ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 24 नवंबर 2010

सेवा करने के लिये बुलाये गये

जब जॉर्ज बुश राष्ट्रपति थे तो एक धन्यवादि पर्व के दिन अचानक वह विदेशों में स्थित अमरीकी सैनिकों के पास पहुंचे और उन्हें भोजन परोसने में भाग लिया। एक प्रेस रिपोर्टर ने टिप्पणी करी कि शायद कुछ सैनिक उस भोजन को निशानी के रूप में बचा कर रख लेंगें, क्योंकि राष्ट्रपति द्वारा परोसा गया भोजन रोज़ रोज़ तो नहीं मिलता।

संसार भर में, सभी निर्वाचित अफसर और नेता, जनता के ’सेवक’ होने के लिये नियुक्त हैं, इसलिये राष्ट्रपति के इस काम के लिये इतना अचंभित होने का कारण क्यों हुआ? क्योंकि चाहे कुछ वास्तव में सेवक बन कर कार्य करने वाले हों, अधिकांशतः तो सेवा लेने वाले ही होते हैं। वे ’सेवक’ केवल अपनी स्वार्थसिद्धी के लिये ही बनते हैं।

जब प्रभु यीशु मसीह अपने चेलों को प्रक्षिशित कर रहे थे तो उनके चेलों में बड़े बनने की होड़ हुई। तब प्रभु ने मसीही सेवक होने का अर्थ चेलों को स्वयं अपने जीवन और उद्देश्य के उदाहरण द्वारा समझाया: "और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। क्‍योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।" (मरकुस १०:४२-४५)

सच्चा मसीही और अच्छा अगुवा, सेवा लेना नहीं वरन पहले स्वयं दीन होकर सेवा करने वाला होता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अच्छा सेवक ही अच्छा अगुवा भी होता है।

क्‍योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे - मरकुस १०:४५


बाइबल पाठ: मरकुस १०:३५-४५

तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे।
उस ने उन से कहा, तुम क्‍या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं?
उन्‍होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे।
यीशु न उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्‍या मांगते हो; जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्‍या ले सकते हो?
उन्‍होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओंगे, और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे।
पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्‍हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बैठाना मेरा काम नहीं।
यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे।
और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं।
पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने।
और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने।
क्‍योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल:
यहेजेकेल २२, २३
१ पतरस १

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

टूटे संबंधों का खेद

ब्रिटेन के संगीत दल ’माईक और मैकैनिकस’ ने १९८० में एक बहुत प्रभावशाली और लोकप्रीय गीत The Living Years रिकॉर्ड किया। इस गीत में गीतकार अपने पिता की मृत्यु का शोक मनाता है, क्योंकि उनके संबंध तनाव और खामोशी से भरे थे न कि एक दूसरे के साथ अपने मन की बातें बांटने से। गीतकार बहुत दुखी और खेदित मन से कहता है कि "जो कुछ मैं उनसे कहना चाहता था वह न कह सका; काश मैंने उनके जीते जी अपने मन की बातें उनसे कह दी होतीं।"

राज दाउद भी इसी प्रकार अपने बेटे अबसलोम से टूटे संबंधों के कारण खेदित हुआ। अबसलोम क्रोधित था कि उसकी बहिन तमार के बलात्कारी अमनोन को दाउद ने दंड नही दिया, इसलियेअ अबसलोम अम्नोन की हत्या करके भाग गया (२ शमुएल १३:२१-३४)। दाउद का सेनपति योआब जानता था कि दाउद अपने भगोड़े बेटे के लिये तरसता है, इसलिये उसने योजना बनाई और अबसलोम को वापस राज्य में ले आया। लेकिन दाउद और अबसलोम के संबंध कभी ठीक नहीं हो सके। अबसलोम के मन की कड़ुवाहट ने एक ऐसे संघर्ष को जन्म दिया जिसमें बाप-बेटा एक दूसरे के विरोधी हो गए और युद्ध में अबसलोम की मृत्यु हुई (२ शमुएल १८:१४)। राजा दाउद के लिये यह एक कटु विजय थी, जिसमें उसने अपने मरे हुए बेटे और उससे टूटे हुए संबंध के लिये विलाप किया। लेकिन कोई खेद या विलाप दाउद के दुख को कम नहीं कर सकता था। यदि समय रहते संबंध सुधार लिये होते तो यह उसे अब यह समय न देखना पड़ता।

