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Tuesday, November 30, 2010

एक ही रास्ता

हम जमैका में अपना काम समाप्त कर चुके थे और अब हम अमेरिका में अपने घर वापस जाना चाहते थे। हमने इसके लिये हवाई जहाज़ के टिकिट भी समय रहते ले लिये थे, इस दृढ़ विश्वास के साथ कि टिकिट बेचने वाली विमान सेवा कंपनी हमें अपने वायदे के अनुसार लेकर भी जाएगी। परन्तु जब जाने का समय आया तो विमान सेवा कंपनी में कुछ समस्याओं के कारण वह कंपनी अपना वायदा पूरा करने में असमर्थ निकली, और हमें बार बार यही घोषणा सुनने को मिल रही थी कि "आपकी उड़ान रद्द हो गई है"। हमारे टिकिट पर चाहे जो लिखा हो, वास्तविकता यह थी कि हम उस विमान सेवा कंपनी द्वारा जमैका से अमेरिका जा पाने में असमर्थ थे। अन्य विकल्प के लिये हमें एक दिन की और प्रतीक्षा करनी पड़ी, तब ही हम अपने घर के लिये रवाना हो सके।

इस स्थिति को संसार से कूच करके स्वर्ग जाने पर लागू कीजिए। कल्पना कीजिए कि जब आप स्वर्ग के द्वार पर पहुंचें तो मालूम पड़े कि आपका प्रवेश संभव नहीं है, क्योंकि आप इसके लिये अयोग्य हैं। संसार में आपने जिन बातों या कार्यों पर भरोसा करके स्वर्ग में प्रवेश के मंसूबे बनाए थे, उनमें से कोई आपके लिये यह द्वार नहीं खोल सकती, उनके सब वायदे गलत साबित हुए और अब आप परमेश्वर के साथ अनन्त काल तक नहीं रह पाएंगे। जमैका से अमेरिका जाने का तो विकल्प मिल गया था, परन्तु एक बार पृथ्वी से कूच करा तो फिर किसी विकल्प की कोई संभावना नहीं है, जो भी संभावना है, वह अभी और इस पृथ्वी पर ही है। अपने "स्वर्गवासी" होने के विकल्पों को भली भांति जांच लीजिये।

प्रेरित पतरस ने, अपनी धार्मिकता के घमंड में मगरूर यहूदी धर्म के अगुवों को, जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह का तिरिस्कार करके उसे क्रूस पर ठुकवा दिया था, प्रभु यीशु मसीह के विषय में कहा: "और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें।" (प्रेरितों ४:१२) प्रभु यीशु मसीह ने स्वयं कहा है "मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।" (यूहन्ना १४:६) स्वर्ग जाने का एक ही रास्ता है - प्रभु यीशु मसीह द्वारा क्रूस पर संसार के पापों के लिये चुकाई गई कीमत पर विश्वास करके पापों से पश्चताप और उसे समर्पण।

अन्य कोई मार्ग नहीं है, व्यर्थ आश्वासनों पर भरोसा न करें। प्रभु यीशु - केवल वो ही एक रास्ता है। - डेव ब्रैनन


प्रभु यीशु ने क्रूस पर मेरा स्थान ले लिया, और मुझे स्वर्ग में स्थान दे दिया।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों ४:१२


बाइबल पाठ: यूहन्ना १४:१-६

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।
मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।
और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपके यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।
और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।
थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३७-३९
  • २ पतरस २

Monday, November 29, 2010

गलतिया की मण्डली

मैं खुले ग्रामीण इलाकों से होकर जा रहा था जब मुझे एक चर्च दिखाई दिया जिसके नाम ने मुझे अचंभित किया, उसक नाम था "गलतिया की मण्डली"। मुझे निश्चय था कि कोई भी किसी चर्च को यह नाम नहीं देगा जब तक कि इसका कोई विकल्प ही न हो क्योंकि गलतिया की मण्डली का उदहरण कोई अनुसरण योग्य उदाहरण नहीं था।

बाइबल में गलतिया की मण्डली को लिखी गई पौलुस की पत्री से पता लगता है कि यह पत्री पौलुस की सबसे आवेश भरी पत्री थी। उसे उन्हें परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार को छोड़कर अपनी वैधानिकता, स्वेच्छा और कर्मों पर आधारित होने के लिये डांटना पड़ा था। पौलुस ने लिखा: "क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ कर के अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे?" (गलतियों ३:३)

