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Monday, February 28, 2011

परमेश्वर की ’ज़बरदस्ती’?

एक मोटरसाईकिल चालकों का दल अपने राज्य की राजधानी की ओर जा रहा था। उनका उद्देश्य था वहां जाकर अनिवार्यतः हेल्मेट पहनने के नियम के विरोध में प्रदर्शन करना। उन्हें एक नियत स्थान पर जमा होकर कुछ भाष्ण देने थे और अपना विरोध दर्ज करने के लिये अपने हेल्मेट जलाने थे। लेकिन विरोध स्थल पर जाते हुए एक चालक अपनी मोटरसाईकिल का नियंत्रण खो बैठा और उसका गंभीर एक्सीडेंट हो गया। उसके सिर और चेहरे पर काफी गहरी चोटें आईं, जिन से वह बच जाता यदि उसने अपनी हेल्मेट पहनी हुई होती!

कभी कभी हम भी इन्हीं चालकों की तरह व्यवहार करते हैं। परमेश्वर द्वारा हमारे बचाव के लिये दिये गए नियम हमें अनुचित और बाधापूर्ण लगते हैं। यद्यपि हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं और चाहते हैं कि उसकी सुरक्षा हमारे साथ बनी रहे, फिर भी उसके निर्देशों के विरुद्ध हम बलवा करते हैं, उनका पालन नहीं करते तथा परमेश्वर के भले उद्देश्यों का अनुचित अर्थ निकलते हैं; हम इस बात को समझना नहीं चाहते के परमेश्वर ने अपने प्रेम में हमारी भलाई और सुरक्षा के लिये ही ये नियम और निर्देश दिये हैं।

अनुशासन और नियमों के पालन से मुक्त होने से हमें अधिक खुशी, स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा मिल जाएगी - ऐसा भी नहीं है; वरन यह अवश्य है कि हम अपना आदर, अपने जीवन का उद्देश्य और अपनी सुरक्षा खो बैठेंगे। संसार भर में सामाजिक व्यवहार के आंकड़े गवाह हैं कि जिनके जीवनों में परमेश्वर का भय और आदर नहीं है, और जो अपनी मनमानी करने पर उतारू रहते हैं, उनके जीवनों में दुर्व्यवहार, तलाक, हिंसा, अशांति और शारीरिक एवं मान्सिक रोग अधिक पाए जाते हैं।

हम नहीं चाहते कि हमारे जीवन नियमों द्वारा बन्धे हों, परन्तु जब हम इसका विकल्प यशायाह के पहले अध्याय में पढ़ते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि परमेश्वर के नियम सदैव हमारी भलाई ही के लिये हैं। परमेश्वर ज़बरदस्ती का परमेश्वर नहीं, प्रेम का परमेश्वर है। - मार्ट डी हॉन