दाउद के खेद से हम टूटे संबंधों को समय रहते ठीक करने के विष्य में सीख सकते हैं। बिगड़ी बात को बनाने का प्रयास कुछ समय के लिये कष्टदायी हो सकता है, लेकिन समय रहते कुछ न करने का खेद उससे कहीं अधिक दुखदायी और सारे जीवन सताने वाला होगा।

प्रभु यीशु ने सिखाया: "इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे और जाकर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर तब आकर अपनी भेंट चढ़ा।" (मत्ती ५:२३, २४)

जैसे परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में होकर हमारे पापों को क्षमा किया है, यदि प्रभु यीशु का प्रेम हमारे मनों में हो तो वह हमें भी सामर्थ देता है कि हम भी क्षमा कर सकें "सब में श्रेष्‍ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्‍योंकि प्रेम अनेक पापों को ढ़ांप देता है।" ( १ पतरस ४:८) - बिल क्राउडर


टूटे संबंध ठीक किये जा सकते हैं, यदि प्रयास करने को तैयार हों तो।

तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा और चलते चलते यों कहता गया, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! मेरे बेटे, हाय ! मेरे बेटे अबसलोम ! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता, हाय ! अबसलोम ! मेरे बेटे, मेरे बेटे !! - २ शमुएल १८:३३

बाइबल पाठ: २ शमुएल १८:३१-१९:४

तब कूशी भी आ गया, और कूशी कहने लगा, मेरे प्रभु राजा के लिये समाचार है। यहोवा ने आज न्याय करके तुझे उन सभों के हाथ से बचाया है जो तेरे विरुद्ध उठे थे।
राजा ने कूशी से पूछा, क्या वह जवान अर्थात अबसलोम कल्याण से है? कूशी ने कहा, मेरे प्रभु राजा के शत्रु, और जितने तेरी हानि के लिये उठे हैं, उनकी दशा उस जवान की सी हो।
तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा? और चलते चलते यों कहता गया, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! मेरे बेटे, हाय ! मेरे बेटे अबसलोम ! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता, हाय ! अबसलोम ! मेरे बेटे, मेरे बेटे !!
तब योआब को यह समाचार मिला, कि राजा अबसलोम के लिये रो रहा है और विलाप कर रहा है।
इसलिये उस दिन की विजय सब लोगों की समझ में विलाप ही का कारण बन गयी, क्योंकि लोगों ने उस दिन सुना, कि राजा अपके बेटे के लिये खेदित है।
और उस दिन लोग ऐसा मुंह चुरा कर नगर में घुसे, जैसा लोग युद्ध से भाग आने से लज्जित होकर मुंह चुराते हैं।
और राजा मुंह ढांपे हुए चिल्ला चिल्ला कर पुकारता रहा, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! हाय अबसलोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे !

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल २०, २१
  • याकूब ५

सोमवार, 22 नवंबर 2010

पृथ्वी पर स्वर्ग?

सिंगापुर के एके भवन निर्माता ने अपनी नई गगनचुंबी भवन निर्माण योजना का विज्ञापन दिया: "पृथ्वी पर स्वर्ग अनुभव कीजिए।" शायद उसका तातपर्य था कि उसके बनाए नए मकान इतने आलिशान और ऐश्वर्यपूर्ण होंगे कि उनमें रहने वाले अलौकिक आनन्द की अनुभूति करेंगे।

सभोपदेशक का लेखक राजा सुलेमान असीम संपत्ति का मालिक था (सभोपदेशक १:१२)। उसने अपनी संपति और ऐश्वर्य द्वारा पृथ्वी पर स्वर्गीय आनन्द पाने के प्रयास में, जो संभव हुआ वह किया (सभोपदेशक २:१-१०), तौभी उसे संतुष्टि नहीं मिली। अन्ततः वह सांसारिक जीवन की मिथ्या से इतना निराश हुआ कि उसने अपने सारे प्रयसों और अनुभवों को एक ही शब्द में निचोड़ डाला - "व्यर्थ"। सभोपदेशक के दूसरे अध्याय में "व्यर्थ" शब्द का उपयोग उसने आठ बार किया। जब उसने पृथ्वी पर करी अपनी मेहनत और अपने कार्यों का विशेलेषण किया (सभोपदेशक २:११) तो उसने पाया कि उसमें, और किसी अन्य मनुष्य में कोई अन्तर नहीं है। इस एहसास ने कि जो कुछ वह जमा कर रहा है, उसके बाद किसी और को जाएगा, और न उसे पता है और न उसका कोई नियंत्रण है कि वह दूसरा उसके परिश्रम का उपयोग कैसे करेगा, उसके व्यर्थता के एहसास को और बढ़ा दिया। उसका निष्कर्ष यही था कि "मनुष्य के लिये खाने-पीने और परिश्र्म करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैं ने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।"(सभोपदेशक २:२४)

