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Tuesday, November 30, 2010

एक ही रास्ता

हम जमैका में अपना काम समाप्त कर चुके थे और अब हम अमेरिका में अपने घर वापस जाना चाहते थे। हमने इसके लिये हवाई जहाज़ के टिकिट भी समय रहते ले लिये थे, इस दृढ़ विश्वास के साथ कि टिकिट बेचने वाली विमान सेवा कंपनी हमें अपने वायदे के अनुसार लेकर भी जाएगी। परन्तु जब जाने का समय आया तो विमान सेवा कंपनी में कुछ समस्याओं के कारण वह कंपनी अपना वायदा पूरा करने में असमर्थ निकली, और हमें बार बार यही घोषणा सुनने को मिल रही थी कि "आपकी उड़ान रद्द हो गई है"। हमारे टिकिट पर चाहे जो लिखा हो, वास्तविकता यह थी कि हम उस विमान सेवा कंपनी द्वारा जमैका से अमेरिका जा पाने में असमर्थ थे। अन्य विकल्प के लिये हमें एक दिन की और प्रतीक्षा करनी पड़ी, तब ही हम अपने घर के लिये रवाना हो सके।

इस स्थिति को संसार से कूच करके स्वर्ग जाने पर लागू कीजिए। कल्पना कीजिए कि जब आप स्वर्ग के द्वार पर पहुंचें तो मालूम पड़े कि आपका प्रवेश संभव नहीं है, क्योंकि आप इसके लिये अयोग्य हैं। संसार में आपने जिन बातों या कार्यों पर भरोसा करके स्वर्ग में प्रवेश के मंसूबे बनाए थे, उनमें से कोई आपके लिये यह द्वार नहीं खोल सकती, उनके सब वायदे गलत साबित हुए और अब आप परमेश्वर के साथ अनन्त काल तक नहीं रह पाएंगे। जमैका से अमेरिका जाने का तो विकल्प मिल गया था, परन्तु एक बार पृथ्वी से कूच करा तो फिर किसी विकल्प की कोई संभावना नहीं है, जो भी संभावना है, वह अभी और इस पृथ्वी पर ही है। अपने "स्वर्गवासी" होने के विकल्पों को भली भांति जांच लीजिये।

प्रेरित पतरस ने, अपनी धार्मिकता के घमंड में मगरूर यहूदी धर्म के अगुवों को, जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह का तिरिस्कार करके उसे क्रूस पर ठुकवा दिया था, प्रभु यीशु मसीह के विषय में कहा: "और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें।" (प्रेरितों ४:१२) प्रभु यीशु मसीह ने स्वयं कहा है "मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।" (यूहन्ना १४:६) स्वर्ग जाने का एक ही रास्ता है - प्रभु यीशु मसीह द्वारा क्रूस पर संसार के पापों के लिये चुकाई गई कीमत पर विश्वास करके पापों से पश्चताप और उसे समर्पण।

अन्य कोई मार्ग नहीं है, व्यर्थ आश्वासनों पर भरोसा न करें। प्रभु यीशु - केवल वो ही एक रास्ता है। - डेव ब्रैनन


प्रभु यीशु ने क्रूस पर मेरा स्थान ले लिया, और मुझे स्वर्ग में स्थान दे दिया।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों ४:१२


बाइबल पाठ: यूहन्ना १४:१-६

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।
मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।
और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपके यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।
और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।
थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३७-३९
  • २ पतरस २

Monday, November 29, 2010

गलतिया की मण्डली

मैं खुले ग्रामीण इलाकों से होकर जा रहा था जब मुझे एक चर्च दिखाई दिया जिसके नाम ने मुझे अचंभित किया, उसक नाम था "गलतिया की मण्डली"। मुझे निश्चय था कि कोई भी किसी चर्च को यह नाम नहीं देगा जब तक कि इसका कोई विकल्प ही न हो क्योंकि गलतिया की मण्डली का उदहरण कोई अनुसरण योग्य उदाहरण नहीं था।

बाइबल में गलतिया की मण्डली को लिखी गई पौलुस की पत्री से पता लगता है कि यह पत्री पौलुस की सबसे आवेश भरी पत्री थी। उसे उन्हें परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार को छोड़कर अपनी वैधानिकता, स्वेच्छा और कर्मों पर आधारित होने के लिये डांटना पड़ा था। पौलुस ने लिखा: "क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ कर के अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे?" (गलतियों ३:३)

