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सोमवार, 23 नवंबर 2020

निगरानी

 

         सू तब छोटी ही थी जब उसके माता-पिता का तलाक हो गया। उसकी देखभाल और पालन-पोषण तथा अन्य बातों को लेकर होने वाले वैधानिक संघर्षों के निवारण होने तक के लिए सू को एक बाल-आश्रम में भेज दिया गया। सू वहाँ अपने आप को अकेला और तिरस्कृत अनुभव करती थी, बड़े बच्चे उसे तंग करते थे। उसकी माँ उससे मिलाने के लिए महीने में एक ही बार आया करती थी, और उसने अपने पिता को शायद ही कभी देखा हो। लेकिन कई वर्षों के बाद उसकी माँ ने सू को बताया कि उस बाल-आश्रम के नियम उसकी माँ को सू से और अधिक मिलने आने से रोकते थे, किन्तु सू की माँ प्रतिदिन आश्रम के बाहर बाड़े के निकट खड़ी रहती थी, कि उसे सू की एक झलक मिल जाए। उसने सू को बताया, “कभी-कभी मैं बस तुम्हें बाग़ में खेलते हुए देखती रहती थी, यह जानने के लिए कि तुम ठीक हो कि नहीं।”

         जब सू ने अपनी यह कहानी बताई, तो मुझे इससे परमेश्वर के प्रेम की एक झलक मिली। अपने जीवन के संघर्षों में कभी-कभी हमें लग सकता है कि हम अकेले पड़ गए हैं, त्याग दिए गए हैं। किन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हमारा स्वर्गीय पिता परमेश्वर निरंतर हम पर दृष्टि बनाए रखता है (भजन 33:18)। चाहे हम उसे अपनी शारीरिक आँखों से देख नहीं सकते हैं, फिर भी वह हमेशा हमारे साथ बना रहता है। एक प्रेमी अभिभावक के समान उसकी दृष्टि और उसका मन हमेशा हमारी ओर लगा रहता है। वह सू की माँ के समान मजबूर नहीं है, और कभी भी हमारे पक्ष में हस्तक्षेप कर सकता है।

         भजन 91 वर्णन करता है कि किस प्रकार परमेश्वर अपने बच्चों को सुरक्षित रखता है, कठिनाइयों से छुड़ाता है, और उन्हें दृढ़ता से थामे रहता है। वह हमारे लिए शरणस्थान और आश्रय से भी बढ़कर है। जब हम जीवन की अंधियारी गलियों में से होकर निकलते हैं, हम इस बात से शान्ति पा सकते हैं कि हमारा सर्व-सामर्थी प्रभु निरंतर हम पर दृष्टि लगाए हुए है और हमारे जीवनों में सक्रिय है; हम हमेशा उसकी निगरानी में रहते हैं। उसने कहा है, “जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।” (पद 15)। - लेस्ली कोह

 

हमारा स्वर्गीय पिता परमेश्वर सदा हमारे निकट रहता है।


देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करुणा की आशा रखते हैं बनी रहती है, कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे। - भजन संहिता 33:18-19

बाइबल पाठ: भजन 91:1-6

भजन संहिता 91:1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

भजन संहिता 91:2 मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।

भजन संहिता 91:3 वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;

भजन संहिता 91:4 वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।

भजन संहिता 91:5 तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,

भजन संहिता 91:6 न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5

सोमवार, 30 मार्च 2015

निगरानी


   मेरे घर के निकट ही अधिकारियों ने ’लाल बत्ती’ पर रुकने की आज्ञा के उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए कैमरा लगाया है। जब भी कोई ’लाल बत्ती’ पर रुके बिना गाड़ी निकाल ले जाता है तो उसके घर पर नियम के उल्लंघन का दण्ड भरने का चालान और साथ में उस उल्लंघन के प्रमाणस्वरूप उस कैमरे से लिया गया उन का फोटो पहुँचा दिया जाता है, और उन्हें वह दण्ड भरना पड़ता है।

   कभी कभी मैं परमेश्वर को भी उस कैमरे की समानता में देखता हूँ - वो वहाँ ऊपर हमारी प्रत्येक बात, प्रत्येक कार्य पर नज़र रखे हुए है, हमारा हर एक पल उसकी निगरानी में है। वह हमारे पाप भी देखता है (इब्रानियों 4:13) और हमारी भले कार्यों को भी। जब हम चर्च या किसी व्यक्ति की आवश्यकता की पूर्ति के लिए दान देते हैं तो वह हमारे दान को भी देखता है और दान के पीछे हमारी भावना को भी जानता है (मरकुस 12:41-44)। वह हमारी व्यक्तिगत प्रार्थनाएं भी सुनता है और हमारे उपवास में हमारी बाहरी दशा का भी ध्यान करता है (मत्ती 6:6, 18)।

   हमारा इस एहसास के साथ जीवन व्यतीत करना कि परमेश्वर हमारी निगरानी कर रहा है तथा हमारे बारे में सब कुछ जानता है, हमें दूसरों की नज़रों में होने से संबंधित व्यर्थ चिंताओं से बचाता है। जब हम कुछ अच्छा या सही करें तो हमें किसी अन्य देखने वाले से प्रशंसा पाने की इच्छा रखने की आवश्यकता नहीं है। यदि हम किसी पाप में पड़ें, तो उसके लिए परमेश्वर से तथा जिस को हानि पहुँची है उससे क्षमा पा लेने के पश्चात और किसी से कुछ पा लेने का ध्यान करने की भी आवश्यकता नहीं है। हम यह जानकर निश्चिंत रह सकते हैं कि, "देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए।..." (2 इतिहास 16:9)। परमेश्वर की निगरानी में रहने से बढ़कर निशचिंतता की बात और कुछ हो नहीं सकती। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


लोग देखते हैं कि हम क्या कर रहे हैं; परमेश्वर देखता है कि हम क्यों कर रहे हैं!

वह हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला देगा। जो सुकर्म में स्थिर रहकर महिमा, और आदर, और अमरता की खोज में है, उन्हें वह अनन्त जीवन देगा। पर जो विवादी हैं, और सत्य को नहीं मानते, वरन अधर्म को मानते हैं, उन पर क्रोध और कोप पड़ेगा। - रोमियों 2:6-8

बाइबल पाठ: मत्ती 6:1-5, 16-18
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। 
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके। 
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। 
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:16 जब तुम उपवास करो, तो कपटियों की नाईं तुम्हारे मुंह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:17 परन्तु जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो। 
Matthew 6:18 ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने; इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39