जैसे हम परमेश्वर के साथ अपना संबंध किन्ही कर्मों से कमा नहीं सकते, वैसे ही हम अपनी शारीरिक सामर्थ से आत्मिक जीवन में उन्नति भी नहीं कर सकते। पौलुस तब गलतिया की मण्डली को, और आज हमको यह समझाता है कि मसीह के साथ हमारा चलना, हमारा मसीही जीवन, परमेश्वर के आत्मा की सामर्थ से परमेश्वर पर निर्भर होने के द्वारा ही संभव हो सकता है।

यदि हम सोचते हैं कि हम अपने प्रयत्नों और कर्मों द्वारा मसीह की समानता में आ सकते हैं तो हम गलतिया की मण्डली के समान हैं - निर्बुद्धि! - बिल क्राउडर


परमेश्वर का पवित्र आत्मा ही परमेश्वर की सामर्थ का स्त्रोत है।

क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ कर के अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे? - गलतियों ३:३


बाइबल पाठ: गलतियों ३:१-१२

हे निर्बुद्धि गलतियों, किस ने तुम्हें मोह लिया? तुम्हारी तो मानों आंखों के साम्हने यीशु मसीह क्रूस पर दिखाया गया!
मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूं, कि तुम ने आत्मा को, क्‍या व्यवस्था के कामों से, या विश्वास के समाचार से पाया?
क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ कर के अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे?
क्‍या तुम ने इतना दुख यों ही उठाया? परन्‍तु कदाचित व्यर्थ नहीं।
सो जो तुम्हें आत्मा दान करता और तुम में सामर्थ के काम करता है, वह क्‍या व्यवस्था के कामों से या विश्वास के सुसमाचार से ऐसा करता है?
इब्राहीम ने तो परमेश्वर पर विश्वास किया और यह उसके लिये धामिर्कता गिनी गई।
तो यह जान लो, कि जो विश्वास करने वाले हैं, वे ही इब्राहीम की सन्‍तान हैं।
और पवित्रशास्‍त्र ने पहिले ही से यह जान कर, कि परमेश्वर अन्यजातियों को विश्वास से धर्मी ठहराएगा, पहिले ही से इब्राहीम को यह सुसमाचार सुना दिया, कि तुझ में सब जातियां आशीष पाएंगी।
तो जो विश्वास करने वाले हैं, वे विश्वासी इब्राहीम के साथ आशीष पाते हैं।
सो जितने लोग व्यवस्था के कामों पर भरोसा रखते हैं, वे सब श्राप के आधीन हैं, क्‍योंकि लिखा है, कि जो कोई व्यवस्था की पुस्‍तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्थिर नहीं रहता, वह श्रापित है।
पर यह बात प्रगट है, कि व्यवस्था के द्वारा परमेश्वर के यहां कोई धर्मी नहीं ठहरता क्‍योंकि धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।
पर व्यवस्था का विश्वास से कुछ सम्बन्‍ध नहीं, पर जो उन को मानेगा, वह उन के कारण जीवित रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३५-३६
  • २ पतरस १

Sunday, November 28, 2010

पृथ्वी आगमन का जोखिम

इसाई धर्म के कैलेनडर में प्रभु यीशु के जन्मदिन मनाने से पूर्व का समय ’ऐडवेन्ट’ के दिन माने जाते हैं जिनमें प्रभु यीशु के आगमन की तैयारियां की जातीं हैं। ऐडवेन्ट के दिनों में मोम्बत्तियां जलाई जातीं हैं, पहली मोमबत्ती आशा की सूचक है। परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह ने प्रभु यीशु के विष्य में भविष्यवाणी की थी कि संसार की सभी जातियों में से लोग उसपर अपनी आशा और विश्वास रखेंगे (यशायाह ४२:१-४, मत्ती १२:२१)।

ऐडवेन्ट या मसीह के आगमन को लोग अकसर इस नज़रिये से देखते हैं कि जैसे वो किसी बाह्य ग्रह से आने वाला कोई आगन्तुक हो जिसे इस पृथ्वी के बारे में कुछ पता नहीं है। वे इस बात से आनन्दित होते हैं कि इस सुन्दर पृथ्वी पर यीशु, जिसने इसे विशेष रूप से हमारे लिये बनाया है, मेहमान की तरह आया है। लेकिन यह स्मरण रखना आवश्यक है कि यीशु इस पृथ्वी से कहीं बेहतर स्थान - स्वर्ग से आया, जो हमारी कल्पना से भी अधिक सुन्दर और अच्छा है।

