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Tuesday, March 31, 2015

खुला एवं स्पष्ट


   वॉल स्ट्रीट जर्नल अखबार में छपे एक लेख में मिस्सी सलिवन ने ध्यान दिलाया कि विभिन्न उत्पादों के साथ आने वाले उपभोक्ता अनुबन्ध, वॉरण्टी, चेतावनियाँ आदि इतने छोटे अक्षरों में लिखे होते हैं कि वे प्रायः पढ़े नहीं जा सकते। उन उत्पादों के बनाने वालों द्वारा इन बातों को अस्पष्ट जान-बूझ कर किया जाता है, जिससे लोग उन बातों को पढ़ और समझ ना सकें। इसी कारण अधिकांशतः लोग उन अनुबन्धों पर हस्ताक्षर करके उन्हें स्वीकार कर लेने से पहले उन्हें पढ़ने का कष्ट ही नहीं करते। एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने इस संदर्भ में अपने नए स्मार्ट-फोन के साथ आए 32 पन्नों के अनुबन्ध को दिखाते हुए उस फोन को बनाने वाले कंपनी के विषय कहा, "वे यह चाहते ही नहीं कि आप इसे पढ़ और समझ सकें।"

   इसकी तुलना में हमारा प्रभु परमेश्वर सदैव इस प्रयास में रहता है कि वह अपने लोगों के साथ साफ और स्वीकारीय रीति से संवाद तथा संपर्क करे; उसकी सब बातें बिलकुल खुली और स्पष्ट होती हैं, किसी को उलझन में डालने या उससे छल-कपट करने की, उन्हें टेढ़ी-मेढ़ी या दोहरे अर्थ वाली बातों में फंसाने की उसकी कतई मनशा नहीं है। इस्त्राएलियों के वाचा किए हुए कनान देश से प्रवेश करने से ठीक पहले मूसा ने उन लोगों से परमेश्वर के वचन और निर्देशों के सम्बंध में कहा: "देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें" (व्यवस्थाविवरण 30:11, 19)।

   प्रभु परमेश्वर चाहता है कि हम उसके उद्देश्यों एवं योजनाओं को खुले तौर पर जाने, उन्हें स्पष्ट रीति से समझें जिससे किसी ज़ोर-ज़बर्दस्ती के अन्तर्गत अथवा अन्ध-विश्वास में नहीं वरन पूरी तरह से जाँच-परख कर और सन्तुष्ट होकर ही हम स्वेच्छा से उसे स्वीकार करने तथा उसके साथ चलने का निर्णय लें; तब ही उसके प्रति हमारा प्रेम, विश्वास और आज्ञाकारिता सही तथा सार्थक रहने पाएंगी और इससे हमारा जीवन सफल और दीर्घायु वाला बनने पाएगा (व्यवस्थाविवरण 30:20)। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की हमारे साथ बातचीत में कहीं कुछ छुपा या अस्पष्ट नहीं है।

परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 30:11-20
Deuteronomy 30:11 देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। 
Deuteronomy 30:12 और न तो यह आकाश में है, कि तू कहे, कि कौन हमारे लिये आकाश में चढ़कर उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:13 और न यह समुद्र पार है, कि तू कहे, कौन हमारे लिये समुद्र पार जाए, और उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:14 परन्तु यह वचन तेरे बहुत निकट, वरन तेरे मुंह और मन ही में है ताकि तू इस पर चले। 
Deuteronomy 30:15 सुन, आज मैं ने तुझ को जीवन और मरण, हानि और लाभ दिखाया है। 
Deuteronomy 30:16 क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे। 
Deuteronomy 30:17 परन्तु यदि तेरा मन भटक जाए, और तू न सुने, और भटक कर पराए देवताओं को दण्डवत करे और उनकी उपासना करने लगे, 
Deuteronomy 30:18 तो मैं तुम्हें आज यह चितौनी दिए देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे; और जिस देश का अधिकारी होने के लिये तू यरदन पार जा रहा है, उस देश में तुम बहुत दिनों के लिये रहने न पाओगे। 
Deuteronomy 30:19 मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें; 
Deuteronomy 30:20 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है, और ऐसा करने से जिस देश को यहोवा ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को देने की शपथ खाई थी उस देश में तू बसा रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26


