलतियों 1


बुधवार, 21 सितंबर 2016

दावत


   कुछ समय पहले मैंने मध्य-कालीन समय पर आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया। उस सम्मेलन के एक हिस्से में हमने उस समय की विधियों से कई प्रकार के ऐसे भोजन बनाए जो उन दिनों में प्रचलित रहे होंगे। हमने दालचीनी और फलों को कूट कर जैम बनाने के लिए इमामदस्ते का प्रयोग किया; सन्तरे के छिलके को शहद और अदरक के साथ पका कर मीठा नाशता बनाया; बादाम को पानी और अन्य वस्तुओं के साथ कुचलकर बादाम का दूध बनाया; और चावल के साथ खाने के लिए एक पूरे मुर्गे को मुख्य भोजन के लिए पकाया। इन सभी भोजनों को तैयार कर के हम ने उन के स्वाद के अनुभव का आनन्द भी लिया।

   जब बात हमारे प्राणों के लिए आत्मिक भोजन की आती है तो, परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में हमें विविध प्रकार के वयंजनों का संकलन दिया है, जिन्हें हम समय तथा आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाकर उनका लाभ पा सकें। ऐसा करने से हम ना केवल तृप्त एवं संतुष्ट होंगे, वरन विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने के लिए आत्मिक बल-बुद्धि-सामर्थ भी प्राप्त करेंगे। बाइबल के विभिन्न अंश, जैसे इतिहास की पुस्तकें, भजन और काव्य, बुद्धिमता की शिक्षाएं, भविष्यवाणियाँ इत्यादि हमें कमज़ोरी के समयों में बल देती हैं; हमारी आवश्यकतानुसार हमें बुद्धिमता और प्रोत्साहन देती हैं (भजन 19:7-14; 119:97-104; इब्रानियों 5:12)। जैसा कि भजनकार कहता है: "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!" (भजन 119:103)

   परमेश्वर ने हम सब के लिए अपनी दावत तैयार करके सजाई हुई है; समस्त मानव जाति के लिए उसका खुला निमंत्रण है कि सब उसके पास आएं और उसकी दावत में शामिल हों, उसके व्यंजनों का आनन्द लें। तो अब देर किस बात की है? - डेनिस फिशर


बाइबल जीवन की वह रोटी है जो कभी बासी नहीं होती।

क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है। वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है। - नीतिवचन 2:6-8

बाइबल पाठ: भजन 19:7-14
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9
  • 2 कुरिन्थियों 13


मंगलवार, 20 सितंबर 2016

सच्चा विश्वास


   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र है राजा योआश। उसके शिशु काल में ही उसकी दादी अथालिया ने उसके अन्य भईयों को मरवा कर यहूदा की राज-गद्दी हथिया ली थी। लेकिन योआश को उसकी फूफी और फूफा ने अपने पास छः वर्ष तक सुरक्षित छुपाए रखा (2 इतिहास 22:10-12)। योआश उनके प्रेम और संरक्षण में बड़ा हुआ और जब वह सात वर्ष का हुआ तब अथालिया का तख्ता पलट करके और उसका राज्याभिषेक करके उसे राजा बना दिया गया। राजा योआश के साथ उसके फूफा, यहोयादा के रूप में एक बुद्धिमान सलाहकार था जो परमेश्वर के भय में चलता था और उसे भी वैसे ही चलना सिखाता था। योआश यहूदा के गिने-चुने "अच्छे राजाओं" में से एक था, और जब तक उसके फूफा जीवित थे वह परमेश्वर के भय में चलता रहा और सही कार्य करता रहा (2 इतिहास 24:2)। लेकिन अपने फूफा के मृत्योपरांत, जब उसके साथ परमेश्वर के भय में चलने और सिखाने वाला कोई नहीं रहा तो योआश भी परमेश्वर से दूर हो गया, मूर्तिपूजा में पड़ गया और उसके जीवन का अन्त बहुत दुःखदायी हुआ (2 इतिहास 24:15-25)। ऐसा लगता है कि योआश के परमेश्वर में विश्वास की जड़ें कुछ खास गहरी नहीं थीं; संभवतः परमेश्वर में विश्वास योआश का नहीं वरन उसके फूफा का था जिनका बस वह ऊपरी रीति से अनुसरण कर रहा था, और उनके जाने के बाद योआश अपने विश्वास में स्थिर बना नहीं रह सका।