प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से सांसारिक वस्तुओं के संबंध में वायदा किया है: " इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे? क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।" (मत्ती ६:३१-३३)

पौलुस ने कहा "पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।" (कुलुस्सियों ३:२२)

पृथ्वी पर स्वर्ग की खोज में न रहें - यह संभव नहीं है, चाहे जैसा और चाहे जितना प्रयास कर लें। सांसारिक वस्तुओं की अभिलाषा छोड़कर परमेश्वर के राज्य और धार्मिकता की खोज करें, उसकी शांति से अपने मन को भर लें; और यथासमय प्रभु आपको स्वर्ग में भी स्थान देगा, जहां वह आपके लिये स्थान तैयार कर रहा है "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आ कर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।" (यूहन्ना १४:१-३) - सी. पी. हिया


जिन्होंने अपने मन स्वर्गीय वस्तुओं की ओर लगा रखे हैं वे पृथ्वी की वस्तुओं को गौण जानते हैं।

पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों ३:२२


बाइबल पाठ: सभोपदेशक २:१-२६

मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है?
मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
मैं ने बड़े बड़े काम किए, मैं ने अपने लिये घर बनवा लिए और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं;
मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिए, और उन में भांति भांति के फलदाई वृक्ष लगाए।
मैं ने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिए कि उन से वह वन सींचा जाए जिस में पौधे लगाए जाते थे।
मैं ने दास और दासियां मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए, और जितने मुझ से पहिले यरूशलेम में थे उस ने कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़-बकरियों का मैं स्वामी था।
मैं ने चान्दी और सोना और राजाओं और प्रान्तों के बहुमूल्य पदार्थों का भी संग्रह किया; मैं ने अपने लिये गवैयों और गाने वालियों को रखा, और बहुत सी कामिनियां भी, जिन से मनुष्य सुख पाते हैं, अपनी कर लीं।
इस प्रकार मैं अपने से पहिले के सब यरूशलेम वासियों से अधिक महान और धनाढय हो गया तौभी मेरी बुद्धि ठिकाने रही।
और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका, मैं ने अपना मन को किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्र्म के कारण आनन्दित हुआ और मेरे सब परिश्र्म से मुझे यही भाग मिला।
तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्र्म को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं।
फिर मैं ने अपने मन को फेरा कि बुद्धि और बावलेपन और मूर्खता के कार्यों को देखूं, क्योंकि जो मनुष्य राजा के पीछे आएगा, वह क्या करेगा? केवल वही जो होता चला आया है।
तब मैं ने देखा कि उजियाला अंधियारे से जितना उत्तम है, उतना बुद्धि भी मूर्खता से उत्तम है।
जो बुद्धिमान है, उसके सिर में आंखें रहती हैं, परन्तु मूर्ख अंधियारे में चलता है, तौभी मैं ने जान लिया कि दोनों की दशा एक सी होती है।
तब मैं ने मन में कहा, जैसी मूर्ख की दशा होगी, वैसी ही मेरी भी होगी; फिर मैं क्यों अधिक बुद्धिमान हुआ? और मैं ने मन में कहा, यह भी व्यर्थ ही है।
क्योंकि ने तो बुद्धिमान का और न मूर्ख का स्मरण सर्वदा बना रहेगा, परन्तु भविष्य में सब कुछ बिसर जाएगा।
बुद्धिमान क्योंकर मूर्ख के समान मरता है! इसलिये मैं ने अपने जीवन से घृणा की, क्योंकि जो काम संसार में किया जाता है मुझे बुरा मालूम हुआ; क्योंकि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।
मैं ने अपने सारे परिश्र्म के प्रतिफल से जिसे मैं ने धरती पर किया या घृणा की, क्योंकि अवश्य है कि मैं उसका फल उस मनुष्य के लिये छोड़ जाऊं जो मेरे बाद आएगा।
यह कौन जानता है कि वह मनुष्य बुद्धिमान होगा वा मूर्ख? तौभी धरती पर जितना परिश्र्म मैं ने किया, और उसके लिये बुद्धि प्रयोग की, उस सब का वही अधिकारी होगा। यह भी व्यर्थ ही है।
तब मैं अपने मन में उस सारे परिश्र्म के विषय जो मैं ने धरती पर किया था निराश हुआ।
क्योंकि ऐसा मनुष्य भी है, जिसका कार्य परिश्र्म और बुद्धि और ज्ञान से होता है और सफल भी होता है, तौभी उसको ऐसे मनुष्य के लिये छोड़ जाना पड़ता है, जिस ने उस में कुछ भी परिश्र्म न किया हो। यह भी व्यर्थ और बहुत ही बुरा है।
मनुष्य जो धरती पर मन लगा लगा कर परिश्र्म करता है उस से उसको क्या लाभ होता है?
उसके सब दिन तो दु:खों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता हैं; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।
मनुष्य के लिये खाने-पीने और परिश्र्म करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैं ने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।
क्योंकि खाने-पीने और सुख भोगने में मुझ से अधिक समर्थ कौन है?
जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वह बुद्धि और ज्ञान और आनन्द देता है, परन्तु पापी को वह दु:ख भरा काम ही देता है कि वह उसको देने के लिये संचय करके ढेर लगाए जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा हो। यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल १८, १९
  • याकूब ४