Monday, March 30, 2015

निगरानी


   मेरे घर के निकट ही अधिकारियों ने ’लाल बत्ती’ पर रुकने की आज्ञा के उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए कैमरा लगाया है। जब भी कोई ’लाल बत्ती’ पर रुके बिना गाड़ी निकाल ले जाता है तो उसके घर पर नियम के उल्लंघन का दण्ड भरने का चालान और साथ में उस उल्लंघन के प्रमाणस्वरूप उस कैमरे से लिया गया उन का फोटो पहुँचा दिया जाता है, और उन्हें वह दण्ड भरना पड़ता है।

   कभी कभी मैं परमेश्वर को भी उस कैमरे की समानता में देखता हूँ - वो वहाँ ऊपर हमारी प्रत्येक बात, प्रत्येक कार्य पर नज़र रखे हुए है, हमारा हर एक पल उसकी निगरानी में है। वह हमारे पाप भी देखता है (इब्रानियों 4:13) और हमारी भले कार्यों को भी। जब हम चर्च या किसी व्यक्ति की आवश्यकता की पूर्ति के लिए दान देते हैं तो वह हमारे दान को भी देखता है और दान के पीछे हमारी भावना को भी जानता है (मरकुस 12:41-44)। वह हमारी व्यक्तिगत प्रार्थनाएं भी सुनता है और हमारे उपवास में हमारी बाहरी दशा का भी ध्यान करता है (मत्ती 6:6, 18)।

   हमारा इस एहसास के साथ जीवन व्यतीत करना कि परमेश्वर हमारी निगरानी कर रहा है तथा हमारे बारे में सब कुछ जानता है, हमें दूसरों की नज़रों में होने से संबंधित व्यर्थ चिंताओं से बचाता है। जब हम कुछ अच्छा या सही करें तो हमें किसी अन्य देखने वाले से प्रशंसा पाने की इच्छा रखने की आवश्यकता नहीं है। यदि हम किसी पाप में पड़ें, तो उसके लिए परमेश्वर से तथा जिस को हानि पहुँची है उससे क्षमा पा लेने के पश्चात और किसी से कुछ पा लेने का ध्यान करने की भी आवश्यकता नहीं है। हम यह जानकर निश्चिंत रह सकते हैं कि, "देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए।..." (2 इतिहास 16:9)। परमेश्वर की निगरानी में रहने से बढ़कर निशचिंतता की बात और कुछ हो नहीं सकती। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


लोग देखते हैं कि हम क्या कर रहे हैं; परमेश्वर देखता है कि हम क्यों कर रहे हैं!

वह हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला देगा। जो सुकर्म में स्थिर रहकर महिमा, और आदर, और अमरता की खोज में है, उन्हें वह अनन्त जीवन देगा। पर जो विवादी हैं, और सत्य को नहीं मानते, वरन अधर्म को मानते हैं, उन पर क्रोध और कोप पड़ेगा। - रोमियों 2:6-8

बाइबल पाठ: मत्ती 6:1-5, 16-18
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। 
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके। 
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। 
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:16 जब तुम उपवास करो, तो कपटियों की नाईं तुम्हारे मुंह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:17 परन्तु जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो। 
Matthew 6:18 ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने; इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39



Sunday, March 29, 2015

दे दो


   कई साल पहले की बात है हमारे एक जवान मित्र ने हम से हमारी कार अपने प्रयोग के लिए माँगी। उसके आग्रह को सुनकर मुझे और मेरी पत्नि को पहले तो संकोच हुआ, आखिरकर वह हमारी कार थी; हम उसके स्वामी थे, हमारे कार्यों के लिए हमें उसकी आवश्यक्ता होती रहती थी। लेकिन शीघ्र ही हमें ग्लानि हुई और हमने वह कार उस समय उसे प्रयोग करने के लिए दे दी, क्योंकि हमें यह बोध हुआ कि परमेश्वर चाहता है कि हम दूसरों की ज़रूरतों में उन की सहायता करें। हमने कार की चाबियाँ उसे दीं और वह 30 मील दूर होने वाली एक जवानों की सभा का संचालन करने के लिए चला गया। उस सभा को प्रभु ने अनेक जवानों को मसीही विश्वास में लाने के लिए उपयोग किया।

