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Friday, December 31, 2010

देखभाल का वायदा

कैलिफोर्निया के एक बुज़ुर्ग पास्टर रे स्टैडमैन ने एक बार अपनी मण्डली से अपने संदेश में कहा: "नव वर्ष की पूर्व सन्ध्या पर, अपने जीवन के किसी भी अन्य समय से अधिक, हमें यह एहसास होता है कि हम बीते हुए वक्त को पलट नहीं सकते; ....हम पिछली यादों को दोहरा अवश्य सकते हैं, परन्तु बीते वर्ष के एक भी पल को दोबारा नहीं जी सकते।"

फिर स्टैडमैन ने बाइबल से इस्त्राएलियों का उदाहरण दिया जब वे एक नए स्थान में प्रवेश करके उसे अपना देश बनाने की कगार पर थे। चार दशकों तक बियाबान में भटकने, पुरानी पीढ़ी के गुज़र जाने के बाद, प्रवेश की कगार पर खड़ी इस नई पीढ़ी में असमंजस रहा होगा कि क्या उनमें वह विश्वास और धैर्य होगा जिससे वे इस वाचा की भूमि को अपना बना सकेंगे?

उनका नेतृत्व करने वाले मूसा ने उन्हें स्मरण दिलाया "परन्तु यहोवा के इन सब बड़े बड़े कामों को तुम ने अपनी आंखों से देखा है।" (व्यवस्थाविवरण ११:७); और, यह कि उनकी मंज़िल एक ऐसा देश है "वह ऐसा देश है जिसकी तेरे परमेश्वर यहोवा को सुधि रहती है; और वर्ष के आदि से लेकर अन्त तक तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि उस पर निरन्तर लगी रहती है।"(व्यवस्थाविवरण ११:१२)

इस नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हम बीते समयों की घटनाओं के कारण भविष्य के लिये चिंतित हो सकते हैं, परन्तु हमें अतीत से बंधे रहने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि हम भविष्य को जानने वाले अपने परमेश्वर पर नज़रें लगा कर आगे बढ़ सकते हैं। जैसे उसकी नज़रें इस्त्राएल और वाचा की हुई भूमि पर हैं, वैसे ही हम पर भी रहतीं हैं।

परमेश्वर की देखभाल हमारे लिये नये साल के प्रत्येक दिन पर उपलब्ध रहेगी, हम इस वायदे पर पूरा पूरा विश्वास रख सकते हैं। - डेविड मैककैसलैंड


हमारे भविष्य का "क्या" अनन्त के परमेश्वर के हाथों में है।

...वर्ष के आदि से लेकर अन्त तक तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि उस पर निरन्तर लगी रहती है। - व्यवस्थाविवरण ११:१२


बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ११:७-१२

परन्तु यहोवा के इन सब बड़े बड़े कामों को तुम ने अपनी आंखों से देखा है।
इस कारण जितनी आज्ञाएं मैं आज तुम्हें सुनाता हूं उन सभों को माना करना, इसलिये कि तुम सामर्थी होकर उस देश में जिसके अधिकारी होने के लिये तुम पार जा रहे हो प्रवेश करके उसके अधिकारी हो जाओ,
और उस देश में बहुत दिन रहने पाओ, जिसे तुम्हें और तुम्हारे वंश को देने की शपथ यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी, और उस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं।
देखो, जिस देश के अधिकारी होने को तुम जा रहे हो वह मिस्र देश के समान नहीं है, जहां से निकल कर आए हो, जहां तुम बीज बोते थे और हरे साग के खेत की रीति के अनुसार अपने पांव की नलियां बना कर सींचते थे;
परन्तु जिस देश के अधिकारी होने को तुम पार जाने पर हो वह पहाड़ों और तराईयों का देश है, और आकाश की वर्षा के जल से सिंचता है,
वह ऐसा देश है जिसकी तेरे परमेश्वर यहोवा को सुधि रहती है; और वर्ष के आदि से लेकर अन्त तक तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि उस पर निरन्तर लगी रहती है।

