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मंगलवार, 15 मार्च 2011

काठ में अभिव्यक्ति

एक बढ़ई एक अन्धे भूमिहर को अपनी कारीगरी के सिद्धांतों को समझाने की कोशिश कर रहा था। बढ़ई ने कहा कि कलाकार अपने आप को रंगों के द्वारा अपने आप को अभिव्यक्त करते हैं, लेखक शब्दों द्वारा और शिल्पकार पत्थर पर काम करके, मैं अपने आप को काठ पर अपनी कारीगरी के द्वारा ही सबसे बेहतर तरह अभिव्यक्त कर सकता हूँ। भूमीधर ने अद्भुत आत्मिक अन्तःदृष्टि से कहा, "काठ द्वारा? श्रीमान क्या आप जानते हैं कि सारे संसार में मनुष्य की महानत्म अभिव्यक्ति काठ में ही हुई है?" बढ़ई ने भूमिहर से बड़े अचरज से पूछा, "कैसे?" भूमिहर ने उत्तर दिया, "यीशु मसीह के क्रूस द्वारा।"

जब प्रभु यीशु इस पृथ्वी पर रहने के लिये आए तो अपने स्वर्गीय पिता के वचनानुसार आए। जो कुछ भी उन्होंने कहा या किया वह सब परमेश्वर पिता की आज्ञा के अनुसार था, इसलिये उनका जीवन और शिक्षाएं मनुष्य जाति के प्रति परमेश्वर के प्रेम भरे हृदय की सच्ची अभिव्यक्ति हैं। परन्तु प्रभु यीशु ने मनुष्य जाति के लिये परमेश्वर के प्रेम की अनन्त योजना की अभिव्यक्ति किसी महान शिक्षा के प्रचार या किसी बड़े आश्चर्यकर्म द्वारा नहीं करी, वरन उन्होंने परमेश्वर के प्रेम का सबसे प्रभावशाली प्रगटिकरण क्रूस पर स्वेच्छा से अपने बलिदान द्वारा किया।

क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान परमेश्वर के प्रेम की महानत्म अभिव्यक्ति था। यह बलिदान, यह मृत्यु सहना, यह अनन्त प्रेम की अभिव्यक्ति मेरे और आपके लिये थी। जिसने इस काठ पर करी गई प्रेम की महानतम अभिव्यक्ति के मर्म को समझ लिया और स्वीकार कर लिया, वह अनन्त उद्धार पा गया। - डेव एगनर


मसीह ने हमारे पाप के दोष को अपने ऊपर ले लिया और हमें अपने अनुग्रह तथा आशीश की भेंट दे दी।

यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। - १ कुरिन्थियों १:२२-२४


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-२५

1Co 1:18 क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।
1Co 1:19 क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा।
1Co 1:20 कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया?
1Co 1:21 क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे।
1Co 1:22 यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं।
1Co 1:23 परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है।
1Co 1:24 परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है।
1Co 1:25 क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २६-२७
  • मरकुस १४:२७-५३

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

मरियम का क्रिसमस

बैतलहेम की वह रात, जिस रात उसने राजाओं के राजा को जन्म दिया, सहमी हुई युवती मरियम के लिये शान्त और सौम्य नहीं रही होगी। मरियम के पास अपने शिशु के जन्म की पीड़ा को सहने में सहायातार्थ सिवाय उसके बढ़ई पति यूसुफ के सख्त और खुरदुरे हाथों के और कुछ नही था। निकट के मैदानों में चरवाहों ने तो उस शिशु के जन्म की खुशी में स्वर्गदूतों से गीत सुने परन्तु मरियम और युसुफ के लिये तो गौशाला के जान्वरों की, प्रसव पीड़ा की और नवजात शिशु के रोने की आवाज़ ही थी। बाहर आकाश में एक विशेष सितारा अपनी चमक बिखेर रहा था, लेकिन इन दो परदेशी आगन्तुकों के लिये गौशाला का निरानन्द दृश्य ही था।

जब युसुफ ने मरियम के हाथों में उस शिशु को रखा तो विस्मय, पीड़ा, भय और आनन्द की मिली-जुली भावनाएं उसके हृदय से होकर गुज़री होंगी। स्वर्गदूत की प्रतिज्ञा के कारण वह जानती थी कि कपड़े में लिपटा यह नन्हा सा बालक "परमप्रधान का पुत्र" (लूका १:३२) है, और जब उस धुंधली सी रौशनी में मरियम ने उस शिशु की आंखों में झांक कर फिर युसुफ की ओर देखा होगा तो उसे असमंजस हुआ होगा कि वह कैसे सृष्टि के चलाने वाले और ऐसे अधिपति के मातृत्व की ज़िम्मेवारी संभाल पाएगी, जिसके राज्य का कोई अन्त नहीं होगा।

उस विशेष रात्रि को मरियम के लिये विचार करने को बहुत कुछ था।

अब २००० वर्ष के पश्चात, हम में से प्रत्येक को यीशु के जन्म के महत्व और बाद में उसके मारे जाने, पुनुरुत्थान और फिर लौट कर आने के वायदे के बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यक्ता है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर हमारे साथ रहने आया, जिससे हमें उसके साथ निवास करने का मार्ग मिल सके।

परन्‍तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। - लूका २:१९


बाइबल पाठ: लूका १:२६-३५

छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्‍वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया।
जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था।
और स्‍वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा, आनन्‍द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है।
वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है?
स्‍वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम, भयभीत न हो, क्‍योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है।
और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्‍पन्न होगा, तू उसका नाम यीशु रखना।
वह महान होगा और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उस को देगा।
और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा और उसके राज्य का अन्‍त न होगा।
मरियम ने स्‍वर्गदूत से कहा, यह क्‍योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं।
स्‍वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्‍पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • सपन्याह १-३
  • प्रकाशितवाक्य १६