   प्रभु यीशु ने अपने चेलों से एक अन्य जन के गदहे को खोल कर ले आने के लिए कहा; प्रभु ने चेलों से यह भी कहा कि "यदि तुम से कोई पूछे, यह क्यों करते हो? तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है; और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा" (मरकुस 11:3)। उसी गदहे पर बैठकर प्रभु यीशु ने इस इतवार के दिन, जिसे हम ’खजूर का इतवार’ के नाम से भी जानते हैं, यरुशालेम में प्रवेश किया और फिर वहाँ जगत के सभी लोगों के पापों के लिए बलिदान हुआ, सारे संसार के समस्त लोगों के लिए सेंत-मेंत उद्धार का मार्ग बना कर दे दिया।

   हम सब के विचार करने के लिए यहाँ एक शिक्षा है: हम सब के पास ऐसी वस्तुएं होती हैं जो हमें प्रीय होती हैं, जिनके विषय हम धारणा रखते हैं कि हम उन्हें अपने से कभी पृथक नहीं होने दे सकते। वो हमारी नई गाड़ी हो सकता है, कोई अच्छा वस्त्र हो सकता है, कोई अन्य वस्तु हो सकती है, कठिनाई से सप्ताह भर के कार्यों में से अपने लिए निकाले गए कुछ घंटे हो सकते हैं। क्या हम इन्हें या इनके समान किसी अन्य वस्तु को दे देने के लिए तैयार होंगे यदि कोई जिसे उनकी आवश्यकता है, हम से उन्हें माँगता है?

   यदि आपको लगता है कि परमेश्वर का आत्मा आपसे बात कर रहा है और आप से कह रहा हे कि उस वस्तु को या अपने समय को जाने दो, दे दो; तो जैसे उस गदहे के स्वामी ने प्रभु यीशु के उपयोग के लिए अपने गदहे को दे दिया था, वैसे ही आप भी अपनी वस्तु अतहवा समय को दे दें। ऐसा करने से आप आशीषित, वह वस्तु या समय धन्य और प्रभु यीशु महिमान्वित होगा। - डेविड ऐग्नर


परमेश्वर हमें हमारी आवश्यकता के अनुसार सब कुछ देता है जिससे हम उन्हें भी दे सकें जो आवश्यकता में हैं।

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। - 2 कुरिन्थियों 9:8

बाइबल पाठ: मरकुस 11:1-11
Mark 11:1 जब वे यरूशलेम के निकट जैतून पहाड़ पर बैतफगे और बैतनिय्याह के पास आए, तो उसने अपने चेलों में से दो को यह कहकर भेजा। 
Mark 11:2 कि अपने साम्हने के गांव में जाओ, और उस में पंहुचते ही एक गदही का बच्‍चा जिस पर कभी कोई नहीं चढ़ा, बन्‍धा हुआ तुम्हें मिलेगा, उसे खोल लाओ। 
Mark 11:3 यदि तुम से कोई पूछे, यह क्यों करते हो? तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है; और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा। 
Mark 11:4 उन्होंने जा कर उस बच्‍चे को बाहर द्वार के पास चौक में बन्‍धा हुआ पाया, और खोलने लगे। 
Mark 11:5 और उन में से जो वहां खड़े थे, कोई कोई कहने लगे कि यह क्या करते हो, गदही के बच्‍चे को क्यों खोलते हो? 
Mark 11:6 उन्होंने जैसा यीशु ने कहा था, वैसा ही उन से कह दिया; तब उन्होंने उन्हें जाने दिया। 
Mark 11:7 और उन्होंने बच्‍चे को यीशु के पास लाकर उस पर अपने कपड़े डाले और वह उस पर बैठ गया। 
Mark 11:8 और बहुतों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछाए और औरों ने खेतों में से डालियां काट काट कर फैला दीं। 
Mark 11:9 और जो उसके आगे आगे जाते और पीछे पीछे चले आते थे, पुकार पुकार कर कहते जाते थे, कि होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है। 
Mark 11:10 हमारे पिता दाऊद का राज्य जो आ रहा है; धन्य है: आकाश में होशाना। 
Mark 11:11 और वह यरूशलेम पहुंचकर मन्दिर में आया, और चारों ओर सब वस्‍तुओं को देखकर बारहों के साथ बैतनिय्याह गया क्योंकि सांझ हो गई थी।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16