   हो सकता है कि लोग हमें अपने मसीही विश्वास के आधार के बारे में सिखा सकें, परन्तु हम में से प्रत्येक को स्वयं स्वेच्छा और सच्चे समर्पण के साथ मसीह यीशु के साथ संबंध स्थापित करना है, विश्वास में आना है, तब ही परमेश्वर के साथ हमारा संबंध सही होगा। यह वास्तविक मसीही विश्वास किसी परिवार-विशेष में जन्म ले लेने या कुछ विधि-विधानों को पूरा करने या फिर कोई रीति-रिवाज़ों-त्यौहारों को मानने से नहीं मिलता। जब हम सच्चे समर्पण तथा पापों के अंगीकार तथा उन की क्षमा के लिए प्रभु यीशु मसीह के पास आते हैं, तब ही हम मसीह यीशु के सच्चे अनुयायी और परमेश्वर की सन्तान, तथा उसकी स्वर्गीय आशीषों के संभागी बनते हैं (यूहन्ना 1:12-13)। - सिंडी हैस कैस्पर


जो विश्वास अन्त तक स्थिर बना रहता 
वही प्रमाणित करता है कि वह आरंभ से ही वास्तविक रहा है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 24:15-25
2 Chronicles 24:15 परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया और दीर्घायु हो कर मर गया। जब वह मर गया तब एक सौ तीस वर्ष का था। 
2 Chronicles 24:16 और दाऊदपुर में राजाओं के बीच उसको मिट्टी दी गई, क्योंकि उसने इस्राएल में और परमेश्वर के और उसके भवन के विषय में भला किया था। 
2 Chronicles 24:17 यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिमों ने राजा के पास जा कर उसे दण्डवत की, और राजा ने उनकी मानी। 
2 Chronicles 24:18 तब वे अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा का भवन छोड़कर अशेरों और मूरतों की उपासना करने लगे। सो उनके ऐसे दोषी होने के कारण परमेश्वर का क्रोध यहूदा और यरूशलेम पर भड़का। 
2 Chronicles 24:19 तौभी उसने उनके पास नबी भेजे कि उन को यहोवा के पास फेर लाएं; और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया। 
2 Chronicles 24:20 और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह में समा गया, और वह ऊंचे स्थान पर खड़ा हो कर लोगों से कहने लगा, परमेश्वर यों कहता है, कि तुम यहोवा की आज्ञाओं को क्यों टालते हो? ऐसा कर के तुम भाग्यवान नहीं हो सकते, देखो, तुम ने तो यहोवा को त्याग दिया है, इस कारण उसने भी तुम को त्याग दिया। 
2 Chronicles 24:21 तब लोगों ने उस से द्रोह की गोष्ठी कर के, राजा की आज्ञा से यहोवा के भवन के आंगन में उसको पत्थरवाह किया। 
2 Chronicles 24:22 यों राजा योआश ने वह प्रीति भूल कर जो यहोयादा ने उस से की थी, उसके पुत्र को घात किया। और मरते समय उसने कहा यहोवा इस पर दृष्टि कर के इसका लेखा ले।
2 Chronicles 24:23 नए वर्ष के लगते अरामियों की सेना ने उस पर चढ़ाई की, और यहूदा ओर यरूशलेम आकर प्रजा में से सब हाकिमों को नाश किया और उनका सब धन लूट कर दमिश्क के राजा के पास भेजा। 
2 Chronicles 24:24 अरामियों की सेना थोड़े ही पुरुषों की तो आई, पन्तु यहोवा ने एक बहुत बड़ी सेना उनके हाथ कर दी, क्योंकि उन्होंने अपने पितरों के परमेश्वर को त्याग दिया था। और योआश को भी उन्होंने दण्ड दिया।
2 Chronicles 24:25 और जब वे उसे बहुत ही रोगी छोड़ गए, तब उसके कर्मचारियों ने यहोयादा याजक के पुत्रों के खून के कारण उस से द्रोह की गोष्ठी कर के, उसे उसके बिछौने पर ही ऐसा मारा, कि वह मर गया; और उन्होंने उसको दाऊद पुर में मिट्टी दी, परन्तु राजाओं के कब्रिस्तान में नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6
  • 2 कुरिन्थियों 12