रविवार, 21 नवंबर 2010

स्वर्ग - कल्पना से परे

एक मसीही कॉलेज के प्राध्यापक ने पाया कि उसके विद्यार्थी स्वर्ग के विष्य में सही विचार नहीं रखते और स्वर्ग को एक गतिहीन और उबाने वाला स्थान समझते हैं। तो उनकी कल्पना को उभारने और उनकी गलतफहमी को दूर करने के लिये उसने उनसे यह प्रश्न किये:
कैसे लगे कि आप जब कल सुबह उठें तो - आपको पता लगे कि जिससे आप सबसे अधिक प्रेम करते हैं, वह आपसे आपके प्रेम से भी कहीं अधिक प्रेम करता है? सुबह आप अपने मनपसन्द संगीत को सुनते हुए उठें और आपका रोम रोम आनन्द से भर जाए? हर नया दिन, नए आनन्द के साथ बिताने को मिले? किसी बात के लिये मन में कोई ग्लानि या कड़ुवाहट कभी न हो? हर नए दिन में अपने अन्दर सम्पूर्ण रूप से देख सकें और जो देखें वह सब भला ही हो? परमेश्वर को वायु और श्वास के समान अपने अन्दर बाहर व्याप्त पाएं? परमेश्वर से, और उसमें होकर दूसरों से सच्चे मन से प्रेम करने वाले हों?

प्राध्यापक के इन टटोलने वाले प्रश्नों के उत्तर में स्वर्ग की इस नई अनुभूति को पसन्द करने की सहमति सभी छात्रों ने जताई। यदि स्वर्ग ऐसा हो तो वे अवश्य वहां होना चाहेंगे; वास्तव में स्वर्ग तो इससे भी कहीं अधिक आकर्षक और रोमांचकारी स्थान होगा। हम सब की भी यही लालसा होगी कि ऐसे महिमामय स्थान में हम भी सदा रहने पाएं। वह एक अवर्णनीय आनन्द का स्थान है, जिसकी सबसे बड़ी बात है वहां सदा बनी रहने वाली स्वयं प्रभु यीशु की उपस्थिति। "परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना १:१२) - और सन्तान अपने पिता के साथ पूरे आदर और अधिकार के साथ रहेगी।

प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों से कहा "...मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपके यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।" (यूहन्ना १४:२, ३)।

क्या आपने प्रभु का निमन्त्रण स्वीकार किया है? क्या आप उसके साथ स्वर्ग में होंगे? - वेर्नन ग्राउंड्स


संसार के सर्वोतम सुखों की तुलना स्वर्ग के आनन्द से नहीं की जा सकती।

परन्‍तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। - १ कुरिन्थियों २:९


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २१:१-८

फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्‍योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्‍वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है, वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, और उन का परमेश्वर होगा।
और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
और जो सिंहासन पर बैठा था, उस ने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्‍योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
फिर उस ने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
जो जय पाए, वही उन वस्‍तुओं का वारिस होगा, और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।
पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूतिर्पूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।