एक साल में बाइबल:
  • मलाकी १-४
  • प्रकाशितवाक्य २२

Thursday, December 30, 2010

सही उद्देश्य

वह खिलाड़ी अपने अभ्यास और व्यायाम को काफी समय से छोड़ चुका था। अब उसने फिर से अभ्यास आरंभ करने की ठानी, इसलिये उसने अपने लिये व्यायाम का क्रम निर्धारित किया। पहले दिन उसने कई डंड बैठकें और हलकी दौड़ लगाई। अगले दिन, कुछ और अधिक डंड बैठकें, कुछ और लम्बी दौड़। तीसरे दिन फिर कुछ अधिक व्यायाम और कुछ और लम्बी दौड़। चौथे दिन जब हमारा यह खिलाड़ी सुबह उठा तो उसका गला बैठा हुआ था और तबियत खराब थी।

अब उसने अपनी स्थिति पर विचार किया और इस निष्कर्श पर पहुंचा कि यदि व्यायाम द्वारा इतना हांफने और तेज़ सांस लेने का यही नतीजा निकला तो वह व्यायाम नहीं करेगा, वह जैसा है वैसा ही भला!

अब एक दूसरा दृश्य देखते हैं, खिलाड़ी की जगह मसीही विश्वासी को रख देते हैं। इस विश्वासी को एहसास होता है कि उसने बहुत समय से परमेश्वर के साथ अपने संबंध को नज़रंदाज़ किया हुआ है, और इसे ठीक करने के लिये वह अपने आत्मिक व्यायाम - बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने का नया क्रम आरंभ करता है। यह आरंभ करने के कुछ दिनों पश्चात ही उसके जीवन में कुछ समस्याएं आ जातीं हैं। अब उसे किस निष्कर्श पर पहुंचना चाहिये? क्या उस खिलाड़ी के समान उसे सोच लेना चाहिये कि उसकी आत्मिक प्रगति का व्यायाम एक व्यर्थ प्रयास है जिससे उसे कुछ लाभ नहीं हुआ? कदापि नहीं!

हमें यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेनी चाहिये कि हमारा बाइबल पढ़ना, प्रार्थना करना, परमेश्वर के लोगों की संगति करना आदि का उद्देश्य यह नहीं है कि हमें कष्ट और परेशानी से रहित जीवन मिल जाए। हम यह इसलिये करते हैं ताकि हम उस सिद्ध परमेश्वर के और निकट आ सकें, उसे और भली भांति जान सकें और उसकी इच्छाओं को पूरा कर सकें। प्रभु यीशु ने कभी अपने अनुयायीयों को यह आश्वासन नहीं दिया कि उन्हें संसार में कष्ट रहित जीवन और संसार के सब सुख मिलेंगे। प्रभु ने कहा "ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ। वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा यह समझेगा कि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूं। और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्‍होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं। परन्‍तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्हें स्मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहिले ही कह दिया था:" (यूहन्ना १६:१-४) "मैं ने तेरा वचन उन्‍हें पहुंचा दिया है, और संसार ने उन से बैर किया, क्‍योंकि जैसा मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं।" (यूहन्ना १७:१४) पौलुस ने लिखा "पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे" (२ तिमुथियुस ३:१२)।

मसीही विश्वासी के लिये परमेश्वर भक्ति का उद्देश्य सांसारिक उप्लब्धियां नहीं हैं "यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं" (१ कुरिन्थियों १५:१९)। परमेश्वर इस संसार में भी हमें बहुत कुछ दे सकता है और देता है, परन्तु हमारी आशा और प्रतिफल उस स्वर्ग के अनन्त जीवन के हैं जहां अन्ततः हमने जाना है। इसलिये "तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।" (इब्रानियों १०:२२, २३) - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में विश्वासी जीवन की जड़ें धंसाने से ही जीवन में स्थिरता और शांति आती है।

तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। - इब्रानियों १०:२२


बाइबल पाठ: इब्रानियों १०:२२-३९

तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं।
और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।
और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें।
और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें, और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।
क्‍योंकि सच्‍चाई की पहिचान प्राप्‍त करने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिये फिर कोई बलिदान बाकी नहीं।
हां, दण्‍ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्‍वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्म कर देगा।
जब कि मूसा की व्यवस्था का न मानने वाला दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है।
तो सोच लो कि वह कितने और भी भारी दण्‍ड के योग्य ठहरेगा, जिस ने परमेश्वर के पुत्र को पांवों से रौंदा, और वाचा के लोहू को जिस के द्वारा वह पवित्र ठहराया गया था, अपवित्र जाना है, और अनुग्रह की आत्मा का अपमान किया।
क्‍योंकि हम उसे जानते हैं, जिस ने कहा, कि पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूंगा: और फिर यह, कि प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा।
जीवते परमेश्वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है।
परन्‍तु उन पहिले दिनों को स्मरण करो, जिन में तुम ज्योति पाकर दुखों के बड़े झमेले में स्थिर रहे।
कुछ तो यों, कि तुम निन्‍दा, और क्‍लेश सहते हुए तमाशा बने, और कुछ यों, कि तुम उन के साझी हुए जिन की र्दुदशा की जाती थी।
क्‍योंकि तुम कैदियों के दुख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्‍द से लुटने दी; यह जानकर, कि तुम्हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरने वाली संपत्ति है।
सो अपना हियाव न छोड़ो क्‍योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है।
क्‍योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्‍छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।
क्‍योंकि अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जब कि आने वाला आएगा, और देर न करेगा।
और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा।
पर हम हटने वाले नहीं, कि नाश हो जाएं पर विश्वास करने वाले हैं, कि प्राणों को बचाएं।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह १३-१४
  • प्रकाशितवाक्य २१

Wednesday, December 29, 2010

नया और पुराना

मैं सिंगापुर में एक पेट्रोलियम कंपनी में काम कर रहा था, वहां एक अन्य देश से, जो उस समय युद्ध में था, एक निरीक्षक उसके देश को भेजे जाने वाले तेल की खेप का परिक्षण करने आया। निरीक्षण के समय अचानक उपर से वायु सेना के युद्ध विमानों की आवाज़ सुनकर, आदत अनुसार वह छुपने के स्थान को ढूंढता हुआ भागा; फिर झेंपकर बोला, "क्षमा कीजिये, मुझे लगा कि मैं अपने देश में हूं"; उसने, आदत अनुसार, वही किया जो वह अपने युद्ध ग्रसित देश में होने पर करता।

मसीही विश्वासी के लिये, संसार की बातों और आकर्षणों में पड़कर, अपने पुराने पापमय चाल-चलन में तथा अपनी पुरानी आदतों के अनुसार चलने के प्रलोभन आते हैं। यद्यपि हम विश्वासी "मसीह यीशु में हैं" (रोमियों ८:१), फिर भी कभी कभी हम ऐसे जीने लगते हैं जैसे कि हम पाप में हों।

पाप के दासत्व से हमें छुड़ाने के लिये परमेश्वर ने बहुत भारी कीमत चुकाई। उसने यह "अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेजकर" किया (रोमियों ८:३)। अब हम "पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था" के आधीन नहीं, वरन "जीवन की आत्मा की व्यवस्था" के आधीन हैं (रोमियों ८:२)। इसलिये पौलुस कहता है कि अब हमें आध्यात्मिक व्यक्तियों के समान आत्मिक बातों पर मन लगाना है (रोमियों ८:५)। इसका अर्थ है कि अब हमें परमेश्वर की आत्मा के निर्देश में परमेश्वर के वचन से मार्गदर्शन लेना है।

जब भी आपके सामने अपने पुराने पापमय जीवन की बातों के अनुसार चलने के प्रलोभन आएं, परमेश्वर के आत्मा के आधीन हो जाएं, जो मसीह के प्रत्येक विश्वासी आंदर निवास करता है। वह आपको "मसीह में" चलने और बने रहने का मार्ग दिखाएगा और उसमें लेकर चलेगा। - सी. पी. हिया