Saturday, March 28, 2015

मित्र


   सच्ची मित्रता जीवन के सबसे उत्त्म उपहारों में से एक है। सच्चे मित्र अपने मित्रों के लिए एक विशेष भलाई चाहते हैं, वह भलाई जो सबसे उत्कृष्ठ है, अर्थात यह कि उनके मित्र परमेश्वर को जानें तथा परमेश्वर से अपने सारे मन, प्राण और आत्मा से प्रेम करें। डिट्रिश बॉनहॉफर ने, जो जर्मनी के एक विख्यात पास्टर थे और अपने मसीही विश्वास के लिए शहीद हुए थे, इस विषय पर कहा, "मित्र अपना लक्ष्य दूसरे  के लिए परमेश्वर की इच्छा द्वारा निर्धारित करते हैं", अर्थात, सच्चा मित्र अपने मित्र को परमेश्वर कि इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित करता रहता है।

   ऐसे सच्ची मित्रता का एक उत्कृष्ठ उदाहरण है परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद के मित्र योनातान का। योनातान का पिता, राजा शाऊल, दाऊद का दुश्मन हो गया था, और दाऊद शाऊल से अपनी जान बचाकर जीप के बियाबान में होरेश नामक स्थान में जा छुपा था। योनातान उसे ढूँढ़ता हुआ, उससे मिलने के लिए वहाँ आया। इस घटना का महत्व योनातान के दाऊद से मिलने जाने के उद्देश्य में देखा जा सकता है, "शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया" (1 शमूएल 23:16); योनातान दाऊद के पास इसलिए गया कि उस से परमेश्वर के बारे में चर्चा करे तथा दाऊद को ढाढ़स दिलाए।

   मसीही विश्वास में मित्रता का यही सार है - परस्पर सामन्य रुचि, एक-दूसरे के प्रति लगाव, आपस में होने वाले मनोरंजन से ऊपर उठकर, अपने मित्र के जीवन में अनन्त आशीष के बीजों को बोना, उन्हें परमेश्वर की बुद्धिमता को स्मरण दिलाते रहना, अपने मित्रों की आत्मा को परमेश्वर के प्रेम भरे वचनों से तरोताज़ा करते रहना, सभी परिस्थितियों में उन्हें परमेश्वर में ढाढ़स बंधाना।

   अपने मित्रों के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करें, और परमेश्वर से माँगें कि वह आपको उनके साथ बाँटने के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त वचन दे जिस से वे परमेश्वर के वचन में होकर एक नई सामर्थ पा सकें। - डेविड रोपर


सच्चा मित्र परमेश्वर से मिला उपहार और अपने मित्रों के परमेश्वर के समीप बढ़ने में सहायक होता है।

जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है। जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है। - नीतिवचन 27:9-10

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 23:12-18
1 Samuel 23:12 फिर दाऊद ने पूछा, क्या कीला के लोग मुझे और मेरे जनों को शाऊल के वश में कर देंगे? यहोवा ने कहा, हां, वे कर देंगे। 
1 Samuel 23:13 तब दाऊद और उसके जन जो कोई छ: सौ थे कीला से निकल गए, और इधर उधर जहां कहीं जा सके वहां गए। और जब शाऊल को यह बताया गया कि दाऊद कीला से निकला भागा है, तब उसने वहां जाने की मनसा छोड़ दी। 
1 Samuel 23:14 जब दाऊद तो जंगल के गढ़ों में रहने लगा, और पहाड़ी देश के जीप नाम जंगल में रहा। और शाऊल उसे प्रति दिन ढूंढ़ता रहा, परन्तु परमेश्वर ने उसे उसके हाथ में न पड़ने दिया। 
1 Samuel 23:15 और दाऊद ने जान लिया कि शाऊल मेरे प्राण की खोज में निकला है। और दाऊद जीप नाम जंगल के होरेश नाम स्थान में था; 
1 Samuel 23:16 कि शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया। 
1 Samuel 23:17 उसने उस से कहा, मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू ही इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूंगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल भी जानता है। 
1 Samuel 23:18 तब उन दोनों ने यहोवा की शपथ खाकर आपस में वाचा बान्धी; तब दाऊद होरेश में रह गया, और योनातन अपने घर चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44