जब कभी मैं प्रभु यीशु के पृथ्वी पर आगमन के बारे में सोचती हूँ, मैं यह भी ध्यान करती हूँ कि यहां आने के लिये उसे स्वर्ग को छोड़ना पड़ा। आने से पहले उसे पता था कि पृथ्वी उसके लिये विरोध की जगह है और यहां आना उसके लिये जोखिम भरा है (मत्ती १२:१४)। लेकिन फिर भी वह आया। हमारे न्यायी और करुणामय परमेश्वर ने अपने आप को मनुष्य के अन्याय के आधीन कर दिया, अविनाशी सृष्टिकर्ता नाशमान देह धारण करके आ गया कि पृथ्वी के जीवन को स्वयं अनुभव कर सके।

प्रभु यीशु ने स्मस्त संसार के लोगों के लिये मृत्यु भोगी (पर हम यीशु को जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं, ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्‍वाद चखे। - इब्रानियों २:९) जिससे हम उसकी कृपा को चख सकें (तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है। - १ पतरस २:३)।

उसने स्वर्ग का वैभव इसलिये छोड़ा कि हमें स्वर्ग की महिमा में ले जा सके। उसने अपने प्राण देकर हमें अनन्त जीवन दिया है। क्या आपने प्रभु यीशु की यह अनन्त जीवन की भेंट स्वीकार करी है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


अनन्त परमेश्वर मानव इतिहास की सीमाओं में सिमट आया ताकि मानव को इतिहास की सीमाओं से परे का अनन्त जीवन मिल सके।

और अन्यजातियां उसके नाम पर आशा रखेंगी। - मत्ती १२:२१


बाइबल पाठ: मत्ती १२:११-२१

उस ने उन से कहा तुम में ऐसा कौन है, जिस की एक भेड़ हो, और वह सब्‍त के दिन गड़हे में गिर जाए, तो वह उसे पकड़ कर न निकाले?
भला, मनुष्य का मूल्य भेड़ से कितना बढ़ कर है? इसलिये सब्‍त के दिन भलाई करना उचित है: तब उस ने उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा।
उस ने बढ़ाया, और वह फिर दूसरे हाथ की नाई अच्‍छा हो गया।
तब फरीसियों ने बाहर जा कर उसके विरोध में सम्मति की, कि उसे किस प्रकार नाश करें?
यह जान कर यीशु वहां से चला गया, और बहुत लागे उसके पीछे हो लिये और उस ने सब को चंगा किया।
और उन्‍हें चिताया, कि मुझे प्रगट न करना।
कि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया या, वह पूरा हो।
कि देखो, यह मेरा सेवक है, जिसे मैं ने चुना है, मेरा प्रिय, जिस से मेरा मन प्रसन्न है: मैं अपना आत्मा उस पर डालूंगा और वह अन्यजातियों को न्याय का समाचार देगा।
वह न झगड़ा करेगा, और न धूम मचाएगा और न बाजारों में कोई उसका शब्‍द सुनेगा।
वह कुचले हुए सरकण्‍डे को न तोड़ेगा और धूआं देती हुई बत्ती को न बुझाएगा, जब तक न्याय को प्रबल न कराए।
और अन्यजातियां उसके नाम पर आशा रखेंगी।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३३-३४
  • १ पतरस ५

Saturday, November 27, 2010

प्रेम के पात्र

हम अपने परिवार के साथ धन्यवादी पर्व के भोजन के लिये एकत्रित थे। भोजन से पहले किसी ने सुझाव दिया कि हम सब अपनी अपनी वह बात बताएं जिसके लिए हम परमेश्वर के धन्यवादी हैं। बारी बारी हम ने अपनी बात कहनी आरंभ करी। तीन वर्षीय जोशुआ "संगीत" के लिये, तो चार वर्षीय नातान "घोड़ों" के लिये धन्यवादी था। परन्तु हम सब चकित रह गए जब स्टीफन जो शीघ्र ही पांच वर्ष का होने वाला था बोला कि "मैं धन्यवादी हूँ कि प्रभु यीशु मुझसे इतना प्रेम करते हैं।" सहज विश्वास से वह प्रभु के प्रेम को समझ पाया और अपने प्रति उनके व्यक्तिगत प्रेम के लिये उनका कृतज्ञ हुआ। उसने हमें बताया कि कैसे प्रभु ने अपना प्रेम क्रूस पर अपना बलिदान देकर प्रगट किया।

प्रेरित पौलुस चाहता था कि इफिसुस के विश्वासी इस बात को समझें कि कैसे वे प्रभु के प्रेम के पात्र हैं। उन लोगों के लिये पौलुस की प्रार्थना थी कि "और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर। सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।" (इफिसियों ३:१७-१९)