एक साल में बाइबल:
यहेजेकेल १६-१७
याकूब ३

शनिवार, 20 नवंबर 2010

उभारने को हाथ बढ़ाएं

सारा टयुकोल्स्की ने Soft Ball खेल के महत्वपूर्ण मुकाबले में अपने जीवन में पहली बार गेंद को 'Home Run' के लायक मारा, अर्थात उसने गेंद को पहली बार इतनी दूर मारा कि वह भागकर पूरा रन बनाने के लिये चारों बेसों को छूने की स्थिति में थी। वह इतनी उतेजित हुई कि भागते हुए पहले बेस को छूने से रह गई। अपनी गलती को ठीक करने के लिये वह जैसे ही तेज़ी से पलटी, उसके घुटने में चोट आ गई और वह रोती हुई पहले बेस की ओर रेंगकर आगे बढ़ने लगी। नियम के अनुसार उसे चारों बेसों को अपने आप छूना था तभी वह रन पूरा माना जाता और गिना जाता। उसकी टीम के खिलाड़ी इसमें उसकी कोई सहायता नहीं कर सकते थे।

ऐसे में पहले बेस पर खड़े प्रतिद्वन्दी टीम के खिलाड़ी मैलोरी ने अम्पायर से पूछा, "यदि हम उसे उठा कर चारों बेस पर बारी बारी ले जाएं तो क्या यह रन माना जाएगा?" अम्पायरों ने आपस में मंत्रणा करके अपनी सहमति जताई। तब सारा की प्रतिद्वन्दी टीम के खिलाड़ी मैलोरी और उसके एक और साथी ने अपने हाथ आपस में जोड़ कर सारा के बैठने के लिये ’कुर्सी’ बनाई और उसे उठा कर चारों बेसों पर ले गए जिससे सारा उन्हें छू कर अपना रन पूरा कर सकी और वह रन उसके नाम से गिना गया। इस प्रक्रिया को पूरा होते होते, प्रतिद्वन्दी टीम के इस निस्वार्थ करुणा के कार्य को देख कर बहुत से लोगों की आंखें भर आईं।

इस घटना से मिलने वाली शिक्षा स्पष्ट है। जब हमारे साथ के लोग या हमारे सहविश्वासी किसी बात में ठोकर खाकर गिरते हैं तो हमें इन खिलाड़ीयों के समान, सहायता और उन्हें उभारने के लिये अपने हाथ बढ़ाने चाहियें - " हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। (गलतियों ६:१, २)

जब किसी को गिरा हुआ देखें तो अपने हाथ उसे और दबाने या उस पर उंगली उठाने के लिये नहीं वरन उसे उभारने और खड़ा करने के लिये सहायतार्थ बढ़ाएं; " एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो" (इफिसियों ४:३२)। यह एक अद्भुत अवसर होता है कि "जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए" (१ पतरस ४:१०)। - डेव एगनर


जो इस संसार में दूसरों के बोझों को हलका करने के लिये हाथ बढ़ाते हैं उनके ये प्रयास कभी व्यर्थ नहीं कहलाते।

जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाई एक दूसरे की सेवा में लगाए। - १ पतरस ४:१०


बाइबल पाठ: १ पतरस ४:७-११

सब बातों का अन्‍त तुरन्‍त होने वाला है, इसलिये संयमी होकर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।
और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्‍योंकि प्रेम अनेक पापों को ढ़ांप देता है।
बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।
जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए।
यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों मे यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल १४-१५
  • याकूब २

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

बहुमूल्य फल

एक फल के लिये आप कितना खर्च करने को तैयार होंगे? जापान में एक व्यक्ति ने देनसुके तरबूज़ के लिये ६००० डौलर से अधिक का दाम दिया। केवल उत्तरी जापान के होकाकाईडो द्वीप पर ही पैदा होने वाले ये देन्सुके तरबूज़, देखने में बहुत सुन्दर गहरे हरे रंग की गेंद के समान होते हैं। १८ पौंड वज़न का यह तरबूज़ उस वर्ष पैदा हुए केवल कुछ हज़ार तरबूज़ों में से एक था। इस फल की विरलता के कारण उस वर्ष यह इतना महंगा बिका।

मसीही विश्वासियों के पास देन्सुके तरबूज़ों से भी अधिक मूल्यवान फल हैं। ये फल हैं ’आत्मा के फल'- "पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं" ( गलतियों ५:२२, २३)। इनमें से प्रत्येक प्रभु यीशु मसीह के चरित्र की समानता का एक रूप है। सुसमाचारों में वर्णित प्रभु के जीवन में हम इन में से प्रत्येक गुण को देखते हैं। अब वह इन्हें हमारे जीवन में उत्पन्न करना चाहता है - हमारी बोल-चाल, सोच-विचार और जीवन की विभिन्न बातों के लिये हमारी प्रतिक्रिया में (यूहन्ना १५:१-४)।