सोमवार, 19 सितंबर 2016

जान-पहचान


   हमारा सबसे कठिन अन्तर्द्वन्द होता है हमारी इस इच्छा कि लोग हमें जाने, तथा हमारे भय के कि पहचान लिए जाने पर कुछ अप्रत्याशित तो नहीं हो जाएगा, के मध्य। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में रचा है, इसलिए हम जाने और पहचाने जाने के लिए हैं - परमेश्वर द्वारा भी, और अन्य लोगों के द्वारा भी। परन्तु फिर भी हमारे पतित स्वभाव के कारण हमारे जीवनों में ऐसी कमज़ोरियाँ और पाप होते हैं जिन्हें हम नहीं चाहते कि कोई जाने या पहचाने। हम अपने जीवन के कुछ "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को छुपा कर रखना चाहते हैं; और दूसरों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे अपने जीवन के सबसे अच्छे भाग या पहलू को प्रगट करें।

   हमारे द्वारा अपने जाने या पहचाने जाने का जोखिम ना उठाने का एक कारण होता है उसके बाद होने वाले तिरिस्कार और उपहास की संभावना। लेकिन जब परमेश्वर के वचन बाइबल के आधार पर हम यह जानने लगते हैं कि परमेश्वर हमें भली-भांति, अन्दर-बाहर से जानता है, हमारी कोई भी बात उससे छुपी नहीं है, लेकिन फिर भी वह हम से प्रेम करता है, हमारे बुरे से बुरे कार्य एवं पाप के बावजूद वह हमें क्षमा करके अपनी सन्तान, अपने परिवार का एक अंग बनाना चाहता है तो परमेश्वर द्वारा तिरिस्कृत होने का हमारा भय हटना आरंभ हो जाता है। और जब हम उसकी क्षमा के इस प्रस्ताव को स्वीकार करके, उससे अपने पापों की क्षमा माँग लेते हैं, अपने जीवन प्रभु यीशु को समर्पित कर देते हैं, तो वह हमें अन्य मसीही विश्वासियों की मण्डली में जोड़ देता है, जो हमारे समान ही क्षमा प्राप्त करके प्रभु के जन बने हैं, जो पापों के अंगीकार और क्षमा के संबंध को व्यक्तिगत अनुभव से जानते और समझते हैं। अब ऐसे लोगों की संगति में रहकर हम अपने पाप और कमज़ोरियों को एक दूसरे के सामने स्वीकार कर लेने, उनके लिए क्षमा माँग लेने से हिचकिचाते नहीं हैं।

   मसीही विश्वास का जीवन, संसार के अन्य लोगों की प्रवृत्ति के विपरीत, केवल हमारे जीवन के भले पहलुओं और भली बातों को दूसरों के सामने रखने से संबंधित नहीं है। इस मसीही विश्वास के जीवन में हम अपने जीवन के उन "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को भी लोगों के समक्ष लाते हैं, और इस बात की गवाही देते हैं कि जब हमने इन "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा परमेश्वर के सामने रखा और उससे उनके लिए क्षमा माँगी, तो उसने ना केवल हमें क्षमा किया, वरन हमारे उन "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को ही हमारे तथा अन्य लोगों के लिए लाभ की बात बना दिया। प्रभु यीशु के साथ इस प्रकार होने वाली जान-पहचान द्वारा मसीही विश्वास में आत्मिक चंगाई और क्षमा से मिली स्वतंत्रता के आनन्द को पाने का यही मार्ग है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


पाप की आवाज़ ऊँची हो सकती है, परन्तु क्षमा की आवाज़ उससे भी ऊँची होती है।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5

बाइबल पाठ: याकूब 5:16-20
James 5:16 इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। 
James 5:17 एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उसने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा। 
James 5:18 फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई।
James 5:19 हे मेरे भाइयों, यदि तुम में कोई सत्य के मार्ग से भटक जाए, और कोई उसको फेर लाए। 
James 5:20 तो वह यह जान ले, कि जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्यु से बचाएगा, और अनेक पापों पर परदा डालेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33


रविवार, 18 सितंबर 2016

अवसर


   जब जाने-माने लेखक स्टड्स टर्कल अपनी अगली पुस्तक लिखने के लिए विषय ढूँढ़ रहे थे तो उनके एक मित्र ने सुझाव दिया कि वे "मृत्यु" पर लिखें। आरंभ में तो टर्कल इस विषय से सहमत नहीं थे, परन्तु धीरे-धीरे उनके अन्दर इस पर लिखने के लिए विचार पनपने लगे; और जब 60 वर्ष के विवाहित जीवन के बाद उनकी पत्नि का देहांत हो गया, तब यह विषय उनके लिए और भी अधिक सजीव हो गया। अब इस विषय की वह पुस्तक उनके लिए एक व्यक्तिगत खोज बन गई; वे जानना चाहते थे कि जहाँ उनकी प्रीय गई हैं, वहाँ क्या है, वह कैसा स्थान है। उस पुस्तक के पृष्ठ, मसीही विश्वास की हमारी यात्रा में हमारे सामने आने वाले प्रभु यीशु तथा अनन्तकाल से संबंधित हमारे प्रश्नों और चिंताओं की एक मर्मस्पर्शी याद हैं।