यदि आप अनुशासन का पालन नहीं करना चाहते तो नियमों को दोषी मत ठहराईये।

यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे। - यशायाह १:१८

बाइबल पाठ: यशायाह १:१-२०
आमोस के पुत्र यशायाह का दर्शन, जिसको उस ने यहूदा और यरूशलेम के विषय में उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिय्याह नाम यहूदा के राजाओं के दिनों में पाया।
हे स्वर्ग सुन, और हे पृथ्वी कान लगा क्योंकि यहोवा कहता है: मैं ने बाल-बच्चों का पालन पोषण किया, और उनको बढ़ाया भी, परन्तु उन्होंने मुझ से बलवा किया।
बैल तो अपने मालिक को और गदहा अपने स्वामी की चरनी को पहिचानता है, परन्तु इस्राएल मुझें नहीं जानता, मेरी प्रजा विचार नहीं करती।
हाय, यह जाति पाप से कैसी भरी है! यह समाज अधर्म से कैसा लदा हुआ है! इस वंश के लोग कैसे कुकर्मी हैं, ये लड़केबाले कैसे बिगड़े हुए हैं! उन्होंने यहोवा को छोड़ दिया, उन्होंने इस्राएल के पवित्र को तुच्छ जाना है! वे पराए बनकर दूर हो गए हैं।
तुम बलवा कर करके क्यों अधिक मार खाना चाहते हो? तुम्हारा सिर घावों से भर गया, और तुम्हारा ह्रृदय दु:ख से भरा है।
नख से सिर तक कहीं भी कुछ आरोग्यता नहीं, केवल चोट और कोड़े की मार के चिन्ह और सड़े हुए घाव हैं जो न दबाये गए, न बान्धे गए, न तेल लगाकर नरमाये गए हैं।
तुम्हारा देश उजड़ा पड़ा है, तुम्हारे नगर भस्म हो गए हैं तुम्हारे खेतों को परदेशी लोग तुम्हारे देखते ही निगल रहे हैं; वह परदेशियों से नाश किए हुए देश के समान उजाड़ है।
और सिय्योन की बेटी दाख की बारी में की झोंपड़ी की नाईं छोड़ दी गई है, वा ककड़ी के खेत में की छपरिया या घिरे हुए नगर के समान अकेली खड़ी है।
यदि सेनाओं का यहोवा हमारे थोड़े से लोगों को न बचा रखता, तो हम सदोम के समान हो जाते, और अमोरा के समान ठहरते।
हे सदोम के न्याइयों, यहोवा का वचन सुनो! हे अमोरा की प्रजा, हमारे परमेश्वर की शिक्षा पर कान लगा।
यहोवा यह कहता है, तुम्हारे बहुत से मेलबलि मेरे किस काम के हैं? मैं तो मेढ़ों के होमबलियों से और पाले हुए पशुओं की चर्बी से अघा गया हूं;
मैं बछड़ों वा भेड़ के बच्चों वा बकरों के लोहू से प्रसन्न नहीं होता। तुम जब अपने मुंह मुझे दिखाने के लिये आते हो, तब यह कौन चाहता है कि तुम मेरे आंगनों को पांव से रौंदो?
व्यर्थ अन्नबलि फिर मत लाओ; धूप से मुझे घृणा है। नये चांद और विश्रामदिन का मानना, और सभाओं का प्रचार करना, यह मुझे बुरा लगता है। महासभा के साथ ही साथ अनर्थ काम करना मुझ से सहा नहीं जाता।
तुम्हारे नये चांदों और नियत पर्वों के मानने से मैं जी से बैर रखता हूं; वे सब मुझे बोझ से जान पड़ते हैं, मैं उनको सहते सहते उकता गया हूं।
जब तुम मेरी ओर हाथ फैलाओ, तब मैं तुम से मुंह फेर लूंगा तुम कितनी ही प्रार्थना क्यों न करो, तौभी मैं तुम्हारी न सुनूंगा क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से भरे हैं।
अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आंखों के साम्हने से अपने बुरे कामों को दूर करो भविष्य में बुराई करना छोड़ दो,
भलाई करना सीखो, यत्न से न्याय करो, उपद्रवी को सुधारो, अनाथ का न्याय चुकाओ, विधवा का मुकद्दमा लड़ो।
यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।
यदि तुम आज्ञाकारी होकर मेरी मानो,
तो इस देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाओगे और यदि तुम ने मानो और बलवा करो, तो तलवार से मारे जाओगे; यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती २०-२२
  • मरकुस ७:१-१३

Sunday, February 27, 2011

दासत्व - स्वतंत्र होने के लिये!

अभी भी मेरे मस्तिष्क में उस तीर से बिंधे हुए लेकिन ज़िंदा और उड़ सकने वले कैनेडियन हंस का चित्र ताज़ा है। एक धनुर्धारी शिकरी का निशाना तो सही लगा, लेकिन वह हंस मरा नहीं। वह न केवल उस शिकारी से, परन्तु जानवरों और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करने वाले लोगों से भी लगभग एक महीने तक बचता रहा। उसे पकड़ने के लिये उन्होंने उसे नशीले पदार्थ मिले दाने खिलाने की कोशिश करी, छोटी तोप जैसी मशीनों से जाल उस की ओर ऊंचाई तक फेंका, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। आखिरकर उसे मछली पकड़ने के जाल में फांसा गया, फिर पक्षियों के डाक्टरों ने ऑपरेशन द्वारा उसके शरीर में फंसा हुआ वह तीर निकाला, और फिर उसे आज़ाद कर दिया। यदि हंस सोचने की शक्ति रखते होंगे तो वह हंस बाद में सोचता होगा, क्यों वह इतने दिन तक इतनी मेहनत करके, अपने पकड़ने वालों से बचता रहा? उन्होंने तो उसकी भलाई के लिये ही उसे बन्धुआ बनाना चाहा था।

इस बन्धुआ बने हंस के अनुभव ने मुझे उन लोगों की याद दिलाई जिनके बारे में यूहन्ना ८ अध्याय में लिखा गया है। वे लोग भी अपनी गंभीर स्थिति के बारे में समझ नहीं पा रहे थे, और न ही प्रभु यीशु के उनके प्रति उद्देश्यों को समझ पा रहे थे। उन लोगों को लगा कि प्रभु यीशु उन्हें बन्धुआ बनाना चाहता है, क्योंकि प्रभु उनसे अपने जीवन उसे समर्पित करने और प्रभु के चेले बनने को कह रहा था। प्रभु ने उनसे याचना करी कि वे उसके आत्मिक दास बन जाएं, लेकिन वे नहीं समझ पाए कि प्रभु यह उनसे उन्हें उनके पाप के दोष से स्वतंत्र करने के लिये कह रहा था।