परमेश्वर के प्रेम के विषय में अपने को दृढ़ करने के लिये भला होगा कि हम इन पदों को कंटस्थ कर लें और बार बार इन्हें दोहराते रहें, और परमेश्वर ने उस दिन जिस विशेष रीति से अपना प्रेम हम पर प्रगट किया है - जैसे किसी कार्य में सहायता, या किसी प्रार्थना के उतर, या किसी कठिनाई में शांति के द्वारा, आदि, उन बातों के लिये प्रतिदिन कुछ मिनिट का समय उसे धन्यवाद देने में लगाएं। इससे हम अपने विश्वास में और बढ़ सकेंगे और स्टीफन के समान धन्यवादी हो सकेंगे कि हम प्रभु के प्रेम के पात्र हैं। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु के प्रति अपने प्रेम को सजीव रखने के लिये, अपने प्रति प्रभु के प्रेम को स्मरण करते रहो।

और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे ह्रृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर। सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ। - इफिसियों ३:१७-१९

बाइबल पाठ: इफिसियों ३:१४-२१

मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,
जिस से स्‍वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।
कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ।
और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे ह्रृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर।
सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।
और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है,
कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल ३०-३२
  • १ पतरस ४

Friday, November 26, 2010

सेवकाई के इलाके

फ़्रांसिस ऐसबरी लगभग एक अर्धशताबदी तक, घोड़े पर बैठकर, प्रतिवर्ष ६००० मील की यात्रा करता रहा। खराब सेहत के बावजूद वह अपना यह कार्य अथक करता रहा। इस यात्रा के दौरान उसका खाना सूखाई हुई भोजन वस्तुओं का होता था जो जलदी खराब न हो। ऐसबरी को मेथोडिस्ट वर्ग के भ्रमणकारी प्रचारकों के आरंभकर्ता के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने अमेरीका के सीमा प्रांतों में प्रभावी रूप से प्रभु यीशु के सुसमाचार का प्रचार किया। इन सुदूर इलाकों में चर्च स्थापित करना उसकी सेवकाई का प्रमुख अंग था।

अपनी सेवकाई के समापन तक ऐसबरी द्वारा उसके जैसे ७०० भ्रमणकारी प्रचारक तैयार होकर इस सेवकाई को बढ़ाने में लगे थे। सन १७७१ में, जब ऐसबरी इन सीमांत इलाकों मे आया था, अमेरिका में केवल करीब ६०० मेथोडिस्ट मत के मसीही थे। ४५ वर्ष बाद वे बढ़कर २००,००० हो गये थे।

कई रूप में ऐसबरी की मण्डलियां स्थापित करने की कार्यशैली पौलुस प्रेरित की शैली पर आधारित थी। पौलुस द्वारा जो मण्डली थिस्सलुनिके में स्थापित हुई थी, उसे अपने पत्र में पौलुस ने लिखा: "क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं।" (१ थिस्सलुनिकियों १:८)

भले ही अब इस प्रकार के भ्रमणकारी प्रचारकों का समय नहीं रहा, पर मसीह के प्रत्येक विश्वासी के लिये पड़ौसी, रिश्तेदार और मित्र सुसमाचार प्रचार के लिये सेवकाई का इलका अभी भी हैं। ऐसे लोगों का स्मरण कीजिए जिन तक अभी भी सुसमाचार नहीं पहुंचा है और अपनी सेवकाई को पूरा कीजिए। - डेनिस फिशर


जो प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं वे पाप में खोए हुओं से भी प्रेम करते हैं।

क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। - १ थिस्सलुनिकियों १:८

बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनिकियों १

पौलुस और सिलवानुस और तीमुयियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्र्म, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं।
और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो।
क्‍योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है, जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे।
और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्‍द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे।
यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने।
क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं।
क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ, और तुम किस प्रकार मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो।
और उसके पुत्र के स्‍वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उस ने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात यीशु की, जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है।
एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल २७-२९
  • १ पतरस ३

Thursday, November 25, 2010

पाप अंगीकार और धन्यवाद

एक इतवार की आराधना सभा में हमारी सारी मण्डली ने सामूहिक रूप से पाप अंगीकार की यह प्रार्थना करी: "अनुग्रहकारी परमेश्वर, अन्य कितने ही विश्वासियों के समान हम भी असन्तुष्ट होकर शिकायत करते हैं जब बातें हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होतीं। हम भी, अपनी आवश्यक्ता के अनुसार नहीं वरन हर चीज़ बहुतायत से उप्लब्ध हो, चाहते हैं। हमारी भी इच्छा रहती है कि जिस स्थान पर आपने हमें रखा है, उसे छोड़कर हम कहीं और चले जाएं। जो आपने हमें दिया है वह नहीं परन्तु जो दूसरों को मिला है वह हमें मिले। हमारी इच्छा रहती है कि आप हमारी सेवा करते रहें, न कि यह कि हम आप की सेवा में लगे रहें। जो कुछ आपने हमें दिया और हमारे लिये किया, हमारा उसके लिये धन्यवादी न होने को कृप्या क्षमा करें।"