   मैं धन्यवादी हूँ उस आश्वासन के लिए जो हम मसीही विश्वासियों को मिला है कि यदि हमने प्रभु यीशु पर विश्वास कर के उससे अपने पापों की क्षमा माँग ली है, तो मृत्योपरांत हम मसीह यीशु के साथ स्वर्ग में ही होंगे। इससे से बढ़कर और कोई आशा है ही नहीं; और अब यह हमारा विशेषाधिकार है कि हम इस सर्वोत्तम आशा को अधिक से अधिक लोगों के साथ बाँटने वाले हों। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने प्रोत्साहित किया, "पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:15)। जैसा दाऊद ने लिखा, "यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो" (1 इतिहास 16:8), हमारे पास भी यह सुअवसर है कि हम भी ऐसा ही करें।

   जिन सब से हम प्रेम रखते हैं उनके जीवनों की कहानियाँ अभी समाप्त नहीं हुई हैं, और हमारे पास उन्हें अपनी गवाही देने, प्रभु यीशु के प्रेम के अद्भुत तथा बहुमूल्य उपहार के बारे में बताने का विशेषाधिकार तथा अवसर है; इसका अवसर का सदुपयोग अवश्य करें। - रैंडी किलगोर


काश कि हमारे जीवन के दिन मसीह यीशु की गवाही 
देने के अवसरों का सदुपयोग करने की लालसा से भरे हों।

और अवसर को बहुमोल समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। - इफिसियों 5:16

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 16:7-13
1 Chronicles 16:7 तब उसी दिन दाऊद ने यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके भाइयों को सौंप दिया। 
1 Chronicles 16:8 यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो। 
1 Chronicles 16:9 उसका गीत गाओ, उसका भजन करो, उसके सब आश्चर्य-कर्मों का ध्यान करो। 
1 Chronicles 16:10 उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो। 
1 Chronicles 16:11 यहोवा और उसकी सामर्थ की खोज करो; उसके दर्शन के लिये लगातार खोज करो। 
1 Chronicles 16:12 उसके किए हुए आश्चर्यकर्म, उसके चमत्कार और न्यायवचन स्मरण करो। 
1 Chronicles 16:13 हे उसके दास इस्राएल के वंश, हे याकूब की सन्तान तुम जो उसके चुने हुए हो!

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 30-31
  • 2 कुरिन्थियों 11:1-15



शनिवार, 17 सितंबर 2016

समर्पित


   दूसरे विश्वयुद्ध और उसके तुरंत बाद के समय की पीढ़ी के लिए कोरी टेन बूम की जीवन-गाथा परमेश्वर भक्ति तथा बुद्धिमता की अनुपम गवाही है। वे निदरलैंड्स की निवासी थीं और उस समय में उनके देश पर रहे नाट्ज़ी कबज़े की यातनाओं की शिकार रही थीं। दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति से उनके देश को नाट्ज़ी आताताईयों से मिली रिहाई के बाद उन्होंने उन भयानक सताव और पीड़ा के दिनों में भी अपने मसीही विश्वास और परमेश्वर पर निर्भरता के अनुभवों का बयान किया।

   एक बार उन्होंने कहा, "मैंने अपने हाथों से बहुत कुछ थाम के रखा, और उस सब को खो भी दिया है। लेकिन जो भी मैंने परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर दिया, वह आज भी मेरे पास है।"

   कोरी हानि से भली-भांति परिचित थीं। उन्होंने उन नाट्ज़ी आताताईयों के हाथों अपने परिवार, संपदा और अपने आयु के वर्षों की भारी हानि झेली थी। लेकिन फिर भी उन्होंने सीखा था कि वे अपना ध्यान उस हानि पर नहीं वरन उस आत्मिक और भावनात्मक लाभ पर लगाएं जो उन सभी बातों को भी अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता के हाथों में समर्पित कर देने से होता है।