कुछ ऐसी ही गलतफहमी में रहकर आज भी लोग प्रभु यीशु मसीह के पास आना नहीं चाहते। वे पाप से बिंधे हुए इधर उधर बचते फिरते हैं, लेकिन जो उन्हें पाप से मुक्ति और उद्धार दे सकता है, उस प्रभु के आधीन नहीं होना चाहते। वे समझ नहीं पाते कि प्रभु का उद्देश्य उन्हें दास बनाना नहीं वरन उन्हें स्वतंत्र करना है - पाप और उसके दण्ड से स्वतंत्र, जो स्वतंत्रता और कहीं नहीं मिल सकती, और वह भी सेंत-मेत, केवल एक साधारण विश्वास से। यह स्वतंत्रता न केवल हमारे अनन्त भविष्य से संबंधित है, वरन पृथ्वी पर हमारे वर्तमान से भी संबंधित है क्योंकि प्रतिदिन मसीह के साथ चलने से हम उसके संरक्षण में बने रहते हैं।

प्रभु के दास होकर ही हम वासत्व में स्वतंत्र होते हैं। - मार्ट डी हॉन


उद्धार द्वारा आया परिवर्तन हमें हमारे पाप के बन्धनों से मुक्त कर देता है।


क्‍योंकि जो दास की दशा में प्रभु में बुलाया गया है, वह प्रभु का स्‍वतंत्र किया हुआ है: - १ कुरिन्थियों ७:२२



बाइबल पाठ: यूहन्ना ८:३१-४६


तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्‍होंने उस की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
उन्‍होंने उस को उत्तर दिया कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए, फिर तू क्‍योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
यीशु ने उन को उत्तर दिया मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
और दास सदा घर में नहीं रहता, पुत्र सदा रहता है।
सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो तौभी मेरा वचन तुम्हारे ह्रृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।
उन्‍होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा, यदि तुम इब्राहीम के सन्‍तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते।
परन्‍तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिस ने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था।
तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्‍होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे, हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर।
यीशु ने उन से कहा यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्‍योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं मैं आप से नहीं आया, परन्‍तु उसी ने मुझे भेजा।
तुम मेरी बात क्‍यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते।
तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्‍योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है, क्‍योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।
परन्‍तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।
तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्‍यों नहीं करते?

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १७-१९
  • मरकुस ६:३०-५६

Saturday, February 26, 2011

कठिन परीक्षा की घड़ी

मौसम की जानकारी देने वाले ने अपने नक्शे को दिखाते हुए कहा "मुझे भय है कि स्थिति सुधरने से पहले और कठिन होगी।" उसकी यह भविष्यवाणी इस्त्राएल की प्रजा का चित्रण करती है, जब वे मिस्त्र के दासत्व से निकलने की बाट जोह रहे थे और परमेश्वर ने उनकी रिहाई की योजना बना रखी थी। लेकिन उनके लिये परिस्थितियां तेज़ी से बिगड़ने लगीं थीं। सताव और शोष्ण की तेज़ हवाएं अब भीष्ण तूफान का रूप ले रहीं थीं। कुछ समय पहले वे लोग बड़े उत्साह से अपनी रिहाई की बातें करते थे; परन्तु उनके लिये वही मूसा जो उनकी रिहाई का योजनाकार था, अब उनके दुखों का कारण बन गया था। फिरौन की नज़रों में यदि दासों के पास आज़ादी के स्वपन देखने का समय था, तो उनके पास बहुत अधिक समय था; इसलिये फिरौन ने उनके काम का बोझ बढ़ा दिया और काम के लिये आवश्यक सामग्री देना बन्द कर दिया और उनसे कहा कि अपनी सामग्री आप अर्जित करो, लेकिन काम में कोई कमी नहीं होगी, और उनके अगुवों की पिटाई करवाई। मूसा भी इस्त्राएलियों की इस दुर्दशा से विसमित होकर परमेश्वर के सामने स्पष्टिकरण के लिये विलाप करने लगा।

लेकिन समय ने दिखा दिया कि परमेश्वर की योजना में कोई बाधा नहीं थी। लोगों की वह भीड़ मिस्त्र की दासता से सदा के लिये निकलने के लिये तैयार करी जा रही थी, और सब कुछ समयबद्ध हो रहा था। परमेश्वर ने जान बूझकर हालात को सुधरने से पहले बिगड़ने दिया ताकि वे अपने विश्वास की परीक्षा द्वारा परमेश्वर की सामर्थ को देख सकें और उसपर अपने विश्वास को दृढ़ कर सकें।

यह घटना हमारे लिये एक शिक्षा और सांत्वना का स्त्रोत है। जब संसार हम पर चढ़ा चला आता है, और परिस्थितियां कठिन होती लगती हैं, हम इस बात द्वारा शांति पा सकते हैं कि हमारी स्थिति का निर्देशक संसार नहीं, वरन संसार पर प्रभुता करने वाला परमेश्वर है। - मार्ट डी हॉन


भोर से पहले ही रात सबसे अंधेरी होती है।

जो अपने ऊपर भरोसा रखता है, वह मूर्ख है; और जो बुद्धि से चलता है, वह बचता है। - नीतिवचन २८:२६


बाइबल पाठ: निर्गमन ६:१-८

तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन से क्या करूंगा; जिस से वह उनको बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।
और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं।
मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ।
और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी होकर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं।
और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है।
इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दास