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शनिवार, 9 जून 2018

महत्वपूर्ण



   दो जन अपने व्यवासायिक दौरे और उसके परिणामों की समीक्षा करने के लिए बैठे। एक ने कहा कि उसे लगता है कि दौरा सफल रहा क्योंकि उनके व्यावासायिक संपर्कों के द्वारा कुछ नए और सार्थक संबंध बनने आरंभ हुए थे। दूसरे ने कहा, “संबंध तो ठीक हैं, परन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात होती है विक्रय करना।” स्पष्टतया, दोनों के बहुत भिन्न दृष्टिकोण थे।

   हम चाहे व्यवसाय में हों, या परिवार में, या चर्च में, दूसरों को इस दृष्टिकोण से देखना कि वे हमारे लिए कैसे उपयोगी हो सकते हैं, बहुत सरल होता है। हम लोगों की कीमत का आँकलन, हमारे लिए उनकी उपयोगिता के आधार पर करते हैं, न कि इस पर कि यीशु के नाम में हम उनकी क्या और कितनी सेवा कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पियों की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में, प्रेरित पौलुस ने लिखा, “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे” (फिलिप्पियों 2:3-4)।

   हमें लोगों को अपने लाभ के लिए प्रयोग नहीं करना है। क्योंकि हमारा परमेश्वर पिता सभी से प्रेम करता है, और हम अपने पिता परमेश्वर से प्रेम करते हैं, इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम दूसरों से भी प्रेम करें। परमेश्वर का प्रेम सबसे महान प्रेम है; और उस प्रेम को अपने जीवनों से प्रदर्शित करना हम मसीहियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। - बिल क्राउडर


औरों की आवश्यकताओं को अपनी आवश्यकताओं से आगे रखने से आनन्द मिलता है।

भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। - रोमियों 12:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 32-33
  • यूहन्ना 18:19-40



शनिवार, 7 अप्रैल 2018

इच्छा एवं योजना



   मेरे पति जब 18 वर्ष के थे तब उन्होंने कारों की सफाई करने का व्यवसाय आरंभ किया था। उन्होंने एक गैराज को किराए पर लिया, सहायकों को वेतन पर रखा, और विज्ञापन के लिए पर्चे छपवा कर बंटवाए। उनका यह व्यवसाय चल निकला। उनका उद्देश्य था कि वे इस व्यवसाय को बेचकर उससे मिलने वाले धन से अपनी कॉलेज की पढाई का खर्चा उठाएंगे। इसलिए जब एक ग्राहक ने व्यवसाय को खरीदने में रुचि दिखाई तो वे बहुत प्रसन्न हुए। कुछ बातचीत और मोल-भाव के बाद ऐसा लगा कि यह सौदा सफल हो जाएगा; परन्तु एन मौके पर आकर सौदा चूक गया। फिर इसके सात महीन बाद ही व्यवसाय बेचने की उनकी योजना सफल हुई।

   यदि हमारी योजनाओं के संबंध में परमेश्वर की योजनाएं और पूर्ति के समय हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होते हैं, तो निराश होना स्वाभाविक होता है। हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि जब राजा दाऊद ने परमेश्वर के मंदिर को बनवाना चाहा, तो उसका उद्देश्य सही था, उसका नेतृत्व सही था, और उसके पास इसके लिए आवश्यक सभी संसाधन थी उपलब्ध थे। परन्तु परमेश्वर ने उसे मंदिर बनावाने से मना किया, क्योंकि उसने युद्ध में बहुत से लोगों का खून बहाया था (1 इतिहास 22:8)।

   परमेश्वर की इस बात को सुनकर दाऊद क्रोधित हो सकता था, खीज कर मुँह फुला सकता था, या फिर अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए परमेश्वर की बात को अनदेखा कर के आगे बढ़ सकता था। परन्तु उसने ऐसा कुछ नहीं किया, वरन दीनता से परमेश्वर के सामने झुक गया और कहा, “...हे यहोवा परमेश्वर! मैं क्या हूँ? और मेरा घराना क्या है? कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचाया है” (1 इतिहास 17:16)। इसके आगे दाऊद ने परमेश्वर की आराधना की, और उसके प्रति अपने समर्पण और भक्ति की पुष्टि की। अपनी इच्छाओं से अधिक, वह परमेश्वर के साथ अपने संबंध को महत्व एवँ मूल्य देता था।

   हमारे लिए यह विचार करने की बात है कि हमारे लिए किस का अधिक महत्व और कीमत है – हमारी अपनी इच्छाओं एवँ योजनाओं की पूर्ति होने की, या परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम, समर्पण और आज्ञाकारिता की? – जेनिफर बेन्सन शुल्ट


सच्ची संतुष्टि परमेश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित होने से मिलती है।

हे यहोवा, मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है, या आदमी क्या है, कि तू उसकी कुछ चिन्ता करता है? – भजन 144:3