   आज हमारे लिए इसमें क्या शिक्षा है? हमें परमेश्वर के हाथों में क्या कुछ समर्पित कर देना चाहिए? परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 10 में दर्ज उस अमीर जवान के वृतांत के अनुसार, हमें सब कुछ परमेश्वर के हाथों में समर्पित करना चाहिए। वह जवान अनन्त जीवन का मार्ग पाने की लालसा से प्रभु यीशु के पास आया था; उसके पास बहुत धन-संपत्ति थी; परन्तु जब प्रभु यीशु ने उससे वह सब छोड़ कर अपने पीछे चलने के लिए कहा, तो वह राज़ी नहीं हुआ। उसने प्रभु यीशु का अनुसरण करने से भला उस संपत्ति के साथा रहना समझा जिससे उसे कोई संतुष्टि प्राप्त नहीं हुई थी; परिणामस्वरूप वह शोकित होकर वापस चला गया (पद 22)।

   कोरी टेन बूम के समान, यदि हम अपना सर्वस्व परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर देंगे, और उस सब की रखवाली तथा परिणाम के लिए परमेश्वर पर अपना भरोसा बनाए रखेंगे, तो हमारी आशा बनी रहेगी तथा हमें कोई हानि नहीं होगी। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर को समर्पित जीवन से अधिक सुरक्षित और कोई जीवन नहीं है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-27
Mark 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Mark 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर। 
Mark 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Mark 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं। 
Mark 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Mark 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था। 
Mark 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:24 चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालकों, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है! 
Mark 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Mark 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 27-29
  • 2 कुरिन्थियों 10



शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

शरणस्थान


   एक युवा महिला अपनी 4 तथा 2 वर्षीय पुत्रियों के साथ हवाई यात्रा कर रही थी, और उन दोनों को व्यस्त रखने में लगी हुई थी जिससे वे दोनों अन्त यात्रियों को परेशान ना करने पाएं। जब विमान-चालक ने सूचना देने के लिए विमान के लाऊडस्पीकरों पर उद्घोषणा करनी आरंभ करी तो छोटी बेटी शांत होकर, अपना सिर झुकाकर बैठ गई, और उद्घोषणा समाप्त होने पर बोली "आमीन", जो कि प्रार्थना कि समाप्ति पर बोला जाता है; उस बच्ची को लगा कि विमान-चालक प्रार्थना कर रहा है!

   मैं भी चाहती हूँ कि मेरा मन भी उस बच्ची के समान रहे, जो तुरंत प्रार्थना में परमेश्वर की ओर मुड़ जाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन-संहिता के अनेकों भजनों के रचियता दाऊद का मन ऐसा ही था। हम दाऊद द्वारा लिखे भजन, भजन 27 में इस बात के संकेत पाते हैं, जहाँ वह कठिन शत्रुओं का सामना करने के बारे में लिखता है (पद 2)। दाऊद लिखता है, "तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा" (भजन 27:8)। कुछ लोगों का मानना है कि इस भजन को लिखते समय दाऊद शाऊल से (1 शमूएल 21:10) या फिर अपने बेटे अबशालोम के षड़यंत्र से (2 शमूएल 15:13-14) जान बचाकर भागने के अपने अनुभवों को स्मरण कर रहा था। प्रार्थना करना और परमेश्वर पर निर्भर रहना दाऊद के रवैये में सर्वोपरि रहते थे; उसने परमेश्वर को अपना शरणस्थान बना रखा था (भजन 27:4-5)।

   हम सभी को शरणस्थान की आवश्यकता रहती है, विशेषकर कठिन परिस्थितियों और परेशानी के समयों में। इस, तथा अन्य भजनों को पढ़ना और प्रार्थना का आधार बनाना हमारे लिए अपने परमेश्वर पिता के साथ वैसा ही निकट संबंध बनाने में सहायक हो सकता है जैसा दाऊद के साथ था। जब हम परमेश्वर को अपना शरणस्थान बना लेंगे, तो स्वतः ही प्रार्थना और आवश्यकता के समयों में हम उसमें शांति तथा विश्राम भी पाएंगे। - ऐनी सेटास


प्रार्थना के समयों में परमेश्वर हमारे हृदयों को शांत करके, 
हमारे मनों को स्थिर करता है।

हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दोहाई दूं, तब मेरी सुन; शत्रु के उपजाए हुए भय के समय मेरे प्राण की रक्षा कर। - भजन 64:1

बाइबल पाठ: भजन 27:1-14
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा।। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9