किसी का संपन्न होना कोई निशचितता नहीं है कि वह उसके लिये आभारी और धन्यवादी भी होगा। कई बार संपन्नता हमारे मन परमेश्वर से विमुख भी कर देती हैं। प्रभु यीशु ने चेलों को चिताया "...चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्‍योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता।" (लूका १२:१५)

जब निशकासित यहूदियों का एक समूह बाबुल की अपनी बन्धुआई से, नेहेमियाह के साथ वापस यरूशलेम का पुनःनिर्माण करने लौटा, तो लौटकर उन्होंने अपने और अपने पूर्वजों के पाप अंगीकार की प्रार्थना करी। उन्होंने प्रार्थना में कहा: "और हमारे राजाओं और हाकिमों, याजकों[पुरोहितों] और पुरखाओं ने, न तो तेरी व्यवस्था को माना है और न तेरी आज्ञाओं और चितौनियों की ओर ध्यान दिया है जिन से तू ने उनको चिताया था। उन्होंने अपने राज्य में, और उस बड़े कल्याण के समय जो तू ने उन्हें दिया था, और इस लम्बे चौड़े और उपजाऊ देश में तेरी सेवा नहीं की, और न अपने बुरे कामों से पश्चाताप किया।" (नेहेमियाह ९:३४, ३५)

परमेश्वर के सन्मुख पापों का अंगीकार और उनके लिये पश्चाताप करने वाले ही खरे और निर्मल मन से फिर उसकी सच्ची आराधाना भी कर सकते है। परमेश्वर ऐसे ही आराधाकओं को ढूंढ़ता है - "परन्‍तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्‍चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्‍योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है। परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।" (यूहन्ना ४:२३, २४)

पापों के लिये पश्चातापी और परमेश्वर के प्रति धन्यवादी तथा आज्ञाकारी मन, जीवन में परमेश्वर की आशीशों के भंडारों को भर देता है। - डेविड मैकैसलैंड


पश्चाताप, धन्यवादी होने के द्वार खोल देता है।

उस बड़े कल्याण के समय जो तू ने उन्हें दिया था, और इस लम्बे चौड़े और उपजाऊ देश में तेरी सेवा नहीं की, और न अपने बुरे कामों से पश्चाताप किया। - नेहेमियाह ९:३५

बाइबल पाठ: नेहेमियाह ९:३२-३७

अब तो हे हमारे परमेश्वर ! हे महान पराक्रमी और भययोग्य ईश्वर ! जो अपनी वाचा पालता और करुणा करता रहा है, जो बड़ा कष्ट, अश्शूर के राजाओं के दिनों से ले आज के दिन तक हमें और हमारे राजाओं, हाकिमों, याजकों, नबियों, पुरखाओं, वरन तेरी समस्त प्रजा को भोगना पड़ा है, वह तेरी दृष्टि में थोड़ा न ठहरे।
तौभी जो कुछ हम पर बीता है उसके विष्य तू तो धमीं है; तू ने तो सच्चाई से काम किया है, परन्तु हम ने दुष्टता की है।
और हमारे राजाओं और हाकिमों, याजकों और पुरखाओं ने, न तो तेरी व्यवस्था को माना है और न तेरी आज्ञाओं और चितौनियों की ओर ध्यान दिया है जिन से तू ने उनको चिताया था।
उन्होंने अपने राज्य में, और उस बड़े कल्याण के समय जो तू ने उन्हें दिया था, और इस लम्बे चौड़े और उपजाऊ देश में तेरी सेवा नहीं की, और न अपने बुरे कामों से पश्चाताप किया।
देख, हम आज कल दास हैं, जो देश तू ने हमारे पितरों को दिया था कि उसकी उत्तम उपज खाएं, उसी में हम दास हैं।
इसकी उपज से उन राजाओं को जिन्हें तू ने हमारे पापों के कारण हमारे ऊपर ठहराया है, बहुत धन मिलता है, और वे हमारे शरीरों और हमारे पशुओं पर अपनी अपनी इच्छा के अनुसार प्रभुता जताते हैं, इसलिये हम बड़े संकट में पड़े हैं।

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल २४-२६
  • १ पतरस २