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 17:1-20
1 Chronicles 17:1 जब दाऊद अपने भवन में रहने लगा, तब दाऊद ने नातान नबी से कहा, देख, मैं तो देवदारु के बने हुए घर में रहता हूँ, परन्तु यहोवा की वाचा का सन्दूक तम्बू में रहता है।
1 Chronicles 17:2 नातान ने दाऊद से कहा, जो कुछ तेरे मन में हो उसे कर, क्योंकि परमेश्वर तेरे संग है।
1 Chronicles 17:3 उसी दिन रात को परमेश्वर का यह वचन नातान के पास पहुंचा, जा कर मेरे दास दाऊद से कह,
1 Chronicles 17:4 यहोवा यों कहता है, कि मेरे निवास के लिये तू घर बनवाने न पाएगा।
1 Chronicles 17:5 क्योंकि जिस दिन से मैं इस्राएलियों को मिस्र से ले आया, आज के दिन तक मैं कभी घर में नहीं रहा; परन्तु एक तम्बू से दूसरे तम्बू को ओर एक निवास से दूसरे निवास को आया जाया करता हूँ।
1 Chronicles 17:6 जहां जहां मैं ने सब इस्राएलियों के बीच आना जाना किया, क्या मैं ने इस्राएल के न्यायियों में से जिन को मैं ने अपनी प्रजा की चरवाही करने को ठहराया था, किसी से ऐसी बात कभी कही, कि तुम लोगों ने मेरे लिये देवदारु का घर क्यों नहीं बनवाया?
1 Chronicles 17:7 सो अब तू मेरे दास दाऊद से ऐसा कह, कि सेनाओं का यहोवा यों कहता है, कि मैं ने तो तुझ को भेड़शाला से और भेड़-बकरियों के पीछे पीछे फिरने से इस मनसा से बुला लिया, कि तू मेरी प्रजा इस्राएल का प्रधान हो जाए;
1 Chronicles 17:8 और जहां कहीं तू आया और गया, वहां मैं तेरे संग रहा, और तेरे सब शत्रुओं को तेरे साम्हने से नष्ट किया है। अब मैं तेरे नाम को पृथ्वी के बड़े बड़े लोगों के नामों के समान बड़ा कर दूंगा।
1 Chronicles 17:9 और मैं अपनी प्रजा इस्राएल के लिये एक स्थान ठहराऊंगा, और उसको स्थिर करूंगा कि वह अपने ही स्थान में बसी रहे और कभी चलायमान न हो; और कुटिल लोग उन को नाश न करने पाएंगे, जैसे कि पहिले दिनों में करते थे;
1 Chronicles 17:10 उस समय भी जब मैं अपनी प्रजा इस्राएल के ऊपर न्यायी ठहराता था; सो मैं तेरे सब शत्रुओं को दबा दूंगा। फिर मैं तुझे यह भी बताता हूँ, कि यहोवा तेरा घर बनाये रखेगा।
1 Chronicles 17:11 जब तेरी आयु पूरी हो जायेगी और तुझे अपने पितरों के संग जाना पड़ेगा, तब मैं तेरे बाद तेरे वंश को जो तेरे पुत्रों में से होगा, खड़ा कर के उसके राज्य को स्थिर करूंगा।
1 Chronicles 17:12 मेरे लिये एक घर वही बनाएगा, और मैं उसकी राजगद्दी को सदैव स्थिर रखूंगा।
1 Chronicles 17:13 मैं उसका पिता ठहरूंगा और वह मेरा पुत्र ठहरेगा; और जैसे मैं ने अपनी करुणा उस पर से जो तुझ से पहिले था हटाई, वैसे मैं उस पर से न हटाऊंगा,
1 Chronicles 17:14 वरन मैं उसको अपने घर और अपने राज्य में सदैव स्थिर रखूंगा और उसकी राजगद्दी सदैव अटल रहेगी।
1 Chronicles 17:15 इन सब बातों और इस दर्शन के अनुसार नातान ने दाऊद को समझा दिया।
1 Chronicles 17:16 तब दाऊद राजा भीतर जा कर यहोवा के सम्मुख बैठा, और कहने लगा, हे यहोवा परमेश्वर! मैं क्या हूँ? और मेरा घराना क्या है? कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचाया है?
1 Chronicles 17:17 और हे परमेश्वर! यह तेरी दृष्टि में छोटी सी बात हुई, क्योंकि तू ने अपने दास के घराने के विषय भविष्य के बहुत दिनों तक की चर्चा की है, और हे यहोवा परमेश्वर! तू ने मुझे ऊंचे पद का मनुष्य सा जाना है।
1 Chronicles 17:18 जो महिमा तेरे दास पर दिखाई गई है, उसके विषय दाऊद तुझ से और क्या कह सकता है? तू तो अपने दास को जानता है।
1 Chronicles 17:19 हे यहोवा! तू ने अपने दास के निमित्त और अपने मन के अनुसार यह बड़ा काम किया है, कि तेरा दास उसको जान ले।
1 Chronicles 17:20 हे यहोवा! जो कुछ हम ने अपने कानों से सुना है, उसके अनुसार तेरे तुल्य कोई नहीं, और न तुझे छोड़ और कोई परमेश्वर है।


एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 7-9
  • लूका 9:18-36



सोमवार, 13 दिसंबर 2010

विश्राम का समय

पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा करने में ३६५ और १/४ दिन लगते हैं। इस कारण हर चौथे साल वर्ष में ३६६ दिन गिने जाते हैं और यह अतिरिक्त दिन फरवरी महीने में जोड़ दिया जाता है। इस प्रकार हमारा कैलेन्डर का नक्षत्रों से निर्धारित समय से सामन्जस्य बना रहता है।

प्राचीन इस्त्राएल के कैलेन्डर में प्रमेश्वर ने एक अद्भुत रीति से सामाजिक बातों को फिर से सही सामन्जस्य में लाने की विधि ठहराई थी। जैसे मनुष्य के लिये सप्ताह का सातवां दिन विश्राम का दिन निर्धारित किया गया (निर्गमन २०:८-१०), वैसे ही भूमि के लिये भी सातवां वर्ष विश्राम का वर्ष ठहराया गया (लैव्यवस्था २५:४) जिससे उसकी उर्वरता की परिपूर्ति हो सके। इसके साथ ही इस विश्राम के सातवें वर्ष में लोगों के कर्ज़ भी माफ होने थे (व्यवस्थाविवरण १५:१-११) और इब्रानी दास भी स्वतंत्र किये जाने थे। अर्थात, यह विश्राम का वर्ष, भूमि और समाज को एक नई शुरूआत देता था।

हमारे व्यस्त कार्यक्रमों और भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में हमें भी जीवन की कई बातों में सामन्जस्य बैठाने और व्यवसाय, परिवार, मण्डली के कामों को सुचारू रूप से चलाने के लिये उनका पुनःअवलोकन करने की आवश्यक्ता होती है। इसके लिये परमेश्वर की इस विश्राम विधि का पालन करना लाभदायक है; इसके द्वारा अपने लिये विश्राम और प्रार्थना सहित अपने कार्यों और अपनी प्रथमिकताओं पर विचार करके आगे बढ़ने के लिये सामर्थ पुनः प्राप्त करी जा सकती है। प्रभु यीशु ने अपने जीवन से इसे दिखाया - वह स्वयं प्रार्थना करने के लिये एकान्त में जाया करता था (लूका ६:१२, मरकुस १:३५) और उसने अपने चेलों को भी ऐसा करने की शिक्षा दी "प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे होकर, जो कुछ उन्‍होंने किया, और सिखाया था, सब उस को बता दिया। उस ने उन से कहा, तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्‍योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्‍हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था। (मरकुस ६:३०, ३१)

ये विश्राम और प्रार्थना के समय हमारे थकित जीवनों में नई जान डालने और हमें अपने कार्य तथा ज़िम्मेदारियों के निर्वाह में और अधिक कार्यकुशल बनाने के लिये आवश्यक हैं, क्योंकि ये हमारे शरीरों की रचना में परमेश्वर द्वारा स्थापित किये गये हैं।

अपने जीवन में विश्राम के उचित समय बनाए रखिये - ये आपके, आपके परिवार के और समाज के भले के लिये परमेश्वर की व्यवस्था हैं। - डेनिस फिशर


अपने समय का सर्वोत्तम प्रयोग करने के लिये प्रार्थना में समय लगाना सीखिये।

परन्तु सातवें वर्ष भूमि को यहोवा के लिये परमविश्रामकाल मिला करे। - लैव्यवस्था २५:४


बाइबल पाठ: लैव्यवस्था २५:१-७

फिर यहोवा ने सीनै पर्वत के पास मूसा से कहा,
इस्त्राएलियों से कह, कि जब तुम उस देश में प्रवेश करो जो मैं तुम्हें देता हूं, तब भूमि को यहोवा के लिये विश्राम मिला करे।
छ: वर्ष तो अपना अपना खेत बोया करना, और छहों वर्ष अपनी अपनी दाख की बारी छांट छांटकर देश की उपज इकट्ठी किया करना;
परन्तु सातवें वर्ष भूमि को यहोवा के लिये परमविश्रामकाल मिला करे। उस में न तो अपना खेत बोना और न अपनी दाख की बारी छांटना।
जो कुछ काटे हुए खेत में अपने आप से उगे उसे न काटना, और अपनी बिन छांटी हुई दाखलता की दाखों को न तोड़ना; क्योंकि वह भूमि के लिये परमविश्राम का वर्ष होगा।
और भूमि के विश्रामकाल ही की उपज से तुम को, और तुम्हारे दास-दासी को, और तुम्हारे साथ रहने वाले मजदूरों और परदेशियों को भी भोजन मिलेगा;
और तुम्हारे पशुओं का और देश में जितने जीवजन्तु हों उनका भी भोजन भूमि की सब उपज से होगा।

एक साल में बाइबल:
  • होशै १२-१४
  • प्रकाशितवाक्य ४