एक विरला और स्वादिष्ट फल बाज़ार में ऊंची कीमत तो पा सकता है, लेकिन मसीह के चरित्र की समानता इससे कहीं अधिक बहुमूल्य है। जब हम अपने पापों का अंगीकार करके परमेश्वर के आत्मा के आधीन हो जाते हैं तो वह हमारे जीवन को भी मसीह की समानता में बदलने लगता है। इस आत्मिक फल से हमारे अपने जीवन आनन्द से भर जाते हैं, हमारे संपर्क में आने वालों को आशीश मिलती और इस फल की भलाई अनन्तकाल तक बनी रहती है। - डेनिस फिशर


मसीह के लिये फलवंत होना मसीह के साथ सहभागिता पर निर्भर करता है।

आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं - गलतियों ५:२२, २३

बाइबल पाठ: गलतियों ५:२२ - २६

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,
और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
और जो मसीह यीशु के हैं, उन्‍होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।।
यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ११-१३
  • याकूब १

गुरुवार, 18 नवंबर 2010

मिट्टी में जान फूंकने वाला परमेश्वर

१९५० के एक उपन्यास में एक दृश्य है जहां गांव में चार जन एक दूसरे के सामने अपने पाप मान लेते हैं। ग्लानि से भर कर उनमें से एक चिल्ला उठता है, "परमेश्वर हमें पृथ्वी पर जीवित कैसे बर्दाशत कर सकता है? वह हमें मार कर अपनी सृष्टि को शुद्ध क्यों नहीं कर लेता?" तब दूसरा उसे उत्तर देता है, "क्योंकि परमेश्वर कुम्हार है; वह मिट्टी को उपयोगी बनाता है।"

संसार के आरंभ में परमेश्वर ने ऐसा ही किया। ’उत्पत्ति’ की पुस्तक बताती है कि सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने मनुष्य जाति को अनूठे रूप में सृजा। उसने ज़मीन की मिट्टी ली, उससे मानव का रूप गढ़ा (- जो शब्द मूल भाषा में इस रचना के कारय लिये उपयोग हुआ है वह एक मंझे हुए श्रेष्ठ कारीगर के कार्य करने को दिखाता है, जैसे कुम्हार मिट्टी लेकर उससे एक सुन्दर और उपयोगी पात्र बना देता है), और फिर उस मिट्टी के मानव में अपनी श्वास फूंक दी जिससे वह मिट्टी का पुतला जीवित प्राणी बन गया, जिसमें न केवल प्राण था वरन आत्मा भी थी और इसलिये वह मानव परमेश्वर के साथ संगति करने और उसकी सेवा करने के योग्य हुआ।

आदम और हव्वा के पाप के कारण मानव जाति की संगति परमेश्वर से टूट गई, लेकिन पाप में गिरे और फंसे मानव के प्रति परमेश्वर का प्रेम कम नहीं हुआ। वह फिर भी उसके हित में कार्य करता रहा और उस टूटी हुई संगति को पुनः स्थापित करने के लिये उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को भेजा ताकि वह उनके पापों के लिये अपना बलिदान दे और समस्त मानव जाति के लिये उद्धार का मार्ग तैयार कर दे।

परमेश्वर आज भी पाप के दलदल में मरे हुए मनुष्यों में नए जीवन की सांस फूंक रहा है - अब जो कोई प्रभु यीशु को और उसके बलिदान को स्वेच्छा से ग्रहण करता है वह पाप के दलदल से निकल कर परमेश्वर की संगति में आ जाता है और परमेश्वर के लिये उपयोगी पात्र बन जाता है।

उसका निमंत्रण सब के लिये है, आपके लिये भी "क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्‍तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।" (यूहन्ना ३:१६, १७)

धन्यवाद सहित इस महान उद्धार को स्वीकार कीजिये और परमेश्वर से नए जीवन का उपहार प्राप्त कीजिए। - मारविन विलियम्स


परमेश्वर ही है जो अशुद्ध को शुद्ध बना सकता है।

और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया। - उत्पत्ति २:७


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१४-२१

क्‍योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।
और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्‍तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उस को ऐसा नहीं जानेंगे।
सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो, वे सब नई हो गईं।
और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारे मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
सो हम मसीह के राजदूत हैं, मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ८-१०
  • इब्रानियों १३