Friday, March 27, 2015

संदर्भ


   हमारे एक मित्र ने अचानक ही अटपटी और निराशाजनक बातें कहना आरंभ कर दिया, जिससे हम लोग उसके लिए चिंतित हुए, उसे प्रोत्साहित करने लगे और उसे सलाह देने लगे। बाद में पता पड़ा कि वह ऐसा मज़ाक में कर रहा था, जान-बूझ कर कुछ गानों की पंक्तियों को इधर-उधर से मिला कर बोल रहा था जिससे लोग उसके साथ वार्तालाप आरंभ कर सकें। जिन मित्रों ने उसकी सहायता करने के लिए प्रयास किए, उन्होंने अपना समय ही व्यर्थ किया क्योंकि उसे किसी सहायात अथवा सलाह की आवश्यकता थी ही नहीं। हमारे उस मित्र द्वारा कही गई बातों के कोई दुषपरिणाम तो नहीं हुए, लेकिन ऐसा हो सकता था यदि किसी ने उसकी सहायाता के लिए अपने किसी आवश्यक कार्य या ज़िम्मेदारी को छोड़ कर उसके प्रति अधिक ध्यान दिया होता। संदर्भ से हटकर कहे गए गीतों के बोल आनन्द नहीं, परेशानी देने वाले हो गए।

   कुछ लोगों का जीवन की अनेक बातों के प्रति यही रवैया रहता है; वे किसी अन्य की कही गई बात को संदर्भ से हटाकर बताते हैं जिससे कि दूसरों का ध्यान आकर्षित कर सकें या किसी बहस को जीत सकें। अन्य कुछ तो इससे भी अधिक चालाक एवं खतरनाक होते हैं - वे दूसरों के ऊपर अधिकार जताने के लिए सत्य को ना केवल संदर्भ से हटाकर, वरन तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं। ऐसे सभी लोग ना केवल दूसरों के जीवनों को वरन उनकी आत्माओं को भी खतरे में डाल देते हैं। जब लोग दूसरों के शब्दों को संदर्भ से हटाकर या तोड़-मरोड़ कर प्रयोग करते हैं जिससे कि वे सुनने वालों को अपनी मनसा के अनुसार चला सकें, तो इसके नुकसान से बचने का एक ही उपाय होता है - उन शब्दों की वास्तविकता को जानना, उन्हें उनके सही संदर्भ में देखना और समझना।

   यही बात और उपाय परमेश्वर के वचन बाइबल के साथ भी लागू होती है। बहुतेरे हैं जो बाइबल की बातों को संदर्भ से हटाकर या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं जिससे दूसरों को गलत प्रभाव में लाएं और उनसे कुछ अनुचित करवाएं। परमेश्वर के वचन की जो सच्चाईयाँ परमेश्वर द्वारा हमारी आशीष और आनन्द के लिए दी गई हैं, ऐसा करने से व्यर्थ एवं अनेपक्षित परेशानी का कारण हो जाती हैं। बाइबल की सच्चाईयों को स्वयं बाइबल को पढ़ने के द्वारा ही जाना जा सकता है; बाइबल परमेश्वर का वचन है, और परमेश्वर किसी को भी कभी कोई अनुचित व्यवहार नहीं सिखाता। शैतान ने प्रभु यीशु की भी परीक्षा परमेश्वर के वचन को उसके संदर्भ से बाहर कह कर के करी थी, और प्रभु यीशु ने शैतान की गलत बातों के इस हमले को परमेश्वर के वचन के सही प्रयोग द्वारा ही निष्क्रीय किया था (लूका 4)। परमेश्वर ने अपने वचन को हमारे हाथों में इसीलिए रखा है और उस वचन को समझाने तथा हमारा मार्ग-दर्शन करने के लिए अपने विश्वासियों को अपनी पवित्र-आत्मा को दिया है जिससे हम ना तो कभी धोखा खाएं और ना ही किसी गलत मार्ग पर चलें।