जब आप नया जन्म लेते हैं तो स्वर्ग के नागरिक बन जाते हैं।

क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया। - रोमियों ८:२


बाइबल पाठ: रोमियों ८:१-१०

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं: क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया।
क्‍योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण र्दुबल होकर न कर सकी, उस को परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेजकर, शरीर में पाप पर दण्‍ड की आज्ञा दी।
इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए।
क्‍योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं, परन्‍तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं।
शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्‍तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्‍ति है।
क्‍योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्‍योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है, और न हो सकता है।
और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।
परन्‍तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्‍तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।
और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है, परन्‍तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह ९-१२
  • प्रकाशितवाक्य २०

Tuesday, December 28, 2010

धीरज रखने की सामर्थ

व्यवासयिक गोल्फ खिलड़ी पौला क्रीमर ने सारे साल परिश्रम किया जिससे उसे २००८ की ADT प्रतियोगिता में भाग लेने का स्थान मिल सके। जब प्रतियोगिता आरंभ हुई तो पौला पेट के रोग से ग्रसित हो गई और प्रतियोगिता के चारों दिन उसे पेट में सूजन के कारण बहुत दर्द रहा, वह कुछ खा भी नहीं पा रही थी और एक रात उसे अस्पताल में भी बितानी पड़ी। फिर भी वह अन्त तक प्रतियोगिता में बनी रही, और आश्चर्य की बात रही कि उसे प्रतियोगिता में तीसरा स्थान मिला। तकलीफ के बवजूद प्रतियोगिता में बने रहने के उसके दृढ़ निश्चय के कारण उसके कई नये प्रशंसक बन गये।

इस जीवन की चुनौतियां और मुश्किलें हमें हमारी सहने की शक्ति की सीमाओं तक परख सकती हैं, और ऐसे में हार मान लेना और धीरज छोड़ देना बहुत आसान होता है। प्रभु यीशु के अनुयाइयों को याकूब ऐसे में एक और परिप्रेक्ष्य दिखाता है। उसका कहना है कि चाहे जीवन एक संघर्ष हो, परन्तु संघर्ष के साथ आशीष भी है: "देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्युब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है" (याकूब ५:११)।

अय्युब के जीवन से हम जीवन की कठिनतम घड़ियों में भी धीरज बनाए रखने के लिये प्रोत्साहन और सामर्थ पाते हैं - सामर्थ जो ऐसे परमेश्वर से है जो कि दयावन्त और करुणामय है। यद्यपि जीवन कठिन और जटिल हो सकता है, लेकिन हम धीरज सहित परिस्थितियों में दृढ़ बने रह सकते हैं क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है। उसकी करुणा सदा बनी रहती है (भजन १३६)। - बिल क्राउडर


परमेश्वर हमें बने रहने की शक्ति प्रदान करता है।

देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्युब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है - याकूब ५:११

बाइबल पाठ: याकूब ५:१-११

हे धनवानों सुन तो लो, तुम अपने आने वाले क्‍लेशों पर चिल्लाकर रोओ।
तुम्हारा धन बिगड़ गया और तुम्हारे वस्‍त्रों को कीड़े खा गए।
तुम्हारे सोने-चान्‍दी में काई लग गई है, और वह काई तुम पर गवाही देगी, और आग की नाई तुम्हारा मांस खा जाएगी: तुम ने अन्‍तिम युग में धन बटोरा है।
देखो, जिन मजदूरों ने तुम्हारे खेत काटे, उन की वह मजदूरी जो तुम ने धोखा देकर रख ली है चिल्ला रही है, और लवने वालों की दोहाई, सेनाओं के प्रभु के कानों तक पहुंच गई है।
तुम पृथ्वी पर भोग-विलास में लगे रहे और बड़ा ही सुख भोगा, तुम ने इस वध के दिन के लिये अपने हृदय का पालन-पोषण करके मोटा ताजा किया।
तुम ने धर्मी को दोषी ठहराकर मार डाला, वह तुम्हारा साम्हना नहीं करता।
सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्‍तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है।
तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्‍योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है।
हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है।
हे भाइयो, जिन भविष्यद्वक्ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्‍हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो।
देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्युब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह ५-८
  • प्रकाशितवाक्य १९

