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शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

यह मेरी ओर से है

एक छोटी लड़की का बड़ा भाई एक पहाड़ी के ऊपर चढ़कर खेल रहा था। उस लड़की ने भी अपने भाई के पास जाकर खेलना चाहा, लेकिन जब पहाड़ी पर चढ़ने के मार्ग को देखा तो निराश होकर पीछे हट गई। उसने विस्मय से कहा, "इस रास्ते में तो कोई भी सीधा और समतल मार्ग नहीं है, सारा मार्ग ढलवां और उबड़-खाबड़ और चट्टानों से भरा हुआ है।" उसके अनुभवी भाई ने उत्तर दिया, "हां, ऐसा ही है; अगर सारा मार्ग सपाट और समतल होता तो हम ऊपर कैसे पहुंचते? केवल इन चट्टानों के सहारे और उबड़-खाबड़ स्थानों में पांव जमाकर ही तो हम ऊपर की ओर चढ़ सकते हैं।" ऐसे ही परमेश्वर हमारे मार्गों में परेशनियां आ लेने देता है। जिन बातों को बहुतेरे लोग अवरोध कहते हैं वे वास्तव में परमेश्वर द्वारा बनाए गए ऊंचाई पर चढ़ने के साधन होते हैं, क्योंकि परमेश्वर हमें निरंतर आत्मिक ऊंचाईयों और आशीशों की ओर बढ़ता हुआ देखना चाहता है।

भजन ११९ के लेखक ने क्लेषों की पाठशाला में कुछ बहुमूल्य पाठ सीखे, और उन शिक्षाओं के सहारे वह इस भजन में परमेश्वर के कुशल मार्गदर्षक होने की गवाही रख सका। लेखक ने जाना कि उसके जीवन की कठिन परिस्थितियों के प्रगट कारण कुछ भी हों, हर बात परमेश्वर की ओर से और उसकी भलाई ही के लिये थी।

परमेश्वर जानता है कि वह क्या कर रहा है, और हम हर बात के लिये उसपर पूरा भरोसा कर सकते हैं। हमारे जीवन में आने या होने वाली हर बात या तो परमेश्वर की अनुमति द्वारा है या उसने भेजी है। उसने उस बात को हमारे अनुशसन और हमारे भले के लिये योजनाबद्ध किया है। हमारी कोई परिस्थिति उसके प्रेम की पहुंच के बाहर नहीं है।

इसलिये हम १ राजा १२:२४ में परमेश्वर के द्वारा कहे गए इन शब्दों से शांत और आश्वस्त रह सकते हैं : "...क्योंकि यह बात मेरी ही ओर से हुई है।" - बौश


क्लेषों द्वारा परमेश्वर हमें वे बातें सिखाता है जिन्हें हम किसी और रीति से नहीं सीख सकते।

हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपनी सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है। - भजन ११९:७५


बाइबल पाठ: भजन ११९:७३-८०

तेरे हाथों से मैं बनाया और रचा गया हूं, मुझे समझ दे कि मैं तेरी आज्ञाओं को सीखूं।
तेरे डरवैये मुझे देख कर आनन्दित होंगे, क्योंकि मैं ने तेरे वचन पर आशा लगाई है।
हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपनी सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है।
मुझे अपनी करूणा से शान्ति दे, क्योंकि तू ने अपने दास को ऐसा ही वचन दिया है।
तेरी दया मुझ पर हो, तब मैं जीवित रहूंगा; क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी हूं।
अभिमानियों की आशा टूटे, क्योंकि उन्होंने मुझे झूठ के द्वारा गिरा दिया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा।
जो तेरा भय मानते हैं, वह मेरी ओर फिरें, तब वे तेरी चितौनियों को समझ लेंगे।
मेरा मन तेरी विधियों के मानने में सिद्ध हो, ऐसा न हो कि मुझे लज्जित होना पड़े।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २३-२४
  • मरकुस १:१-२२