   परमेश्वर के वचन का नियमित अध्ययन करें जिससे कि उसके संदर्भ से हटाकर कहे जाने के दुरुपयोग के प्रति सचेत रहें, तथा ऐसा किए जाने के दुषप्रभावों से बचकर रह सकें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि हम परमेश्वर के सत्य को थामे रहेंगे तो शैतान के झूठ में कभी फंसने नहीं पाएंगे।

कि शैतान का हम पर दांव न चले, क्योंकि हम उस की युक्तियों से अनजान नहीं। - 2 कुरिन्थियों 2:11 

बाइबल पाठ: लूका 4:1-13
Luke 4:1 फिर यीशु पवित्रआत्मा से भरा हुआ, यरदन से लैटा; और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उस की परीक्षा करता रहा। 
Luke 4:2 उन दिनों में उसने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी। 
Luke 4:3 और शैतान ने उस से कहा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो इस पत्थर से कह, कि रोटी बन जाए। 
Luke 4:4 यीशु ने उसे उत्तर दिया; कि लिखा है, मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा। 
Luke 4:5 तब शैतान उसे ले गया और उसको पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए। 
Luke 4:6 और उस से कहा; मैं यह सब अधिकार, और इन का वैभव तुझे दूंगा, क्योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूं, उसी को दे देता हूं। 
Luke 4:7 इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा। 
Luke 4:8 यीशु ने उसे उत्तर दिया; लिखा है; कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर; और केवल उसी की उपासना कर। 
Luke 4:9 तब उसने उसे यरूशलेम में ले जा कर मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उस से कहा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहां से नीचे गिरा दे। 
Luke 4:10 क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें। 
Luke 4:11 और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पांव में पत्थर से ठेस लगे। 
Luke 4:12 यीशु ने उसको उत्तर दिया; यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना। 
Luke 4:13 जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30



Thursday, March 26, 2015

पिता की सृष्टि


   कॉलेज से अपने स्नात्क होने से पूर्व के वर्ष में अमान्डा का दृष्टिकोण इस पृथ्वी के प्रति एक मसीही विश्वासी की ज़िम्मेदारी को लेकर बदलने लगा। उस समय तक अमान्डा की धारणा रही थी कि प्रभु यीशु के साथ उसके संबंध का पृथ्वी के पर्यावरण के प्रति उसकी ज़िम्मेदारी से कुछ लेना-देना नहीं है। लेकिन अमान्डा ने इस विषय पर पुनःविचार करना तब आरंभ किया जब उसके सामने यह प्रश्न रखा गया कि एक मसिही विश्वासी का इस पृथ्वी की देखरेख तथा संभाल में क्या योगदान हो सकता है - विशेषकर उन लोगों के संदर्भ में जो सबसे ज़रुरतमन्द हैं और अनेक ऐसे संसाधानों से वंचित हैं जिनकी अनेक उन्नत देशों में बरबादी या दुरुपयोग हो रहा है।

   अमान्डा ने पहचाना कि इस सुन्दर संसार के प्रति, जिसे हमारे परमेश्वर पिता ने बना कर हमें दिया है, एक भण्डारीपन है। इस संसार की सभी वस्तुओं और इसके लोगों के प्रति हमारी देखभाल और संभाल परमेश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा को प्रगट करता है। यह बात परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए दो सिद्धांतों पर आधारित है।

   पहला सिद्धांत यह कि पृथ्वी परमेश्वर की है (भजन 24:1-2)। भजनकार ने परमेश्वर की इस सृष्टि के लिए और उसके स्वामित्व के लिए प्रशंसा करी - आकाशमण्डल, पृथ्वी और उन में का सब कुछ परमेश्वर का ही है, उसी ने सब कुछ को सृजा है। इन सब पर परमेश्वर का प्रभुत्व है (भजन 93:1-2) और वह इन सबकी परवाह तथा देखभाल करता है (मत्ती 6:26-30)।

   दूसरा सिद्धांत यह कि परमेश्वर ने इस पृथ्वी की देखरेख का दायित्व मनुष्य को सौंपा है (उत्पत्ति 1:26-28), और इस दायित्व म