Monday, December 27, 2010

अनुग्रह का स्थान

२८ दिसंबर २००८ को अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर के टाईम्स स्कुऐर में Good Riddance Day (पिंड छुड़ाने का दिन) का आयोजन किया गया। आयोजकों ने लोगों को उत्साहित किया कि वे बीते वर्ष की अपनी बुरी यादें और तकलीफें लेकर आयें और कागज़ की धज्जियां बनाने वाली विशाल मशीन (Shredder) या रखे गये बड़े से कूड़ेदान में उन्हें डाल दें।

लोगों ने जिन बातों को सांकेतिक रूप से अपने से दूर किया उनमें कुछ थीं ’स्टॉक मार्केट’, ’कैंसर’आदि। कुछ ने बैंक के कागज़ात फाड़े, एक लड़की ने अपने ’बॉयफ्रैंड’, जो उससे अलग हो गया था, की ईमेल फाड़ीं।

हम अपने दुखदायी अनुभवों, लोगों द्वारा हमारे विरोध में करी गई बातों, अपनी कठिन परिस्थितियों आदि की यादों को भुला देने की लालसा रखते हैं। प्रेरित पौलुस भी चाहता था कि उसे तकलीफ देने वाली व्याधि, जो उसे कमज़ोर कर रही थी, से वह छुटकारा पाये (२ कुरिन्थियों १२:७-१०)। परन्तु परमेश्वर ने उससे कहा, "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है" (२ कुरिन्थियों १२:९)। परमेश्वर ने वह तकलीफ नहीं हटाई वरन उसे सहन करने की सामर्थ और उस समस्या में भी परमेश्वर की महिमा करने की सामर्थ दे दी।

जब हम अपने मनों में समस्याओं पर विचार करते रहते हैं तो वे हमें बोझिल कर देती हैं और हमारे रिश्तों और जीवन के प्रति नज़रिये पर प्रभाव डालती हैं। प्रभु यीशु के विश्वासियों के पास इन समस्याओं को ले जाने का ऐसा स्थान है जहां से वे फिर उन्हें परेशान नहीं कर सकतीं - "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है।" (१ पतरस ५:६, ७)

क्या आपने इस अनुग्रह के स्थान को जाना है? क्या आप ने अपनी चिन्ताएं उस अनुग्रह के स्थान पर डाल दी हैं? परमेश्वर का निमंत्रण आज आपके लिये है, प्रभु यीशु में आपके लिये अनुग्रह का स्थान खुला है उसने वय्दा दिया है - "हे सब परिश्र्म करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्रम दूंगा" (मती ११:२८)। - ऐनी सेटास


परमेश्वर हमें प्रत्येक समस्या का सामना करने की सामर्थ देता है।

मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है। - २ कुरिन्थियों १२:९


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १२:७-१०

और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं।
इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार विनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए।
और उस ने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्‍द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे।
इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं, क्‍योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह १-४
  • प्रकाशितवाक्य १८

Sunday, December 26, 2010

प्रबल आशा

आज नास्तिक साम्यवाद का प्रभाव संसार में कम होता जा रहा है, किंतु जब साम्यवाद संसार में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा था तो उसके प्रतिपादकों ने घोषणा करी कि ईश्वर का कोई असतित्व नहीं है और इस जीवन के बाद किसी जीवन की आशा रखना धोखा और भ्रम है। रूस के राष्ट्रपति लियोनिड ब्रैज़नेव अपने समय में इस मार्क्सवादि सिद्धांत की प्रतिमूर्ति थे; लेकिन उनकी अंतिम क्रिया के समय कुछ ऐसा हुआ जिसने इस नास्तिक्ता के सिद्धांत का खण्डन किया। उस समय जार्ज बुश अमेरिका के उपराष्ट्रपति थे और ब्रैज़नेव के अन्तिम संसकार में अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