जैसे हम परमेश्वर के साथ अपना संबंध किन्ही कर्मों से कमा नहीं सकते, वैसे ही हम अपनी शारीरिक सामर्थ से आत्मिक जीवन में उन्नति भी नहीं कर सकते। पौलुस तब गलतिया की मण्डली को, और आज हमको यह समझाता है कि मसीह के साथ हमारा चलना, हमारा मसीही जीवन, परमेश्वर के आत्मा की सामर्थ से परमेश्वर पर निर्भर होने के द्वारा ही संभव हो सकता है।

यदि हम सोचते हैं कि हम अपने प्रयत्नों और कर्मों द्वारा मसीह की समानता में आ सकते हैं तो हम गलतिया की मण्डली के समान हैं - निर्बुद्धि! - बिल क्राउडर


परमेश्वर का पवित्र आत्मा ही परमेश्वर की सामर्थ का स्त्रोत है।

क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ कर के अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे? - गलतियों ३:३


बाइबल पाठ: गलतियों ३:१-१२

हे निर्बुद्धि गलतियों, किस ने तुम्हें मोह लिया? तुम्हारी तो मानों आंखों के साम्हने यीशु मसीह क्रूस पर दिखाया गया!
मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूं, कि तुम ने आत्मा को, क्‍या व्यवस्था के कामों से, या विश्वास के समाचार से पाया?
क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ कर के अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे?
क्‍या तुम ने इतना दुख यों ही उठाया? परन्‍तु कदाचित व्यर्थ नहीं।
सो जो तुम्हें आत्मा दान करता और तुम में सामर्थ के काम करता है, वह क्‍या व्यवस्था के कामों से या विश्वास के सुसमाचार से ऐसा करता है?
इब्राहीम ने तो परमेश्वर पर विश्वास किया और यह उसके लिये धामिर्कता गिनी गई।
तो यह जान लो, कि जो विश्वास करने वाले हैं, वे ही इब्राहीम की सन्‍तान हैं।
और पवित्रशास्‍त्र ने पहिले ही से यह जान कर, कि परमेश्वर अन्यजातियों को विश्वास से धर्मी ठहराएगा, पहिले ही से इब्राहीम को यह सुसमाचार सुना दिया, कि तुझ में सब जातियां आशीष पाएंगी।
तो जो विश्वास करने वाले हैं, वे विश्वासी इब्राहीम के साथ आशीष पाते हैं।
सो जितने लोग व्यवस्था के कामों पर भरोसा रखते हैं, वे सब श्राप के आधीन हैं, क्‍योंकि लिखा है, कि जो कोई व्यवस्था की पुस्‍तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्थिर नहीं रहता, वह श्रापित है।
पर यह बात प्रगट है, कि व्यवस्था के द्वारा परमेश्वर के यहां कोई धर्मी नहीं ठहरता क्‍योंकि धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।
पर व्यवस्था का विश्वास से कुछ सम्बन्‍ध नहीं, पर जो उन को मानेगा, वह उन के कारण जीवित रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३५-३६
  • २ पतरस १

Sunday, November 28, 2010

पृथ्वी आगमन का जोखिम

इसाई धर्म के कैलेनडर में प्रभु यीशु के जन्मदिन मनाने से पूर्व का समय ’ऐडवेन्ट’ के दिन माने जाते हैं जिनमें प्रभु यीशु के आगमन की तैयारियां की जातीं हैं। ऐडवेन्ट के दिनों में मोम्बत्तियां जलाई जातीं हैं, पहली मोमबत्ती आशा की सूचक है। परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह ने प्रभु यीशु के विष्य में भविष्यवाणी की थी कि संसार की सभी जातियों में से लोग उसपर अपनी आशा और विश्वास रखेंगे (यशायाह ४२:१-४, मत्ती १२:२१)।

ऐडवेन्ट या मसीह के आगमन को लोग अकसर इस नज़रिये से देखते हैं कि जैसे वो किसी बाह्य ग्रह से आने वाला कोई आगन्तुक हो जिसे इस पृथ्वी के बारे में कुछ पता नहीं है। वे इस बात से आनन्दित होते हैं कि इस सुन्दर पृथ्वी पर यीशु, जिसने इसे विशेष रूप से हमारे लिये बनाया है, मेहमान की तरह आया है। लेकिन यह स्मरण रखना आवश्यक है कि यीशु इस पृथ्वी से कहीं बेहतर स्थान - स्वर्ग से आया, जो हमारी कल्पना से भी अधिक सुन्दर और अच्छा है।

जब कभी मैं प्रभु यीशु के पृथ्वी पर आगमन के बारे में सोचती हूँ, मैं यह भी ध्यान करती हूँ कि यहां आने के लिये उसे स्वर्ग को छोड़ना पड़ा। आने से पहले उसे पता था कि पृथ्व