शनिवार, 29 जनवरी 2011

सृष्टि की पाठशाला, परमेश्वर के अनपहचाने करिशमे

एक इंजीनियर श्री टी. सी. रोडी ने लिखा, "मेरे घर के आंगन में छः विशाल Oak (बांज) वृक्ष हैं जो १०० वर्ष से भी अधिक पुराने होंगे। उनके तले से लेकर चोटी तक के प्रत्येक पत्ते को हरा भरा रखने के लिये प्रतिदिन भारी मात्रा में उन तक पानी पहुंचाने की आवश्यक्ता होती है। एक इंजीनियर होने के नाते मैं जानता हूं कि मनुष्य द्वारा अभिकल्पित अथवा निर्मित ऐसा कोई भी पानी चढ़ाने का पम्प नहीं है जो इतना पानी इन पेड़ों के सघन लकड़ी के तने में से होकर इतनी ऊँचाई तक प्रवाहित कर सके, और वह भी लगातार, अविराम, बिना किसी खराबी या रखरखाव की आवश्यक्ता के। यदि पानी के प्रवाह में तने की लकड़ी के प्रतिरोध को ना भी लिया जाए, तो भी प्रत्येक पेड़ की जड़ों को ज़मीन से चोटी तक पानी चढाने के लिये ३,००० पौंड प्रति वर्ग फुट से अधिक के दबाव को पार करना होगा। लेकिन फिर भी यह परमेश्वर का अद्भुत करिशमा है कि जड़ें इतना पानी जमा भी करतीं हैं और उसे प्रत्येक पत्ते तक भी पहुंचाती हैं, बिल्कुल शांत और सहज रीति से, और हमें पता भी नहीं चलता।"

यह परमेश्वर के अनपहचाने करिशमों का केवल एक उदाहरण है। ऐसे न जाने कितने, और इससे भी न जाने कितने जटिल और कई उदाहरण सृष्टि की पाठशाला में विद्यमान हैं। परमेश्वर के इन्हीं अनपहचाने करिशमों के कारण हमारा जीवन प्रतिदिन पृथ्वी पर संभव है। प्रतिदिन परमेश्वर हमें अनगिनित आशीशों से नवाज़ता है और हम उन्हें ’प्रकृति के कार्य’ कह कर हलके में टाल जाते हैं, परमेश्वर को धन्यवाद देना तो दूर, बहुतेरे तो उसके असतित्व से ही इन्कार कर जाते हैं। लेकिन परमेश्वर का धैर्य और प्रेम फिर भी सबके प्रति बना रहता है और वह जीवन की आवश्यक्ताएं प्रदान करता रहता है।

प्रकृति परमेश्वर में हमारे विश्वास को बढ़ाती है। हज़ारों साल पहले परमेश्वर ने बुज़ुर्ग और निसन्तान अब्राहम से कहा कि आकाश की ओर देख और सितारों की संख्या पर ध्यान दे, जैसे तारे अनगिनित हैं वैसे ही तेरे वंश के लोग भी अनगिनित होंगे। वह बुज़ुर्ग समझ गया कि जो परमेश्वर उन अनगिनित सितारों को बना और चला सकता है, उस परमेश्वर के लिये उसकी बुज़ुर्गी में पुत्र देना कोई कठिन कार्य नहीं है। अब्राहम ने परमेश्वर की बात पर विश्वास किया और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया। अब्राहम और उसकी पत्नि के बुढापे में उन्हें सन्तान हुई और आज उसका वंश इस्त्राएल के रूप में जाना जाता है।

जब कभी अपनी किसी समस्या के समाधान के लिये परमेश्वर पर विश्वास करना कठिन हो रहा हो तो सृष्टि की पाठशाला में जा कर प्रकृति के सृजनकर्ता और संचलाक परमेश्वर के अद्भुत कार्यों पर ध्यान कीजिए। विचार कीजिए कि जो इतना सब इतनी सहजता से बना और चला सकता है, उसके लिये आपकी समस्या क्या कठिन है? फिर अपने बच्चोंके लिये उसके वचन और हमारी पाठ्य पुस्तक - पवित्र शास्त्र बाइबल में दिये गये उसके वायदों और आश्वासनों को स्मरण कीजिए, आपका विश्वास स्वतः ही जाग उठेगा और चिंताएं जाती रहेंगीं। - डेनिस डी हॉन


जो कुछ मैं ने देखा है वह सब मुझे मेरे सृष्टिकर्ता परमेश्वर पर प्रत्येक अन्देखी बात के लिये भी विश्वास रखने को प्रेरित करता है। - एमरसन

और उस ने उसको बाहर ले जा के कहा, आकाश की ओर दृष्टि कर के तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है ? फिर उस ने उस से कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा। - उत्पत्ति १५:५


बाइबल पाठ: उत्पत्ति १५:१-६

इन बातों के पश्चात्‌ यहोवा को यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुंचा, कि हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा फल मैं हूं।
अब्राम ने कहा, हे प्रभु यहोवा मैं तो निर्वंश हूं, और मेरे घर का वारिस यह दमिश्की एलीएजेर होगा, सो तू मुझे क्या देगा ?
और अब्राम ने कहा, मुझे तो तू ने वंश नहीं दिया, और क्या देखता हूं, कि मेरे घर में उत्पन्न हुआ एक जन मेरा वारिस होगा।
तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि यह तेरा वारिस न होगा, तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा।
और उस ने उसको बाहर ले जा के कहा, आकाश की ओर दृष्टि कर के तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है? फिर उस ने उस से कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा।
उस ने यहोवा पर विश्वास किया और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २१-२२
  • मत्ती १९