जार्ज बुश ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जब तक कफन का ढक्कन खुला रहा तब तक ब्रैज़नेव की पत्नि उसके पास अविचल खड़ी अपने पति के शव की ओर देखती रही। सनिकों के कफन को बंद करने के कुछ क्षण पहले उन्होंने हाथ बढ़ा कर अपनी उंगुली से ब्रैज़नेव की छाती पर क्रूस का निशान बना दिया; कैसा अर्थपूर्ण और भावनात्मक प्रयास! उस विध्वा को शायद यह आशा थी कि सारी उम्र जिस परमेश्वर को उसका पति अपनी पूरी सामर्थ से नकारता रहा और जिसका विरोध करता रहा, वही अब अपनी करुणा में उस पर दया दिखाएगा।

परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमारे लिये इस पृथ्वी के जीवन बाद भी एक आशा का मार्ग है। बस हमें इतना करना है कि सच्चे मन और विश्वास से क्रूस के उद्धारकारी संदेश - प्रभु यीशु हमारे पापों के लिये मारा गया और तीसरे दिन जी उठा जिससे हम उसके साथ अनन्तकाल तक जी सकें, को मानकर ग्रहण कर लेना है।

क्या आप ने यह विश्वास किया है? यदि हां तो प्रेरित पौलुस के साथ मिलकर कहिये "हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है जो सब मनुष्यों का, और निज करके विश्वासियों का उद्धारकर्ता है।" (१ तिमुथियुस ४:१०)


अनन्त जीवन का एकमात्र मार्ग यीशु मसीह के कलवरी के क्रूस से होकर ही है।

पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्‍ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्‍टि में और मैं संसार की दृष्‍टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं। - गलतियों ६:१४


बाइबल पाठ: फिलिपियों २:५-११

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है।
कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल:
  • हग्गै १, २
  • प्रकाशितवाक्य १७

Saturday, December 25, 2010

मरियम का क्रिसमस

बैतलहेम की वह रात, जिस रात उसने राजाओं के राजा को जन्म दिया, सहमी हुई युवती मरियम के लिये शान्त और सौम्य नहीं रही होगी। मरियम के पास अपने शिशु के जन्म की पीड़ा को सहने में सहायातार्थ सिवाय उसके बढ़ई पति यूसुफ के सख्त और खुरदुरे हाथों के और कुछ नही था। निकट के मैदानों में चरवाहों ने तो उस शिशु के जन्म की खुशी में स्वर्गदूतों से गीत सुने परन्तु मरियम और युसुफ के लिये तो गौशाला के जान्वरों की, प्रसव पीड़ा की और नवजात शिशु के रोने की आवाज़ ही थी। बाहर आकाश में एक विशेष सितारा अपनी चमक बिखेर रहा था, लेकिन इन दो परदेशी आगन्तुकों के लिये गौशाला का निरानन्द दृश्य ही था।

जब युसुफ ने मरियम के हाथों में उस शिशु को रखा तो विस्मय, पीड़ा, भय और आनन्द की मिली-जुली भावनाएं उसके हृदय से होकर गुज़री होंगी। स्वर्गदूत की प्रतिज्ञा के कारण वह जानती थी कि कपड़े में लिपटा यह नन्हा सा बालक "परमप्रधान का पुत्र" (लूका १:३२) है, और जब उस धुंधली सी रौशनी में मरियम ने उस शिशु की आंखों में झांक कर फिर युसुफ की ओर देखा होगा तो उसे असमंजस हुआ होगा कि वह कैसे सृष्टि के चलाने वाले और ऐसे अधिपति के मातृत्व की ज़िम्मेवारी संभाल पाएगी, जिसके राज्य का कोई अन्त नहीं होगा।

उस विशेष रात्रि को मरियम के लिये विचार करने को बहुत कुछ था।

अब २००० वर्ष के पश्चात, हम में से प्रत्येक को यीशु के जन्म के महत्व और बाद में उसके मारे जाने, पुनुरुत्थान और फिर लौट कर आने के वायदे के बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यक्ता है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर हमारे साथ रहने आया, जिससे हमें उसके साथ निवास करने का मार्ग मिल सके।

परन्‍तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। - लूका २:१९


बाइबल पाठ: लूका १:२६-३५

छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्‍वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया।
जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था।
और स्‍वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा, आनन्‍द और जय तेरी ह&#